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चित्रकूट: बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आया रामानंद मिशन, 1000 परिवारों और साधु-संतों तक पहुंचाई जाएगी राहत सामग्री; राशन, कपड़े और जरूरी सामान शामिल

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सतना: तीर्थक्षेत्र चित्रकूट में हाल में आई भीषण बाढ़ के बाद प्रभावित परिवारों की मदद के लिए श्री तुलसीपीठ सेवा न्यास और रामानंद मिशन ने राहत अभियान शुरू किया है। अभियान के तहत बाढ़ प्रभावित करीब 1,000 जरूरतमंद परिवारों और आश्रमों में रहने वाले साधु-संतों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

रामानंद मिशन के कार्यकर्ताओं और धर्मयोद्धाओं की टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर राहत सामग्री वितरित कर रही हैं। संस्था के मुताबिक, बाढ़ के कारण जिन परिवारों की दैनिक जरूरतें प्रभावित हुई हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सहायता दी जा रही है।

राहत किट में रोजमर्रा की जरूरत का सामान

बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए तैयार की गई राहत किट में दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली आवश्यक वस्तुएं शामिल की गई हैं। इनमें गद्दा, रजाई, मच्छरदानी, चादर, दरी और चटाई, बाथरूम एवं स्वच्छता किट, थाली, गिलास और राशन सामग्री के अलावा पहनने योग्य आवश्यक कपड़े समेत अन्य सामग्री शामिल हैं।

साधु-संतों के लिए भी विशेष सहायता

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राहत अभियान के तहत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के साथ-साथ आसपास की पहाड़ी और जंगली इलाकों में निवास करने वाले साधु-संतों तक भी सहायता पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। संस्था के अनुसार, बाढ़ के कारण साधना में आ रही परेशानियों को कम करने के उद्देश्य से साधु-संतों को भी राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। यह सामग्री श्री तुलसीपीठ के उत्तराधिकारी आचार्य रामचन्द्र दास जी महाराज के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने श्रद्धापूर्वक सौंपी।

‘सेवा ही साधना है, सेवा ही समर्पण’

आचार्य रामचन्द्र दास जी महाराज ने कहा कि बाढ़ के कारण जिन परिवारों की दैनिक आवश्यकताएं प्रभावित हुई हैं, उनके जीवन में दोबारा आशा, सम्मान और सहारा पहुंचाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने आमजन से भी राहत एवं सेवा कार्यों में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि “सेवा ही साधना है, सेवा ही समर्पण है।” रामानंद मिशन के मुताबिक, राहत अभियान के माध्यम से बाढ़ प्रभावित लोगों की तत्काल जरूरतों को पूरा करने के साथ उन्हें इस कठिन परिस्थिति में सामाजिक और मानवीय सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

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सागर शराब कांड: 20 हजार के इनामी रवि लखेरा का शॉर्ट एनकाउंटर, पैर में लगी गोली; मौतों का आंकड़ा 31 तक पहुंचने का दावा

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सागर: मध्य प्रदेश के सागर में जहरीली शराब कांड के मुख्य आरोपियों में शामिल रवि लखेरा का शुक्रवार सुबह पुलिस से एनकाउंटर हो गया। बरायठा के जंगल में पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें रवि लखेरा के पैर में गोली लगी। पुलिस ने उसे घायल हालत में बंडा अस्पताल में भर्ती कराया है। रवि पर 20 हजार रुपए का इनाम घोषित था।

सागर में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ने की खबरें सामने आ रही हैं। विभिन्न रिपोर्टों में अब तक 31 लोगों की मौत बताई गई है, हालांकि प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड में इससे कम मौतों की पुष्टि की गई है। 10 सितंबर तक प्रशासन ने 16 मौतों की पुष्टि की थी।

बरायठा के जंगल में हुई मुठभेड़

पुलिस के मुताबिक रवि लखेरा की तलाश लगातार की जा रही थी। शुक्रवार सुबह बरायठा के जंगल में पुलिस टीम का सामना उससे हो गया। मुठभेड़ के दौरान उसके पैर में गोली लगी। इसके बाद पुलिस उसे इलाज के लिए बंडा अस्पताल लेकर पहुंची। इलाज के बाद उससे पूछताछ की जाएगी और शराब के कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। रवि लखेरा को पुलिस इस मामले में अहम आरोपी मान रही है। उसके खिलाफ पहले से भी शराब से जुड़े मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

