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Chhattisgarh: रेलवे की देश के 48 प्रमुख शहरों में संचालन क्षमता दोगुनी करने की महत्वाकांक्षी योजना, रायपुर भी योजना में शामिल

Raipur: भारतीय रेलवे द्वारा अगले पांच वर्षों में देश के 48 प्रमुख शहरों में रेलगाड़ियों की संचालन क्षमता को दोगुना करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गई है। इसमें छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को भी शामिल किया गया है। इस निर्णय का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के करोड़ों यात्रियों के लिए बड़ा तोहफा है और इससे राज्य की कनेक्टिविटी, व्यापार, उद्योग तथा पर्यटन गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे का व्यापक आधुनिकीकरण हो रहा है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा घोषित इस योजना से छत्तीसगढ़ जैसे उभरते हुए राज्य को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर जंक्शन देश के प्रमुख रेल जंक्शनों में से एक है और यहां प्रतिदिन लाखों यात्री आवागमन करते हैं। संचालन क्षमता दोगुनी होने से लोगों को अधिक ट्रेनें, बेहतर आवृत्ति तथा कम भीड़भाड़ का लाभ मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर के साथ-साथ अन्य औद्योगिक और वाणिज्यिक नगरों के लिए भी यह योजना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। रेल संरचना के विस्तार से निवेश, रोजगार और लॉजिस्टिक्स की सुगमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिलेगी।
रेल मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार वर्ष 2030 तक संचालन क्षमता दोगुनी करने के लिए मौजूदा टर्मिनलों पर अतिरिक्त प्लेटफार्म, पिट लाइन एवं स्टेबलिंग लाइन का निर्माण, शहरी क्षेत्र और आसपास नए टर्मिनलों की स्थापना, सिग्नलिंग, यार्ड आधुनिकीकरण और मल्टीट्रैकिंग के माध्यम से अनुभागीय क्षमता में वृद्धि और मेगा कोचिंग कॉम्प्लेक्स एवं आधुनिक रखरखाव सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रायपुर में इन सुविधाओं के विकसित होने से आम यात्रियों के साथ-साथ छात्रों, मरीजों, उद्योगपतियों और व्यापारियों सभी वर्गों को राहत मिलेगी। राज्य सरकार रेलवे मंत्रालय के साथ समन्वय स्थापित कर इस योजना को तेज गति से धरातल पर उतारने के लिए हर संभव सहयोग देगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ देश के सर्वाधिक बेहतर रेल संपर्क वाले राज्यों में शामिल होगा और यह परिवर्तन “विकसित भारत @2047” के संकल्प को सशक्त करेगा।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में 41 हजार करोड़ रूपए की लागत से रेलवे सुविधाओं के विस्तार का काम तेजी से चल रहा है, जिसमें रेल्वे ट्रैक का विस्तार, रेलवे लाईन का दोहरीकरण, रेलवे फ्लाई ओवर एवं ब्रिज आदि का निर्माण शामिल है। केंद्र सरकार ने इस साल के बजट में छत्तीसगढ़ राज्य में रेल्वे सुविधा के विकास के लिए 6925 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। इससे राज्य में रेल परियोजनाओं के कामों को तेजी से पूरा करने में मदद मिलेगी।
छत्तीसगढ़ में रेलवे के उन्नयन और विकास के लिए 41,000 करोड़ रुपए के निवेश से नई रेल लाइनों, रेलवे फ्लाईओवर और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य में रेलवे का शत-प्रतिशत इलेक्ट्रिफिकेशन का काम पूरा हो गया है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव जी को छत्तीसगढ़ की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को अभूतपूर्व रेल परियोजनाओं की सौगात मिली है। ये परियोजनाएं राज्य के विकास को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी और जनता को बेहतर रेल सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच बेहतर समन्वय के कारण छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क विस्तार की ऐतिहासिक पहल हो रही है। इससे यात्री सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ औद्योगिक, खनिज और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। छत्तीसगढ़ में रेलवे नेटवर्क विस्तार से न केवल यात्री परिवहन बल्कि खनिज संपदा और औद्योगिक उत्पादों के निर्यात में तेजी आएगी। इससे राज्य में व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
