अर्थ जगत
LPG Gas Price: महंगी हुई रसोई गैस, घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम 50 रुपए बढ़े

LPG Gas Price: देश की आम जनता को सोमवार को महंगाई का तगड़ा झटका लगा है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में इजाफा किया गया है। सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में 50 रुपए का इजाफा किया है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ रही हैं और हमारे यहां कीमतें घट रही हैं। हमने फैसला कि रसोई गैस की कीमत में 50 रुपए की बढ़ोतरी की जाएगी। बता दें कि घरेलू एलपीजी गैस के दाम 1 अगस्त 2024 से स्थिर थे।
नई दरें लागू होने के बाद दिल्ली में सामान्य उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 803 रुपए से बढ़कर 853 रुपये हो जाएगी और उज्ज्वला योजना के तहत उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 503 रुपए से बढ़कर 553 रुपए हो जाएगी। रसोई गैस पर बढ़ी हुई दर मंगलवार 8 अप्रैल से लागू हो जाएगी।
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UPI पर ₹2,000 तक कोई चार्ज नहीं, चार्ज की चर्चाओं के बीच वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट की स्थिति

नई दिल्ली: UPI पेमेंट को लेकर चल रही चार्ज की चर्चाओं के बीच वित्त मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार की 14 सितंबर की अधिसूचना के मुताबिक ₹2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं लगा सकते। RuPay से किए जाने वाले डेबिट कार्ड पेमेंट को भी नो-चार्ज व्यवस्था में रखा गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ₹2,000 UPI पेमेंट की नई सीमा बन गई है। इससे अधिक रकम का UPI ट्रांजैक्शन पहले की तरह किया जा सकता है। ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर अभी कोई नया चार्ज लागू नहीं हुआ है। सरकार ने सिर्फ भविष्य में चुनिंदा डिजिटल पेमेंट पर चार्ज तय करने के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया है।
संसद में कानून बदलने के बाद शुरू हुई थी चर्चा
अगस्त 2026 में संसद ने Taxation and Other Laws (Amendment) Act, 2026 पारित किया था। इसके जरिए Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में बदलाव किया गया। पहले इस प्रावधान के तहत निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से होने वाले पेमेंट पर बैंक और सिस्टम प्रोवाइडर शुल्क नहीं लगा सकते थे। संशोधन के बाद सरकार को यह अधिकार मिला कि वह ऐसे इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड को अधिसूचित करे, जिन पर शुल्क लगाने की मनाही रहेगी। इसी के बाद यह सवाल उठा कि क्या ₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर आगे चलकर MDR लगाया जा सकता है।
सवाल: क्या ₹2,000 UPI की नई लिमिट है?
जवाब: नहीं।
₹2,000 सिर्फ उस रकम की सीमा है, जिस तक अधिसूचना के तहत UPI पेमेंट पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से शुल्क नहीं लगाया जा सकता। इससे अधिक रकम का भुगतान UPI से किया जा सकता है।
सवाल: ₹2,500, ₹5,000 या ₹10,000 भेजने पर अभी फीस लगेगी?
जवाब: अभी नहीं।
सिर्फ ₹2,000 से ज्यादा होने के कारण बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर मनमाने तरीके से शुल्क नहीं लगा सकते। अधिक रकम वाले पेमेंट पर शुल्क लगाने के लिए आगे सरकार को संबंधित नियम और दरें तय करनी होंगी। अभी ऐसा कोई अंतिम MDR रेट लागू नहीं किया गया है।
सवाल: फिर ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट की चर्चा क्यों?
इसका कारण बड़े Person-to-Merchant (P2M) पेमेंट हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में ₹2,000 से ज्यादा के P2M UPI ट्रांजैक्शन संख्या के लिहाज से करीब 4% थे, लेकिन इनका हिस्सा कुल P2M पेमेंट वैल्यू में करीब दो-तिहाई था। यानी संख्या कम है, लेकिन इन ट्रांजैक्शन में बड़ी रकम का भुगतान होता है।
सवाल: क्या दोस्त या परिवार को ₹5,000-10,000 भेजने पर चार्ज लगेगा?
