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यमुना एक्सप्रेस-वे पर बस में लगी आग, 9 की मौत, यात्रियों ने कहा- जलने की गंध के बाद भी ड्राइवर ने बस नहीं रोकी

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेस-वे पर बुधवार देर रात दिल्ली से महोबा जा रही AC स्लीपर बस में भीषण आग लग गई। हादसे में 9 यात्रियों की मौत हो गई। मृतकों में 8 पुरुष और एक महिला शामिल हैं। बस में करीब 30-35 यात्री सवार थे। कई यात्रियों ने खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलकर जान बचाई।
हादसा रात करीब 11:30 बजे एक्सप्रेस-वे के 33वें किलोमीटर के पास, जेवर एयरपोर्ट के नजदीक हुआ। बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा के लिए रवाना हुई थी। आग इतनी तेजी से फैली कि कई यात्री बस के अंदर फंस गए। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
FIR में दावा- जलने की गंध आ रही थी, फिर भी नहीं रोकी बस
हमीरपुर निवासी यात्री सुनील कुमार की शिकायत पर जेवर थाने में FIR दर्ज की गई है। शिकायत के मुताबिक, आग लगने से पहले यात्रियों को ड्राइवर केबिन की तरफ से जलने की गंध आ रही थी। यात्रियों ने ड्राइवर और कंडक्टर को इसकी जानकारी देकर बस रोकने और जांच करने को कहा।
FIR में आरोप है कि दोनों ने यात्रियों की बात को गंभीरता से नहीं लिया और बस चलती रही। शिकायत में यह भी कहा गया है कि ड्राइवर और कंडक्टर केबिन में सिगरेट/बीड़ी पी रहे थे। कुछ देर बाद ड्राइवर सीट के पास अचानक लपटें उठीं और आग तेजी से पूरे बस में फैल गई। इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।
आग फैलते ही मची अफरा-तफरी, यात्रियों ने तोड़े शीशे
आग लगने के बाद बस में धुआं भर गया। यात्रियों ने बाहर निकलने की कोशिश की। कुछ लोग बस की खिड़कियां तोड़कर बाहर निकले, जबकि कई यात्री अंदर फंस गए। एक यात्री ने बताया कि वह सो रहा था, तभी किसी ने उसे जगाकर बस में आग लगने की जानकारी दी। इसके बाद यात्रियों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई और लोग किसी तरह बाहर निकलने लगे।
45 मिनट में बुझी आग, करीब 2 घंटे चला रेस्क्यू
सूचना मिलने के बाद दमकल की 5 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। करीब 45 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। इसके बाद फायरकर्मियों ने बस का पिछला हिस्सा काटकर अंदर प्रवेश किया और एक-एक करके शव बाहर निकाले। रेस्क्यू ऑपरेशन करीब 2 घंटे चला। हादसे के बाद एक्सप्रेस-वे पर यातायात भी प्रभावित हुआ।
AC में स्पार्क या ब्लास्ट से आग लगने की आशंका
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, AC सिस्टम में स्पार्क या ब्लास्ट से इंजन के लुब्रिकेटिंग ऑयल में आग लगने की आशंका है। इसके बाद आग तेजी से बस में फैल गई। हालांकि, आग लगने की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
राज कल्पना ट्रैवल्स की थी बस
पुलिस के मुताबिक, बस राज कल्पना ट्रैवल्स की थी। सरकारी डेटाबेस की जानकारी के अनुसार इस बस पर 19 चालान दर्ज थे और करीब ₹1.75 लाख का जुर्माना लगाया जा चुका था। इनमें परिवहन नियमों से जुड़े उल्लंघन भी शामिल बताए गए हैं।बस का रजिस्ट्रेशन नंबर BR32 PA8647 बताया गया है।
ड्राइवर पवन और कंडक्टर योगेश हिरासत में
हादसे के बाद पुलिस ने बस के ड्राइवर पवन और कंडक्टर योगेश को हिरासत में लिया है। दोनों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी जांच रही है कि आग लगने से पहले यात्रियों की शिकायत पर बस क्यों नहीं रोकी गई और हादसे के समय चालक दल ने क्या कदम उठाए।
मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख की मदद
हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताया और अधिकारियों को घायलों के इलाज तथा पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता देने के निर्देश दिए। मृतकों के परिजनों के लिए ₹2 लाख और घायलों के लिए ₹50 हजार की आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से ₹2 लाख और घायलों के लिए ₹50 हजार की सहायता की घोषणा की है।
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UP News: आजमगढ़ में पत्नी-बेटे और 2 पुजारियों की हत्या, एनकाउंटर में आरोपी ढेर

आजमगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पत्नी और दो पुजारियों की हत्या के बाद बच्चों को बंधक बनाने वाले आरोपी अरविंद सिंह की पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई। करीब 7 घंटे तक चले ऑपरेशन के दौरान पुलिस और ATS-SOG की टीम उसे सरेंडर करने के लिए समझाती रही। इसी दौरान कमरे के अंदर से गोली चलने के बाद सुरक्षाबलों ने कार्रवाई की। पुलिस के मुताबिक, जवाबी फायरिंग में अरविंद घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई।
ऑपरेशन के दौरान अरविंद का करीब 8-10 साल का बेटा शौर्य भी गोली लगने से गंभीर घायल हुआ था। अस्पताल ले जाने के बाद उसकी मौत हो गई। वहीं दोनों बेटियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
पूजा को लेकर पत्नी से हुआ था विवाद
घटना अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव की है। पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, परिवार अरविंद के व्यवहार को लेकर परेशान था। उसके भाई सुनील की मौत के बाद उसकी आत्मा की शांति के लिए घर में धार्मिक अनुष्ठान कराया जा रहा था।
मंगलवार शाम करीब 6 बजे अरविंद घर पहुंचा तो पूजा चल रही थी। पत्नी से इसी बात को लेकर उसका विवाद हुआ। इसके बाद उसने पूजा कराने आए पुजारियों से आधार कार्ड मांगा और कहासुनी करने लगा। विवाद बढ़ने पर उसने लाइसेंसी हथियार से फायरिंग कर दी।
फायरिंग में उसकी पत्नी बबीता और दो पुजारी महेंद्र पाठक (60) और अखिलेश मिश्रा (लगभग 50) की मौत हो गई। घटना के बाद अरविंद तीन बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया।
7 घंटे तक बच्चों को लेकर कमरे में रहा
वारदात की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों और परिजनों ने अरविंद को बच्चों को छोड़ने और सरेंडर करने के लिए समझाने की कोशिश की। करीब सात घंटे तक बातचीत चलती रही, लेकिन वह बाहर आने को तैयार नहीं हुआ। पुलिस के मुताबिक, वह बार-बार पुलिस को पीछे हटने के लिए कह रहा था। इसके बाद कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आई। पुलिस के मुताबिक, अरविंद ने अपने बेटे शौर्य को गोली मार दी। इसके बाद टीम ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया।
स्टन ग्रेनेड और टियर गैस के बाद कमरे में घुसी टीम
पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान स्टन/स्मोक ग्रेनेड और टियर गैस का इस्तेमाल किया गया। टीम ने कमरे में प्रवेश किया तो अरविंद ने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग की। पुलिस के अनुसार जवाबी कार्रवाई में अरविंद को गोली लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
दो बेटियां सुरक्षित निकाली गईं
ऑपरेशन के बाद अरविंद की दोनों बेटियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों को उनकी दादी के साथ रखा गया है। घर के आसपास पुलिस बल तैनात रहा और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए।
8 साल पुरानी भाई की हत्या से जुड़ा था पारिवारिक विवाद
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, अरविंद के भाई सुनील की करीब 8 साल पहले गोली मारकर हत्या हुई थी। इस हत्या के पीछे पारिवारिक विवाद की बात सामने आई थी। जानकारी के अनुसार, अरविंद और सुनील के चचेरे भाई मनीष से अरविंद की पत्नी बबीता के कथित तौर पर अवैध संबंध की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि इसकी जानकारी होने पर सुनील ने मनीष के खिलाफ चोरी और छेड़छाड़ से संबंधित शिकायत की थी। इसके बाद सुनील की हत्या कर दी गई थी। मामले में मनीष और उसके भाई अविनाश के नाम सामने आए थे।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि अरविंद अपने भाई की मौत के लिए पत्नी को जिम्मेदार मानकर मानसिक रूप से परेशान रहता था और उसे लगता था कि उसके भाई की आत्मा उसे परेशान कर रही है। इसी वजह से घर में महामृत्युंजय जाप कराया जा रहा था। मंगलवार शाम इसी धार्मिक अनुष्ठान को लेकर पत्नी से उसका विवाद हुआ था।
