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UP News: UPSRTC कर्मचारियों को अब मिलेगा 1 करोड़ का बीमा, बच्चों की पढ़ाई के लिए 10 लाख

Lucknow: उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह की मौजूदगी में उत्तर प्रदेश परिवहन निगम एवं इंडियन बैंक के बीच आज कर्मचारी हित में एक अहम MOU पर हस्ताक्षर किए गए। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में परिवहन निगम के कार्मिकों का स्वेच्छा से वेतन खाता इंडियन बैंक में खोले जाने पर बैंक द्वारा बीमा आदि की सुविधा उपलब्ध कराए जाने के संबंध में MOU हस्ताक्षरित किया गया।
परिवहन मंत्री ने कहा कि परिवहन सेवा एक रिस्की सेवा है, ऐसे में हमारे कर्मचारियों के लिए यह MOU काफी लाभकारी साबित होगा। मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि यह कोई नहीं चाहता कि उसके परिवार का कोई भी व्यक्ति असमय मृत्यु का शिकार हो, लेकिन ऐसी स्थिति में परिवार संकट में ना आए इसलिए इंडियन बैंक ने एक आत्मविश्वास पैदा करने की कोशिश की है। मंत्री ने बताया कि दुर्घटना की स्थिति में बैंक मृतक के परिजन को एक करोड रुपए का बीमा कवर मुहैया कराएगी। इसके अलावा टर्म लाइफ पॉलिसी भी बैंक ने उपलब्ध कराई है।
इंडियन बैंक में सैलरी अकाउंट खोलने वाले कर्मचारियों को एक्सीडेंटल केस में 10 लाख रुपए तक की सहायता मृतक की बेटी की शादी के लिए एवं 10 लाख रुपए तक की सहायता मृतक के बच्चे को हायर एजुकेशन के लिए बैंक उपलब्ध करा रहा है। परिवहन मंत्री ने कहा कि अधिक से अधिक संख्या में इंडियन बैंक से कर्मचारी जुड़े और बैंक द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है इस पॉलिसी का लाभ उठाएं।
घर बैठे जान सकेंगे बसों की लोकेशन
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने इस अवसर पर व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस एवं पैनिक बटन का भी बटन दबाकर शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि अब लोग घर बैठे ही बसों की लोकेशन जान सकेंगे और उसी के अनुसार स्टेशन अपने परिजन को लेने पहुंचेंगे। इसके अलावा आकस्मिक स्थिति में पैनिक बटन दबाकर इमरजेंसी सेवा भी प्राप्त की जा सकती है। प्रदेश सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक अत्याधुनिक सेवाएं लोगों को मुहैया कराई जाएं। इस अवसर पर उन्होंने चालकों/परिचालकों की वर्दी के लिए 1800 रुपए का चेक प्रदान किया। उन्होंने कहा कि UPSRTC को इतना मजबूत करना है कि आने वाले समय में ब्याज से ही निगम का संचालन सुगमता से होता रहे।
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नोएडा एनकाउंटर: 50 हजार का इनामी अमन त्यागी उर्फ माया त्यागी मारा गया, दो पुलिसकर्मी घायल

नोएडा: नोएडा पुलिस ने 50 हजार रुपए के इनामी बदमाश अमन त्यागी उर्फ माया त्यागी को मुठभेड़ में मार गिराया। शनिवार शाम सेक्टर-126 थाना क्षेत्र में पुलिस और बदमाश के बीच हुई मुठभेड़ में दो पुलिसकर्मी भी गोली लगने से घायल हो गए। अमन को घायल अवस्था में जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घायल पुलिसकर्मियों का अस्पताल में उपचार चल रहा है।
पुलिस के मुताबिक, सेक्टर-126 थाना पुलिस और क्राइम रिस्पॉन्स टीम (CRT) की संयुक्त टीम इलाके में चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान बाइक सवार संदिग्ध को रुकने का इशारा किया गया। आरोप है कि उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में अमन को गोली लगी। पुलिस ने मौके से एक पिस्टल, खोखा कारतूस और बाइक बरामद की है। घटनास्थल का निरीक्षण फील्ड यूनिट और फोरेंसिक टीम ने किया।
2019 में भी पुलिस मुठभेड़ में घायल हुआ था
