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अमेरिका में 8 बड़ी IT कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से किया सस्पेंड, टाटा, इंफोसिस, विप्रो और HCL भी शामिल

वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने गुरुवार को 8 बड़ी IT कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया। इनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टाटा), इंफोसिस, विप्रो और HCL के साथ कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं।
अमेरिकी श्रम विभाग के सचिव कीथ सोंडरलिंग ने कहा कि इन कंपनियों से जुड़ी नई PERM एप्लीकेशन स्वीकार नहीं की जाएंगी और लंबित आवेदनों की प्रोसेसिंग भी रोक दी जाएगी। यह कार्रवाई विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पर असर डाल सकती है।
क्या है PERM प्रोग्राम?
PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन अमेरिकी ग्रीन कार्ड की रोजगार आधारित प्रक्रिया का एक अहम चरण है। इसके जरिए अमेरिकी कंपनियां यह प्रमाणित कराती हैं कि किसी पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है और इसके बाद पात्र विदेशी कर्मचारी के लिए स्थायी रोजगार आधारित निवास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल H-1B वीजा पर काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों के लिए भी किया जाता है। हालांकि, मौजूदा फैसले से H-1B वीजा सीधे रद्द या सस्पेंड नहीं किए गए हैं। असर मुख्य रूप से PERM और उससे जुड़ी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर है।
अमेरिका ने क्यों लिया फैसला?
ट्रम्प प्रशासन ने इन कंपनियों पर इमिग्रेशन सिस्टम के कथित दुरुपयोग और विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के जरिए अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार पर असर डालने के आरोप लगाए हैं। श्रम सचिव सोंडरलिंग के मुताबिक, 2009 से इन कंपनियों ने मिलकर करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किए। इनमें 2.30 लाख से ज्यादा H-1B वीजा अप्रूवल और 1 लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणपत्र शामिल हैं। प्रशासन का दावा है कि इससे बड़ी संख्या में अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुईं।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी विदेशी कर्मचारियों से जुड़े वीजा कार्यक्रमों में कथित गड़बड़ियों पर चिंता जताई और अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने की बात कही।
हजारों भारतीय कर्मचारियों पर असर की आशंका
इस फैसले से अमेरिका में काम कर रहे उन भारतीय IT प्रोफेशनल्स की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिनके लिए संबंधित कंपनियां PERM आवेदन कर रही थीं। खास तौर पर भारतीय कर्मचारियों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए भारतीय आवेदकों का बैकलॉग पहले से लंबा है। हालांकि, किसी कर्मचारी का मौजूदा H-1B स्टेटस इस फैसले से अपने आप खत्म नहीं होता।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि कंपनियों के PERM आवेदन पर रोक तब तक जारी रह सकती है, जब तक प्रशासन की ओर से उठाई गई चिंताओं का समाधान नहीं होता।
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Smit Machchhar: अमेरिकी संसद ने भारतीय पायलट स्मित मच्छर की बहादुरी को सराहा, फ्लाईदुबई हमले को बताया आतंकी हमला

Smit Machchhar: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने फ्लाईदुबई के भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी को सम्मानित करने वाला प्रस्ताव पास किया है। प्रस्ताव में 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट FZ1073 में हुए कॉकपिट हमले की निंदा की गई और इसे आतंकी हमला बताया गया। प्रस्ताव में कैप्टन मच्छर के साथ ऑफ-ड्यूटी पायलटों, क्रू और यात्रियों की भूमिका की भी सराहना की गई।
प्रस्ताव के मुताबिक, उड़ान के दौरान फर्स्ट ऑफिसर ने कॉकपिट में कैप्टन मच्छर पर विमान की इमरजेंसी क्रैश एक्स से हमला किया और विमान के नियंत्रण पर कब्जा करने की कोशिश की। विमान कुछ ही समय में 14 हजार फीट से ज्यादा नीचे आ गया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छर ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू किया।
