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Maharashtra: महाराष्ट्र में आज शाम शपथ लेगी नई सरकार, पीएम मोदी समारोह में होंगे शामिल

Maharashtra: मुंबई के आजाद मैदान में आज शाम 5:30 बजे महाराष्ट्र की नई सरकार का शपथ समारोह होगा। बीजेपी नेता देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे. तो वहीं महायुति 2.0 सरकार में एकनाथ शिंदे और अजित पवार डिप्टी सीएम की भूमिका में रहेंगे। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी समेत एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और अन्य बड़े नेता शामिल होंगे। समारोह में 40 हजार लोगों के आने की संभावना है। शपथ समारोह के बाद महायुती की बैठक होगी। आगे की रणनीति और मंत्रिमंडल के गठन पर विस्तार से चर्चा होगी। 5 से 7 दिसंबर को राज्य का विशेष अधिवेशन बुलाया गया है। सूत्रों के मुताबिक शरद पवार और उद्धव ठाकरे आज होने वाले शपथ समारोह में शामिल नहीं होंगे। समारोह में शामिल होने के लिए विपक्ष को भी आमंत्रण भेजा गया था। पवार दिल्ली में होने के चलते, शामिल नहीं हो पाएंगे।
आज सिर्फ मुख्यमंत्री और दोनों डिप्टी सीएम शपथ लेंगे
महाविजय के 12 दिन बाद आज देवेंद्र फडणवीस तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। वहीं एकनाथ शिंदे और अजित पवार डिप्टी सीएम पद की शपथ लेंगे। आज शाम साढ़े 5 बजे मुंबई के आजाद मैदान में भव्य शपथ समारोह होगा जिसे यादगार बनाने के लिए आजाद मैदान के बाहर बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी के झंडों और होर्डिंग से सड़कें पटी हुई है। आज मुख्यमंत्री और दोनों उप मुख्यमंत्रियों के अलावा कोई मंत्री शपथ नहीं लेगा। हालांकि महायुति के बीच कैबिनेट बंटवारे को लेकर 6-1 का फॉर्मूला तय हुआ है। यानी 6 विधायक पर एक मंत्री पद मिलेगा। इसके तहत भाजपा को 20 से 22 मंत्री पद, एकनाथ शिंदे गुट को 12 और अजित पवार गुट को 9 से 10 मंत्री पद दिए जा सकते हैं।
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PM मोदी का पोस्ट हटाने पर जुकरबर्ग ने मांगी माफी, डीपफेक, CSAM और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी कमियां स्वीकार कीं

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत सरकार से माफी मांगी है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, सरकारी सूत्रों ने बताया कि कंपनी ने इस घटना पर खेद जताते हुए अपने प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी चूक स्वीकार की है।
बुधवार को Meta की ग्लोबल टीम ने ग्लोबल अफेयर्स चीफ जोएल कैपलन के नेतृत्व में केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव और IT सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की। यह बैठक पिछले महीने पीएम मोदी का फेसबुक पोस्ट हटने के बाद सरकार की ओर से भेजे गए समन के बाद हुई।
डीपफेक और CSAM पर भी स्वीकार की कमियां
बैठक में Meta ने माना कि उसके प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मैटेरियल (CSAM), डीपफेक और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी खामियां रही हैं। कंपनी ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ तरह के कंटेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़ी रकम खर्च की गई, जिससे अवैध कंटेंट को भी प्रमोशन मिला। हालांकि, सरकारी सूत्रों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किस प्रकार के कंटेंट की बात की गई।
सरकार बोली- जिम्मेदारी से नहीं बच सकती Meta
बैठक में सरकार ने स्पष्ट किया कि Meta खुद को केवल IT Act के तहत एक इंटरमीडियरी बताकर जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। सरकार का कहना है कि कंपनी अपने एल्गोरिद्म के जरिए तय करती है कि कौन-सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचेगा, इसलिए उसे अपनी जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
सरकार ने Meta से वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा, एल्गोरिद्मिक पक्षपात (Algorithmic Bias), भारतीय कानूनों के पालन और कंटेंट मॉडरेशन को लेकर भी जवाब मांगा। इन मुद्दों पर आगे भी कंपनी के अधिकारियों को तलब किया जा सकता है।
क्या था मामला?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं पर चिंता जताते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की जरूरत बताई थी। यह वीडियो कुछ समय के लिए फेसबुक से हट गया था, जिसे बाद में Meta ने दोबारा बहाल कर दिया।
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PM मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा घिरी: संसदीय समिति ने जुकरबर्ग से 3 दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने को कहा

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक से वीडियो हटाने के मामले में मेटा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। संसदीय समिति ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी मांगने को कहा है। समिति ने संकेत दिया है कि ऐसा नहीं होने पर मेटा को भारत में मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और कुछ नियामकीय छूट वापस लेने पर विचार किया जा सकता है।
इधर, इस पूरे मामले को लेकर सूचना प्रौद्योगिकी (IT) मंत्रालय और मेटा के अधिकारियों के बीच दिल्ली में दो दिवसीय बैठक भी शुरू हो गई है। सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को चर्चा के लिए भारत बुलाया है। बैठक का पहला दौर 5 अगस्त को हुआ।
23 जुलाई को पोस्ट किया गया था वीडियो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था। वीडियो में उन्होंने पेपर लीक को गंभीर समस्या बताते हुए ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया था। हालांकि, यह वीडियो कुछ समय के लिए फेसबुक से हटा दिया गया था। बाद में मेटा ने वीडियो को दोबारा प्लेटफॉर्म पर बहाल कर दिया।
सरकार ने मांगा जवाब
वीडियो हटाए जाने के बाद सरकार ने मेटा से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है। अब संसदीय समिति की सख्त टिप्पणी और आईटी मंत्रालय के साथ चल रही बैठक के बाद इस मामले पर आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।
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Sheikh Hasina: शेख हसीना के ऑनलाइन संबोधन से भारत सरकार ने बनाई दूरी, बोली- निजी कार्यक्रम, सरकार का कोई संबंध नहीं

