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पुष्कर सिंह धामी एक बार फिर संभालेंगे उत्तराखंड की कमान, मणिपुर में एन बीरेन सिंह ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ

देहरादून:(Uttarakhand New CM) उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों में प्रचंड बहुमत के साथ वापसी के बाद भी बीजेपी के लिए नया मुख्यमंत्री तय कर पाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा था। दरअसल उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे पुष्कर सिंह धामी खटीमा सीट से चुनाव हार गए थे। ऐसे में बीजेपी भारी बहुमत से जीत के बाद भी उनके नाम का ऐलान करने से पहले सारा नफा नुकसान तोल लेना चाहती थी। अब सोमवार की शाम उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। मौजूदा सीएम धामी ही दूसरी बार उत्तराखंड के सीएम बनेंगे। प्रदेश के नए मुख्यमंत्री के ऐलान से पहले सोमवार सुबह 11 बजे उत्तराखंड के सभी विधायकों ने शपथ ली।
एन बीरेन सिंह ने ली मणिपुर के सीएम पद की शपथ
मणिपुर में एन बीरेन सिंह ने लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। आज राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में एन बीरेन सिंह को राज्यपाल एल गणेशन ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री के साथ पांच मंत्रियों ने भी शपथ ली। बता दें कि मणिपुर विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की है। बीजेपी को सूबे की कुल 60 में से 32 सीटों पर जीत मिली।2017 में भी बीजेपी ने सरकार बनाई थी और एन बीरेन सिंह मुख्यमंत्री बने थे।
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Weather Update: देशभर में प्री-मानसून का असर, 9 राज्यों में बारिश, यूपी में आंधी-बारिश से 5 मौतें; मानसून छत्तीसगढ़ सीमा तक पहुंचा

Weather Update: देश के कई राज्यों में प्री-मानसून गतिविधियां तेज हो गई हैं। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश समेत 9 राज्यों में बारिश का दौर जारी है। कई जगहों पर तेज आंधी और बिजली गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। मौसम विभाग के अनुसार मानसून झारखंड और ओडिशा के कुछ हिस्सों में प्रवेश कर चुका है और फिलहाल छत्तीसगढ़ की सीमा तक पहुंच गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले तीन दिनों में मानसून मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में दस्तक दे सकता है।
यूपी में आंधी-बारिश से 5 लोगों की मौत
उत्तर प्रदेश में खराब मौसम के दौरान हुए अलग-अलग हादसों में पांच लोगों की मौत हो गई। उन्नाव और गाजीपुर में बिजली गिरने से दो लोगों की जान चली गई। वहीं कासगंज में तेज आंधी के कारण मकान की छत गिरने से पति-पत्नी और उनकी बेटी की मौत हो गई। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों की मदद के लिए राहत कार्य शुरू कर दिया है।
भोपाल समेत कई जिलों में तेज बारिश
मध्य प्रदेश में शनिवार शाम भोपाल सहित कई जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए और बिजली के तार टूटकर सड़कों पर गिर गए, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां अभी कुछ दिन और जारी रह सकती हैं।
राजस्थान में दीवार गिरने से चार लोग घायल
राजस्थान के जयपुर सहित कई जिलों में शनिवार को बारिश हुई। चूरू जिले में तेज आंधी और बारिश के दौरान एक मकान की दीवार गिर गई, जिसके मलबे में एक ही परिवार के चार सदस्य दब गए। ग्रामीणों ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर सभी को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।
केरल से 9 दिन में 19 राज्यों तक पहुंचा मानसून
दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 4 जून को केरल में दस्तक दी थी। इसके बाद मात्र नौ दिनों में यह देश के 19 राज्यों तक पहुंच चुका है। अब इसका अगला पड़ाव मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य हिस्से माने जा रहे हैं।
8 राज्यों में अब भी गर्मी का असर
बारिश के बावजूद देश के कई हिस्सों में गर्मी का असर बना हुआ है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया।
सबसे अधिक तापमान महाराष्ट्र के यवतमाल में 42.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में 42 डिग्री, गुजरात के भावनगर में 41.9 डिग्री और राजस्थान के जैसलमेर में 40.8 डिग्री तापमान दर्ज किया गया।
मध्य महाराष्ट्र, विदर्भ और मराठवाड़ा के 26 जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश और कोंकण-गोवा में उमस भरा मौसम बना रह सकता है।
19 जून तक इन राज्यों में बारिश की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के प्रभाव से 19 जून तक उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में बारिश जारी रह सकती है।
- जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड में 14 से 19 जून तक बारिश के आसार।
- हिमाचल प्रदेश में 14 से 19 जून के बीच बारिश की संभावना।
- हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 जून तक रुक-रुककर बारिश।
- पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 और 19 जून को बारिश की संभावना।
- पश्चिमी राजस्थान में 14 से 17 जून और 19 जून को बारिश के आसार।
- हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में तेज हवाएं चल सकती हैं।
- हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आंधी और बिजली गिरने की आशंका बनी हुई है।
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Assam Plane Crash: वायुसेना का AN-32 विमान क्रैश, पायलट समेत 5 जवानों की मौत, को-पायलट घायल

