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झुंझुनूं में बड़ा हादसा: सड़क बना रहे 8 मजदूरों की करंट से मौत, 5 झुलसे

झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के छापोली गांव में सोमवार सुबह सड़क निर्माण के दौरान बड़ा हादसा हो गया। रोड़ी-बजरी मिक्सर मशीन का हाइड्रोलिक जैक ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइन के संपर्क में आ गया। इससे मशीन में करंट फैल गया और उसकी चपेट में आकर 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 5 अन्य झुलस गए। हादसा सुबह करीब 10 बजे हुआ।
उदयपुरवाटी थाना प्रभारी रामपाल के मुताबिक, सड़क पर काम कर रही मिक्सर मशीन का हाइड्रोलिक जैक बिजली के तार से छू गया था। इसके बाद मशीन में करंट फैलने से वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए।
ग्रामीणों ने शुरू किया धरना, बिजली लाइन को लेकर उठाए सवाल
हादसे के बाद ग्रामीणों ने धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि 11 केवी की बिजली लाइन पहले सड़क से दूर थी, लेकिन कुछ दिन पहले इसे बदलकर रास्ते के ऊपर से निकाल दिया गया था। ग्रामीण रोहिताश्व के अनुसार, बिजली के तार नीचे होने के कारण मशीन का जैक उनसे टकरा गया और यह हादसा हुआ। ग्रामीणों ने बिजली लाइन को स्थानांतरित किए जाने और उसकी ऊंचाई को लेकर जिम्मेदारी तय करने की मांग उठाई है।
जनसहयोग से बन रही थी सड़क, तीन-चार महीने से चल रहा था काम
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में सड़क का निर्माण जनसहयोग से कराया जा रहा था। करीब तीन-चार महीने से काम चल रहा था, लेकिन बीच-बीच में निर्माण कार्य रुक जाता था। गांव के ठेकेदार विष्णु सैनी आरसीसी सड़क डालने का काम कर रहे थे। ग्रामीणों के कहने पर सोमवार को काम दोबारा शुरू किया गया था। हादसे के बाद गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीण धरने पर बैठकर घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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चक्रवात मुरासु का खतरा: आंध्र प्रदेश के तट से आज रात टकराने की आशंका, 110 किमी/घंटे तक चल सकती हैं हवाएं

चक्रवात मुरासु: बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात मुरासु को लेकर दक्षिण भारत के तटीय राज्यों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चक्रवात के आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ने और ओंगोल के पास टकराने की आशंका जताई गई है। इस दौरान हवा की रफ्तार 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
सोमवार सुबह 5:30 बजे चक्रवात चेन्नई से करीब 200 किलोमीटर और नेल्लोर से 210 किलोमीटर दूर बताया गया था। इसकी गति लगभग 25 किलोमीटर प्रति घंटा थी। आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और ओडिशा के कई इलाकों में तेज हवाओं और बारिश का असर दिखने लगा है।
नेल्लोर के मयपाडु बीच पर समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं। विजयवाड़ा एयरपोर्ट पर 10 उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। वहीं, तमिलनाडु के चेन्नई, चेंगलपट्टू और तिरुवल्लूर में रविवार रात से बारिश जारी है। चेन्नई में कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं और स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
आंध्र प्रदेश: 90 जवानों की तीन NDRF टीमें तैनात
चक्रवात से निपटने के लिए NDRF की चौथी बटालियन की तीन टीमें तैनात की गई हैं। इनमें कुल 90 जवान शामिल हैं। इन टीमों को नेल्लोर, प्रकाशम और मार्कापुरम में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए भेजा गया है।
आंध्र प्रदेश के बापटला, कृष्णा और प्रकाशम जिलों में चक्रवात का अधिक असर पड़ने की आशंका है। प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है। मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात के तट से टकराने के दौरान 100 से 110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। झोंकों की गति 120 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।
तमिलनाडु: चेन्नई में 24 घंटे में 11 सेमी बारिश
चेन्नई में पिछले 24 घंटे के दौरान माधवरम में सबसे ज्यादा 11 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई। एन्नोर पोर्ट और नुंगमबक्कम में 10-10 सेंटीमीटर बारिश हुई। शहर के 22 सबवे में से दो में पानी भर गया।
