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पुष्कर सिंह धामी एक बार फिर संभालेंगे उत्तराखंड की कमान, मणिपुर में एन बीरेन सिंह ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

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देहरादून:(Uttarakhand New CM) उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत के साथ वापसी के बाद भी बीजेपी के लिए नया मुख्यमंत्री तय कर पाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा था। दरअसल उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे पुष्कर सिंह धामी खटीमा सीट से चुनाव हार गए थे। ऐसे में बीजेपी भारी बहुमत से जीत के बाद भी उनके नाम का ऐलान करने से पहले सारा नफा नुकसान तोल लेना चाहती थी। अब सोमवार की शाम उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी को विधायक दल का नेता  चुन लिया गया है। मौजूदा सीएम धामी ही दूसरी बार उत्तराखंड के सीएम बनेंगे। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के ऐलान से पहले सोमवार सुबह 11 बजे उत्तराखंड के सभी विधायकों ने शपथ ली।

एन बीरेन सिंह ने ली मणिपुर के सीएम पद की शपथ

मणिपुर में एन बीरेन सिंह ने लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। आज राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में एन बीरेन सिंह को राज्यपाल एल गणेशन ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री के साथ पांच मंत्रियों ने भी शपथ ली। बता दें कि मणिपुर विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है। बीजेपी को सूबे की कुल 60 में से 32 सीटों पर जीत मिली।2017 में भी बीजेपी ने सरकार बनाई थी और एन बीरेन सिंह मुख्यमंत्री बने थे।

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अरब सागर में भारत-पाक नौसेना के जहाज टकराए, दिल्ली में पाक राजनयिक तलब

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नई दिल्ली: उत्तरी अरब सागर में भारत और पाकिस्तान की नौसेना के जहाजों के बीच टक्कर हो गई। घटना 15 सितंबर की शाम अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई, जब नियमित निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना के एक युद्धपोत के करीब पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज तेज रफ्तार से पहुंचा। भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी जहाज के व्यवहार को ‘अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर’ बताते हुए 16 सितंबर को पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

MEA के मुताबिक घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। भारत ने कहा कि पाकिस्तानी नौसैनिक इकाई का आचरण 1991 के भारत-पाकिस्तान समझौते के अनुच्छेद 10 के सीधे उल्लंघन में था। इस अनुच्छेद का उद्देश्य दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों के दौरान जहाजों और इकाइयों के बीच सुरक्षा व पूर्व-सूचना से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

तेज रफ्तार में भारतीय युद्धपोत के करीब आया पाकिस्तानी जहाज

भारतीय सूत्रों के अनुसार, भारतीय युद्धपोत उत्तरी अरब सागर में नियमित निगरानी मिशन पर था। इसी दौरान पाकिस्तानी नौसेना का एक जहाज तेज गति से भारतीय युद्धपोत के करीब आया और असुरक्षित तरीके से दिशा बदली। इसके बाद दोनों जहाजों की टक्कर हो गई।

विदेश मंत्रालय ने घटना के विस्तृत नौवहन विवरण या भारतीय युद्धपोत का नाम सार्वजनिक नहीं किया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तानी जहाज की पहचान PNS Hunain के रूप में की गई है। इसे यारमूक-क्लास का समुद्री गश्ती पोत बताया गया है, जिसका इस्तेमाल निगरानी और समुद्री सुरक्षा अभियानों में होता है।

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भारत ने पाकिस्तान के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया

घटना के बाद विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के चार्ज डी’अफेयर्स को तलब किया। भारत ने पाकिस्तानी नौसैनिक इकाइयों के व्यवहार पर कड़ा विरोध दर्ज कराया और पाकिस्तान से अपने सैन्य बलों को समुद्र में पर्याप्त सावधानी बरतने तथा दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का पालन सुनिश्चित करने को कहा। भारत के इस्लामाबाद स्थित चार्ज डी’अफेयर्स को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के सामने इसी मामले में विरोध दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