नई दिल्ली: भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि 5 अगस्त को बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रस्तावित ऑनलाइन संबोधन से उसका कोई संबंध नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि यह एक निजी मीडिया संस्था का कार्यक्रम है और भारत सरकार न तो इसका आयोजन कर रही है और न ही इसमें व्यक्त किए जाने वाले विचारों का समर्थन करती है।
शेख हसीना 5 अगस्त को नई दिल्ली स्थित फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCCSA) के कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होंगी। अगस्त 2024 में बांग्लादेश छोड़ने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन होगा।
बांग्लादेश ने भारत से की थी अपील
इस कार्यक्रम से पहले बांग्लादेश सरकार ने भारत से अनुरोध किया था कि शेख हसीना या प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े किसी व्यक्ति को भारत की धरती से राजनीतिक गतिविधियां या भाषण देने की अनुमति न दी जाए।
ढाका का कहना है कि इससे दोनों देशों के रिश्तों पर असर पड़ सकता है। यह मुद्दा हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर और ढाका में भारत के उच्चायुक्त के बीच हुई बैठक में भी उठा था।
5 अगस्त की तारीख क्यों अहम?
5 अगस्त 2024 को छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर बांग्लादेश छोड़ दिया था और भारत आ गई थीं। अब ठीक दो साल बाद उसी तारीख को वह सार्वजनिक रूप से लोगों को संबोधित करने जा रही हैं।
माना जा रहा है कि इस कार्यक्रम के जरिए वह अपनी राजनीतिक वापसी का संदेश दे सकती हैं। कार्यक्रम में उनके बेटे सजीब वाजेद जॉय और अवामी लीग के अन्य नेताओं के भी शामिल होने की संभावना है।
सितंबर में भारत आ सकते हैं बांग्लादेश के प्रधानमंत्री
शेख हसीना की सार्वजनिक मौजूदगी ऐसे समय हो रही है, जब सितंबर में नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS सम्मेलन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान के शामिल होने की संभावना है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत ने तारीक रहमान को सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया है। बांग्लादेश इस समय BIMSTEC का अध्यक्ष भी है, इसलिए उन्हें आउटरीच सत्र में बुलाया गया है।
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NEET Protest Case: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का बयान- प्रदर्शनकारी छात्रों पर नहीं होगी कानूनी कार्रवाई

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। सोमवार को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार अपने वादे पर कायम है और छात्रों के खिलाफ कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं होगी।
हालांकि केंद्र ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा और अन्य गंभीर अपराधों के आरोपों में 2700 से अधिक लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली जाएंगी। सरकार का कहना है कि इन मामलों में कानून के मुताबिक कार्रवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर जताई चिंता
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेने का मुद्दा उठाया। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जो भी उचित होगा, सरकार वही करेगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है, तो उसे बचाया नहीं जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि छात्र आंदोलन की आड़ में किसी गंभीर अपराध के आरोपी को भी संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
36 दिन चला था प्रदर्शन
NEET पेपर लीक और परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान संगठन ने तीन प्रमुख मांगें रखी थीं, जिनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने की मांग भी शामिल थी।
सरकार द्वारा मांगें स्वीकार किए जाने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया था। मामले की अगली सुनवाई अब 18 अगस्त को होगी।
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CJP Protest: विदेशी फंडिंग एंगल की जांच तेज, कई कंपनियों पर छापे

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को लेकर जांच एजेंसियों ने विदेशी फंडिंग समेत कई पहलुओं की जांच तेज कर दी है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि प्रदर्शन के लिए धन किन माध्यमों से जुटाया गया और इसमें किन संस्थाओं की भूमिका रही।
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दायरे में पांच से अधिक कंपनियां हैं। इनमें डिजिटल मार्केटिंग और सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर से जुड़ी कंपनियां भी शामिल हैं। पिछले तीन दिनों में मुंबई, बेंगलुरु, गुरुग्राम और दिल्ली स्थित कई ठिकानों पर छापेमारी की गई।
वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस खंगाले
जांच के दौरान एजेंसियों ने कंपनियों के वित्तीय लेन-देन, कैंपेन से जुड़े दस्तावेज, इंफ्लूएंसर के साथ हुए एग्रीमेंट और अन्य रिकॉर्ड की जांच की। कुछ डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए हैं। सूत्रों का दावा है कि जांच में कई संदिग्ध वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं। इन्हीं के आधार पर कुछ सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर भी जांच के दायरे में आए हैं। एजेंसियां डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटा रही हैं। पर्याप्त सबूत मिलने के बाद मामले में एफआईआर दर्ज की जा सकती है।
2,000 संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान
जांच एजेंसियों के अनुसार, एआई से एडिट किए गए वीडियो और भ्रामक पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की छवि खराब करने की कोशिश की गई। इस मामले में 2,000 से अधिक संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की गई है। बताया जा रहा है कि इनमें कई अकाउंट विदेश से संचालित हो रहे थे, जबकि करीब 700 अकाउंट भारत से ऑपरेट किए जा रहे थे। एजेंसियां इन अकाउंट से जुड़े डिजिटल डेटा और गतिविधियों की भी जांच कर रही हैं।
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