जलभराव से निपटने के लिए चेन्नई नगर निगम ने पंप और फील्ड टीमों को तैनात किया है। तिरुवल्लूर जिले के पझावेर्काडु में समुद्र में ऊंची लहरें उठने की खबर है। लगातार बारिश के कारण चेन्नई सहित प्रभावित इलाकों में स्कूल बंद किए गए हैं।
ओडिशा: पांच जिलों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा
चक्रवात के प्रभाव को देखते हुए ओडिशा सरकार ने गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। पुरी में सोमवार सुबह से बारिश हो रही है और समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं। रायगढ़ा जिले में सभी 11 फायर स्टेशन की टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। NDRF, ODRAF और ओडिशा फायर सर्विस के 300 से अधिक बचाव दलों को तैनात किया गया है।
मौसम विभाग ने गंजाम और गजपति में भारी बारिश, बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया है।
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में बारिश का अलर्ट
चक्रवात के प्रभाव से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी बारिश हो सकती है। इन राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात के तट से टकराने के बाद भी इसके प्रभाव से आसपास के क्षेत्रों में बारिश और तेज हवाओं का असर बना रह सकता है।
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पंचकूला के स्कूल में KG की बच्ची पर तीसरी कक्षा के छात्र का हमला, CCTV में कैद हुई घटना

हरियाणा के पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित एक नामी स्कूल में छह साल की KG छात्रा पर तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। 28 अक्टूबर को हुई इस घटना में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। उसे पहले पंचकूला के अस्पताल ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर PGI चंडीगढ़ रेफर किया गया।
क्लासरूम में हुई पूरी घटना CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में छात्र को बच्ची के साथ मारपीट करते और उसे चोट पहुंचाते देखा गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए हमले का वीडियो साझा नहीं किया जा रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
बच्ची को लेने पहुंचा ऑटो ड्राइवर, तब सामने आया मामला
परिजनों के मुताबिक, स्कूल की छुट्टी के बाद जब ऑटो ड्राइवर बच्ची को लेने पहुंचा तो वह नहीं मिली। इसकी जानकारी मिलने पर परिवार के लोग स्कूल पहुंचे और बच्ची की तलाश शुरू की। बच्ची के चाचा ने बताया कि जिस छात्र पर हमले का आरोप है, उसी ने उन्हें उस जगह के बारे में बताया जहां बच्ची घायल अवस्था में पड़ी थी।
परिजन बच्ची को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। परिवार का कहना है कि बच्ची के पिता ने उसे खून से लथपथ देखा तो वे बेहोश हो गए। बच्ची को पहले स्थानीय अस्पताल में उपचार दिया गया, फिर PGI चंडीगढ़ रेफर किया गया।
परिवार ने स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
बच्ची के परिजनों ने आरोप लगाया है कि स्कूल में शिक्षकों की कमी के कारण अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाया जाता था। परिवार ने यह भी सवाल उठाया कि जब स्कूल में CCTV कैमरे लगे हैं और उनकी निगरानी की व्यवस्था है, तो इतनी गंभीर घटना समय रहते किसी की जानकारी में क्यों नहीं आई।
परिवार का आरोप है कि यदि स्कूल स्टाफ समय पर हस्तक्षेप करता तो बच्ची को गंभीर चोटों से बचाया जा सकता था। इन आरोपों की जांच की जा रही है।
पुलिस कर रही जांच, छात्र का होगा मानसिक आकलन
पुलिस टीम ने स्कूल पहुंचकर प्रबंधन से घटना की जानकारी ली है। छात्र के माता-पिता से भी पूछताछ की जा रही है। जांच का एक अहम पहलू यह पता लगाना है कि हमला किन परिस्थितियों में हुआ और घटना के समय स्कूल में निगरानी की क्या व्यवस्था थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने छात्र के मानसिक स्वास्थ्य का आकलन कराने की प्रक्रिया भी शुरू की है। चूंकि दोनों बच्चे नाबालिग हैं, इसलिए मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार की जाएगी।
शिक्षा मंत्री ने बनाई जांच कमेटी
