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जालौन बार एसोसिएशन अध्यक्ष गयादीन अहिरवार की अपहरण के बाद हत्या, सिर पर जैक से किए 15 वार

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जालौन के कालपी बार एसोसिएशन अध्यक्ष गयादीन अहिरवार हत्याकांड से जुड़ा समाचार

जालौन: उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई। शनिवार को उन्हें बेटे के सामने कार में बैठाकर ले जाया गया था। रविवार सुबह उनका शव कानपुर के गुजैनी इलाके में नहर से बरामद हुआ। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, उनके सिर पर जैक जैसी भारी वस्तु से कई वार किए गए थे। सिर की हड्डियां टूट गई थीं और अत्यधिक रक्तस्राव से उनकी मौत हुई।

पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। कार बरामद करने के लिए आरोपियों को कालपी के जंगल ले जाया गया, जहां पुलिस के मुताबिक उन्होंने छिपाए गए हथियारों से फायरिंग कर भागने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई में आशीष विश्वकर्मा और सर्वेश शुक्ला के पैर में गोली लगी। तीसरे आरोपी केशव को भी पकड़ लिया गया। बाद की पुलिस कार्रवाई में कथित साजिशकर्ता इंद्रजीत यादव को भी गिरफ्तार किए जाने की खबर है। मुख्य शूटर मोनू यादव की तलाश जारी बताई गई है।

बेटे के सामने कार में बैठाकर ले गए थे आरोपी

कालपी के मोहल्ला कागजीपुरा निवासी गयादीन अहिरवार शनिवार को उरई स्थित जिला न्यायालय में एक मुकदमे की पैरवी करने गए थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने बेटे हर्ष को स्कूटी लेकर बुलाया और बताया कि दुर्गा मंदिर चौराहे पर उनका एक मुवक्किल इंतजार कर रहा है।

बेटा उन्हें स्कूटी से चौराहे तक ले गया। वहां बिना नंबर प्लेट की कार खड़ी थी, जिसमें तीन लोग मौजूद थे। बेटे के मुताबिक, कार से उतरे एक व्यक्ति ने गयादीन के पैर छुए और उन्हें अपने साथ कार में बैठा लिया।

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कार के बिना नंबर प्लेट होने से बेटे को शक हुआ। उसने पिता को फोन किया, लेकिन मोबाइल बंद मिला। बेटे ने स्कूटी से कार का पीछा भी किया, लेकिन उसका पता नहीं चल सका। इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने पहले अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

जमीन विवाद में हत्या की सुपारी देने का आरोप

एएसपी डॉ. ईशान सोनी के मुताबिक, गयादीन अहिरवार और कानपुर निवासी इंद्रजीत यादव के बीच जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। पुलिस की शुरुआती जांच में इसी रंजिश को हत्या की वजह माना गया है। पुलिस का आरोप है कि इंद्रजीत यादव ने हत्या के लिए मोनू यादव को सुपारी दी थी। मोनू ने अपने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जमीन को लेकर विवाद वर्ष 2015 से चल रहा था और इंद्रजीत के मोबाइल से मिले व्हाट्सऐप चैट की भी जांच की जा रही है।

सिर पर जैक से किए गए कई वार, नहर किनारे मिला शव

पुलिस को आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर कानपुर के गुजैनी क्षेत्र में नहर के किनारे शव मिला। घटनास्थल के पास खून लगा ट्रक जैक भी बरामद किया गया, जिसे पुलिस हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार मानकर जांच कर रही है।

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पोस्टमॉर्टम से जुड़ी जानकारी के अनुसार, गयादीन के सिर पर करीब 15 चोटें थीं। सिर की हड्डियां बुरी तरह टूट गई थीं और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उनकी मौत हुई। शव मिलने के बाद उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया।

कार बरामदगी के दौरान पुलिस मुठभेड़, दो आरोपी घायल

पुलिस आरोपियों को अपहरण में इस्तेमाल कार बरामद कराने के लिए कालपी के जंगल क्षेत्र में ले गई थी। पुलिस के मुताबिक, वहां पहले से छिपाए गए हथियारों से आरोपियों ने फायरिंग की और भागने की कोशिश की। जवाबी फायरिंग में आशीष विश्वकर्मा और सर्वेश शुक्ला के पैर में गोली लगी। तीसरे आरोपी केशव को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने बताया कि तीनों आरोपी कानपुर के रहने वाले हैं। इसके बाद कथित साजिशकर्ता इंद्रजीत यादव को भी गिरफ्तार किया गया। मुख्य आरोपी मोनू यादव की तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं।

