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Chhattisgarh: व्यापारियों और आम जनता के हित में साय सरकार का बड़ा निर्णय, ई-वे बिल की सीमा ₹1 लाख हुई

Raipur: छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के छोटे व्यापारियों और मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानि आज 1 अप्रैल से ई-वे बिल की सीमा में बढ़ोतरी कर दी है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ के भीतर माल परिवहन के लिए अनिवार्य ई-वे बिल की सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी है। यह निर्णय विशेष रूप से छोटे व्यापारियों को राहत देने के उद्देश्य से लिया गया है। इस निर्णय से व्यापारियों को ₹1 लाख तक के मूल्य के सामानों के परिवहन में अब ई-वे बिल की आवश्यकता नहीं होगी। व्यापारियों द्वारा लंबे समय से ई-वे बिल में छूट दिए जाने की मांग पर यह निर्णय लिया गया है, जो व्यापार को सुगम और लागत प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल है।
विष्णुदेव साय सरकार के इस निर्णय से राज्य में ई-वे बिल जनरेट करने वाले लगभग 26% व्यापारियों को ई-वे बिल जनरेट करने से मुक्ति मिलेगी। इस निर्णय से ई-वे बिल जनरेशन में 54 प्रतिशत की कमी आएगी, जिससे अनुपालन व्यय में उल्लेखनीय कमी आएगी। हालांकि, कुछ विशेष वस्तुएं जैसे पान मसाला, तंबाकू उत्पाद, विशिष्ट लकड़ी उत्पाद जैसे – प्लायवुड, लेमिनेटेड शीट, पार्टिकल बोर्ड, फाइबर बोर्ड, आयरन, स्टील एवं उसके सामान, कोयला के लिए यह छूट लागू नहीं होगी।
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Chhattisgarh: परिवहन पोर्टल से घर बैठे बनवाएं लायसेंस और कराएं वाहनों का पंजीयन, कुल 42 सेवाएं शामिल

Parivan Portel: छत्तीसगढ़ शासन, परिवहन विभाग द्वारा आम नागरिकों को दी जा रही सुविधाओं को अधिक सुगम बनाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए आम नागरिकों को किसी मध्यस्थ की आवश्यकता नहीं है। घर बैठे ही आवेदकों द्वारा इन सुविधाओं के लिए आवेदन किया जा सकता है। परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश ने बताया कि सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निर्मित परिवहन सेवा पोर्टल Parivahan.gov.in में जाकर आवेदकों द्वारा वांछित सेवा का चुनाव कर आधार अभिप्रमाणन द्वारा उक्त सेवा का लाभ लिया जा सकता है।
आधार अभिप्रमाणन के बाद परिवहन पोर्टल में दिये गए सेवाओं के तहत् वाहन से संबंधित 23 सेवाएं तथा सारथी (चालक लाईसेंस से संबंधित) के 19 सेवाएं शामिल हैं। अब तक वाहन 4.0 संबंधी सेवाओं हेतु 1,724 आवेदन एवं सारथी 4.0 के माध्यम से लाईसेंस संबंधी 34,225 आवेदन का निराकरण 01 वर्ष के भीतर किया गया है। परिवहन विभाग आम नागरिकों की सुविधाओं में वृद्धि करने हेतु सतत् रूप से प्रयासरत् है।
वाहन से संबंधित 23 सेवाएं – मोटर वाहन के अस्थायी पंजीकरण के लिए आवेदन, पूर्ण निर्मित बॉडी वाले मोटर वाहन के पंजीकरण के लिए आवेदन, पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC) की डुप्लिकेट जारी करने के लिए आवेदन, पंजीकरण प्रमाणपत्र शुल्क जमा करना, पंजीकरण प्रमाणपत्र के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्रदान करने के लिए आवेदन, पंजीकरण प्रमाणपत्र में पते में परिवर्तन, शुल्क के विरुद्ध पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC) विवरण देखें, मोटर वाहन के स्वामित्व के हस्तांतरण की सूचना, मोटर वाहन के स्वामित्व