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CG Cabinet Decisions: छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी, 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा भाव; बिजली बिल में राहत मार्च 2027 तक

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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक और धान खरीदी सहित विकास संबंधी फैसले।

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री निवास कार्यालय, सिविल लाइन रायपुर में आयोजित छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद की बैठक में किसानों, घरेलू बिजली उपभोक्ताओं, सरकारी कर्मचारियों और प्रदेश के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी 15 नवंबर से शुरू करने, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने और बिजली बिल में राहत की अवधि बढ़ाने का निर्णय प्रमुख है। इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा, मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन-2026, पर्यटन विकास मिशन और नई रेल परियोजना को लेकर भी मंजूरी दी गई।

15 नवंबर से होगी धान खरीदी, 3100 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा भाव

राज्य सरकार खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 15 नवंबर 2026 से किसानों से धान खरीदेगी। मंत्रिपरिषद के निर्णय के अनुसार, 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के मान से धान की खरीदी की जाएगी।

किसानों को पंजीयन प्रक्रिया में राहत देते हुए एग्रीस्टैक आईडी वाले पिछले वर्ष के पंजीकृत किसानों को धान बेचने के लिए मान्य किया गया है। ऐसे किसानों को अलग से पंजीयन कराने की जरूरत नहीं होगी। एग्रीस्टैक में पंजीयन होने के कारण धान विक्रय के लिए समिति में अलग से ऋण पुस्तिका लाने की आवश्यकता भी नहीं होगी।

धान के रकबे का निर्धारण डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से किया जाएगा। वास्तविक किसानों से खरीदी सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन की व्यवस्था रहेगी। किसानों की सुविधा के लिए 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू किए जाएंगे। इसके बाद प्रदेश में कुल 3100 केंद्रों के माध्यम से धान खरीदी की जाएगी।

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कैबिनेट ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 और 2025-26 के अतिशेष धान के नीलामी के माध्यम से निराकरण संबंधी मंत्रिमंडलीय उपसमिति के निर्णय का भी अनुसमर्थन किया।

बिजली बिल में राहत 31 मार्च 2027 तक बढ़ी

मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान यानी एम-ऊर्जा योजना के तहत घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल में दी जा रही रियायत जारी रहेगी। साथ ही योजना का लाभ लेने के लिए 400 यूनिट तक मासिक बिजली खपत की पात्रता अवधि 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है। इस फैसले से करीब 7.25 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को योजना के तहत मिलने वाली राहत का लाभ जारी रहने की उम्मीद है।

सरकारी कर्मचारियों और परिवारों को कैशलेस इलाज

मंत्रिपरिषद ने राज्य के शासकीय सेवकों और उनके आश्रित परिवारजनों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

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नई व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार के दौरान कर्मचारियों को चिकित्सा खर्च पहले अपनी जेब से चुकाकर बाद में प्रतिपूर्ति के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। पूर्व-अनुमोदन और चिकित्सा दावों की प्रक्रिया ऑनलाइन तथा डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी।

इस व्यवस्था से गंभीर बीमारी और आपातकाल में कर्मचारियों और उनके परिवारों को उपचार के साथ आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

सड़क निर्माण के लिए डामर पर 230 करोड़ रुपये तक की राहत

बिटुमिन यानी डामर की कीमतों में असाधारण वृद्धि को देखते हुए सरकार ने सड़क निर्माण, नवीनीकरण और संधारण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों को मूल्य राहत देने का फैसला किया है।

छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के अंतर्गत संचालित कार्यों के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक वास्तव में खरीदी और उपयोग की गई बिटुमिन की मात्रा पर 130.88 करोड़ रुपये की राहत बजट अनुदान के रूप में दी जाएगी।

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वहीं, लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत राज्य वित्त पोषित सड़क निर्माण, नवीनीकरण और संधारण के उन अनुबंधों में, जिनकी निविदाएं 1 अप्रैल 2026 से पहले प्राप्त हुई थीं, 15 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक खरीदे और उपयोग किए गए डामर पर भी राहत मिलेगी। इस मद में लगभग 70 से 100 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च का अनुमान है।

सरकार के अनुसार, इस निर्णय से लंबित डामरीकरण कार्यों को गति देने और उन्हें समय-सीमा में पूरा करने में मदद मिलेगी।