छत्तीसगढ़ में रेलवे के दीर्घकालिक विकास के लिए रावघाट-जगदलपुर, धरमजयगढ़-लोहरदगा और खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा जैसी कई नई रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को ऐतिहासिक रेलवे बजट प्राप्त हुआ है। यह राज्य की अर्थव्यवस्था, औद्योगिक विकास और यात्री सुविधाओं को नया आयाम मिलेगा। उन्होंने इसके लिए केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार इस विकास यात्रा को और आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
गौरतलब है कि रावघाट रेलवे लाइन के अन्तर्गत दल्लीराजहरा-अंतागढ़ (77 किमी) सेक्शन चालू, यात्री ट्रेनों का संचालन शुरू हो चुका है। रावघाट तक विस्तार कार्य प्रगति पर, जिससे भिलाई इस्पात संयंत्र को लौह अयस्क की आपूर्ति होगी और ग्रामीणों को किफायती यातायात सुविधा मिलेगी। इसके अलावा के.के. रेल लाइन दोहरीकरण के अन्तर्गत 170 किमी में से 148 किमी का कार्य पूर्ण हो चुका है। इससे बस्तर और दंतेवाड़ा जिले की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। आवागमन आसान और माल परिवहन सुविधाजनक हो सकेगा।
इसी तरह 4021 करोड़ रुपए की लागत वाली डोंगरगढ़-कवर्धा-कटघोरा रेल लाइन परियोजना की लंबाई 295 किमी है। इसके निर्माण से खनिज परिवहन, यात्री सुविधाएं और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। कोरबा-अंबिकापुर नई रेल लाइन से सरगुजा क्षेत्र को नए विकास की दिशा मिलेगी। गढ़चिरौली-बीजापुर-बचेली 490 किमी लंबी परियोजना के सर्वेक्षण के लिए 12.25 करोड़ रुपए मंजूर हुए हैं। सरडेगा-भालुमुडा डबल लाइन से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
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Chhattisgarh: जन्माष्टमी पर 4 सितंबर को छत्तीसगढ़ में शुष्क दिवस, शराब दुकानें, बार और क्लब रहेंगे बंद; अवैध बिक्री पर उड़नदस्तों की नजर

रायपुर: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर 4 सितंबर, शुक्रवार को पूरे छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री और परोसने पर रोक रहेगी। राज्य शासन ने इस दिन को ‘शुष्क दिवस’ घोषित किया है। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं।
शराब दुकान से लेकर होटल-बार तक सब बंद
शुष्क दिवस के दौरान प्रदेश की सभी देशी और विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानें बंद रहेंगी। इसके अलावा रेस्टोरेंट बार, होटल-बार, क्लब, अहाता और शराब बेचने या परोसने वाले अन्य सभी लाइसेंसी प्रतिष्ठान भी बंद रहेंगे। भांग और भांगघोटा की फुटकर दुकानें भी 4 सितंबर को नहीं खुलेंगी।
होटल-रेस्टोरेंट और क्लबों में भी शराब पर रोक
शासन के निर्देश के मुताबिक शुष्क दिवस के दौरान किसी भी होटल, रेस्टोरेंट, क्लब या अन्य प्रतिष्ठान अथवा व्यक्ति को शराब बेचने या परोसने की अनुमति नहीं होगी। गैरमालिकाना क्लब, रेस्टोरेंट और स्टार होटल भी इस प्रतिबंध के दायरे में आएंगे।
शराब का भंडारण भी प्रतिबंधित
शुष्क दिवस के दौरान व्यक्तिगत रूप से शराब का भंडारण करने और गैर-लाइसेंसी परिसरों में शराब रखने पर भी रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर शराब जब्त करने के साथ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अवैध शराब के खिलाफ चलेगा जांच अभियान
