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Trump के बर्थराइट सिटिजनशिप आदेश पर रोक, मैरीलैंड कोर्ट बोली- अमेरिका में जन्मे बच्चे नागरिक

US Citizenship: अमेरिका में जन्म से नागरिकता यानी बर्थराइट सिटिजनशिप का मुद्दा एक बार फिर अदालत पहुंच गया है। मैरीलैंड की फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 6 अगस्त के उस नए कार्यकारी आदेश पर प्रारंभिक रोक लगा दी है, जिसमें कुछ परिस्थितियों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को स्वत: नागरिकता देने पर पाबंदी लगाने की कोशिश की गई थी।
फेडरल जज डेबोरा एल. बोर्डमैन ने बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अमेरिकी जमीन पर जन्म लेने वाले संबंधित बच्चे जन्म के समय अमेरिकी नागरिक होते हैं। अदालत ने ट्रम्प प्रशासन को इस नए आदेश को लागू करने से फिलहाल रोक दिया है। यह रोक तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक मामले में चल रही क्लास-एक्शन याचिका पर आगे फैसला नहीं हो जाता।
ट्रम्प ने 6 अगस्त को जारी किया था नया आदेश
ट्रम्प प्रशासन ने 6 अगस्त को बर्थराइट सिटिजनशिप को सीमित करने वाला नया कार्यकारी आदेश जारी किया था। इसमें खास तौर पर ‘बर्थ टूरिज्म’ यानी बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आने वाले लोगों को निशाना बनाया गया था।
आदेश में कुछ अन्य श्रेणियों के बच्चों को भी जन्म से अमेरिकी नागरिकता से बाहर रखने का प्रयास किया गया था। इमिग्रेंट परिवारों और अधिकार संगठनों ने इसे अदालत में चुनौती दी।
जज बोलीं- सुप्रीम कोर्ट का फैसला पहले से मौजूद
जज बोर्डमैन ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया। उनका कहना है कि अदालत पहले ही संबंधित बच्चों को ‘citizens at birth’ यानी जन्म से नागरिक मानने की स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। इसलिए कार्यकारी आदेश के जरिए इस संवैधानिक सुरक्षा को सीमित करने की कोशिश गंभीर कानूनी सवाल खड़े करती है।
अदालत ने माना कि ट्रम्प का नया आदेश संवैधानिक रूप से टिकने की संभावना नहीं रखता और उसके लागू होने से बच्चों के नागरिकता अधिकारों को तत्काल नुकसान पहुंच सकता है।
किन बच्चों पर असर डालना चाहता था ट्रम्प प्रशासन?
नए आदेश का उद्देश्य कुछ विशेष परिस्थितियों में अमेरिका में जन्मे बच्चों को स्वत: नागरिकता मिलने से रोकना था। इसमें ऐसे मामलों को शामिल किया गया था जिनमें माता-पिता की स्थिति या अमेरिका आने के उद्देश्य को लेकर प्रशासन आपत्ति जताता है।
इनमें कथित बर्थ टूरिज्म, विदेशी सरकारों से जुड़े कुछ लोग और अन्य विशेष श्रेणियां शामिल थीं। प्रशासन का तर्क था कि अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए अमेरिका में बच्चे को जन्म देने की व्यवस्था का दुरुपयोग रोका जाना चाहिए।
संघीय एजेंसियां फिलहाल नागरिकता रोक नहीं सकेंगी
मैरीलैंड कोर्ट की प्रारंभिक रोक के बाद संबंधित संघीय एजेंसियां इस आदेश के आधार पर प्रभावित बच्चों की नागरिकता को रोकने या चुनौती देने की कार्रवाई नहीं कर सकेंगी। हालांकि एजेंसियों को आदेश लागू करने के लिए जरूरी प्रशासनिक गाइडलाइन तैयार करने की अनुमति दी गई है। यानी सरकार तैयारी जारी रख सकती है, लेकिन अदालत की रोक के दायरे में आने वाले बच्चों पर नई नीति लागू नहीं कर सकती।
ट्रम्प के लिए दूसरी बड़ी कानूनी चुनौती
यह ट्रम्प प्रशासन की बर्थराइट सिटिजनशिप को सीमित करने की कोशिश को लगा एक और बड़ा झटका है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उनके व्यापक प्रयास पर फैसला सुनाया था। इसके बाद प्रशासन ने दायरा सीमित करते हुए नया आदेश जारी किया था, लेकिन उसे भी अदालत में चुनौती मिल गई।
मैरीलैंड की जज बोर्डमैन ने अब नए आदेश के खिलाफ प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी कर दी है। मामले की अंतिम संवैधानिक वैधता पर आगे की सुनवाई जारी रहेगी।
अमेरिका में जन्म से नागरिकता का आधार क्या है?
