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प्रधानमंत्री मोदी ने सोतीगंज का नाम क्या लिया, कार्रवाई हुई और तेज, 25 पर एक साथ लगेगा गैंगस्टर एक्ट

मेरठ: प्रधानमंत्री मोदी ने गंगा एक्सप्रेस वे के शिलान्यास के मौके पर शनिवार को मेरठ के सोतीगंज का जिक्र करते हुए चोरी का वाहन खरीदने वाले कबाड़ियों पर योगी सरकार की कार्रवाई की तारीफ की थी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई और भी तेज कर दी है। पुलिस अब 25 वाहन चोरों और कबाड़ियों पर एक साथ गैंगस्टर की तैयारी कर चुकी है। इनकी फाइल तैयार हो चुकी है और जल्द गैंगस्टर लगा दी जाएगी। मेरठ एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने सोतीगंज के वाहन चोरों और कबाड़ियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए पांच माह पहले अभियान शुरू किया था। वाहनों चोरों और कबाड़ियों की धरपकड़, इनकी प्रॉपर्टी की जांच, गैंगस्टर और हिस्ट्रीशीट की कार्रवाई समेत पुराने चोरी के मामलों में इंजन रिकवर करते हुए आरोपी बनाने का काम शुरू किया गया। जिसके चलते चोरी की गाड़ियों के कटने के लिए मशहूर बाजार अब अंतिम सांसें गिन रहा है।
मेरठ के सोतीगंज का कबाड़ मार्केट अब बंद हो चुका है। चोरी के वाहन और पार्ट्स खरीदने में 100 कबाड़ियों के नाम सामने आए हैं। इन्हें हाल ही में नोटिस दिए और इनके खिलाफ जांच की जा रही है। इनकी प्रॉपर्टी से लेकर तमाम जानकारी पुलिस जुटा रही है। पुलिस ने हाजी गल्ला, इकबाल कबाड़ी, मन्नू कबाड़ी और जीशान पव्वा के खिलाफ गैंगस्टर में कार्रवाई की थी। इन सभी आरोपियों की करीब 40 करोड़ की प्रॉपर्टी को कुर्क किया था। अभी भी इन आरोपियों की बेनामी प्रॉपर्टी की तलाश जारी है।
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Chitrakoot Flood: चित्रकूट में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM योगी: 800 परिवारों को राहत किट बांटी; बोले- जिनके घर बहे, उन्हें मिलेगा पक्का मकान

चित्रकूट: उत्तर प्रदेश में बाढ़ के बिगड़ते हालात के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को चित्रकूट पहुंचे। उन्होंने मंदाकिनी नदी के उफान से प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और रामघाट पहुंचकर बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। इसके बाद रैन बसेरे में बनाए गए राहत शिविर में पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
मुख्यमंत्री ने रामायण मेला परिसर में करीब 800 प्रभावित परिवारों को राहत किट वितरित की। बाढ़ में आश्रयहीन हुए परिवारों को राहत राशि और आवास के लिए भूमि आवंटन प्रमाणपत्र भी दिए गए।
रामघाट में नुकसान देखा, अधिकारियों को दिए निर्देश
योगी आदित्यनाथ ने रामघाट क्षेत्र में बाढ़ से हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने घाट, दुकानों, मकानों और मठ-मंदिरों की स्थिति देखी। इस दौरान बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त तुलसीदास की प्रतिमा को भी देखा और उसके संरक्षण व जीर्णोद्धार के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली।
मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ से चित्रकूट के 36 गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई घरों और फसलों को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है।
मंच पर फोटो खिंचवाने पहुंचे नेताओं को पीछे हटाया
राहत सामग्री वितरण के दौरान मंच पर मौजूद कुछ नेता मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचवाने की कोशिश करने लगे। इससे योगी नाराज हो गए। उन्होंने इशारे से नेताओं को पीछे जाने को कहा, ताकि राहत लेने आए लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
रामघाट निरीक्षण के दौरान जब सुरक्षा में तैनात जवान लोगों को पीछे हटाने लगा तो मुख्यमंत्री ने उसे भी रोकते हुए कहा कि लोगों को अपनी बात कहने दिया जाए। मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं सीधे सुनने पर जोर दिया।
‘जिनके घर बह गए, उन्हें मिलेगा मकान’
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि आपदा की इस घड़ी में सरकार उनके साथ है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त या बह गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मकान उपलब्ध कराया जाएगा। जिन जरूरतमंद परिवारों के पास रहने के लिए जमीन नहीं है, उन्हें आवासीय पट्टा देने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही। फसल और अन्य नुकसान का सर्वे कराकर पात्र लोगों को नियमानुसार सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं।
यूपी के दो दर्जन से ज्यादा जिले बाढ़ से प्रभावित
भारी बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर से उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। आकाशवाणी की 6 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 24 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इससे पहले 4 सितंबर को 26 जिलों के प्रभावित होने की सूचना थी।
वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या और अन्य जिलों में भी बाढ़ का असर देखा जा रहा है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण वाराणसी के कई घाटों और निचले इलाकों में पानी पहुंचा है। प्रयागराज में भी घाट और शवदाह स्थलों पर बाढ़ का असर पड़ा है।
