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पनामा पेपर्स मामले में ऐश्वर्या राय से 6 घंटे ईडी ने की पूछताछ, पिछले महीने हुई थी अभिषेक बच्चन से पूछताछ

नई दिल्ली:(Panama Papers case) बॉलीवुड एक्ट्रेस और बच्चन परिवार की बहू ऐश्वर्या राय(Aishwarya Rai) सोमवार को पनामा पेपर्स मामले से जुड़ी जांच को लेकर दिल्ली स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दफ्तर में पहुंची थी। ऐश्वर्या राय की पेशी दिल्ली स्थित लोकनायक भवन में हुई। करीब 6 घंटे तक ऐश्वर्या राय से सवाल जवाब करने के बाद ED की पूछताछ खत्म हो गई। बता दें कि पनामा पेपर्स मामले की जांच के सिलसिले में कई बड़े चेहरों से पूछताछ हो चुकी है। देश की कई बड़ी हस्तियां जांच में शामिल हो चुकी हैं। बॉलीवुड एक्टर अभिषेक बच्चन भी एक महीने पहले ईडी दफ्तर पहुंचे थे, जहां उनसे पूछताछ की गई थी।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पनामा पेपर्स लीक का वैश्विक मामला सामने आने के बाद 2016 से इस संबंध में जांच कर रहा है। सरकार के मुताबिक पनामा एवं पैराडाइस पेपर्स लीक में भारत से जुड़े 930 प्रतिष्ठानों के नाम सामने आए हैं, जिसमें से पनामा पेपर्स मामले में भारत के करीब 500 लोगों के शामिल होने की बात सामने आ चुकी है। इन लोगों पर टैक्स चोरी का आरोप है।
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दिल्ली में प्रदूषण से हालात बिगड़े, GRAP-3 लागू; MP में बढ़ी ठंड, राजस्थान के भिवाड़ी में AQI 300 पार

दिल्ली: दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। हालात को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने शुक्रवार को ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का तीसरा चरण लागू कर दिया। इसके तहत दिल्ली और प्रमुख NCR जिलों में पांचवीं कक्षा तक के स्कूलों को हाइब्रिड मोड में पढ़ाई कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस व्यवस्था में विद्यार्थी ऑनलाइन या ऑफलाइन, दोनों में से किसी भी माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे।
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश में रात के तापमान में गिरावट से ठंड का असर बढ़ने लगा है। इंदौर, भोपाल और दूसरे शहरों में न्यूनतम तापमान 12 से 14 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। राजस्थान में भी प्रदूषण बढ़ रहा है। भिवाड़ी में शनिवार सुबह AQI 300 के पार दर्ज किया गया।
दिल्ली-NCR में GRAP-3 लागू, पांचवीं तक हाइब्रिड कक्षाएं
दिल्ली में 6 नवंबर को औसत AQI 382 दर्ज किया गया था, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। शनिवार सुबह यह घटकर 364 रहा, हालांकि कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी तक पहुंचा। इंडिया गेट के आसपास के निगरानी स्टेशन पर शुक्रवार सुबह AQI 403 दर्ज किया गया था।
प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए CAQM ने दिल्ली-NCR में GRAP-3 लागू किया है। इसके तहत निर्माण और ध्वस्तीकरण से जुड़ी कई गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। साथ ही दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत में पांचवीं कक्षा तक के स्कूलों को हाइब्रिड मोड में पढ़ाई कराने के निर्देश दिए गए हैं।
इस व्यवस्था के तहत स्कूलों में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प उपलब्ध रहेंगे। अभिभावक बच्चों की सुविधा और स्थानीय निर्देशों के अनुसार पढ़ाई का माध्यम चुन सकेंगे।
मध्य प्रदेश में रात का पारा 12 डिग्री के करीब
मध्य प्रदेश में दिवाली के आसपास मौसम में बदलाव दिखने लगा है। कई शहरों में रात का तापमान गिरने से सुबह और देर रात हल्की ठंड महसूस हो रही है।