45 मिनट तक डेंटिस्ट ने बचाने की कोशिश की
हमले के बाद विमान में मौजूद इजराइल में रहने वाले डेंटिस्ट डॉ. शोता मुसेव कैप्टन मच्छर की मदद के लिए कॉकपिट पहुंचे। उन्होंने बताया कि कैप्टन के सिर और बाएं हाथ पर गहरे घाव थे और काफी खून बह रहा था। मुसेव ने टी-शर्ट से घावों पर दबाव बनाया और क्रू से बर्फ मंगाकर करीब 45 मिनट तक प्राथमिक उपचार करते रहे। इस दौरान वह कैप्टन से लगातार बात करते रहे ताकि वह होश में रहें।
मुसेव ने बताया कि कैप्टन को होश में रखने के लिए उन्होंने उनसे परिवार के बारे में बात की। उन्होंने पूछा कि उनके कितने बच्चे हैं और उनके नाम क्या हैं। मुसेव के मुताबिक, एक समय कैप्टन की नब्ज बेहद धीमी हो गई थी। बाद में विमान को जल्द उतारने की जरूरत महसूस हुई, जिसके बाद फ्लाइट को सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट की ओर मोड़ा गया। फ्लाइट में करीब 174 यात्री और क्रू सदस्य सवार थे और सभी सुरक्षित बच गए।
कुल्हाड़ी से हुआ था हमला
शुरुआती जानकारी में हमले के लिए चाकू के इस्तेमाल की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में UAE अधिकारियों ने बताया कि फर्स्ट ऑफिसर ने विमान में इमरजेंसी के लिए रखी जाने वाली क्रैश एक्स का इस्तेमाल किया था। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के प्रस्ताव में भी इसी हथियार का उल्लेख है। क्रैश एक्स विमान में आपात स्थिति के लिए रखी जाती है। इसका इस्तेमाल आग या अन्य आपात स्थिति में पैनल काटने अथवा फंसे लोगों तक पहुंच बनाने के लिए किया जा सकता है।
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Spain: 87 साल की किराएदार को घर से निकाला तो भड़का स्पेन, हजारों लोग सड़कों पर उतरे, सरकार गिरी

मैड्रिड: स्पेन में एक 87 वर्षीय बुजुर्ग महिला को उसके 71 साल पुराने किराए के घर से निकाले जाने की घटना ने देश के बढ़ते आवास और किराए के संकट को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। घटना के बाद मैड्रिड समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए और हजारों लोग किराए में बढ़ोतरी तथा बेदखली के खिलाफ सड़कों पर उतर आए।
मामला इतना बढ़ा कि सरकार ने किराएदारों और कमजोर परिवारों को राहत देने के लिए कई आपात आवासीय उपायों का प्रस्ताव रखा। संसद में इन उपायों को लेकर सरकार को समर्थन नहीं मिल सका। इसके बाद प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने तय समय से करीब आठ महीने पहले आम चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है। स्पेन में 29 नवंबर 2026 को मतदान होगा।
71 साल पुराने घर से बेदखल हुईं मारिया
मामला 23 सितंबर को सामने आया, जब मारिया डेल कारमेन अबासकल को मैड्रिड के रेटिरो इलाके में स्थित उनके किराए के घर से बेदखल कर दिया गया। वह करीब 71 साल से इस मकान में रह रही थीं। उनके परिवार ने 1950 के दशक से यह घर किराए पर लिया था। 2018 में इमारत का मालिकाना हक एक रियल एस्टेट निवेश कंपनी के पास चला गया। इसके बाद किराए को लेकर विवाद शुरू हुआ।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनका मासिक किराया 500 यूरो से बढ़ाकर 2,650 यूरो करने की कोशिश की गई। बाद में इसे 1,650 यूरो किया गया, लेकिन यह भी मारिया की करीब 1,350 यूरो की मासिक पेंशन से ज्यादा था।
बेदखली रोकने के लिए जुटे प्रदर्शनकारी
23 सितंबर को जब मारिया डेल कारमेन अबासकल को घर से निकालने की कार्रवाई हुई तो बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग किया। घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे सिर्फ एक बुजुर्ग महिला की समस्या नहीं, बल्कि महंगे किराए और किफायती मकानों की कमी से जुड़े बड़े संकट का उदाहरण बताया।
सरकार ने आवास संकट पर आपात कदम उठाए
घटना के बाद स्पेन सरकार ने 29 सितंबर को आवास संकट से निपटने के लिए दो रॉयल डिक्री-लॉ मंजूर किए। इनमें कमजोर किराएदारों को बेदखली से बचाने, किफायती आवास बढ़ाने और किराये के बाजार में स्थिरता लाने से जुड़े उपाय शामिल हैं। सरकार ने कुछ मामलों में बेदखली पर सुरक्षा व्यवस्था को 2030 तक बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा।
