Connect with us

अर्थ जगत

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: निवेशकों के भरोसे को कानून का आधार, छत्तीसगढ़ में कारोबार की राह हुई आसान

Published

on

छत्तीसगढ़, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, Ease of Doing Business, छत्तीसगढ़ उद्योग, निवेश, निवेशक, MSME, औद्योगिक विकास, विष्णुदेव साय, छत्तीसगढ़ सरकार, Deemed Approval, Self Certification, Risk Based System, Trust Based System, Industrial Development

रायपुर: किसी भी निवेशक के लिए सिर्फ जमीन, बिजली, पानी या बाजार की उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं होती। वह यह भी देखता है कि कारोबार शुरू करने के लिए कितनी मंजूरियां लेनी होंगी, उनमें कितना समय लगेगा, कितनी बार विभागीय प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा और नियमों के अनुपालन में कितना प्रशासनिक बोझ आएगा। इसी सोच को केंद्र में रखते हुए छत्तीसगढ़ ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आगे बढ़ाई गई ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026’ की व्यवस्था का उद्देश्य उद्योगों के लिए अनुमति प्रक्रिया को सरल, समयबद्ध और अधिक भरोसेमंद बनाना है। इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है- जोखिम के आधार पर अनुमति और निरीक्षण तथा विश्वास पर आधारित अनुपालन की व्यवस्था। यह बदलाव सिर्फ प्रक्रियाओं को कम करने का प्रयास नहीं है, बल्कि सरकार और उद्यमी के बीच संबंधों को एक नए भरोसे के ढांचे में बदलने की कोशिश है।

हर उद्योग के लिए एक जैसी प्रक्रिया नहीं

अब तक कई मामलों में छोटे और बड़े उद्योगों को समान तरह की प्रशासनिक प्रक्रियाओं और निरीक्षणों से गुजरना पड़ता था। नई व्यवस्था में इस दृष्टिकोण को बदलते हुए उद्योगों को उनके आकार, प्रकृति और संभावित जोखिम के आधार पर देखने की व्यवस्था की गई है।

कम जोखिम वाले उद्योगों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है। विशेष रूप से सूक्ष्म और लघु उद्यमों को बार-बार होने वाले विभागीय निरीक्षणों और अनावश्यक प्रक्रियागत बोझ से राहत देने पर जोर है। ऐसे मामलों में Self-Certification यानी स्व-घोषणा तथा अधिकृत विशेषज्ञों- जैसे आर्किटेक्ट या लाइसेंसधारी इंजीनियर के प्रमाण-पत्रों को महत्व दिया जाएगा।

Advertisement

दूसरी ओर, जिन परियोजनाओं में सुरक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य या व्यापक जनहित से जुड़े जोखिम अधिक हैं, उनके लिए तकनीकी जांच और आवश्यक निरीक्षण की व्यवस्था बनी रहेगी। यानी सुधार का मतलब नियमों को खत्म करना नहीं, बल्कि जोखिम के हिसाब से नियमों और निगरानी को अधिक तर्कसंगत बनाना है।

निवेशक के लिए क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था का सबसे सीधा असर उद्योग लगाने और कारोबार संचालित करने में लगने वाले समय तथा प्रशासनिक प्रयास पर पड़ सकता है।

1. बार-बार नवीनीकरण की जरूरत कम होगी

ऐसे लाइसेंस और अनुमतियां, जिनके लिए हर साल नवीनीकरण की आवश्यकता होती थी, उनमें वार्षिक नवीनीकरण की व्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में बड़ा बदलाव किया गया है। इसका अर्थ है कि उद्यमी को हर वर्ष समान कागजी प्रक्रिया दोहराने के बजाय अपने कारोबार पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिलेगा।

Advertisement

2. तय समय में फैसला नहीं तो ‘Deemed Approval’

निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक Deemed Approval यानी स्वतः स्वीकृति की व्यवस्था है। यदि निर्धारित समय-सीमा में संबंधित विभाग द्वारा आवेदन पर निर्णय नहीं लिया जाता है, तो निर्धारित नियमों और शर्तों के अधीन अनुमति को स्वीकृत माना जा सकेगा। इससे सबसे बड़ी समस्या ‘अनिश्चित प्रतीक्षा’ को कम करने में मदद मिल सकती है।

3. MSME को प्रक्रियागत राहत

छोटे उद्यमियों के लिए कई बार किसी उद्योग को शुरू करने से ज्यादा मुश्किल उससे जुड़ी अलग-अलग अनुमतियां हासिल करना होता है। नई व्यवस्था में जल प्रदाय, भवन अनुज्ञा जैसी कुछ बुनियादी सेवाओं को स्व-घोषणा और विशेषज्ञ प्रमाण-पत्र आधारित व्यवस्था से जोड़ने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि छोटे उद्यमी का समय सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के बजाय उत्पादन, बाजार और कारोबार बढ़ाने में लगे।

4. 43 सेवाएं एकीकृत व्यवस्था में

Advertisement

प्रारंभिक चरण में 8 प्रमुख विभागों की 43 आवश्यक सेवाओं को इस व्यवस्था के दायरे में लाया गया है। यह एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि उद्योग लगाने वाले निवेशक के लिए अलग-अलग विभागों की प्रक्रियाओं को समझना और पूरा करना अक्सर बड़ी चुनौती होती है।

‘ट्रस्ट’ का मतलब नियमों से छूट नहीं

इस पूरी व्यवस्था की सबसे अहम बात यह है कि Trust-Based System का अर्थ नियमों से मुक्ति नहीं है। इसका अर्थ है कि कम जोखिम वाले मामलों में सरकार हर उद्यमी को पहले से संदिग्ध मानकर लगातार निरीक्षण करने के बजाय उसके स्व-घोषित अनुपालन पर भरोसा करे और आवश्यकता होने पर जोखिम आधारित जांच करे।

दूसरे शब्दों में, व्यवस्था का फोकस ‘हर किसी की जांच’ से ‘जहां जरूरत है वहां जांच’ की ओर बढ़ता है। इससे प्रशासनिक संसाधनों का भी बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकता है। विभागों को कम जोखिम वाले मामलों में नियमित प्रक्रियाओं पर कम समय खर्च करके उच्च जोखिम वाले मामलों पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलेगा।

जवाबदेही भी, निगरानी भी

Advertisement

किसी भी सुधार की सफलता सिर्फ नियम बनाने से नहीं, बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन से तय होती है। इसलिए इस व्यवस्था के साथ निगरानी और जवाबदेही का ढांचा भी महत्वपूर्ण है।

इसके लिए त्रिस्तरीय व्यवस्था प्रस्तावित है-

शीर्ष परिषद: मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नीति और समग्र क्रियान्वयन को दिशा देने का काम।

राज्य स्तरीय समिति: मुख्य सचिव के नेतृत्व में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और व्यवस्था की निगरानी।

जिला स्तरीय समिति: कलेक्टर की अध्यक्षता में स्थानीय स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं और शिकायतों के समाधान पर ध्यान।

Advertisement

इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अनुमति प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला सिर्फ सरकारी दस्तावेजों तक सीमित न रहे, बल्कि उद्योग लगाने वाले व्यक्ति को जमीन पर भी उसका लाभ मिले।

छोटे उद्यमी से बड़े निवेशक तक असर

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का लाभ सिर्फ बड़े औद्योगिक समूहों तक सीमित नहीं होता। इसकी सबसे बड़ी उपयोगिता छोटे उद्यमियों के लिए होती है, जिनके पास बड़ी कंपनियों की तरह अलग कानूनी, नियामकीय और प्रशासनिक टीमें नहीं होतीं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 15 लाख से अधिक MSME हैं। ऐसे में अनुमति प्रक्रिया में समय और कागजी कार्रवाई की कमी का व्यापक आर्थिक प्रभाव हो सकता है।

