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Delhi: सत्य निकेतन में PG की इमारत ढही, मलबे में कई छात्रों के फंसे होने की आशंका; 3 रेस्क्यू

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नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया। यहां एक बहुमंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। इमारत में PG चल रहा था, इसलिए मलबे में कई छात्रों के दबे होने की आशंका है। हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया और अब तक 3 छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाले जाने की जानकारी सामने आई है।

हादसा दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस और अन्य बचाव टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबा हटाने का काम तेजी से चल रहा है। स्थानीय लोग भी राहत-बचाव में जुटे हैं। मलबे में कुछ वाहन भी दबे होने की जानकारी है।

PG में रह रहे थे छात्र, कितने फंसे अभी स्पष्ट नहीं

चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे के समय कई छात्र अपने कमरों में मौजूद थे। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि इमारत को ‘हॉस्टल डेज’ के नाम से जाना जाता था और यह लड़कों के लिए PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। इसके ठीक बगल की एक अन्य इमारत भी गिर गई।

मलबे में कितने लोग फंसे हैं, इसका अभी आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में छात्रों के दबे होने की आशंका जताई है, लेकिन रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड और रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद ही वास्तविक संख्या स्पष्ट हो सकेगी।

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आसपास की इमारतें भी खाली कराईं

सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने आसपास की इमारतों को खाली करा दिया है। लगातार बारिश के बीच हुए इस हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है। फिलहाल प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।

सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में रहते हैं छात्र

सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित प्रमुख छात्र इलाकों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। आसपास वेंकटेश्वर कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज जैसे संस्थान हैं। इसी वजह से इलाके में पूरे दिन छात्रों की आवाजाही रहती है। हादसे के बाद छात्र सुरक्षा और इमारतों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

हादसे की वजह अभी साफ नहीं

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फिलहाल प्रशासन की ओर से इमारत गिरने की आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है। कुछ रिपोर्टों में इमारत में निर्माण/बेसमेंट से जुड़े काम की बात सामने आई है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। रेस्क्यू टीमें मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। जैसे-जैसे मलबा हटाया जा रहा है, हादसे की वास्तविक स्थिति और प्रभावित लोगों की संख्या स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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India-China Tension: अरुणाचल में चीनी सैनिकों से टकराव जारी, ITBP ड्रोन पर खर्च करेगी ₹1,000 करोड़

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नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने गुरुवार को कहा कि अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ है और कुछ जगहों पर स्थिति अब भी जारी है।

राजस्थान के अलवर स्थित ITBP के सेंट्रल ट्रेनिंग कॉलेज में आयोजित हिमवीर सम्मान समारोह में जवानों को संबोधित करते हुए कपूर ने सीमा पर आधुनिक तकनीक और बेहतर युद्ध क्षमता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि फोर्स सभी सीमा सुरक्षा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून बना चुकी है। इसके साथ ही ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षण देने और अपने ड्रोन विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।

अरुणाचल में कई जगह आमने-सामने आए भारतीय और चीनी सैनिक

ITBP DG के मुताबिक, हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आए। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर स्थिति अब भी बनी हुई है। उन्होंने सीमा पर तैनात ITBP की शौर्य कमांडो टीमों के काम की भी सराहना की।

रिपोर्टों के मुताबिक, ऊपरी सुबनसिरी जिले के तक्सिंग क्षेत्र में सीमा से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच सैन्य स्तर पर बातचीत भी हुई थी। भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को लेकर अलग-अलग धारणाएं होने के कारण समय-समय पर इस तरह की स्थितियां बनती रही हैं।

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ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर खर्च होंगे ₹1,000 करोड़

ITBP अपनी सैन्य क्षमता के आधुनिकीकरण पर बड़ा निवेश करने की तैयारी कर रही है। कपूर ने बताया कि करीब ₹4,000 करोड़ की एक बड़ी आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिली है। इसमें से लगभग ₹1,000 करोड़ ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए निर्धारित किए जाएंगे। इसके अलावा, मौजूदा ₹400 करोड़ की आधुनिकीकरण योजना में भी करीब 70% राशि ड्रोन क्षमता बढ़ाने पर खर्च की जा रही है। कपूर ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीक को अपनाना जरूरी है।

