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Earthquake: म्यांमार में भूकंप से भारी तबाही, अब तक 1644 की मौत, थाइलैंड में 10 की मौत, कई लापता

Earthquake: म्यांमार में शुक्रवार को आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। अकेले म्यांमार में भूकंप में 1644 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि अभी तक 2300 से अधिक घायलों को रेस्क्यू कर इलाज के लिए ले जाया गया है। वहीं सैंकड़ों लोग भूकंप के बाद से लापता बताए जा रहे हैं। इनके मलबे में दबे होने की आशंका है। यूनाइटेड स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने आशंका जताई है कि म्यांमार में भूकंप से मरने वालों का आंकड़ा 10 हजार पार जा सकता है। फिलहाल राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। भूकंप से प्रभावित म्यांमार की मदद के लिए भारत आगे आया है। भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत राहत सामग्री भेजी है। वायुसेना का विमान सी-130 जे करीब 15 टन राहत सामग्री लेकर यांगून पहुंच गया है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए जानकारी दी है। कि ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत भारतीय वायुसेना (आईएएफ) सी-130जे विमान में सवार होकर म्यांमार को राहत सामग्री भेजी गई। राहत पैकेज में टेंट, स्लीपिंग बैग, कंबल, खाने के लिए तैयार भोजन, वाटर प्यूरीफायर, हाइजीन किट, सोलर लैंप, जनरेटर सेट और पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, सीरिंज, दस्ताने और पट्टियां जैसी आवश्यक चीजें शामिल हैं। शुक्रवार कौ आए भूकंप के झटके बांग्लादेश, चीन और भारत तक महसूस किए गए। हालांकि इन देशों से नुकसान की कोई ख़बर नहीं है।
थाइलैंड में अब तक 10 की मौत, कई लापता
म्यांमार के पड़ोसी देश थाइलैंड में भी करीब 7.2 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जहां एक निर्माणाधीन 33 मंजिला इमारत भूकंप के झटकों से ढह गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत गिरते ही पूरे इलाके में धूल का गुबार छा गया, लोग घबराकर चीखने लगे और सड़कों पर अफरा-तफरी मच गई। बैंकॉक प्रशासन के अनुसार, इस दुर्घटना में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, 16 घायल हैं और 101 लोग लापता हैं। भारी तबाही के चलते पूरे थाईलैंड में इमरजेंसी लगा दी गई है।
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अमेरिका में अंधाधुंध गोलीबारी, 2 बच्चों समेत 9 की मौत, घर के अंदर मृत मिला संदिग्ध हमलावर

एरी (अमेरिका): अमेरिका के पेंसिल्वेनिया राज्य के एरी शहर में शुक्रवार शाम हुई अंधाधुंध गोलीबारी में 2 बच्चों समेत 8 लोगों की मौत हो गई। संदिग्ध हमलावर भी मृत पाया गया। इस तरह घटना में मरने वालों की कुल संख्या 9 हो गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, संदिग्ध ने खुद को गोली मार ली थी। पुलिस ने कहा है कि अब आम लोगों के लिए कोई खतरा नहीं है।
गोलीबारी की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस
सीबीएस न्यूज ने स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के हवाले से बताया कि शुक्रवार शाम करीब 5 बजे पुलिस को पेरी स्ट्रीट पर एक हथियारबंद व्यक्ति के गोली चलाने की सूचना मिली थी। चश्मदीदों के मुताबिक, गोली चलाने के बाद संदिग्ध एक घर के अंदर चला गया। सूचना मिलने पर पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारी मौके पर पहुंचे। वहां सड़क पर दो महिलाओं के शव मिले। इसके बाद घर की तलाशी ली गई, जहां गोलीबारी के अन्य पीड़ित भी मिले।
घर के अंदर मृत मिला संदिग्ध
अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्ध हमलावर भी घर के अंदर मृत मिला। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई कि उसने खुद को गोली मारकर जान दी। हालांकि, पुलिस ने घटना के पीछे की वजह और संदिग्ध के मकसद को लेकर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, गोलीबारी में 8 लोगों की मौत हुई और संदिग्ध भी मारा गया। कुल मृतकों की संख्या 9 बताई गई है।
पुलिस प्रमुख बोले- 28 साल के करियर में ऐसा नहीं देखा
एरी के पुलिस प्रमुख रिक लोराह ने घटना पर दुख जताते हुए एक स्थानीय न्यूज चैनल से कहा कि अपने 28 साल से ज्यादा के करियर में उन्होंने ऐसा कुछ नहीं देखा। उन्होंने कहा कि एरी शहर ने शायद ही कभी इतनी जानों का नुकसान और इतनी तबाही देखी हो। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
गवर्नर ने मदद का भरोसा दिया
पेंसिल्वेनिया के गवर्नर जोश शापिरो ने शनिवार को बताया कि उन्होंने एरी की मेयर डारिया डेव्लिन को अपने प्रशासन की ओर से पूरा सहयोग देने की पेशकश की है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन प्रभावित परिवारों और लोगों की मदद में जुटा है। एरी शहर पेंसिल्वेनिया के प्रमुख शहर पिट्सबर्ग से करीब 188 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। गोलीबारी की घटना के बाद इलाके में चिंता का माहौल है।
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अमेरिका में 8 बड़ी IT कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से किया सस्पेंड, टाटा, इंफोसिस, विप्रो और HCL भी शामिल

वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने गुरुवार को 8 बड़ी IT कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (PERM) प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया। इनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टाटा), इंफोसिस, विप्रो और HCL के साथ कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोबी शामिल हैं।
अमेरिकी श्रम विभाग के सचिव कीथ सोंडरलिंग ने कहा कि इन कंपनियों से जुड़ी नई PERM एप्लीकेशन स्वीकार नहीं की जाएंगी और लंबित आवेदनों की प्रोसेसिंग भी रोक दी जाएगी। यह कार्रवाई विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया पर असर डाल सकती है।
क्या है PERM प्रोग्राम?
PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन अमेरिकी ग्रीन कार्ड की रोजगार आधारित प्रक्रिया का एक अहम चरण है। इसके जरिए अमेरिकी कंपनियां यह प्रमाणित कराती हैं कि किसी पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं है और इसके बाद पात्र विदेशी कर्मचारी के लिए स्थायी रोजगार आधारित निवास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। इस प्रक्रिया का इस्तेमाल H-1B वीजा पर काम कर रहे विदेशी कर्मचारियों के लिए भी किया जाता है। हालांकि, मौजूदा फैसले से H-1B वीजा सीधे रद्द या सस्पेंड नहीं किए गए हैं। असर मुख्य रूप से PERM और उससे जुड़ी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर है।
अमेरिका ने क्यों लिया फैसला?
ट्रम्प प्रशासन ने इन कंपनियों पर इमिग्रेशन सिस्टम के कथित दुरुपयोग और विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति के जरिए अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार पर असर डालने के आरोप लगाए हैं। श्रम सचिव सोंडरलिंग के मुताबिक, 2009 से इन कंपनियों ने मिलकर करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए अनुरोध किए। इनमें 2.30 लाख से ज्यादा H-1B वीजा अप्रूवल और 1 लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणपत्र शामिल हैं। प्रशासन का दावा है कि इससे बड़ी संख्या में अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हुईं।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी विदेशी कर्मचारियों से जुड़े वीजा कार्यक्रमों में कथित गड़बड़ियों पर चिंता जताई और अमेरिकी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने की बात कही।
हजारों भारतीय कर्मचारियों पर असर की आशंका
इस फैसले से अमेरिका में काम कर रहे उन भारतीय IT प्रोफेशनल्स की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिनके लिए संबंधित कंपनियां PERM आवेदन कर रही थीं। खास तौर पर भारतीय कर्मचारियों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका में रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लिए भारतीय आवेदकों का बैकलॉग पहले से लंबा है। हालांकि, किसी कर्मचारी का मौजूदा H-1B स्टेटस इस फैसले से अपने आप खत्म नहीं होता।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि कंपनियों के PERM आवेदन पर रोक तब तक जारी रह सकती है, जब तक प्रशासन की ओर से उठाई गई चिंताओं का समाधान नहीं होता।
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Smit Machchhar: अमेरिकी संसद ने भारतीय पायलट स्मित मच्छर की बहादुरी को सराहा, फ्लाईदुबई हमले को बताया आतंकी हमला

Smit Machchhar: अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने फ्लाईदुबई के भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी को सम्मानित करने वाला प्रस्ताव पास किया है। प्रस्ताव में 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट FZ1073 में हुए कॉकपिट हमले की निंदा की गई और इसे आतंकी हमला बताया गया। प्रस्ताव में कैप्टन मच्छर के साथ ऑफ-ड्यूटी पायलटों, क्रू और यात्रियों की भूमिका की भी सराहना की गई।
प्रस्ताव के मुताबिक, उड़ान के दौरान फर्स्ट ऑफिसर ने कॉकपिट में कैप्टन मच्छर पर विमान की इमरजेंसी क्रैश एक्स से हमला किया और विमान के नियंत्रण पर कब्जा करने की कोशिश की। विमान कुछ ही समय में 14 हजार फीट से ज्यादा नीचे आ गया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मच्छर ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिसके बाद यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू किया।
45 मिनट तक डेंटिस्ट ने बचाने की कोशिश की
हमले के बाद विमान में मौजूद इजराइल में रहने वाले डेंटिस्ट डॉ. शोता मुसेव कैप्टन मच्छर की मदद के लिए कॉकपिट पहुंचे। उन्होंने बताया कि कैप्टन के सिर और बाएं हाथ पर गहरे घाव थे और काफी खून बह रहा था। मुसेव ने टी-शर्ट से घावों पर दबाव बनाया और क्रू से बर्फ मंगाकर करीब 45 मिनट तक प्राथमिक उपचार करते रहे। इस दौरान वह कैप्टन से लगातार बात करते रहे ताकि वह होश में रहें।