पुलिस के अनुसार, अमन त्यागी मुजफ्फरनगर जिले के छपार गांव का रहने वाला था। उस पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित था। उसके खिलाफ हत्या, लूट, रंगदारी और गैंगस्टर एक्ट समेत 20 से अधिक आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।
अमन की पुलिस से यह पहली मुठभेड़ नहीं थी। वर्ष 2019 में थाना फेज-2 पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में उसके दोनों पैरों में गोली लगी थी। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। बाद में जमानत पर बाहर आने के बाद वह फिर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों में पुलिस के निशाने पर आया।
बादलपुर में फायरिंग के मामले में था वांछित
पुलिस के मुताबिक, अमन त्यागी थाना बादलपुर में दर्ज मुकदमा संख्या 306/2026 में वांछित था। आरोप है कि उसने कुछ दिन पहले बादलपुर क्षेत्र में वर्चस्व को लेकर अपने साथियों के साथ फायरिंग की थी। इस मामले में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस को उसकी तलाश थी और गिरफ्तारी पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया था।
रणदीप भाटी गैंग से जुड़ा होने का आरोप
पुलिस के अनुसार, अमन त्यागी का संबंध रणदीप भाटी गैंग से था। वह कथित तौर पर गैंग के लिए शूटर के रूप में काम करता था। पुलिस उसके आपराधिक नेटवर्क और साथियों के बारे में जानकारी जुटा रही है। उस पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, रंगदारी और गैंगस्टर एक्ट के तहत मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। पुलिस का दावा है कि ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में हुई कुछ हत्याओं में भी उसकी भूमिका की जांच की गई थी। इन मामलों में उसकी कथित भूमिका को पुलिस के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दो पुलिसकर्मी घायल, जांच जारी
मुठभेड़ में घायल पुलिसकर्मियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मौके से हथियार और अन्य सामग्री बरामद की गई है। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस अब अमन के साथियों, उसके नेटवर्क और दर्ज मुकदमों से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
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वाराणसी से दिल्ली के लिए देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन शुरू, 9 घंटे में पूरा होगा सफर

वाराणसी: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को वाराणसी से नई दिल्ली के बीच देश की दूसरी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इस ट्रेन से काशी और दिल्ली के बीच रातभर का सफर करीब 9 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। ट्रेन प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल, अलीगढ़ और गाजियाबाद में रुकेगी। यह सेवा सप्ताह में छह दिन चलाने की योजना है।
रेलवे के अनुसार, वाराणसी से चलने वाली ट्रेन शुक्रवार को और दिल्ली से चलने वाली ट्रेन शनिवार को नहीं चलेगी। ट्रेन पूरी तरह वातानुकूलित है और इसमें कुल 16 कोच लगाए गए हैं। इसकी यात्री क्षमता 823 है।
16 कोच में तीन श्रेणियों की सुविधा
वंदे भारत स्लीपर में यात्रियों के लिए तीन श्रेणियों की व्यवस्था की गई है। इसमें फर्स्ट एसी का एक, सेकेंड एसी के चार और थर्ड एसी के 11 कोच हैं। ट्रेन में कुल 823 यात्रियों के लिए बर्थ उपलब्ध होंगी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ट्रेन में यात्रियों के साथ लोको पायलट और अन्य क्रू सदस्यों की सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है। क्रू के लिए अलग केबिन और टॉयलेट की व्यवस्था की गई है।
हरी झंडी दिखाने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रेल मंत्री ने ट्रेन का निरीक्षण किया और लोको पायलट से बातचीत की। इस दौरान रेल मंत्री ने मुख्यमंत्री को ट्रेन की सुविधाओं और तकनीकी विशेषताओं की जानकारी दी।