भारतीय जहाज को बड़ा नुकसान नहीं

MEA ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई इस घटना से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों में भारतीय युद्धपोत पर किसी बड़े संरचनात्मक नुकसान या नौसैनिकों के घायल होने की जानकारी नहीं है। हालांकि, पाकिस्तानी जहाज को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं और उसके अपने बंदरगाह की ओर लौटने की बात भी रिपोर्ट की गई है। इस संबंध में आधिकारिक विस्तृत आकलन अभी सामने नहीं आया है।

1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 का मामला

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भारत ने इस घटना को 1991 के Agreement on Advance Notice on Military Exercises, Manoeuvres and Troops Movements के अनुच्छेद 10 के संदर्भ में उठाया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का आचरण इस प्रावधान के सीधे विपरीत था। भारत ने पाकिस्तान से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में उसके सैन्य जहाज ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पर्याप्त सावधानी बरतें।

2011 में भी INS Godavari और PNS Babur आमने-सामने आए थे

भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों के बीच समुद्र में ऐसी घटना पहले भी हो चुकी है। 16 जून 2011 को अदन की खाड़ी में भारतीय युद्धपोत INS Godavari और पाकिस्तानी जहाज PNS Babur एक-दूसरे से टकरा गए थे। उस समय दोनों जहाज सोमाली समुद्री डकैती से मुक्त किए गए MV Suez के मामले में इलाके में सक्रिय थे।

भारत ने तब आरोप लगाया था कि PNS Babur ने पीछे से तेज गति से आकर असुरक्षित तरीके से manoeuvre किया और INS Godavari को छुआ। इस घटना में INS Godavari के हेलिकॉप्टर डेक का सुरक्षा जाल क्षतिग्रस्त हुआ था। भारत ने पाकिस्तान के सामने औपचारिक विरोध भी दर्ज कराया था।

पाकिस्तान ने उस समय अलग पक्ष रखते हुए INS Godavari पर उसके मानवीय अभियान में बाधा डालने और खतरनाक manoeuvre करने का आरोप लगाया था। यानी 2011 की घटना को लेकर दोनों देशों के दावे अलग थे।

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Mumbai: दिशा सालियान केस में CBI ने दर्ज की FIR, आदित्य ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, डिनो मोरिया और सूरज पंचोली के नाम

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मुंबई: सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को FIR दर्ज कर ली। यह कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट के 2 सितंबर के आदेश के बाद हुई है। कोर्ट ने CBI को दिशा के पिता सतीश सालियान की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर मामले की नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक CBI की FIR में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे, अभिनेता डिनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती और सूरज पंचोली समेत कई नाम शामिल हैं। हालांकि, FIR में नाम दर्ज होना आरोप सिद्ध होना नहीं है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री मिलने पर ही किसी व्यक्ति को आरोपी माना जाए।

6 साल बाद CBI के हाथ में जांच

दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद मौत हुई थी। पुलिस ने शुरुआत में इसे Accidental Death Report (ADR) के रूप में दर्ज किया था। बाद की जांच में मुंबई पुलिस ने मौत को आत्महत्या बताया था। 6 दिन बाद 14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत भी बांद्रा स्थित अपने घर में मृत मिले थे। दिशा और सुशांत की मौत के बीच समय का अंतर होने के कारण दोनों मामलों को लेकर लंबे समय से कई तरह के सवाल और दावे सामने आते रहे हैं।

हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की जांच पर उठाए थे सवाल

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बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को CBI जांच का आदेश देते हुए कहा था कि करीब छह साल तक चली पुलिस जांच ज्यादा सवाल खड़े करती है और जवाब कम देती है। अदालत ने CBI को वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी के नेतृत्व में जांच करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि जांच में यदि कोई अपराध सामने नहीं आता है तो CBI उचित समरी रिपोर्ट दाखिल कर सकती है।

पिता ने लगाए थे हत्या और गैंगरेप के आरोप

दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत को लेकर गंभीर संदेह जताते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका आरोप है कि दिशा के साथ गैंगरेप और हत्या हुई तथा प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए मामले को दबाने की कोशिश की गई।

CBI के सामने बयान दर्ज कराते समय उन्होंने आदित्य ठाकरे, रिया चक्रवर्ती, सूरज पंचोली, डिनो मोरिया और अन्य लोगों के नामों का उल्लेख किया था। हालांकि ये आरोप जांच का विषय हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।

