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पंचकूला के स्कूल में KG की बच्ची पर तीसरी कक्षा के छात्र का हमला, CCTV में कैद हुई घटना

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पंचकूला के स्कूल में KG छात्रा पर हमले के मामले और स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था की जांच को दर्शाता समाचार ग्राफिक।

हरियाणा के पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित एक नामी स्कूल में छह साल की KG छात्रा पर तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। 28 अक्टूबर को हुई इस घटना में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे पहले पंचकूला के अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर PGI चंडीगढ़ रेफर किया गया।

क्लासरूम में हुई पूरी घटना CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में छात्र को बच्ची के साथ मारपीट करते और उसे चोट पहुंचाते देखा गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए हमले का वीडियो साझा नहीं किया जा रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

बच्ची को लेने पहुंचा ऑटो ड्राइवर, तब सामने आया मामला

परिजनों के मुताबिक, स्कूल की छुट्टी के बाद जब ऑटो ड्राइवर बच्ची को लेने पहुंचा तो वह नहीं मिली। इसकी जानकारी मिलने पर परिवार के लोग स्कूल पहुंचे और बच्ची की तलाश शुरू की। बच्ची के चाचा ने बताया कि जिस छात्र पर हमले का आरोप है, उसी ने उन्हें उस जगह के बारे में बताया जहां बच्ची घायल अवस्था में पड़ी थी।

परिजन बच्ची को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। परिवार का कहना है कि बच्ची के पिता ने उसे खून से लथपथ देखा तो वे बेहोश हो गए। बच्ची को पहले स्थानीय अस्पताल में उपचार दिया गया, फिर PGI चंडीगढ़ रेफर किया गया।

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परिवार ने स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

बच्ची के परिजनों ने आरोप लगाया है कि स्कूल में शिक्षकों की कमी के कारण अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाया जाता था। परिवार ने यह भी सवाल उठाया कि जब स्कूल में CCTV कैमरे लगे हैं और उनकी निगरानी की व्यवस्था है, तो इतनी गंभीर घटना समय रहते किसी की जानकारी में क्यों नहीं आई।

परिवार का आरोप है कि यदि स्कूल स्टाफ समय पर हस्तक्षेप करता तो बच्ची को गंभीर चोटों से बचाया जा सकता था। इन आरोपों की जांच की जा रही है।

पुलिस कर रही जांच, छात्र का होगा मानसिक आकलन

पुलिस टीम ने स्कूल पहुंचकर प्रबंधन से घटना की जानकारी ली है। छात्र के माता-पिता से भी पूछताछ की जा रही है। जांच का एक अहम पहलू यह पता लगाना है कि हमला किन परिस्थितियों में हुआ और घटना के समय स्कूल में निगरानी की क्या व्यवस्था थी।

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रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने छात्र के मानसिक स्वास्थ्य का आकलन कराने की प्रक्रिया भी शुरू की है। चूंकि दोनों बच्चे नाबालिग हैं, इसलिए मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।

शिक्षा मंत्री ने बनाई जांच कमेटी

हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्यालय स्तर पर जांच कमेटी गठित की है। उन्होंने कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। यदि स्कूल प्रबंधन या कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी। इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, कक्षाओं की निगरानी और शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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ISRO ने लॉन्च किया नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03, भारत के NavIC सिस्टम को मिलेगी मजबूती

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श्रीहरिकोटा से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट के सफल प्रक्षेपण को दर्शाता समाचार ग्राफिक

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC को मजबूत करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। इसरो ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर की रात 11 बजकर 51 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसे GSLV-F18 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया।

लॉन्च के करीब 18 मिनट 40 सेकंड बाद रॉकेट ने सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित कर दिया। इसरो के अनुसार, NVS-03 का वजन 2,232 किलोग्राम है। यह मिशन भारत की अपनी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन सेवाओं को जारी रखने और उनकी क्षमता बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

पूरे भारत और सीमा से 1,500 किमी आगे तक मिलेगी कवरेज

NVS-03 इसरो की अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का तीसरा उपग्रह है। यह भारत के NavIC नेटवर्क के तहत पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने में मदद करेगा।

इसरो के मुताबिक, NavIC भारत के पूरे भूभाग और देश की सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक कवरेज देने के लिए तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल नागरिक सेवाओं के साथ-साथ समुद्री, हवाई और रणनीतिक क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।

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स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक और नया L1 सिग्नल

