Connect with us

ख़बर दुनिया

इंडोनेशिया में 243 लोगों से भरा जहाज पलटा, 102 रेस्क्यू, 1 की मौत; 140 अब भी लापता

Published

on

इंडोनेशिया जहाज हादसा, Virgo Transport 8, Indonesia ship accident, Java Sea ship accident, Indonesia ferry accident, जावा सागर जहाज हादसा, 140 missing Indonesia ship

जकार्ता: इंडोनेशिया में 243 लोगों को लेकर जा रहा यात्री जहाज Virgo Transport 8 रविवार को जावा सागर में खराब मौसम के दौरान पलट गया। जहाज सुराबाया से बोर्नियो द्वीप के बंजारमासिन जा रहा था। संपर्क टूटने के बाद शुरू किए गए सर्च ऑपरेशन में अब तक 102 लोगों को बचाया गया है, जबकि एक यात्री का शव बरामद हुआ है। करीब 140 लोग अब भी लापता हैं।

करीब 3 मीटर ऊंची लहरों के बीच पलटा जहाज

अधिकारियों के मुताबिक, जहाज शनिवार को सुराबाया से रवाना हुआ था। रविवार तड़के करीब 2 बजे इसका संपर्क टूट गया। इससे पहले कप्तान ने समुद्र में तेज लहरों और खराब मौसम की सूचना देते हुए जहाज के एक तरफ झुकने की जानकारी दी थी। इसके बाद जहाज के पलटने की सूचना मिली।

मैनिफेस्ट के अनुसार जहाज में 213 यात्री और 30 क्रू सदस्य, यानी कुल 243 लोग सवार थे। हालांकि इंडोनेशिया में कई बार मैनिफेस्ट और वास्तविक यात्रियों की संख्या में अंतर सामने आता रहा है।

आखिरी लोकेशन बंजारमासिन से 148 किमी दूर

Advertisement

Virgo Transport 8 की आखिरी लोकेशन बंजारमासिन के एक पियर से करीब 148 किलोमीटर दूर जावा सागर में मिली। इसके बाद इंडोनेशियाई सर्च एंड रेस्क्यू एजेंसी ने कई जहाज और हेलिकॉप्टर को मौके की ओर भेजा। आसपास मौजूद अन्य जहाजों की मदद से लोगों को समुद्र से बाहर निकाला गया।

रेस्क्यू एजेंसी के मुताबिक, 102 लोग जीवित मिले, जबकि एक शव बरामद हुआ है। शेष करीब 140 लोगों की तलाश समुद्र में जारी है। खराब मौसम और समुद्री परिस्थितियां बचाव अभियान को चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।

इंडोनेशिया में समुद्री हादसे क्यों होते हैं?

इंडोनेशिया 17 हजार से ज्यादा द्वीपों वाला देश है। यहां अलग-अलग द्वीपों के बीच आवागमन के लिए फेरी और यात्री जहाज बेहद महत्वपूर्ण हैं। बड़ी संख्या में लोग रोजाना समुद्री परिवहन पर निर्भर रहते हैं। खराब मौसम, तेज हवाएं और ऊंची समुद्री लहरें इन जहाजों के लिए बड़ा खतरा बनती हैं। हाल के वर्षों में भी इंडोनेशिया में फेरी हादसे सामने आते रहे हैं। अगस्त 2026 में Mutiara Sentosa 2 में आग लगने से कई लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग लापता हुए थे। इन हादसों में मौसम के अलावा जहाजों की सुरक्षा व्यवस्था, संचालन और सुरक्षा नियमों के पालन की भी जांच होती है। Virgo Transport 8 हादसे की वास्तविक वजह भी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

Advertisement

ख़बर दुनिया

इजराइल ने हिजबुल्लाह की 2 किमी लंबी सुरंग उड़ाई, धमाके के दौरान 4.1 तीव्रता का भूकंपीय झटका दर्ज; नेतन्याहू बोले- मिशन पूरा हुआ

Published

on

इजराइल हिजबुल्लाह सुरंग, Israel Hezbollah tunnel, Lebanon tunnel blast, Ali al-Taher tunnel, Hezbollah Badr unit, Israel Lebanon conflict, 4.1 earthquake Lebanon