छह थानों की पुलिस को चकमा देकर 70 किमी दूर फेंका शव

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इस हत्याकांड में आरोपियों ने जालौन से कानपुर तक का रास्ता तय किया और शव को करीब 70 किलोमीटर दूर नहर में फेंक दिया। पुलिस सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की मदद से आरोपियों तक पहुंची। जांच में अपहरण के लिए इस्तेमाल कार और हत्या में प्रयुक्त जैक की बरामदगी भी अहम कड़ी मानी जा रही है।

चौथी बार बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए थे गयादीन

गयादीन अहिरवार कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर चौथी बार चुने गए थे। वह वरिष्ठ अधिवक्ता थे और लंबे समय से वकालत कर रहे थे। उनकी हत्या की खबर से कालपी के अधिवक्ताओं और स्थानीय लोगों में शोक है।

जालौन के एसपी सुरेश चंद्र रावत के मुताबिक, बेटे की तहरीर पर पहले अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया था। शव बरामद होने के बाद मामले में हत्या और एससी-एसटी एक्ट की धाराएं बढ़ाई गई हैं। मामले की जांच सीओ राजेश कमल को सौंपी गई है।

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नोएडा एनकाउंटर: 50 हजार का इनामी अमन त्यागी उर्फ माया त्यागी मारा गया, दो पुलिसकर्मी घायल

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नोएडा सेक्टर-126 में पुलिस मुठभेड़ के बाद की तस्वीर

नोएडा: नोएडा पुलिस ने 50 हजार रुपए के इनामी बदमाश अमन त्यागी उर्फ माया त्यागी को मुठभेड़ में मार गिराया। शनिवार शाम सेक्टर-126 थाना क्षेत्र में पुलिस और बदमाश के बीच हुई मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी भी गोली लगने से घायल हो गए। अमन को घायल अवस्था में जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घायल पुलिसकर्मियों का अस्पताल में उपचार चल रहा है।

पुलिस के मुताबिक, सेक्टर-126 थाना पुलिस और क्राइम रिस्पॉन्स टीम (CRT) की संयुक्त टीम इलाके में चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान बाइक सवार संदिग्ध को रुकने का इशारा किया गया। आरोप है कि उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में अमन को गोली लगी। पुलिस ने मौके से एक पिस्टल, खोखा कारतूस और बाइक बरामद की है। घटनास्थल का निरीक्षण फील्ड यूनिट और फोरेंसिक टीम ने किया।

2019 में भी पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ था

पुलिस के अनुसार, अमन त्यागी मुजफ्फरनगर जिले के छपार गांव का रहने वाला था। उस पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित था। उसके खिलाफ हत्या, लूट, रंगदारी और गैंगस्टर एक्ट समेत 20 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

अमन की पुलिस से यह पहली मुठभेड़ नहीं थी। वर्ष 2019 में थाना फेज-2 पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में उसके दोनों पैरों में गोली लगी थी। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। बाद में जमानत पर बाहर आने के बाद वह फिर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों में पुलिस के निशाने पर आया।

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बादलपुर में फायरिंग के मामले में था वांछित

पुलिस के मुताबिक, अमन त्यागी थाना बादलपुर में दर्ज मुकदमा संख्या 306/2026 में वांछित था। आरोप है कि उसने कुछ दिन पहले बादलपुर क्षेत्र में वर्चस्व को लेकर अपने साथियों के साथ फायरिंग की थी। इस मामले में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस को उसकी तलाश थी और गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था।

रणदीप भाटी गैंग से जुड़ा होने का आरोप

पुलिस के अनुसार, अमन त्यागी का संबंध रणदीप भाटी गैंग से था। वह कथित तौर पर गैंग के लिए शूटर के रूप में काम करता था। पुलिस उसके आपराधिक नेटवर्क और साथियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। उस पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, रंगदारी और गैंगस्टर एक्ट के तहत मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। पुलिस का दावा है कि ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में हुई कुछ हत्याओं में भी उसकी भूमिका की जांच की गई थी। इन मामलों में उसकी कथित भूमिका को पुलिस के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

दो पुलिसकर्मी घायल, जांच जारी

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मुठभेड़ में घायल पुलिसकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मौके से हथियार और अन्य सामग्री बरामद की गई है। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अब अमन के साथियों, उसके नेटवर्क और दर्ज मुकदमों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।

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वाराणसी से दिल्ली के लिए देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू, 9 घंटे में पूरा होगा सफर

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वाराणसी से दिल्ली के लिए रवाना की गई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को वाराणसी से नई दिल्ली के बीच देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस ट्रेन से काशी और दिल्ली के बीच रातभर का सफर करीब 9 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। ट्रेन प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद में रुकेगी। यह सेवा सप्ताह में छह दिन चलाने की योजना है।