6 नवंबर को इंदौर में न्यूनतम तापमान 12.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में यह 13.5 डिग्री रहा। दमोह में 12 डिग्री और पचमढ़ी में 12.4 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया। शाजापुर जिले के गिरवर में प्रदेश का न्यूनतम तापमान 11.9 डिग्री दर्ज हुआ।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार प्रदेश में फिलहाल मौसम शुष्क रहने की संभावना है। अगले कुछ दिनों में रात के तापमान में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
राजस्थान के भिवाड़ी में AQI 300 पार
दिल्ली की तरह राजस्थान में भी वायु प्रदूषण चिंता बढ़ा रहा है। शनिवार सुबह भिवाड़ी के RIICO इंडस्ट्रियल एरिया-3 निगरानी केंद्र पर AQI 340 दर्ज किया गया। यह गंभीर श्रेणी में आता है। हालांकि भिवाड़ी के दूसरे निगरानी केंद्र पर AQI का स्तर अलग रहा।
प्रदेश के अन्य शहरों में भी हवा की गुणवत्ता खराब दर्ज की गई। अलवर में सुबह कोहरा देखा गया, जबकि अजमेर समेत कुछ जिलों में हल्के बादल छाए रहे।
शुक्रवार को पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। इस तरह प्रदेश में दिन के समय गर्मी और सुबह-रात में ठंडक के साथ वायु प्रदूषण की चुनौती भी बनी हुई है।
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CBSE Date Sheet 2027: 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 16 फरवरी से, 101 दिन पहले जारी हुई डेटशीट

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा 2027 की डेटशीट जारी कर दी है। दोनों कक्षाओं की परीक्षाएं 16 फरवरी 2027 से शुरू होंगी। बोर्ड ने परीक्षा शुरू होने से 101 दिन पहले ही टाइम टेबल जारी किया है, ताकि विद्यार्थियों को तैयारी और रिवीजन के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
CBSE के अनुसार, कक्षा 10वीं में 83 विषयों की परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इसमें 26.5 लाख से ज्यादा विद्यार्थी शामिल होंगे। वहीं, 12वीं की परीक्षा में 121 विषय रखे गए हैं, जिसमें 19.8 लाख से अधिक विद्यार्थी शामिल होंगे। सभी परीक्षाएं सुबह 10:30 बजे से शुरू होंगी।
10वीं की परीक्षा 9 मार्च तक, 12वीं के पेपर 9 अप्रैल तक
बोर्ड की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक, कक्षा 10वीं की परीक्षाएं 16 फरवरी से शुरू होकर 9 मार्च 2027 तक चलेंगी। वहीं, कक्षा 12वीं की परीक्षाएं 16 फरवरी से शुरू होकर 9 अप्रैल 2027 तक आयोजित की जाएंगी। विद्यार्थी अपनी विषयवार परीक्षा की तारीख और अन्य निर्देश CBSE की आधिकारिक डेटशीट में देख सकते हैं।
40 हजार से ज्यादा विषय संयोजनों का रखा ध्यान
CBSE ने डेटशीट तैयार करते समय 40 हजार से अधिक विषय संयोजनों को ध्यान में रखा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी विद्यार्थी के चुने हुए दो विषयों की परीक्षाएं एक ही दिन न पड़ें। इसके अलावा, आमतौर पर साथ पढ़े जाने वाले विषयों के पेपर के बीच पर्याप्त अंतर रखा गया है, ताकि विद्यार्थियों को तैयारी और रिवीजन का समय मिल सके।
12वीं के छात्रों की प्रवेश परीक्षाओं को भी ध्यान में रखा
बोर्ड ने कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों की प्रवेश परीक्षाओं के संभावित कार्यक्रम को भी ध्यान में रखकर डेटशीट तैयार की है। कोशिश की गई है कि बोर्ड परीक्षाएं प्रमुख प्रवेश परीक्षाओं के शुरू होने से पहले पूरी हो जाएं। इससे विद्यार्थियों को बोर्ड और प्रवेश परीक्षा, दोनों की तैयारी के लिए बेहतर समय मिल सकेगा।
CBSE की वेबसाइट से डाउनलोड करें डेटशीट
विद्यार्थी कक्षा 10वीं और 12वीं की विषयवार डेटशीट CBSE की आधिकारिक वेबसाइट पर देख और डाउनलोड कर सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट: https://www.cbse.gov.in पर जाकर Latest Updates सेक्शन में वर्ष 2027 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा डेटशीट का लिंक खोलें। विद्यार्थी अपनी कक्षा और विषय के अनुसार परीक्षा की तारीख ध्यान से जांच लें।