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने घटना का संज्ञान लेते हुए मुख्यालय स्तर पर जांच कमेटी गठित की है। उन्होंने कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। यदि स्कूल प्रबंधन या कर्मचारियों की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी। इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, कक्षाओं की निगरानी और शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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ISRO ने लॉन्च किया नेविगेशन सैटेलाइट NVS-03, भारत के NavIC सिस्टम को मिलेगी मजबूती

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC को मजबूत करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है। इसरो ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर की रात 11 बजकर 51 मिनट पर आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से NVS-03 नेविगेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसे GSLV-F18 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया।
लॉन्च के करीब 18 मिनट 40 सेकंड बाद रॉकेट ने सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित कर दिया। इसरो के अनुसार, NVS-03 का वजन 2,232 किलोग्राम है। यह मिशन भारत की अपनी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन सेवाओं को जारी रखने और उनकी क्षमता बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
पूरे भारत और सीमा से 1,500 किमी आगे तक मिलेगी कवरेज
NVS-03 इसरो की अगली पीढ़ी के नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का तीसरा उपग्रह है। यह भारत के NavIC नेटवर्क के तहत पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने में मदद करेगा।
इसरो के मुताबिक, NavIC भारत के पूरे भूभाग और देश की सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर आगे तक कवरेज देने के लिए तैयार किया गया है। इसका इस्तेमाल नागरिक सेवाओं के साथ-साथ समुद्री, हवाई और रणनीतिक क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।
स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक और नया L1 सिग्नल
NVS-03 में स्वदेशी एटॉमिक क्लॉक के साथ आयातित एटॉमिक क्लॉक भी लगाए गए हैं। सैटेलाइट में पहले से इस्तेमाल हो रहे L5 और S-बैंड सिग्नल के अलावा L1 सिग्नल भी जोड़ा गया है। इससे NavIC की सेवाओं और अलग-अलग नेविगेशन रिसीवर के साथ उसकी उपयोगिता बढ़ने की उम्मीद है। इस मिशन के साथ भारत अपने नेविगेशन सिस्टम के लिए जरूरी तकनीक और उपकरणों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कारगिल युद्ध के बाद महसूस हुई थी अपने नेविगेशन सिस्टम की जरूरत
भारत के स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम की रणनीतिक जरूरत 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान प्रमुखता से सामने आई थी। उस समय भारत को सैन्य अभियानों के लिए क्षेत्र की सटीक लोकेशन संबंधी जानकारी की जरूरत थी। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने भारत को GPS की सैन्य स्तर की जानकारी देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद भारत ने अपना क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम तेज किया। इसी कार्यक्रम को पहले IRNSS और बाद में NavIC नाम दिया गया।
क्या है NavIC?
NavIC का पूरा नाम Navigation with Indian Constellation है। यह इसरो द्वारा विकसित भारत का स्वतंत्र क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम है। इसका उद्देश्य GPS जैसे विदेशी सिस्टम पर निर्भरता कम करते हुए भारत और आसपास के क्षेत्र में सटीक लोकेशन तथा समय संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराना है। NVS-03 के सफल प्रक्षेपण से इस नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। इसरो की योजना अगली पीढ़ी के अन्य NVS उपग्रहों के जरिए NavIC की सेवाओं को और बेहतर बनाने की है।
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दिल्ली: जूता फैक्ट्री में भीषण आग, 4 लोगों की मौत; 2 गंभीर, 11 को रेस्क्यू किया गया

दिल्ली: मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 में शुक्रवार रात एक जूता फैक्ट्री में भीषण आग लगने से चार लोगों की मौत हो गई। हादसे में दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। दमकल और रेस्क्यू टीम ने इमारत से कई लोगों को बाहर निकाला। घायलों को संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंचाया गया।
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग रात करीब 9:30 बजे फैक्ट्री के बेसमेंट में लगी थी। देखते ही देखते आग ने इमारत के हिस्सों को अपनी चपेट में ले लिया। आग लगने के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है।