जवाब: नहीं।
सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया है कि Person-to-Person (P2P) UPI ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे। संभावित MDR की चर्चा मुख्य रूप से मर्चेंट यानी कारोबारियों को किए जाने वाले चुनिंदा बड़े पेमेंट को लेकर है।
सवाल: अगर MDR आया तो किस पर लगेगा?
MDR यानी Merchant Discount Rate। यह डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा के बदले मर्चेंट से लिया जाने वाला शुल्क है। सरकार ने अगस्त में कहा था कि अगर MDR लागू किया जाता है तो यह सीमित संख्या में मर्चेंट ट्रांजैक्शन, एक तय सीमा से ऊपर और मामूली दर पर लगाया जाएगा। सरकार के मुताबिक ज्यादातर मर्चेंट ट्रांजैक्शन भी मुफ्त रहने की उम्मीद है। इसलिए यह कहना अभी सही नहीं होगा कि ₹2,000 से ज्यादा का हर UPI पेमेंट शुल्क के दायरे में आ जाएगा।
सवाल: आम यूजर पर क्या असर पड़ेगा?
अभी के लिए रोजमर्रा के छोटे UPI पेमेंट पर कोई असर नहीं है। ₹2,000 तक के भुगतान पर चार्ज लगाने की मनाही स्पष्ट है। ₹2,000 से अधिक के P2P पेमेंट भी अभी मुफ्त हैं। भविष्य में अगर MDR लागू होता है तो उसका सीधा कानूनी बोझ मर्चेंट पर होगा; हालांकि कारोबारी चाहें तो अपनी लागत का असर कीमतों में डाल सकते हैं—यह संभावित प्रभाव है, मौजूदा नियम नहीं।
सवाल: RuPay डेबिट कार्ड पर क्या नियम है?
वित्त मंत्रालय की 14 सितंबर की अधिसूचना में RuPay-powered debit card को भी ऐसे इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड में शामिल किया गया है, जिन पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से चार्ज नहीं लगा सकते। यहां अधिसूचना में ₹2,000 की सीमा अलग से नहीं लगाई गई है; ₹2,000 की सीमा विशेष रूप से UPI ट्रांजैक्शन के लिए लिखी गई है।
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Samsung के विज्ञापन में Tim Cook ने Galaxy Z Fold 8 की तारीफ की, वायरल विज्ञापन का सच क्या?

नई दिल्ली: Apple के पहले फोल्डेबल iPhone Duo की लॉन्चिंग के तुरंत बाद Samsung के एक विज्ञापन ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। विज्ञापन में Tim Cook नाम का एक शख्स Galaxy Z Fold 8 की तारीफ करता नजर आ रहा है। वीडियो को देखकर पहली नजर में ऐसा लगता है कि Apple के पूर्व CEO Tim Cook ही Samsung का फोन प्रमोट कर रहे हैं। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। विज्ञापन में दिख रहा व्यक्ति न्यूजीलैंड के Palmerston North का रहने वाला दूसरा Tim Cook है। Samsung ने जानबूझकर इसी नाम की समानता को अपनी मार्केटिंग का हिस्सा बनाया है।
Apple के Tim Cook नहीं, न्यूजीलैंड वाले Tim Cook
Samsung New Zealand के विज्ञापन में जिस व्यक्ति को दिखाया गया है, उसका नाम वास्तव में Tim Cook है। वह Palmerston North में रहता है और उसका चेहरा और पहनावा Apple के पूर्व CEO से कुछ हद तक मिलता-जुलता है। वीडियो को Apple के प्रोडक्ट लॉन्च वीडियो की शैली में बनाया गया है। इसमें ‘Tim Cook’ Galaxy Z Fold 8 का इस्तेमाल करते हुए फोन की तारीफ करता है और अंत में खुद को “Palmerston North वाला Tim Cook” बताता है।Samsung ने सोशल मीडिया पोस्ट में भी “Tim Cook from Palmerston North” लिखकर साफ कर दिया कि यह Apple वाले Tim Cook नहीं हैं।
तो क्या Tim Cook Samsung जॉइन कर रहे हैं?