रेलवे के अनुसार, वाराणसी से चलने वाली ट्रेन शुक्रवार को और दिल्ली से चलने वाली ट्रेन शनिवार को नहीं चलेगी। ट्रेन पूरी तरह वातानुकूलित है और इसमें कुल 16 कोच लगाए गए हैं। इसकी यात्री क्षमता 823 है।

16 कोच में तीन श्रेणियों की सुविधा

वंदे भारत स्लीपर में यात्रियों के लिए तीन श्रेणियों की व्यवस्था की गई है। इसमें फर्स्ट एसी का एक, सेकेंड एसी के चार और थर्ड एसी के 11 कोच हैं। ट्रेन में कुल 823 यात्रियों के लिए बर्थ उपलब्ध होंगी।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ट्रेन में यात्रियों के साथ लोको पायलट और अन्य क्रू सदस्यों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है। क्रू के लिए अलग केबिन और टॉयलेट की व्यवस्था की गई है।

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हरी झंडी दिखाने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रेल मंत्री ने ट्रेन का निरीक्षण किया और लोको पायलट से बातचीत की। इस दौरान रेल मंत्री ने मुख्यमंत्री को ट्रेन की सुविधाओं और तकनीकी विशेषताओं की जानकारी दी।

पहले 13-14 घंटे लगते थे, अब करीब 9 घंटे में सफर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले वाराणसी से दिल्ली पहुंचने में 13 से 14 घंटे तक लगते थे। नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन से यह यात्रा करीब 8 से 9 घंटे में पूरी हो सकेगी। रात में यात्रा कर सुबह दिल्ली पहुंचने की सुविधा यात्रियों के लिए उपयोगी होगी।

रेलवे की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नई सेवा मौजूदा शिव गंगा एक्सप्रेस की तुलना में वाराणसी से दिल्ली की यात्रा में करीब 55 मिनट और दिल्ली से वाराणसी की यात्रा में करीब 35 मिनट की बचत करेगी।

दिल्ली से वाराणसी तक बुलेट ट्रेन का प्रस्तावित सफर साढ़े तीन घंटे में

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कार्यक्रम के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली-वाराणसी-गुवाहाटी बुलेट ट्रेन नेटवर्क के नॉर्दर्न कॉरिडोर को प्रधानमंत्री की मंजूरी मिलने की जानकारी दी। प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर आगरा, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या को जोड़ेगा। इसके बाद यह वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक पहुंचेगा।

रेल मंत्री के मुताबिक, कॉरिडोर तैयार होने के बाद दिल्ली से वाराणसी की यात्रा करीब 3 घंटे 33 मिनट में पूरी हो सकेगी। दिल्ली से आगरा का सफर लगभग एक घंटे में पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है।

दो मेमू ट्रेनों को भी दिखाई हरी झंडी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी से राजातालाब और बनारस से प्रयागराज रामबाग के बीच मेमू ट्रेन सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाई। इन सेवाओं का उद्देश्य वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में स्थानीय रेल कनेक्टिविटी को बेहतर करना है।

जनवरी में शुरू हुई थी पहली वंदे भारत स्लीपर सेवा

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देश की पहली वंदे भारत स्लीपर सेवा जनवरी 2026 में हावड़ा-गुवाहाटी कॉरिडोर पर शुरू की गई थी। वाराणसी-दिल्ली मार्ग पर दूसरी स्लीपर ट्रेन के उद्घाटन से उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी के बीच रात के रेल सफर के लिए एक और आधुनिक विकल्प उपलब्ध होगा।

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प्रयागराज: जमीन के नीचे छिपी करोड़ों की नकदी का मामला, रडार से तलाश, पुणे तक पहुंची जांच

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प्रयागराज के बरईपुर गांव में जमीन के नीचे दबे तीन ड्रमों से करोड़ों रुपये की नकदी मिलने के मामले की जांच करते पुलिस और अधिकारी।

प्रयागराज: बरईपुर गांव में जमीन के नीचे दबाकर रखी गई करोड़ों रुपये की नकदी का मामला अब और गहराता जा रहा है। नोटों से भरे तीन नीले ड्रम मिलने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि करोड़ों की रकम कहां से आई और इसे जमीन में क्यों छिपाया गया था। तलाशी अभियान के लिए तीन टीमें मौके पर पहुंची हैं। जमीन के भीतर छिपी नकदी का पता लगाने के लिए ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) की मदद ली जा रही है। पुलिस ने घर के परिसर में खुदाई भी शुरू कराई है। जांच में पुलिस के साथ आयकर विभाग और बैंक अधिकारियों की टीमें भी शामिल हैं।