अमेरिका में बर्थराइट सिटिजनशिप का प्रमुख संवैधानिक आधार 14वां संशोधन है। इसके तहत अमेरिकी क्षेत्र में जन्म लेने वाले लोगों को सामान्य तौर पर जन्म से नागरिकता मिलती है, कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर।
मौजूदा विवाद इसी बात पर है कि क्या राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश के जरिए इस संवैधानिक अधिकार के दायरे को सीमित किया जा सकता है। मैरीलैंड कोर्ट ने फिलहाल ट्रम्प के नए प्रयास पर रोक लगाकर इस विवाद को आगे की न्यायिक प्रक्रिया के लिए खुला रखा है।
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Nepal Flood: नेपाल बाढ़ की सबसे दर्दनाक तस्वीर, पहचान से पहले दफन हो रहे अज्ञात शव, DNA सैंपल सुरक्षित; मौतों का आंकड़ा 1,066 पहुंचा

काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब राहत और बचाव के साथ अज्ञात शवों की पहचान और अंतिम संस्कार प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गई है। पानी और कीचड़ में कई दिन तक पड़े रहने से शव तेजी से खराब हो रहे हैं। अस्पतालों के मुर्दाघर और अस्थायी शव केंद्र भी भर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन DNA और अन्य फोरेंसिक रिकॉर्ड सुरक्षित करने के बाद अज्ञात शवों को दफना रहा है, ताकि भविष्य में पहचान होने पर उन्हें परिजनों तक पहुंचाया जा सके।
चितवन के देवघाट इलाके में प्रशासन ने बड़ी संख्या में कब्रें तैयार की हैं। यहां लाए गए शवों के DNA सैंपल, फोटो और पहचान से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड की जा रही है। हर शव को एक अलग पहचान नंबर देने की व्यवस्था की गई है। भविष्य में किसी परिवार के लापता सदस्य का मिलान होने पर इसी रिकॉर्ड के आधार पर शव की पहचान और कब्र का पता लगाया जा सकेगा।
पानी और कीचड़ में दबे शवों की पहचान मुश्किल
बाढ़ का पानी शवों को घटनास्थल से कई किलोमीटर दूर तक बहाकर ले गया। कई शव मलबे में दबे मिले, जबकि कुछ के अवशेष क्षत-विक्षत हालत में बरामद हुए। ऐसे में सिर्फ चेहरा देखकर पहचान करना मुश्किल हो गया है।
नेपाल पुलिस के मुताबिक बड़ी संख्या में शवों की हालत इतनी खराब है कि DNA, फिंगरप्रिंट, दांतों के रिकॉर्ड, फोटो और अन्य फोरेंसिक जानकारी के जरिए ही पहचान संभव हो सकती है।
मुर्दाघर भरे, इसलिए दफनाना जरूरी हुआ
बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव मिलने से अस्पतालों और अस्थायी शव केंद्रों की क्षमता खत्म हो गई है। चितवन में ही स्थानीय अस्पतालों की क्षमता के मुकाबले बरामद शवों की संख्या कई गुना ज्यादा हो गई थी। ऐसे में प्रशासन के सामने शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का विकल्प सीमित रह गया। शवों के तेजी से खराब होने और स्वास्थ्य संबंधी खतरे को देखते हुए DNA रिकॉर्ड सुरक्षित कर सम्मानपूर्वक दफनाने का फैसला लिया गया।
नेपाल में 1,050 मौतें, तिब्बत में 16
ताजा आंकड़ों के मुताबिक नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से 1,050 लोगों की मौत हो चुकी है। तिब्बत में 16 लोगों की जान गई है। इस तरह दोनों क्षेत्रों में मृतकों की संख्या 1,066 हो गई है। वहीं, 4,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या स्थानीय निवासियों के अलावा हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों और विदेशी नागरिकों की भी है। कई परिवार अब भी अस्पतालों, शव केंद्रों और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
हाइड्रोपावर सुरंगों में भी जारी जिंदगी की तलाश
बाढ़ के बाद कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश भी जारी है। पानी, कीचड़ और मलबे से सुरंगों के रास्ते बंद हैं। बचाव दल भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से अंदर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।रेस्क्यू ऑपरेशन में नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी मदद कर रही हैं। कई सुरंगों में अब भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है।
