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किम तक पहुंचना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है

सिंगापुर: उत्तर कोरिया के सुप्रीम ली़डर किम जोंग उन राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात के बाद उनकी लिमोजिन कार को देखने भी गए। अमरीकी राष्ट्रपति की कार सुरक्षा के लिहाज से दुनिया में सबसे एडवांस मानी जाती है। लेकिन सिंगापुर में लोग किम की सिक्योरिटी देखकर हैरान हैं । उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता को जिस तरह की सुरक्षा मुहैया कराई जाती है, शायद ही ऐसी सुरक्षा विश्व के किसी दूसरे नेता को दी जाती हो।
सुरक्षा के तीन घेरों में रहते हैं किम
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन को तीन श्रेणियों में सुरक्षा दी जाती है। हर घेरे को ऐसा बनाया गया है,कि किसी के लिए भी उसको तोड़ना लगभग नामुमकिन है
ऑफिस ऑफ एडजुटेंट्स
पहले घेरे की सुरक्षा जिन सुरक्षाकर्मियों के हवाले रहती है,उन्हें ‘ऑफिस ऑफ एडजुटेंट्स’ कहते हैं। ये सेना में अफसर होते हैं। किम के गाड़ी में सवार होते ही ये सुरक्षाकर्मी चारों तरफ से घेरा बनाकर एक अभेद्य सुरक्षा मुहैया कराते हैं। मेन ऑफिस ऑफ एडजुटेंट्स में करीब 200 से 300 बॉडीगार्ड्स होते हैं। इनमें से आधे बॉडीगार्ड और बाकी ड्राइवर और तकनीकी स्टाफ होते हैं।
‘गार्ड कमांड’ के हवाले है दूसरा और तीसरा घेरा
किम की सुरक्षा पंक्ति में दूसरे और तीसरे घेरे की जिम्मेदारी ‘गार्ड कमांड’ की होती है। इस घेरे में लगे सुरक्षाकर्मियों पर यह जिम्मेदारी होती है कि ये उन स्थलों की जांच करते हैं, जहां किम को जाना होता है। इसके साथ ही ये सुरक्षाकर्मी किम के लिए विशेष फोन लाइन या कम्प्यूटर का इंतजाम करते हैं। इनका चयन भी उसी तरह होता है जैसा कि ‘ऑफिस ऑफ एडजुटेंट्स’ का होता है। ये सुरक्षा गार्ड किम के खान-पान का पूरा ख्याल रखते हैं। ये गार्ड कमांड उन सभी रास्तों को आधा मील तक अपने कब्जे में रखते हैं, जहां से किम जोंग-उन गुजरते हैं।
‘बॉडीगार्ड्स’ का चयन और ट्रेनिंग
ख़ास तरह डिजाइन होती है ड्राइवर की ड्रेस
सुरक्षा के साथ-साथ किम के ड्राइवर के लिए भी खास तरह की पोशाक होती है। ड्राइवर को लेदर के दस्ताने पहनना अनिवार्य होता है, ताकि गाड़ी पर उसका नियंत्रण बना रहे। इसके साथ कार के अंदर वह सूचनाओं से अपडेट रहे, इसके लिए वह कानों में इयरपीस पहनता है। इसके जरिए वह सुरक्षा और मार्ग से अपडेट होता रहता है। उसके कपड़े पर विशेष पिन और बैज लगा होता है। वह विशेष कोड के जरिए बात करता है
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अजरबैजान के स्कूलों में हिजाब पर विवाद, छात्राओं ने किया कक्षाओं का बहिष्कार

अजरबैजान: स्कूलों के ड्रेस कोड को लेकर अजरबैजान में विवाद शुरू हो गया है। सरकार के नए नियमों के बाद हिजाब पहनकर स्कूल पहुंचीं कुछ छात्राओं और शिक्षकों को कक्षाओं में जाने से रोकने की खबरें सामने आई हैं। इसके विरोध में छात्राओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। विवाद का असर पड़ोसी देश तुर्किये तक भी पहुंच गया है।
अजरबैजान की करीब 96% आबादी मुस्लिम है। इसके बावजूद देश का संविधान उसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करता है। ऐसे में स्कूलों में धार्मिक पहनावे को लेकर नए नियमों ने धार्मिक स्वतंत्रता और समान ड्रेस कोड की बहस को तेज कर दिया है।
हिजाब का नाम लेकर रोक नहीं, ड्रेस कोड में बदलाव
सरकार का कहना है कि स्कूलों में सभी विद्यार्थियों के लिए एक जैसा ड्रेस कोड होना चाहिए। इसी उद्देश्य से यूनिफॉर्म से जुड़े नियम बदले गए हैं। नए नियमों में हिजाब का सीधे नाम लेकर प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कही गई है, लेकिन सरकार जिन कपड़ों को धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था के खिलाफ मानती है, उन पर रोक लगाई गई है।
सरकार के अनुसार, देश की संस्कृति और राष्ट्रीय परंपराओं से जुड़े कपड़े विशेष अवसरों पर पहने जा सकते हैं। इसके लिए स्कूल की संबंधित समिति से मंजूरी लेना जरूरी होगा।
कम से कम दो स्कूलों में कक्षाओं का बहिष्कार