पांच साल में 500 करोड़ रुपये का अधोसंरचना मिशन

प्रदेश में सड़क और अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं की योजना, तैयारी, गुणवत्ता और निगरानी बेहतर बनाने के लिए ‘मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन-2026’ की गाइडलाइंस को मंजूरी दी गई है। यह मिशन वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच साल चलेगा। इसके लिए कुल 500 करोड़ रुपये यानी हर साल 100 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।

लोक निर्माण विभाग मिशन का नोडल विभाग होगा, जबकि छत्तीसगढ़ रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGRIDCL) क्रियान्वयन एजेंसी होगी। मिशन में सड़क नेटवर्क का मास्टर प्लान, डेटा आधारित जरूरतों का आकलन, परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पहले से तैयार करना, GIS आधारित नियोजन, डिजिटल कार्य निगरानी, गुणवत्ता जांच और सड़क सुरक्षा ऑडिट पर जोर दिया जाएगा।

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पर्यटन विकास मिशन के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन’ को भी मंजूरी दी गई है। ‘पर्यटन से समृद्धि’ के उद्देश्य से यह मिशन अगले पांच वर्षों तक संचालित होगा और इसके लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।

मिशन के तहत पर्यटन स्थलों पर बेहतर सड़क संपर्क, सुविधाएं, सुरक्षा और स्वच्छता विकसित करने के साथ होमस्टे, निजी निवेश और पर्यटन उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं, महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने का लक्ष्य है।

295 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना को मंजूरी

कैबिनेट ने कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ रेल परियोजना के शीघ्र क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CRCL) के माध्यम से शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

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लगभग 295 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत 8,000 करोड़ रुपये है। इसमें 25 प्रतिशत यानी करीब 2,000 करोड़ रुपये अंशपूंजी के रूप में प्रस्तावित हैं। इसमें छत्तीसगढ़ शासन और रेल मंत्रालय लगभग 1,000-1,000 करोड़ रुपये का योगदान देंगे। राज्य की हिस्सेदारी मिनरल डेवलपमेंट फंड, जिला खनिज न्यास (DMF) और राज्य बजट के माध्यम से वहन की जाएगी।

परियोजना से रेल सुविधा से वंचित क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने के साथ उद्योग, पर्यटन, रोजगार और कृषि उपज के लिए नए बाजारों तक पहुंच बढ़ाने की उम्मीद है।

1000 करोड़ रुपये या अधिक निवेश वाली कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं को प्रोत्साहन

मंत्रिपरिषद ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत 1000 करोड़ रुपये या उससे अधिक निवेश वाली कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज का प्रावधान किया गया है।इसका उद्देश्य राज्य के कोयला भंडार का मूल्यवर्धित उपयोग बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करना है।

पांच सरकारी परिसंपत्तियों का PPP मॉडल पर पुनर्विकास

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रिडेवलपमेंट योजना के दूसरे चरण में पांच परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। इनमें दुर्ग का शासकीय पोल्ट्री फार्म, रामानुजगंज का वेटरनरी अस्पताल परिसर, जशपुर में पुलिस लाइन और रणजीता स्टेडियम के पीछे की भूमि, सक्ती का बुधवारी बाजार और धमतरी के रुद्री चौक की शासकीय भूमि शामिल हैं।

इन परियोजनाओं का विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य जर्जर परिसंपत्तियों का नियोजित पुनर्विकास, भूमि का बेहतर उपयोग, राजस्व में वृद्धि और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

राजनांदगांव में भंडारण और फल प्रसंस्करण को बढ़ावा

कैबिनेट ने राजनांदगांव जिले के ग्राम खपरीकला में केंद्रीय भंडारण निगम (CWC) को 10 एकड़ भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे जिले में कृषि उपज सहित अन्य वस्तुओं के सुरक्षित भंडारण की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा ग्राम सोमनी में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के माध्यम से मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी स्थापित करने के लिए 31.55 एकड़ भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई है। परियोजना में लगभग 400 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। किसानों से सीधे फल खरीदने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके तहत 1000 से अधिक प्रत्यक्ष और 5000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने का अनुमान है।

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नगर पंचायत कूंरा का नाम अब कुंवरगढ़

मंत्रिपरिषद ने रायपुर जिले की नगर पंचायत कूंरा का नाम बदलकर कुंवरगढ़ करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। सरकार के अनुसार, कुंवरगढ़ अपनी ऐतिहासिक धरोहरों, प्राचीन मंदिरों और तालाबों के लिए जाना जाता है। स्थानीय नागरिक लंबे समय से इस ऐतिहासिक नाम को दोबारा स्थापित करने की मांग कर रहे थे।

राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े नौ मामले वापस लेने की अनुमति

कैबिनेट ने विशुद्ध रूप से राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े नौ प्रकरणों को जनहित में न्यायालय से वापस लेने के लिए उपसमिति की 30 सितंबर 2026 की बैठक में की गई अनुशंसा के अनुसार आगे की कार्रवाई की अनुमति दी है।

अन्य प्रमुख फैसले

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कृषि और भंडारण: राजनांदगांव में केंद्रीय भंडारण निगम को 10 एकड़ भूमि आवंटित करने की मंजूरी।

फल प्रसंस्करण: सोमनी में लगभग 400 करोड़ रुपये की प्रस्तावित मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी के लिए 31.55 एकड़ भूमि आवंटित करने की मंजूरी।

प्रशासनिक व्यवस्था: सुशासन एवं अभिसरण विभाग के विभागाध्यक्ष कार्यालय में तीन नए पदों के सृजन को मंजूरी-आयुक्त/संचालक, अपर संचालक और अपर संचालक स्तर के विशेषज्ञ का एक-एक पद।

कैबिनेट के इन फैसलों में किसानों को धान बिक्री की सुविधा, घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली बिल में राहत, सरकारी कर्मचारियों के लिए कैशलेस उपचार और प्रदेश में सड़क, रेल, पर्यटन तथा औद्योगिक अधोसंरचना के विकास पर विशेष जोर दिया गया है।

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छत्तीसगढ़: प्रदेश में चक्रवात ‘अर्नब’ को लेकर हाई अलर्ट, 5 जिलों में विशेष सतर्कता

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छत्तीसगढ़ में संभावित चक्रवात अर्नब को लेकर हाई अलर्ट और राहत-बचाव की तैयारियां

रायपुर: छत्तीसगढ़ में संभावित चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। 27 से 29 अक्टूबर तक सभी जिलों के कलेक्टरों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। दक्षिण बस्तर के बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, बस्तर और नारायणपुर जिलों में तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका को देखते हुए विशेष एहतियात बरतने को कहा गया है। प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और होमगार्ड की टीमों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य बातें

  • 27 से 29 अक्टूबर तक अलर्ट: सभी जिलों के कलेक्टरों को तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश।
  • दक्षिण बस्तर पर विशेष नजर: पांच जिलों में तेज हवाओं और बारिश की आशंका के मद्देनजर सतर्कता।
  •  7 एसडीआरएफ टीमें तैयार: आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों के लिए आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात रहने की तैयारी।
  • राहत शिविरों की व्यवस्था: स्वास्थ्य सेवाएं, भोजन, परिवहन और संचार सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश।
  • शून्य जनहानि का लक्ष्य: लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने पर जोर।

कैबिनेट सचिव ने मुख्य सचिवों से की वीडियो कॉन्फ्रेंस

संभावित चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए भारत सरकार के कैबिनेट सचिव डॉ. टी.वी. सोमनाथन ने सोमवार को नई दिल्ली से सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने राज्यों को चक्रवात के संभावित प्रभाव से निपटने के लिए व्यापक इंतजाम करने और प्रभावी चेतावनी प्रणाली बनाए रखने के निर्देश दिए।

छत्तीसगढ़ की ओर से मंत्रालय महानदी भवन से अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ ने राज्य की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। दक्षिण बस्तर में 28 अक्टूबर को भारी बारिश की आशंका को देखते हुए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।

राज्य में सात एसडीआरएफ टीमें आवश्यक उपकरणों के साथ तैयार हैं। होमगार्ड और एनडीआरएफ की टीमें भी आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रखी गई हैं।

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गर्भवती महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर जोर

राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को राहत शिविरों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को चिकित्सा सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

प्रशासन को गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूली बच्चों और आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा के लिए भी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जरूरी कदम उठाने को कहा गया है।

किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी करने और पशुधन को संभावित नुकसान से बचाने के उपाय करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बिजली, सड़क और संचार व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश

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तेज हवाओं के कारण कच्चे मकानों, बिजली के खंभों, पेड़ों और असुरक्षित संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका को देखते हुए संबंधित विभागों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जरूरत पड़ने पर समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। पेड़ गिरने से सड़कें बाधित होने की स्थिति में उन्हें तत्काल हटाने की व्यवस्था की जाए। बिजली और दूरसंचार सेवाएं प्रभावित होने पर वैकल्पिक इंतजाम भी सुनिश्चित किए जाएं।

होर्डिंग्स और अन्य कमजोर संरचनाओं की स्थिति का आकलन करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि तेज हवाओं के दौरान दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

शून्य जनहानि के लक्ष्य पर सरकार का जोर

कैबिनेट सचिव ने चक्रवात के दौरान शून्य जनहानि सुनिश्चित करने को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने पेड़ों के गिरने, दीवारें ढहने और यातायात के दौरान लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।

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राज्य शासन ने सभी विभागों और जिला प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा है, ताकि संभावित आपात स्थिति में लोगों को समय पर सहायता मिल सके और जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके।

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Durg News: पिकअप के सीक्रेट चेंबर से मिले ₹4 करोड़ कैश, 2 लोग हिरासत में

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दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पुलिस ने एक बोलेरो मैक्स पिकअप से ₹4 करोड़ नकद बरामद किए हैं। रकम वाहन के पिछले हिस्से में बनाए गए सीक्रेट चेंबर में छिपाकर रखी गई थी। पुलिस ने पिकअप में सवार दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। फिलहाल नकदी के मालिक, उसके स्रोत और रकम नागपुर ले जाने के उद्देश्य का पता नहीं चल पाया है।

मामला खुर्सीपार थाना क्षेत्र के डबरापारा का है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, नकदी रायपुर के भनपुरी स्थित जीडी ट्रांसपोर्ट से लोड की गई थी और इसे नागपुर ले जाया जा रहा था। बताया जा रहा है कि रकम किसी ट्रांसपोर्टर की हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

वाहन जांच के दौरान पकड़ी गई पिकअप

पुलिस के मुताबिक, सूचना मिलने के बाद खुर्सीपार पुलिस ने वाहन जांच शुरू की। इसी दौरान रायपुर से नागपुर जा रही सफेद रंग की बोलेरो मैक्स पिकअप (CG 04 QU 5996) को रोका गया। वाहन की तलाशी लेने पर पुलिस को उसके पिछले हिस्से में बदलाव नजर आया। यह हिस्सा इस तरह बंद किया गया था कि अंदर रखी वस्तुएं बाहर से दिखाई नहीं दे रही थीं।

बारीकी से जांच करने पर पुलिस को एक गुप्त चेंबर मिला। इसे खोलने पर अंदर नकदी रखी मिली। गिनती के बाद कुल ₹4 करोड़ बरामद होने की जानकारी सामने आई। इतनी बड़ी रकम वाहन में छिपाकर ले जाने को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

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पिकअप में सवार दो लोग हिरासत में

पुलिस के अनुसार, वाहन में भवेशभाई जीनाभाई डाभी और विष्णुदेव दुबे सवार थे। डाभी पिकअप चला रहा था। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम किसकी है, इसे किस व्यक्ति तक पहुंचाया जाना था और नकदी से संबंधित कोई वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।

आयकर विभाग को दी गई सूचना

मामले की जानकारी आयकर विभाग को भेजे जाने की बात कही गई है। अब नकदी के स्रोत, संभावित वित्तीय लेनदेन और रकम से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि वाहन में सीक्रेट चेंबर कब और किसने बनवाया था। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि नकदी कहां से आई थी और उसे किस उद्देश्य से नागपुर ले जाया जा रहा था। फिलहाल नकदी के मालिक और उसके स्रोत की पुष्टि नहीं हुई है।

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CG Weather Alert: चक्रवाती तूफान के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में भारी बारिश की संभावना, किसानों को सतर्क रहने की सलाह

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रायपुर: बंगाल की खाड़ी में विकसित हो रहे चक्रवाती तूफान का असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर भी पड़ सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, प्रदेश में 27 अक्टूबर से बारिश की गतिविधियां बढ़ने और 28 व 29 अक्टूबर को कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। इसे देखते हुए किसानों को फसलों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की ओर से जारी मौसम आधारित कृषि सलाह में किसानों को पक चुकी फसलों की कटाई कुछ दिनों के लिए टालने, कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थान पर रखने और खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने की सलाह दी गई है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी चक्रवाती तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और मैदानी अमले को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