रसुवा-नुवाकोट में राहत की सबसे ज्यादा जरूरत
बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा और नुवाकोट के कई इलाकों में राहत पहुंचाना अब भी चुनौती बना हुआ है। सड़कें और पुल टूटने के कारण कई गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के मुताबिक कुछ इलाकों में टेंट, चावल, दाल, पीने का पानी और दूसरी जरूरी सामग्री की जरूरत बनी हुई है। बाढ़ के बाद मरे जानवरों और शवों से दुर्गंध की समस्या भी सामने आई है, जिसके लिए सैनिटाइजेशन और कीटाणुनाशक सामग्री की जरूरत बताई गई है। नेपाल सरकार ने भी प्रभावित जिलों में राहत और पुनर्वास को प्राथमिकता देने की बात कही है।
हर शव का रिकॉर्ड, ताकि परिवारों को मिल सके जवाब
नेपाल प्रशासन के लिए अब चुनौती सिर्फ शवों का अंतिम संस्कार करना नहीं, बल्कि हर मृतक की पहचान सुरक्षित रखना भी है। इसलिए दफनाने से पहले DNA सैंपल, फोटो, कपड़े, सामान और अन्य पहचान चिह्नों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। यानी आज जिन शवों की पहचान नहीं हो पा रही है, उनकी पहचान का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होगा। वैज्ञानिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहने से भविष्य में परिवार के DNA नमूने मिलने पर मिलान किया जा सकेगा और प्रशासन संबंधित शव की कब्र तक पहुंच सकेगा।
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Nepal Flood: नेपाल बाढ़ की भयावह तस्वीर, 196 अज्ञात शव दफनाए गए, DNA से होगी पहचान; टनल में फंसे लोगों की तलाश जारी

काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब तबाही की भयावह तस्वीर सामने आ रही है। चितवन के देवघाट जंगल में अज्ञात शवों को सामूहिक रूप से दफनाने का काम शुरू कर दिया गया है। पिछले दो दिनों में 196 शव दफनाए जा चुके हैं। लंबे समय तक पानी और मलबे में पड़े रहने के कारण कई शव बुरी तरह खराब हो गए हैं, जिससे उनकी पहचान मुश्किल हो रही है।
प्रशासन हर शव को एक पहचान नंबर देकर उसका रिकॉर्ड तैयार कर रहा है। शवों के DNA सैंपल भी लिए जा रहे हैं, ताकि बाद में परिजनों के नमूनों से मिलान कर पहचान सुनिश्चित की जा सके। पहचान होने पर शव परिवारों को सौंपने की कोशिश की जाएगी।
नेपाल में मौत का आंकड़ा 903, 4,247 लोग अब भी लापता
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 903 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,247 लोग लापता हैं। तिब्बत में 16 मौतें दर्ज की गई हैं और 546 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। दोनों क्षेत्रों को मिलाकर मृतकों की संख्या 919 हो गई है।
कई इलाकों में सड़क, पुल और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचना अब भी राहत टीमों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हाइड्रोपावर सुरंगों में जिंदगी की तलाश
बाढ़ के बाद कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। Upper Trishuli-3A समेत कई परियोजनाओं में सुरंगों के मुहाने पर जमा मलबा और कीचड़ हटाया जा रहा है।
त्रिशूली-3A में रेस्क्यू टीम सुरंग के ऊपरी हिस्से तक पहुंच चुकी है। मशीनों से रास्ता चौड़ा किया जा रहा है, ताकि बचावकर्मी ऑक्सीजन सिलेंडर और कैमरों के साथ अंदर जाकर फंसे लोगों की तलाश कर सकें।
भारत और चीन के विशेषज्ञ भी रेस्क्यू में जुटे
नेपाल ने सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद ली है। भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें नेपाली सेना और स्थानीय बचाव दलों के साथ मिलकर ऑपरेशन में सहयोग कर रही हैं। भारी मशीनरी और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम लगातार चल रहा है।