नहीं, ऐसा कोई संकेत या खबर नहीं है। वायरल विज्ञापन सिर्फ Samsung का एक मजेदार मार्केटिंग कैंपेन है। इसमें Apple के पूर्व CEO के नाम से मिलते-जुलते व्यक्ति का इस्तेमाल कर कंपनी ने Apple पर तंज कसा है। वैसे भी सितंबर 2026 से Apple के CEO की जिम्मेदारी John Ternus संभाल रहे हैं। Tim Cook अब कंपनी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं।
iPhone Duo लॉन्च होते ही Samsung का पलटवार
Samsung ने यह विज्ञापन ऐसे समय जारी किया है, जब Apple ने पहली बार फोल्डेबल फोन बाजार में एंट्री की है। Apple ने 9 सितंबर को $1,999 का iPhone Duo लॉन्च किया, जबकि Samsung पहले ही Galaxy Z Fold सीरीज की आठवीं पीढ़ी तक पहुंच चुका है।
Samsung ने iPhone Duo की लॉन्चिंग के बाद सोशल मीडिया पर कई व्यंग्यात्मक पोस्ट भी किए। कंपनी ने Apple पर फोल्डेबल तकनीक में देर से आने को लेकर तंज कसा और अपने Galaxy Z Fold 8 की पतली और हल्की डिजाइन को प्रमुखता से प्रचारित किया।
Samsung 2019 से फोल्डेबल बाजार में
Samsung ने 2019 में अपने फोल्डेबल स्मार्टफोन बाजार में उतारे थे और अब Galaxy Z Fold की आठवीं पीढ़ी तक पहुंच चुका है। Apple की एंट्री के बाद दोनों कंपनियों के बीच इस सेगमेंट में सीधा मुकाबला और तेज होने की उम्मीद है।
Reuters के मुताबिक Counterpoint Research को उम्मीद है कि 2026 में फोल्डेबल फोन बाजार में Samsung की हिस्सेदारी करीब 38% और Apple की पहली ही पीढ़ी में करीब 25% रह सकती है। हालांकि ये बाजार अनुमान हैं, वास्तविक हिस्सेदारी बिक्री के बाद स्पष्ट होगी।
विज्ञापन में Tim Cook को ही क्यों चुना?
Samsung ने यहां सिर्फ Galaxy Z Fold 8 का प्रचार नहीं किया, बल्कि नाम की समानता को ही विज्ञापन का मुख्य हुक बनाया। Apple के पूर्व CEO Tim Cook की वैश्विक पहचान को देखते हुए इसी नाम वाले व्यक्ति को Apple जैसी प्रस्तुति में दिखाना लोगों का ध्यान खींचने का तरीका है।
इसलिए सोशल मीडिया पर चल रही “Tim Cook ने Samsung जॉइन कर लिया” वाली चर्चा वास्तविक नहीं, बल्कि Samsung की मार्केटिंग रणनीति का हिस्सा है।
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India GDP Growth: भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पर, IMF ने कहा- उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन

नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा संकट और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने तेज रफ्तार कायम रखी है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में देश की रियल GDP ग्रोथ 7.8% रही। यह रिजर्व बैंक के 7% के अनुमान और बाजार के करीब 7.1% अनुमान से बेहतर है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने भी भारत के प्रदर्शन को मजबूत बताया है। IMF की प्रवक्ता जूली कोजाक के मुताबिक भारत की पहली तिमाही की ग्रोथ IMF के अप्रैल के अनुमान से ज्यादा रही। उन्होंने भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रमुख ग्रोथ इंजन बताते हुए कहा कि सर्विसेज सेक्टर और एक्सपोर्ट ने मजबूत प्रदर्शन किया है।