प्रधानमंत्री सांचेज ने इससे पहले कहा था कि सरकार का लक्ष्य ऐसी स्थिति रोकना है जिसमें कोई बुजुर्ग व्यक्ति लंबे समय तक किराया चुकाने के बावजूद अपने घर से बाहर होने की स्थिति में पहुंच जाए।
अब वापस लौटेंगी 87 वर्षीय अबासकल
इस बीच अबासकल के मामले में एक अहम मोड़ भी आया। मालिक कंपनी के साथ नए समझौते के बाद उन्हें दोबारा उसी घर में लौटने का रास्ता साफ हुआ। नए समझौते के तहत उनका किराया उनकी आय के करीब 30% तक सीमित रहेगा, जो लगभग 500 यूरो बैठता है।
आवास संकट के बीच समय से पहले चुनाव
आवास संकट को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ने के बीच प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने 29 नवंबर 2026 को आम चुनाव कराने की घोषणा की। चुनाव तय कार्यक्रम से करीब आठ महीने पहले होंगे। सरकार को संसद में अपने आवास संबंधी प्रस्तावों के लिए पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया था।
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रूस में लैब कर्मचारी की मौत से हड़कंप, 200 लोग क्वॉरेंटाइन, एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थी मृतक

Russia: रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक 28 वर्षीय लैब कर्मचारी की मौत के बाद करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। महिला इरकुत्स्क क्षेत्र के शेलेखोव स्थित एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थी। उसकी मौत के बाद संभावित संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाए हैं। हालांकि, रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि महिला की मौत प्लेग से हुई थी।
25 सितंबर को टेस्ट ट्यूब टूटने की रिपोर्ट
स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, महिला की पहचान दारिया शिपिलोवा के रूप में हुई है। रिपोर्टों में दावा है कि 25 सितंबर को लैब में जीवित जैविक नमूनों के साथ काम करते समय एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी। कुछ रिपोर्टों में नमूने को Yersinia pestis यानी प्लेग पैदा करने वाले बैक्टीरिया से जोड़ा गया है। हालांकि, इस लैब दुर्घटना और महिला के संक्रमण के बीच सीधा संबंध अभी आधिकारिक तौर पर स्थापित नहीं हुआ है। रूसी स्वास्थ्य एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर ने भी लैब में टेस्ट ट्यूब टूटने की बात से इनकार किया है।
29 सितंबर को अस्पताल में भर्ती, वेंटिलेटर पर रखा गया
महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे 29 सितंबर को शेलेखोव के अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी हालत गंभीर होने पर वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। उसे गंभीर निमोनिया था, लेकिन बीमारी का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। रिपोर्टों के अनुसार 1 और 2 अक्टूबर की दरमियानी रात उसकी मौत हो गई। रूसी अधिकारियों के अनुसार फिलहाल बीमारी को अज्ञात कारण वाला निमोनिया माना जा रहा है।
करीब 200 लोगों की निगरानी
महिला के संपर्क में आए करीब 200 लोगों की पहचान कर उन्हें मेडिकल निगरानी में रखा गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, निगरानी में रखे गए लोगों में अभी तक बीमारी के लक्षण सामने नहीं आए हैं और शुरुआती टेस्ट निगेटिव बताए गए हैं। कुछ अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं में एहतियाती कदम उठाए जाने की भी खबरें हैं।
प्लेग की पुष्टि नहीं, जांच जारी
इस मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि महिला को आखिर कौन-सा संक्रमण हुआ था। कुछ स्थानीय रिपोर्टों ने इसे न्यूमोनिक प्लेग से जोड़ा है, लेकिन रूसी संघीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। बीमारी के स्रोत और महिला की मौत के कारण की जांच की जा रही है। क्षेत्रीय अधिकारियों ने लोगों से घबराने के बजाय आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। शेलेखोव की एक एल्युमिनियम फैक्ट्री ने भी एहतियात के तौर पर कर्मचारियों को मास्क पहनने की सलाह दी है।
क्या है न्यूमोनिक प्लेग?