NVS-03 में स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक के साथ आयातित एटॉमिक क्लॉक भी लगाए गए हैं। सैटेलाइट में पहले से इस्तेमाल हो रहे L5 और S-बैंड सिग्नल के अलावा L1 सिग्नल भी जोड़ा गया है। इससे NavIC की सेवाओं और अलग-अलग नेविगेशन रिसीवर के साथ उसकी उपयोगिता बढ़ने की उम्मीद है। इस मिशन के साथ भारत अपने नेविगेशन सिस्टम के लिए जरूरी तकनीक और उपकरणों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कारगिल युद्ध के बाद महसूस हुई थी अपने नेविगेशन सिस्टम की जरूरत

भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम की रणनीतिक जरूरत 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान प्रमुखता से सामने आई थी। उस समय भारत को सैन्य अभियानों के लिए क्षेत्र की सटीक लोकेशन संबंधी जानकारी की जरूरत थी। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने भारत को GPS की सैन्य स्तर की जानकारी देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद भारत ने अपना क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम तेज किया। इसी कार्यक्रम को पहले IRNSS और बाद में NavIC नाम दिया गया।

क्या है NavIC?

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NavIC का पूरा नाम Navigation with Indian Constellation है। यह इसरो द्वारा विकसित भारत का स्वतंत्र क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है। इसका उद्देश्य GPS जैसे विदेशी सिस्टम पर निर्भरता कम करते हुए भारत और आसपास के क्षेत्र में सटीक लोकेशन तथा समय संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराना है। NVS-03 के सफल प्रक्षेपण से इस नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। इसरो की योजना अगली पीढ़ी के अन्य NVS उपग्रहों के जरिए NavIC की सेवाओं को और बेहतर बनाने की है।

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दिल्ली: जूता फैक्ट्री में भीषण आग, 4 लोगों की मौत; 2 गंभीर, 11 को रेस्क्यू किया गया

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दिल्ली के मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया में जूता फैक्ट्री में आग लगने के बाद दमकलकर्मियों का राहत और बचाव अभियान।

दिल्ली: मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में शुक्रवार रात एक जूता फैक्ट्री में भीषण आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई। हादसे में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। दमकल और रेस्क्यू टीम ने इमारत से कई लोगों को बाहर निकाला। घायलों को संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंचाया गया।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग रात करीब 9:30 बजे फैक्ट्री के बेसमेंट में लगी थी। देखते ही देखते आग ने इमारत के हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है।
बेसमेंट में लगी आग, धुएं के कारण फंसे लोग

दिल्ली अग्निशमन सेवा के सहायक मंडल अधिकारी (ADO) पारस कुमार के मुताबिक, फैक्ट्री में जूते-चप्पल बनाने के साथ उनका भंडारण भी किया जाता था। आग सबसे पहले बेसमेंट में लगी। दमकलकर्मियों ने आग को बेसमेंट तक सीमित रखा, ताकि वह इमारत के अन्य हिस्सों में न फैले।

बचाव अभियान के दौरान एक व्यक्ति को तीसरी मंजिल की सीढ़ियों से और पांच लोगों को चौथी मंजिल से बाहर निकाला गया। सभी छह लोग बेहोशी की हालत में थे। उन्हें संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया, जहां चार को मृत घोषित कर दिया गया और दो का इलाज जारी है।

दमकल की 20 से ज्यादा गाड़ियां पहुंचीं

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आग की सूचना रात करीब 9:30 बजे मिलने के बाद दमकल विभाग ने 20 से अधिक गाड़ियां मौके पर भेजीं। दमकलकर्मियों ने कई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसके बाद फैक्ट्री में कूलिंग का काम किया गया।

फैक्ट्री मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फैक्ट्री मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। ठेकेदार और कर्मचारियों से भी जानकारी ली जा रही है, ताकि पता चल सके कि हादसे के समय फैक्ट्री में कितने लोग मौजूद थे। आग लगने की असली वजह और सुरक्षा इंतजामों से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है।

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Indian Navy को मिलेंगे 8 नए युद्धपोत, ₹40 हजार करोड़ की परियोजना मंजूर

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भारतीय नौसेना के लिए प्रस्तावित आठ नए स्वदेशी कॉर्वेट युद्धपोतों को दर्शाता रक्षा समाचार ग्राफिक

नई दिल्ली:  भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने आठ नए कॉर्वेट युद्धपोतों के निर्माण की परियोजना को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी है। परियोजना पर 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।

इन सभी युद्धपोतों का निर्माण देश में ही किया जाएगा। परियोजना में 70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और उपकरणों के इस्तेमाल का लक्ष्य रखा गया है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग, जहाज निर्माण क्षेत्र और घरेलू सप्लाई चेन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

GRSE और गोवा शिपयार्ड को मिलेगा निर्माण का काम

आठों युद्धपोतों का निर्माण सरकारी क्षेत्र की दो प्रमुख कंपनियां करेंगी। इनमें कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों कंपनियों के साथ अगले कुछ दिनों में निर्माण अनुबंध पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।