स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, नए नियमों के विरोध में कम से कम दो स्कूलों में विद्यार्थियों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया। सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो में स्कूल में प्रवेश से रोके जाने के बाद छात्राएं अपनी शिक्षिकाओं से गले मिलती और रोती दिखाई दे रही हैं।
96% मुस्लिम आबादी, फिर भी धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था
अजरबैजान में अधिकांश आबादी मुस्लिम है। इनमें शिया मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, जबकि सुन्नी मुस्लिम भी बड़ी संख्या में रहते हैं। हालांकि, देश की संवैधानिक व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष है और नागरिकों को धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता प्राप्त है।अब विवाद इस बात पर केंद्रित है कि स्कूलों में समान ड्रेस कोड लागू करने और विद्यार्थियों की धार्मिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। सरकार समान नियमों पर जोर दे रही है, जबकि विरोध करने वालों का कहना है कि हिजाब पहनना व्यक्तिगत पसंद और धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला है।
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Saudi Arabia: रियाद एयरपोर्ट पर हमले में भारतीय समेत 13 की मौत, 309 घायल

रियाद: सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों के हमले को लेकर गंभीर दावे सामने आए हैं। उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, 10 अक्टूबर को हुए हमले में एक भारतीय समेत 13 लोगों की मौत हुई, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हुए। इसके बाद रियाद एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन रोकने की बात कही गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अगले दिन घरेलू उड़ानों के लिए इस्तेमाल होने वाले टर्मिनल-3 और टर्मिनल-4 को भी निशाना बनाया गया। इस हमले में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत होने का दावा है।
रविवार को घरेलू उड़ानों के टर्मिनल पर भी हमला
सऊदी अरब की नागरिक उड्डयन एजेंसी के मुताबिक, 11 अक्टूबर को एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 और टर्मिनल-4 पर एक और हमला हुआ। इन टर्मिनलों से घरेलू उड़ानें संचालित होती हैं। इस हमले में एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए। इससे पहले 10 अक्टूबर को हुए हमले में 12 लोगों की मौत और 309 लोगों के घायल होने की पुष्टि की गई थी। रविवार को घायल भारतीय नागरिक की मौत के बाद पहले हमले में मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई।
एयर इंडिया समेत कई एयरलाइंस ने उड़ानें रोकीं
हमलों के बाद रियाद एयरपोर्ट पर परिचालन प्रभावित हुआ। खबरों के मुताबिक, एयर इंडिया, फ्लाईदुबई, लुफ्थांसा समूह और पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस समेत कई एयरलाइंस ने सऊदी अरब के लिए उड़ानों पर रोक लगाई या उनमें बदलाव किया। यात्रियों को अपनी उड़ान की स्थिति संबंधित एयरलाइन से जांचने की सलाह दी गई है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि आम नागरिकों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाना अस्वीकार्य है। रियाद स्थित भारतीय दूतावास ने भी भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने, जरूरत पड़ने पर घर के अंदर रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी।
एक हफ्ते में रियाद एयरपोर्ट पर कई हमले
रिपोर्टों के मुताबिक, अक्टूबर के पहले सप्ताह में भी रियाद एयरपोर्ट पर हमले हुए थे। 8 अक्टूबर को हुए हमलों में एक सऊदी पायलट समेत तीन लोगों की मौत हुई थी। 10 अक्टूबर का हमला इस श्रृंखला की सबसे घातक घटना बताया गया।
यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच संघर्ष बढ़ने के साथ हवाई अड्डों और अन्य ठिकानों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। हूती विद्रोहियों ने अपने हमलों को यमन के संघर्ष में सऊदी अरब की भूमिका से जोड़ा है।
यमन की राजधानी सना पर भी हमले का दावा