मुसेव ने बताया कि कैप्टन को होश में रखने के लिए उन्होंने उनसे परिवार के बारे में बात की। उन्होंने पूछा कि उनके कितने बच्चे हैं और उनके नाम क्या हैं। मुसेव के मुताबिक, एक समय कैप्टन की नब्ज बेहद धीमी हो गई थी। बाद में विमान को जल्द उतारने की जरूरत महसूस हुई, जिसके बाद फ्लाइट को सऊदी अरब के ताबुक एयरपोर्ट की ओर मोड़ा गया। फ्लाइट में करीब 174 यात्री और क्रू सदस्य सवार थे और सभी सुरक्षित बच गए।
कुल्हाड़ी से हुआ था हमला
शुरुआती जानकारी में हमले के लिए चाकू के इस्तेमाल की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में UAE अधिकारियों ने बताया कि फर्स्ट ऑफिसर ने विमान में इमरजेंसी के लिए रखी जाने वाली क्रैश एक्स का इस्तेमाल किया था। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के प्रस्ताव में भी इसी हथियार का उल्लेख है। क्रैश एक्स विमान में आपात स्थिति के लिए रखी जाती है। इसका इस्तेमाल आग या अन्य आपात स्थिति में पैनल काटने अथवा फंसे लोगों तक पहुंच बनाने के लिए किया जा सकता है।
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Spain: 87 साल की किराएदार को घर से निकाला तो भड़का स्पेन, हजारों लोग सड़कों पर उतरे, सरकार गिरी

मैड्रिड: स्पेन में एक 87 वर्षीय बुजुर्ग महिला को उसके 71 साल पुराने किराए के घर से निकाले जाने की घटना ने देश के बढ़ते आवास और किराए के संकट को राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। घटना के बाद मैड्रिड समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए और हजारों लोग किराए में बढ़ोतरी तथा बेदखली के खिलाफ सड़कों पर उतर आए।
मामला इतना बढ़ा कि सरकार ने किराएदारों और कमजोर परिवारों को राहत देने के लिए कई आपात आवासीय उपायों का प्रस्ताव रखा। संसद में इन उपायों को लेकर सरकार को समर्थन नहीं मिल सका। इसके बाद प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने तय समय से करीब आठ महीने पहले आम चुनाव कराने का ऐलान कर दिया है। स्पेन में 29 नवंबर 2026 को मतदान होगा।
71 साल पुराने घर से बेदखल हुईं मारिया
मामला 23 सितंबर को सामने आया, जब मारिया डेल कारमेन अबासकल को मैड्रिड के रेटिरो इलाके में स्थित उनके किराए के घर से बेदखल कर दिया गया। वह करीब 71 साल से इस मकान में रह रही थीं। उनके परिवार ने 1950 के दशक से यह घर किराए पर लिया था। 2018 में इमारत का मालिकाना हक एक रियल एस्टेट निवेश कंपनी के पास चला गया। इसके बाद किराए को लेकर विवाद शुरू हुआ।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनका मासिक किराया 500 यूरो से बढ़ाकर 2,650 यूरो करने की कोशिश की गई। बाद में इसे 1,650 यूरो किया गया, लेकिन यह भी मारिया की करीब 1,350 यूरो की मासिक पेंशन से ज्यादा था।
बेदखली रोकने के लिए जुटे प्रदर्शनकारी
23 सितंबर को जब मारिया डेल कारमेन अबासकल को घर से निकालने की कार्रवाई हुई तो बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए बल प्रयोग किया। घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया। प्रदर्शनकारियों ने इसे सिर्फ एक बुजुर्ग महिला की समस्या नहीं, बल्कि महंगे किराए और किफायती मकानों की कमी से जुड़े बड़े संकट का उदाहरण बताया।
सरकार ने आवास संकट पर आपात कदम उठाए
घटना के बाद स्पेन सरकार ने 29 सितंबर को आवास संकट से निपटने के लिए दो रॉयल डिक्री-लॉ मंजूर किए। इनमें कमजोर किराएदारों को बेदखली से बचाने, किफायती आवास बढ़ाने और किराये के बाजार में स्थिरता लाने से जुड़े उपाय शामिल हैं। सरकार ने कुछ मामलों में बेदखली पर सुरक्षा व्यवस्था को 2030 तक बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा।
प्रधानमंत्री सांचेज ने इससे पहले कहा था कि सरकार का लक्ष्य ऐसी स्थिति रोकना है जिसमें कोई बुजुर्ग व्यक्ति लंबे समय तक किराया चुकाने के बावजूद अपने घर से बाहर होने की स्थिति में पहुंच जाए।
अब वापस लौटेंगी 87 वर्षीय अबासकल
इस बीच अबासकल के मामले में एक अहम मोड़ भी आया। मालिक कंपनी के साथ नए समझौते के बाद उन्हें दोबारा उसी घर में लौटने का रास्ता साफ हुआ। नए समझौते के तहत उनका किराया उनकी आय के करीब 30% तक सीमित रहेगा, जो लगभग 500 यूरो बैठता है।
आवास संकट के बीच समय से पहले चुनाव
