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MP Cabinet: भोपाल मेट्रो के लिए ₹13,565 करोड़ मंजूर, कपास पर मंडी फीस आधी की गई

Bhopal: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में बुनियादी ढांचे, कृषि, डिजिटल विकास और सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लगी। कैबिनेट ने लगभग 13,800 करोड़ रुपए के विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें भोपाल मेट्रो परियोजना के लिए 13,565.84 करोड़ रुपए की पुनरीक्षित लागत, किसानों के लिए नई मंडी शुल्क व्यवस्था और IT सेक्टर के लिए 235.63 करोड़ रुपए का प्रावधान शामिल है।
भोपाल मेट्रो के लिए 13,565 करोड़ रुपए मंजूर
कैबिनेट ने भोपाल मेट्रो रेल परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी दे दी है। परियोजना की मूल लागत 6,941.40 करोड़ रुपए थी, जिसमें 3,092.22 करोड़ रुपए की अतिरिक्त लागत जोड़ी गई है। इसके साथ ही अतिरिक्त वित्तपोषण को मिलाकर कुल स्वीकृत राशि 13,565.84 करोड़ रुपए हो गई है। सरकार का कहना है कि इससे भोपाल के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और भविष्य की यातायात जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
कपास पर मंडी फीस आधी
प्रदेश की 158 जिनिंग मिलों को राहत देते हुए कैबिनेट ने कपास पर मंडी फीस 1% से घटाकर 0.5% कर दी है।सरकार का मानना है कि इससे कपास उद्योग की लागत कम होगी, प्रदेश की जिनिंग मिलें प्रतिस्पर्धी बनेंगी और दूसरे राज्यों में उद्योगों के पलायन पर रोक लगेगी। साथ ही रोजगार और GST संग्रह में भी वृद्धि होगी।
किसानों के लिए मंडी शुल्क बढ़ा
कैबिनेट ने सामान्य मंडी शुल्क को एक रुपए से बढ़ाकर 1.50 रुपए प्रति सौ रुपए कर दिया है। इससे सरकार को लगभग 500 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। इस राशि का उपयोग किसान सड़क निधि, कृषि अनुसंधान, वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, लॉजिस्टिक हब और कृषि अधोसंरचना विकास पर किया जाएगा।
IT और AI विकास पर 235 करोड़ खर्च
राज्य में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को बढ़ावा देने के लिए 2026 से 2031 तक की अवधि के लिए 235.63 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इसमें 180.20 करोड़ रुपए IT संवर्ग परामर्श सेवाओं के लिए, सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी कार्य योजना के लिए 55.43 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं। मंजूर की गई कुल राशि का उपयोग AI, बिग डेटा एनालिटिक्स, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने में किया जाएगा।
गेहूं-धान खरीदी के लिए 8,600 करोड़ की गारंटी
रबी और खरीफ सीजन में समर्थन मूल्य पर फसल खरीदी को सुचारू बनाए रखने के लिए कैबिनेट ने एमपी स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन और मार्कफेड को 8,600 करोड़ रुपए की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति (गारंटी) देने की मंजूरी दी है। इसके अलावा एमपी स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन को 29,500 करोड़ रुपए तक की अतिरिक्त सरकारी गारंटी भी स्वीकृत की गई है।
कैबिनेट के प्रमुख फैसले
- भोपाल मेट्रो के लिए ₹13,565.84 करोड़ मंजूर
- कपास पर मंडी फीस 1% से घटाकर 0.5%
- मंडी शुल्क ₹1 से बढ़ाकर ₹1.50
- IT और ई-गवर्नेंस के लिए ₹235.63 करोड़
- MPSCSC और मार्कफेड को ₹8,600 करोड़ की गारंटी
- किसानों के लिए कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस नेटवर्क को बढ़ावा
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MP News: लाड़ली बहनों को 14 अक्टूबर को मिलेगी 41वीं किस्त, खाते में आएंगे ₹1,500

भोपाल: मध्यप्रदेश की लाड़ली बहना योजना की हितग्राही महिलाओं के लिए 14 अक्टूबर का दिन अहम होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नवरात्रि के दौरान उमरिया जिले के गुरुवाही गांव में आयोजित कार्यक्रम से योजना की 41वीं किस्त जारी करेंगे। सिंगल क्लिक के जरिए करीब 1.25 करोड़ पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 1,500-1,500 रुपये ट्रांसफर किए जाएंगे।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री क्षेत्र के विकास कार्यों की भी सौगात देंगे। वे करीब 144.16 करोड़ रुपये की लागत वाले 136 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन करेंगे।
जून 2023 में शुरू हुई थी योजना