तेल अवीव/बेरूत:  इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के एक बड़े भूमिगत नेटवर्क को विस्फोट कर ध्वस्त कर दिया। इजराइली सेना के मुताबिक, अली अल-ताहेर पहाड़ी के नीचे करीब 2 किलोमीटर लंबी सुरंग प्रणाली थी, जिसमें हथियारों का बड़ा भंडार और हिजबुल्लाह की बद्र यूनिट का कमांड सेंटर मौजूद था। धमाके के दौरान अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने इलाके में 4.1 तीव्रता का भूकंपीय झटका दर्ज किया।

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि भूमिगत ढांचे को नष्ट करने के साथ दक्षिणी लेबनान में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्र की स्थापना का मिशन पूरा हो गया है।

सुरंग में रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन का भंडार

इजराइली सेना के अनुसार सुरंग परिसर में रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन समेत बड़ी मात्रा में हथियार रखे गए थे। यहां एंटी-टैंक हथियार, मशीनगन और विस्फोटक भी मिले।

सेना ने इसे हिजबुल्लाह की बद्र क्षेत्रीय यूनिट का प्रमुख भूमिगत केंद्र बताया है। परिसर में कमांड सेंटर, हथियार रखने की जगह और लंबे समय तक लड़ाकों के रहने के लिए सुविधाएं भी थीं।

Advertisement

दो दशक में तैयार हुआ था नेटवर्क

इजराइल का दावा है कि यह भूमिगत नेटवर्क करीब दो दशक में तैयार किया गया था और इसके निर्माण में ईरान की फंडिंग और योजना शामिल थी। इजराइली अधिकारियों के मुताबिक, यह ढांचा दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता का अहम हिस्सा था।

अली अल-ताहेर पहाड़ी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह इलाका दक्षिणी लेबनान में इजराइल की सीमा से करीब 15 किलोमीटर दूर है और आसपास के बड़े क्षेत्र पर नजर रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

एक हफ्ते पहले इजराइल ने इलाके पर नियंत्रण का दावा किया था

इजराइली सेना ने सितंबर की शुरुआत में दावा किया था कि उसने अली अल-ताहेर पहाड़ी पर हिजबुल्लाह के लड़ाकों को हटा दिया है और इलाके पर ऑपरेशनल कंट्रोल हासिल कर लिया है।

Advertisement

सेना के मुताबिक, कुछ हिजबुल्लाह लड़ाके सुरंगों से निकल गए, जबकि कुछ को सैन्य कार्रवाई में मारा गया। इसके बाद भूमिगत ढांचे को पूरी तरह नष्ट करने की कार्रवाई की गई। हालांकि, लेबनानी अधिकारियों और स्वतंत्र स्रोतों ने इजराइल के पूरे इलाके पर नियंत्रण के दावे पर अलग-अलग आकलन दिए हैं।

जून के सीजफायर के बावजूद बढ़ी हिंसा

इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच जून में अमेरिका की मध्यस्थता से संघर्ष विराम की व्यवस्था बनी थी, लेकिन दक्षिणी लेबनान में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। पिछले दिनों इलाके में इजराइली हवाई हमले और हिजबुल्लाह के ड्रोन हमलों के बीच संघर्ष फिर तेज हुआ है।

अली अल-ताहेर पहाड़ी को लेकर भी अमेरिका की मध्यस्थता में बातचीत हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ने पहाड़ी का नियंत्रण लेबनानी सेना को सौंपने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन इस पर सहमति नहीं बन सकी।

मार्च से अब तक 4,300 से ज्यादा मौतें

Advertisement

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में संघर्ष तेज होने के बाद से इजराइली हमलों में 4,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। हाल के दिनों में दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों पर हमलों के बाद तनाव और बढ़ा है।

इजराइल का कहना है कि उसके सैन्य अभियान का लक्ष्य हिजबुल्लाह के हथियारों और सैन्य ढांचे को नष्ट करना तथा उत्तरी इजराइल के खिलाफ हमलों को रोकने के लिए सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखना है। वहीं लेबनानी अधिकारियों ने लगातार हो रहे हमलों को संघर्ष विराम के उल्लंघन और क्षेत्रीय तनाव बढ़ाने वाला बताया है।

Continue Reading

ख़बर दुनिया

नेपाल बाढ़ में अब तक 1341 मौतें, 5 हजार लापता, DNA से हो रही शवों की पहचान

Published

on

Nepal Flood 2026, Nepal Flood Death Toll, नेपाल बाढ़, नेपाल बाढ़ में मौतें, नेपाल में 5000 लापता, Nepal Flood DNA Testing, Bhotekoshi Flood, Nepal Disaster

काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के 12वें दिन भी लापता लोगों की तलाश जारी है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 1,341 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 4,996 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान में अब तक 13,104 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

बाढ़ के बाद सबसे बड़ी चुनौतियों में मृतकों की पहचान करना भी शामिल है। कई शव पानी और कीचड़ में लंबे समय तक रहने के कारण क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कुछ मामलों में शवों के केवल हिस्से ही बरामद हुए हैं। ऐसे में नेपाल पुलिस परिजनों के DNA नमूने लेकर अज्ञात शवों और मानव अवशेषों की पहचान करने में जुटी है।

चितवन में सबसे ज्यादा 362 शव मिले

NDRRMA के मुताबिक, सबसे ज्यादा 362 शव चितवन जिले में बरामद हुए हैं। इसके अलावा नवलपरासी पश्चिम में 220, नवलपरासी पूर्व में 222, नुवाकोट में 195, रसुवा में 163, गोरखा में 74, धाड़िंग में 67 और तनहूं में 28 शव मिले हैं। अब तक केवल 98 शवों की पहचान कर परिजनों को सौंपा जा सका है।

अधिकारियों के मुताबिक कई शव बाढ़ के तेज बहाव में घटनास्थल से काफी दूर चले गए। पानी, मलबे और कीचड़ में लंबे समय तक रहने के कारण शवों की हालत खराब हो गई, जिससे सामान्य तरीके से पहचान करना मुश्किल हो रहा है।

Advertisement

लापता लोगों के परिजनों से लिए जा रहे DNA सैंपल

नेपाल पुलिस ने लापता लोगों के परिवारों से DNA नमूने लेना शुरू कर दिया है। इन नमूनों का मिलान बरामद अज्ञात शवों और मानव अवशेषों से किया जाएगा।

नेपाल में परिजन काठमांडू स्थित नेपाल पुलिस अस्पताल या अपने नजदीकी जिला पुलिस कार्यालय में DNA नमूना दे सकते हैं। नेपाल के विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत समेत कई देशों के फोरेंसिक विशेषज्ञ भी पहचान की प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं।

1 हजार से ज्यादा अज्ञात शवों को दफनाया

अधिकारियों के अनुसार, DNA नमूने लेने और जरूरी फोरेंसिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद 1,000 से अधिक अज्ञात शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया है। इसका उद्देश्य भविष्य में DNA मिलान के जरिए शवों की पहचान कर उन्हें उनके परिवारों को सौंपना है।

Advertisement

26 अगस्त को हिमस्खलन के बाद आई थी तबाही

यह आपदा 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए बर्फ और चट्टानों के बड़े हिमस्खलन के बाद शुरू हुई। इससे नदियों में अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आया। भोटेकोशी और आसपास की नदी प्रणालियों में आई बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई इलाकों को तबाह कर दिया।

घरों, वाहनों, सड़कों और पुलों के साथ बड़ी संख्या में जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। आपदा के बाद 21 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों को खोज, बचाव और राहत कार्यों में लगाया गया है।

सरकार बोली- राहत सामग्री की कमी नहीं

नेपाल के सूचना एवं संचार मंत्री बिक्रम तिमिल्सिना ने कहा है कि प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने राहत वितरण में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने और प्रभावित लोगों तक सामग्री पहुंचाने की बात कही।

Advertisement

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए स्कूलों और अस्पतालों की इमारतों में अस्थायी आवास की व्यवस्था की गई है। सरकार दीर्घकालिक पुनर्वास की योजना भी तैयार कर रही है। साथ ही प्रभावित इलाकों में सड़क, बिजली और संचार व्यवस्था बहाल करने का काम जारी है।

गोरखा में फिर आई बाढ़, 4 मकान और पुल बहा

बाढ़ की तबाही के बीच रविवार को गोरखा जिले में एक और बाढ़ आ गई। नामरुंग खोला नदी में अचानक पानी बढ़ने से चार मकान और एक झूला पुल बह गया। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