शराब की अवैध बिक्री, परिवहन और संग्रहण रोकने के लिए आबकारी विभाग ने निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। जिला कार्यालयों के साथ संभागीय और राज्य स्तरीय उड़नदस्ते भी कार्रवाई करेंगे। जांच दल संदिग्ध वाहनों और अवैध शराब के संभावित संग्रहण स्थलों की जांच करेंगे। अवैध शराब मिलने पर उसे जब्त कर संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाएगा।
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Chhattisgarh: बस्तर फाइटर्स में 4600 पदों पर सीधी भर्ती, स्थानीय बोली जानने वालों को मिलेंगे 20 बोनस अंक

रायपुर: बस्तर संभाग के स्थानीय युवाओं को पुलिस सेवा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार बस्तर फाइटर्स में 4600 आरक्षकों की सीधी भर्ती करने जा रही है। भर्ती की नियमावली गृह विभाग ने तैयार कर ली है। अब पुलिस मुख्यालय की ओर से अलग से विज्ञापन जारी किया जाएगा। भर्ती में स्थानीय भाषा- बोली का ज्ञान रखने वाले अभ्यर्थियों को 20 बोनस अंक दिए जाएंगे।
इस भर्ती में सबसे महत्वपूर्ण शर्त संबंधित जिले का स्थानीय निवासी होना है। यानी अभ्यर्थी उसी जिले का स्थानीय निवासी होना चाहिए, जिसके लिए भर्ती की जा रही है। सरकार का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को पुलिस सेवा में अवसर देने के साथ बस्तर के दुर्गम इलाकों में पुलिस और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना है।
सामान्य वर्ग 10वीं पास, ST को 5वीं पास पर भी मौका
सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास रखी गई है। वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के उम्मीदवार 5वीं पास होने पर भी भर्ती के लिए पात्र होंगे। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के नक्सल पीड़ित परिवारों और राहत शिविरों में रहने वाले परिवारों के सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को भी 5वीं पास होने पर आवेदन का अवसर मिलेगा।
18 से 28 वर्ष होगी आयु सीमा
भर्ती में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी की उम्र 18 से 28 वर्ष के बीच होनी चाहिए। SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट मिलेगी। महिलाओं, पूर्व सैनिकों, नगर सैनिकों और संविदा कर्मचारियों को भी नियमों के अनुसार अतिरिक्त आयु छूट का लाभ मिलेगा।
200 अंकों की होगी पूरी चयन प्रक्रिया
बस्तर फाइटर्स की चयन प्रक्रिया कुल 200 अंकों की होगी। शुरुआत 100 अंकों की शारीरिक दक्षता परीक्षा से होगी। इसमें अभ्यर्थियों को लंबी कूद, ऊंची कूद, गोला फेंक के साथ 100 मीटर और 800 मीटर दौड़ में प्रदर्शन करना होगा।शारीरिक दक्षता परीक्षा में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को कम से कम 60% अंक, जबकि SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवारों को न्यूनतम 50% अंक हासिल करने होंगे। इसके बाद मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा के लिए चुना जाएगा।
लिखित परीक्षा में बस्तर की समझ भी परखी जाएगी
लिखित परीक्षा में सामान्य ज्ञान, बुद्धि-विवेक, अंकगणित के साथ स्थानीय भूगोल और संस्कृति से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। लिखित परीक्षा के बाद मेरिट के आधार पर पदों की संख्या से तीन गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इंटरव्यू 20 अंकों का होगा। स्थानीय भाषा-बोली के ज्ञान के लिए भी निर्धारित बोनस अंक चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
स्थानीय महिलाओं, होमगार्ड और पूर्व सैनिकों को आरक्षण
इस भर्ती में अलग-अलग वर्गों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। स्थानीय महिलाओं को 30%, तीन वर्ष की सेवा पूरी कर चुके होमगार्ड जवानों को 25% और भूतपूर्व सैनिकों को 10% आरक्षण दिया जाएगा। चयनित जवानों को नई पेंशन प्रणाली के तहत NPS या UPS (यूनिफाइड पेंशन स्कीम) में से किसी एक योजना का विकल्प चुनने का अधिकार होगा।
बस्तर फाइटर्स में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता क्यों?