ऊपरी त्रिशूली क्षेत्र की कई परियोजनाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई सुरंगों के रास्ते मलबे और कीचड़ से पूरी तरह बंद हो गए हैं।
सीमा के पास बनी बैरियर झील से अब खतरा टला
बाढ़ के बीच नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बनी एक बैरियर झील को लेकर भी चिंता थी। ग्लेशियर और मलबे के खिसकने के बाद चोचेन खोला और चीन की पुरेपु त्सांगपो नदी के पास यह झील बनी थी। इसमें करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा होने की जानकारी सामने आई थी।
हालांकि अब चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक झील का पानी प्राकृतिक बहाव से लगभग पूरी तरह निकल चुका है। इससे नीचे की ओर अचानक दूसरी बड़ी बाढ़ आने का तत्काल खतरा कम हो गया है।
परिजनों को अब भी अपनों के लौटने का इंतजार
एक तरफ राहत टीमें सुरंगों में जिंदगी तलाश रही हैं, तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में परिवार अपने लापता परिजनों की जानकारी के लिए इंतजार कर रहे हैं। कई शवों की पहचान नहीं हो पाने के कारण DNA रिकॉर्ड तैयार करना प्रशासन के लिए बेहद अहम हो गया है।
नेपाल में बचाव और राहत अभियान के साथ अब शवों की पहचान, सामूहिक दफन और लापता लोगों की तलाश भी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो गई है।
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Nepal Flood: बाढ़ के बाद टनल में फंसे मजदूरों को बचाने की जंग, 537 कर्मचारी अब भी लापता, त्रिशूली-3A सुरंग तक पहुंचने का रास्ता मिला

काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे कर्मचारियों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। अलग-अलग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स में संपर्क से बाहर हुए 898 कर्मचारियों में से 361 को बचाया जा चुका है, जबकि 537 अब भी लापता हैं। सबसे मुश्किल हालात उन कर्मचारियों के हैं, जो सुरंगों और भूमिगत पावरहाउस में फंसे हुए हैं।
बाढ़ से नेपाल के भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है। नेपाल में मृतकों की संख्या 788 तक पहुंच गई है, जबकि हजारों लोग अब भी लाड़े पता बताए जा रहे हैं।
त्रिशूली-3A सुरंग तक पहुंचने का रास्ता मिला
रेस्क्यू टीम को Upper Trishuli-3A Hydropower Project की सुरंग का ऊपरी हिस्सा और प्रवेश मार्ग खोजने में सफलता मिली है। नेपाल सेना, नेपाल विद्युत प्राधिकरण और सुरंग विशेषज्ञों की टीम पिछले कई दिनों से ड्रिलिंग और खुदाई कर रही थी।
टीम ने सुरंग के ऊपरी हिस्से तक पहुंच बनाई है। इसके बाद सुरंग को खोलकर बचावकर्मियों को अंदर भेजने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक परियोजना के भूमिगत हिस्से में करीब 40 से 42 तकनीकी कर्मचारी फंसे होने की आशंका है।
पहले हवा पहुंचाने के लिए किए गए थे कई छेद
सुरंग के अंदर स्थिति का पता लगाने और फंसे लोगों तक हवा पहुंचाने के लिए बचाव दल ने कई जगह ड्रिलिंग की। अब तक पांच ओपनिंग बनाई जा चुकी हैं। इनका इस्तेमाल हवा पहुंचाने और अंदर की स्थिति का आकलन करने के लिए किया गया है।
ताजा ऑपरेशन में सुरंग का प्रवेश मार्ग मिलने के बाद बचाव दल अंदर जाने की तैयारी कर रहा है। जरूरत पड़ने पर कैमरों और ऑक्सीजन की मदद से पहले अंदर की स्थिति जांची जाएगी।
9 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के 537 कर्मचारी अब भी लापता
Independent Power Producers’ Association Nepal (IPPAN) के मुताबिक बाढ़ के बाद 9 जलविद्युत परियोजनाओं के 898 कर्मचारी और कामगार संपर्क से बाहर हुए थे। इनमें 361 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 537 अब भी लापता हैं।
इनमें Upper Trishuli-I परियोजना सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां करीब 300 कर्मचारियों के सुरंग के अंदर फंसे होने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा Upper Trishuli-3A में 42 और Upper Trishuli-3B में शुरुआती तौर पर 122 लोग संपर्क से बाहर थे, जिनमें से 91 को सुरक्षित निकाल लिया गया है।
