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Amritsar: बड़ी आतंकी साजिश नाकाम, पुलिस को मिला 690 ग्राम IED, पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की थी तैयारी

अमृतसर: पंजाब पुलिस की अमृतसर पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस के दौरान बड़ी आतंकी साजिश को नाकाम करने का दावा किया गया है। अमृतसर देहात पुलिस ने 690 ग्राम IED बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक, इसका इस्तेमाल विभिन्न पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए किया जाना था।
बरामद IED काले रंग के मोम से लिपटे एक संदिग्ध पैकेट में मिला। इसके साथ इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर, बैटरी, टाइमर और लोहे का बॉक्स भी बरामद किया गया। सूचना के बाद बम डिस्पोजल स्क्वायड को मौके पर बुलाया गया और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत विस्फोटक को निष्क्रिय कर दिया गया।
नाइट पेट्रोलिंग के दौरान मिली सूचना
अमृतसर देहाती के SSP कंवलप्रीत सिंह चहल के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस को देखते हुए जिले में पहले से नाकाबंदी और चेकिंग बढ़ाई गई थी। सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा पर भी विशेष नजर रखी जा रही थी।
शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि के दौरान ASI कुलबीर सिंह गग्गोमहन इलाके में नाइट पेट्रोलिंग कर रहे थे। इसी दौरान टीम को इलाके में एक संदिग्ध वस्तु पड़े होने की सूचना मिली।
पुलिस टीम मौके पर पहुंची तो वहां काले रंग के मोम से लिपटा पैकेट मिला। जांच करने पर उसके अंदर IED होने का पता चला। पैकेट के साथ इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर, बैटरी, टाइमर और अन्य सामान भी बरामद हुआ।
DGP बोले- राष्ट्रविरोधी तत्वों की साजिश नाकाम
पंजाब के DGP गौरव यादव ने कहा कि अमृतसर ग्रामीण पुलिस की सतर्कता से राष्ट्रविरोधी तत्वों की साजिश को नाकाम किया गया और संभावित खतरे को टाल दिया गया। उन्होंने बताया कि मामले की जांच जारी है। IED रखने और साजिश रचने वाले लोगों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
बम डिस्पोजल स्क्वायड ने किया निष्क्रिय
IED मिलने की सूचना पर बम डिस्पोजल स्क्वायड को बुलाया गया। टीम ने निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत विस्फोटक को मौके पर ही निष्क्रिय कर दिया। अन्य बरामद सामान को पुलिस ने जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है।
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80th Independence Day: PM मोदी का लाल किले से संदेश: हथियारबंद नक्सल गए, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ अभी सक्रिय; 1 करोड़ युवाओं को AI ट्रेनिंग का ऐलान

नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। करीब 76 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद, युवाओं, AI, महिला आरक्षण, आत्मनिर्भर भारत और वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य पर बात की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश ने नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया था और आज कई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है। हालांकि उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि हथियारबंद नक्सल भले चले गए हों, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ अभी भी सक्रिय हैं और युवाओं व समाज को भटकाने के अवसर तलाश रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को पहचानने और समाज से अलग-थलग करने की जरूरत है, ताकि युवा पीढ़ी को विकसित भारत के निर्माण से जोड़ा जा सके।