बेसमेंट में लगी आग, धुएं के कारण फंसे लोग
दिल्ली अग्निशमन सेवा के सहायक मंडल अधिकारी (ADO) पारस कुमार के मुताबिक, फैक्ट्री में जूते-चप्पल बनाने के साथ उनका भंडारण भी किया जाता था। आग सबसे पहले बेसमेंट में लगी। दमकलकर्मियों ने आग को बेसमेंट तक सीमित रखा, ताकि वह इमारत के अन्य हिस्सों में न फैले।
बचाव अभियान के दौरान एक व्यक्ति को तीसरी मंजिल की सीढ़ियों से और पांच लोगों को चौथी मंजिल से बाहर निकाला गया। सभी छह लोग बेहोशी की हालत में थे। उन्हें संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल ले जाया गया, जहां चार को मृत घोषित कर दिया गया और दो का इलाज जारी है।
दमकल की 20 से ज्यादा गाड़ियां पहुंचीं
आग की सूचना रात करीब 9:30 बजे मिलने के बाद दमकल विभाग ने 20 से अधिक गाड़ियां मौके पर भेजीं। दमकलकर्मियों ने कई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इसके बाद फैक्ट्री में कूलिंग का काम किया गया।
फैक्ट्री मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। फैक्ट्री मालिक को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। ठेकेदार और कर्मचारियों से भी जानकारी ली जा रही है, ताकि पता चल सके कि हादसे के समय फैक्ट्री में कितने लोग मौजूद थे। आग लगने की असली वजह और सुरक्षा इंतजामों से जुड़े पहलुओं की जांच जारी है।
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Indian Navy को मिलेंगे 8 नए युद्धपोत, ₹40 हजार करोड़ की परियोजना मंजूर

नई दिल्ली: भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने आठ नए कॉर्वेट युद्धपोतों के निर्माण की परियोजना को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी है। परियोजना पर 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।
इन सभी युद्धपोतों का निर्माण देश में ही किया जाएगा। परियोजना में 70 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और उपकरणों के इस्तेमाल का लक्ष्य रखा गया है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग, जहाज निर्माण क्षेत्र और घरेलू सप्लाई चेन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
GRSE और गोवा शिपयार्ड को मिलेगा निर्माण का काम
आठों युद्धपोतों का निर्माण सरकारी क्षेत्र की दो प्रमुख कंपनियां करेंगी। इनमें कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) और गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों कंपनियों के साथ अगले कुछ दिनों में निर्माण अनुबंध पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
रक्षा सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि परियोजना को CCS की मंजूरी बुधवार को हुई बैठक में मिली। इससे दोनों शिपयार्ड को लंबे समय के लिए काम मिलेगा। साथ ही युद्धपोत निर्माण से जुड़े छोटे और मध्यम उद्योगों को भी ऑर्डर मिलने की संभावना है।
2030 तक पहले युद्धपोत की डिलीवरी का लक्ष्य
रिपोर्ट के अनुसार, पहले कॉर्वेट का निर्माण एक साल के भीतर शुरू करने की तैयारी है। इसकी डिलीवरी 2030 तक करने का लक्ष्य रखा गया है। बाकी युद्धपोतों की डिलीवरी अगले चार से पांच वर्षों में शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण की विस्तृत समय-सारिणी और प्रत्येक शिपयार्ड को मिलने वाले युद्धपोतों की संख्या की आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
नए कॉर्वेट में स्टील्थ तकनीक, आधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम तथा बेहतर गतिशीलता जैसी क्षमताएं शामिल होने की उम्मीद है। इनसे हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी और समुद्री सुरक्षा अभियानों में नौसेना की क्षमता बढ़ेगी।
इसी साल नौसेना में शामिल हुए थे तीन स्वदेशी प्लेटफॉर्म
इससे पहले 21 जून 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में तीन स्वदेशी नौसैनिक प्लेटफॉर्म- INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय- को भारतीय नौसेना में कमीशन किया था। इनमें दूनागिरी एक स्टील्थ फ्रिगेट, संशोधक सर्वेक्षण पोत और अग्रय पनडुब्बी रोधी युद्धक पोत है। इनका निर्माण GRSE ने किया था। आठ नए कॉर्वेट की मंजूरी को नौसेना के आधुनिकीकरण और देश में युद्धपोत निर्माण क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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