लाड़ली बहना योजना की शुरुआत जून 2023 में हुई थी। इसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उनकी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता देना है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये दिए जा रहे हैं।
वहीं, सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाली पात्र महिलाओं को योजना के नियमों के अनुसार हर महीने 900 रुपये की सहायता मिलती है। राशि सीधे आधार से जुड़े और डीबीटी सक्रिय बैंक खातों में भेजी जाती है।
सितंबर 2026 तक योजना की 40 किस्तें जारी की जा चुकी हैं। अब 14 अक्टूबर को 41वीं किस्त जारी की जाएगी। इसके अलावा अगस्त 2023, 2024, 2025 और 2026 में महिलाओं को चार बार 250-250 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी दी गई थी।
योजना के लिए 23,882 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट
वित्तीय वर्ष 2026-27 में लाड़ली बहना योजना के लिए 23,882.81 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। योजना के तहत पात्र महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता दी जाती है।
144.16 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन
उमरिया जिले के गुरुवाही गांव में होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री 136 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन करेंगे। इनकी कुल लागत करीब 144.16 करोड़ रुपये है। इनमें 68 कार्यों का लोकार्पण और 68 कार्यों का भूमि-पूजन शामिल है। बांधवगढ़ और मानपुर विधानसभा क्षेत्रों के विकास कार्य भी इस सूची में शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान पूरे हो चुके कार्यों का लोकार्पण और नए निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन किया जाएगा।
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MP News: प्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ. ढाल सिंह बिसेन बने उत्तराखंड के राज्यपाल, 4 बार विधायक और बालाघाट से सांसद रह चुके

भोपाल: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड का राज्यपाल नियुक्त किया। सिवनी जिले के पिपरिया गांव में जन्मे बिसेन चार बार विधायक रह चुके हैं। वे मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
2019 में बालाघाट से बने थे सांसद
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2019 के लोकसभा चुनाव में डॉ. बिसेन को बालाघाट सीट से उम्मीदवार बनाया था। चुनाव जीतने के बाद वे 17वीं लोकसभा के सदस्य बने और 2024 तक सांसद रहे।
विधायक से राज्यपाल तक का सफर
डॉ. बिसेन का राजनीतिक सफर मध्यप्रदेश की राजनीति से शुरू हुआ। विधायक और मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभाने के बाद उन्होंने लोकसभा में बालाघाट सीट से प्रतिनिधित्व किया। अब उन्हें उत्तराखंड के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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MP में हेलीकॉप्टर से पकड़े 97 कृष्णमृग, शुजालपुर में बोमा तकनीक से रेस्क्यू अभियान

शुजालपुर: मध्यप्रदेश के शुजालपुर में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे कृष्णमृगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए विशेष रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया है। शनिवार को हेलीकॉप्टर की मदद से हांका लगाकर बोमा तकनीक के जरिए 97 कृष्णमृगों को पकड़ा गया। 9 से 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान में दक्षिण अफ्रीका के 14 विशेषज्ञों समेत करीब 200 कर्मचारी जुटे हैं।
हेलीकॉप्टर से हांका लगाकर पकड़े 97 कृष्णमृग
शुजालपुर के ग्राम हन्नूखेड़ी में वन विभाग ने शनिवार को अभियान शुरू किया। हेलीकॉप्टर की मदद से कृष्णमृगों को निर्धारित दिशा में ले जाकर बोमा पद्धति से तैयार सुरक्षित घेरे में पहुंचाया गया। पहले चरण में 97 कृष्णमृग पकड़े गए।
दोपहर में तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के बाद विशेषज्ञों की सलाह पर अभियान रोक दिया गया। रेस्क्यू का अगला चरण रविवार सुबह शुरू करने की योजना बनाई गई।
दक्षिण अफ्रीका के 14 विशेषज्ञ संभाल रहे जिम्मेदारी
अभियान में दक्षिण अफ्रीका की ‘कंजर्वेशन सॉल्यूशन’ टीम के 14 विशेषज्ञ शामिल हैं। इनके साथ वन विभाग, राजस्व और पुलिस प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी भी तैनात हैं। भोपाल और अन्य जिलों से पहुंचे करीब 200 कर्मचारी अभियान में सहयोग कर रहे हैं। हेलीकॉप्टर से हांका लगाकर बोमा तकनीक के जरिए कृष्णमृगों को पकड़ने की यह पहल लगातार दूसरे साल शुजालपुर से शुरू हुई है। पिछले साल भी इसी इलाके में इस पद्धति का इस्तेमाल किया गया था।
क्या है बोमा तकनीक?