81.36 लाख करोड़ रुपए पहुंची रियल GDP
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून 2026 में भारत की रियल GDP 81.36 लाख करोड़ रुपए रही। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 75.46 लाख करोड़ रुपए थी। इस तरह रियल GDP में 7.8% की वृद्धि दर्ज हुई। वहीं, मौजूदा कीमतों पर यानी नॉमिनल GDP 88.27 लाख करोड़ रुपए रही, जो पिछले साल की 80 लाख करोड़ रुपए की तुलना में 10.3% ज्यादा है।
सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग ने संभाली अर्थव्यवस्था
पहली तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में व्यापक मजबूती देखने को मिली। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में करीब 9.2% और सर्विसेज से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि दर्ज हुई। वित्तीय, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज की ग्रोथ करीब 12% रही।
निवेश और एक्सपोर्ट भी ग्रोथ के प्रमुख आधार रहे। Reuters के मुताबिक मजबूत निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज ने वैश्विक चुनौतियों के बीच अर्थव्यवस्था को सहारा दिया।
IMF ने GDP की नई गणना पद्धति का स्वागत किया
भारत ने इस साल GDP के आंकड़ों की गणना के लिए नई सीरीज लागू की है। इसमें 2022-23 को नया बेस ईयर बनाया गया है। इसके साथ राष्ट्रीय खातों की गणना में डेटा स्रोत और कीमतों के आकलन से जुड़ी पद्धतियों में भी बदलाव किया गया है।
IMF ने इन बदलावों का स्वागत करते हुए कहा है कि बेहतर डेटा और आधुनिक पद्धतियों से भारत के GDP अनुमान की गुणवत्ता और सटीकता में सुधार होना चाहिए।
GDP आंकड़ों पर क्यों उठे सवाल?
मजबूत GDP आंकड़ों के बीच पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने इसकी गणना को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि पिछले साल के आंकड़ों में बड़े संशोधन के कारण इस साल की ग्रोथ दर ज्यादा दिखाई दे रही है।
गर्ग ने पुराने आंकड़ों और मौजूदा कीमतों की तुलना के आधार पर करीब 2.6% ग्रोथ का दावा किया है। हालांकि, यह तुलना आधिकारिक 7.8% रियल GDP ग्रोथ की गणना से अलग आधार पर है। विशेषज्ञों और सरकारी पक्ष की ओर से भी कहा गया है कि नए बेस ईयर और नई GDP सीरीज को ध्यान में रखे बिना पुराने आंकड़ों से सीधे तुलना करना सही नहीं है।
नए बेस ईयर को लेकर समझना जरूरी
MoSPI ने GDP की नई सीरीज में 2022-23 को बेस ईयर बनाया है। इसलिए 2025-26 और 2026-27 के आंकड़ों की तुलना भी इसी नई सीरीज के आधार पर की जाती है।
यही वजह है कि पुराने बेस ईयर से निकाले गए आंकड़ों और नई सीरीज के आधिकारिक आंकड़ों में अंतर दिखाई दे सकता है। GDP की नई पद्धति को लेकर पारदर्शिता और विस्तृत जानकारी की मांग के बीच सरकार और विशेषज्ञों के बीच इस पर बहस जारी है।
भारत के लिए क्या संकेत?