नेपाल में 788 मौतें, 2,500 के करीब लोग अब भी लापता
बाढ़ और भूस्खलन के बाद नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक 788 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता हैं। हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स से जुड़े 933 लोगों की स्थिति भी कुछ समय पहले तक स्पष्ट नहीं थी, हालांकि अलग-अलग परियोजनाओं से अब कई कर्मचारियों को बचाया जा चुका है।
बाढ़ ने सड़क, पुल और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई जगह मलबा और पानी अब भी बचाव दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
राहत के साथ अब सबसे बड़ी चुनौती टनल रेस्क्यू
नेपाल में बचाव अभियान का अगला बड़ा लक्ष्य उन कर्मचारियों तक पहुंचना है, जो भूमिगत सुरंगों में फंसे बताए जा रहे हैं। त्रिशूली-3A में सुरंग का रास्ता मिलने के बाद उम्मीद बढ़ी है कि जल्द अंदर जाकर कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सकेगा।
रेस्क्यू टीमें ड्रिलिंग मशीन, एक्सकेवेटर, हाइड्रोलिक उपकरण और एयर सपोर्ट सिस्टम की मदद से रास्ता खोल रही हैं। खराब मौसम, मलबे और पहाड़ी इलाके की मुश्किल भौगोलिक स्थिति के बावजूद ऑपरेशन लगातार जारी है।
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Nepal Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा पर एक और झील फटी, बाढ़ का खतरा बढ़ा, रसुवा में रेस्क्यू ऑपरेशन रोका; 478 मौतें, 1,500+ लापता

Nepal Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा के पास एक और झील फट गई है। यह झील चोचेन नदी और पुरेपु सांगपो नदी के संगम के पास बनी थी। चीन ने एक दिन पहले ही इसके फटने की आशंका जताई थी। झील फटने के बाद आसपास के इलाकों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ने लगा है।
बाढ़ के नए खतरे को देखते हुए नेपाल के रसुवा जिले में चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन 90 मिनट के लिए रोक दिया गया है। भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के आसपास बसे कई गांवों को खाली कराया जा रहा है। स्थानीय लोगों और सुरक्षाकर्मियों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, चीन ने भी तिब्बत में राहत और बचाव अभियान रोक दिया है। दोबारा बाढ़ आने की आशंका को देखते हुए वहां लेवल-4 अलर्ट जारी किया गया है।
478 लोगों की मौत, 1,500 से ज्यादा लापता
बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल और तिब्बत में अब तक 478 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं 1,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। इनमें करीब 290 भारतीय नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं।
आपदा प्रभावितों का आंकड़ा
नेपाल में
- 475 लोगों की मौत की पुष्टि
- 977 लोग लापता
- लापता लोगों में 517 विदेशी नागरिक
- 45 नेपाली सेना के जवान
- 41 नेपाल पुलिसकर्मी
तिब्बत में
- 3 लोगों की मौत की पुष्टि
- 558 लोग लापता
- लापता लोगों में 260 विदेशी नागरिक
चीन ने ग्लेशियर टूटने को बताया संभावित वजह
चीन ने शुक्रवार को कहा कि नेपाल में बुधवार को आई अचानक बाढ़ की संभावित वजह ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर का टूटना हो सकती है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान के मुताबिक, चीन और नेपाल के विशेषज्ञों और सरकारी संस्थानों ने शुरुआती जांच की है। इसके आधार पर माना जा रहा है कि ऊंचाई वाले इलाके में ग्लेशियर टूटने के कारण भोटेकोशी नदी में अचानक पानी बढ़ा और इससे नेपाल-तिब्बत सीमा के बड़े हिस्से में तबाही हुई।
पहले भी फट चुकी हैं झीलें
नेपाल-तिब्बत सीमा के ऊंचाई वाले इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन के बाद कई जगह झीलें बनने की स्थिति सामने आई है। अब एक और झील के फटने से नदियों का जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में दोबारा बाढ़ आने का खतरा पैदा हो गया है।