न्यूमोनिक प्लेग, प्लेग का वह रूप है जिसमें संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसका कारण Yersinia pestis बैक्टीरिया है। हालांकि यह गंभीर बीमारी हो सकती है, लेकिन समय पर उचित एंटीबायोटिक उपचार मिलने पर इसका इलाज संभव है। फिलहाल इस मामले में प्लेग की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे संभावित प्लेग संक्रमण के बजाय अज्ञात कारण वाले गंभीर निमोनिया और संदिग्ध लैब एक्सपोजर के मामले के तौर पर रिपोर्ट करना अधिक सटीक है।
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Smit Machchhar: नेतन्याहू ने भारतीय पायलट स्मित मच्छर से फोन पर बात की: बोले- आप भारत, इजराइल और पूरी दुनिया के हीरो; मोदी के साथ इजराइल आने का न्योता

Smit Machchhar: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फ्लाईदुबई के भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर से फोन पर बात कर उनके साहस की तारीफ की। नेतन्याहू ने उन्हें भारत, इजराइल और पूरी दुनिया का हीरो बताया। उन्होंने कैप्टन स्मित और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अगले इजराइली स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने और मशाल जलाने के लिए इजराइल आने का न्योता दिया।
नेतन्याहू ने पूछा- फ्लाइट में आखिर हुआ क्या था?
बातचीत के दौरान नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित से घटना के बारे में पूछा। स्मित ने बताया कि हमले से पहले को-पायलट ने नमाज पढ़ने के लिए समय मांगा था। उन्होंने बताया कि प्रार्थना के दौरान उन्होंने सम्मानवश पीछे की ओर देखने के बजाय सामने की तरफ ध्यान रखा। करीब 4-5 मिनट बाद उनके सिर के पीछे जोरदार वार हुआ। शुरुआत में उन्हें लगा कि विमान के साथ कोई गंभीर हादसा हुआ है, लेकिन लगातार हमले के बाद उन्हें समझ आया कि को-पायलट ही उन पर हमला कर रहा है।
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की। पहली कोशिश के बाद हमलावर ने दरवाजा बंद कर दिया। इसके बाद स्मित ने दोबारा पूरी ताकत लगाकर दरवाजा खोला, जिसके बाद बाहर मौजूद लोगों को अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू करने का मौका मिला।
‘आप भारत और इजराइल के सच्चे हीरो हैं’
नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित की बहादुरी की तारीफ करते हुए उन्हें भारत, इजराइल और पूरी दुनिया का हीरो बताया। उन्होंने कहा कि स्मित ने अपनी जान जोखिम में डालकर विमान में सवार लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। नेतन्याहू ने कहा कि वह चाहते हैं कि कैप्टन स्मित और प्रधानमंत्री मोदी अगले स्वतंत्रता दिवस समारोह में इजराइल आएं और उत्सव की मशाल जलाएं। उन्होंने इसे इजराइल में दिए जाने वाले बड़े सम्मानों में से एक बताया।
क्या है इजराइल में मशाल जलाने की परंपरा?
इजराइल के स्वतंत्रता दिवस को योम हा’अत्जमाउत (Yom Ha’atzmaut) कहा जाता है। इसके समारोह की शुरुआत यरुशलम के माउंट हर्जल पर होने वाले मशाल प्रज्वलन कार्यक्रम से होती है। इस समारोह में आमतौर पर 12 मशालें जलाई जाती हैं। मशाल जलाने का सम्मान उन लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने इजराइली समाज और देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया हो। नेतन्याहू ने बताया कि यह सम्मान आम तौर पर इजराइली नागरिकों को दिया जाता है, लेकिन कैप्टन स्मित के साहस को देखते हुए वह उन्हें इस समारोह में शामिल करना चाहते हैं।
फ्लाईदुबई की फ्लाइट में क्या हुआ था?