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दिल्ली के चांदनी चौक में निर्माणाधीन इमारत ढही, 2 की मौत; कई लोगों के फंसे होने की आशंका

दिल्ली: चांदनी चौक इलाके में गुरुवार सुबह एक तीन मंजिला निर्माणाधीन इमारत ढह गई। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। घटना के बाद दमकल विभाग, NDRF, दिल्ली पुलिस और नगर निगम की टीमें राहत एवं बचाव अभियान में जुट गईं।
हादसा सुबह करीब 9:50 बजे चावड़ी बाजार मेट्रो स्टेशन के पास गली सत्तारा, शीश महल इलाके में हुआ। दिल्ली फायर सर्विस को सूचना मिलने के बाद दमकल की छह यूनिट मौके पर भेजी गईं। शुरुआती कार्रवाई में दो वाटर टेंडर, एक वाटर बाउजर, क्विक रिस्पॉन्स व्हीकल और एक इंसिडेंट रिस्पॉन्स टीम को रवाना किया गया था। बाद में अतिरिक्त संसाधन भी भेजे गए।
MCD ने दो इंजीनियरों को किया सस्पेंड
हादसे के बाद नगर निगम (MCD) ने बिल्डिंग विभाग के दो अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इनमें असिस्टेंट इंजीनियर मोहम्मद नईम और जूनियर इंजीनियर अमन दलाल शामिल हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, निर्माण के लिए बिल्डिंग प्लान स्वीकृत नहीं कराया गया था। हादसे के संबंध में अधिकारियों की जिम्मेदारी और निर्माण में हुई संभावित अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
छत का सपोर्ट सिस्टम हटाते समय गिरने की बात
MCD के एक अधिकारी के मुताबिक, इमारत में निर्माण कार्य चल रहा था, लेकिन करीब 15 दिन पहले काम रोक दिया गया था। हादसे के समय मजदूर छत के नीचे लगाए गए सपोर्ट सिस्टम को हटा रहे थे। इसी दौरान इमारत ढह गई।
अधिकारी ने यह भी बताया कि निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और उसके सेट होने की स्थिति इंजीनियरिंग मानकों के अनुरूप नहीं थी। हालांकि, हादसे के सटीक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्रत्यक्षदर्शी बोले- 3-4 महीने से चल रहा था निर्माण
प्रत्यक्षदर्शी मोहम्मद नईम के मुताबिक, इमारत में पिछले तीन से चार महीने से निर्माण कार्य चल रहा था। वहां तीन-चार लिंटर डाले जा चुके थे। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि हादसे के दौरान ये सभी एक साथ ढह गए।
उनके मुताबिक, घटना के समय निर्माण स्थल पर करीब तीन-चार लोग मौजूद थे। उन्होंने मलबे से एक शव बाहर निकाले जाते हुए भी देखा।
NDRF और पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
हादसे की सूचना मिलने के बाद NDRF, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और MCD की टीमें मौके पर पहुंचीं। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान स्थिति के अनुसार अतिरिक्त संसाधन लगाए जा रहे हैं।
मलबे में दबे लोगों की संख्या को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग जानकारी सामने आई है। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कुल कितने लोग लापता हैं।
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मोदी कैबिनेट: 850 फास्ट ट्रैक कोर्ट को मंजूरी, ऊर्जा भंडारण के लिए ₹14,500 करोड़

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार, 4 नवंबर को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए। इनमें रेप और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों के जल्द निपटारे के लिए 850 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट की योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इसके अलावा बिजली स्टोर करने के लिए 92 गीगावाट-घंटे (GWh) क्षमता विकसित करने के लिए ₹14,500 करोड़ की योजना को मंजूरी मिली है।
कैबिनेट ने देश के डेटा कलेक्शन सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए ₹4,371.10 करोड़ और क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए ₹2,814 करोड़ की योजना भी स्वीकृत की है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।