रक्षा सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि परियोजना को CCS की मंजूरी बुधवार को हुई बैठक में मिली। इससे दोनों शिपयार्ड को लंबे समय के लिए काम मिलेगा। साथ ही युद्धपोत निर्माण से जुड़े छोटे और मध्यम उद्योगों को भी ऑर्डर मिलने की संभावना है।

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2030 तक पहले युद्धपोत की डिलीवरी का लक्ष्य

रिपोर्ट के अनुसार, पहले कॉर्वेट का निर्माण एक साल के भीतर शुरू करने की तैयारी है। इसकी डिलीवरी 2030 तक करने का लक्ष्य रखा गया है। बाकी युद्धपोतों की डिलीवरी अगले चार से पांच वर्षों में शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण की विस्तृत समय-सारिणी और प्रत्येक शिपयार्ड को मिलने वाले युद्धपोतों की संख्या की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

नए कॉर्वेट में स्टील्थ तकनीक, आधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम तथा बेहतर गतिशीलता जैसी क्षमताएं शामिल होने की उम्मीद है। इनसे हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी और समुद्री सुरक्षा अभियानों में नौसेना की क्षमता बढ़ेगी।

इसी साल नौसेना में शामिल हुए थे तीन स्वदेशी प्लेटफॉर्म

इससे पहले 21 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में तीन स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म- INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय- को भारतीय नौसेना में कमीशन किया था। इनमें दूनागिरी एक स्टील्थ फ्रिगेट, संशोधक सर्वेक्षण पोत और अग्रय पनडुब्बी रोधी युद्धक पोत है। इनका निर्माण GRSE ने किया था। आठ नए कॉर्वेट की मंजूरी को नौसेना के आधुनिकीकरण और देश में युद्धपोत निर्माण क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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Cyclone Arnab: कमजोर पड़ा तूफान, ओडिशा के 300 गांवों में बाढ़; कई राज्यों में बारिश का अलर्ट

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चक्रवात अर्नब के कमजोर पड़ने के बाद ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश, बाढ़ और राहत-बचाव अभियान को दर्शाता समाचार

नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान अर्नब कमजोर होकर डीप डिप्रेशन में बदल गया है, लेकिन इसके असर से पूर्वी भारत के कई इलाकों में भारी बारिश, बाढ़ और जनजीवन प्रभावित होने की स्थिति बनी हुई है। आंध्र प्रदेश और ओडिशा में तूफान से जान-माल का नुकसान हुआ है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अधिकारियों ने छह मौतों की सूचना दी है, जबकि कुछ अन्य रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग बताई गई है।

ओडिशा के गंजाम जिले में लगातार बारिश से कई गांवों में बाढ़ जैसे हालात बनने की खबर है। वहीं, आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तेज हवाओं और बारिश से बिजली व्यवस्था, सड़क यातायात और अन्य बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं। तूफान के पहले आंध्र प्रदेश और ओडिशा में 1.80 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था।

ओडिशा में बाढ़ जैसे हालात, राहत-बचाव अभियान जारी

ओडिशा के दक्षिणी जिलों में लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी भर गया है। गंजाम सहित प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत पहुंचाने की तैयारी की गई है। राज्य में पहले से ही आपदा प्रबंधन दलों और प्रशासनिक अधिकारियों को तैनात किया गया था।

तूफान के कारण कई स्थानों पर पेड़ उखड़ने, बिजली आपूर्ति बाधित होने और सड़कों पर आवागमन प्रभावित होने की खबरें हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बहाली का काम जारी है।

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आंध्र प्रदेश में रेल और बिजली व्यवस्था प्रभावित

आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में तेज हवाओं और भारी बारिश से बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। कई जगह पेड़ गिरने और बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त होने से आपूर्ति प्रभावित हुई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, तूफान के दौरान कम से कम 15 हजार बिजली के खंभों को नुकसान पहुंचने की सूचना मिली थी। कुछ रेल मार्गों पर भी परिचालन प्रभावित हुआ। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले संबंधित रेलवे की आधिकारिक सूचना और ट्रेन की स्थिति जांच लें।

डीप डिप्रेशन में बदला अर्नब, आगे और कमजोर होने का अनुमान

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात अर्नब 28 अक्टूबर की रात कमजोर होकर डीप डिप्रेशन में बदल गया। 29 अक्टूबर की सुबह जारी पूर्वानुमान में इसके दिन के दौरान डिप्रेशन और शाम तक अच्छी तरह चिह्नित कम दबाव के क्षेत्र में बदलने की संभावना जताई गई। हालांकि, तूफान कमजोर होने के बावजूद इससे जुड़ी बारिश का असर तत्काल खत्म होना जरूरी नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।

