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Spain Train Accident: स्पेन में दो हाई-स्पीड ट्रेनों की टक्कर, 39 की मौत; कई घायल

Spain Train Accident: स्पेन के टोलेडो प्रांत में बुधवार, 28 अक्टूबर को दो हाई-स्पीड ट्रेनों की टक्कर हो गई। हादसे में कम से कम 39 लोगों की मौत होने की खबर कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दी गई है। वहीं, शुरुआती आधिकारिक रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 10 बताई गई थी और आशंका जताई गई थी कि यह आंकड़ा बढ़ सकता है। दुर्घटना के बाद मौके पर आपातकालीन चिकित्सा दल, पुलिस और बचावकर्मी तैनात किए गए हैं।
सुबह करीब 9 बजे हुआ हादसा
स्पेनिश मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दुर्घटना स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9 बजे टोलेडो प्रांत में उर्दा और आसपास के कस्बों के नजदीक हुई। हादसे में सरकारी रेल कंपनी Renfe की AVE हाई-स्पीड ट्रेन और निजी कंपनी Iryo की ट्रेन शामिल थीं।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, एक ट्रेन दूसरी ट्रेन के पीछे से टकराई। टक्कर के बाद Iryo ट्रेन के दो डिब्बे पटरी से उतरकर ढलान पर जा गिरे। घटनास्थल से क्षतिग्रस्त डिब्बों और मलबे की तस्वीरें सामने आई हैं।
मैड्रिड-अंदालूसिया रेल लाइन बंद
हादसे के बाद मैड्रिड को दक्षिणी अंदालूसिया क्षेत्र से जोड़ने वाली हाई-स्पीड रेल लाइन पर यातायात रोक दिया गया। इससे मैड्रिड, सेविला और अन्य दक्षिणी शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रेल ऑपरेटरों ने प्रभावित यात्रियों को यात्रा से पहले ट्रेन की स्थिति जांचने की सलाह दी है। कुछ सेवाओं को रद्द किया गया है और यात्रियों के टिकट बदलने या रद्द करने की व्यवस्था भी की गई है।
राहत और बचाव कार्य जारी
दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, अग्निशमन दल, चिकित्सा कर्मचारी और आपातकालीन सेवाएं घटनास्थल पर पहुंचीं। घायलों को प्राथमिक उपचार देने और अस्पताल पहुंचाने के लिए चिकित्सा सहायता की व्यवस्था की गई।
उर्दा शहर के मेयर मैनुअल गालान के मुताबिक, आपातकालीन सेवाओं ने घायलों और प्रभावित यात्रियों की सहायता के लिए स्थानीय प्रशासन से एक स्पोर्ट्स हॉल तैयार रखने को कहा था। हादसे में प्रभावित लोगों की संख्या और उनकी स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
स्पेन के प्रधानमंत्री ने जताया दुख
स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने हादसे पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि वह परिवहन मंत्री और कास्तिया-ला मांचा क्षेत्र के प्रमुख के लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने प्रभावित लोगों और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा बताया कि आपातकालीन टीमें उनकी सहायता के लिए काम कर रही हैं।
हादसे की वजह की जांच
फिलहाल दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। शुरुआती रिपोर्टों में संकेत दिया गया है कि एक ट्रेन दूसरी के पीछे से टकराई थी। जांच में रेल सिग्नलिंग व्यवस्था, ट्रैक पर परिचालन और ट्रेन को आगे बढ़ाने से जुड़े फैसलों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
इस साल जनवरी में भी हुआ था बड़ा रेल हादसा
स्पेन में जनवरी 2026 में भी अंदालूसिया क्षेत्र के अदामुज के पास दो ट्रेनों की दुर्घटना हुई थी। उस हादसे में 46 लोगों की मौत हुई थी। अक्टूबर की इस दुर्घटना के बाद स्पेन की हाई-स्पीड रेल व्यवस्था की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं।
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UAE ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर को दिया बड़ा सम्मान, राष्ट्रपति ने गले लगाकर सराहा

अबू धाबी: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर को बहादुरी के लिए सम्मानित किया है। UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उन्हें ‘ऑर्डर ऑफ जायद II – फर्स्ट क्लास’ से नवाजा। फ्लाईदुबई फ्लाइट के अन्य क्रू सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में UAE के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम भी मौजूद रहे। दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद अल मकतूम ने क्रू की जिम्मेदारी और साहस की सराहना की।