एक छोटे उद्यमी के लिए कुछ दिन या सप्ताह की बचत भी महत्वपूर्ण होती है। वहीं बड़े निवेश के मामले में परियोजना शुरू होने में लगने वाला समय सीधे लागत, वित्तीय दायित्व और बाजार में प्रवेश के समय को प्रभावित कर सकता है।इसलिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का वास्तविक अर्थ केवल ‘कम फॉर्म’ नहीं, बल्कि ‘कम अनिश्चितता और अधिक गति’ है।

Advertisement

निवेश के लिए भरोसे का माहौल

किसी राज्य में निवेश का फैसला केवल उपलब्ध संसाधनों के आधार पर नहीं होता। निवेशक यह भी देखता है कि सरकार की नीतियां कितनी स्पष्ट हैं, अनुमति प्रक्रिया कितनी समयबद्ध है और कारोबार शुरू होने के बाद अनुपालन कितना सरल है। छत्तीसगढ़ की नई पहल इसी भरोसे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

रिस्क-बेस्ड और ट्रस्ट-बेस्ड व्यवस्था, Deemed Approval, वार्षिक नवीनीकरण से राहत, Self-Certification और सेवाओं के एकीकरण जैसे सुधार मिलकर ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास करते हैं, जहां सरकार का काम केवल अनुमति देना नहीं, बल्कि कारोबार के लिए अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना हो।

आगे की चुनौती- नीति से जमीन तक

इस सुधार की असली सफलता इस बात से तय होगी कि नए प्रावधानों को जिलों और विभागों में कितनी तेजी और एकरूपता से लागू किया जाता है।

Advertisement

डिजिटल प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता, विभागीय समय-सीमा का पालन, अधिकारियों की जवाबदेही, उद्योगों के लिए स्पष्ट मार्गदर्शन और शिकायतों के त्वरित समाधान जैसे पहलू इसकी सफलता के लिए उतने ही महत्वपूर्ण होंगे।

यदि नीति और उसके क्रियान्वयन के बीच की दूरी कम की जाती है, तो यह व्यवस्था छत्तीसगढ़ के औद्योगिक वातावरण में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है।

क्योंकि निवेशक के लिए सबसे बड़ा प्रोत्साहन केवल रियायत नहीं होता—उसे यह भरोसा चाहिए कि उसका समय महत्वपूर्ण है, प्रक्रिया स्पष्ट है और सरकार उसके साथ खड़ी है।

इसी भरोसे को संस्थागत रूप देने की दिशा में ‘छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ पहल राज्य को अधिक सरल, पारदर्शी और निवेश-अनुकूल औद्योगिक वातावरण की ओर ले जाने वाला महत्वपूर्ण कदम बन सकती है।

Advertisement

अर्थ जगत

SBI Data Leak: डार्क वेब पर मिले 3,897 रिकॉर्ड में ग्राहकों की निजी जानकारी, बैंक ने बताया पैसा सुरक्षित

Published

on

SBI data leak, SBI cyber alert, SBI customer data leak, State Bank of India data breach, SBI dark web records, SBI data exposure, एसबीआई डेटा लीक, एसबीआई साइबर अलर्ट, बैंकिंग फ्रॉड, साइबर सुरक्षा

SBI Cyber Alert: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों के डेटा से जुड़ी साइबर घटना सामने आई है। बैंक के मुताबिक, शुरुआती जांच में डार्क वेब पर उपलब्ध करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड में से 3,897 रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें ग्राहकों की निजी जानकारी शामिल थी। बैंक ने प्रभावित ग्राहकों को ईमेल और WhatsApp के जरिए अलग-अलग सूचना भेजी है।

हालांकि, बैंक ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के खातों में जमा रकम सुरक्षित है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कितने ग्राहकों की कौन-कौन सी निजी जानकारियां प्रभावित हुईं और डेटा सामने आने की घटना किस तरह हुई।

क्या SBI ग्राहकों के खाते से पैसे निकलने का खतरा है?