हर सीमा सुरक्षा बटालियन में ड्रोन प्लाटून

ITBP ने अपनी सभी सीमा सुरक्षा बटालियनों में ड्रोन प्लाटून स्थापित की हैं। फोर्स ड्रोन पायलटों को प्रशिक्षित कर रही है और घरेलू स्तर पर ड्रोन विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है।

ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, दुर्गम क्षेत्रों की जानकारी जुटाने और सीमा पर गतिविधियों पर नजर रखने में किया जा सकता है। वहीं, एंटी-ड्रोन सिस्टम संभावित दुश्मन ड्रोन से निपटने की क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं।

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LAC पर बनाए जा रहे भूमिगत शेल्टर

ITBP सीमा चौकियों पर जवानों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए भूमिगत ढांचे विकसित कर रही है। कपूर के अनुसार, आधुनिक युद्ध में जमीन के ऊपर मौजूद जवानों और इमारतों को निशाना बनाए जाने का खतरा बढ़ गया है।

इसी को ध्यान में रखते हुए सीमा चौकियों पर पायलट प्रोजेक्ट के तहत भूमिगत संरचनाएं बनाई जा रही हैं। योजना है कि इनके सफल होने पर इन्हें स्थायी सुरक्षा व्यवस्था के रूप में विकसित किया जाए।

गलवान जैसी स्थिति से निपटने के लिए ‘स्ट्राइक’ कोर्स

ITBP ने जवानों को आधुनिक युद्ध कौशल और नई रणनीतियों का प्रशिक्षण देने के लिए ‘स्ट्राइक’ नाम का विशेष कोर्स शुरू किया है। इसका उद्देश्य जवानों को गलवान जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार करना है।

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फोर्स ने 2027 के अंत तक सभी जवानों को इस प्रशिक्षण से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा, प्रत्येक बटालियन में शौर्य कमांडो टीम विकसित करने की योजना भी है।

कपूर ने बताया कि ITBP अपनी परिचालन क्षमता बढ़ाने के लिए आधुनिक हथियारों, वाहनों और सीमा चौकियों के आधुनिकीकरण पर भी ध्यान दे रही है।

31 अक्टूबर को रिटायर होंगे ITBP DG

शत्रुजीत सिंह कपूर 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। रिटायरमेंट से पहले दिए गए उनके इस बयान में अरुणाचल प्रदेश में जारी सीमा तनाव और ITBP की तैयारियों पर विशेष जोर रहा।

ITBP भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाती है। फोर्स का आधुनिकीकरण, ड्रोन क्षमता का विस्तार और जवानों के लिए विशेष प्रशिक्षण सीमा पर बदलती परिस्थितियों से निपटने की व्यापक तैयारी का हिस्सा हैं।

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WhatsApp New Rule: 1 जनवरी 2027 से बदल सकता है WhatsApp चलाने का तरीका, फोन में SIM रखना होगा जरूरी

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नई दिल्ली: WhatsApp और Telegram इस्तेमाल करने वालों के लिए आने वाले समय में बड़ा बदलाव हो सकता है। केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने मैसेजिंग ऐप्स पर सिम-बाइंडिंग लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसका मकसद ऑनलाइन फ्रॉड, फर्जी अकाउंट और भारतीय मोबाइल नंबरों के दुरुपयोग पर रोक लगाना है।

सरकार ने ऐप कंपनियों को नियमों का पालन करने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक का समय दिया है। इसके बाद 1 जनवरी 2027 से नए नियम लागू होने की संभावना है। हालांकि, यूजर्स को होने वाले वास्तविक बदलाव इस बात पर निर्भर करेंगे कि संबंधित ऐप इन्हें किस तरह लागू करते हैं।

क्या है SIM Binding Rule?