33 आरोपी बनाए गए, 18 गिरफ्तार

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पुलिस की अब तक की कार्रवाई में 33 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें रवि लखेरा भी शामिल है। उपलब्ध ताजा जानकारी के मुताबिक रवि की गिरफ्तारी से पहले 18 आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके थे। पुलिस के अनुसार एक आरोपी की मौत हो चुकी है, जबकि एक आरोपी अस्पताल में भर्ती है। अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। इससे पहले पुलिस ने फरार आरोपियों पर इनाम घोषित किया था। रवि लखेरा और मनीष लोधी पर 20-20 हजार रुपए का इनाम रखा गया था।

3 आरोपियों के 5 मकानों पर चला बुलडोजर

इससे पहले गुरुवार को प्रशासन ने शराब कांड से जुड़े तीन आरोपियों के पांच मकानों के अवैध हिस्सों पर बुलडोजर कार्रवाई की थी। कार्रवाई में आरोपी मनीष लोधी, करणी सेना के संभागीय अध्यक्ष चंद्रभान सिंह राजपूत और आशीष साहू के निर्माण शामिल थे। प्रशासन ने अवैध निर्माण को चिह्नित कर कार्रवाई की। मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले ही अधिकारियों को आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दे चुके हैं।

नकली शराब बनाने और सप्लाई नेटवर्क की जांच

पुलिस की जांच में कथित तौर पर अवैध शराब तैयार करने, उसकी पैकिंग और ग्रामीण इलाकों में सप्लाई किए जाने वाले नेटवर्क की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने मनीष लोधी और रवि लखेरा के बीच संपर्क होने का भी दावा किया है। जांच में यह भी सामने आया है कि नकली शराब को ब्रांडेड शराब जैसा दिखाने के लिए पैकिंग और लेबल का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि मामले की पूरी आपूर्ति श्रृंखला और मौतों के कारणों की जांच अभी जारी है।

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मौतों के आंकड़े पर सरकारी और स्थानीय रिपोर्टों में अंतर

सागर शराब कांड में मौतों का आंकड़ा सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 31 तक पहुंचने की बात कही गई है, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इससे कम संख्या की पुष्टि की गई है। 10 सितंबर की रिपोर्टों में प्रशासन ने 16 मौतों की पुष्टि की थी और 32 मरीजों के अस्पतालों में भर्ती होने की जानकारी दी थी। इसलिए 31 मौतों का आंकड़ा फिलहाल रिपोर्टेड आंकड़ा है, आधिकारिक रूप से पुष्ट आंकड़ा नहीं।

न्यायिक जांच के आदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। रिटायर्ड मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जस्टिस विष्णु प्रताप सिंह चौहान की अध्यक्षता में जांच की जानकारी सामने आई है। जांच में शराब के निर्माण, पैकिंग, सप्लाई नेटवर्क के साथ-साथ प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर हुई संभावित लापरवाही की भी पड़ताल की जाएगी।

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MP News: सिंधिया संपत्ति विवाद में नया मोड़, केंद्रीय मंत्री सिंधिया की बड़ी बुआ का दावा भी सुनवाई में शामिल

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ग्वालियर: सिंधिया राजपरिवार की करीब ₹40 हजार करोड़ की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े विवाद में गुरुवार को नया मोड़ आया। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ प्रतिमा देवी के दावे को मामले की सुनवाई में शामिल कर लिया गया है। कोर्ट ने उनके आवेदन को स्वीकार करते हुए उन्हें अपने दावे और उसके आधार पर पक्ष रखने का अवसर दिया है।

हालांकि, आवेदन स्वीकार किए जाने का मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने प्रतिमा देवी को संपत्ति में हिस्सा देने का फैसला कर दिया है। उनके अधिकार और हिस्सेदारी पर आगे होने वाली सुनवाई और कानूनी बहस के बाद ही निर्णय होगा।