दुर्गम इलाकों की बेहतर जानकारी: बस्तर के घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और दुर्गम रास्तों की स्थानीय युवाओं को बेहतर जानकारी होती है। इससे अभियान और पुलिसिंग में मदद मिल सकती है।
स्थानीय भाषा में संवाद: गोंडी, हल्बी जैसी स्थानीय बोलियों में ग्रामीणों से संवाद करने से पुलिस और आदिवासी समुदाय के बीच भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
नक्सल प्रभावित परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ना: 5वीं और 10वीं पास स्थानीय युवाओं तथा नक्सल प्रभावित परिवारों के सदस्यों को सरकारी सेवा का अवसर देकर उन्हें रोजगार और मुख्यधारा से जोड़ना भर्ती का एक अहम उद्देश्य है।
खुफिया सूचनाओं में मदद: स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की समझ रखने वाले जवानों से क्षेत्र में सूचनाओं के बेहतर और तेज आदान-प्रदान में मदद मिलने की उम्मीद है। 4600 पदों की यह भर्ती बस्तर के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का बड़ा अवसर होगी। साथ ही स्थानीय युवाओं को पुलिस बल में शामिल कर क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों का लाभ सुरक्षा व्यवस्था को देने की कोशिश भी की जाएगी।
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Chhattisgarh: नवा रायपुर में 40 एकड़ में बनेगा NMIMS कैंपस, 2-3 साल में शुरू होगी पढ़ाई

रायपुर/नवा रायपुर: छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी खबर है। देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) अब नवा रायपुर अटल नगर में अपना कैंपस स्थापित करेगा। सेक्टर-18 में करीब 40 एकड़ जमीन पर बनने वाले इस कैंपस के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
राज्य सरकार का कहना है कि NMIMS के आने से छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को प्रबंधन, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा के लिए दूसरे बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी। संस्थान का पहला शैक्षणिक बैच अगले दो से तीन वर्षों में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। कैंपस पूरी तरह विकसित होने के बाद करीब 10 हजार विद्यार्थी यहां अध्ययन कर सकेंगे।
90 साल की लीज पर मिली जमीन
NMIMS का संचालन करने वाले श्री विले पार्ले केलवणी मंडल (SVKM) को सेक्टर-18 की करीब 40 एकड़ जमीन 90 वर्ष की लीज पर दी गई है। राज्य मंत्रिपरिषद ने 21 जनवरी 2026 को संस्थान के लिए जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अब लीज और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कैंपस निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।संस्थान की स्थापना से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को अगले सात वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन पढ़ाई इससे पहले शुरू करने की तैयारी है।
महानगरों की जगह प्रदेश में ही मिलेंगे बड़े संस्थान के अवसर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली, मुंबई, पुणे या दूसरे बड़े शहरों का रुख न करना पड़े। NMIMS की स्थापना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का फोकस उच्च शिक्षा के साथ कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को जोड़ने पर है, ताकि युवा बदलती अर्थव्यवस्था और उद्योगों की जरूरत के अनुरूप तैयार हो सकें।
पढ़ाई के साथ रोजगार और स्टार्टअप को भी बढ़ावा
NMIMS के आने से सिर्फ डिग्री और पाठ्यक्रमों तक सीमित फायदा नहीं होगा। संस्थान के जरिए कौशल विकास, शोध, नवाचार और उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विद्यार्थियों को उद्योगों के साथ काम करने, व्यावहारिक अनुभव हासिल करने और नए कारोबारी विचारों पर काम करने के अवसर मिलेंगे। इससे छत्तीसगढ़ में विकसित हो रहे औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
देशभर से छात्र आएंगे, नवा रायपुर का एजुकेशन हब का सपना मजबूत होगा