वकील ने कई लोगों के नाम शिकायत में दिए थे

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सतीश सालियान के वकील निलेश ओझा ने पहले कहा था कि शिकायत में कई लोगों के नाम दिए गए हैं। इनमें आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डिनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती, कुछ पुलिस अधिकारी और अन्य लोग शामिल हैं। वकील का कहना था कि जांच में जिसके खिलाफ पर्याप्त सबूत मिलेंगे, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, अगर CBI की रिपोर्ट में अपराध नहीं बनता है तो परिवार को उस रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराने और प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने का अधिकार रहेगा।

पुलिस का पुराना दावा- मौत आत्महत्या थी

मुंबई पुलिस ने अपनी जांच में दिशा की मौत को आत्महत्या बताया था। पुलिस का कहना था कि उपलब्ध गवाहों और फोरेंसिक सामग्री में हत्या या यौन हमले के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। यही वजह है कि CBI जांच में अब मौत की परिस्थितियों, पोस्टमॉर्टम, फोरेंसिक सामग्री, डिजिटल साक्ष्यों और पहले की पुलिस जांच के सभी पहलुओं की दोबारा पड़ताल महत्वपूर्ण होगी।

पोस्टमॉर्टम और जांच को लेकर भी उठे थे सवाल

हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान दिशा की मौत से जुड़ी मेडिकल और जांच सामग्री को लेकर भी सवाल उठे थे। अदालत ने उपलब्ध तस्वीरों और दस्तावेजों पर सवाल किए थे और यह पूछा था कि इतनी ऊंचाई से गिरने के मामले में चोटों से जुड़ी जानकारी और जांच रिकॉर्ड में स्पष्टता क्यों नहीं है। अब CBI के सामने सबसे अहम सवाल यही होंगे कि दिशा की मौत किन परिस्थितियों में हुई, क्या इसमें किसी आपराधिक साजिश के सबूत हैं और पहले की जांच में कोई महत्वपूर्ण तथ्य छूट गया था या नहीं। फिलहाल CBI की जांच शुरुआती चरण में है। किसी भी व्यक्ति की भूमिका या अपराध में संलिप्तता का अंतिम निर्धारण जांच में सामने आने वाले सबूतों के आधार पर ही होगा।

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BRICS Summit 2026: नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद पर सख्त रुख, पहलगाम हमले की निंदा

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नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई और वैश्विक शासन में सुधार पर सहमति जताई है। नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा करते हुए आतंकियों की फंडिंग रोकने, सुरक्षित ठिकाने खत्म करने और आतंकियों तथा उनके समर्थकों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया है। यह सहमति ऐसे समय बनी है, जब BRICS के भीतर पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद थे। ईरान और UAE अलग-अलग पक्षों में हैं, इसके बावजूद भारत की कोशिशों से संयुक्त घोषणा पर सहमति बनी।

पहलगाम हमले की निंदा, आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस

BRICS घोषणा में 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी, की कड़ी निंदा की गई है। आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोड़ने का विरोध किया गया है। घोषणा में आतंकवाद, उसकी फंडिंग, सीमा पार आवाजाही और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के तहत Comprehensive Convention on International Terrorism को जल्द अंतिम रूप देने की मांग भी दोहराई गई है।

आतंकियों को पनाह और फंडिंग देने वालों पर कार्रवाई

BRICS देशों ने आतंकवाद से जुड़े पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की जरूरत बताई है। इसमें आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकना, सुरक्षित ठिकाने खत्म करना और आतंकी संगठनों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई शामिल है। घोषणा में आतंकवाद से निपटने के लिए BRICS Counter-Terrorism Working Group और संबंधित तंत्र के जरिए सहयोग मजबूत करने की बात भी कही गई है।

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एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों पर भी चिंता

नई दिल्ली घोषणा में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं को लेकर भी चिंता जताई गई। BRICS देशों ने नियम आधारित और निष्पक्ष वैश्विक व्यापार व्यवस्था की जरूरत बताई तथा व्यापारिक कदमों को WTO के नियमों के अनुरूप रखने पर जोर दिया।