28 और 29 अक्टूबर को भारी बारिश की आशंका

भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बना मौसमी सिस्टम चक्रवाती तूफान में बदल सकता है। इसके प्रभाव से छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बारिश होने की संभावना है। उपलब्ध पूर्वानुमान में 27 अक्टूबर को बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां बढ़ने तथा 28 और 29 अक्टूबर को भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका जताई गई है। दक्षिण छत्तीसगढ़ में 28 अक्टूबर और उत्तर छत्तीसगढ़ में 29 अक्टूबर को भारी बारिश की संभावना बताई गई है।

मौसम प्रणाली की दिशा और तीव्रता में बदलाव के साथ बारिश का प्रभाव भी बदल सकता है। किसानों को अपने जिले के लिए जारी ताजा मौसम चेतावनी पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

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किसानों को धान की कटाई रोकने की सलाह

मौसम को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने धान, दलहन और तिलहन की उन फसलों की कटाई स्थगित रखने की सलाह दी है, जो पकने की अवस्था में हैं। जिन किसानों ने कटाई कर ली है, वे फसल को खुले खेतों में छोड़ने के बजाय सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखें।

खेतों में बारिश का पानी जमा होने से फसल को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए खेतों की मेड़, नालियों और जल निकासी के रास्तों की जांच कर लें। जहां जरूरत हो, वहां अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें।

बारिश के दौरान कीटनाशकों का छिड़काव न करें

कृषि सलाह के अनुसार, फसलों में रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर बारिश के दौरान कीटनाशक अथवा कवकनाशक का छिड़काव करने से बचना चाहिए। मौसम साफ होने के बाद ही विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आवश्यक उपचार करें।

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रबी फसलों की बुवाई करने वाले किसान भी मौसम की स्थिति देखकर ही खेत तैयार करने और बुवाई की योजना बनाएं। बारिश के कारण खेतों में नमी और जलभराव की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।

सब्जियों और फलदार पौधों को भी सुरक्षित रखें

तेज हवा और बारिश की आशंका को देखते हुए सब्जी एवं फल उत्पादक किसानों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। करेला, लौकी जैसी लता वाली सब्जियों को सहारा दें। केले के पौधों और कमजोर फलदार पेड़ों को जरूरत के मुताबिक सहारा दें, ताकि तेज हवा में उनके गिरने या टूटने का खतरा कम हो।

सब्जियों के खेतों में जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखें। बारिश के दौरान फसलों पर दवाओं का छिड़काव करने से बचें और खेतों में पानी जमा होने की स्थिति पर लगातार नजर रखें।

पशुपालक भी बरतें सावधानी

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चक्रवाती मौसम के दौरान पशुओं को सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखें। उन्हें खुले स्थानों या पेड़ों के नीचे बांधने से बचें। पशुओं के लिए सूखे चारे और स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था करें।

मंत्री रामविचार नेताम ने विभागीय अमले को किया सतर्क

चक्रवाती तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने अधिकारियों, कर्मचारियों और मैदानी अमले को किसानों की मदद के लिए सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मौसम के कारण फसलों को नुकसान होने की स्थिति में किसानों तक जरूरी जानकारी और सहायता पहुंचाना महत्वपूर्ण होगा।

किसानों से अपील की गई है कि वे मौसम विभाग के ताजा पूर्वानुमान और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह का पालन करें। समय रहते सावधानी बरतने से फसलों, उद्यानिकी उत्पादन और पशुधन को संभावित नुकसान से बचाने में मदद मिल सकती है।

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छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीदी, ₹3100 प्रति क्विंटल मिलेगा भाव; 160 लाख टन खरीदने का लक्ष्य

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रायपुर: छत्तीसगढ़ के धान उत्पादक किसानों के लिए बड़ी खबर है। राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत धान खरीदी 15 नवंबर 2026 से शुरू होकर 31 जनवरी 2027 तक चलेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दुर्ग जिले के बानबरद में आयोजित पंडवानी महासम्मेलन में खरीदी की तारीख का ऐलान किया। सरकार ने इस सीजन में 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है।

राज्य सरकार किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदेगी। पंजीकृत किसानों से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान की खरीदी की जाएगी। पिछले सीजन में धान खरीदी का लक्ष्य करीब 140 लाख मीट्रिक टन बताया गया था। इस बार लक्ष्य में 20 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की गई है।