Assam Plane Crash: असम के जोरहाट स्थित रौरिया इंडियन एयरबेस पर शनिवार सुबह भारतीय वायुसेना का AN-32 मालवाहक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में पायलट सहित पांच वायुसेना कर्मियों की मौत हो गई, जबकि एक को-पायलट घायल हो गया। दुर्घटना उस समय हुई, जब विमान एयरबेस पर लैंडिंग की प्रक्रिया में था। हादसे के बाद विमान में भीषण आग लग गई और वह दो हिस्सों में टूट गया। दुर्घटना की सूचना मिलते ही बचाव और राहत दल मौके पर पहुंच गए।
इन जवानों की हुई मौत
हादसे में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम की मौत हो गई। खेमाराम कुमावत राजस्थान के रहने वाले थे, जबकि दानिश आलम बिहार से थे। घायल को-पायलट का इलाज जारी है।
रूटीन उड़ान पर था विमान
भारतीय वायुसेना के अनुसार AN-32 विमान नियमित उड़ान पर था। दुर्घटना के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। वायुसेना ने लोगों से अपील की है कि शुरुआती जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी तरह की अटकलें न लगाई जाएं।वायुसेना ने हादसे की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश जारी कर दिए हैं। जांच के बाद ही दुर्घटना की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।
दुर्गम इलाकों में संचालन के लिए जाना जाता है AN-32
भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में करीब 100 AN-32 परिवहन विमान सक्रिय सेवा में हैं। शुरुआती दौर में वायुसेना ने सोवियत मूल के 125 AN-32 विमान खरीदे थे। AN-32 ने वर्ष 1980 से भारतीय वायुसेना की मीडियम-लिफ्ट ट्रांसपोर्ट क्षमता की रीढ़ के रूप में काम किया है। यह विमान गर्म मौसम और हिमालय जैसे ऊंचे एवं दुर्गम क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक संचालन करने की क्षमता रखता है। इसी कारण इसे वायुसेना के सबसे भरोसेमंद परिवहन विमानों में गिना जाता है।
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DRDO BMD System Test: भारत अब ICBM जैसी मिसाइलों को भी रोक सकेगा, लगातार 3 फ्लाइट टेस्ट सफल

DRDO BMD System Test: भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का सफल प्रदर्शन किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 10 और 11 जून को लगातार तीन फ्लाइट टेस्ट किए, जिनमें लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी के खतरों को रोकने की क्षमता का प्रदर्शन किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 13 जून को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर परीक्षण से जुड़ी तस्वीरें साझा करते हुए इस उपलब्धि की जानकारी दी।
अब ICBM जैसे खतरों का भी मुकाबला कर सकेगा भारत
DRDO के इस स्वदेशी मल्टी-लेयर्ड BMD सिस्टम की खासियत यह है कि यह दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइल को उसके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही हवा में नष्ट कर सकता है। परीक्षणों में इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल श्रेणी तक के खतरों को ट्रैक करने और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता प्रदर्शित की गई। इसके साथ ही नेवल एंटी-शिप मिसाइल (मीडियम रेंज) का भी सफल परीक्षण किया गया, जिसे भारत की समुद्री रक्षा और स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विशेष देशों की सूची में शामिल हुआ भारत
इस सफलता के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास ऑपरेशनल स्तर की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता मौजूद है। इससे पहले अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन के पास ही ऐसी उन्नत तकनीक उपलब्ध थी।
क्या होती है ICBM?
इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) अत्यधिक लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल होती है। इसकी रेंज आमतौर पर 5,500 किलोमीटर से अधिक होती है और यह एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक हमला करने में सक्षम होती है। यह मिसाइल पहले अंतरिक्ष की ओर जाती है और फिर अत्यधिक गति से पृथ्वी की ओर लौटकर लक्ष्य को निशाना बनाती है। अधिकांश ICBM परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम होती हैं, इसलिए इन्हें दुनिया के सबसे शक्तिशाली रणनीतिक हथियारों में गिना जाता है।
कैसे काम करता है मल्टी-लेयर्ड BMD सिस्टम
मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम कई सुरक्षा परतों में काम करता है। सबसे पहले रडार दुश्मन की मिसाइल का पता लगाते हैं। इसके बाद कमांड सेंटर खतरे का विश्लेषण करता है और इंटरसेप्टर मिसाइल लॉन्च की जाती है। यह इंटरसेप्टर मिसाइल हवा में ही दुश्मन की मिसाइल को नष्ट कर देती है। यदि पहली इंटरसेप्टर मिसाइल लक्ष्य को नष्ट करने में असफल रहती है, तो दूसरी सुरक्षा परत सक्रिय हो जाती है। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।
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TMC Crisis: 4 दिन में तीसरे राज्यसभा सांसद का इस्तीफा, प्रकाश चिक बड़ाईक ने भी छोड़ी पार्टी