के हस्तांतरण के लिए आवेदन, किराया-खरीद समझौते का समर्थन, किराया-खरीद समझौते की समाप्ति, नए परमिट जारी करना, डुप्लिकेट परमिट जारी करना, परमिट का स्थायी समर्पण, परमिट का हस्तांतरण, परमिट का हस्तांतरण (मृत्यु मामला), परमिट का नवीनीकरण परमिट, परमिट प्राधिकरण का नवीनीकरण, विशेष परमिट के लिए आवेदन, अस्थायी परमिट के लिए आवेदन, परिवहन सेवाओं के लिए रिकॉर्ड में मोबाइल नंबर अपडेट करना, डुप्लीकेट फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करना और वाहन का रूपांतरण सेवाएं शामिल हैं।
चालक लाईसेंस से संबंधित 19 सेवाएं – लर्नर लाइसेंस में पता बदलना, डुप्लीकेट लर्नर लाइसेंस जारी करना, डुप्लीकेट ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) जारी करना, ड्राइविंग लाइसेंस का नवीनीकरण जिसके लिए ड्राइविंग योग्यता का परीक्षण आवश्यक नहीं है, ड्राइविंग लाइसेंस का प्रतिस्थापन, ड्राइविंग लाइसेंस में पता बदलना, ड्राइविंग लाइसेंस में बायोमेट्रिक्स बदलना, ड्राइविंग लाइसेंस में फोटो और हस्ताक्षर बदलना, ड्राइविंग लाइसेंस एक्सट्रैक्ट प्रोविजनिंग, इंटरनेशनल ड्राइविंग परमिट जारी करना, लाइसेंस से वाहन की श्रेणी का सरेंडर करना, खतरनाक सामग्री चलाने के लिए अनुमोदन, ड्राइवर को पब्लिक सर्विस व्हीकल (पीएसवी) बैज जारी करना, डुप्लीकेट पब्लिक सर्विस व्हीकल (पीएसवी) बैज जारी करना, कंडक्टर लाइसेंस का नवीनीकरण, डुप्लीकेट कंडक्टर लाइसेंस जारी करना, कंडक्टर लाइसेंस में पता बदलना, कंडक्टर में बायोमेट्रिक्स बदलना लाइसेंस और कंडक्टर लाइसेंस में नाम परिवर्तन सेवाएं शामिल हैं।
इस तरह लें सेवाओं का लाभ
उपरोक्त सेवाओं का लाभ लेने के लिए आवेदकों को सर्वप्रथम परिवहन सेवा पोर्टल Parivahan.gov.in में जाकर वेबसाईट में प्रदर्शित हो रहे Menu Bar में ऑनलाइन सर्विसेस को सेलेक्ट करना है। सेलेक्ट करते ही Vehicle Related Services जो कि वाहन सेवा से संबंधित है का चयन करते ही वाहन से संबंधित विभिन्न सेवाओं हेतु विकल्प प्रदर्शित होता है। इसी प्रकार चालक लाइसेंस से संबंधित सेवाओं हेतु वेबसाइट में प्रदर्शित हो रहे Menu Bar में ऑनलाइन सर्विसेस के तहत् Driving License Related Services का चयन करने पर ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित विभिन्न सेवाओं हेतु विकल्प प्रदर्शित होता है। आवेदक अपने कार्य से संबंधित विकल्प का चुनाव कर, सुविधा का लाभ ले सकता है।
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Chhattisgarh: नक्सल प्रभावित जिलों में निर्माण कार्यों के लिए “जिला निर्माण समिति” का गठन, CM साय का बड़ा निर्णय

Raipur: छत्तीसगढ़ सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाते हुए नक्सल प्रभावित सुकमा, बीजापुर एवं नारायणपुर जिलों में निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु “जिला निर्माण समिति” के गठन की स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनता के पैसे से चलने वाले कार्यों में गुणवत्ता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। इसी तारतम्य में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जिला निर्माण समिति के गठन के सम्बन्ध में आदेश जारी किया गया है। यह समिति निर्माण कार्यों के बेहतर क्रियान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए गठित की गई है। समिति के अध्यक्ष जिला कलेक्टर रहेंगे। जिले के पुलिस अधीक्षक, सीईओ जिला पंचायत, डीएफओ, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री, जिला कोषालय अधिकारी एवं संबंधित कार्य के जिला प्रमुख अधिकारी समिति के सदस्य रहेंगे। जिला निर्माण समिति का कार्य क्षेत्र संपूर्ण राजस्व जिला होगा।
कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति वर्तमान नियमों के तहत् सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी की जाएगी। जिला निर्माण समिति के माध्यम से किए जाने वाले कार्यों का निर्धारण जिला कलेक्टर द्वारा किया जायेगा। जिन कार्यों को 3 बार ऑनलाइन निविदा आमंत्रित करने के बाद भी, इच्छुक ठेकेदार उपलब्ध नहीं होने के कारण पूरा कराया जाना संभव न हो, ऐसे अत्यावश्यक तथा अपरिहार्य निर्माण कार्यों को जिला निर्माण समिति के माध्यम से कराया जायेगा। जिले के जो ब्लॉक गहन रूप से नक्सल प्रभावित नहीं है, उनमें जिला निर्माण समिति के माध्यम से यथासंभव कार्य नहीं कराए जाने के निर्देश हैं। स्थानीय निधि जैसे की डीएमएफ/सीएसआर इत्यादि मद से कराए जाने वाले कार्यों में भी सर्वप्रथम कार्य एजेंसी जैसे की पीडब्लूडी/ आरईएस/पीएमजीएसवाई इत्यादि को ही क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया जाना चाहिए, ना कि जिला निर्माण एजेंसी को। इन एजेंसी के द्वारा अगर कार्य निष्पादन नहीं हो पाता है, लगातार 3 बार निविदा में कोई भाग नहीं लेता है, तब ऐसी परिस्थिति में ही कार्य स्थानीय निधि से जो कराए जाने है, उसमें जिला निर्माण एजेंसी को क्रियान्वयन एजेंसी बनाया जा सकता है।
समिति के माध्यम से 10 करोड़ रुपए तक का कार्य कराए जा सकेंगे। अपरिहार्य तथा अत्यावश्यक निर्माण कार्यों को जिला निर्माण समिति से कराये जाने के संबंध में ई-टेण्डर द्वारा निविदा आमंत्रित की जायेगी। जिला निर्माण समिति द्वारा एक कार्य को निर्माण की सुविधा की दृष्टि से दो अथवा दो से अधिक भागों में विभाजित किया जा सकेगा, जैसे-पुल-पुलियों के कार्य सहित सड़क निर्माण का कार्य स्वीकृत हो, तो सड़क कार्य के लिये अलग ठेकेदार तथा पुल-पुलियों के लिये अलग-ठेकेदार नियुक्त करने की छूट होगी। सड़क की लंबाई अधिक होने अथवा पुल-पुलियों की संख्या अधिक होने की स्थिति में सड़क को दो अथवा दो से अधिक भागों में बांटने तथा अलग-अलग पुल-पुलियों के लिये भी अलग-अलग एजेंसी नियुक्त करने की छूट होगी, किन्तु एक कार्य को छोटे-छोटे टुकडों में विभाजित करते समय समिति द्वारा इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि समग्र रूप से कार्य की गुणवत्ता एक जैसी रहे तथा अलग-अलग टुकड़ों में कराए गए कार्यों के लागत मूल्य में समानता रहे। यदि कार्य को अलग अलग-अलग टुकड़ों में कराया जाता है तो यह ध्यान रखा जाए कि विगत तीन वर्षों में जिले में विभिन्न विभागों के द्वारा कराए गए समान प्रवृत्ति के कार्य के दर से अधिक नहीं हो। कार्यों का निरीक्षण, पर्यवेक्षण तथा मूल्यांकन का कार्य लोक निर्माण विभाग या कलेक्टर द्वारा निर्धारित किसी सक्षम तकनीकी अधिकारी के द्वारा किया जायेगा।
पारदर्शिता को मिलेगा संस्थागत ढांचा, दरों की समुचितता और प्रतिस्पर्धात्मकता की जाएगी सुनिश्चित