क्राउन प्रिंस ने की कैप्टन स्मित मच्छर की सराहना
दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद अल मकतूम ने कैप्टन मच्छर की बहादुरी और जिम्मेदारी की प्रशंसा की। UAE नेतृत्व ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में क्रू ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। कैप्टन मच्छर हमले में घायल हुए थे और उनका इलाज UAE में किया गया। इससे पहले भी क्राउन प्रिंस अस्पताल में उनसे मिलने पहुंचे थे और उनके साहस की सराहना की थी।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 30 सितंबर 2026 को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई थी। विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था। UAE के अभियोजकों के मुताबिक, उड़ान के दौरान को-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन मच्छर पर इमरजेंसी कुल्हाड़ी से हमला किया और विमान पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की।
हमले में कैप्टन मच्छर के सिर और हाथ में गंभीर चोटें आईं। इसके बावजूद उन्होंने मदद के लिए प्रयास जारी रखे और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। इसके बाद विमान में मौजूद एक अन्य पायलट, क्रू सदस्यों और यात्रियों ने हस्तक्षेप कर हमलावर को काबू किया।
विमान 17 हजार फीट नीचे आया, सऊदी अरब में इमरजेंसी लैंडिंग
हमले के दौरान विमान तेजी से नीचे आया। रिपोर्टों के मुताबिक, विमान ने कुछ ही समय में लगभग 14,000 से 17,000 फीट की ऊंचाई खो दी। अन्य पायलटों ने विमान का नियंत्रण संभाला और उसका मार्ग बदलकर सऊदी अरब के ताबुक शहर में सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई।
विमान में सवार यात्रियों और क्रू सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस घटना में कैप्टन मच्छर की भूमिका और क्रू तथा यात्रियों के सहयोग को विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम माना गया।
जांच में सामने आई हमले की साजिश
UAE की सरकारी समाचार एजेंसी WAM के अनुसार, UAE के अटॉर्नी जनरल ने 9 अक्टूबर को बताया था कि जांच में को-पायलट द्वारा विमान पर कब्जा करने और तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट के यात्री टर्मिनल को निशाना बनाने की कथित योजना सामने आई है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ में अपनी योजना स्वीकार की। हालांकि, मामले से जुड़े अन्य संभावित पहलुओं की जांच जारी रहने की बात भी कही गई थी।
‘ऑर्डर ऑफ जायद II’ क्यों है खास?
‘ऑर्डर ऑफ जायद II – फर्स्ट क्लास’ UAE के उच्च नागरिक सम्मानों में शामिल है। कैप्टन स्मित मच्छर को यह सम्मान यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में उनके साहस, पेशेवर जिम्मेदारी और योगदान के लिए दिया गया। कैप्टन मच्छर को मिला यह सम्मान विमानन क्षेत्र में संकट के समय सतर्कता, साहस और टीमवर्क के महत्व को भी रेखांकित करता है।
हमले के आरोपी का नाम हमाम अल-हमामी
कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला करने वाले को-पायलट की पहचान हमाम अल-हमामी के रूप में हुई है। वह ओमान का रहने वाला है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच में उसके अलकायदा की विचारधारा से प्रभावित होने के सबूत मिले हैं। पूछताछ में अल-हमामी ने बताया कि वह विमान को इजराइल में क्रैश कराना चाहता था।
हमले से पहले भी उसके रवैये पर सवाल उठे थे। 2024 में उसे कट्टरपंथी सोच के कारण ओमान की नेशनल एयरलाइन की पायलट ट्रेनिंग से हटा दिया गया था। बाद में उसे एयरलाइन में दूसरी जिम्मेदारी दी गई। करीब 8 महीने पहले वह फ्लाईदुबई से जुड़ा था।
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Air Pollution: दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में लाहौर टॉप पर पहुंचा, भारत के 3 शहर भी टॉप-10 में

IQAir: पाकिस्तान के लाहौर में वायु प्रदूषण गंभीर चिंता का विषय बन गया है। एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म IQAir की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 410 तक पहुंच गया। इस स्तर पर प्रदूषित हवा स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। रिपोर्ट में भारत के कोलकाता, नई दिल्ली और मुंबई का नाम भी दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल बताया गया है।
AQI 410 का क्या मतलब है?
एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI हवा में मौजूद प्रदूषकों के स्तर और उनसे होने वाले संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को समझने का एक पैमाना है। AQI का मान जितना अधिक होता है, हवा की गुणवत्ता उतनी ही खराब मानी जाती है।
IQAir के अमेरिकी AQI पैमाने के अनुसार, 300 से अधिक की रीडिंग ‘खतरनाक’ श्रेणी में आती है। ऐसे हालात में स्वस्थ लोगों को भी परेशानी हो सकती है, जबकि बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए जोखिम अधिक रहता है।
WHO की तय सीमा से 45.2 गुना अधिक PM2.5
रिपोर्ट के मुताबिक, लाहौर में PM2.5 प्रदूषकों की सांद्रता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के वार्षिक वायु गुणवत्ता दिशानिर्देश में निर्धारित सीमा से 45.2 गुना अधिक दर्ज की गई। PM2.5 हवा में मौजूद बेहद महीन कण होते हैं, जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है। अपने छोटे आकार के कारण ये कण फेफड़ों की गहराई तक पहुंच सकते हैं और कुछ परिस्थितियों में रक्तप्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं। इनके लंबे समय तक संपर्क में रहने से सांस संबंधी बीमारियों, हृदय संबंधी समस्याओं और अन्य गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों की आशंका बढ़ सकती है।
भारत के तीन शहर भी सूची में शामिल
रिपोर्ट में दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की शीर्ष 10 सूची में भारत के तीन शहरों का उल्लेख किया गया है।
कोलकाता: चौथा स्थान
नई दिल्ली: पांचवां स्थान
मुंबई: छठा स्थान
हालांकि, IQAir की लाइव रैंकिंग में शहरों की स्थिति और AQI का स्तर समय के साथ बदलता रहता है। इसलिए इन स्थानों को संबंधित रिपोर्ट के समय के आंकड़ों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
अक्टूबर से फरवरी तक बढ़ती है स्मॉग की समस्या
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हर साल, खासकर अक्टूबर से फरवरी के बीच, स्मॉग की समस्या गंभीर हो जाती है। लाहौर सहित कई इलाकों में धुएं और कोहरे के मिश्रण से दृश्यता प्रभावित होती है और लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
हाल के वर्षों में वायु प्रदूषण इस क्षेत्र के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी बड़ी चुनौती बना हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ और वायु गुणवत्ता से जुड़े अधिकारी लोगों को गंभीर स्मॉग के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह देते रहे हैं।
प्रदूषित हवा से बचने के लिए क्या करें?
IQAir की सलाह के मुताबिक, वायु प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर लोगों को कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए।
- बाहर दौड़ने, व्यायाम करने और लंबे समय तक शारीरिक गतिविधियों से बचें।
- प्रदूषित हवा का प्रवेश कम करने के लिए खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें, जब तक घर के अंदर की हवा बाहर से अधिक प्रदूषित न हो।
- जरूरी होने पर बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला, कणों को छानने में सक्षम मास्क पहनें।
- घर के अंदर उपयुक्त एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
- बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने दें।
- सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या अन्य गंभीर लक्षण महसूस होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
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फ्रांस: महंगाई के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन, गाड़ियों में आगजनी; 1,200 गिरफ्तार

पेरिस: फ्रांस में बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों के विरोध में प्रदर्शन तेज हो गए हैं। शनिवार को देशभर में बड़े पैमाने पर लोग सड़कों पर उतरे। राजधानी पेरिस में राष्ट्रपति भवन एलिजे पैलेस के पास प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों में आग लगा दी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 1,200 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
लिमोज शहर में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने टाउन हॉल में आग लगा दी। बताया गया है कि आग से 143 साल पुरानी इमारत को भारी नुकसान पहुंचा। देश के कई हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बना रहा।
चार प्रमुख मांगों को लेकर प्रदर्शन
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें हैं:
- वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी
- महंगाई पर नियंत्रण
- सरकारी सेवाओं में सुधार
स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करना और जर्जर इमारतों की मरम्मत
स्कूलों से शुरू हुआ आंदोलन देशभर में फैला
रिपोर्ट के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के लाइसी सेंट-एक्सूपेरी स्कूल के छात्रों के विरोध से हुई थी। छात्रों ने शिक्षकों और संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाया। 29 सितंबर को प्रशासन की ओर से अतिरिक्त स्टाफ भेजे जाने के बाद वहां की हड़ताल खत्म हो गई, लेकिन तब तक दूसरे स्कूलों में भी विरोध शुरू हो चुका था।
इसके बाद विश्वविद्यालयों के छात्र, अभिभावक, शिक्षक और मजदूर संगठन भी आंदोलन से जुड़ गए। 5 अक्टूबर को लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान पुलिस के एक ग्रेनेड से 15 वर्षीय लड़का गंभीर रूप से घायल हो गया। रिपोर्ट के मुताबिक, उसका एक हाथ काटना पड़ा। इस घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी बढ़ गई।