पुलिस की एक टीम को जांच के सिलसिले में पुणे भेजा गया है। अधिकारियों का फोकस नकदी के स्रोत, उसे प्रयागराज लाने के रास्ते और इससे जुड़े लोगों की भूमिका का पता लगाने पर है।

पुणे में काम करने के दौरान जुटाई गई रकम की आशंका

जांच में यह बात सामने आने की जानकारी दी जा रही है कि राजेश और राकेश यादव कई साल तक पुणे में एक सर्राफा कारोबारी के यहां काम करते थे। कोविड महामारी के दौरान दोनों प्रयागराज लौट आए थे। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या बरामद नकदी का संबंध पुणे में उनके कामकाज से है। इसी कड़ी में पुलिस की एक टीम पुणे भेजे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, नकदी पुणे से लाई गई थी या इसका संबंध किसी कारोबारी अथवा आपराधिक गतिविधि से है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस और आयकर विभाग रकम के स्रोत तथा उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहे हैं।

दूसरे ठिकानों पर भी छिपी हो सकती है नकदी

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जांच एजेंसियों को आशंका है कि तीन ड्रमों में मिली रकम के अलावा घर, बाग, खाली जमीन या परिवार की अन्य संपत्तियों में भी नकदी छिपाई गई हो सकती है। इसी संभावना को देखते हुए परिसर की दोबारा तलाशी और जमीन के भीतर जांच की जा रही है।

पुलिस ने बिजली कटवाकर की थी छापेमारी

बरईपुर रामनगर गांव में बुधवार शाम पुलिस ने राकेश यादव उर्फ महाकाल के पुश्तैनी मकान पर कार्रवाई की थी। बताया गया कि पुलिस को घर में चोरी के रुपये जमीन के नीचे छिपाकर रखने की सूचना मिली थी। इसके बाद डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार और एडीसीपी पुष्कर वर्मा समेत पुलिस टीम शाम करीब छह बजे गांव पहुंची। तलाशी अभियान से पहले गांव की बिजली कटवाई गई और फिर मकान की घेराबंदी कर तलाशी ली गई। कार्रवाई में एसीपी सोरांव श्यामजीत प्रमिला सिंह भी मौजूद थीं।

जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि इतनी बड़ी नकदी किसकी है और इसे जमीन के नीचे छिपाने की वजह क्या थी। फिलहाल बरामद रकम की अंतिम आधिकारिक गिनती और उसके स्रोत की पुष्टि का इंतजार है।

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प्रयागराज: पुलिस की छापेमारी में जमीन के नीचे दबे मिले नोटों से भरे 3 ड्रम, करोड़ों की नकदी बरामद; गिनती जारी

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प्रयागराज के रामनगर गांव में जमीन के नीचे दबे तीन ड्रमों से बरामद नकदी की पुलिस जांच को दर्शाता समाचार

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एक मकान के अंदर जमीन खोदने पर नोटों से भरे तीन ड्रम मिलने का मामला सामने आया है। नवाबगंज थाना क्षेत्र के बरईपुर रामनगर गांव में बुधवार शाम पुलिस ने छापेमारी कर जमीन के नीचे छिपाकर रखी गई करोड़ों रुपये की नकदी बरामद की। ड्रमों में 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां रखी थीं।

पुलिस ने नकदी को कब्जे में लेकर सील कर दिया है और मकान के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, देर रात तक 4 करोड़ रुपये से अधिक की गिनती हो चुकी थी, जबकि बरामद रकम की अंतिम राशि की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। मामले में कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

पुलिस ने गांव की बिजली कटवाकर की छापेमारी

पुलिस को सूचना मिली थी कि बरईपुर रामनगर गांव में राकेश यादव उर्फ महाकाल के मकान में चोरी की रकम जमीन के नीचे छिपाकर रखी गई है। इसके बाद बुधवार शाम करीब 6 बजे डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार और एडीसीपी गंगानगर पुष्कर वर्मा समेत पुलिस टीम मौके पर पहुंची।

रिपोर्टों के अनुसार, तलाशी शुरू करने से पहले गांव की बिजली कटवाई गई। इसके बाद मकान में तलाशी और खुदाई की गई। जमीन के नीचे दबे तीन ड्रम मिलने पर पुलिस ने उन्हें बाहर निकलवाया। ड्रमों में कपड़े से ढकी नोटों की गड्डियां रखी थीं। पुलिस ने नकदी जब्त कर परिसर की घेराबंदी कर दी।