7.8% की पहली तिमाही वृद्धि से संकेत मिलता है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और बाहरी दबावों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और एक्सपोर्ट का बेहतर प्रदर्शन आगे की ग्रोथ के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि, ऊंची ऊर्जा कीमतें, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां और भू-राजनीतिक तनाव आगे भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम बने हुए हैं।
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Apple iPhone price: नए iPhone लॉन्च के बाद पुराने मॉडल महंगे, iPhone 17 की कीमत ₹17 हजार बढ़ी, Air का 1TB मॉडल ₹65 हजार तक महंगा

नई दिल्ली: Apple ने iPhone 18 Pro सीरीज और अपना पहला फोल्डेबल फोन iPhone Duo लॉन्च करने के तुरंत बाद भारत में कई मौजूदा iPhone मॉडल्स की कीमतें बढ़ा दी हैं। आमतौर पर नई iPhone सीरीज आने के बाद पुराने मॉडल्स की कीमत घटती है, लेकिन इस बार कंपनी ने इसके उलट फैसला लिया है।
Apple के भारतीय ऑनलाइन स्टोर पर iPhone 17, iPhone 17e, iPhone 16 और iPhone Air की नई कीमतें लागू हो गई हैं। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी iPhone Air के 1TB मॉडल में हुई है, जिसकी कीमत ₹65 हजार बढ़ी है।
iPhone 17 अब करीब ₹1 लाख का
iPhone 17 के 256GB मॉडल की कीमत पहले ₹82,900 थी। अब यह ₹99,900 में उपलब्ध है। यानी कीमत में ₹17,000 की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, 512GB मॉडल ₹1,02,900 से बढ़कर ₹1,24,900 का हो गया है। इस वेरिएंट पर ₹22,000 की बढ़ोतरी हुई है। Apple की वेबसाइट पर यही नई कीमतें दिखाई जा रही हैं।
iPhone 17e भी ₹20 हजार तक महंगा
Apple के अपेक्षाकृत किफायती मॉडल iPhone 17e की कीमत में भी बड़ा बदलाव हुआ है।
- 256GB: ₹64,900 से बढ़कर ₹79,900- ₹15,000 की बढ़ोतरी
- 512GB: ₹84,900 से बढ़कर ₹1,04,900- ₹20,000 की बढ़ोतरी
iPhone 16 की कीमत में ₹20 हजार का इजाफा
पुरानी पीढ़ी का iPhone 16 भी अब महंगा हो गया है। इसका 128GB मॉडल पहले ₹69,900 में मिल रहा था। अब Apple ने इसकी कीमत ₹89,900 कर दी है। यानी दो साल पुराने मॉडल के लिए भी ग्राहकों को पहले के मुकाबले ₹20,000 ज्यादा खर्च करने होंगे।
iPhone Air पर सबसे बड़ा झटका
iPhone Air की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसके वेरिएंट्स की नई कीमतें इस तरह हैं:
| मॉडल | पुरानी कीमत | नई कीमत | बढ़ोतरी |
| iPhone Air 256 GB | ₹1,19,900 | ₹1,49,900 | ₹30,000 |
| iPhone Air 512 GB | ₹1,39,900 | ₹1,74,900 | ₹35,000 |
| iPhone Air 1 TB | ₹1,59,900 | ₹2,24,900 | ₹65,000 |
मेमोरी चिप की कमी से बढ़ रही लागत
Apple की कीमत बढ़ाने के पीछे प्रमुख कारण मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की बढ़ती लागत बताई जा रही है। AI कंपनियों और डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप्स की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। इसका असर स्मार्टफोन समेत इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज की लागत पर पड़ रहा है।
Apple के तत्कालीन CEO टिम कुक ने जून में The Wall Street Journal से बातचीत में कहा था कि कीमतों में बढ़ोतरी से बचना अब मुश्किल हो गया है। उन्होंने बढ़ती मेमोरी और स्टोरेज लागत को कंपनी के लिए गंभीर चुनौती बताया था।
iPhone 18 Pro और Duo के बाद बदला पूरा प्राइस स्ट्रक्चर
9 सितंबर को Apple ने ‘Surprise and Shine’ इवेंट में iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और iPhone Duo लॉन्च किए। iPhone Duo कंपनी का पहला फोल्डेबल iPhone है। यह खुलने पर 7.6 इंच का इनर डिस्प्ले देता है और इसकी शुरुआती कीमत भारत में ₹2,99,900 है।