युवाओं के लिए बड़ी घोषणा: 1 करोड़ को AI Skills Training
प्रधानमंत्री ने युवाओं के लिए बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अगले एक वर्ष में 1 करोड़ युवाओं को Artificial Intelligence यानी AI से जुड़ी स्किल्स की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके साथ ही गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं के लिए विभिन्न परीक्षाओं की फ्री ऑनलाइन कोचिंग की व्यवस्था शुरू करने की भी बात कही गई।
महिला आरक्षण लागू करने की अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33% प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण को लागू करने में सहयोग करने की अपील की।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य तय कर लिया है और अब उसे हासिल करना है। इसके लिए देश को अपनी कार्यशैली और सोच में बदलाव लाना होगा। उन्होंने कहा कि जो काम पिछले 5 से 7 दशकों में नहीं हो पाए, उन्हें आने वाले 5 से 7 वर्षों में पूरा करने की दिशा में तेजी से काम करना होगा।
आत्मनिर्भर भारत पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अपनी क्षमताओं को मजबूत करना होगा और दूसरे देशों पर निर्भरता कम करनी होगी। दुनिया में चीजें सस्ती या आसानी से उपलब्ध हो सकती हैं, लेकिन केवल आयात पर निर्भर रहने से देश की अपनी क्षमता विकसित नहीं होती। उन्होंने कहा कि देश के हितों की सुरक्षा के लिए आत्मनिर्भर भारत का संकल्प जरूरी है।
पहली बार लाल किले पर गूंजा वंदे मातरम्
स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम् का गायन हुआ। इसके बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया, राष्ट्रगान हुआ और 21 तोपों की सलामी दी गई।
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Independence Day 2026: 78 वीरता पुरस्कारों का ऐलान, 9 कीर्ति चक्र, 19 शौर्य चक्र, 13 पुरस्कार मरणोपरांत

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के जवानों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी है। इन पुरस्कारों में 13 मरणोपरांत सम्मान भी शामिल हैं। पुरस्कारों में एक खास नाम राजपूताना राइफल्स के मेजर आदित्य प्रताप सिंह का है। उन्हें शौर्य चक्र में ‘बार’ दिया जा रहा है। मेजर आदित्य प्रताप सिंह फिलहाल 44 असम राइफल्स में तैनात हैं और उनके नाम के साथ सेना मेडल भी दर्ज है।
इससे पहले जून 2026 में भारत-म्यांमार सीमा पर उग्रवादियों के खिलाफ चलाए गए एक अभियान में अदम्य साहस दिखाने के लिए उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया जा चुका है। अब दोबारा असाधारण वीरता के लिए उन्हें उसी सम्मान में ‘बार’ प्रदान किया जा रहा है।
वहीं, इन सम्मानों में आर्मी डॉग टायसन का नाम भी शामिल है। टायसन को ऑपरेशन रक्षक के तहत मेंशन इन डिस्पैचेस में शामिल किया गया है।
वीरता पुरस्कारों की सूची
- 9 कीर्ति चक्र, इनमें 7 मरणोपरांत
- 1 शौर्य चक्र के लिए बार
- 19 शौर्य चक्र, इनमें 1 मरणोपरांत
- 36 सेना मेडल (वीरता), इनमें 5 मरणोपरांत और 5 बार
- 3 नौसेना मेडल (वीरता)
- 5 वायु सेना मेडल (वीरता)
9 जवानों को कीर्ति चक्र, 7 को मरणोपरांत सम्मान
वीरता पुरस्कारों की सूची में 9 कीर्ति चक्र शामिल हैं, जिनमें से 7 मरणोपरांत दिए जा रहे हैं।
- लेफ्टिनेंट कर्नल मनियो फ्रांसिस
- मेजर जितेंद्र राठी
- हवलदार गजेंद्र सिंह (मरणोपरांत)
- हेड कांस्टेबल जगबीर सिंह (मरणोपरांत)
- SG कांस्टेबल जसवंत सिंह (मरणोपरांत)
- SG कांस्टेबल बलविंदर सिंह (मरणोपरांत)
- SG कांस्टेबल तारिक हुसैन (मरणोपरांत)
- SG कांस्टेबल बशीर अहमद (मरणोपरांत)
- इंस्पेक्टर STF सुनील कुमार (मरणोपरांत)
गैलेंट्री अवॉर्ड्स में ‘बार’ का क्या मतलब है?