NMIMS जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान के आने से नवा रायपुर में देश के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थी और शिक्षक आने की संभावना है। इससे शहर का शैक्षणिक और बौद्धिक माहौल और मजबूत होगा। राज्य सरकार नवा रायपुर को आधुनिक सुविधाओं वाले शहर के साथ एजुकेशन और नॉलेज हब के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। NMIMS की स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में प्रक्रिया पूरी
लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, आवास एवं पर्यावरण सचिव अंकित आनंद और नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के CEO चंदन कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कैंपस पूरी क्षमता से संचालित होने के बाद करीब 10 हजार विद्यार्थियों को यहां शिक्षा मिलने की उम्मीद है। इससे नवा रायपुर में शिक्षा के साथ आवास, परिवहन, सेवाओं और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
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Chhattisgarh: TGCG 2026 का पोस्टर लॉन्च, 20 दिसंबर को नवा रायपुर में दौड़ेंगे हजारों लोग, ‘Rivers of Chhattisgarh’ होगी इस साल की थीम

रायपुर/नवा रायपुर: छत्तीसगढ़ के प्रमुख रनिंग और फिटनेस आयोजनों में शामिल The Great Chhattisgarh Run (TGCG) 2026 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। शनिवार को नवा रायपुर में NRANVP के बोर्ड रूम में आयोजित कार्यक्रम में सीईओ श्री चंदन कुमार ने प्रतियोगिता के आधिकारिक पोस्टर का अनावरण किया। इस मौके पर NRANVP टीम और LetsRun Community के सदस्य मौजूद रहे।


TGCG का मुख्य आयोजन 20 दिसंबर 2026 को नवा रायपुर में होगा। पोस्टर लॉन्च के साथ ही इस साल के रनिंग इवेंट की आधिकारिक शुरुआत कर दी गई है। आयोजन से पहले आने वाले महीनों में रनिंग कम्युनिटी, फिटनेस प्रेमियों और आम लोगों को जोड़ने के लिए अलग-अलग जागरूकता और प्रचार गतिविधियां की जाएंगी।
LetsRun Community ने कहा कि NRANVP के सीईओ चंदन कुमार(आईएएस) द्वारा TGCG 2026 के आधिकारिक पोस्टर का अनावरण किया जाना इस वर्ष की यात्रा की गौरवपूर्ण शुरुआत है। टीम ने विश्वास व्यक्त किया कि NRANVP के सहयोग और रनिंग कम्युनिटी की भागीदारी से TGCG 2026 एक बार फिर फिटनेस, समुदाय और छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पहचान को एक साथ जोड़ने वाला यादगार आयोजन बनेगा।
इस बार नदियों से जोड़ी गई रनिंग की थीम
TGCG 2026 की थीम ‘Rivers of Chhattisgarh’ रखी गई है। आयोजन से जुड़े लोगों के मुताबिक छत्तीसगढ़ की नदियों को राज्य की जीवनधारा मानते हुए इस थीम में ऊर्जा, निरंतरता, प्रकृति और एकता का संदेश दिया गया है।
LetsRun Community का कहना है कि जिस तरह नदियां अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों को जोड़ते हुए लगातार आगे बढ़ती हैं, उसी तरह रनिंग लोगों को फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली के साझा मंच पर लाने का काम करती है।
11वें साल में पहुंचा TGCG
नवा रायपुर में TGCG का यह 11वां संस्करण होगा। आयोजकों के मुताबिक पिछले वर्षों में NRANVP और प्रशासन से मिले सहयोग ने इस रनिंग इवेंट को लगातार आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
LetsRun Community ने कहा कि TGCG का मकसद केवल एक दिन दौड़ आयोजित करना नहीं है। इसके जरिए लोगों को नियमित व्यायाम, स्वस्थ जीवनशैली और सामुदायिक भागीदारी के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जाता है।
‘Rivers of Chhattisgarh’ से मिलेगा नया विजुअल और सामाजिक कनेक्ट
आयोजन की इस साल की थीम में छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पहचान को रनिंग से जोड़ने की कोशिश की गई है। आयोजकों के अनुसार नदियों की रफ्तार और प्रवाह को रनिंग की ऊर्जा तथा लगातार आगे बढ़ने की भावना के साथ जोड़ा जाएगा।