दामाद ने कोर्ट में रखा प्रतिमा देवी का पक्ष

गुरुवार को प्रतिमा देवी की ओर से उनके दामाद प्रतीक कारकी कोर्ट में उपस्थित हुए और उनका पक्ष रखा। प्रतिमा देवी का कहना है कि उनकी मां पद्माराजे सिंधिया, सिंधिया राजपरिवार की बेटी थीं। इसी उत्तराधिकार के आधार पर उन्होंने संपत्ति में अपने हिस्से का दावा किया है। उनकी आपत्ति के बाद अब बंटवारे से जुड़े मामले में उनके दावे और अधिकार पर भी कानूनी बहस होगी।

वसीयत और दस्तावेज नहीं मिलने की आपत्ति

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प्रतिमा देवी ने इससे पहले आरोप लगाया था कि उन्हें संपत्ति विवाद से जुड़े जरूरी दस्तावेज और वसीयत की पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने इस आधार पर पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले के नोटिस भेजे जाने के तरीके पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि वह काठमांडू में रहती हैं, जबकि कुछ नोटिस नेपालगंज के पते पर भेजे गए। उनका दावा है कि गलत पते पर नोटिस जाने के कारण उन्हें मामले की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी।

दूसरे पक्ष ने कहा- समझौते पर सहमति और हस्ताक्षर थे

प्रतिमा देवी की आपत्तियों पर दूसरे पक्ष की ओर से जवाब भी कोर्ट में पेश किया जा चुका है। इसमें दावा किया गया है कि संपत्ति के बंटवारे से जुड़े समझौते की प्रक्रिया में प्रतिमा देवी की सहमति थी और संबंधित दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर भी हैं। यानी अब कोर्ट के सामने दो अहम सवाल हैं- प्रतिमा देवी को संपत्ति में कानूनी अधिकार कितना है और पहले तैयार किए गए समझौते में उनकी सहमति की स्थिति क्या थी।

पहले से चल रहा है संपत्ति बंटवारे का विवाद

सिंधिया परिवार की पैतृक और अन्य संपत्तियों को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद चल रहा है। 2026 में परिवार के कई सदस्यों के बीच समझौते के जरिए विवाद खत्म करने की कोशिश भी हुई। रिपोर्टों के मुताबिक समझौते का मसौदा कोर्ट के सामने पेश किया गया था, लेकिन प्रतिमा देवी की आपत्ति के बाद मामला फिर कानूनी पेंच में फंस गया। विवाद में ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे, उषा राजे और परिवार के अन्य सदस्य भी पक्षकार हैं।

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7 अक्टूबर को अगली सुनवाई

गुरुवार की सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले में 7 अक्टूबर को अगली तारीख तय की है। इस दिन संपत्ति के बंटवारे, प्रतिमा देवी के दावे और पहले हुए समझौते से जुड़े कानूनी मुद्दों पर आगे सुनवाई होने की संभावना है। फिलहाल प्रतिमा देवी का दावा सिर्फ सुनवाई के दायरे में आया है। संपत्ति में उनका वास्तविक अधिकार और हिस्सा कितना होगा, इस पर कोर्ट का अंतिम फैसला अभी बाकी है।

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सागर शराब कांड में मौतों का आंकड़ा बढ़ा: 22 लोगों की जान गई, 112 अस्पताल में भर्ती; 30 पर FIR, 10 गिरफ्तार

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सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली/अवैध शराब से मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। स्थानीय जानकारी के मुताबिक मृतकों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है, जबकि 112 लोगों का सागर और भोपाल के अस्पतालों में इलाज चल रहा है। हालांकि, मौतों के आंकड़े को लेकर प्रशासन और अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है। प्रशासन की ओर से सभी 22 मौतों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।

पुलिस ने मामले में करीब 30 नामजद लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इनमें लाइसेंसी शराब ठेकेदार भी शामिल हैं। अब तक 10 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है। पुलिस बाकी आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है और शराब की सप्लाई के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

