Connect with us

अर्थ जगत

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया आर्थिक सर्वे, वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए जीडीपी 8-8.5 प्रतिशत रहने का अनुमान

Published

on

नई दिल्ली:(India Economic Survey 2022-23)केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मंगलवार 1 फरवरी को देश का आम बजट पेश करेंगी। पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री होने के नाते यह सीतारमण का चौथा बजट होगा, जबकि 2014 में सत्ता पर काबिज होने के बाद से मोदी सरकार का यह 10वां बजट होगा। इससे पहले सोमवार यानी आज वित्त मंत्री ने वित्तीय वर्ष 2022-23 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। यह सर्वे 2022-23 वित्तीय वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 8 से 8.5 प्रतिशत की विकास दर का अनुमान लगाता है।

एनएसओ ने जताया था 9.2 फीसदी का अनुमान

बता दें कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा पूर्व में 9.2 प्रतिशत जीडीपी विस्तार का अनुमान जताया गया था। यानी ये एनएसओ के पूर्व अनुमान से कम है। आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22, अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति के साथ-साथ विकास में तेजी लाने के लिए किए जाने वाले सुधारों का विवरण देता है। 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.3 प्रतिशत की गिरावट आई थी। सर्वेक्षण भारतीय अर्थव्यवस्था के लचीलेपन में सुधार के लिए आपूर्ति-पक्ष के मुद्दों पर केंद्रित है।

क्या होता है आर्थिक सर्वेक्षण

बजट हर साल 1 फरवरी के दिन पेश किया जाता है। इसके ठीक एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण को सामने रखा जाता है, हालांकि पिछले साल इसे 29 जनवरी को पेश किया गया था। आर्थिक सर्वेक्षण बजट का मुख्य आधार होता है और इसमें अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर पेश की जाती है और पूरा लेखा.जोखा रहता है। दूसरे शब्दों में कहें तो आर्थिक सर्वेक्षण देश की आर्थिक सेहत का लेखा.जोखा होता है।

Advertisement

Continue Reading
Advertisement

अर्थ जगत

Indian Railway: नए नियम लागू, बिना टिकट यात्रा पर 500 रुपए जुर्माना, महिला कोच में घुसे तो 2500 रुपए तक पेनाल्टी

Published

on

रेलवे नए नियम 2026, बिना टिकट जुर्माना, भारतीय रेलवे नियम, महिला कोच जुर्माना, रेलवे टिकट नियम, रेलवे पेनाल्टी, Indian Railways New Rules

New Delhi: यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और रेलवे व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव किए हैं। रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नए प्रावधानों के तहत बिना टिकट यात्रा, टिकट का दुरुपयोग, महिला कोच में अवैध प्रवेश, गंदगी फैलाने और अवैध फेरी जैसे मामलों में अब पहले से अधिक सख्ती बरती जाएगी।

रेलवे ने वर्ष 2013 के बाद पहली बार जुर्माने की राशि में संशोधन किया है। नए नियमों के अनुसार बिना टिकट या गलत टिकट के साथ यात्रा करते पकड़े जाने पर यात्री को किराए के अतिरिक्त न्यूनतम 500 रुपए का जुर्माना देना होगा। इससे पहले यह जुर्माना 250 रुपए था।

दूसरे के नाम के टिकट पर सफर करना पड़ेगा भारी

रेलवे ने टिकट के गलत इस्तेमाल पर भी शिकंजा कस दिया है। यदि कोई यात्री किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर बुक टिकट से यात्रा करता हुआ पाया जाता है, तो उसका टिकट तत्काल निरस्त किया जा सकता है। इसके साथ ही उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

महिला कोच में अवैध प्रवेश पर 2500 रुपए तक जुर्माना

Advertisement

महिला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने महिला कोच में अवैध प्रवेश के नियमों को और कड़ा किया है। अब महिला कोच में बिना अनुमति प्रवेश करने वाले पुरुष यात्रियों पर 2500 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

गंदगी और हंगामा करने वालों पर भी कार्रवाई

रेलवे स्टेशन या ट्रेन में गंदगी फैलाने, नशे की हालत में उपद्रव करने अथवा अशोभनीय व्यवहार करने वाले यात्रियों पर 2000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। रेलवे का कहना है कि इससे यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित यात्रा वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।

अवैध फेरी और भीख मांगने वालों पर सख्ती

रेलवे ने ट्रेनों और स्टेशन परिसरों में बिना अनुमति सामान बेचने, फेरी लगाने और भीख मांगने वालों के खिलाफ भी कड़े प्रावधान लागू किए हैं। ऐसे मामलों में 2000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

Advertisement

जुर्माना नहीं भरा तो हो सकती है जेल

रेलवे के अनुसार यदि कोई व्यक्ति निर्धारित जुर्माना जमा नहीं करता है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत तीन महीने से लेकर एक वर्ष तक की जेल की सजा भी हो सकती है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, अनुशासन बनाए रखना और रेलवे सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना है।

Continue Reading

अर्थ जगत

RBI ने रेपो रेट 5.25% पर रखा बरकरार, EMI में नहीं होगा बदलाव, महंगाई का अनुमान बढ़ाया

