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MP SI Admit Card 2026: एमपी एसआई और सूबेदार भर्ती परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, 28 अक्टूबर से परीक्षा

भोपाल: मध्य प्रदेश में सब-इंस्पेक्टर (एसआई) और सूबेदार भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए जरूरी खबर है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (MPESB) ने भर्ती परीक्षा 2026 का प्रवेश पत्र जारी कर दिया है। जिन उम्मीदवारों ने इन पदों के लिए आवेदन किया था, वे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाकर अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
बोर्ड के परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार, सूबेदार और सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 28 अक्टूबर 2026 से शुरू होगी। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा से पहले अपना प्रवेश पत्र डाउनलोड कर लें और उस पर दर्ज परीक्षा तिथि, शिफ्ट, रिपोर्टिंग टाइम तथा परीक्षा केंद्र के पते को ध्यान से जांच लें।
एमपीईएसबी के अनुसार, सूबेदार और सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया 9 सितंबर 2026 को शुरू हुई थी। आवेदन करने की अंतिम तारीख 23 सितंबर 2026 थी, जबकि आवेदन पत्र में सुधार के लिए 28 सितंबर 2026 तक का समय दिया गया था।
ऐसे डाउनलोड करें प्रवेश पत्र
उम्मीदवार नीचे दिए गए चरणों का पालन करके अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
- सबसे पहले एमपीईएसबी की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाएं।
- वेबसाइट पर Test Admit Card या संबंधित भर्ती परीक्षा का लिंक खोलें।
- Subedar & Sub-Inspector Recruitment Test 2026 का विकल्प चुनें।
- मांगी गई जानकारी, जैसे आवेदन संख्या और जन्मतिथि, दर्ज करें।
- स्क्रीन पर मांगी गई सत्यापन संबंधी जानकारी भरकर सबमिट करें।
- एडमिट कार्ड खुलने पर उसमें दर्ज सभी विवरण जांचें।
- प्रवेश पत्र डाउनलोड करके उसका प्रिंट निकाल लें।
एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में परेशानी होने पर उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर दोबारा प्रयास करें। लॉगिन संबंधी जानकारी भरते समय सावधानी रखें।
एडमिट कार्ड पर इन जानकारियों को जरूर जांचें
प्रवेश पत्र डाउनलोड करने के बाद उम्मीदवार को निम्नलिखित विवरणों का मिलान कर लेना चाहिए:
- उम्मीदवार का नाम और रोल नंबर
- आवेदन संख्या और जन्मतिथि
- फोटो और हस्ताक्षर
- परीक्षा की तारीख और शिफ्ट
- रिपोर्टिंग टाइम और प्रवेश से जुड़े निर्देश
परीक्षा केंद्र का नाम और पूरा पता
यदि नाम, फोटो या किसी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी में गलती दिखाई देती है, तो एमपीईएसबी के आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें।
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MP Coaching Rules 2026: कोचिंग सेंटरों को 90 दिन में कराना होगा पंजीयन, फीस और शिक्षकों की जानकारी वेबसाइट पर देना अनिवार्य

भोपाल: मध्यप्रदेश में कोचिंग सेंटरों के संचालन को व्यवस्थित करने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए नियमों का प्रारूप जारी किया गया है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जारी मध्यप्रदेश कोचिंग केंद्र (पंजीयन एवं विनियमन) नियम, 2026 के प्रारूप में कोचिंग संस्थानों के पंजीयन, फीस में पारदर्शिता, शिक्षकों की योग्यता, सुरक्षा व्यवस्था और शिकायतों के निराकरण से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, कोचिंग संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर फीस, शिक्षकों की योग्यता, उपलब्ध सुविधाओं और शिकायत निवारण व्यवस्था जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक करनी होंगी। इसके अलावा विद्यार्थियों की निजता, मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलिंग पर भी जोर दिया गया है।
90 दिन में पंजीयन के लिए आवेदन, तीन साल की होगी वैधता
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, कोचिंग संचालकों को नियमों के प्रकाशन के 90 दिनों के भीतर पंजीयन के लिए आवेदन करना होगा। पंजीयन की अवधि तीन साल निर्धारित की गई है। इसके बाद संस्थान को नवीनीकरण कराना होगा। पंजीयन हस्तांतरणीय नहीं होगा।