गैलेंट्री अवॉर्ड्स में ‘बार’ का मतलब है कि किसी व्यक्ति को वही वीरता पुरस्कार दूसरी बार दिया जा रहा है। मान लीजिए किसी सैन्य अधिकारी को पहले शौर्य चक्र मिल चुका है। इसके बाद वह फिर ऐसा असाधारण साहस दिखाता है, जिसके लिए वह दोबारा शौर्य चक्र का पात्र बनता है। ऐसी स्थिति में उसे नया अलग पदक देने के बजाय उसके मूल पदक के साथ एक ‘बार’ जोड़कर दूसरी बार सम्मानित किया जाता है।
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Census 2027: जनगणना में पहली बार सभी जातियों की होगी गिनती, 40 सवालों की लिस्ट जारी

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 के लिए 40 सवालों की सूची जारी कर दी है। इस जनगणना में लोगों से SC, ST के साथ अन्य जातियों की जानकारी भी पूछी जाएगी। आजादी के बाद यह पहली बार होगा, जब जनगणना के दौरान सभी समुदायों की जाति से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे पहले वर्ष 2011 की जनगणना में 29 सवाल शामिल थे और जाति से संबंधित जानकारी में केवल SC और ST का विकल्प था। जनगणना-2027 के नए फॉर्म में जाति से जुड़ा सवाल नंबर 10 पर रखा गया है।
नई जनगणना में लोगों से केवल परिवार और शिक्षा की जानकारी ही नहीं, बल्कि मोबाइल नंबर, बैंक अकाउंट, आधार, वोटर ID, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और कोविड वैक्सीन से संबंधित जानकारी भी ली जाएगी।
40 सवालों को 5 हिस्सों में बांटा गया
1. पहचान और परिवार: 12 सवाल
जनगणना में व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि, उम्र और वैवाहिक स्थिति पूछी जाएगी। इसके अलावा शादी के समय उम्र, पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता, धर्म, SC/ST/जाति, माता-पिता की जानकारी भी दर्ज की जाएगी।
2. शिक्षा और भाषा: 5 सवाल
इस सेक्शन में व्यक्ति की-
- दिव्यांगता
- मातृभाषा और अन्य भाषाएं
- साक्षरता
- डिजिटल साक्षरता
- शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई की स्थिति
- उच्चतम शैक्षणिक योग्यता और विषय
से संबंधित जानकारी ली जाएगी।
3. रोजगार और काम: 8 सवाल
व्यक्ति ने पिछले एक साल में काम किया या नहीं, इसकी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके साथ-
- आर्थिक गतिविधि
- व्यवसाय
- काम का क्षेत्र
- कामगार की श्रेणी
- गैर-आर्थिक गतिविधियां
- काम की तलाश
- काम के लिए उपलब्धता
- कार्यस्थल तक आने-जाने
से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे।
4. जन्म और माइग्रेशन: 8 सवाल
इसमें व्यक्ति के जन्मस्थान, पिछले निवास स्थान और माइग्रेशन से जुड़ी जानकारी ली जाएगी।
सवालों में शामिल होंगे-
- जन्म स्थान
- पिछला निवास स्थान
- माइग्रेशन का कारण
- वहां रहने की अवधि
- स्थायी निवास का पता
महिलाओं से उनके जीवित बच्चों, अब तक जन्मे बच्चों और पिछले एक साल में जन्मे बच्चों की संख्या भी पूछी जाएगी।
5. बैंक अकाउंट से आधार तक: 7 सवाल
जनगणना-2027 में दस्तावेजों और सुविधाओं से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी।
लोगों से पूछा जाएगा-
- कोविड-19 वैक्सीन कहां लगवाई?
- कुल कितने बैंक अकाउंट हैं?
- मोबाइल नंबर क्या है?
- आधार उपलब्ध है या नहीं?
- वोटर ID है या नहीं?
- पासपोर्ट उपलब्ध है या नहीं?
- ड्राइविंग लाइसेंस है या नहीं?