PM मोदी का संदेश- अगले 20 साल का एजेंडा तैयार करें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS के 20 साल पूरे होने के मौके पर समूह के लिए अगले दो दशकों का महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि BRICS को अपने फैसलों को जमीन पर उतारने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। मोदी ने AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नियम बनाने की प्रक्रिया में ग्लोबल साउथ की बराबर भागीदारी की जरूरत बताई।

युवाओं और नाविकों के लिए भी पहल का प्रस्ताव

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प्रधानमंत्री ने युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय बातचीत तथा कानून से जुड़े विषयों की ट्रेनिंग देने का सुझाव दिया। उन्होंने समुद्र में संकट में फंसे नाविकों के लिए देशों के बीच एक इमरजेंसी नेटवर्क बनाने की बात भी रखी, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें चिकित्सा सहायता, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकासी उपलब्ध कराई जा सके। BRICS मंच पर भारत ने समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा को भी प्रमुखता दी है।

मोदी बोले- भविष्य साझा है तो फैसला भी सबका होना चाहिए

प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया का भविष्य अगर साझा है तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए। भारत BRICS में वैश्विक संस्थाओं में सुधार, विकासशील देशों की अधिक भागीदारी और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने की वकालत कर रहा है। BRICS की 2026 अध्यक्षता के लिए भारत ने “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” थीम रखी है।

7 साल बाद भारत आए शी जिनपिंग

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। उनका यह 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पहला भारत दौरा है। इससे पहले उनकी भारत यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी। हालांकि मोदी और जिनपिंग 2025 में चीन के तियानजिन में मिल चुके हैं।

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BRICS के दौरान मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक तय है। बातचीत में LAC, सीमा विवाद, व्यापार घाटा, बाजार पहुंच और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे उठने की संभावना है। चीन ने बैठक से पहले कहा है कि वह भारत के साथ मतभेदों को उचित तरीके से संभालने, संवाद बढ़ाने और सहयोग मजबूत करने के लिए तैयार है।

BRICS में भारत की कूटनीतिक परीक्षा

नई दिल्ली में हो रहा यह सम्मेलन ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब BRICS में 11 सदस्य देश हैं और समूह के भीतर पश्चिम एशिया के युद्ध, व्यापार प्रतिबंधों और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर अलग-अलग राय है। इसके बावजूद भारत संयुक्त घोषणा पर सहमति बनाने में सफल रहा। Reuters के मुताबिक, घोषणा पर सहमति बनना BRICS के भीतर मतभेदों के बावजूद एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।

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MBBS की 13,186 सीटें बढ़ीं, देश में अब 1.40 लाख से ज्यादा सीटें; कर्नाटक में सबसे ज्यादा 1,650 का इजाफा, MP को 520 और CG को 645 नई सीटें

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नई दिल्ली: मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया के बीच राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने 2026-27 के लिए संशोधित MBBS सीट मैट्रिक्स जारी कर दी है। नई मैट्रिक्स में देशभर में 13,186 MBBS सीटें बढ़ाई गई हैं। इसके साथ ही, इंस्टीट्यूट्स ऑफ नेशनल इंपोर्टेंस (INI) जैसे AIIMS और JIPMER की सीटों को छोड़कर कुल MBBS सीटों की संख्या बढ़कर 1,40,214 हो गई है।

NMC के आंकड़ों के मुताबिक पहले 1,27,028 सीटें रिन्यू हुई थीं। अब नई स्वीकृत सीटों को जोड़ने के बाद कुल संख्या 1,40,214 हो गई है। देश में MBBS मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी 836 पहुंच गई है।

सरकारी कॉलेजों में 2,786 और निजी में 10,400 सीटें बढ़ीं

संशोधित सीट मैट्रिक्स के मुताबिक सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 61,185 सीटें रिन्यू हुई थीं और इनमें 2,786 सीटों की बढ़ोतरी हुई। इससे सरकारी कॉलेजों की कुल क्षमता 63,971 सीटें हो गई। वहीं निजी मेडिकल कॉलेजों में 65,843 सीटें रिन्यू हुई थीं। इनमें 10,400 नई सीटें जुड़ने के बाद निजी कॉलेजों की कुल क्षमता 76,243 सीटें हो गई है। इस तरह कुल 13,186 अतिरिक्त सीटों में सबसे बड़ा हिस्सा निजी मेडिकल कॉलेजों का है।

