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Chhattisgarh: सीआरपीएफ के वाहन को नक्सलियों ने बनाया निशाना, 2 जवान शहीद

Sukma News: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों द्वारा आईईडी ब्लास्ट किया गया है। जगरगुंडा थाना क्षेत्र के अंतर्गत सिलगेर और टेकुलगुडेम के बीच नक्सलियों द्वारा लगाए गए आईईडी विस्फोट में सीआरपीएफ कोबरा 201 बटालियन के 2 जवान शहीद हो गए।नक्सलियों ने जवानों के ट्रक को निशाना बनाकर विस्फोट किया। सुकमा के एसपी किरण चव्हाण ने की घटना की पुष्टि की है। सूचना पर अतिरिक्त बल को मौके पर रवाना किया गया है। इलाके में सर्चिंग अभियान तेज कर दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक रविवार को सिलगेर व टेकुलगुडम जाने के रास्ते मे नक्सलियों द्वारा सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने की नीयत से आईईडी प्लांट किया गया था। आरओपी ड्यूटी के दौरान ट्रक और मोटर साइकिल से कैम्प टेकलगुडेम की तरफ कोबरा 201 वाहिनी की एडवांस पार्टी का मूवमेंट था। इस दौरान रविवार दोपहर तीन बजे के करीब आईईडी की चपेट से कोबरा 201 वाहिनी के ट्रक जिसमें चालक और सहचालक जवान मौके पर बलिदान हो गए। बताया गया है कि जवानों में विष्णु आर और शैलेंद्र शामिल हैं। बाकी सभी जवान सुरक्षित हैं।
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मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026: लोक कलाकारों से आवेदन आमंत्रित, सालाना ₹24 हजार तक मिलेंगे

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना-2026 के तहत आवेदन आमंत्रित किए हैं। संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय की इस योजना के जरिए चयनित लोक कलाकारों को हर साल 12 हजार से 24 हजार रुपए तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।योजना का उद्देश्य पारंपरिक लोक कलाओं का संरक्षण, कलाकारों का सम्मान और कला दलों के विकास को बढ़ावा देना है।
इन क्षेत्रों के कलाकार कर सकेंगे आवेदन
योजना के तहत लोक नृत्य, लोक संगीत, लोक नाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी गीतकार, वाद्ययंत्र वादक, शिल्प कलाकार, पारंपरिक व्यंजन (पाक कला) और छत्तीसगढ़ी सौंदर्य कला (श्रृंगार) से जुड़े कलाकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित प्रारूप में पंजीकृत डाक से भेजना होगा। आवेदन पत्र विभाग की वेबसाइट और संस्कृति एवं राजभाषा संचालनालय, नया रायपुर कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं।
31 अगस्त तक भेज सकते हैं आवेदन
योजना का लाभ लेने के लिए कलाकार का चिन्हारी पोर्टल में पंजीयन अनिवार्य होगा। सभी स्रोतों से वार्षिक आय 96 हजार रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए। आवेदन के साथ आय प्रमाण-पत्र, बैंक खाते का विवरण, IFSC कोड और पैन कार्ड की प्रति संलग्न करनी होगी। आवेदन भेजने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। प्राप्त आवेदनों का परीक्षण समिति करेगी और उसका निर्णय अंतिम होगा।
आर्थिक सहयोग के साथ मिलेगी पहचान
सरकार का कहना है कि इस योजना के माध्यम से लोक कलाकारों को आर्थिक सहायता के साथ अपनी कला को व्यापक मंच मिलेगा। साथ ही छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।
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CG Cabinet: कैबिनेट के 7 बड़े फैसले, ₹500 करोड़ के AI मिशन, BEML प्लांट और डिजिटल गवर्नेंस को मंजूरी