30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के अंदर को-पायलट ने कैप्टन स्मित पर हमला किया था। विमान अचानक तेजी से नीचे आया। स्मित ने घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू किया। बाद में विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया। घटना की जांच UAE, सऊदी अरब और इजराइल की एजेंसियां कर रही हैं। हमले के मकसद और आरोपी की पृष्ठभूमि को लेकर भी जांच जारी है।
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फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट पर हमला करने वाला का नाम हमाम अल-हमामी, कट्टरपंथी विचारधारा से था प्रभावित

दुबई: फ्लाईदुबई की दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट FZ1073 में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर चाकू से हमला करने वाले को-पायलट की पहचान हमाम अल-हमामी के रूप में सामने आई है। कई मीडिया रिपोर्टों में उसे ओमान का नागरिक बताया गया है। हालांकि, जांच एजेंसियां अभी उसके मकसद, पृष्ठभूमि और हमले की पूरी योजना की जांच कर रही हैं।
कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित होने की जांच
CBS और अन्य रिपोर्टों के मुताबिक, अल-हमामी ने पहले Oman Air में पायलट ट्रेनिंग ली थी। सूत्रों के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया है कि ओमानी अधिकारियों की निगरानी के दौरान उसके द्वारा कथित तौर पर कट्टरपंथी वेबसाइटें देखे जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद उसे उड़ान से हटाकर ऑफिस की भूमिका दिए जाने की बात कही गई है।
CNN से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह भी रिपोर्ट किया गया है कि उसे कथित कट्टरपंथी विचारों को लेकर ट्रेनिंग से हटाया गया था। हालांकि, उसे बाद में एयरलाइन में दूसरी जिम्मेदारी मिलने की बात भी सामने आई है। इन दावों की जांच जारी है।
सीरिया में रहने के दौरान प्रभावित होने का दावा
कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, अल-हमामी ने ओमान से बाहर काफी समय बिताया था और सीरिया में भी रहा था। जांच से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि इसी दौरान वह कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित हुआ। हालांकि, यह अभी जांच में सामने आए दावों का हिस्सा है और इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रिपोर्टों में उसके सोशल मीडिया से जुड़ी कुछ गतिविधियों का भी उल्लेख है। CBS के अनुसार, एक कथित पोस्ट में इजराइली एयरलाइन El Al के विमान का वीडियो और अल-कायदा के पूर्व प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी की तस्वीर दिखाई देने की बात कही गई है। CBS ने यह जानकारी जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से दी है।
क्या विमान को इजराइल में क्रैश कराने की योजना थी?
जांच का सबसे अहम पहलू अब हमले के मकसद को लेकर है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पूछताछ के दौरान अल-हमामी ने विमान को इजराइल में क्रैश कराने की बात कही। हालांकि, इस दावे को अभी जांच के दौरान सामने आई जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आरोपी का वास्तविक मकसद और क्या वह विमान को जानबूझकर गिराने की योजना बना रहा था, इसकी जांच UAE समेत संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।
33 हजार से 17 हजार फीट तक नीचे आया विमान
30 सितंबर की घटना में उड़ान के दौरान को-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छर पर चाकू से हमला किया था। हमले के दौरान विमान की ऊंचाई तेजी से कम हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, विमान करीब एक मिनट में 33 हजार फीट से 17 हजार फीट तक नीचे आ गया।
गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन ने हमलावर का सामना किया और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। इसके बाद यात्रियों और क्रू ने आरोपी को काबू किया। विमान को बाद में सऊदी अरब के तबुक में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी विमान को सुरक्षित उतारने में मदद की। फ्लाइट में कुल 174 लोग सवार थे।
फ्लाईदुबई में नौकरी कैसे मिली, इसकी भी जांच
जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि पहले कथित सुरक्षा चिंताओं के बावजूद अल-हमामी को फ्लाईदुबई में पायलट की जिम्मेदारी कैसे मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, वह करीब आठ महीने पहले फ्लाईदुबई से जुड़ा था। इससे पहले उसके Oman Air और Royal Air Maroc से जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, उसके करियर की पूरी टाइमलाइन को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है।
इजराइली और UAE एजेंसियों के साथ अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी उसके बैकग्राउंड, संभावित कट्टरपंथीकरण, हमले की योजना और किसी बाहरी कनेक्शन की जांच कर रही हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उसने अकेले यह हमला किया था या किसी और के संपर्क में था।
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