यदि किसी कोचिंग संस्थान की एक से अधिक शाखाएं संचालित होती हैं, तो प्रत्येक शाखा को अलग कोचिंग केंद्र माना जाएगा। इस व्यवस्था से अलग-अलग शाखाओं के संचालन और निर्धारित मानकों के पालन की जवाबदेही तय करने में मदद मिलेगी।
वेबसाइट पर फीस और शिक्षकों की जानकारी देनी होगी
कोचिंग संस्थानों को अपनी वेबसाइट पर विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए जरूरी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें संबंधित परीक्षा और पाठ्यक्रम, फीस का पूरा विवरण, शिक्षकों की योग्यता, संस्थान में उपलब्ध सुविधाएं और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शामिल होगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को दाखिले से पहले संस्थान के बारे में पर्याप्त जानकारी देना और फीस तथा सुविधाओं को लेकर पारदर्शिता बढ़ाना है।
CCTV लगेंगे, लेकिन संवेदनशील स्थानों पर रिकॉर्डिंग नहीं
विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कोचिंग परिसर में निर्धारित उपयुक्त स्थानों पर CCTV कैमरे लगाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर विद्यार्थियों की निजता से समझौता नहीं किया जा सकेगा। प्रस्तावित नियमों के अनुसार, शौचालयों, चेंजिंग रूम और परामर्श कक्ष जैसे संवेदनशील स्थानों पर रिकॉर्डिंग नहीं की जाएगी।
कोचिंग संस्थानों को पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, प्राथमिक उपचार और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के इंतजाम भी करने होंगे। सुरक्षा कर्मचारियों की उपलब्धता और सुरक्षा प्रोटोकॉल की नियमित समीक्षा पर भी जोर दिया गया है।
ट्यूटर बनने के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक
प्रारूप में ट्यूटर के रूप में नियुक्ति के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक निर्धारित की गई है। विद्यार्थियों की सुरक्षा और उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए कुछ व्यक्तियों को ट्यूटर या सहायक कर्मचारी के रूप में नियुक्त नहीं करने से संबंधित प्रावधान भी शामिल हैं। कोचिंग संस्थानों को प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मचारियों और मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए योग्य परामर्शदाताओं की व्यवस्था करनी होगी।
मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलिंग पर जोर
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान विद्यार्थियों पर पढ़ाई और परिणाम का दबाव बढ़ सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित नियमों में मानसिक स्वास्थ्य सहायता और करियर मार्गदर्शन की व्यवस्था पर जोर दिया गया है। संस्थानों को नियमित परामर्श सत्र आयोजित करने, अभिभावकों के साथ संवाद बनाए रखने और विद्यार्थियों की समस्याओं को समय रहते समझने की व्यवस्था विकसित करनी होगी। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सरकारी नीति के अनुरूप काम करने पर भी जोर दिया गया है।
जाति-धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकेंगे संस्थान
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, प्रवेश और शिक्षण प्रक्रिया के दौरान किसी विद्यार्थी के साथ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या अन्य निर्धारित आधारों पर भेदभाव नहीं किया जा सकेगा। इन आधारों पर विद्यार्थियों के अलग-अलग बैच बनाने पर भी रोक का प्रावधान है। इसके अलावा, विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए कोचिंग परिसर को दिव्यांग-अनुकूल बनाने और संस्थान के कर्मचारियों को उनके प्रति संवेदनशील रखने पर जोर दिया गया है।
पंजीयन रद्द होने पर 30 दिन में अपील का अधिकार
यदि किसी कोचिंग सेंटर का पंजीयन या नवीनीकरण अस्वीकार किया जाता है अथवा उसका पंजीयन निलंबित या रद्द किया जाता है, तो संबंधित आदेश के खिलाफ अपील की जा सकेगी। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, आदेश की सूचना मिलने के 30 दिनों के भीतर संभागायुक्त के समक्ष अपील प्रस्तुत की जा सकती है। सुनवाई के बाद 45 दिनों के भीतर अपील का निपटारा करने की व्यवस्था का उल्लेख है।
विद्यार्थियों और अभिभावकों को क्या होगा फायदा?