कई राज्यों में बारिश की संभावना, स्थानीय अलर्ट पर नजर रखें

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चक्रवात के कमजोर होने के बाद भी इसके प्रभाव से मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में बारिश की संभावना बनी हुई है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के प्रभावित जिलों में प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। स्कूल बंद होने, सड़क मार्ग बाधित होने या स्थानीय चेतावनी से जुड़ी जानकारी के लिए संबंधित जिला प्रशासन की ताजा सूचना देखना जरूरी है।

मौसम विभाग ने लोगों को जलभराव वाले रास्तों से दूर रहने, तेज बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और बिजली के खंभों या गिरे हुए तारों के पास नहीं जाने की सलाह दी है।

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कैंसर की 543 दवाओं के दाम बदले, कुछ की कीमत 90% से ज्यादा घटी; 9 नवंबर से नई दरें लागू

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कैंसर की दवाओं की कीमतों में कटौती और NPPA की ओर से जारी नई दरों को दर्शाता समाचार

नई दिल्ली: कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 543 दवा ब्रांडों की अधिकतम खुदरा कीमतों (MRP) में संशोधन किया गया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) की ओर से जारी सूची के अनुसार, इनमें से 397 ब्रांड-पैक की कीमतें घटाई गई हैं, जबकि 146 की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। नई कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी।

सरकार के इस कदम से कैंसर के इलाज का खर्च कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कीमतों में कटौती सभी दवाओं पर समान रूप से लागू नहीं हुई है। कुछ दवाओं की कीमतों में 90 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है, जबकि कई महंगी दवाओं के दाम पहले जैसे ही बने हुए हैं।

पैलबोप्रो की कीमत ₹40,421 से घटकर ₹2,720

नई सूची में कुछ दवाओं की कीमतों में बड़ी कटौती हुई है। प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं:

पैलबोप्रो: 125 mg की 21 कैप्सूल वाली पैकिंग की कीमत ₹40,421.33 से घटाकर ₹2,720 कर दी गई है। यह लगभग 93.3 प्रतिशत की कमी है।

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सैमटेपा इंजेक्शन: 100 mg की शीशी की कीमत ₹80,071.86 से घटाकर ₹7,150.33 कर दी गई है। इसमें लगभग 91 प्रतिशत की कटौती हुई है।

पैलबोप्रो का इस्तेमाल कुछ प्रकार के ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में किया जाता है, जबकि सैमटेपा एक कीमोथेरेपी दवा है। वास्तविक बचत मरीज की निर्धारित दवा, पैकिंग और इलाज की जरूरत पर निर्भर करेगी।

397 ब्रांड-पैक सस्ते, 146 की कीमतें यथावत

NPPA की 28 अक्टूबर को जारी सूची में कंपनियों की ओर से 27 अक्टूबर तक उपलब्ध कराई गई कीमतों की जानकारी शामिल है। कुल 543 ब्रांड-पैक में से 397 की संशोधित MRP कम हुई है। इनमें 217 की कीमतें आधी या उससे कम रह गई हैं। कुछ ब्रांडों में 80 से 90 प्रतिशत से अधिक की कटौती भी दर्ज की गई है। प्राधिकरण ने कहा है कि कंपनियों से नई कीमतों की जानकारी मिलने पर सूची को आगे भी अपडेट किया जाएगा।

कीट्रूडा और कुछ महंगी दवाओं के दाम नहीं बदले

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कीमतों में व्यापक बदलाव के बावजूद कुछ महंगी कैंसर दवाओं की MRP में कोई कमी नहीं हुई है। इनमें इम्यूनोथेरेपी दवा कीट्रूडा और टैग्रिसो जैसी दवाएं शामिल हैं। इसलिए मरीजों और उनके परिजनों के लिए जरूरी है कि वे अपनी दवा के ब्रांड, डोज और पैक साइज के अनुसार नई कीमत की जांच करें। एक ही दवा के अलग-अलग ब्रांडों की कीमतों में भी अंतर हो सकता है।

सरकार ने 137 एंटी-कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन पर लगाई सीमा

कीमतों में संशोधन से पहले NPPA ने 17 अक्टूबर 2026 को 137 गैर-अनुसूचित एंटी-कैंसर दवाओं के लिए ट्रेड मार्जिन को MRP के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया था। इसका उद्देश्य दवा वितरण और खुदरा बिक्री के दौरान अत्यधिक मार्जिन पर नियंत्रण लगाना तथा कैंसर मरीजों के लिए दवाओं को अधिक किफायती बनाना है। नई कीमतें 9 नवंबर से लागू होंगी। मरीज संशोधित दरों की जानकारी NPPA की वेबसाइट और ‘फार्मा सही दाम’ ऐप के माध्यम से भी जांच सकते हैं।

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