1. रेप और POCSO मामलों के लिए 850 फास्ट ट्रैक कोर्ट
कैबिनेट ने रेप और बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को पांच साल के लिए जारी रखने की मंजूरी दी है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी।
इस योजना पर कुल ₹3,788.04 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी ₹2,353.15 करोड़ और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की हिस्सेदारी ₹1,434.89 करोड़ होगी। केंद्र का हिस्सा निर्भया फंड से दिया जाएगा।
योजना के तहत देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 850 फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट संचालित करने का प्रावधान है। इनमें POCSO मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें भी शामिल होंगी।
हर कोर्ट में एक न्यायिक अधिकारी, एक विशेष लोक अभियोजक और छह सहायक कर्मचारियों की व्यवस्था होगी। इसका उद्देश्य रेप और POCSO एक्ट के लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करना और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना है।
2. बिजली स्टोर करने के लिए ₹14,500 करोड़ की योजना
कैबिनेट ने 92 GWh ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम विकसित करने के लिए ₹14,500 करोड़ की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू होगी। इस योजना का उद्देश्य बड़े स्तर पर बिजली को स्टोर करना है, ताकि जरूरत के समय उसका इस्तेमाल किया जा सके। इससे सौर और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा का बेहतर उपयोग संभव होगा।
92 GWh की क्षमता को तीन हिस्सों में बांटा गया है:
- 30 GWh: बैटरी आधारित एनर्जी स्टोरेज सिस्टम।
- 60 GWh: पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट।
- 2 GWh: उभरती हुई ऊर्जा भंडारण तकनीकें।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ऊर्जा भंडारण से बिजली ट्रांसमिशन लाइनों का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी सौर ऊर्जा संयंत्र के लिए 10 मेगावाट की ट्रांसमिशन क्षमता तैयार की गई है, तो रात में सौर बिजली का उत्पादन नहीं होने के कारण इसका पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाता। लेकिन दिन में उत्पादित बिजली को स्टोर करके रात में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे मौजूदा ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर की उपयोगिता बढ़ेगी।
3. क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग के लिए ₹2,814 करोड़
कैबिनेट ने महत्वपूर्ण खनिजों यानी क्रिटिकल मिनरल्स की प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए ₹2,814 करोड़ की कैपिटल एक्सपेंडिचर सपोर्ट योजना को मंजूरी दी है। यह योजना पांच साल यानी वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू होगी।
इसका उद्देश्य देश में खनिजों के प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ाना और विनिर्माण उद्योगों को जरूरी कच्चा माल उपलब्ध कराना है।
योजना के तहत 24 चिन्हित महत्वपूर्ण खनिजों को शामिल किया गया है। इसमें खदानों से निकाले गए खनिजों के साथ-साथ रीसाइक्लिंग से प्राप्त खनिज भी शामिल होंगे।
इन खनिजों को प्रोसेस करके ऐसा कच्चा माल तैयार किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल सेमीकंडक्टर, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरण और भारी मशीनरी जैसे उद्योगों में किया जा सके।
4. डेटा कलेक्शन सिस्टम के आधुनिकीकरण के लिए ₹4,371 करोड़
कैबिनेट ने देश की सांख्यिकी और डेटा संग्रह प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए ‘विकसित भारत इनिशिएटिव फॉर स्टैटिस्टिकल ट्रांसफॉर्मेशन, एनालिटिक्स एंड रिसर्च’ (VISTAR) योजना को मंजूरी दी है। इसके लिए ₹4,371.10 करोड़ का बजट तय किया गया है। यह योजना 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी।