इस लॉन्च के साथ Apple ने अपने पुराने मॉडल्स को सस्ता करने के बजाय उनकी कीमतें बढ़ा दीं। कंपनी ने iPhone 17 Pro और 17 Pro Max को अपने आधिकारिक स्टोर से हटाकर नई प्राइसिंग स्ट्रैटेजी के तहत लाइनअप को भी पुनर्गठित किया है।
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GDP Growth: महंगाई की चिंता के बीच अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8%; GVA 8.2% बढ़ा

नई दिल्ली: महंगाई और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत बढ़त के साथ की है। अप्रैल-जून तिमाही में देश की रियल GDP 7.8% की दर से बढ़ी है। सोमवार को जारी मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन (MoSPI) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में रियल GDP 75.46 लाख करोड़ रुपए थी, जो इस बार बढ़कर 81.36 लाख करोड़ रुपए हो गई।
मौजूदा कीमतों पर यानी नॉमिनल GDP भी 10.3% बढ़ी है। यह अप्रैल-जून 2026 में 88.27 लाख करोड़ रुपए रही, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 80 लाख करोड़ रुपए थी।
GVA की रफ्तार GDP से भी ज्यादा
अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को मापने वाले रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। Q1 FY2026-27 में रियल GVA 8.2% बढ़कर 73.82 लाख करोड़ रुपए हो गया। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 68.21 लाख करोड़ रुपए था। मौजूदा कीमतों पर नॉमिनल GVA की ग्रोथ 11.5% रही और यह 80.53 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
नए बेस ईयर से बदली GDP की तस्वीर
MoSPI ने इस बार GDP के आंकड़ों की गणना के लिए 2022-23 को बेस ईयर बनाया है। इससे पहले GDP की गणना 2011-12 को आधार मानकर की जाती थी। सरकार ने 27 फरवरी 2026 को 2022-23 बेस ईयर वाली GDP की नई सीरीज जारी की थी। इसके बाद 5 जून को वित्त वर्ष 2025-26 के प्रोविजनल GDP आंकड़े जारी किए गए थे। अब Q1 FY2026-27 के आंकड़ों के साथ पुराने वर्षों और तिमाहियों के आंकड़ों को भी अपडेट किया गया है।
2022-23 से अब तक के आंकड़े भी अपडेट
नई सीरीज के तहत वित्त वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के वार्षिक GDP आंकड़ों को संशोधित किया गया है। इसके अलावा 2022-23 की पहली तिमाही से 2025-26 की चौथी तिमाही तक के तिमाही आंकड़ों में भी नए डेटा को शामिल किया गया है। MoSPI के मुताबिक इन संशोधनों में विभिन्न सरकारी विभागों से मिले अपडेटेड प्रशासनिक आंकड़ों के साथ नए उत्पादन और मूल्य संबंधी डेटा का इस्तेमाल किया गया है।
GDP की गणना में किन आंकड़ों का इस्तेमाल होता है?
GDP तैयार करने के लिए अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों से मिलने वाले आंकड़ों को शामिल किया जाता है। इनमें औद्योगिक उत्पादन, कीमतों से जुड़े इंडेक्स, बैंकिंग सेवाएं और विभिन्न सरकारी विभागों से मिलने वाले प्रशासनिक आंकड़े प्रमुख हैं। खर्च के आधार पर भी अर्थव्यवस्था की तस्वीर तैयार की जाती है। इसमें निजी खपत, सरकारी खर्च, निवेश, निर्यात और आयात जैसे आंकड़े शामिल होते हैं। ये आंकड़े स्थिर कीमतों और मौजूदा कीमतों दोनों के आधार पर जारी किए जाते हैं।
सरकार ने डेटा में सुधार और नए स्रोत जोड़े
नई GDP सीरीज में सिर्फ बेस ईयर बदला नहीं गया है, बल्कि आंकड़े जुटाने और अर्थव्यवस्था को मापने की प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए हैं। MoSPI ने अपडेटेड औद्योगिक उत्पादन, कीमतों और अलग-अलग प्रशासनिक स्रोतों से मिले डेटा को नई गणना में शामिल किया है। MoSPI ने यह भी स्पष्ट किया है कि GDP के ये आंकड़े आगे चलकर संशोधित हो सकते हैं। नए डेटा और स्रोत एजेंसियों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर बाद की रिलीज में आंकड़ों में बदलाव संभव है।
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