SBI ने अपने संदेश में ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि उनके खातों में जमा रकम सुरक्षित है। हालांकि, निजी डेटा सामने आने की घटना को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि साइबर अपराधियों के पास किसी ग्राहक की निजी जानकारी पहुंच जाती है, तो वे उसका इस्तेमाल फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने, नकली मैसेज भेजने या धोखाधड़ी के जरिए गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश में कर सकते हैं।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्रभावित ग्राहकों के खातों से पैसे निकाले गए हैं। बैंक ने कितने ग्राहकों का डेटा प्रभावित हुआ और कौन-सी जानकारी सामने आई, इसका पूरा विवरण साझा नहीं किया है।

Advertisement

डार्क वेब पर मिले 3,897 रिकॉर्ड में क्या था?

बैंक की ओर से शेयर बाजार को दी गई जानकारी के मुताबिक, 21 अक्टूबर को सामने आए मामले की शुरुआती जांच में डार्क वेब पर उपलब्ध लगभग 3.75 लाख रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। इनमें से 3,897 रिकॉर्ड में ग्राहकों की निजी जानकारी होने की पहचान की गई।

बैंक को 16 अक्टूबर को अपने थ्रेट इंटेलिजेंस सेवा प्रदाता, डिफेंस साइबर एजेंसी और भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (CERT-In) से डेटा उजागर होने की आशंका से जुड़े अलर्ट मिले थे। इसके बाद बैंक ने मामले की जांच शुरू की और प्रभावित ग्राहकों को सूचना देने की प्रक्रिया अपनाई।

ग्राहकों को ईमेल और WhatsApp से भेजा गया अलर्ट

SBI ने जिन ग्राहकों के डेटा से जुड़ी जानकारी की पहचान की, उन्हें ईमेल और WhatsApp के जरिए अलग-अलग सूचित किया है। यदि आपको बैंक के नाम से कोई संदेश मिलता है, तो उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। किसी भी लिंक पर क्लिक करने या व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले सुनिश्चित करें कि संदेश वास्तव में बैंक की ओर से भेजा गया है।

Advertisement

साइबर अपराधी कई बार बैंक के नाम और लोगो का इस्तेमाल करके नकली संदेश भेजते हैं। इसलिए केवल संदेश में SBI का नाम या लोगो देखकर उस पर भरोसा न करें।

SBI ग्राहकों को किन 5 बातों का ध्यान रखना चाहिए?

1. OTP किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी होने का दावा करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP मांगे, तो उसे साझा न करें।

2. PIN और पासवर्ड गोपनीय रखें: ATM PIN, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड और अन्य गोपनीय बैंकिंग विवरण किसी के साथ साझा न करें।

3. संदिग्ध लिंक से बचें: ईमेल, SMS या WhatsApp पर आए अनजान लिंक के जरिए बैंकिंग खाते में लॉगिन न करें।

Advertisement

4. अनजान कॉल पर भरोसा न करें: KYC अपडेट, खाता बंद होने या पैसे सुरक्षित रखने के नाम पर आने वाली कॉल की आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।

5. संदिग्ध लेनदेन दिखे तो तुरंत शिकायत करें: बैंक के आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर भारत के साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।

क्या ग्राहकों को अपना पासवर्ड बदलना चाहिए?