निविदा स्वीकार करने वाला प्राधिकारी निविदाओं को स्वीकार करने से पहले दरों की उचितता के बारे में खुद को संतुष्ट करेगा। दरों की उचितता का आंकलन मुख्य रूप से उचित दरों के आधार पर किया जाएगा, निविदा स्वीकार करने वाला प्राधिकारी निविदाओं पर निर्णय लेते समय पिछले तीन महीनों की अवधि के भीतर बुलाए गए कार्यों की समान प्रकृति की निविदाओं की दरों का उल्लेख कर सकता है। समान कार्यों का अर्थ है प्रकृति, मात्रा, विनिर्देशों और स्थान में समान कार्य, जो बहुत करीब है। दरों की उचितता की जांच के लिए औचित्य कथन तैयार किया जाएगा। इस विधि में श्रम, सामग्री, माल ढुलाई आदि की बाजार दरों को ध्यान में रखते हुए दरों का विस्तृत विश्लेषण तैयार करना शामिल है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में यह पहल न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगी, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास को गति देने के साथ-साथ भ्रष्टाचार पर कठोर प्रहार भी करेगी। राज्य शासन के विकास, विश्वास और पारदर्शिता के मूल सिद्धांतों को सशक्त करने की दिशा में मुख्यमंत्री साय की यह रणनीति एक निर्णायक कदम है।
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Chhattisgarh: डीएमएफ फंड से होगा गीदम मेडिकल कॉलेज भवन निर्माण, 299.85 करोड़ की मिली प्रशासकीय स्वीकृति

Dantewada: छत्तीसगढ़ में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) की राशि का जनहित में लोगों को गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में उपयोग प्रारंभ हो गया है। इसी क्रम में दंतेवाड़ा जिले की डीएमएफ शासी परिषद की बैठक में गीदम में नवीन शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय भवन निर्माण कार्य हेतु ₹299 करोड़ 85 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। यह स्वीकृति क्षेत्रीय स्वास्थ्य ढांचे को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में यह पहल न सिर्फ गीदम और दंतेवाड़ा क्षेत्र के लोगों को अपने निवास के समीप उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराएगी, बल्कि यह संपूर्ण बस्तर अंचल के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को भी मजबूती प्रदान करेगी। इस महत्वपूर्ण परियोजना के क्रियान्वयन के लिए लोक स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत सीजीएमएससी (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन) को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया है। सीजीएमएससी नियमानुसार राज्य शासन एवं पीडब्ल्यूडी मैनुअल के प्रावधानों के तहत निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश और निर्धारित समय सीमा का पालन सुनिश्चित करेगी।
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Chhattisgarh: प्रदेश में में आज से पेट्रोल एक रुपया लीटर सस्ता, विष्णु देव सरकार ने बजट में की थी घोषणा

Raipur: विष्णुदेव साय सरकार ने आम जनता को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल के दाम में कटौती करते हुए नए वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में पेट्रोल प्रति लीटर 1 रुपए सस्ता करने की घोषणा की है, जो 31 मार्च को आधी रात से लागू हो गई है। इसके साथ ही रायपुर में अब पेट्रोल की कीमत घटकर 100.42 रुपए प्रति लीटर हो गई है। यह कटौती प्रदेशवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद हुई है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के सभी शहरों में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपए प्रति लीटर से ऊपर हैं।