हूती विद्रोहियों के नियंत्रण वाले मीडिया ने रविवार को दावा किया कि सऊदी अरब के विमानों ने यमन की राजधानी सना के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर हमला किया। हूती-नियंत्रित स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक रिहायशी इमारत पर हमले में एक बच्चे की मौत होने की बात भी कही। मंत्रालय के प्रवक्ता अनीस अल-असबाही के मुताबिक, 3 सितंबर से सऊदी हवाई हमलों में 91 लोगों की मौत हुई है।
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नेपाल में अचानक बाढ़ से तबाही: 35 घर और 6 पुल बहे, 10 लोग लापता; हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान

गोरखा (नेपाल): नेपाल के गोरखा जिले में रविवार सुबह बूढ़ी गंडकी नदी में अचानक बाढ़ आने से कई गांवों में भारी नुकसान हुआ है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, बाढ़ में करीब 35 घर और 6 पुल बह गए, जबकि कम से कम 10 लोग लापता हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए अभियान चलाया जा रहा है। बाढ़ का पानी सुबह करीब 4 बजे बस्तियों में घुसा। अचानक पानी बढ़ने से लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। बाढ़ ने 341 मेगावाट क्षमता वाली बूढ़ी गंडकी जलविद्युत परियोजना के निर्माण शिविर और कई मशीनों को भी नुकसान पहुंचाया।
भूस्खलन से नदी का रास्ता बंद होने की आशंका
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पहाड़ी इलाके में भूस्खलन के कारण नदी का प्रवाह बाधित हो गया था। इसके बाद पानी जमा हुआ और अचानक तेज बहाव के साथ नीचे की ओर आया। हालांकि, बाढ़ के सटीक कारणों की जांच जारी है।
बाढ़ के बाद नेपाली सेना और अन्य बचाव दलों को तैनात किया गया है। अधिकारियों ने नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। शुरुआती रिपोर्टों में किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई थी, जबकि कई लोग लापता बताए गए।
अगस्त की बाढ़ में 1,455 लोगों की मौत
नेपाल इससे पहले 26 अगस्त को भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित हुआ था। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, उस आपदा में 1,455 लोगों की मौत दर्ज की गई थी और 5,285 लोग लापता थे। इस आपदा के बाद भी राहत, खोज और पुनर्वास से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
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अमेरिका में अंधाधुंध गोलीबारी, 2 बच्चों समेत 9 की मौत, घर के अंदर मृत मिला संदिग्ध हमलावर

एरी (अमेरिका): अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य के एरी शहर में शुक्रवार शाम हुई अंधाधुंध गोलीबारी में 2 बच्चों समेत 8 लोगों की मौत हो गई। संदिग्ध हमलावर भी मृत पाया गया। इस तरह घटना में मरने वालों की कुल संख्या 9 हो गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, संदिग्ध ने खुद को गोली मार ली थी। पुलिस ने कहा है कि अब आम लोगों के लिए कोई खतरा नहीं है।
गोलीबारी की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस
सीबीएस न्यूज ने स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के हवाले से बताया कि शुक्रवार शाम करीब 5 बजे पुलिस को पेरी स्ट्रीट पर एक हथियारबंद व्यक्ति के गोली चलाने की सूचना मिली थी। चश्मदीदों के मुताबिक, गोली चलाने के बाद संदिग्ध एक घर के अंदर चला गया। सूचना मिलने पर पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारी मौके पर पहुंचे। वहां सड़क पर दो महिलाओं के शव मिले। इसके बाद घर की तलाशी ली गई, जहां गोलीबारी के अन्य पीड़ित भी मिले।
घर के अंदर मृत मिला संदिग्ध
अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्ध हमलावर भी घर के अंदर मृत मिला। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई कि उसने खुद को गोली मारकर जान दी। हालांकि, पुलिस ने घटना के पीछे की वजह और संदिग्ध के मकसद को लेकर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, गोलीबारी में 8 लोगों की मौत हुई और संदिग्ध भी मारा गया। कुल मृतकों की संख्या 9 बताई गई है।
पुलिस प्रमुख बोले- 28 साल के करियर में ऐसा नहीं देखा