नए प्रावधान लागू होने पर विद्यार्थियों और अभिभावकों को दाखिले से पहले कोचिंग की फीस, शिक्षकों की योग्यता, उपलब्ध सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी मिल सकेगी। मानसिक स्वास्थ्य और करियर काउंसलिंग से जुड़ी सुविधाएं परीक्षा के दबाव से निपटने में मदद कर सकती हैं। शिकायतों के समाधान के लिए औपचारिक व्यवस्था बनने से संस्थानों की जवाबदेही बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
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MP News: बैतूल में बैंक ऑफ महाराष्ट्र में ₹1.5 करोड़ का घोटाला, जिंदा खाताधारकों को कागजों में मृत दिखाकर तोड़ीं एफडी

बैतूल: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मोरखा स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र की शाखा में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि जिंदा खाताधारकों को दस्तावेजों में मृत दिखाकर उनके नाम से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार किए गए और उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) तुड़वाकर रकम निकाल ली गई। इसके अलावा नेट बैंकिंग में खाताधारकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदलकर पैसे दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए।
मामले में बोरदेही पुलिस ने बैंक के असिस्टेंट मैनेजर लुकेश गोखे, टैक्सी ड्राइवर गौरव सूर्यवंशी और 15 वर्षीय नाबालिग को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले में अब तक छह खाताधारकों ने एफआईआर दर्ज कराई है। पीड़ितों की कुल संख्या का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
ऑनलाइन कियोस्क चलाने वाला किशोर मुख्य सूत्रधार
एसपी वीरेंद्र जैन के अनुसार, बैंक शाखा के पास ऑनलाइन कियोस्क सेंटर चलाने वाले 15 वर्षीय किशोर को इस कथित घोटाले का मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है। बैंक में नियमित रूप से आने-जाने के कारण उसे बड़े खाताधारकों की जमा राशि की जानकारी मिल गई थी। इसके बाद उसने कथित तौर पर बैंक के असिस्टेंट मैनेजर को अपने साथ मिला लिया।
पुलिस के मुताबिक, असिस्टेंट मैनेजर की आईडी का इस्तेमाल कर जनवरी 2026 से अब तक करीब 10 बार खाताधारकों के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर बदले गए। इसके बाद नेट बैंकिंग के जरिए लेनदेन किए गए और एफडी तुड़वाकर रकम निकालने का आरोप है।
टैक्सी ड्राइवर के खाते में मिली सवा करोड़ की रकम
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार टैक्सी ड्राइवर गौरव सूर्यवंशी के बैंक खाते में कथित घोटाले से जुड़ी करीब 1.25 करोड़ रुपये की रकम मिली है। पुलिस ने संबंधित खाते को फ्रीज करा दिया है। इस मामले में धोखाधड़ी का एक तरीका यह भी सामने आया है कि जब कोई खाताधारक अपने खाते से रकम गायब होने की शिकायत लेकर बैंक पहुंचता था, तो आरोपी उसके खाते में रकम वापस जमा कर देते थे। पुलिस को आशंका है कि ऐसा खाताधारकों का संदेह दूर रखने और मामले को आगे बढ़ने से रोकने के लिए किया जाता था।
रिटायर्ड टीचर की शिकायत से खुला मामला
मामले का खुलासा तब हुआ, जब एक सेवानिवृत्त शिक्षक के बैंक खाते से बिना अनुमति बड़ी रकम निकाल ली गई। जांच में अन्य खाताधारकों के साथ भी वित्तीय हेराफेरी की जानकारी सामने आई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, ज्योति रघुवंशी के खाते से 4.86 लाख रुपये, फूलवंती के खाते से 2.74 लाख रुपये, इंद्रेश रघुवंशी के खाते से 1.85 लाख रुपये, भोजराज सोनी के खाते से 5.50 लाख रुपये और रागिनी साहू के खाते से 1.55 लाख रुपये की हेराफेरी सामने आई है।
पुलिस का कहना है कि अभी पीड़ितों की वास्तविक संख्या और कुल नुकसान का आकलन किया जा रहा है। अब तक छह खाताधारकों की शिकायतों पर एफआईआर दर्ज की गई है।
बैंक प्रबंधन पर मामला दबाने का आरोप
मामले में बैंक प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, अनियमितताएं सामने आने के बाद बैंक ने असिस्टेंट मैनेजर लुकेश गोखे को निलंबित कर दिया था। हालांकि, रीजनल ऑफिस को मामले की जानकारी होने के बावजूद पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी।
बोरदेही पुलिस ने खाताधारकों की शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए 24 अक्टूबर को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस अब बैंक के अन्य खातों, संदिग्ध लेनदेन और आरोपियों की संपत्तियों की जांच कर रही है।
₹22.33 लाख की संपत्ति जब्त