स्थानीय लोगों को बाढ़ आने का अंदाजा पहले हो गया था, इसलिए वे सुरक्षित स्थानों पर चले गए। अधिकारियों के मुताबिक नदी के उद्गम क्षेत्र में कुछ समय के लिए पानी का रास्ता बाधित हुआ होगा और बाद में मिट्टी-मलबे के साथ पानी का तेज बहाव नीचे आया।

नामरुंग खोला आगे जाकर बुधीगंडकी नदी में मिलती है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र की दो छोटी जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं और पुल बहने से आवाजाही बाधित हुई है।

Advertisement

तलाश जारी, आंकड़े अभी और बदल सकते हैं

नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। NDRRMA ने भी स्पष्ट किया है कि मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े खोज एवं सत्यापन के साथ बदल सकते हैं। करीब 5 हजार लोगों के अब भी लापता होने से आने वाले दिनों में राहत एजेंसियों के सामने खोज, पहचान और पुनर्वास की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Continue Reading

ख़बर दुनिया

Trump के बर्थराइट सिटिजनशिप आदेश पर रोक, मैरीलैंड कोर्ट बोली- अमेरिका में जन्मे बच्चे नागरिक

Published

on

Trump birthright citizenship, बर्थराइट सिटिजनशिप, अमेरिका जन्म नागरिकता, Donald Trump, Deborah Boardman, US birthright citizenship, Trump citizenship order, 14th Amendment, अमेरिका नागरिकता कानून

US Citizenship: अमेरिका में जन्म से नागरिकता यानी बर्थराइट सिटिजनशिप का मुद्दा एक बार फिर अदालत पहुंच गया है। मैरीलैंड की फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 6 अगस्त के उस नए कार्यकारी आदेश पर प्रारंभिक रोक लगा दी है, जिसमें कुछ परिस्थितियों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को स्वत: नागरिकता देने पर पाबंदी लगाने की कोशिश की गई थी।

फेडरल जज डेबोरा एल. बोर्डमैन ने बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अमेरिकी जमीन पर जन्म लेने वाले संबंधित बच्चे जन्म के समय अमेरिकी नागरिक होते हैं। अदालत ने ट्रम्प प्रशासन को इस नए आदेश को लागू करने से फिलहाल रोक दिया है। यह रोक तब तक प्रभावी रहेगी, जब तक मामले में चल रही क्लास-एक्शन याचिका पर आगे फैसला नहीं हो जाता।

ट्रम्प ने 6 अगस्त को जारी किया था नया आदेश

ट्रम्प प्रशासन ने 6 अगस्त को बर्थराइट सिटिजनशिप को सीमित करने वाला नया कार्यकारी आदेश जारी किया था। इसमें खास तौर पर ‘बर्थ टूरिज्म’ यानी बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आने वाले लोगों को निशाना बनाया गया था।

आदेश में कुछ अन्य श्रेणियों के बच्चों को भी जन्म से अमेरिकी नागरिकता से बाहर रखने का प्रयास किया गया था। इमिग्रेंट परिवारों और अधिकार संगठनों ने इसे अदालत में चुनौती दी।

Advertisement

जज बोलीं- सुप्रीम कोर्ट का फैसला पहले से मौजूद

जज बोर्डमैन ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया। उनका कहना है कि अदालत पहले ही संबंधित बच्चों को ‘citizens at birth’ यानी जन्म से नागरिक मानने की स्थिति स्पष्ट कर चुकी है। इसलिए कार्यकारी आदेश के जरिए इस संवैधानिक सुरक्षा को सीमित करने की कोशिश गंभीर कानूनी सवाल खड़े करती है।

अदालत ने माना कि ट्रम्प का नया आदेश संवैधानिक रूप से टिकने की संभावना नहीं रखता और उसके लागू होने से बच्चों के नागरिकता अधिकारों को तत्काल नुकसान पहुंच सकता है।

किन बच्चों पर असर डालना चाहता था ट्रम्प प्रशासन?