केवल इस खबर के आधार पर सभी ग्राहकों के पासवर्ड बदलना जरूरी होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। हालांकि, यदि बैंक ने आपको व्यक्तिगत रूप से अलर्ट भेजा है, तो उसमें दिए गए आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।यदि आपको किसी संदिग्ध गतिविधि का संदेह है, तो बैंक के आधिकारिक चैनल से संपर्क करके अपने खाते की सुरक्षा की जांच कराएं। किसी भी स्थिति में OTP, PIN या पासवर्ड साझा न करें। फिलहाल इस मामले में प्रभावित डेटा की पूरी प्रकृति और संभावित दुरुपयोग से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

Advertisement
Continue Reading

अर्थ जगत

UPI पेमेंट पर MDR चार्ज दिवाली तक टला, ₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर लगना था 0.4% शुल्क

Published

on

UPI MDR चार्ज, UPI पेमेंट चार्ज, NPCI, 0.4 प्रतिशत MDR, ₹2000 से ज्यादा UPI पेमेंट, UPI चार्ज दिवाली

नई दिल्ली: यूपीआई (UPI) पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लगाने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। यह नियम पहले 15 अक्टूबर से लागू होना था। प्रस्ताव के मुताबिक, दुकानदारों को ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर 0.4% शुल्क देना पड़ता। हालांकि, आम लोगों के बीच होने वाले यूपीआई ट्रांजैक्शन फ्री रहने की बात कही गई है।

त्योहारी सीजन के बाद लागू करने की तैयारी

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने त्योहारी सीजन को देखते हुए चार्ज लागू करने का फैसला आगे बढ़ाया है। जानकारी के मुताबिक, इसे दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जा सकता है। हालांकि, नई तारीख का अभी ऐलान नहीं किया गया है।

दुकानदारों पर पड़ सकता है असर

प्रस्ताव लागू होने पर ₹2,000 से अधिक के पात्र यूपीआई भुगतान पर दुकानदारों को 0.4% शुल्क देना पड़ सकता है। आम लोगों के बीच होने वाले व्यक्तिगत यूपीआई ट्रांजैक्शन पर शुल्क नहीं लगने की बात कही गई है।

Advertisement
Continue Reading

अर्थ जगत

GST Council 2026: 5 करोड़ से कम की टैक्स गड़बड़ी पर गिरफ्तारी नहीं, ₹10 हजार तक के मामलों में नोटिस भी नहीं

Published

on

GST Council 2026, GST नए नियम, GST गिरफ्तारी, 5 करोड़ टैक्स चोरी, GST prosecution limit, GST Council meeting, GST tax rules, निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली: GST काउंसिल ने कारोबारियों और टैक्सपेयर्स को राहत देते हुए GST कानून के तहत टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म करने और क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन की सीमा बढ़ाने की सिफारिश की है। गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई GST काउंसिल की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। काउंसिल ने GST मामलों में क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन की न्यूनतम सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का फैसला किया है। साथ ही सामान्य पेनल्टी को ₹25 हजार से घटाकर ₹10 हजार करने की सिफारिश की गई है।

GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म

GST व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव गिरफ्तारी से जुड़ा है। काउंसिल ने GST अधिकारियों की टैक्सपेयर्स को गिरफ्तार करने की शक्ति खत्म करने की सिफारिश की है। साथ ही न्यूनतम सजा का प्रावधान भी हटाने का फैसला किया गया है। अब किसी मामले में जुर्माना, जेल या दोनों में से क्या सजा होगी, इसका फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत करेगी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि टैक्स चोरी या गलत ITC लेने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। टैक्स की रिकवरी, ब्याज और लागू पेनल्टी की कार्रवाई जारी रहेगी।

₹1 करोड़ की जगह ₹5 करोड़ हुई प्रॉसिक्यूशन लिमिट

अब तक ₹1 करोड़ की टैक्स गड़बड़ी पर क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन शुरू किया जा सकता था। काउंसिल ने इस सीमा को पांच गुना बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य छोटे और सामान्य टैक्स विवादों को आपराधिक कार्रवाई के दायरे से बाहर रखना और गंभीर टैक्स चोरी के मामलों पर फोकस करना है।

Advertisement

₹10 हजार तक के मामलों में नहीं दिया जाएगा नोटिस

GST काउंसिल ने ₹10 हजार या उससे कम की राशि वाले मामलों में शो-कॉज नोटिस जारी नहीं करने का फैसला किया है। पहले से लंबित ऐसे नोटिस वापस लेने का भी प्रावधान किया गया है। इससे छोटी रकम से जुड़े मामलों में कारोबारियों पर होने वाली कागजी और कानूनी कार्रवाई कम होगी।