वाराणसी के बाद चित्रकूट पहुंचे योगी
इससे एक दिन पहले शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया था और राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने बाढ़ में डूबी फसलों का सर्वे कर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के निर्देश भी दिए हैं।
चित्रकूट दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशासन से राहत-बचाव कार्यों की जानकारी ली और प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए। फिलहाल प्रशासन का फोकस प्रभावित परिवारों को सुरक्षित रखने और राहत सामग्री पहुंचाने पर है।
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UP News: सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, कोर्ट का आदेश बरकरार रहने के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई; सपा सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। प्रशासन के मुताबिक सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा मानते हुए हटाने का आदेश दिया था। मस्जिद पक्ष की अपील जिला जज की अदालत से भी खारिज होने के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की।
ध्वस्तीकरण के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के पांचों गेट बंद कर दिए गए और बाहरी लोगों की आवाजाही रोक दी गई। मौके पर पुलिस के साथ आरएएफ और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात रहा। कार्रवाई के बाद इलाके में राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ गई है।
2 सितंबर को जिला जज ने खारिज की थी अपील
मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत शिकायत के बाद हुई थी। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम के तहत मामला चला। 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा निर्माण मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था। आदेश में करीब 6.41 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की गई थी।
मस्जिद पक्ष ने इस आदेश को जिला जज की अदालत में चुनौती दी। कई तारीखों पर सुनवाई के बाद 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
प्रशासन बोला- कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कार्रवाई
सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह के मुताबिक नोटिस और अपील समेत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण किया गया। प्रशासन ने संवेदनशील स्थिति को देखते हुए पहले से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। त्योहारों के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पीएसी और आरएएफ की तैनाती की गई थी। मिश्रित आबादी वाले इलाकों में फुट पेट्रोलिंग और फ्लैग मार्च भी किया गया। अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सपा सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बीच कैराना से सपा सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट किए जाने की खबर सामने आई। वह सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया।
इमरान मसूद भी बोले- कानूनी लड़ाई आगे ले जाएंगे
मामले पर सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत विपक्षी नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। ध्वस्तीकरण के बाद मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक मसूद ने इस मामले को आगे अदालत में चुनौती देने की बात कही है।
मायावती ने कार्रवाई रोकने की मांग की
बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी सहारनपुर की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को अवैध बताकर गिराए जाने के कथित सरकारी अभियान पर सवाल उठाते हुए ऐसी कार्रवाई रोकने और विवादों का समाधान निकालने की मांग की है। मामले को लेकर प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों पर रोक लगाने के लिए निगरानी बढ़ा दी है।
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UP News: मायावती ने आकाश आनंद को फिर हटाया, राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी छीनी, बोलीं- अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को एक बार फिर पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी से हटा दिया है। गुरुवार को लखनऊ में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मायावती ने स्पष्ट किया कि आकाश आनंद फिलहाल पार्टी में काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
मायावती ने इसकी वजह आकाश का अभी राजनीतिक रूप से पूरी तरह परिपक्व नहीं होना बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक हैं और ऐसे समय में पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को देना उचित नहीं होगा, जिसे अभी राजनीतिक परिस्थितियों और विरोधियों की रणनीतियों से निपटने के लिए और अनुभव की जरूरत है।
3 साल में तीसरी बार बदली आकाश की भूमिका
आकाश आनंद के राजनीतिक सफर में यह तीसरा मौका है, जब मायावती ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी से हटाया है। इससे पहले भी उन्हें पार्टी की अहम जिम्मेदारियों से हटाया गया था और बाद में दोबारा संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई थी। अगस्त 2025 में उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी मिली थी। इस बार मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाकर फिलहाल पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर काम करने की बात कही है।