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से छह मोबाइल फोन, 8.28 लाख रुपये का सोना, 1.40 लाख रुपये की चांदी और करीब 12 लाख रुपये कीमत की एक कार जब्त की गई है। जब्त संपत्ति की कुल कीमत 22.33 लाख रुपये बताई गई है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घोटाले में और कौन-कौन शामिल हो सकता है, कितने खाताधारक प्रभावित हुए हैं और रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई।
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MP News: 70 हजार शिक्षकों को मिल सकता है छठे वेतनमान का एरियर, हाईकोर्ट ने सरकार को दिया 4 सप्ताह का समय

जबलपुर: मध्य प्रदेश में पंचायत विभाग से स्कूल शिक्षा विभाग में संविलियन किए गए शिक्षकों के वेतन और सेवा लाभ से जुड़े मामले में जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश से हजारों शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद है। मामला 2006 से छठे वेतनमान का लाभ देने और पहली नियुक्ति से सेवा की गणना करने से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश के पालन के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। इस मामले से प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों को लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
2006 से छठे वेतनमान का लाभ देने की मांग
शिक्षकों का कहना है कि छठा वेतनमान 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ था, लेकिन उन्हें इसका लाभ वर्ष 2016 से दिया गया। उनका तर्क है कि पहली नियुक्ति से सेवा की गणना किए जाने पर वे 2006 से ही वेतनमान और उससे जुड़े अन्य सेवा लाभों के हकदार हैं। इस मांग को लेकर शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। रिपोर्टों के मुताबिक, राजेश कुमार पांडे सहित 497 शिक्षकों की याचिकाओं में वेतनमान के पुनर्निर्धारण, वरिष्ठता, वेतनवृद्धि और पेंशन जैसे लाभों की मांग की गई थी।
सरकार को चार सप्ताह में पालन करने का निर्देश
मामले में हाईकोर्ट के पहले के आदेश के पालन की मांग करते हुए शिक्षकों ने अवमानना याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से आदेश के अनुपालन के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने सरकार को चार सप्ताह का समय दिया था।
रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि सरकार की विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट ने 24 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिक्षकों ने हाईकोर्ट में आदेश के पालन की मांग उठाई।
प्रत्येक शिक्षक को 7 से 8 लाख रुपए मिलने का दावा
शिक्षक पक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि 2006 से वेतनमान का लाभ मिलने पर प्रत्येक पात्र शिक्षक को लगभग 7 लाख से 8 लाख रुपए तक का एरियर मिल सकता है। इसके अलावा, मासिक वेतन में 15,000 से 20,000 रुपए तक का अंतर आने का अनुमान भी बताया गया है।
शिक्षकों ने बकाया राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की मांग भी उठाई है। हालांकि, ये आंकड़े शिक्षकों की ओर से बताए गए अनुमान और मांग हैं। वास्तविक एरियर, ब्याज और वेतन में बदलाव का निर्धारण संबंधित आदेश, पात्रता तथा सरकार की गणना के आधार पर ही होगा।
संविलियन के बाद शुरू हुआ विवाद
शिक्षकों के अनुसार, पंचायत विभाग में नियुक्त कर्मचारियों का बाद में अध्यापक संवर्ग में संविलियन किया गया और 2018 में उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग में शामिल किया गया। विवाद इस बात को लेकर है कि सेवा की गणना और वेतन संबंधी लाभ किस तारीख से दिए जाएं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पहली नियुक्ति से सेवा मान्य होने पर वरिष्ठता, वेतनवृद्धि, पेंशन और अन्य सेवा लाभों की गणना भी उसी आधार पर की जानी चाहिए।
करीब 70 हजार शिक्षकों की नजर सरकार के फैसले पर
इस मामले का असर याचिका दायर करने वाले शिक्षकों से आगे प्रदेश के अन्य पात्र शिक्षकों पर भी पड़ सकता है। हालांकि, करीब 70 हजार शिक्षकों को लाभ मिलने का आंकड़ा अधिवक्ता और मीडिया रिपोर्टों में सामने आया है। सभी शिक्षकों को समान लाभ मिलेगा या नहीं, यह आदेश के दायरे, पात्रता और उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। अब शिक्षकों की नजर राज्य सरकार की कार्रवाई और अदालत में अनुपालन की स्थिति पर है।
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Satna News: दुर्गा प्रतिमा विसर्जन से लौट रहे ट्रैक्टर-ट्रॉली सवार 8 बच्चे करंट की चपेट में आए, 2 गंभीर