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के डिजिटल, औद्योगिक और आधारभूत विकास से जुड़े सात महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने 500 करोड़ रुपए के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन, BEML के हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग प्लांट, लोक निर्माण विभाग में डिजिटल प्रबंधन प्रणाली और ग्रामीण सड़क योजना में बदलाव समेत कई प्रस्तावों पर मुहर लगाई।
500 करोड़ का AI मिशन मंजूर
कैबिनेट ने पांच वर्षों के लिए छत्तीसगढ़ राज्य AI मिशन को मंजूरी दी। इस पर 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे। मिशन के तहत राज्य में 100 AI डेटा लैब, 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 300 से अधिक AI स्टार्टअप्स को सहायता दी जाएगी।इसके अलावा 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को AI का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शासन के कामकाज को आसान बनाने के लिए 50 से अधिक AI आधारित सेवाएं विकसित होंगी।
राज्य में लगेगा BEML का पहला प्लांट
कैबिनेट ने भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) को रियायती दर पर भूमि आवंटित करने की मंजूरी दी। राज्य में पहली बार हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट निर्माण संयंत्र स्थापित होगा। सरकार का दावा है कि इससे बड़े निवेश आएंगे और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे।
PWD में लागू होगी डिजिटल प्रणाली
लोक निर्माण विभाग में निर्माण कार्यों के लिए वर्क्स एंड अकाउंट मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (WAMIS) लागू किया जाएगा। इससे ई-टेंडर, बिल भुगतान, गुणवत्ता निगरानी और निर्माण कार्यों की रियल टाइम मॉनिटरिंग एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी।
ग्रामीण सड़क योजना में बड़े बदलाव
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ग्राम सड़क एवं विकास योजना के दिशा-निर्देशों में संशोधन किया है। अब ग्रामीण गलियों में सीसी सड़क और नाली निर्माण आसान होगा। सड़क निर्माण से पहले मनरेगा से मिट्टी कार्य कराने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी गई है।
ADB देगा 15 करोड़ का अनुदान
कैबिनेट ने ‘अंजोर LIGHT’ तकनीकी सहायता परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से 15 करोड़ रुपए का पूर्ण अनुदान लेने को मंजूरी दी। यह परियोजना पूरी तरह ग्रांट आधारित होगी, जिससे राज्य पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
राज्य योजनाओं के लिए नया S-SNA मॉडल
सरकार ने राज्य योजनाओं के लिए स्टेट सिंगल नोडल एजेंसी (S-SNA) मॉडल लागू करने का फैसला किया है। इससे योजनाओं की राशि एक केंद्रीकृत खाते से सीधे हितग्राहियों और वेंडरों को जारी होगी। सरकार का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और वित्तीय गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।
CSPGCL जारी करेगी 200 करोड़ के बॉन्ड
कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (CSPGCL) को 200 करोड़ रुपए तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) और बॉन्ड जारी कर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने की मंजूरी दी है। इससे बिजली क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और वित्तीय संसाधन जुटाने में मदद मिलेगी।
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Chhattisgarh: प्रदेश में 1460 गौधाम बनेंगे, निराश्रित मवेशियों के संरक्षण के लिए सरकार की बड़ी योजना

रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने निराश्रित और घुमंतू मवेशियों के संरक्षण के लिए राज्यभर में 1,460 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य तय किया है। ‘गौधाम योजना’ के तहत यह परियोजना चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य बेसहारा पशुओं को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गौ-संरक्षण को बढ़ावा देना है।
छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अनुसार, प्रत्येक विकासखंड में 10 उत्कृष्ट गौठानों का चयन कर उन्हें गौधाम के रूप में विकसित किया जाएगा। अब तक प्राप्त 408 आवेदनों में से 151 को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि 88 गौधामों का पंजीयन पूरा हो गया है।
42 गौधामों में 5 हजार से ज्यादा मवेशियों को आश्रय
वर्तमान में प्रदेश के 42 गौधाम संचालित हैं, जहां करीब 5,109 निराश्रित पशुओं की देखभाल की जा रही है। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को तेजी से बढ़ाकर सभी जिलों में व्यवस्थित गौधाम विकसित करना है।
राष्ट्रीय राजमार्गों के पास बनेंगे गौधाम
पशुधन विकास विभाग के अनुसार, पहले चरण में उन गौठानों को प्राथमिकता दी गई है जो राष्ट्रीय राजमार्गों के पास स्थित हैं और जहां आवश्यक आधारभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं।
गौधामों का संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं, पंजीकृत गौशालाओं, एनजीओ, एफपीओ और ट्रस्ट के माध्यम से किया जाएगा। हाल ही में नियमों में संशोधन कर ग्राम पंचायतों को संचालन में प्राथमिकता देने का फैसला भी लिया गया है। साथ ही शहरी गौठानों को भी योजना में शामिल किया गया है।
पारदर्शी होगी चयन प्रक्रिया
गौधाम की स्थापना के लिए जिला स्तरीय समिति और कलेक्टर की अनुशंसा के बाद पंचायत से अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया जाएगा। इसके बाद भौतिक सत्यापन और आयोग की समीक्षा के बाद अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति दी जाएगी।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा सहारा
सरकार का मानना है कि गोधन ग्रामीण संस्कृति और कृषि अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। गौधाम योजना से बेसहारा पशुओं के संरक्षण के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, जैविक खेती और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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Chhattisgarh: धमतरी में काशी जैसी गूंजेगी महानदी गंगा आरती, रुद्रेश्वर धाम के विकास पर 20 करोड़ खर्च होंगे