मायावती बोलीं- कांशीराम के विचारों पर कायम हूं
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मायावती ने परिवारवाद और पार्टी में रिश्तेदारों की भूमिका को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि कांशीराम परिवार और रिश्तेदारों को पार्टी के काम में सहयोग करने की अनुमति देते थे, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने या सरकार बनने पर पद देने के पक्ष में नहीं थे।
मायावती ने कहा कि वह भी इसी विचार पर कायम हैं। उनका कहना था कि बसपा का लक्ष्य शोषित और वंचित समाज को सत्ता में भागीदारी दिलाना है और इस उद्देश्य में उनके लिए कोई अपना या पराया नहीं है।
आकाश बैठक में नहीं पहुंचे, छोटे भाई ईशान की पहली मौजूदगी
लखनऊ में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में देशभर से करीब 350 पदाधिकारी पहुंचे। खास बात यह रही कि आकाश आनंद बैठक में नजर नहीं आए, जबकि उनके छोटे भाई ईशान आनंद पहली बार पार्टी के इस आधिकारिक मंच पर दिखाई दिए। ईशान बसपा का पटका पहनकर अपने पिता आनंद कुमार के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे।
मायावती के बैठक के लिए बैठने तक ईशान अपने पिता के साथ खड़े रहे। इससे पहले 2024 में मायावती के जन्मदिन के मौके पर भी ईशान अपने भाई आकाश के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे थे।
युकेश सिंह भी बैठक में पहुंचे
बसपा के दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे युकेश सिंह भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल हुए। मायावती ने कुछ दिन पहले ही युकेश को पार्टी के राजनीतिक मंच पर आगे बढ़ाया था। इसके बाद उनकी भूमिका को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा तेज है।
5 राज्यों के चुनाव की रणनीति पर मंथन
बैठक में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड और पंजाब समेत पांच राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए संगठन को मजबूत करने और पार्टी की चुनावी रणनीति पर पदाधिकारियों के साथ मंथन किया गया।
मायावती ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले चुनावों में बसपा अपने दम पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी। पार्टी का फोकस संगठन को मजबूत करने और अपने वोट बैंक को दोबारा सक्रिय करने पर है।
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Ayodhya: राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, ऑपरेशन सिंदूर में संभाली थी वेस्टर्न एयर कमांड की कमान

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के प्रशासन को नए ढांचे में ले जाने की दिशा में बड़ा फैसला किया है। ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। वह उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले हैं।
बुधवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में तीन नए ट्रस्टियों के नामों पर भी मुहर लगी। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। निर्मला यादव की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट में पहली बार किसी महिला को जगह मिली है।
पूर्व एयर मार्शल को मिली मंदिर के प्रशासन की कमान
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारी रहे हैं। उन्होंने पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी संभाली है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी वे इस सैन्य अभियान से जुड़े अनुभवों को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखते रहे हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी ने लंबी प्रक्रिया के बाद तीन नामों का पैनल तैयार किया था। इस पद के लिए हजारों आवेदन आए थे और कई चरणों की स्क्रीनिंग के बाद उम्मीदवारों के इंटरव्यू किए गए थे।
तीन नए ट्रस्टी कौन हैं?
महेश भागचंदका: दिल्ली के रहने वाले महेश भागचंदका को ट्रस्ट में शामिल किया गया है। वे विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के रिश्तेदार बताए जाते हैं। 2020 में राम मंदिर के भूमि पूजन और 2024 की प्राण-प्रतिष्ठा के धार्मिक अनुष्ठानों में भी उनकी भूमिका रही थी।
मदन मोहन पांडेय: अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय को भी ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया है। वह लंबे समय से राम जन्मभूमि से जुड़े कानूनी मामलों से जुड़े रहे हैं।
निर्मला यादव: शिकोहाबाद की निर्मला यादव को ट्रस्टी बनाया गया है। उनकी नियुक्ति को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि ट्रस्ट के गठन के बाद पहली बार किसी महिला को इसमें शामिल किया गया है।
चढ़ावा चोरी के बाद ट्रस्ट में लगातार हो रहे बदलाव
राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट में प्रशासनिक बदलाव तेज हुए हैं। इसी क्रम में जुलाई में तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए थे। इसके बाद रिटायर्ड IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी।चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय निगरानी को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
पहली बार CEO की नियुक्ति क्यों अहम?