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यूपी में 34 IAS अफसरों के तबादले, 14 जिलों के DM बदले, 5 मौजूदा DM को दूसरे जिलों की कमान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 34 IAS अफसरों के तबादले किए। इनमें 14 जिलों के जिलाधिकारी शामिल हैं। तबादले के तहत 5 मौजूदा जिलाधिकारियों को दूसरे जिलों की कमान सौंपी गई है, जबकि 9 अफसरों को शासन और अन्य विभागों से हटाकर जिलों में डीएम की जिम्मेदारी दी गई है। नई तैनातियों में मुरादाबाद, हरदोई, कुशीनगर, कानपुर नगर, पीलीभीत, बलिया, एटा, संतकबीर नगर, अमेठी, बागपत, महोबा, हाथरस, हमीरपुर और बिजनौर शामिल हैं।
इन 5 IAS अफसरों को फिर जिला मिला
सरकार ने पांच ऐसे IAS अधिकारियों को दूसरे जिलों में जिलाधिकारी बनाकर भेजा है, जो पहले से ही डीएम के पद पर तैनात थे।
- अनुनय झा — हरदोई के डीएम से अब मुरादाबाद के डीएम बनाए गए।
- संजय चौहान — अमेठी के डीएम से अब कुशीनगर के डीएम बनाए गए।
- महेंद्र सिंह तंवर — कुशीनगर के डीएम से अब कानपुर नगर के डीएम बनाए गए।
- आलोक कुमार — संतकबीर नगर के डीएम से अब पीलीभीत के डीएम बनाए गए।
- ज्ञानेंद्र सिंह — पीलीभीत के डीएम से अब बलिया के डीएम बनाए गए।
इन 9 अफसरों को फील्ड में तैनाती
सरकार ने 9 IAS अधिकारियों को शासन, विकास प्राधिकरण और अन्य विभागों से हटाकर जिलों में जिलाधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी है।
- राहुल पांडेय — विशेष सचिव, राज्य कर विभाग से हरदोई के डीएम।
- एम. अरुन्मोली — उपाध्यक्ष, आगरा विकास प्राधिकरण से एटा की डीएम।
- अनुज मलिक — CEO, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण से संतकबीर नगर की डीएम।
- शशांक चौधरी — ACEO, इन्वेस्ट यूपी से अमेठी के डीएम।
- दिव्यांशु पटेल — नगर आयुक्त, मुरादाबाद नगर निगम से बागपत के डीएम।
- प्रभास कुमार — विशेष सचिव, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति विभाग से महोबा के डीएम।
- सत्य प्रकाश पटेल — विशेष सचिव, नगर विकास विभाग से हाथरस के डीएम।
- अशोक कुमार — विशेष सचिव, सिंचाई विभाग से हमीरपुर के डीएम।
- उमेश प्रताप सिंह — विशेष सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग से बिजनौर के डीएम।
दिव्यांशु पटेल को पहली बार मिली जिले की कमान
इस तबादला सूची में दिव्यांशु पटेल की पोस्टिंग खास मानी जा रही है। वह अभी मुरादाबाद नगर निगम के नगर आयुक्त थे। सरकार ने उन्हें पहली बार जिले की कमान देते हुए बागपत का जिलाधिकारी बनाया है। बागपत की डीएम अस्मिता लाल को हटाकर विशेष सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
मुरादाबाद डीएम राजेंद्र पैंसिया की भी बदली तैनाती
मुरादाबाद के डीएम राजेंद्र पैंसिया को भी हटाया गया है। उन्हें विशेष सचिव, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी जगह हरदोई के डीएम अनुनय झा को मुरादाबाद का नया जिलाधिकारी बनाया गया है।
जसजीत कौर बनीं यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन की MD
बिजनौर की डीएम जसजीत कौर को हटाकर उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन का प्रबंध निदेशक बनाया गया है। वह 2012 बैच की यूपी कैडर की IAS अधिकारी हैं। वह शामली और सुल्तानपुर की डीएम रह चुकी हैं। इसके अलावा मेरठ में अपर आयुक्त के पद पर भी काम कर चुकी हैं।
ज्ञानेंद्र सिंह को बलिया की जिम्मेदारी
पीलीभीत के डीएम ज्ञानेंद्र सिंह को अब बलिया का नया जिलाधिकारी बनाया गया है। वह पीलीभीत में अपने कार्यकाल के दौरान ईंधन बचत की मुहिम को लेकर चर्चा में रहे थे। ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान ईंधन बचाने की अपील के बीच उन्होंने भी पहल की थी। उन्होंने अपनी सुरक्षा में लगा एस्कॉर्ट वाहन हटवा दिया था। इसके अलावा ऑफिसर्स कॉलोनी में रहने वाले अधिकारियों को कलेक्ट्रेट तक पैदल आने के निर्देश दिए थे। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से ईंधन बचाने की अपील के बाद उठाया गया था।
इन जिलों में बदले गए जिलाधिकारी
| जिला | नए जिलाधिकारी |
|---|---|
| मुरादाबाद | अनुनय झा |
| हरदोई | राहुल पांडेय |
| कुशीनगर | संजय चौहान |
| कानपुर नगर | महेंद्र सिंह तंवर |
| पीलीभीत | आलोक कुमार |
| बलिया | ज्ञानेंद्र सिंह |
| एटा | एम. अरुन्मोली |
| संतकबीर नगर | अनुज मलिक |
| अमेठी | शशांक चौधरी |