पहले 13-14 घंटे लगते थे, अब करीब 9 घंटे में सफर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले वाराणसी से दिल्ली पहुंचने में 13 से 14 घंटे तक लगते थे। नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन से यह यात्रा करीब 8 से 9 घंटे में पूरी हो सकेगी। रात में यात्रा कर सुबह दिल्ली पहुंचने की सुविधा यात्रियों के लिए उपयोगी होगी।
रेलवे की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, नई सेवा मौजूदा शिव गंगा एक्सप्रेस की तुलना में वाराणसी से दिल्ली की यात्रा में करीब 55 मिनट और दिल्ली से वाराणसी की यात्रा में करीब 35 मिनट की बचत करेगी।
दिल्ली से वाराणसी तक बुलेट ट्रेन का प्रस्तावित सफर साढ़े तीन घंटे में
कार्यक्रम के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिल्ली-वाराणसी-गुवाहाटी बुलेट ट्रेन नेटवर्क के नॉर्दर्न कॉरिडोर को प्रधानमंत्री की मंजूरी मिलने की जानकारी दी। प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर आगरा, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या को जोड़ेगा। इसके बाद यह वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक पहुंचेगा।
रेल मंत्री के मुताबिक, कॉरिडोर तैयार होने के बाद दिल्ली से वाराणसी की यात्रा करीब 3 घंटे 33 मिनट में पूरी हो सकेगी। दिल्ली से आगरा का सफर लगभग एक घंटे में पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है।
दो मेमू ट्रेनों को भी दिखाई हरी झंडी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी से राजातालाब और बनारस से प्रयागराज रामबाग के बीच मेमू ट्रेन सेवाओं को भी हरी झंडी दिखाई। इन सेवाओं का उद्देश्य वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में स्थानीय रेल कनेक्टिविटी को बेहतर करना है।
जनवरी में शुरू हुई थी पहली वंदे भारत स्लीपर सेवा
देश की पहली वंदे भारत स्लीपर सेवा जनवरी 2026 में हावड़ा-गुवाहाटी कॉरिडोर पर शुरू की गई थी। वाराणसी-दिल्ली मार्ग पर दूसरी स्लीपर ट्रेन के उद्घाटन से उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी के बीच रात के रेल सफर के लिए एक और आधुनिक विकल्प उपलब्ध होगा।
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प्रयागराज: जमीन के नीचे छिपी करोड़ों की नकदी का मामला, रडार से तलाश, पुणे तक पहुंची जांच

प्रयागराज: बरईपुर गांव में जमीन के नीचे दबाकर रखी गई करोड़ों रुपये की नकदी का मामला अब और गहराता जा रहा है। नोटों से भरे तीन नीले ड्रम मिलने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि करोड़ों की रकम कहां से आई और इसे जमीन में क्यों छिपाया गया था। तलाशी अभियान के लिए तीन टीमें मौके पर पहुंची हैं। जमीन के भीतर छिपी नकदी का पता लगाने के लिए ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (GPR) की मदद ली जा रही है। पुलिस ने घर के परिसर में खुदाई भी शुरू कराई है। जांच में पुलिस के साथ आयकर विभाग और बैंक अधिकारियों की टीमें भी शामिल हैं।
पुलिस की एक टीम को जांच के सिलसिले में पुणे भेजा गया है। अधिकारियों का फोकस नकदी के स्रोत, उसे प्रयागराज लाने के रास्ते और इससे जुड़े लोगों की भूमिका का पता लगाने पर है।
पुणे में काम करने के दौरान जुटाई गई रकम की आशंका
जांच में यह बात सामने आने की जानकारी दी जा रही है कि राजेश और राकेश यादव कई साल तक पुणे में एक सर्राफा कारोबारी के यहां काम करते थे। कोविड महामारी के दौरान दोनों प्रयागराज लौट आए थे। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या बरामद नकदी का संबंध पुणे में उनके कामकाज से है। इसी कड़ी में पुलिस की एक टीम पुणे भेजे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, नकदी पुणे से लाई गई थी या इसका संबंध किसी कारोबारी अथवा आपराधिक गतिविधि से है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस और आयकर विभाग रकम के स्रोत तथा उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहे हैं।