राम मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने की संभावना है। ऐसे में दर्शन व्यवस्था, प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, कर्मचारियों की व्यवस्था, सुरक्षा और श्रद्धालु सुविधाओं जैसे कामों के लिए एक पेशेवर प्रशासनिक ढांचे की जरूरत महसूस की जा रही थी।
CEO की नियुक्ति इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब ट्रस्ट के धार्मिक और नीतिगत कामों के साथ रोजमर्रा के प्रशासनिक संचालन के लिए एक समर्पित कार्यकारी व्यवस्था होगी।
जुलाई में बदला था ट्रस्ट का प्रशासनिक ढांचा
चढ़ावे से जुड़े मामले के बाद हुई बैठक में ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए थे। कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया था। इसके बाद CEO की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने प्रक्रिया आगे बढ़ाई। अब CEO और तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव पूरा होता दिखाई दे रहा है।
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UP में आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय अब 20 हजार तक, योगी सरकार ने बनाया सेवा निगम, 3.5 लाख कर्मियों को फायदा; 50 लाख तक बीमा कवर

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागों में काम करने वाले आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए योगी सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को यूपी आउटसोर्स सेवा निगम की वेबसाइट और लोगो का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने आउटसोर्स कर्मचारियों को चेक भी वितरित किए।
नए निगम के शुरू होने के साथ प्रदेश के करीब 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों के मानदेय में 7 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है। जिन कर्मचारियों को पहले करीब 13 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते थे, उनका मानदेय अब 20 हजार रुपए तक किया गया है।
सरकार ने कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का भी प्रावधान किया है। अलग-अलग वेतन श्रेणियों के आधार पर उन्हें 20 से 50 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा। आकस्मिक दवा के लिए 5 लाख और एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान भी बताया गया है।
मनमाने तरीके से नौकरी से नहीं निकाल सकेगी एजेंसी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब कोई आउटसोर्स एजेंसी कर्मचारी को अपनी मर्जी से नौकरी से नहीं निकाल सकेगी। किसी कर्मचारी को हटाने से पहले एजेंसी को सरकार को इसकी जानकारी देनी होगी। मामले की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य आउटसोर्स कर्मचारियों को बिचौलियों और अव्यवस्थित व्यवस्था से बाहर निकालकर सरकार, एजेंसी और कर्मचारी के बीच पारदर्शी संबंध स्थापित करना है।
योगी बोले- पहले कर्मचारी को पता ही नहीं होता था कितना मानदेय मिल रहा
मुख्यमंत्री ने पुरानी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि कई बार कर्मचारी को यह तक पता नहीं होता था कि उसके नाम पर कितना भुगतान किया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कागजों में 9 हजार रुपए मानदेय दर्ज होने के बावजूद कर्मचारी को केवल 6 हजार रुपए मिलते थे। बाकी राशि कहां जाती थी, इसका जवाब नहीं मिलता था। योगी ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि कर्मचारी को उसके काम के अनुरूप पूरा मानदेय मिले और भुगतान की व्यवस्था पारदर्शी हो।
सरकार-एजेंसी-कर्मचारी के बीच बनेगा डिजिटल सिस्टम
नई व्यवस्था में सरकारी विभाग, आउटसोर्स एजेंसी और कर्मचारी तकनीक आधारित डिजिटल सिस्टम से जुड़ेंगे। विभागों में मैनपावर की जरूरत का आकलन किया जाएगा और उसी के आधार पर कर्मचारियों की उपलब्धता और नियुक्ति की योजना बनाई जाएगी।
नियुक्तियों में सरकार की आरक्षण नीति लागू होगी। कर्मचारियों के रिकॉर्ड, भुगतान और काम की निगरानी के लिए डिजिटल मैनेजमेंट और मॉनिटरिंग की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
PF और इलाज की सुविधा भी मिलेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों के खाते में भविष्य निधि (PF) का पैसा भी जमा होगा। इससे नौकरी पूरी होने या सेवानिवृत्ति के बाद उनके पास भविष्य के लिए वित्तीय सुरक्षा रहेगी। उन्होंने कहा कि ESI के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल पाने की स्थिति में कर्मचारियों को आयुष्मान योजना से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
दुर्घटना में 20 से 50 लाख तक बीमा
सरकार ने स्टेट बैंक के साथ एमओयू किया है। इसके तहत अलग-अलग वेतन वर्ग के आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए 20 लाख से 50 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा कवर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा अग्निकांड की स्थिति में 10 लाख रुपए तक सहायता, आकस्मिक दवा के लिए 5 लाख रुपए तक, एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपए तक सहायता, बेटे की शिक्षा के लिए 5 लाख रुपए तक, बेटी की शिक्षा के लिए 8 लाख रुपए तक, बेटी की शादी के लिए भी सहायता का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी कर्मचारी के साथ बड़ी दुर्घटना होने पर उसका परिवार अकेला नहीं रहेगा, बल्कि सरकार की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था उसके साथ खड़ी होगी।
20 लाख लोगों को सुरक्षा कवर देने का लक्ष्य
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस व्यवस्था का लाभ केवल कर्मचारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसके परिवार को भी सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य इस निगम के माध्यम से 20 लाख लोगों को सुरक्षा कवर उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स वर्कफोर्स को संगठित करने के साथ उनकी सेवा शर्तों, भुगतान और सामाजिक सुरक्षा को व्यवस्थित किया जाएगा।
प्रदेश में 2.25 लाख पुलिस भर्तियां हुईं- CM योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में अब तक पुलिस विभाग में करीब 2.25 लाख भर्तियां की गई हैं। बेहतर कानून-व्यवस्था के कारण निवेश का माहौल बना और सरकार के पास करीब 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव आए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को स्किल, इनोवेशन और तकनीक से जोड़ने पर भी काम कर रही है। AI और रोबोटिक्स जैसे नए क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार किया जा रहा है।
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