| बागपत | दिव्यांशु पटेल |
| महोबा | प्रभास कुमार |
| हाथरस | सत्य प्रकाश पटेल |
| हमीरपुर | अशोक कुमार |
| बिजनौर | उमेश प्रताप सिंह |
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UP Police में 912 युवाओं को नियुक्ति, योगी बोले- पहले बिना आवेदन के भी मिल जाती थी नौकरी; अगले 6 महीने में 1 लाख नियुक्तियां देंगे

लखनऊ: लोकभवन में रविवार को उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग के 912 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चयनित युवाओं को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और मेरिट को प्राथमिकता दी गई है। कार्यक्रम में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना समेत पुलिस और शासन के अधिकारी मौजूद रहे।
इन नियुक्तियों में पुलिस उपनिरीक्षक (गोपनीय), सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) और सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के पद शामिल हैं। चयन प्रक्रिया उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के तहत पूरी की गई।
योगी बोले- पहले भर्ती में भाई-भतीजावाद के आरोप लगते थे
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि 2017 से पहले भर्ती प्रक्रिया को लेकर युवाओं में निराशा थी। उन्होंने दावा किया कि उस समय कई भर्तियों में भाई-भतीजावाद और अनियमितताओं की शिकायतें सामने आती थीं। योगी ने कहा कि कुछ मामलों में ऐसे लोगों को भी नियुक्ति मिल जाती थी, जिन्होंने भर्ती के लिए आवेदन तक नहीं किया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने ग्रुप-सी और ग्रुप-डी की भर्तियों में इंटरव्यू व्यवस्था खत्म की और चयन प्रक्रिया को बदलने का काम किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पद और मानवबल वही हैं, लेकिन काम करने के तरीके में बदलाव आया है।
कानून-व्यवस्था पर बोले- अब अपराधी परिणाम के बारे में सोचता है
योगी ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि पहले कई जगह दंगे और लंबे समय तक कर्फ्यू की स्थिति रहती थी। उन्होंने दावा किया कि अब स्थिति बदली है और यूपी पुलिस के कामकाज के मॉडल की दूसरे राज्यों में भी चर्चा होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले माफिया का प्रभाव इतना था कि उनके काफिले के गुजरने के दौरान न्यायिक अधिकारियों तक के काफिले रोके जाते थे। उन्होंने कहा कि आज अपराध करने वाले को कार्रवाई के परिणाम का अंदाजा रहता है।
महिलाओं की सुरक्षा का जिक्र करते हुए योगी ने कहा कि छेड़खानी जैसी घटनाओं में शामिल होने वालों को कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। उन्होंने अपने संबोधन में अपराध करने वाले व्यक्ति के लिए ‘डेथ सेंटेंस पर खुद साइन करने’ वाली टिप्पणी भी की।
महाकुंभ का उदाहरण देकर व्यवस्था में बदलाव का दावा
मुख्यमंत्री ने प्रयागराज महाकुंभ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में करीब 66 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे और व्यवस्था को लेकर लोगों की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही। यह आंकड़ा 2025 के प्रयागराज महाकुंभ के आधिकारिक आंकड़ों से भी मेल खाता है। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में दंगों और कर्फ्यू की स्थिति को लेकर चर्चा होती थी, जबकि अब पुलिस व्यवस्था और बड़े आयोजनों की सुरक्षा को लेकर अलग तरह की चर्चा हो रही है।
पुलिस ट्रेनिंग की क्षमता 60 हजार तक पहुंचने का दावा
योगी ने कहा कि प्रदेश में पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण की क्षमता बढ़कर 60 हजार कर्मियों तक हो गई है। उन्होंने महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 44 हजार से अधिक होने का भी दावा किया। उन्होंने पुलिस की जमीन पर कथित कब्जे का एक प्रसंग भी सुनाया। मुख्यमंत्री के मुताबिक, फोरेंसिक संस्थान के लिए जमीन तलाशने के दौरान तत्कालीन डीजीपी ने बताया था कि पुलिस की जमीन पर माफिया का कब्जा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में FIR दर्ज की गई और संबंधित व्यक्ति ने बाद में आत्मसमर्पण कर दिया। मुख्यमंत्री ने पुलिस बैरकों के निर्माण, पुलिस लाइनों के विस्तार और PAC की क्षमता बढ़ाने का भी उल्लेख किया।