इसका उद्देश्य सरकारी आंकड़े जुटाने, उनकी जांच करने और उनका विश्लेषण करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। इससे सरकार को नीतियां बनाने के लिए अधिक भरोसेमंद आंकड़े मिल सकेंगे।
योजना के तहत सर्वेक्षण के तरीकों में सुधार, आंकड़ों की गुणवत्ता की जांच और डेटा संग्रह में होने वाली गलतियों को कम करने पर जोर दिया जाएगा। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सांख्यिकी व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा।
इसके अलावा आठवीं आर्थिक जनगणना को भी इस योजना के तहत समर्थन मिलेगा। विश्वविद्यालयों में सांख्यिकी और डेटा संग्रह से जुड़े प्रशिक्षण और पाठ्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा।
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अग्निवीरों को 2 साल का सेवा विस्तार, अब 6 साल तक कर सकेंगे देश की सेवा

नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों में अग्निवीर के रूप में सेवा दे रहे युवाओं के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने बुधवार, 4 नवंबर को अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर देने की घोषणा की। इसके बाद अग्निवीरों का कुल सेवा कार्यकाल चार साल से बढ़कर छह साल तक हो सकेगा।
नई व्यवस्था के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वाले उन 75% अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त कार्यकाल दिया जाएगा, जिन्हें पहले नियमित कैडर में शामिल नहीं किया जाता था। इस अवधि के बाद सेना में बने रहने के इच्छुक अग्निवीर निर्धारित चयन प्रक्रिया से गुजर सकेंगे। हालांकि, सेवा विस्तार का मतलब स्थायी नियुक्ति की गारंटी नहीं है।
25% अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने का प्रावधान
अग्निपथ योजना की शुरुआत 14 जून 2022 को हुई थी। इसके तहत थल सेना, वायुसेना और नौसेना में युवाओं की भर्ती चार साल के लिए की जाती है।
योजना के मौजूदा प्रावधान के अनुसार, प्रत्येक बैच के अधिकतम 25% अग्निवीरों को चार साल की सेवा पूरी होने के बाद नियमित कैडर में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए उनके प्रदर्शन, योग्यता और सशस्त्र बलों की जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है।
अब शेष 75% अग्निवीरों को भी दो साल तक सेवा जारी रखने का अवसर मिलेगा। इस तरह उन्हें सेना में छह साल तक काम करने का मौका मिल सकेगा। अतिरिक्त अवधि पूरी होने के बाद नियमित सेवा में शामिल होने के लिए निर्धारित चयन प्रक्रिया लागू होगी।
दिसंबर तक 18,300 अग्निवीरों का कार्यकाल होना था पूरा
अग्निपथ योजना के पहले बैच में तीनों सेनाओं में करीब 24,400 अग्निवीर भर्ती हुए थे। इनमें से लगभग 18,300 अग्निवीरों का चार साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 तक पूरा होने वाला था। यह पहले बैच का करीब 75% हिस्सा है।
पहले की व्यवस्था के मुताबिक, नवंबर के मध्य से इन अग्निवीरों को चरणबद्ध तरीके से सेवा से मुक्त किया जाना था। नई व्यवस्था से उन्हें दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर मिलेगा।
तीनों सेनाओं में करीब 3.18 लाख अग्निवीर
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वर्तमान में तीनों सेनाओं में करीब 3.18 लाख अग्निवीर सेवा दे रहे हैं। इनमें थल सेना, वायुसेना और नौसेना के अग्निवीर शामिल हैं।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब अग्निपथ योजना के पहले बैच की चार साल की सेवा अवधि पूरी होने वाली है। नई व्यवस्था से प्रशिक्षित और अनुभवी युवाओं को सशस्त्र बलों में कुछ और समय तक सेवा देने का अवसर मिलेगा।
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