20 दिसंबर को होने वाला TGCG 2026 इसी थीम के साथ रनिंग और फिटनेस से जुड़े लोगों को एक साझा मंच पर लाएगा। आयोजकों को उम्मीद है कि NRANVP के सहयोग और रनिंग कम्युनिटी की भागीदारी से इस साल का आयोजन फिटनेस के साथ छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पहचान को भी सामने लाएगा।
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Chhattisgarh: रक्षाबंधन पर CM साय बोले- बहनों का स्नेह और आशीर्वाद अनमोल, 68 लाख महिलाओं को हर महीने ₹1,000, 13.85 लाख बनीं लखपति दीदी

रायपुर: मुख्यमंत्री निवास में शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व आत्मीयता और उल्लास के साथ मनाया गया। समाज के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचीं माताओं-बहनों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कलाई पर राखी बांधी और उन्हें अपना स्नेह व आशीर्वाद दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहनों का यह स्नेह उनके लिए अनमोल है और उनका आशीर्वाद प्रदेश की सेवा के संकल्प को और मजबूत करता है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट स्नेह, विश्वास और आत्मीयता का पर्व है। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए महिलाओं का सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।
कर्नल अशोक दुबे की पत्नी ने बांधी राखी
कार्यक्रम में स्वर्गीय कर्नल अशोक कुमार दुबे की पत्नी सरला दुबे ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने इसे भावुक और गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय कर्नल अशोक कुमार दुबे सेना में शामिल होने वाले छत्तीसगढ़ के पहले जवान थे।
कार्यक्रम में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की सविता दीदी और स्मृति दीदी, पद्मश्री डॉ. उषा बारले, महिला आयोग की अध्यक्ष ममता साहू, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन सहित महिला पत्रकारों, स्व-सहायता समूहों की दीदियों, लखपति दीदियों, ड्रोन दीदियों, ई-रिक्शा दीदियों और विभिन्न समाजों की महिलाओं ने मुख्यमंत्री को राखी बांधी।
जवानों को भी बांधी राखी, 1600 सुरक्षाकर्मियों का किया सम्मान
मुख्यमंत्री ने रायपुर में आयोजित ‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि स्व-सहायता समूहों की बहनों, दिव्यांग बहनों और शहीद जवानों के परिवारों की महिलाओं ने CRPF, BSF, CISF और ITBP समेत विभिन्न सुरक्षा बलों के करीब 1600 जवानों की कलाई पर राखी बांधी।
साय ने कहा कि जवान त्योहारों पर भी अपने परिवार से दूर रहकर देश और प्रदेश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। ऐसे वीर जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना सभी का दायित्व है।
महिला पत्रकारों के साहस और समर्पण की सराहना
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में मौजूद महिला पत्रकारों का स्वागत करते हुए कहा कि पत्रकारिता साहस, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का कार्य है। महिला पत्रकार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी अपने दायित्व का निर्वहन कर समाज को देश-दुनिया की घटनाओं से अवगत करा रही हैं। साय ने बताया कि दिल्ली प्रवास से लौटने के दौरान शुक्रवार सुबह एयरपोर्ट पर पत्रकार जिज्ञासा ने भी उन्हें राखी बांधी।
महतारी वंदन से 68 लाख महिलाओं को आर्थिक मदद
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की करीब 68 लाख महिलाओं को हर महीने ₹1,000 की आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के मद्देनजर योजना की 31वीं किस्त की राशि निर्धारित समय से पहले 25 अगस्त को ही जारी कर दी गई। इसके तहत ₹631 करोड़ से अधिक की राशि महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।
साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना सिर्फ आर्थिक सहायता देने वाली योजना नहीं है, बल्कि इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। महिलाएं इस राशि का उपयोग घरेलू जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, बचत और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों में कर रही हैं।
छत्तीसगढ़ में 13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लखपति दीदी अभियान के तहत छत्तीसगढ़ को 8 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य मिला था। सरकार के मुताबिक, प्रदेश ने इस लक्ष्य को पार करते हुए पिछले दो वर्षों में 13 लाख 85 हजार महिलाओं को लखपति दीदी बनाया है। उन्होंने इसे प्रदेश की महिलाओं के परिश्रम, आत्मविश्वास और उद्यमशीलता का प्रमाण बताया।
ड्रोन से खेती में मदद कर रही गांव की महिलाएं
मुख्यमंत्री ने ड्रोन दीदी योजना का जिक्र करते हुए कहा कि गांवों की महिलाएं अब आधुनिक तकनीक से जुड़कर अपनी आय बढ़ा रही हैं। ड्रोन के जरिए खेतों में उर्वरक और दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। साय के मुताबिक, ड्रोन से प्रति एकड़ छिड़काव पर करीब ₹300 की आय होती है। 20 से 25 एकड़ में काम करने पर ड्रोन दीदियां प्रतिदिन ₹6 से ₹7 हजार तक कमा रही हैं।
नया रायपुर में 92 ई-रिक्शा दीदियां, जशपुर में 50 को मिले ई-रिक्शा
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को सिर्फ योजनाओं का लाभार्थी बनाने के बजाय उन्हें आर्थिक गतिविधियों में भागीदार बनाया जा रहा है। स्व-सहायता समूहों की महिलाएं अब पारंपरिक आजीविका के साथ नए क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही हैं।उन्होंने बताया कि नया रायपुर में 92 ई-रिक्शा दीदियां आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं। वहीं रक्षाबंधन के अवसर पर जशपुर के बगिया में 50 महिलाओं को ई-रिक्शा दिए गए हैं। साय ने कहा कि ई-रिक्शा महिलाओं के लिए सिर्फ आवागमन का साधन नहीं, बल्कि सम्मानजनक रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम भी है।
महिलाओं के नाम जमीन की रजिस्ट्री पर 50% छूट
मुख्यमंत्री ने बताया कि महिलाओं के नाम जमीन की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में 50% की छूट दी जा रही है। उनके मुताबिक, पिछले ढाई वर्षों में करीब 30 हजार रजिस्ट्रियां महिलाओं के नाम पर हुई हैं। उन्होंने कहा कि नई औद्योगिक विकास नीति में महिला उद्यमियों के लिए विशेष रियायत और प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। प्रदेश को अब तक करीब ₹8.50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त होने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही। साय ने महिलाओं से औद्योगिक नीति के प्रावधानों का लाभ उठाकर उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और विकास का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद लंबे समय तक छत्तीसगढ़ के विकास में बड़ी बाधा रहा। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की इच्छाशक्ति, सुरक्षा बलों के साहस और जनता के सहयोग से नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता मिली है। साय ने कहा कि जिन क्षेत्रों में पहले हिंसा और भय का माहौल था, वहां अब शांति, विश्वास और विकास की नई शुरुआत हो रही है। सरकार सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार कर रही है।
‘बहनों के सशक्तिकरण के बिना विकसित छत्तीसगढ़ का सपना अधूरा’
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में छत्तीसगढ़ भी अपनी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का सपना मातृशक्ति के सशक्तिकरण के बिना पूरा नहीं हो सकता। साय ने रक्षाबंधन पर प्रदेश की सभी माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनका स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद सरकार की शक्ति है। मातृशक्ति के सामर्थ्य से ही सशक्त परिवार, समृद्ध समाज और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण होगा।
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