दुकानों में लूटपाट और आगजनी के आरोप
प्रदर्शन के दौरान कई शहरों में दुकानों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाएं सामने आने की बात कही गई है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ समूहों ने नकाब पहनकर और दस्ताने लगाकर दुकानों को निशाना बनाया। आरोप है कि कुछ जगहों पर सुरक्षा कैमरों के कनेक्शन काटने के बाद दुकानों में घुसकर सामान लूटा गया।
मैक्रों ने दी कार्रवाई की चेतावनी
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सरकारी इमारतों और कारोबारों पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि तोड़फोड़ और लूटपाट में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाएगा और कानून के तहत सजा दी जाएगी।
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हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन का दावा- ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को अमेरिका से मिल रही फंडिंग

Mary Millben: हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को अमेरिका से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी कुछ अमेरिकी डोनर्स अभिजीत दीपके को पैसा भेज रहे हैं। मिलबेन के मुताबिक, इस रकम का इस्तेमाल भारत में अशांति फैलाने और सरकार के कामकाज में बाधा डालने के लिए किया जा रहा है।
मिलबेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भारत के युवाओं से इस मुद्दे पर आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने लिखा, ‘यह चुप रहने का समय नहीं है।’
अमेरिकी डोनर्स पर लगाया आरोप
मिलबेन ने दावा किया कि कुछ अमेरिकी डोनर्स दुनियाभर के दक्षिणपंथी नेताओं को निशाना बनाने के लिए एक तय तरीका अपनाते हैं। उनके आरोप के मुताबिक, ऐसे लोग किसी देश में अमेरिका से पढ़े व्यक्ति की पहचान करते हैं, उसे कट्टर बनाते हैं और फिर अपने देश लौटने के बाद अराजकता फैलाने के लिए फंडिंग देते हैं।
पीएम मोदी के समर्थन में क्या बोलीं मिलबेन?
मैरी मिलबेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर का बचाव करते हुए कहा कि वह करीब 25 साल से सरकार में रहकर लोगों की सेवा कर रहे हैं और 12 साल से प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने दावा किया कि मोदी अमेरिका से आने वाली ऐसी ताकतों के सामने नहीं झुकेंगे। मिलबेन के बयान के बाद इस कथित फंडिंग और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े दावों पर चर्चा शुरू हो गई है।
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अजरबैजान के स्कूलों में हिजाब पर विवाद, छात्राओं ने किया कक्षाओं का बहिष्कार

अजरबैजान: स्कूलों के ड्रेस कोड को लेकर अजरबैजान में विवाद शुरू हो गया है। सरकार के नए नियमों के बाद हिजाब पहनकर स्कूल पहुंचीं कुछ छात्राओं और शिक्षकों को कक्षाओं में जाने से रोकने की खबरें सामने आई हैं। इसके विरोध में छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। विवाद का असर पड़ोसी देश तुर्किये तक भी पहुंच गया है।
अजरबैजान की करीब 96% आबादी मुस्लिम है। इसके बावजूद देश का संविधान उसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करता है। ऐसे में स्कूलों में धार्मिक पहनावे को लेकर नए नियमों ने धार्मिक स्वतंत्रता और समान ड्रेस कोड की बहस को तेज कर दिया है।
हिजाब का नाम लेकर रोक नहीं, ड्रेस कोड में बदलाव
सरकार का कहना है कि स्कूलों में सभी विद्यार्थियों के लिए एक जैसा ड्रेस कोड होना चाहिए। इसी उद्देश्य से यूनिफॉर्म से जुड़े नियम बदले गए हैं। नए नियमों में हिजाब का सीधे नाम लेकर प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कही गई है, लेकिन सरकार जिन कपड़ों को धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था के खिलाफ मानती है, उन पर रोक लगाई गई है।
सरकार के अनुसार, देश की संस्कृति और राष्ट्रीय परंपराओं से जुड़े कपड़े विशेष अवसरों पर पहने जा सकते हैं। इसके लिए स्कूल की संबंधित समिति से मंजूरी लेना जरूरी होगा।
कम से कम दो स्कूलों में कक्षाओं का बहिष्कार
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, नए नियमों के विरोध में कम से कम दो स्कूलों में विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो में स्कूल में प्रवेश से रोके जाने के बाद छात्राएं अपनी शिक्षिकाओं से गले मिलती और रोती दिखाई दे रही हैं।
96% मुस्लिम आबादी, फिर भी धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था
अजरबैजान में अधिकांश आबादी मुस्लिम है। इनमें शिया मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, जबकि सुन्नी मुस्लिम भी बड़ी संख्या में रहते हैं। हालांकि, देश की संवैधानिक व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष है और नागरिकों को धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता प्राप्त है।अब विवाद इस बात पर केंद्रित है कि स्कूलों में समान ड्रेस कोड लागू करने और विद्यार्थियों की धार्मिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। सरकार समान नियमों पर जोर दे रही है, जबकि विरोध करने वालों का कहना है कि हिजाब पहनना व्यक्तिगत पसंद और धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला है।
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