बोमा तकनीक में वन्यजीवों को धीरे-धीरे एक खास तरीके से बनाए गए सुरक्षित घेरे की ओर ले जाया जाता है। घेरे की बनावट ऐसी होती है कि जानवरों को नियंत्रित तरीके से भीतर लाकर सुरक्षित पकड़ा जा सके। इस अभियान में हेलीकॉप्टर की मदद से कृष्णमृगों को निर्धारित दिशा में बढ़ाया जाता है। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञों की निगरानी में होती है, ताकि वन्यजीवों को चोट और अनावश्यक तनाव से बचाया जा सके।
प्रमुख सचिव समेत अधिकारियों ने परखी तैयारियां
अभियान शुरू होने से एक दिन पहले, 9 अक्टूबर को प्रमुख सचिव वन राघवेंद्र कुमार सिंह, वन बल प्रमुख शुभांजन सेन, मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक डॉ. समिता राजौरा, कलेक्टर ऋजु बाफना और नोडल अधिकारी डॉ. किरण बिसेन ने हन्नूखेड़ी पहुंचकर तैयारियों का निरीक्षण किया। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि अभियान के दौरान संबंधित खेतों में सिंचाई और कृषि कार्य रोककर रखें। बच्चों को बोमा स्थल से दूर रखें और पालतू मवेशियों को बाड़े में बांधकर रखें। हेलीकॉप्टर की आवाज सुनकर मौके पर भीड़ नहीं लगाने की भी हिदायत दी गई है।
फसलों को नुकसान से राहत दिलाने की कोशिश
कृष्णमृग और नीलगाय खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसी समस्या से राहत दिलाने के लिए वन विभाग पहले भी जिले में अभियान चलाकर कृष्णमृगों और नीलगायों को दूसरे स्थानों पर पहुंचा चुका है। इस बार भी अभियान में स्थानीय ग्रामीणों की मदद ली जाएगी। क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी की जानकारी होने के कारण ग्रामीण रेस्क्यू टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। उनके सहयोग से अभियान स्थल पर अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
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मध्यप्रदेश में पटवारियों की हड़ताल खत्म, 12 अक्टूबर से स्वामित्व योजना का काम शुरू

भोपाल: मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना को लेकर सरकार और पटवारियों के बीच चल रहा गतिरोध खत्म हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से शुक्रवार शाम मुलाकात के बाद पटवारी संघ ने 12 अक्टूबर से योजना का काम दोबारा शुरू करने का ऐलान किया है। बैठक में पटवारियों को कानूनी संरक्षण देने और 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाइयों को शून्य करने पर सहमति बनने की बात कही गई।
कानूनी संरक्षण के मुद्दे पर बनी सहमति
पटवारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल के मुताबिक, स्वामित्व योजना के तहत होने वाली रजिस्ट्रियों से जुड़े मामलों में पटवारियों को न्यायिक संरक्षण देने के आदेश जारी किए जाएंगे। पटवारी संघ लंबे समय से इस योजना के तहत रजिस्ट्री से जुड़े विवादों में संभावित कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा की मांग कर रहा था। भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने बताया कि बैठक में इस संबंध में आ रही अड़चनों का समाधान कर दिया गया है। साथ ही, 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाइयों को शून्य करने पर भी सहमति बनी है।
वेतन विसंगति पर आयोग के गठन के बाद विचार
बैठक में पटवारियों की आर्थिक मांगों पर भी चर्चा हुई। सरकार ने वेतन विसंगति सहित अन्य मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है। गुर्जर के मुताबिक, वेतन विसंगति के मामले में आयोग के गठन के बाद विचार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने 27 अक्टूबर को होने वाले पटवारी महासम्मेलन में आर्थिक मांगों को लेकर घोषणा करने का आश्वासन दिया है।
50 लाख भूमि पंजीयन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बैठक की जानकारी साझा की। इसके मुताबिक, पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने स्वामित्व योजना का काम पूरी निष्ठा से करने की बात कही है। सरकार इस योजना को प्राथमिकता दे रही है। इसके तहत करीब 50 लाख भूमि पंजीयन का लक्ष्य बताया गया है। बैठक में राज्य कर्मचारी कल्याण समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा, भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर, पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल और प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