आवास संकट को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ने के बीच प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने 29 नवंबर 2026 को आम चुनाव कराने की घोषणा की। चुनाव तय कार्यक्रम से करीब आठ महीने पहले होंगे। सरकार को संसद में अपने आवास संबंधी प्रस्तावों के लिए पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया था।
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रूस में लैब कर्मचारी की मौत से हड़कंप, 200 लोग क्वॉरेंटाइन, एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थी मृतक

Russia: रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक 28 वर्षीय लैब कर्मचारी की मौत के बाद करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। महिला इरकुत्स्क क्षेत्र के शेलेखोव स्थित एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थी। उसकी मौत के बाद संभावित संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों ने एहतियाती कदम उठाए हैं। हालांकि, रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि महिला की मौत प्लेग से हुई थी।
25 सितंबर को टेस्ट ट्यूब टूटने की रिपोर्ट
स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, महिला की पहचान दारिया शिपिलोवा के रूप में हुई है। रिपोर्टों में दावा है कि 25 सितंबर को लैब में जीवित जैविक नमूनों के साथ काम करते समय एक टेस्ट ट्यूब टूट गई थी। कुछ रिपोर्टों में नमूने को Yersinia pestis यानी प्लेग पैदा करने वाले बैक्टीरिया से जोड़ा गया है। हालांकि, इस लैब दुर्घटना और महिला के संक्रमण के बीच सीधा संबंध अभी आधिकारिक तौर पर स्थापित नहीं हुआ है। रूसी स्वास्थ्य एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर ने भी लैब में टेस्ट ट्यूब टूटने की बात से इनकार किया है।
29 सितंबर को अस्पताल में भर्ती, वेंटिलेटर पर रखा गया
महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे 29 सितंबर को शेलेखोव के अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसकी हालत गंभीर होने पर वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। उसे गंभीर निमोनिया था, लेकिन बीमारी का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। रिपोर्टों के अनुसार 1 और 2 अक्टूबर की दरमियानी रात उसकी मौत हो गई। रूसी अधिकारियों के अनुसार फिलहाल बीमारी को अज्ञात कारण वाला निमोनिया माना जा रहा है।
करीब 200 लोगों की निगरानी
महिला के संपर्क में आए करीब 200 लोगों की पहचान कर उन्हें मेडिकल निगरानी में रखा गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, निगरानी में रखे गए लोगों में अभी तक बीमारी के लक्षण सामने नहीं आए हैं और शुरुआती टेस्ट निगेटिव बताए गए हैं। कुछ अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं में एहतियाती कदम उठाए जाने की भी खबरें हैं।
प्लेग की पुष्टि नहीं, जांच जारी
इस मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि महिला को आखिर कौन-सा संक्रमण हुआ था। कुछ स्थानीय रिपोर्टों ने इसे न्यूमोनिक प्लेग से जोड़ा है, लेकिन रूसी संघीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। बीमारी के स्रोत और महिला की मौत के कारण की जांच की जा रही है। क्षेत्रीय अधिकारियों ने लोगों से घबराने के बजाय आधिकारिक दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। शेलेखोव की एक एल्युमिनियम फैक्ट्री ने भी एहतियात के तौर पर कर्मचारियों को मास्क पहनने की सलाह दी है।
क्या है न्यूमोनिक प्लेग?
न्यूमोनिक प्लेग, प्लेग का वह रूप है जिसमें संक्रमण फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसका कारण Yersinia pestis बैक्टीरिया है। हालांकि यह गंभीर बीमारी हो सकती है, लेकिन समय पर उचित एंटीबायोटिक उपचार मिलने पर इसका इलाज संभव है। फिलहाल इस मामले में प्लेग की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे संभावित प्लेग संक्रमण के बजाय अज्ञात कारण वाले गंभीर निमोनिया और संदिग्ध लैब एक्सपोजर के मामले के तौर पर रिपोर्ट करना अधिक सटीक है।
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