New Delhi: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) में टूट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा, जब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपनी सदस्यता और पार्टी से इस्तीफा दे दिया। पिछले चार दिनों में टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं। इससे पहले 10 जून को सुष्मिता देव ने इस्तीफा दिया था, जबकि 8 जून को सुखेंदु शेखर रे ने राज्यसभा सदस्यता और पार्टी दोनों छोड़ दी थी।
प्रकाश चिक बड़ाईक ने अपना इस्तीफा राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को सौंपा। इस्तीफे के बाद उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में जनता का जनादेश भाजपा के पक्ष में था और ऐसे में उनके लिए पद पर बने रहना उचित नहीं था।
‘मैं अभी बूढ़ा नहीं हुआ, आगे समय बताएगा’
मीडिया से बातचीत में प्रकाश चिक बड़ाईक ने कहा कि उनके चुनाव क्षेत्र समेत उत्तर बंगाल में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। उन्होंने कहा कि जनता के फैसले का सम्मान करते हुए उन्होंने अपने पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा देने का निर्णय लिया है। उन्होंने अपने भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं को लेकर संकेत देते हुए कहा, “मैं अभी बूढ़ा नहीं हुआ हूं। आगे क्या करूंगा, यह समय के साथ सामने आएगा।”
राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चा
टीएमसी में जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच 10 जून को ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने दिल्ली में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इससे एक दिन पहले ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी से भेंट की थी। इन मुलाकातों के बाद पार्टी के भीतर चल रही उथल-पुथल को लेकर राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
20 लोकसभा सांसदों ने एनडीए को समर्थन दिया
8 जून को टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसदों ने एनडीए सरकार को समर्थन देने का फैसला किया था। सांसद और टीएमसी की पूर्व नेता काकोली घोष दस्तीदार ने बताया था कि सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजा गया है। इसमें अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में बैठने की व्यवस्था की मांग भी की गई है।
58 विधायक भी बना चुके हैं अलग गुट
टीएमसी में बगावत की शुरुआत 3 जून को सामने आई थी, जब 58 विधायकों ने पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुना। बागी विधायकों ने विधानसभा स्पीकर को समर्थन पत्र सौंपकर ऋतब्रत को नेता विपक्ष घोषित करने की मांग की थी, जिसे मंजूरी मिल गई।
ममता के पास बचे सिर्फ 22 विधायक और 27 सांसद
राजनीतिक संकट के बीच टीएमसी की संख्या बल में बड़ी गिरावट आई है। पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 अलग हो चुके हैं, जबकि राज्यसभा के 13 सांसदों में से 3 इस्तीफा दे चुके हैं। विधानसभा में भी पार्टी को झटका लगा है। 80 विधायकों में से 58 विधायक अलग गुट बना चुके हैं। ऐसे में अब ममता बनर्जी के पास केवल 22 विधायक और संसद के दोनों सदनों को मिलाकर 27 सांसद ही बचे हैं।
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मोदी ने बनाया नया रिकॉर्ड: देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बने, नेहरू को पीछे छोड़ा

Narendra Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 जून को देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहने का नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के 4399 दिन पूरे हो गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के 4398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद वे 2019 और 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। यह उनका लगातार तीसरा कार्यकाल है। इस उपलब्धि के अवसर पर मंगलवार दोपहर केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में खड़े होकर तालियां बजाईं। बैठक में उनकी उपलब्धि को लेकर एक विशेष प्रस्ताव भी पारित किया गया।
प्रधानमंत्री के रिकॉर्ड पर देशभर में भाजपा और एनडीए कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। कई स्थानों पर नेताओं, सांसदों और कार्यकर्ताओं ने मंदिरों में पूजा-अर्चना की तथा हवन-पूजन कर खुशी जताई। हालांकि, कांग्रेस ने इस रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने इसे स्वयं घोषित और संदिग्ध तरीके से गढ़ी गई उपलब्धि बताया। पार्टी का कहना है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हुई हैं और लोकतंत्र पर खतरा बढ़ा है।
कैसे नरेंद्र मोदी बने सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री
देश की आजादी के बाद 15 अगस्त 1947 को जवाहरलाल नेहरू प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए थे। नियुक्त प्रधानमंत्री के रूप में वे 15 अगस्त 1947 से 13 मई 1952 तक कुल 1732 दिन इस पद पर रहे। इसके बाद 1952 में देश का पहला आम चुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस को बहुमत मिला।
संसदीय दल ने नेहरू को अपना नेता चुना और वे 13 मई 1952 से 27 मई 1964 तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री रहे। निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में उनका कार्यकाल 4398 दिनों का रहा। अब नरेंद्र मोदी ने 4399 दिन पूरे कर यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है और वे देश के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री बन गए हैं।
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