15 नवंबर से 31 जनवरी तक होगी खरीदी

सरकार के घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, प्रदेश के धान उपार्जन केंद्रों पर 15 नवंबर से खरीदी शुरू होगी। यह प्रक्रिया 31 जनवरी 2027 तक चलेगी। किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पंजीयन और टोकन लेना होगा।

खरीदी केंद्रों पर किसानों की सुविधा, धान की गुणवत्ता और उपार्जन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं।

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एक एकड़ में अधिकतम 21 क्विंटल धान बेच सकेंगे किसान

राज्य में निर्धारित सीमा के अनुसार पंजीकृत किसान प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान बेच सकेंगे। धान का घोषित खरीद भाव 3,100 रुपये प्रति क्विंटल है।

किसानों को सलाह है कि वे अपने पंजीकृत रकबे और पात्रता की जानकारी संबंधित सहकारी समिति या उपार्जन केंद्र से पहले ही प्राप्त कर लें, ताकि खरीदी के समय किसी तरह की परेशानी न हो।

धान बेचने के लिए एग्रीस्टैक पंजीयन जरूरी

इस खरीदी सीजन में किसानों के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन अनिवार्य बताया गया है। किसानों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका पंजीयन और संबंधित भूमि का विवरण सही हो। पंजीयन या भूमि संबंधी जानकारी में कोई गड़बड़ी होने पर समय रहते संबंधित समिति या विभाग से संपर्क करना उचित होगा।

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टोकन मिलने पर ही तय दिन बेच सकेंगे धान

धान खरीदी केंद्रों पर टोकन व्यवस्था के जरिए किसानों को निर्धारित तारीख पर उपज बेचने की सुविधा मिलेगी। किसानों को केंद्र पर जाने से पहले अपने टोकन और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी जांच लेनी चाहिए।

टोकन जारी करने की समय-सीमा और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी संबंधित समिति या विभाग के आधिकारिक निर्देशों से प्राप्त की जा सकती है।

बायोमेट्रिक सत्यापन और 17 प्रतिशत नमी की सीमा

खरीदी केंद्रों पर पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किसानों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। इसके अलावा धान की गुणवत्ता की जांच भी होगी।

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धान में नमी की मात्रा 17 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। निर्धारित मानक से ज्यादा नमी होने पर धान स्वीकार करने में परेशानी हो सकती है। इसलिए किसान उपज को अच्छी तरह सुखाकर और साफ करके ही खरीदी केंद्र पर ले जाएं।

इस बार 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य

राज्य सरकार ने इस सीजन में 160 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य निर्धारित किया है। पिछले साल के करीब 140 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य की तुलना में यह 20 लाख मीट्रिक टन अधिक है। धान खरीदी की तैयारियों के बीच किसानों की नजर अब उपार्जन केंद्रों की व्यवस्था, टोकन जारी होने और पंजीयन संबंधी निर्देशों पर रहेगी। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खरीदी से जुड़ी ताजा जानकारी के लिए अपने नजदीकी सहकारी समिति और संबंधित विभाग के आधिकारिक निर्देशों पर भरोसा करें।

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Bastar Dussehra: राष्ट्रपति मुर्मु ने की बस्तर दशहरा की सराहना, मांझियों का मानदेय ₹5,000 और चालकी का ₹3,500 हुआ

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जगदलपुर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जगदलपुर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल होकर इसकी अनूठी जनजातीय परंपराओं, सामूहिक आस्था और सामाजिक समरसता की सराहना की। उन्होंने मुरिया दरबार को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत उदाहरण बताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि माओवाद से मुक्त बस्तर अब नवनिर्माण और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने पारंपरिक प्रतिनिधियों के मानदेय में भी वृद्धि की है।

बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता का प्रतीक: राष्ट्रपति मुर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं। मां दंतेश्वरी की पावन भूमि पर आयोजित इस समारोह में उन्होंने बस्तर की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की सराहना की।

राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव, सामूहिक आस्था, सामाजिक समरसता और जनजातीय विरासत का जीवंत प्रतीक है। इस उत्सव की खासियत यह है कि विभिन्न गोत्रों, समुदायों और समाज के सभी वर्गों के लोग इसमें सक्रिय भागीदारी निभाते हैं।

रथ निर्माण, रथ खींचने, पूजा-अर्चना और विभिन्न अनुष्ठानों में अलग-अलग समुदाय अपनी पारंपरिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। राष्ट्रपति के अनुसार, यह व्यवस्था आपसी सहयोग और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक निरंतरता का उल्लेखनीय उदाहरण है।