दूसरे ठिकानों पर भी छिपी हो सकती है नकदी
जांच एजेंसियों को आशंका है कि तीन ड्रमों में मिली रकम के अलावा घर, बाग, खाली जमीन या परिवार की अन्य संपत्तियों में भी नकदी छिपाई गई हो सकती है। इसी संभावना को देखते हुए परिसर की दोबारा तलाशी और जमीन के भीतर जांच की जा रही है।
पुलिस ने बिजली कटवाकर की थी छापेमारी
बरईपुर रामनगर गांव में बुधवार शाम पुलिस ने राकेश यादव उर्फ महाकाल के पुश्तैनी मकान पर कार्रवाई की थी। बताया गया कि पुलिस को घर में चोरी के रुपये जमीन के नीचे छिपाकर रखने की सूचना मिली थी। इसके बाद डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार और एडीसीपी पुष्कर वर्मा समेत पुलिस टीम शाम करीब छह बजे गांव पहुंची। तलाशी अभियान से पहले गांव की बिजली कटवाई गई और फिर मकान की घेराबंदी कर तलाशी ली गई। कार्रवाई में एसीपी सोरांव श्यामजीत प्रमिला सिंह भी मौजूद थीं।
जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि इतनी बड़ी नकदी किसकी है और इसे जमीन के नीचे छिपाने की वजह क्या थी। फिलहाल बरामद रकम की अंतिम आधिकारिक गिनती और उसके स्रोत की पुष्टि का इंतजार है।
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प्रयागराज: पुलिस की छापेमारी में जमीन के नीचे दबे मिले नोटों से भरे 3 ड्रम, करोड़ों की नकदी बरामद; गिनती जारी

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में एक मकान के अंदर जमीन खोदने पर नोटों से भरे तीन ड्रम मिलने का मामला सामने आया है। नवाबगंज थाना क्षेत्र के बरईपुर रामनगर गांव में बुधवार शाम पुलिस ने छापेमारी कर जमीन के नीचे छिपाकर रखी गई करोड़ों रुपये की नकदी बरामद की। ड्रमों में 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां रखी थीं।
पुलिस ने नकदी को कब्जे में लेकर सील कर दिया है और मकान के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, देर रात तक 4 करोड़ रुपये से अधिक की गिनती हो चुकी थी, जबकि बरामद रकम की अंतिम राशि की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। मामले में कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
पुलिस ने गांव की बिजली कटवाकर की छापेमारी
पुलिस को सूचना मिली थी कि बरईपुर रामनगर गांव में राकेश यादव उर्फ महाकाल के मकान में चोरी की रकम जमीन के नीचे छिपाकर रखी गई है। इसके बाद बुधवार शाम करीब 6 बजे डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार और एडीसीपी गंगानगर पुष्कर वर्मा समेत पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
रिपोर्टों के अनुसार, तलाशी शुरू करने से पहले गांव की बिजली कटवाई गई। इसके बाद मकान में तलाशी और खुदाई की गई। जमीन के नीचे दबे तीन ड्रम मिलने पर पुलिस ने उन्हें बाहर निकलवाया। ड्रमों में कपड़े से ढकी नोटों की गड्डियां रखी थीं। पुलिस ने नकदी जब्त कर परिसर की घेराबंदी कर दी।
साढ़े चार घंटे तक चला तलाशी अभियान
मकान में तलाशी और खुदाई की कार्रवाई करीब साढ़े चार घंटे चली। रात लगभग 10:30 बजे पुलिस टीम वापस लौटी, लेकिन घर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई। मकान और उससे जुड़ी जमीन की निगरानी के लिए पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया।
डीसीपी गंगानगर सोनम कुमार के मुताबिक, रात अधिक होने के कारण तलाशी अभियान रोकना पड़ा। बरामद नकदी की गिनती और उससे जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। आयकर विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियों को भी मामले की जानकारी दिए जाने की खबर है।