अगले 6 महीने में 1 लाख नियुक्तियों का ऐलान
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने का अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि पुलिस-होमगार्ड में करीब 77 हजार भर्तियों की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा UPSSSC और शिक्षा चयन आयोग के माध्यम से भी हजारों पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक करीब 9.50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि नियुक्ति पत्र वितरण के कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे।
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Jhansi: परवेज अली हत्याकांड का खुलासा, ड्रग्स की रकम वसूलने के लिए किया था अपहरण, सिपाही समेत 8 गिरफ्तार

झांसी: बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बीए एलएलबी अंतिम वर्ष के छात्र परवेज अली की मौत के मामले का पुलिस ने वारदात के पांच दिन बाद खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, ड्रग्स तस्करी से जुड़ी रकम की वसूली के लिए परवेज को बुलाकर कार में बैठाया गया और उसके साथ मारपीट की गई। हालत बिगड़ने पर आरोपी उसे नगरा हाट मैदान में छोड़कर फरार हो गए। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने प्रेमनगर थाने में तैनात सिपाही आशीष सिंह समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सिपाही को निलंबित कर दिया है। मामले में तीन अन्य आरोपी अभी फरार हैं।
150 से ज्यादा कैमरों की फुटेज और कॉल डिटेल खंगाली
एसएसपी विकास कुमार के मुताबिक, रविवार रात परवेज नगरा हाट मैदान में घायल हालत में मिला था। उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। शरीर पर चोट के निशान और जांघ पर दांत से काटने का निशान मिला था। घटना की जांच में पुलिस ने चार दिनों तक सुकुवां-ढुकुवां से नगरा हाट तक 150 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले। इसके आधार पर पुलिस ने सात आरोपियों को पकड़ा। पूछताछ के बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल तीन कार और सात मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
सैंपल लेने के बहाने बुलाया, कार में बैठाकर ले गए
पुलिस के अनुसार, परवेज आरोपियों को पहले से जानता था। साहिल मिश्रा ने उसे ड्रग्स के सैंपल लेने के बहाने बुलाया। इसके बाद सुकुवां-ढुकुवां कॉलोनी के बाहर से उसे लाल रंग की कार में बैठा लिया गया। दो अन्य कारों में भी आरोपी पीछे-पीछे चल रहे थे। पुलिस का कहना है कि परवेज उस समय नशे में था। रास्ते में उसे शक हुआ तो उसने कार में विरोध और शोर करना शुरू कर दिया। आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने उसे काबू करने के लिए मारपीट की।तबीयत बिगड़ने पर आरोपी उसे नगरा हाट मैदान में छोड़कर भाग गए।
पूछताछ में सामने आया सिपाही का नाम
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान प्रेमनगर थाने में तैनात सिपाही आशीष सिंह का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। आशीष मूल रूप से बांदा के तिंदवारी रोड का रहने वाला बताया गया है। पुलिस का दावा है कि आशीष घटना के समय आरोपियों के साथ मौजूद था और कथित साजिश में शामिल था। गिरफ्तारी के बाद विभाग ने उसे निलंबित कर दिया है।
साहिल के फोन से 5 हजार रुपए के लेन-देन का सबूत
जांच में पुलिस को आरोपियों के मोबाइल से डिजिटल सबूत मिले हैं। पुलिस के अनुसार, साहिल मिश्रा के फोन में परवेज को किए गए 5 हजार रुपए के भुगतान से संबंधित साक्ष्य मिले हैं। CCTV फुटेज में भी परवेज को साहिल की कार में बैठते देखा गया है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों की आपराधिक पृष्ठभूमि की भी जांच कर रही है। पुलिस के मुताबिक, प्रयांश सोनी के खिलाफ पहले भी ड्रग्स से जुड़े मामले दर्ज हो चुके हैं।
कार में बनाया था ढाई मिनट का वीडियो