सामान्य पेनल्टी ₹25 हजार से घटकर ₹10 हजार

जहां किसी विशेष उल्लंघन के लिए अलग पेनल्टी तय नहीं है, वहां लागू होने वाली जनरल पेनल्टी ₹25 हजार से घटाकर ₹10 हजार करने की सिफारिश की गई है। वहीं रिटर्न दाखिल करने में देरी, गलती या टैक्स भुगतान में देरी पर टैक्स रिकवरी, ब्याज और लागू अनुपातिक पेनल्टी की कार्रवाई जारी रहेगी।

सही बिल वाले खरीदारों के ITC पर कमेटी करेगी अध्ययन

Advertisement

इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC को लेकर भी काउंसिल ने अहम कदम उठाया है। यदि किसी खरीदार के पास सही इनवॉइस है, उसने सामान प्राप्त किया है और सप्लायर को भुगतान कर दिया है, लेकिन सप्लायर की गलती या धोखाधड़ी के कारण खरीदार का ITC प्रभावित होता है, तो ऐसे मामलों की सुरक्षा व्यवस्था पर Committee of Officers अध्ययन करेगी। कमेटी को अपनी रिपोर्ट तीन महीने में देने को कहा गया है। रिपोर्ट अगली GST काउंसिल बैठक में रखी जाएगी।

छोटे ई-कॉमर्स कारोबारियों को भी राहत

काउंसिल ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों के लिए GST अनुपालन आसान करने की सिफारिश की है। इसके तहत कुछ शर्तों के साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस को दूसरे राज्य में कारोबार के प्रमुख स्थान के रूप में इस्तेमाल करने की सुविधा दी जाएगी।

GST की दरों में कोई बदलाव नहीं

बैठक में मौजूदा GST टैक्स रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। इस बार काउंसिल का फोकस टैक्स दरों के बजाय GST व्यवस्था को सरल बनाने, अनुपालन का बोझ घटाने और टैक्स प्रशासन को आसान बनाने पर रहा।

Advertisement
Continue Reading

अर्थ जगत

RBI ने बढ़ाई रेपो रेट: 5.25% से 5.50% हुई, आने वाले समय में महंगा हो सकता है लोन

Published

on

RBI Repo Rate, रेपो रेट, RBI MPC 2026, Sanjay Malhotra, RBI Rate Hike, Loan EMI, GDP Growth 7.1, RBI Inflation Forecast

मुंबई: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट में 0.25% यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। अब रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गई है। यह फरवरी 2023 के बाद RBI की पहली दर बढ़ोतरी है। RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार, 7 अक्टूबर को फैसलों की जानकारी दी। RBI ने महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी चरणबद्ध सख्ती की ओर किया है।

EMI पर पड़ सकता है असर

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्प अवधि के लिए कर्ज देता है। इसमें बढ़ोतरी होने पर बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरों और EMI पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका असर हर बैंक और हर लोन पर एक जैसा या तुरंत होना जरूरी नहीं है।

महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2%

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, खाद्य कीमतों और मौसम से जुड़े जोखिमों को महंगाई के लिए चुनौती माना गया है।

Advertisement

GDP ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ा

महंगाई की चिंता के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ग्रोथ आउटलुक बेहतर किया है। FY27 में GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया गया है। पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही थी, जो RBI के अनुमान से बेहतर थी। इसी मजबूत आर्थिक गतिविधि को आगे की ग्रोथ के लिए सकारात्मक संकेत माना गया है।