पिता-पुत्र समेत कई लोगों की मौत

सोमवार को इलाज के दौरान कई और मरीजों ने दम तोड़ दिया। महेश रावत (55), श्याम बाई अहिरवार (50) और कृष्ण कुमार लोधी की मौत की जानकारी सामने आई है। इससे पहले गंभीर हालत में एयरलिफ्ट कर भोपाल ले जाए गए राम प्रसाद लोधी की रविवार रात मौत हो गई थी। उनके पिता गोविंद लोधी की भी रविवार को मौत हुई थी। राम प्रसाद का छोटा भाई भूरे लोधी अभी अस्पताल में भर्ती है। इसके अलावा गूगरा खुर्द के भगवान सिंह (35), खटोरा के गोपाल आदिवासी (40) और मुड़ना पैरा के देश कुमार लोधी समेत अन्य लोगों की मौत की भी जानकारी सामने आई है।

112 मरीजों का अस्पतालों में इलाज

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ताजा स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक 112 मरीज अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। इनमें सबसे ज्यादा मरीज बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC), सागर में बताए गए हैं। जिला अस्पताल और बंडा सिविल अस्पताल में भी प्रभावित लोगों का इलाज चल रहा है। कुछ मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। एक मरीज को गंभीर स्थिति में एयरलिफ्ट कर भोपाल भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई थी।

मौतों की जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच

सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल ने मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी जैसीनगर एसडीएम को सौंपी गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि मौतों की वास्तविक वजह क्या थी, शराब कहां तैयार या उपलब्ध कराई गई, उसका भंडारण और वितरण किन लोगों ने किया और इस पूरे मामले में संबंधित विभागों की कोई लापरवाही थी या नहीं। जांच अधिकारी को स्पष्ट अभिमत के साथ रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

शराब सप्लाई नेटवर्क की जांच

पुलिस की जांच में शराब की सप्लाई को लेकर उत्तर प्रदेश के ललितपुर से संभावित कनेक्शन की बात सामने आई है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि संदिग्ध शराब सागर के गांवों तक कैसे पहुंची और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

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जांच एजेंसियां शराब के नमूनों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मौतों की वजह की पुष्टि करने में जुटी हैं। कुछ रिपोर्टों में मृतकों के शरीर में मेथेनॉल पाए जाने की बात सामने आई है, हालांकि इस मामले में अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष जांच के बाद ही माना जाएगा।

30 लोगों पर FIR, ठेकेदार भी आरोपी

पुलिस ने बंडा और आसपास के थानों में दर्ज मामलों में करीब 30 लोगों को नामजद किया है। इनमें शराब की अवैध बिक्री और सप्लाई से जुड़े बताए जा रहे लोगों के साथ लाइसेंसी शराब कारोबारियों के नाम भी शामिल हैं। पुलिस ने अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वहीं, कुछ अन्य रिपोर्टों में गिरफ्तारियों की संख्या 14 तक बताई गई है, इसलिए आधिकारिक पुलिस आंकड़ा आने तक संख्या में सावधानी बरतना जरूरी है। पुलिस की टीमें बाकी आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संदिग्ध शराब का निर्माण, भंडारण और वितरण कहां से हुआ।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

घटना के बाद आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। तीन आबकारी अधिकारियों और दो पुलिसकर्मियों के निलंबन की भी जानकारी सामने आई है। फिलहाल प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर स्क्रीनिंग कर रही हैं। प्रशासन ने शराब का सेवन करने वाले लोगों से तबीयत खराब होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की है।

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MP News: सागर में जहरीली शराब से 11 मौतें, 30+ अस्पताल पहुंचे, 3 गंभीर; शराब दुकानों पर कार्रवाई

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सागर: मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध जहरीली शराब पीने से 11 लोगों की मौत की खबर है। चार गांवों के 30 से ज्यादा लोगों को अस्पताल लाया गया है। इनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में स्क्रीनिंग शुरू कर दी है और शराब के नमूने जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। हालांकि, प्रशासन और पुलिस के स्तर पर शराब को मौतों का अंतिम कारण अभी घोषित नहीं किया गया है। प्रारंभिक तौर पर संदिग्ध जहरीली शराब को वजह माना जा रहा है। पोस्टमार्टम और जांच रिपोर्ट के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