धमतरी: महानदी के रुद्री घाट पर सावन के पहले सोमवार से काशी की तर्ज पर भव्य महानदी गंगा आरती की शुरुआत हो गई है। 108 दीपों, शंखनाद, वैदिक मंत्रों और घंटियों की गूंज के बीच पहली बार आयोजित इस आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। अब सावन के प्रत्येक सोमवार को यह आरती नियमित रूप से आयोजित की जाएगी।
इसी के साथ प्रदेश सरकार ने धमतरी के प्राचीन रुद्रेश्वर महादेव मंदिर के कायाकल्प के लिए 20 करोड़ रुपए की विकास योजना पर काम शुरू करने का फैसला किया है। संस्कृति एवं पर्यटन विभाग इस परियोजना के तहत रुद्रेश्वर धाम को आधुनिक सुविधाओं से युक्त धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करेगा।
तीन चरणों में होगा रुद्रेश्वर धाम का विकास
मास्टर प्लान के अनुसार परियोजना तीन चरणों में पूरी की जाएगी। मंदिर की पारंपरिक स्थापत्य शैली को संरक्षित रखते हुए भव्य प्रवेश द्वार, शिखर, तोरण, दीप स्तंभ और विशाल नंदी प्रतिमा का निर्माण होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चौड़े पैदल मार्ग, विश्राम गृह, प्रसाद एवं स्मृति केंद्र, फूड कोर्ट, सुरक्षित घाट और डिजिटल सूचना प्रणाली विकसित की जाएगी। परिसर में एआई आधारित हेल्थ कियोस्क, उद्यान, सांस्कृतिक मंडप, रिवर फ्रंट कॉटेज, ओपन एयर स्टेज और भविष्य में मरीन ड्राइव की तर्ज पर तट विकसित करने की भी योजना है।
पर्यावरण संरक्षण पर भी रहेगा जोर
परियोजना में सौर ऊर्जा आधारित पार्किंग, ईवी चार्जिंग स्टेशन, वर्षा जल संचयन और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन जैसी पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाएं भी शामिल होंगी। कार्यक्रम में विधायक ओंकार साहू, महापौर जगदीश रामू रोहरा, कलेक्टर और पूर्व विधायक रंजना साहू सहित कई जनप्रतिनिधि और नागरिक मौजूद रहे। माना जा रहा है कि इस पहल से धमतरी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय व्यापार व रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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राष्ट्रपति भवन पहुंची बस्तर की जनजातीय संस्कृति: मांझी-चालकी और ‘बस्तर पंडुम’ विजेताओं ने की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात

नई दिल्ली: बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था को देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर सम्मान मिला है। नारायणपुर जिले के मांझी-चालकी और ‘बस्तर पंडुम’ प्रतियोगिता के विजेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने बस्तर की लोककला, जनजातीय परंपराओं और सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत से राष्ट्रपति को अवगत कराया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 30 जुलाई को राष्ट्रपति भवन पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल में ‘बस्तर पंडुम’ के विजेता, मांझी-चालकी प्रतिनिधि और पद्मश्री सम्मानित कलाकार शामिल थे। मुलाकात के दौरान बस्तर की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
27 जुलाई को नारायणपुर से रवाना हुआ था दल
इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत 27 जुलाई को हुई थी। नारायणपुर नगरपालिका अध्यक्ष इंद्रप्रसाद बघेल ने प्रतिनिधिमंडल को हरी झंडी दिखाकर दिल्ली के लिए रवाना किया था। इसके बाद 30 जुलाई को राष्ट्रपति भवन में बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
जनजातीय कला और स्वशासन व्यवस्था की दी जानकारी
प्रतिनिधिमंडल में ‘बस्तर पंडुम’ की जनजातीय आभूषण विधा की विजेता मुंगड़ी कोर्राम और सुदनी दुग्गा ने पारंपरिक आभूषणों और उनके सांस्कृतिक महत्व की जानकारी साझा की। वहीं एड़का परगना के मांझी राजाराम, करंगाल परगना के मांझी सुधवाराम करंगा, गोटाली परगना के मांझी मंगतू राम ध्रुव, नूरदेश परगना के मांझी गुड्डू पोटाई और करंगाल परगना के चालकी सोमारू राम ने बस्तर की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, सामाजिक संरचना और रीति-रिवाजों की जानकारी राष्ट्रपति को दी।
बस्तर की संस्कृति को मिला राष्ट्रीय मंच
इस मुलाकात को नारायणपुर और पूरे बस्तर क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे राष्ट्रीय मंचों पर जनजातीय कला, संस्कृति और लोक परंपराओं की प्रस्तुति से इनके संरक्षण और संवर्धन को नई गति मिलेगी।
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