Q2 में 7.2% और Q3 में 6.9% ग्रोथ का अनुमान

RBI के अनुमान के मुताबिक FY27 की दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.2% और तीसरी तिमाही में 6.9% रह सकती है। चौथी तिमाही के लिए ग्रोथ अनुमान 6.8% पर बरकरार रखा गया है। RBI के सामने एक तरफ मजबूत आर्थिक गतिविधि है, वहीं दूसरी तरफ महंगाई और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिम हैं। इसी संतुलन को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर बढ़ाने का फैसला किया है।

Advertisement
Continue Reading

अर्थ जगत

World Bank ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, FY27 में 7.1% की रफ्तार

Published

on

भारत GDP ग्रोथ, World Bank GDP Forecast, India GDP Growth FY27, World Bank India, GDP Growth 7.1 Percent, भारत की अर्थव्यवस्था, India Development Update

नई दिल्ली: वर्ल्ड बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। अप्रैल में संस्था ने FY27 में भारत की आर्थिक वृद्धि 6.6% रहने का अनुमान लगाया था। नया अनुमान मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को जारी ताजा India Development Update में सामने आया है।

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। FY27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में GDP ग्रोथ 7.8% रही, जिसने पूरे वित्त वर्ष के अनुमान को ऊपर करने में अहम भूमिका निभाई।

गांव-शहरों में मांग बढ़ी, एक्सपोर्ट ने भी दिया सहारा

वर्ल्ड बैंक के अनुसार भारत की ग्रोथ को सबसे ज्यादा निजी खपत और निवेश से मजबूती मिली है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अच्छी कृषि गतिविधि, ग्रामीण आय सहायता, खाद्य सब्सिडी और कम महंगाई से सहारा मिला। वहीं, शहरी खपत को इनकम टैक्स में राहत और GST कटौती से बढ़ावा मिला। एक्सपोर्ट ने भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसे FY27 के ग्रोथ आउटलुक के लिए सकारात्मक संकेत माना गया है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर में तेज ग्रोथ

Advertisement

सप्लाई साइड पर इंडस्ट्रियल एक्टिविटी ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। पहली तिमाही में इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स की ग्रोथ 7.2% रही, जबकि एक साल पहले यह 6.1% थी। गर्मी के दौरान बिजली की मांग बढ़ने से इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर में 9.3% की ग्रोथ दर्ज की गई। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, मजबूत औद्योगिक गतिविधि कृषि क्षेत्र में कमजोरी की भरपाई करने में मदद कर सकती है।

कृषि क्षेत्र पर बारिश की कमी का असर

वर्ल्ड बैंक ने कृषि क्षेत्र को लेकर कुछ चिंता भी जताई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश में कमी रही, हालांकि जुलाई के बाद हुई बारिश ने स्थिति में सुधार किया है। इसके बावजूद पूरे मानसून सीजन की कमी से कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर कुछ असर पड़ने की आशंका है।

FY26 में 7.8% रही भारत की ग्रोथ

वर्ल्ड बैंक के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था FY26 में 7.8% की दर से बढ़ी, जबकि FY25 में यह वृद्धि 7.2% रही थी। मजबूत निवेश, निजी खपत और अनुकूल वित्तीय एवं नीतिगत परिस्थितियों ने वैश्विक व्यापार संबंधी चुनौतियों के असर को कम करने में मदद की। हालांकि, वर्ल्ड बैंक ने आगे की तिमाहियों में ग्रोथ की रफ्तार कुछ कम होने की संभावना जताई है। वैश्विक तेल कीमतें, El Niño और शेयर बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव जैसे जोखिम भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने रह सकते हैं।

Advertisement
Continue Reading

Advertisment

ख़बर उत्तर प्रदेश

अभी तक की बड़ी खबरें

WEBSITE PROPRIETOR & EDITOR DETAILS

Editor/ Director :- Somesh Singh Senger
Web News Portal: Khabritaau.com
Website : www.khabritaau.com
Company : Khabritaau News
Publication Place: Raipur (CG), Bhopal (MP) & Lucknow (UP)
Email:- khabritaau@gmail.com
Mob: +91 6264 084 601

DPR Links

Trending