सिम-बाइंडिंग का मतलब है कि मैसेजिंग ऐप को उस सक्रिय सिम कार्ड से लगातार जुड़ा रहना होगा, जिसका मोबाइल नंबर अकाउंट की पहचान या सेवा देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आपने अपने Jio नंबर से WhatsApp अकाउंट बनाया है, तो नए नियम के तहत उस नंबर का सक्रिय सिम संबंधित फोन में मौजूद रखना जरूरी होगा। केवल एक बार OTP डालकर अकाउंट चालू कर लेना पर्याप्त नहीं होगा, यदि ऐप को बाद में भी सिम की मौजूदगी सत्यापित करनी है।

दूरसंचार विभाग के अनुसार, कुछ मैसेजिंग ऐप्स में सिम निकालने या दूसरे डिवाइस में स्थानांतरित करने के बाद भी अकाउंट चलता रहता है। इस सुविधा का इस्तेमाल साइबर अपराधी धोखाधड़ी के लिए कर सकते हैं। सिम-बाइंडिंग के जरिए मोबाइल नंबर, सिम और ऐप के बीच संबंध बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

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WhatsApp यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा?

नए नियम का असर खासकर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का सिम किसी दूसरे फोन में रखते हैं और WhatsApp किसी अन्य डिवाइस पर चलाते हैं।

फोन में सिम रखने वाले यूजर्स: अगर रजिस्टर्ड नंबर का सक्रिय सिम उसी फोन में है, जहां ऐप इस्तेमाल किया जा रहा है, तो सामान्य तौर पर उन्हें कम बदलाव महसूस हो सकता है।

अलग फोन पर WhatsApp चलाने वाले यूजर्स: अगर सिम एक फोन में और WhatsApp दूसरे फोन में है, तो ऐप के नियम लागू होने के बाद परेशानी हो सकती है।

बिना सिम वाले डिवाइस: केवल Wi-Fi से जुड़े ऐसे फोन या डिवाइस पर ऐप चलाने में दिक्कत आ सकती है, जिनमें रजिस्टर्ड नंबर का सिम मौजूद नहीं है।

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दूसरे डिवाइस से जुड़े अकाउंट: WhatsApp के लिंक्ड डिवाइस और अन्य माध्यमों पर नियम किस तरह लागू होंगे, यह संबंधित ऐप के अंतिम तकनीकी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

यह नियम केवल WhatsApp तक सीमित नहीं है। दूरसंचार विभाग के निर्देशों में Telegram, Signal और अन्य ऐप-आधारित संचार सेवाओं को भी शामिल किया गया है।

क्या WhatsApp Web हर 6 घंटे में लॉगआउट होगा?

इस मामले में पहले छह घंटे में अनिवार्य लॉगआउट की शर्त रखी गई थी। हालांकि, बाद में सरकार ने इस व्यवस्था को बदल दिया। अब WhatsApp Web और संबंधित वेब सेशन के लिए जोखिम-आधारित लॉगआउट व्यवस्था अपनाई गई है। इसका मतलब है कि संदिग्ध गतिविधि या संभावित धोखाधड़ी की स्थिति में सेशन को लॉगआउट किया जा सकता है। सरकार ने इसके लिए हर छह घंटे की कोई निश्चित अवधि निर्धारित नहीं की है।

सरकार क्यों लागू कर रही है सिम-बाइंडिंग?

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दूरसंचार विभाग का कहना है कि साइबर अपराधी भारतीय मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, डिजिटल अरेस्ट, पहचान की नकल और निवेश से जुड़े फ्रॉड करते हैं। कुछ मामलों में सिम हटाने के बाद भी मैसेजिंग अकाउंट सक्रिय रहने से अपराधियों की पहचान करना मुश्किल हो सकता है।

सिम-बाइंडिंग का उद्देश्य अकाउंट और संबंधित सक्रिय सिम के बीच संबंध बनाए रखना है, ताकि मोबाइल नंबरों के दुरुपयोग को रोकने और संदिग्ध गतिविधियों की जांच में मदद मिल सके।

यूजर्स को अभी क्या करना चाहिए?