ग्रामीणों का दावा- पुणे में काम करने के बाद खरीदी जमीन
गांव के कुछ लोगों ने दावा किया है कि राकेश यादव पहले पुणे में अपने रिश्तेदारों के साथ रहकर सर्राफा कारोबारी के यहां काम करता था। कोविड महामारी के दौरान वह गांव लौट आया था। इसके बाद उसने 22 बीघा जमीन खरीदी और करीब 1 करोड़ खर्च कर मकान बनवाया। ग्रामीणों के मुताबिक, उसने ट्रैक्टर, डीजे और पिकअप वाहन भी खरीदे तथा सीमेंट-सरिया का कारोबार शुरू किया। पुलिस जांच में यह पता लगाया जाना है कि बरामद रकम कहां से आई, किसकी है और उसे जमीन के नीचे छिपाकर क्यों रखा गया था।
नकदी की गिनती पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी कुल रकम
मकान से मिली नकदी की सही राशि को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ रिपोर्टों में पांच करोड़ रुपये से अधिक की रकम मिलने की बात कही गई, जबकि अन्य रिपोर्टों में देर रात तक चार करोड़ रुपये से अधिक की गिनती पूरी होने का उल्लेख है। 60 करोड़ रुपये से अधिक नकदी होने की चर्चा भी सामने आई, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि गिनती और जांच पूरी होने के बाद ही बरामद रकम की वास्तविक मात्रा स्पष्ट होगी।
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Ghaziabad Encounter: पुलिस के साथ एनकाउंटर में एक लाख का इनामी धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी ढेर, 3 पुलिसकर्मी घायल

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस और क्राइम ब्रांच के साथ एक लाख रुपये के इनामी बदमाश धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी उर्फ बावरिया की मुठभेड़ हो गई। दोनों तरफ से हुई करीब 15 राउंड फायरिंग में गोली लगने से धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। निवाड़ी क्षेत्र में गंग नहर की पटरी पर हुई मुठभेड़ में गाजियाबाद क्राइम ब्रांच के तीन पुलिसकर्मी विनीत, अमित और हिमांशु भी गोली लगने से घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
रुकने का इशारा करने पर फायरिंग का आरोप
पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड के अनुसार, मुखबिर से सूचना मिलने के बाद एडिशनल डीसीपी क्राइम पीयूष सिंह के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की टीम को गंग नहर पटरी पर तैनात किया गया था। इसी दौरान बाइक से आ रहे धर्मेंद्र को पुलिस ने रुकने का इशारा किया। पुलिस के मुताबिक धर्मेंद्र ने रुकने के बजाय टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी। घायल अवस्था में उसे निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
गाजियाबाद और बागपत में डकैती के मामलों में तलाश
एडिशनल डीसीपी क्राइम पीयूष सिंह ने बताया कि अमरोहा जिले के बशी गांव का रहने वाला धर्मेंद्र अपने गिरोह के साथ गाजियाबाद और बागपत में डकैती की वारदातों को अंजाम देता था। पुलिस पिछले करीब एक साल से उसकी तलाश कर रही थी।
पुलिस के अनुसार, धर्मेंद्र पहचान बदलकर वारदात करता था और रात के समय लूट तथा डकैती की घटनाओं को अंजाम देता था। वर्ष 2025 में निवाड़ी क्षेत्र में डकैती की एक घटना के दौरान मकान मालिक पर जानलेवा हमला करने का भी आरोप है।
गाजियाबाद और मेरठ पुलिस ने घोषित किया था इनाम
धर्मेंद्र उर्फ टिड्डी को बावरिया गिरोह का सदस्य बताया जा रहा है। उसकी गिरफ्तारी के लिए गाजियाबाद पुलिस ने 50 हजार रुपये और मेरठ पुलिस ने 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इस तरह उस पर कुल एक लाख रुपये का इनाम था। पुलिस के मुताबिक, बागपत सहित कई जिलों की पुलिस और एसटीएफ भी उसकी तलाश कर रही थी।
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