सतना: मध्य प्रदेश के सतना जिले के कोठी क्षेत्र में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन से लौटते समय बड़ा हादसा हो गया। पतेरिया गांव के पास ट्रैक्टर-ट्रॉली में सवार आठ बच्चे ऊपर से गुजर रही 11 केवी बिजली लाइन की चपेट में आ गए। हादसे में सभी बच्चे घायल हो गए। इनमें दो बच्चियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल सतना रेफर किया गया है।
घटना के बाद घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से कोठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार शुरू किया गया। बाकी घायल बच्चों का इलाज वहीं जारी है।
विसर्जन से लौटते समय हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, कोठी नगर पंचायत के वार्ड 14 और 15 के निवासी ग्रामीण दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली से गए थे। गुरुवार शाम विसर्जन के बाद सभी वापस लौट रहे थे। इसी दौरान पतेरिया गांव के पास ट्रॉली में सवार बच्चे ऊपर से गुजर रही 11 केवी बिजली लाइन की चपेट में आ गए। करंट लगने के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की।
दो बच्चियों को जिला अस्पताल किया गया रेफर
हादसे के बाद सभी घायल बच्चों को कोठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां प्राथमिक उपचार के दौरान दो बच्चियों की हालत गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल सतना रेफर कर दिया गया। अन्य बच्चों का इलाज कोठी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जारी है।
बिजली विभाग और पुलिस ने शुरू की जांच
घटना की जानकारी मिलने के बाद बिजली विभाग के अधिकारी और कोठी थाना प्रभारी संतोष तिवारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस और बिजली विभाग की जांच में हादसे की परिस्थितियों और ट्रैक्टर-ट्रॉली के बिजली लाइन के संपर्क में आने के कारणों का पता लगाया जाएगा।
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MP News: स्कूल शिक्षा विभाग में 20 हजार पदों पर होगी भर्ती, 200 नए सांदीपनि विद्यालय खुलेंगे

भोपाल: मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग में 20 हजार पदों पर नई भर्ती करने की घोषणा की है। इसके साथ ही प्रदेश में 200 नए सांदीपनि विद्यालय खोले जाएंगे और जनजातीय क्षेत्रों में 200 नए विद्यालय भवन बनाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित कार्यक्रम में ये घोषणाएं कीं। हालांकि, 20 हजार पदों पर भर्ती की समयसीमा, पदों का वर्गीकरण और चयन प्रक्रिया की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
950 लोगों को मिले अनुकंपा नियुक्ति के आदेश
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने करीब 950 लोगों को अनुकंपा नियुक्ति के आदेश सौंपे। इनमें 661 सहायक ग्रेड-3, 31 प्राथमिक शिक्षक और 262 चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अब तक 85 हजार नियुक्तियां कर चुकी है। उन्होंने नवनियुक्त कर्मचारियों से ईमानदारी, निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ काम करने की अपेक्षा की।
प्रदेश में खुलेंगे 200 नए सांदीपनि विद्यालय
मुख्यमंत्री के मुताबिक, मध्य प्रदेश में फिलहाल 369 सांदीपनि विद्यालय संचालित हो रहे हैं। अब 200 नए विद्यालय खोलने की पहल की जा रही है। इसके अलावा जनजातीय क्षेत्रों में 200 नए स्कूल भवन बनाने की योजना है। सरकार का उद्देश्य स्कूलों में शैक्षणिक सुविधाओं का विस्तार करना और विद्यार्थियों को बेहतर माहौल उपलब्ध कराना है।
400 करोड़ से बढ़कर 38 हजार करोड़ हुआ शिक्षा विभाग का बजट
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2003 से पहले स्कूल शिक्षा विभाग का बजट करीब 400 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपए हो गया है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दे रही है।
अनुकंपा नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी
स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा कि पहले अनुकंपा नियुक्ति मिलने में कई बार सालों लग जाते थे। मुख्यमंत्री के निर्देश और विभागीय प्रयासों से प्रक्रिया तेज हुई है। उन्होंने बताया कि पदोन्नति से खाली हुए पदों पर नियुक्तियां करने का रास्ता बनाया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवार के मुखिया की मृत्यु के बाद आश्रितों को समय पर नौकरी मिलने से उन्हें आर्थिक परेशानियों से निपटने में मदद मिलती है।
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