नए आदेश का उद्देश्य कुछ विशेष परिस्थितियों में अमेरिका में जन्मे बच्चों को स्वत: नागरिकता मिलने से रोकना था। इसमें ऐसे मामलों को शामिल किया गया था जिनमें माता-पिता की स्थिति या अमेरिका आने के उद्देश्य को लेकर प्रशासन आपत्ति जताता है।

Advertisement

इनमें कथित बर्थ टूरिज्म, विदेशी सरकारों से जुड़े कुछ लोग और अन्य विशेष श्रेणियां शामिल थीं। प्रशासन का तर्क था कि अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए अमेरिका में बच्चे को जन्म देने की व्यवस्था का दुरुपयोग रोका जाना चाहिए।

संघीय एजेंसियां फिलहाल नागरिकता रोक नहीं सकेंगी

मैरीलैंड कोर्ट की प्रारंभिक रोक के बाद संबंधित संघीय एजेंसियां इस आदेश के आधार पर प्रभावित बच्चों की नागरिकता को रोकने या चुनौती देने की कार्रवाई नहीं कर सकेंगी। हालांकि एजेंसियों को आदेश लागू करने के लिए जरूरी प्रशासनिक गाइडलाइन तैयार करने की अनुमति दी गई है। यानी सरकार तैयारी जारी रख सकती है, लेकिन अदालत की रोक के दायरे में आने वाले बच्चों पर नई नीति लागू नहीं कर सकती।

ट्रम्प के लिए दूसरी बड़ी कानूनी चुनौती

यह ट्रम्प प्रशासन की बर्थराइट सिटिजनशिप को सीमित करने की कोशिश को लगा एक और बड़ा झटका है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उनके व्यापक प्रयास पर फैसला सुनाया था। इसके बाद प्रशासन ने दायरा सीमित करते हुए नया आदेश जारी किया था, लेकिन उसे भी अदालत में चुनौती मिल गई।

Advertisement

मैरीलैंड की जज बोर्डमैन ने अब नए आदेश के खिलाफ प्रारंभिक निषेधाज्ञा जारी कर दी है। मामले की अंतिम संवैधानिक वैधता पर आगे की सुनवाई जारी रहेगी।

अमेरिका में जन्म से नागरिकता का आधार क्या है?

अमेरिका में बर्थराइट सिटिजनशिप का प्रमुख संवैधानिक आधार 14वां संशोधन है। इसके तहत अमेरिकी क्षेत्र में जन्म लेने वाले लोगों को सामान्य तौर पर जन्म से नागरिकता मिलती है, कुछ सीमित अपवादों को छोड़कर।

मौजूदा विवाद इसी बात पर है कि क्या राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश के जरिए इस संवैधानिक अधिकार के दायरे को सीमित किया जा सकता है। मैरीलैंड कोर्ट ने फिलहाल ट्रम्प के नए प्रयास पर रोक लगाकर इस विवाद को आगे की न्यायिक प्रक्रिया के लिए खुला रखा है।

Advertisement
Continue Reading

ख़बर दुनिया

Nepal Flood: नेपाल बाढ़ की सबसे दर्दनाक तस्वीर, पहचान से पहले दफन हो रहे अज्ञात शव, DNA सैंपल सुरक्षित; मौतों का आंकड़ा 1,066 पहुंचा

Published

on

नेपाल बाढ़, Nepal Flood, अज्ञात शव, DNA जांच, सामूहिक दफन, चितवन, देवघाट, नेपाल मौत, नेपाल लापता, रसुवा बाढ़, नुवाकोट बाढ़, Nepal Disaster

काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब राहत और बचाव के साथ अज्ञात शवों की पहचान और अंतिम संस्कार प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती बन गई है। पानी और कीचड़ में कई दिन तक पड़े रहने से शव तेजी से खराब हो रहे हैं। अस्पतालों के मुर्दाघर और अस्थायी शव केंद्र भी भर चुके हैं। ऐसे में प्रशासन DNA और अन्य फोरेंसिक रिकॉर्ड सुरक्षित करने के बाद अज्ञात शवों को दफना रहा है, ताकि भविष्य में पहचान होने पर उन्हें परिजनों तक पहुंचाया जा सके।

चितवन के देवघाट इलाके में प्रशासन ने बड़ी संख्या में कब्रें तैयार की हैं। यहां लाए गए शवों के DNA सैंपल, फोटो और पहचान से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड की जा रही है। हर शव को एक अलग पहचान नंबर देने की व्यवस्था की गई है। भविष्य में किसी परिवार के लापता सदस्य का मिलान होने पर इसी रिकॉर्ड के आधार पर शव की पहचान और कब्र का पता लगाया जा सकेगा।