एरी के पुलिस प्रमुख रिक लोराह ने घटना पर दुख जताते हुए एक स्थानीय न्यूज चैनल से कहा कि अपने 28 साल से ज्यादा के करियर में उन्होंने ऐसा कुछ नहीं देखा। उन्होंने कहा कि एरी शहर ने शायद ही कभी इतनी जानों का नुकसान और इतनी तबाही देखी हो। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
गवर्नर ने मदद का भरोसा दिया
पेंसिल्वेनिया के गवर्नर जोश शापिरो ने शनिवार को बताया कि उन्होंने एरी की मेयर डारिया डेव्लिन को अपने प्रशासन की ओर से पूरा सहयोग देने की पेशकश की है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन प्रभावित परिवारों और लोगों की मदद में जुटा है। एरी शहर पेंसिल्वेनिया के प्रमुख शहर पिट्सबर्ग से करीब 188 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। गोलीबारी की घटना के बाद इलाके में चिंता का माहौल है।
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अमेरिका में 8 बड़ी IT कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से किया सस्पेंड, टाटा, इंफोसिस, विप्रो और HCL भी शामिल

वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने गुरुवार को 8 बड़ी IT कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया। इनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टाटा), इंफोसिस, विप्रो और HCL के साथ कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं।
अमेरिकी श्रम विभाग के सचिव कीथ सोंडरलिंग ने कहा कि इन कंपनियों से जुड़ी नई PERM एप्लीकेशन स्वीकार नहीं की जाएंगी और लंबित आवेदनों की प्रोसेसिंग भी रोक दी जाएगी। यह कार्रवाई विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पर असर डाल सकती है।
क्या है PERM प्रोग्राम?
PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन अमेरिकी ग्रीन कार्ड की रोजगार आधारित प्रक्रिया का एक अहम चरण है। इसके जरिए अमेरिकी कंपनियां यह प्रमाणित कराती हैं कि किसी पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है और इसके बाद पात्र विदेशी कर्मचारी के लिए स्थायी रोजगार आधारित निवास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल H-1B वीजा पर काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों के लिए भी किया जाता है। हालांकि, मौजूदा फैसले से H-1B वीजा सीधे रद्द या सस्पेंड नहीं किए गए हैं। असर मुख्य रूप से PERM और उससे जुड़ी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर है।
अमेरिका ने क्यों लिया फैसला?
ट्रम्प प्रशासन ने इन कंपनियों पर इमिग्रेशन सिस्टम के कथित दुरुपयोग और विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के जरिए अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार पर असर डालने के आरोप लगाए हैं। श्रम सचिव सोंडरलिंग के मुताबिक, 2009 से इन कंपनियों ने मिलकर करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किए। इनमें 2.30 लाख से ज्यादा H-1B वीजा अप्रूवल और 1 लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणपत्र शामिल हैं। प्रशासन का दावा है कि इससे बड़ी संख्या में अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुईं।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी विदेशी कर्मचारियों से जुड़े वीजा कार्यक्रमों में कथित गड़बड़ियों पर चिंता जताई और अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने की बात कही।
हजारों भारतीय कर्मचारियों पर असर की आशंका
इस फैसले से अमेरिका में काम कर रहे उन भारतीय IT प्रोफेशनल्स की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिनके लिए संबंधित कंपनियां PERM आवेदन कर रही थीं। खास तौर पर भारतीय कर्मचारियों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए भारतीय आवेदकों का बैकलॉग पहले से लंबा है। हालांकि, किसी कर्मचारी का मौजूदा H-1B स्टेटस इस फैसले से अपने आप खत्म नहीं होता।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि कंपनियों के PERM आवेदन पर रोक तब तक जारी रह सकती है, जब तक प्रशासन की ओर से उठाई गई चिंताओं का समाधान नहीं होता।
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