घूघर, नौराज और बराज समेत चार गांवों में मामला

बताया गया है कि शनिवार रात घूघर, नौराज, बराज और आसपास के गांवों के कुछ लोगों ने शराब का सेवन किया था। इसके बाद एक के बाद एक लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजन उन्हें बंडा सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां कुछ लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। बीमार लोगों में से कई को सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल रेफर किया गया है। तीन मरीजों की हालत गंभीर बताई गई है।

मरीजों के शरीर नीले पड़े, अकड़न की शिकायत

डॉक्टरों के मुताबिक अस्पताल पहुंचाए गए कुछ मरीजों के शरीर नीले पड़ गए थे और उन्हें शरीर में अकड़न की शिकायत थी। घटना के बाद प्रशासन ने प्रभावित गांवों में मेडिकल टीम भेजकर स्क्रीनिंग शुरू कराई है। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने लोगों से अपील की है कि यदि पिछले 24 से 48 घंटे में किसी भी तरह की शराब पी है या जहरीली शराब से जुड़े लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो तुरंत जांच कराएं। लोग स्थानीय मेडिकल टीम से संपर्क करने के अलावा बंडा सिविल अस्पताल पहुंचकर भी स्क्रीनिंग करा सकते हैं।

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शराब दुकानों के सैंपल लिए जा रहे

घटना के बाद प्रशासन और पुलिस ने शराब की बिक्री और सप्लाई से जुड़े स्रोतों की जांच शुरू कर दी है। इलाके की शराब दुकानों को सील कर नमूने लेने की कार्रवाई की गई है। अलग-अलग रिपोर्टों में सील की गई दुकानों की संख्या पांच से छह बताई गई है, इसलिए आधिकारिक आंकड़ा आने के बाद इसे अपडेट किया जाना उचित होगा। अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों की भी तलाश की जा रही है। प्रशासन ने मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

CM मोहन यादव ने दिए जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर गंभीर चिंता जताते हुए अधिकारियों को मौके पर भेजने और मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका

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प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। शराब पीने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाया जा रहा है। कुछ मरीजों की हालत गंभीर होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस शराब की सप्लाई, सेवन और मौतों के बीच संबंध की जांच कर रही है। पोस्टमार्टम और शराब के नमूनों की रिपोर्ट से मौतों की वास्तविक वजह सामने आने की उम्मीद है।

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MP News: मध्यप्रदेश में TET अब ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन भी, शिक्षक दिवस पर CM मोहन यादव का ऐलान; सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हो रही परीक्षा

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भोपाल: मध्यप्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आयोजित की जा रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) अब ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन मोड में भी होगी। शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसकी घोषणा की। परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों को ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प भी दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने शनिवार को भोपाल स्थित आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में यह घोषणा की। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान किया गया।

डेढ़ लाख शिक्षकों ने पास नहीं की TET परीक्षा

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद प्रदेश में सेवारत उन शिक्षकों के लिए TET आयोजित की जा रही है, जिन्होंने अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं की है। परीक्षा के दायरे में करीब डेढ़ लाख शिक्षक आने की संभावना बताई गई है। परीक्षा अक्टूबर 2026 में प्रस्तावित है। ऑफलाइन परीक्षा का विकल्प उन शिक्षकों के लिए खास तौर पर राहत माना जा रहा है, जिन्हें कंप्यूटर आधारित परीक्षा देने में परेशानी हो सकती है।

आवेदन की तारीख भी बढ़ाई गई

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TET के लिए आवेदन की अंतिम तारीख अब 18 सितंबर 2026 कर दी गई है। आवेदन में संशोधन की सुविधा 20 सितंबर तक रहेगी। इससे पहले आवेदन की अंतिम तारीख 4 सितंबर थी।

CM बोले- शिक्षा व्यवस्था मजबूत करना लक्ष्य

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि देश और समाज के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्कूल की कक्षाओं में ही देश का भविष्य तैयार होता है और शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ जीवन की दिशा भी देते हैं।

उन्होंने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश बोर्ड की मेरिट सूची में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी स्थान बना रहे हैं। यह शिक्षकों की मेहनत और विद्यार्थियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

शिक्षकों को बेहतर अवसर देने की बात

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मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षकों के हित में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में TET को ऑफलाइन कराने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना, शिक्षकों को सम्मान और बेहतर अवसर देना तथा हर विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।

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