पानी और कीचड़ में दबे शवों की पहचान मुश्किल

बाढ़ का पानी शवों को घटनास्थल से कई किलोमीटर दूर तक बहाकर ले गया। कई शव मलबे में दबे मिले, जबकि कुछ के अवशेष क्षत-विक्षत हालत में बरामद हुए। ऐसे में सिर्फ चेहरा देखकर पहचान करना मुश्किल हो गया है।

नेपाल पुलिस के मुताबिक बड़ी संख्या में शवों की हालत इतनी खराब है कि DNA, फिंगरप्रिंट, दांतों के रिकॉर्ड, फोटो और अन्य फोरेंसिक जानकारी के जरिए ही पहचान संभव हो सकती है।

Advertisement

मुर्दाघर भरे, इसलिए दफनाना जरूरी हुआ

बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव मिलने से अस्पतालों और अस्थायी शव केंद्रों की क्षमता खत्म हो गई है। चितवन में ही स्थानीय अस्पतालों की क्षमता के मुकाबले बरामद शवों की संख्या कई गुना ज्यादा हो गई थी। ऐसे में प्रशासन के सामने शवों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने का विकल्प सीमित रह गया। शवों के तेजी से खराब होने और स्वास्थ्य संबंधी खतरे को देखते हुए DNA रिकॉर्ड सुरक्षित कर सम्मानपूर्वक दफनाने का फैसला लिया गया।

नेपाल में 1,050 मौतें, तिब्बत में 16

ताजा आंकड़ों के मुताबिक नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन से 1,050 लोगों की मौत हो चुकी है। तिब्बत में 16 लोगों की जान गई है। इस तरह दोनों क्षेत्रों में मृतकों की संख्या 1,066 हो गई है। वहीं, 4,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या स्थानीय निवासियों के अलावा हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों और विदेशी नागरिकों की भी है। कई परिवार अब भी अस्पतालों, शव केंद्रों और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।

हाइड्रोपावर सुरंगों में भी जारी जिंदगी की तलाश

Advertisement

बाढ़ के बाद कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश भी जारी है। पानी, कीचड़ और मलबे से सुरंगों के रास्ते बंद हैं। बचाव दल भारी मशीनों और विशेष उपकरणों की मदद से अंदर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।रेस्क्यू ऑपरेशन में नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी मदद कर रही हैं। कई सुरंगों में अब भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है।

रसुवा-नुवाकोट में राहत की सबसे ज्यादा जरूरत

बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा और नुवाकोट के कई इलाकों में राहत पहुंचाना अब भी चुनौती बना हुआ है। सड़कें और पुल टूटने के कारण कई गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाना मुश्किल है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के मुताबिक कुछ इलाकों में टेंट, चावल, दाल, पीने का पानी और दूसरी जरूरी सामग्री की जरूरत बनी हुई है। बाढ़ के बाद मरे जानवरों और शवों से दुर्गंध की समस्या भी सामने आई है, जिसके लिए सैनिटाइजेशन और कीटाणुनाशक सामग्री की जरूरत बताई गई है। नेपाल सरकार ने भी प्रभावित जिलों में राहत और पुनर्वास को प्राथमिकता देने की बात कही है।

हर शव का रिकॉर्ड, ताकि परिवारों को मिल सके जवाब

नेपाल प्रशासन के लिए अब चुनौती सिर्फ शवों का अंतिम संस्कार करना नहीं, बल्कि हर मृतक की पहचान सुरक्षित रखना भी है। इसलिए दफनाने से पहले DNA सैंपल, फोटो, कपड़े, सामान और अन्य पहचान चिह्नों का रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। यानी आज जिन शवों की पहचान नहीं हो पा रही है, उनकी पहचान का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होगा। वैज्ञानिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहने से भविष्य में परिवार के DNA नमूने मिलने पर मिलान किया जा सकेगा और प्रशासन संबंधित शव की कब्र तक पहुंच सकेगा।

Advertisement
Continue Reading

ख़बर दुनिया

Nepal Flood: नेपाल बाढ़ की भयावह तस्वीर, 196 अज्ञात शव दफनाए गए, DNA से होगी पहचान; टनल में फंसे लोगों की तलाश जारी

Published

on

नेपाल बाढ़, Nepal Flood, नेपाल में मौतें, अज्ञात शव, सामूहिक दफन, चितवन, देवघाट, DNA टेस्ट, Trishuli 3A, Hydropower Rescue, Nepal-Tibet Flood, नेपाल रेस्क्यू

काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद अब तबाही की भयावह तस्वीर सामने आ रही है। चितवन के देवघाट जंगल में अज्ञात शवों को सामूहिक रूप से दफनाने का काम शुरू कर दिया गया है। पिछले दो दिनों में 196 शव दफनाए जा चुके हैं। लंबे समय तक पानी और मलबे में पड़े रहने के कारण कई शव बुरी तरह खराब हो गए हैं, जिससे उनकी पहचान मुश्किल हो रही है।

प्रशासन हर शव को एक पहचान नंबर देकर उसका रिकॉर्ड तैयार कर रहा है। शवों के DNA सैंपल भी लिए जा रहे हैं, ताकि बाद में परिजनों के नमूनों से मिलान कर पहचान सुनिश्चित की जा सके। पहचान होने पर शव परिवारों को सौंपने की कोशिश की जाएगी।

नेपाल में मौत का आंकड़ा 903, 4,247 लोग अब भी लापता

बाढ़ और भूस्खलन से नेपाल में हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 903 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,247 लोग लापता हैं। तिब्बत में 16 मौतें दर्ज की गई हैं और 546 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। दोनों क्षेत्रों को मिलाकर मृतकों की संख्या 919 हो गई है।

कई इलाकों में सड़क, पुल और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचना अब भी राहत टीमों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Advertisement

हाइड्रोपावर सुरंगों में जिंदगी की तलाश

बाढ़ के बाद कई जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। Upper Trishuli-3A समेत कई परियोजनाओं में सुरंगों के मुहाने पर जमा मलबा और कीचड़ हटाया जा रहा है।

त्रिशूली-3A में रेस्क्यू टीम सुरंग के ऊपरी हिस्से तक पहुंच चुकी है। मशीनों से रास्ता चौड़ा किया जा रहा है, ताकि बचावकर्मी ऑक्सीजन सिलेंडर और कैमरों के साथ अंदर जाकर फंसे लोगों की तलाश कर सकें।

भारत और चीन के विशेषज्ञ भी रेस्क्यू में जुटे

नेपाल ने सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद ली है। भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें नेपाली सेना और स्थानीय बचाव दलों के साथ मिलकर ऑपरेशन में सहयोग कर रही हैं। भारी मशीनरी और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाने का काम लगातार चल रहा है।

Advertisement

ऊपरी त्रिशूली क्षेत्र की कई परियोजनाओं में बड़ी संख्या में कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई सुरंगों के रास्ते मलबे और कीचड़ से पूरी तरह बंद हो गए हैं।

सीमा के पास बनी बैरियर झील से अब खतरा टला

बाढ़ के बीच नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बनी एक बैरियर झील को लेकर भी चिंता थी। ग्लेशियर और मलबे के खिसकने के बाद चोचेन खोला और चीन की पुरेपु त्सांगपो नदी के पास यह झील बनी थी। इसमें करीब 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा होने की जानकारी सामने आई थी।

हालांकि अब चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक झील का पानी प्राकृतिक बहाव से लगभग पूरी तरह निकल चुका है। इससे नीचे की ओर अचानक दूसरी बड़ी बाढ़ आने का तत्काल खतरा कम हो गया है।

परिजनों को अब भी अपनों के लौटने का इंतजार

Advertisement

एक तरफ राहत टीमें सुरंगों में जिंदगी तलाश रही हैं, तो दूसरी ओर बड़ी संख्या में परिवार अपने लापता परिजनों की जानकारी के लिए इंतजार कर रहे हैं। कई शवों की पहचान नहीं हो पाने के कारण DNA रिकॉर्ड तैयार करना प्रशासन के लिए बेहद अहम हो गया है।

नेपाल में बचाव और राहत अभियान के साथ अब शवों की पहचान, सामूहिक दफन और लापता लोगों की तलाश भी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल हो गई है।

Continue Reading

Advertisment

ख़बर उत्तर प्रदेश

अभी तक की बड़ी खबरें

WEBSITE PROPRIETOR & EDITOR DETAILS

Editor/ Director :- Somesh Singh Senger
Web News Portal: Khabritaau.com
Website : www.khabritaau.com
Company : Khabritaau News
Publication Place: Raipur (CG), Bhopal (MP) & Lucknow (UP)
Email:- khabritaau@gmail.com
Mob: +91 6264 084 601

DPR Links

Trending