Published

on

RBI Repo Rate, RBI MPC Meeting, Sanjay Malhotra, Repo Rate 5.25%, EMI News, Inflation Forecast, GDP Growth Forecast, RBI Monetary Policy, RBI News Hindi, Economy News India

RBI Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी बैठक में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि फिलहाल होम लोन, कार लोन और अन्य कर्जों की EMI में कोई बदलाव नहीं होगा।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 जून को बैठक के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय बैंक ने आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक चुनौतियों को देखते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।

महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.1% किया

RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई (Inflation) के अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि वैश्विक तनाव और ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी आने वाले समय में महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है।

GDP ग्रोथ अनुमान घटाया

Advertisement

वैश्विक परिस्थितियों और सप्लाई चेन में संभावित बाधाओं को देखते हुए RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है।

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर विकास दर पर पड़ सकता है।

मॉनेटरी पॉलिसी का रुख रहेगा ‘न्यूट्रल’

मौद्रिक नीति समिति ने अपना रुख (Policy Stance) ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है। RBI का कहना है कि वह आने वाले आर्थिक आंकड़ों और महंगाई की स्थिति के आधार पर आगे निर्णय लेगा।

कमजोर मानसून पर भी नजर

Advertisement

RBI ने कमजोर मानसून की आशंका को लेकर भी चिंता जताई है। कम बारिश का असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है। हालांकि सरकार की फसल विविधीकरण योजनाओं से इसके प्रभाव को कुछ हद तक कम करने की उम्मीद है।

सर्विस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना सहारा

केंद्रीय बैंक ने कहा कि देश की आर्थिक गतिविधियां अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन सकारात्मक है। साथ ही GST सुधारों और रोजगार में स्थिरता से शहरी क्षेत्रों में खपत को भी समर्थन मिल रहा है।

रेपो रेट क्या होता है?

रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज देता है। जब रेपो रेट घटती है तो बैंकों के लिए फंड सस्ता हो जाता है और वे ग्राहकों को कम ब्याज दर पर लोन दे सकते हैं। वहीं रेपो रेट बढ़ने पर लोन महंगे हो जाते हैं।

Advertisement

हर दो महीने में होती है MPC की बैठक

मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) में कुल 6 सदस्य होते हैं। इनमें 3 सदस्य RBI और 3 सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। समिति हर दो महीने में बैठक कर ब्याज दरों और मौद्रिक नीति पर फैसला लेती है।

Continue Reading

अर्थ जगत

ईरान जंग का असर: 2 हफ्तों में चौथी बार महंगी हुई CNG, पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़े

Published

on

CNG price hike, petrol diesel price increase, IGL CNG rates, Delhi NCR CNG price, crude oil prices, Iran US war impact, fuel price hike India, petrol diesel rates Delhi, oil companies loss, CNG news India, सीएनजी महंगी

CNG price hike: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) के दाम पिछले दो हफ्तों में चौथी बार बढ़ाए गए हैं। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने मंगलवार 26 मई से CNG की कीमतों में ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी कर दी है।

दिल्ली-NCR में नए CNG रेट

Delhi में CNG अब ₹83.09 प्रति किलो हो गई है, जो पहले ₹81.09 थी। वहीं नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में CNG की कीमत ₹91.70 प्रति किलो पहुंच गई है। गुरुग्राम में CNG अब ₹88.12 प्रति किलो मिलेगी।  इससे पहले 25 मई को तेल कंपनियों ने पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा किया था। बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹102.12 और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर हो गई है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल इसकी बड़ी वजह है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से पहले क्रूड ऑयल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। इसी कारण कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम लगातार बढ़ा रही हैं।

Advertisement

तेल कंपनियों को रोज 600 करोड़ का नुकसान

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने 25 मई को बताया कि सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन करीब 600 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि 15 मई से पहले पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की बिक्री पर कंपनियों को रोजाना लगभग 1000 करोड़ रुपए तक का घाटा हो रहा था।

Continue Reading

अर्थ जगत

Fuel Price Increase: पेट्रोल-डीजल फिर महंगा, 5 दिन में दूसरी बढ़ोतरी, आज से 90 पैसे प्रति लीटर तक बढ़े दाम

Published

on

Petrol Diesel Price Hike, Fuel Price Increase, Crude Oil Price, Petrol Price Today, Diesel Price Today, Oil Companies Loss, Fuel Rate India, Crude Oil 100 Dollar, Petrol Diesel News, Fuel Price Update

Petrol Diesel Price Hike: देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज 19 मई से औसतन 90 पैसे प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। इससे पहले 15 मई को भी पेट्रोल-डीजल के दामों में 3-3 रुपए प्रति लीटर का इजाफा हुआ था। यानी महज पांच दिनों के भीतर ईंधन कीमतों में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है।

क्यों बढ़ रहे हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में उछाल है। ईरान-अमेरिका तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण क्रूड ऑयल 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।

कच्चे तेल की महंगाई के चलते सरकारी तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ गया था। कंपनियों का कहना है कि लगातार घाटे की स्थिति के कारण कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया था।

तेल कंपनियों को हर महीने भारी नुकसान

Advertisement

सरकार के अनुसार Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी बिक्री पर हर महीने करीब 30 हजार करोड़ रुपए तक का नुकसान हो रहा था। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब घरेलू बाजार में भी दिखने लगा है।

कैसे तय होते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम?