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Independence Day 2026: 1,057 पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मियों को सम्मान, 301 को वीरता पदक

नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर पुलिस, फायर सर्विस, होम गार्ड एवं सिविल डिफेंस और सुधार सेवाओं के कुल 1,057 कर्मियों को वीरता और सेवा पदकों से सम्मानित किया गया है। सम्मान पाने वालों में 301 वीरता पदक, 92 विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक और 664 सराहनीय सेवा पदक शामिल हैं। वीरता पदक पाने वाले कर्मियों में सबसे बड़ी संख्या वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सुरक्षाकर्मियों की रही।
301 कर्मियों को मिला वीरता पदक
गृह मंत्रालय के अनुसार, कुल 301 वीरता पदकों में से 197 कर्मियों को वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में साहसिक कार्रवाई के लिए सम्मानित किया गया है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के 51, पूर्वोत्तर क्षेत्र के 12, देश के अन्य हिस्सों के 41 कर्मियों को वीरता पदक प्रदान किए गए हैं। वीरता पदक पाने वाले 301 कर्मियों में 272 पुलिस कर्मी और 29 फायर सर्विस कर्मी शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, यह पदक जीवन और संपत्ति की रक्षा करने, अपराध रोकने या अपराधियों को पकड़ने के दौरान दिखाई गई असाधारण बहादुरी के लिए दिया जाता है। सम्मान के लिए संबंधित अधिकारी द्वारा अपने कर्तव्यों के दौरान उठाए गए जोखिम का भी आकलन किया जाता है।
92 कर्मियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक
केंद्र सरकार ने 92 कर्मियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पदक देने की घोषणा की है। इनमें 83 पुलिस सेवा कर्मी, 4 अग्निशमन सेवा कर्मी, 3 सिविल डिफेंस एवं होम गार्ड कर्मी, 2 सुधारात्मक सेवा कर्मी शामिल हैं। यह सम्मान लंबे समय तक उत्कृष्ट और विशिष्ट सेवा रिकॉर्ड रखने वाले कर्मियों को प्रदान किया जाता है।
664 कर्मियों को सराहनीय सेवा पदक
सरकार ने 664 कर्मियों को सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया है। इनमें 606 पुलिस कर्मी, 28 अग्निशमन सेवा कर्मी, 18 सिविल डिफेंस एवं होम गार्ड कर्मी, 12 सुधारात्मक सेवा कर्मी शामिल हैं।
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Parliament: मानसून सत्र समाप्त, लोकसभा में 12 विधेयक पारित, सिर्फ एक पर हुई पूरी चर्चा

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र के दौरान लोकसभा की उत्पादकता सिर्फ 19%, जबकि राज्यसभा की 39% रही।
रिजिजू ने कहा कि विपक्षी सांसदों के हंगामे और कई बार सदन से बाहर चले जाने के कारण संसद का काफी समय बर्बाद हुआ। हालांकि, उन्होंने कहा कि एनडीए के सहयोगी दलों और कुछ विपक्षी दलों के सांसदों ने बहस और चर्चा में हिस्सा लिया।
लोकसभा में 12 बिल पास, सिर्फ एक पर हुई चर्चा
केंद्रीय मंत्री रिजिजू के मुताबिक मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में 12 विधेयक पारित किए गए, लेकिन इनमें से केवल एक विधेयक पर पूरी चर्चा हो सकी। यह लोक परीक्षा (अनुचित तरीकों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 था। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल और अन्य अनुचित तरीकों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों को और सख्त करना है।यह संशोधन मौजूदा 2024 के कानून में बदलाव से जुड़ा है। संसद ने जुलाई के आखिर में इस विधेयक को मंजूरी दी थी।
राज्यसभा में सभी विधेयकों पर हुई चर्चा
रिजिजू ने कहा कि राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के बावजूद वहां पारित किए गए सभी विधेयकों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि उच्च सदन की उत्पादकता लोकसभा की तुलना में बेहतर रही और कुल कामकाज 39% दर्ज किया गया। वहीं, लोकसभा में लगातार व्यवधान के कारण उत्पादकता 19% तक सीमित रही।
रिजिजू बोले- पहली बार विपक्ष को चर्चा से भागते देखा
किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अपने संसदीय अनुभव में उन्होंने पहली बार विपक्ष को बहस और चर्चा से बचते हुए देखा है। उन्होंने कहा कि सरकार महत्वपूर्ण मुद्दों और विधेयकों पर चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन लगातार हंगामे के कारण सदन का काफी समय बर्बाद हुआ। रिजिजू ने कहा कि सरकार इस सत्र को दो नजरियों से देखती है। विधायी कामकाज के लिहाज से 12 विधेयकों का पारित होना उपलब्धि है, लेकिन बहस और चर्चा के लिए उपलब्ध समय का अपेक्षित इस्तेमाल नहीं हो सका।


