फिलहाल यूजर्स को घबराने या अपना WhatsApp अकाउंट हटाने की जरूरत नहीं है। इन बातों का ध्यान रखें:

  • अपने WhatsApp अकाउंट से जुड़े मोबाइल नंबर का सिम सक्रिय रखें।
  • यदि आप WhatsApp किसी दूसरे फोन पर चलाते हैं, तो ऐप के आधिकारिक अपडेट और निर्देशों पर नजर रखें।
  • WhatsApp Web और लिंक्ड डिवाइस से जुड़े नए नियमों की जानकारी आधिकारिक स्रोतों से लें।
  • किसी अनजान व्यक्ति को OTP या अकाउंट सत्यापन कोड न बताएं।
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Netanyahu Modi Call: नेतन्याहू ने पीएम मोदी को दिया इस्राइल आने का न्योता, स्मित मच्छार के साथ जलाएंगे मशाल

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नई दिल्ली: इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पीएम नरेंद्र मोदी को स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित किया। फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार को भी मिला न्योता, जिन्होंने विमान में सवार 174 लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की और उन्हें इस्राइल के आगामी स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया। नेतन्याहू ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। खास बात यह रही कि उन्होंने अपनी पोस्ट हिंदी में लिखी।

नेतन्याहू ने पीएम मोदी के साथ-साथ भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को भी समारोह में मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित किया। कैप्टन मच्छार ने फ्लाईदुबई की एक उड़ान में संकट के दौरान 174 लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।

नेतन्याहू ने पीएम मोदी को क्या निमंत्रण दिया?

नेतन्याहू ने अपनी पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी को अपना मित्र बताते हुए कहा कि वे उन्हें इस्राइल के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। इस समारोह में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को भी शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है।

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नेतन्याहू ने पायलट के साहस की सराहना करते हुए उन्हें भारत, इस्राइल और पूरी दुनिया का हीरो बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल प्रज्वलित करना इस्राइल के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

नेतन्याहू की पोस्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निमंत्रण के लिए उनका धन्यवाद किया। बातचीत के दौरान मोदी ने भारत और इस्राइल के बीच मजबूत संबंधों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि दोनों देश जमीन और हवा, दोनों जगह आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग और दोस्ती की भी सराहना की।

कौन हैं कैप्टन स्मित मच्छार?

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कैप्टन स्मित मच्छार फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 के भारतीय पायलट हैं। 30 सितंबर 2026 को दुबई से तेल अवीव जा रही इस उड़ान में कॉकपिट के भीतर सह-पायलट के हमले की घटना हुई थी। हमले में कैप्टन मच्छार घायल हो गए थे। गंभीर परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मदद के लिए अलर्ट करने और विमान में सवार यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।

विमान में कुल 174 लोग सवार थे और बाद में इसे सऊदी अरब में सुरक्षित उतारा गया।इस घटना के बाद पूरी दुनिया में कैप्टन मच्छार के साहस की सराहना हुई। नेतन्याहू का उन्हें स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित करना इसी साहस के सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत-इस्राइल संबंधों के लिहाज से भी अहम बातचीत

नेतन्याहू और मोदी के बीच बातचीत ऐसे समय हुई है, जब दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ साझेदारी महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया।इस्राइल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री मोदी और कैप्टन स्मित मच्छार को आमंत्रित करने की घोषणा ने इस बातचीत को खास बना दिया है।

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Delhi-NCR में GRAP-1 लागू, AQI 244 पहुंचा; कोयले-लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक

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नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है। बुधवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, दोपहर 3 बजे दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 244 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में आता है।

होटल-रेस्तरां में कोयले और लकड़ी पर रोक

GRAP-1 के तहत होटल और रेस्तरां में कोयले तथा लकड़ी के इस्तेमाल पर प्रतिबंध रहेगा। बीएस-III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल वाहनों के संचालन पर भी सख्त निगरानी रखी जाएगी। वाहनों के प्रदूषण जांच प्रमाणपत्र (PUC) की जांच तेज करने के निर्देश हैं।

निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के निर्देश

निर्माण और विध्वंस गतिविधियों में धूल नियंत्रण के उपाय लागू करने होंगे। 500 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाली ऐसी परियोजनाओं में निर्माण कार्य की अनुमति नहीं होगी, जो संबंधित वेबपोर्टल पर पंजीकृत नहीं हैं। निर्माण सामग्री और कचरे को ढककर रखने तथा सड़कों की मशीनों से सफाई और पानी का छिड़काव करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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खुले में कचरा फेंकने पर रोक

नगरपालिका ठोस कचरे, निर्माण मलबे और खतरनाक कचरे को डंप स्थलों से नियमित रूप से हटाना होगा। खुले क्षेत्रों में अवैध रूप से कचरा डालने पर रोक रहेगी। इसके अलावा, डीजल जनरेटर सेट का इस्तेमाल बिजली आपूर्ति के नियमित स्रोत के रूप में नहीं किया जा सकेगा। इन उपायों का उद्देश्य दिल्ली-NCR में प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करना और हवा की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

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विजयादशमी 2026: मोहन भागवत बोले- भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिश

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नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत में भी बांग्लादेश और फ्रांस जैसे हालात बनाने की कोशिश हो रही है। उनके मुताबिक, दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उनका उद्देश्य सत्ता परिवर्तन के जरिए हालात सुधारना नहीं, बल्कि अपने समर्थकों को सत्ता में बैठाना है।

भागवत मंगलवार को नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में विजयादशमी उत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भारत और हिंदू समाज को तोड़ना चाहते हैं और उन्हें ऐसे नेताओं का समर्थन भी मिलता है। कार्यक्रम में उन्होंने शस्त्र पूजन किया। आरएसएस हर साल विजयादशमी पर अपना स्थापना दिवस मनाता है। संघ की स्थापना 1925 में हुई थी।

भागवत के भाषण की 5 बड़ी बातें

1. आंदोलन का उद्देश्य समाधान होना चाहिए

भागवत ने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन जरूरी हो सकते हैं, लेकिन उनका मकसद समाज में द्वेष और विभाजन पैदा करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार आंदोलनों का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों के लिए किया जाता है और वे राजनीति का साधन बन जाते हैं। समाज की सक्रिय भागीदारी से भी समस्याओं का समाधान संभव है।

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2. एकता बनाए रखेंगे तो कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा

भागवत ने कहा कि दुनिया में ऐसी शक्तियां हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उनके प्रभाव में आकर लोगों को उत्तेजित नहीं होना चाहिए। उन्होंने बंगाल विभाजन का उदाहरण देते हुए कहा कि 1905 में लॉर्ड कर्जन ने बंगाल का विभाजन किया था, जिसे बाद में वापस लेना पड़ा। उन्होंने 1947 के देश विभाजन का जिक्र करते हुए सामाजिक एकता पर जोर दिया।

3. पूर्वज और संस्कृति एक, सबको साथ लेकर चलना जरूरी

भागवत ने कहा कि भारत के लोगों के पूर्वज और संस्कृति के मूल सूत्र एक हैं। उन्होंने कहा कि किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। उनके मुताबिक, भारतीय परंपरा और विचार दुनिया की समस्याओं के समाधान में योगदान दे सकते हैं।

4. विकास के साथ प्रकृति की रक्षा भी जरूरी

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भागवत ने कहा कि विकास के लिए तकनीक को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन इससे प्रकृति को नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्होंने नेपाल में बाढ़ का उदाहरण देते हुए विकास में अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और नैतिकता के बीच संतुलन बनाए रखने की बात कही।

5. ओटीटी पर नियम और एआई का सही इस्तेमाल हो

भागवत ने डिजिटल सामग्री और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल पर भी बात रखी। उन्होंने कहा कि जानकारी की उपलब्धता बढ़ी है, लेकिन सही-गलत समझे बिना उसका इस्तेमाल नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए नियम बनाने और उनके पालन पर सरकार-प्रशासन का ध्यान जरूरी बताया।

कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं

विजयादशमी उत्सव में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी मौजूद रहे।

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