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति के आधार पर तय होती हैं। सरकारी तेल कंपनियां ‘डेली प्राइस रिवीजन’ सिस्टम के तहत रोज सुबह 6 बजे नए रेट जारी करती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल की अंतिम कीमत बेस प्राइस से कई गुना अधिक हो जाती है, क्योंकि इसमें टैक्स, डीलर कमीशन और ट्रांसपोर्टेशन लागत भी जुड़ती है।

पड़ोसी देशों में पहले ही बढ़ चुके थे दाम

Advertisement

सरकार अब तक यह कहती रही थी कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डाला गया। जबकि पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम पहले ही 15% से 20% तक बढ़ चुके थे।

चुनाव से पहले मिली थी राहत

मार्च 2024 से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर थीं। लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने जनता को राहत देते हुए ईंधन पर 2 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। इसके अलावा केंद्र ने एक्साइज ड्यूटी में भी 10-10 रुपए तक की कमी की थी, जिससे लंबे समय तक कीमतें नियंत्रित रहीं।

हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते दबाव के कारण कंपनियों ने फिर कीमतों में इजाफा शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल और महंगा हो सकता है।

Advertisement
Continue Reading

अर्थ जगत

GST Collection: अप्रैल में सरकार को मिले ₹2.42 लाख करोड़, इम्पोर्ट से आय में 25% उछाल

Published

on

GST कलेक्शन 2026, भारत GST रिकॉर्ड, अप्रैल GST कलेक्शन, GST revenue India, Indian economy news, टैक्स कलेक्शन, इम्पोर्ट रेवेन्यू, महाराष्ट्र GST, कर्नाटक GST, गुजरात GST, भारत अर्थव्यवस्था, GST growth, business news India, net GST collection, अप्रैल 2026 GST आंकड़े

GST Collection: देश की जीएसटी व्यवस्था ने एक बार फिर नया रिकॉर्ड बनाया है। अप्रैल 2026 में भारत का ग्रॉस GST कलेक्शन बढ़कर ₹2.42 लाख करोड़ पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक यह पिछले वित्त वर्ष के अप्रैल महीने की तुलना में 8.7% ज्यादा है। इससे पहले अप्रैल 2025 में ₹2.23 लाख करोड़ का रिकॉर्ड कलेक्शन हुआ था।

विशेषज्ञों के मुताबिक हर साल अप्रैल में टैक्स कलेक्शन मजबूत रहने की एक बड़ी वजह कंपनियों द्वारा मार्च में वित्त वर्ष खत्म होने पर खातों का मिलान करना है। इस दौरान कंपनियां बकाया टैक्स का भुगतान करती हैं, जिसका असर अप्रैल के आंकड़ों में दिखाई देता है।

नेट GST कलेक्शन ₹2.11 लाख करोड़

सरकार के अनुसार अप्रैल 2026 में नेट GST कलेक्शन ₹2.11 लाख करोड़ दर्ज किया गया। इसमें सालाना आधार पर 7.3% की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान कुल GST रिफंड 19.3% बढ़कर ₹31,793 करोड़ पहुंच गया। रिफंड जारी करने के बाद सरकार का शुद्ध राजस्व ₹2,10,909 करोड़ रहा।

इम्पोर्ट से आय में 25.8% की बड़ी छलांग

Advertisement

इस बार GST ग्रोथ में सबसे बड़ा योगदान विदेशी व्यापार यानी इम्पोर्ट से आया। ग्रॉस इम्पोर्ट रेवेन्यू 25.8% बढ़कर ₹57,580 करोड़ पहुंच गया। वहीं घरेलू कारोबार से मिलने वाला ग्रॉस डोमेस्टिक रेवेन्यू 4.3% की बढ़ोतरी के साथ ₹1.85 लाख करोड़ दर्ज किया गया। विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आयात गतिविधियों में तेजी आने से सरकार के टैक्स कलेक्शन को मजबूती मिली है।

महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात सबसे आगे

राज्यों के प्रदर्शन की बात करें तो महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात ने GST कलेक्शन में सबसे ज्यादा योगदान दिया। इसके अलावा उत्तर और दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी टैक्स संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार के लिए यह आंकड़े अर्थव्यवस्था में बढ़ती कारोबारी गतिविधियों और टैक्स अनुपालन में सुधार का संकेत माने जा रहे हैं।

Continue Reading

Advertisment

ख़बर उत्तर प्रदेश

अभी तक की बड़ी खबरें

WEBSITE PROPRIETOR & EDITOR DETAILS

Editor/ Director :- Somesh Singh Senger
Web News Portal: Khabritaau.com
Website : www.khabritaau.com
Company : Khabritaau News
Publication Place: Raipur (CG), Bhopal (MP) & Lucknow (UP)
Email:- khabritaau@gmail.com
Mob: +91 6264 084 601

DPR Links

Trending