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साढ़े चार घंटे तक चला तलाशी अभियान

मकान में तलाशी और खुदाई की कार्रवाई करीब साढ़े चार घंटे चली। रात लगभग 10:30 बजे पुलिस टीम वापस लौटी, लेकिन घर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई। मकान और उससे जुड़ी जमीन की निगरानी के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।

डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार के मुताबिक, रात अधिक होने के कारण तलाशी अभियान रोकना पड़ा। बरामद नकदी की गिनती और उससे जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। आयकर विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियों को भी मामले की जानकारी दिए जाने की खबर है।

ग्रामीणों का दावा- पुणे में काम करने के बाद खरीदी जमीन

गांव के कुछ लोगों ने दावा किया है कि राकेश यादव पहले पुणे में अपने रिश्तेदारों के साथ रहकर सर्राफा कारोबारी के यहां काम करता था। कोविड महामारी के दौरान वह गांव लौट आया था। इसके बाद उसने 22 बीघा जमीन खरीदी और करीब 1 करोड़ खर्च कर मकान बनवाया। ग्रामीणों के मुताबिक, उसने ट्रैक्टर, डीजे और पिकअप वाहन भी खरीदे तथा सीमेंट-सरिया का कारोबार शुरू किया। पुलिस जांच में यह पता लगाया जाना है कि बरामद रकम कहां से आई, किसकी है और उसे जमीन के नीचे छिपाकर क्यों रखा गया था।

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नकदी की गिनती पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी कुल रकम

मकान से मिली नकदी की सही राशि को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में पांच करोड़ रुपये से अधिक की रकम मिलने की बात कही गई, जबकि अन्य रिपोर्टों में देर रात तक चार करोड़ रुपये से अधिक की गिनती पूरी होने का उल्लेख है। 60 करोड़ रुपये से अधिक नकदी होने की चर्चा भी सामने आई, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि गिनती और जांच पूरी होने के बाद ही बरामद रकम की वास्तविक मात्रा स्पष्ट होगी।

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Ghaziabad Encounter: पुलिस के साथ एनकाउंटर में एक लाख का इनामी धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी ढेर, 3 पुलिसकर्मी घायल

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गाजियाबाद के निवाड़ी क्षेत्र में क्राइम ब्रांच और इनामी बदमाश धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी के बीच मुठभेड़ हुई।

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस और क्राइम ब्रांच के साथ एक लाख रुपये के इनामी बदमाश धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी उर्फ बावरिया की मुठभेड़ हो गई। दोनों तरफ से हुई करीब 15 राउंड फायरिंग में गोली लगने से धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। निवाड़ी क्षेत्र में गंग नहर की पटरी पर हुई मुठभेड़ में गाजियाबाद क्राइम ब्रांच के तीन पुलिसकर्मी विनीत, अमित और हिमांशु भी गोली लगने से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

रुकने का इशारा करने पर फायरिंग का आरोप

पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड के अनुसार, मुखबिर से सूचना मिलने के बाद एडिशनल डीसीपी क्राइम पीयूष सिंह के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की टीम को गंग नहर पटरी पर तैनात किया गया था। इसी दौरान बाइक से आ रहे धर्मेंद्र को पुलिस ने रुकने का इशारा किया। पुलिस के मुताबिक धर्मेंद्र ने रुकने के बजाय टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी। घायल अवस्था में उसे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

गाजियाबाद और बागपत में डकैती के मामलों में तलाश

एडिशनल डीसीपी क्राइम पीयूष सिंह ने बताया कि अमरोहा जिले के बशी गांव का रहने वाला धर्मेंद्र अपने गिरोह के साथ गाजियाबाद और बागपत में डकैती की वारदातों को अंजाम देता था। पुलिस पिछले करीब एक साल से उसकी तलाश कर रही थी।

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पुलिस के अनुसार, धर्मेंद्र पहचान बदलकर वारदात करता था और रात के समय लूट तथा डकैती की घटनाओं को अंजाम देता था। वर्ष 2025 में निवाड़ी क्षेत्र में डकैती की एक घटना के दौरान मकान मालिक पर जानलेवा हमला करने का भी आरोप है।

गाजियाबाद और मेरठ पुलिस ने घोषित किया था इनाम

धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी को बावरिया गिरोह का सदस्य बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए गाजियाबाद पुलिस ने 50 हजार रुपये और मेरठ पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इस तरह उस पर कुल एक लाख रुपये का इनाम था। पुलिस के मुताबिक, बागपत सहित कई जिलों की पुलिस और एसटीएफ भी उसकी तलाश कर रही थी।

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