छत्तीसगढ़ में दुपहिया वाहनों का उपयोग करने वालों की संख्या अधिक है, जो मुख्यतः पेट्रोल पर निर्भर हैं। वैट में की गई यह कटौती इन परिवारों की रोज़मर्रा की लागत को कम करने में सहायक सिद्ध होगी। वहीं राज्य सरकार को राजस्व का घाटा होगा। वाणिज्यक कर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उपभोग बढ़ने से राजस्व नुकसान की भरपाई जाएगी।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 2025-26 के बजट में जनता को राहत देने पेट्रोल की कीमत में ₹1 प्रति लीटर की कमी की गई है, जिससे आम लोगों, किसानों और उद्योगों को लाभ होगा। इसके पहले सरकार ने बल्क में डीजल खरीदी पर वैट घटाकर 17% कर दिया था, जिससे परिवहन और कृषि कार्यों की लागत में कमी आई है।
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Bastar ke Ram: दंतेवाड़ा में गूंजेगा बस्तर के राम, 3 अप्रैल को डॉ. कुमार विश्वास सुनाएंगे ‘बस्तर के राम’ की अनुपम कथा

Bastar Pandum: बस्तर क्षेत्र की कला, संस्कृति और परंपराओं के उत्सव ‘बस्तर पंडुम’ में डॉ. कुमार विश्वास द्वारा “बस्तर के राम” कथा का वाचन किया जाएगा। आगामी 3 अप्रैल को होने वाला यह आयोजन, बस्तर क्षेत्र में शांति और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के नए सोपान तय करेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने “बस्तर पंडुम 2025” को बस्तर की आत्मा से जुड़ा एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण बताते हुए कहा कि यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की अस्मिता, आस्था और आकांक्षाओं का उत्सव है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘बस्तर के राम’ जैसे कार्यक्रम बस्तर की धरती को आध्यात्मिक ऊर्जा से जोड़ते हैं और यह सिद्ध करते हैं कि विकास का सबसे सशक्त मार्ग संस्कृति और परंपरा से होकर जाता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास जताया कि यह उत्सव बस्तर को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगा और हमारी जनजातीय परंपराएं आने वाली पीढ़ियों के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।
उल्लेखनीय है कि दंडकारण्य क्षेत्र का रामायण काल में विशेष स्थान रहा है और प्रभु श्री राम ने अपने वनवास काल का कुछ समय दंडकारण्य के जंगलों में व्यतीत किया था। डॉ. कुमार विश्वास बस्तर क्षेत्र के परिपेक्ष्य में श्री राम के महत्व पर अपनी राम कथा “बस्तर के राम” का वाचन करेंगे।
बस्तर पण्डुम आयोजन में डॉ. कुमार विश्वास की वाणी में जब राम कथा की गूंज बस्तर की वादियों में फैलेगी तो इसमें सिर्फ शब्द नहीं बल्कि एक भावना होगी, शांति, एकता और पुनर्जागरण की। इस आयोजन के माध्यम से बस्तर क्षेत्र में श्री राम के प्रवास का स्मरण कर अपनी समृद्ध पौराणिक विरासत का अनुभव कर सकेंगे।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने “बस्तर के राम” के आयोजन पर कहा कि “बस्तर पण्डुम” और “बस्तर के राम” जैसे आयोजन बस्तर क्षेत्र को भारत और विश्व से जोड़ते एक सांस्कृतिक सेतु की तरह है, जो हमारे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के बस्तर क्षेत्र के समेकित विकास के संकल्प का परिचायक है। बस्तर क्षेत्र आज गर्व से साक्षी बन रहा है कि हिंसा का अंत संभव है और शांति का मार्ग संस्कृति से होकर गुजरता है।
उल्लेखनीय है कि जनजातीय बाहुल्य बस्तर संभाग के स्थानीय कला, संस्कृति एवं जीवन शैली संरक्षण-संवर्धन एवं प्रोत्साहन के लिए राज्य शासन द्वारा “बस्तर पण्डुम 2025” का आयोजन किया जा रहा है जिसके उद्घाटन सत्र में शाम 6 बजे “बस्तर के राम” कार्यक्रम किया जाना निर्धारित है।
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