पुलिस की जांच में एक और अहम बात सामने आई है। आरोपियों ने परवेज को कार में ले जाने के दौरान उसका करीब दो से ढाई मिनट का वीडियो बनाया था। पुलिस के मुताबिक, वीडियो बनाए जाने पर परवेज ने आपत्ति जताई थी। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ने और मारपीट की बात सामने आई है। आरोपियों ने बाद में वीडियो मोबाइल से डिलीट कर दिया था। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल जब्त कर लिए हैं और अब डिलीट वीडियो को रिकवर करने की कोशिश की जा रही है। जांच एजेंसियों के लिए यह वीडियो अहम डिजिटल सबूत हो सकता है।
तीन आरोपी अभी फरार
पुलिस ने मामले में सिपाही समेत आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन वांछित आरोपी अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं। गिरफ्तार सभी आरोपियों को शुक्रवार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
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UP News: पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ा, अब 9 हजार रुपए; प्रधान-सचिव नहीं हटा सकेंगे

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत सहायकों के आंदोलन के बीच योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पंचायत सहायकों का मासिक मानदेय 6 हजार से बढ़ाकर 9 हजार रुपए करने का ऐलान किया गया है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को लखनऊ में इसकी जानकारी दी। इस फैसले से प्रदेश के 57 हजार से ज्यादा पंचायत सहायकों को फायदा मिलेगा।
सरकार ने केवल मानदेय बढ़ाने का फैसला नहीं किया है, बल्कि पंचायत सहायकों की सेवा सुरक्षा, भुगतान व्यवस्था और आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को लेकर भी राहत का ऐलान किया है।
प्रधान या सचिव मनमाने तरीके से नहीं हटा सकेंगे
अब किसी पंचायत सहायक को ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव अपनी मर्जी से सेवा से हटाने की प्रक्रिया नहीं कर सकेंगे। सेवा समाप्त करने से पहले जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी जांच करेगी। जांच के बाद ही सेवा समाप्ति पर फैसला लिया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य पंचायत सहायकों को स्थानीय स्तर पर मनमाने तरीके से हटाए जाने से सुरक्षा देना है।
मानदेय सीधे बैंक खाते में भेजने की तैयारी
अभी पंचायत सहायकों के मानदेय के भुगतान की व्यवस्था राज्य वित्त आयोग से जुड़ी है। सरकार ने अब इसे DBT के जरिए सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था करने की बात कही है। इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी के बाद व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे भुगतान के लिए ग्राम प्रधान या पंचायत स्तर की मध्यस्थ प्रक्रिया खत्म करने की दिशा में कदम उठेगा।
आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस होंगे
राजभर ने कहा कि आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। आंदोलन के दौरान कार्रवाई के चलते जिन सहायकों को सेवा से हटाया गया है, उनकी बहाली की भी बात कही गई है।
पंचायत सहायकों की 5 प्रमुख मांगें
पंचायत सहायकों की ओर से मानदेय बढ़ाने और सेवा सुरक्षा समेत कई मांगें रखी गई थीं। सरकार के ताजा ऐलान के बाद इनका स्वरूप इस तरह है-
1. मानदेय बढ़ाने की मांग: पंचायत सहायकों की ओर से मानदेय को 20 से 25 हजार रुपए तक करने की मांग थी। सरकार ने फिलहाल इसे बढ़ाकर 9 हजार रुपए किया है।
2. नियमितीकरण की मांग: संविदा व्यवस्था खत्म कर स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
3. सीधे बैंक खाते में भुगतान: सरकार ने DBT के जरिए सीधे खाते में मानदेय भेजने की व्यवस्था की घोषणा की है। इसके लिए कैबिनेट प्रक्रिया पूरी की जानी है।
4. सेवा सुरक्षा: अब सेवा समाप्त करने से पहले जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी से जांच कराने की व्यवस्था की जाएगी।
5. आंदोलन से जुड़े मुकदमे: धरना-प्रदर्शन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लेने और कार्रवाई में हटाए गए सहायकों की बहाली का ऐलान किया गया है।
57 हजार से ज्यादा पंचायत सहायकों को मिलेगा फायदा
सरकार के मुताबिक प्रदेश में 57 हजार से अधिक पंचायत सहायक कार्यरत हैं। इनके मानदेय में ₹3,000 की बढ़ोतरी के बाद अब हर महीने ₹9,000 का मानदेय तय किया गया है। यह मौजूदा ₹6,000 की तुलना में 50% की वृद्धि है।