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मुरिया दरबार लोकतांत्रिक परंपराओं का उदाहरण

राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा के दौरान आयोजित होने वाले मुरिया दरबार को लोकतांत्रिक व्यवस्था की जमीनी अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं, जरूरतों और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं।

सामूहिक संवाद से समाधान निकालने की यह परंपरा भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती है। राज्यपाल रमेन डेका ने भी कहा कि बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार समाज को साथ लेकर चलने तथा संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजने का संदेश देते हैं।

उन्होंने पारंपरिक मांझियों, मुखियाओं, पुजारियों, कारीगरों, रथ निर्माताओं, कलाकारों और स्थानीय प्रशासन के योगदान की सराहना की।

जनजातीय युवाओं की प्रतिभा को मिले अवसर

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राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समाज में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। उचित अवसर, प्रोत्साहन और संसाधन उपलब्ध होने पर जनजातीय युवा हर क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा सकते हैं।

उन्होंने बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को जनजातीय युवाओं को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। बस्तर ओलंपिक में युवाओं की भागीदारी की सराहना करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि उचित प्रशिक्षण और मंच मिलने पर यहां के खिलाड़ी भविष्य में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सुविधाओं और बाजार से जोड़ने के प्रयास समावेशी विकास को गति दे सकते हैं। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में जनजातीय समाज की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।

दंडकारण्य से जुड़ी है बस्तर की सांस्कृतिक विरासत

राष्ट्रपति ने बस्तर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण में इस क्षेत्र का संबंध दंडकारण्य से जोड़ा जाता है। भगवान श्रीराम के वनवास और माता शबरी से जुड़े प्रसंग इस क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृतियों का हिस्सा हैं।

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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों, माता सीता की मर्यादा और माता शबरी की भक्ति से प्रेरणा लेकर समाज को नैतिकता और मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाना चाहिए।

राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की प्रकृति संरक्षण परंपरा की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जंगल, पहाड़, पेड़-पौधे और प्राकृतिक संसाधन अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण और अधिकाधिक पौधरोपण के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण सुरक्षित रखना आवश्यक है।

माओवाद से मुक्त बस्तर में विकास की नई राह: मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति मुर्मु का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति से बस्तरवासियों का उत्साह बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा जनजातीय संस्कृति, सामूहिक सहभागिता और आपसी विश्वास की सुंदर अभिव्यक्ति है।

उन्होंने कहा कि बस्तर हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन इस बदलाव को गति दे रहे हैं और क्षेत्र की कला-संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं।

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मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार दूरस्थ इलाकों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम-जनमन के तहत दूरस्थ बसाहटों को सड़क से जोड़ने का काम जारी है।

उन्होंने परिवहन सुविधाओं के विस्तार, रायपुर से रावघाट तक रेल सेवा, रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन और रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का उल्लेख किया। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे तथा वनोपज संग्राहकों को उचित मूल्य दिलाने के प्रयासों की भी जानकारी दी।

स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का हो रहा विस्तार

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उनके अनुसार, जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू किया गया है और गीदम में मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से प्रारंभ हुआ है। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में विकास की संभावनाएं और मजबूत होंगी।

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मांझियों और चालकी के मानदेय में बढ़ोतरी

बस्तर दशहरा समारोह में पारंपरिक प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि की जानकारी भी दी गई। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के अनुसार, राज्य सरकार ने मांझियों और चालकी के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की है।

मांझी: ₹2,000 से बढ़ाकर ₹5,000 प्रतिमाह।

चालकी: ₹1,500 से बढ़ाकर ₹3,500 प्रतिमाह।

संस्कृति मंत्री ने कहा कि यह निर्णय बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने वाले पारंपरिक प्रतिनिधियों के योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

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राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा की कुटुम्ब जात्रा और 27 अक्टूबर को मां दंतेश्वरी तथा देवी मावली की डोली विदाई जैसे पारंपरिक अनुष्ठानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने मां दंतेश्वरी से बस्तरवासियों के उज्ज्वल भविष्य, छत्तीसगढ़ की प्रगति और समग्र विकास की कामना की।

समारोह में राज्यपाल रमेन डेका, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, विभिन्न मंत्री, सांसद, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी, पारंपरिक मांझी-चालकी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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