कर्नाटक में सबसे ज्यादा 1,650 सीटों का इजाफा

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राज्यों में MBBS सीटों की सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कर्नाटक में हुई है। यहां 1,650 सीटें बढ़ाई गई हैं। राज्य में अब कुल 15,745 MBBS सीटें हैं। इसके बाद तमिलनाडु, बिहार और उत्तर प्रदेश का नंबर है।

राज्यबढ़ी MBBS    सीटेंकुल सीटें
कर्नाटक1,65015,745
तमिलनाडु1,25014,299
बिहार1,2404,660
उत्तर प्रदेश1,20014,400
राजस्थान1,1008,280
तेलंगाना1,01010,450
पश्चिम बंगाल9757,350
छत्तीसगढ़6453,025
महाराष्ट्र55013,249
आंध्र प्रदेश5257,615
झारखंड5201,650
मध्य प्रदेश5206,120
हरियाणा3503,060
केरल3005,754
गुजरात2507,800
उत्तराखंड2001,525

छत्तीसगढ़ को 645 नई सीटों का फायदा

छत्तीसगढ़ में MBBS सीटों में 645 की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ राज्य में कुल MBBS सीटों की संख्या 3,025 हो गई है। यह बढ़ोतरी राज्यों में आठवीं सबसे बड़ी है। मध्य प्रदेश में भी 520 सीटें बढ़ी हैं और अब वहां कुल 6,120 MBBS सीटें हैं।

27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में बढ़ीं सीटें

NMC की संशोधित मैट्रिक्स में 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से 27 में MBBS सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। सात राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में इस बार कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। इनमें अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली, दिल्ली, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड शामिल हैं।

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काउंसलिंग में स्वीकृत सीटों से ज्यादा दाखिला नहीं

NMC ने काउंसलिंग समितियों को निर्देश दिया है कि दाखिले के लिए केवल संशोधित और स्वीकृत सीट मैट्रिक्स का ही इस्तेमाल किया जाए। यदि किसी सीट या कॉलेज के आंकड़े में कोई विसंगति मिलती है तो उसे Medical Assessment and Rating Board (MARB) के पास स्पष्टीकरण के लिए भेजा जाएगा। NMC ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत क्षमता से अधिक सीटों पर दाखिला नहीं दिया जा सकता।

NEET UG 2026 के छात्रों को बढ़े विकल्प

सीटों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब NEET UG 2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया जारी है। 13,186 अतिरिक्त सीटों के जुड़ने से MBBS में प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सीटों का दायरा बढ़ गया है। हालांकि, किस छात्र को कौन-सी सीट मिलेगी, यह संबंधित काउंसलिंग प्रक्रिया और उम्मीदवार की मेरिट पर निर्भर करेगा।

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मोदी-पुतिन की मुलाकात आज: Su-57 की बिक्री और भारत में प्रोडक्शन पर होगी बात; S-400, ब्रह्मोस-NG और न्यूक्लियर पावर भी एजेंडे में

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नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी। दोनों नेताओं की बातचीत में रक्षा सहयोग सबसे अहम मुद्दों में से एक रहने की संभावना है। खास तौर पर रूस के Su-57 स्टील्थ फाइटर की भारत को बिक्री और इसके लिए तकनीक हस्तांतरण पर चर्चा हो सकती है।

क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव पहले ही कह चुके हैं कि भारत को Su-57 बेचने का मुद्दा बैठक के एजेंडे में है। भारत की ओर से विमान के स्थानीय उत्पादन के लिए तकनीक ट्रांसफर की इच्छा भी जताई गई है और इस पर अतिरिक्त बातचीत चल रही है। यानी फिलहाल अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।

रात में दिल्ली पहुंचे पुतिन

पुतिन भारत पहुंचने के बाद सीधे अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत आगे बढ़े। दिल्ली में उनके लिए बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा में उनकी अपनी सुरक्षा टीम के साथ भारतीय एजेंसियां भी तैनात हैं।BRICS सम्मेलन के लिए दिल्ली में हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। पुतिन और अन्य राष्ट्राध्यक्षों के होटल, यात्रा मार्ग और कार्यक्रम स्थलों को अलग-अलग सुरक्षा घेरे में रखा गया है।

‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ और बख्तरबंद कार भी साथ

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पुतिन की यात्रा के साथ रूस की सुरक्षा व्यवस्था भी भारत पहुंची है। उनकी सुरक्षा व्यवस्था में Aurus Senat बख्तरबंद लिमोजिन और अत्याधुनिक संचार सुविधाओं से लैस ‘Flying Kremlin’ के नाम से चर्चित विशेष विमान शामिल हैं।रूसी राष्ट्रपति की टीम अपने साथ निजी शेफ और भोजन की जांच के लिए पोर्टेबल टेस्टिंग लैब भी रखती है। रिपोर्टों के मुताबिक रूसी सुरक्षा अधिकारी होटल और यात्रा मार्गों की एडवांस जांच भी कर रहे हैं।

मोदी-पुतिन की बैठक में 5 बड़े मुद्दे

1. Su-57: खरीद से आगे भारत में उत्पादन की तैयारी

भारत रूस से पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने में रुचि दिखा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा इसका भारत में उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण है। रूस ने भारत को विमान की बिक्री के साथ स्थानीय उत्पादन में सहयोग की पेशकश की है। अगर बातचीत आगे बढ़ती है तो यह भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।

2. S-400 की अंतिम खेप और रखरखाव

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भारत और रूस के बीच S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अंतिम यूनिट की डिलीवरी भी चर्चा में रहेगी। भारत ने पांच S-400 सिस्टम के लिए करीब 5.43 अरब डॉलर का समझौता किया था। चार सिस्टम भारत को मिल चुके हैं और अंतिम यूनिट की डिलीवरी पर बातचीत चल रही है। इसके अलावा मौजूदा S-400 सिस्टम के रखरखाव और भविष्य की जरूरतों पर भी दोनों पक्ष चर्चा कर सकते हैं।

3. BrahMos-NG और Su-30MKI अपग्रेड

ब्रह्मोस मिसाइल के नए और हल्के संस्करण BrahMos-NG पर भी बातचीत हो सकती है। इसका उद्देश्य ऐसे प्लेटफॉर्म तैयार करना है जिन्हें हल्के लड़ाकू विमानों से भी इस्तेमाल किया जा सके। Su-30MKI के अपग्रेड पर भी दोनों देश सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। भारत की ‘सुपर सुखोई’ योजना में रडार, एवियोनिक्स और हथियार प्रणाली को आधुनिक बनाने पर जोर है।

4. परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर जोर

रक्षा के अलावा परमाणु ऊर्जा भी बैठक का अहम विषय हो सकती है। रूस की रोसाटॉम कंपनी कुडनकुलम परमाणु बिजली परियोजना में भारत के साथ काम कर रही है। दोनों देशों के बीच नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र, रूसी तकनीक, उपकरणों के स्थानीयकरण और संयुक्त निर्माण को लेकर पहले से सहयोग चल रहा है।

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5. रुपये-रूबल कारोबार और नए ट्रेड रूट

भारत और रूस दोनों देशों की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के विकल्पों पर भी चर्चा कर सकते हैं। इसका मकसद द्विपक्षीय व्यापार में भुगतान संबंधी अड़चनों को कम करना है। इसके साथ ही International North-South Transport Corridor (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक ईस्टर्न मैरीटाइम कॉरिडोर को आगे बढ़ाने पर भी जोर है। दोनों देश पहले ही इन परिवहन मार्गों के जरिए व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने पर सहमत हो चुके हैं।

BRICS से पहले क्यों अहम है मोदी-पुतिन की मुलाकात?

यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब भारत-रूस संबंधों में रक्षा के साथ ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। दोनों नेताओं ने अगस्त में बिश्केक में SCO बैठक के दौरान भी द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की थी और 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS सम्मेलन के लिए पुतिन के भारत दौरे की पुष्टि की थी। इसलिए शुक्रवार की बातचीत में किसी एक रक्षा सौदे से ज्यादा भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के अगले चरण पर फोकस रहने की संभावना है।

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