इसी वजह से दोनों देशों में राहत और बचाव अभियान को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। नेपाल में नदी किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है, जबकि चीन ने तिब्बत में बचाव अभियान फिलहाल रोककर अलर्ट जारी किया है।
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Nepal Flood: नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर अचानक बाढ़-लैंडस्लाइड में अब तक 210 की मौत, 1,500 लापता

Nepal Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार सुबह आई अचानक बाढ़ और लैंडस्लाइड से भारी तबाही हुई है। हादसे में अब तक 210 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें नेपाल में 207 और तिब्बत में 3 लोगों की जान गई है। करीब 1,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में 900 से ज्यादा लोग लापता हैं। इनमें 32 देशों के करीब 525 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक, लापता लोगों में 300 से ज्यादा भारतीय भी हैं।
खराब मौसम और कई रास्तों के टूट जाने के बावजूद राहत और बचाव अभियान जारी है। नेपाली सेना ने बुधवार सुबह रसुवा के टिमुरे इलाके से 116 लोगों को सुरक्षित निकाला। इनमें 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिक शामिल हैं। वहीं, तिब्बत में भी 550 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
लैंडस्लाइड से आया 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका
बुधवार सुबह करीब 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए। शुरुआत में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था। बाद में USGS ने स्पष्ट किया कि 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा महसूस हुआ झटका लैंडस्लाइड के कारण पैदा हुआ था। दरअसल पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिरा था। इससे इलाके में तेज बहाव और तबाही की स्थिति बनी। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी नदी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है।
32 देशों के 525 विदेशी पर्यटक भी लापता
नेपाल में लापता लोगों में अलग-अलग देशों के करीब 525 विदेशी पर्यटक शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें 300 से ज्यादा भारतीय नागरिक होने का दावा किया गया है। खराब मौसम और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण राहत और बचाव दलों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है। इसके बावजूद नेपाली सेना और स्थानीय एजेंसियां लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।
दलाई लामा ने जताया दुख
नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर दलाई लामा ने भी दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के लिए प्रार्थना करते हुए प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी आपदाएं जलवायु परिवर्तन या अन्य कारणों से पैदा होने वाली बड़ी समस्याओं का संकेत हो सकती हैं। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की जरूरत है।
NDRF की टीमें स्टैंडबाय पर
नेपाल में तबाही के बाद भारत ने राहत और बचाव के लिए NDRF की टीमों को स्टैंडबाय पर रखा है। NDRF के IG नरेंद्र सिंह बुंदेला के मुताबिक, फिलहाल भारत की कोई NDRF टीम नेपाल नहीं भेजी गई है। नेपाल सरकार की ओर से मदद का अनुरोध आने और भारत सरकार की मंजूरी मिलने पर टीमें तुरंत रवाना की जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने नेपाल के लिए मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री लेकर दो विमान भेजे हैं। इनमें जरूरी दवाइयां और अन्य राहत सामग्री शामिल है।
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