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MP News: पटवारियों पर कार्रवाई तेज, 102 पर गिरी गाज, 27 बर्खास्त और 75 निलंबित; स्वामित्व योजना पर टकराव

भोपाल: मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी की जमीनों के मालिकाना हक और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को लेकर सरकार और पटवारियों के बीच विवाद बढ़ गया है। निष्पादक (एग्जीक्यूटर) की भूमिका में हस्ताक्षर करने पर पटवारियों की आपत्ति के बीच प्रदेश में 102 पटवारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें 27 को बर्खास्त और 75 को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
सबसे बड़ी कार्रवाई रीवा में हुई, जहां गुरुवार को 15 पटवारियों को एक साथ निलंबित किया गया। इसके अलावा ग्वालियर में 19, जबलपुर में 17 और सागर में 13 पटवारियों को निलंबित किया गया। कार्रवाई के विरोध में प्रभावित जिलों में पटवारियों ने राजस्व कार्यों का बहिष्कार किया। इधर, नर्मदापुरम में 133, सागर में 137, छिंदवाड़ा में 32, गुना में 52 और भोपाल में 3 पटवारियों को नोटिस दिए गए हैं। रतलाम में शासकीय कार्यों में लापरवाही के आरोप में 12 पटवारियों को आरोप-पत्र जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री तक पहुंचा विवाद, बैठक में नहीं निकला हल
पटवारियों के विरोध और उनके खिलाफ कार्रवाई का मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंच गया है। गुरुवार को प्रमुख राजस्व आयुक्त (PRC) कार्यालय में पटवारी संघ के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के साथ वल्लभ भवन में प्रस्तावित बैठक भी उनकी व्यस्तता के कारण टल गई। पटवारी संघ का कहना है कि जब तक उन्हें निष्पादक की भूमिका से हटाने पर निर्णय नहीं होता, उनकी मुख्य आपत्ति बनी रहेगी। संघ ने कार्रवाई वापस लेने की मांग भी की है।
50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री की तैयारी
मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों की करीब 50 लाख संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है। इस प्रक्रिया पर 3,800 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि पर काबिज लोगों के अधिकारों का रिकॉर्ड तैयार किया गया है। अब इन संपत्तियों के मालिकाना हक को रजिस्ट्री के जरिए औपचारिक रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसी काम में पटवारियों की भूमिका को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को सात दिन में योजना का काम पूरा कराने और प्रदर्शन दिखाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित समय में काम नहीं हुआ तो कलेक्टरों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी। योजना की तय समय-सीमा में केवल नौ दिन शेष होने की बात भी कही गई है।
मुख्य सचिव की सख्ती
मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कलेक्टरों को निर्देश दिए कि पटवारियों और तहसीलदारों से काम कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि पहले पटवारियों को समझाकर काम कराया जाए। जरूरत पड़ने पर सख्त कार्रवाई की जाए, लेकिन योजना का काम पूरा होना चाहिए। बर्णवाल ने कहा कि तीन सप्ताह बीत जाने के बावजूद योजना में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूमि और राजस्व से जुड़े काम संबंधित कर्मचारियों से ही कराए जाने चाहिए।
उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि जो अधिकारी सात दिन में काम नहीं करा पाएंगे, उन्हें भोपाल बुलाकर जवाब मांगा जा सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि काम में लापरवाही पर कलेक्टरों के साथ उन तहसीलदारों पर भी कार्रवाई हो सकती है, जो पटवारियों से काम नहीं करा पा रहे हैं।
‘पटवारी कलेक्टर के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगा रहे’
मुख्य सचिव ने प्रदर्शन के दौरान कलेक्टरों के खिलाफ नारेबाजी पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सरकार पटवारियों की मांगों पर बातचीत कर चुकी है। इसके लिए पांच मंत्रियों की समिति के साथ चर्चा कराई गई और उनकी मांगों के अनुरूप सर्कुलर भी जारी किया गया। इसके बावजूद काम नहीं होने पर उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी आदेशों का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है।
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