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UP News: यूपी STF के साथ मुठभेड़ में गैंगस्टर अनिल दुजाना ढेर, दुजाना के नाम दर्ज थे 60 से अधिक मुकदमे

UP News: उत्तरप्रदेश में एसटीएफ (UP STF) ने आज एक और कुख्यात गैंगस्टर अनिल दुजाना (Anil Dujana Encounter) उर्फ अनिल नागर को मिट्टी में मिला दिया। मेरठ में हुए इस एनकाउंटर में मारे गए अनिल दुजाना पर यूपी समेत अन्य राज्यों में 18 हत्या समेत लूट, रंगदारी, अपहरण, फिरौती के 60 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। दुजाना को मिलाकर यूपी एसटीएफ पिछले 6 साल में 184 एनकाउंटर कर चुकी है। अनिल दुजाना तीन साल से अयोध्या जेल में बंद था और जमानत मिलने के बाद से ही फरार चल रहा था। बताया जा रहा है कि एसटीएफ के साथ एनकाउंटर के समय सफेद स्कॉर्पियो गाड़ी में सवार होकर अनिल दुजाना बागपत से मुजफ्फरनगर साथियों से मिलने जा रहा था। इसी दौरान मुखबिर की सूचना पर भोला की झाल के पास एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
https://twitter.com/uppstf/status/1654155658558599168?s=20
https://twitter.com/AHindinews/status/1654083828078743553?s=20
प्रदेश सरकार की 66 गैंगस्टर की लिस्ट में शामिल था दुजाना
यूपी सरकार ने हाल ही में उत्तरप्रदेश के 66 गैंगस्टर की लिस्ट जारी की थी, उसमें सात गौतमबुद्धनगर के थे। इसमें सुंदर भाटी, अनिल दुजाना, रणदीप भाटी, सिंहराज भाटी, अनिल कसाना, अनिल भाटी व मनोज उर्फ आसे का नाम शामिल था। सात में से एक गैंगस्टर अनिल दुजाना का आज अंत हो गया।
https://twitter.com/ANINewsUP/status/1654088867648278533?s=20
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UP News: कानपुर में करोड़पति दवा कारोबारी की हत्या, बहू पर 6 लाख की सुपारी देने का आरोप, पुराने नौकर से कराई हत्या

कानपुर: शहर के पॉश रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में 63 वर्षीय दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या के मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, कारोबारी की बहू शालू को हत्या की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि ससुर की रोक-टोक और खर्चों पर नियंत्रण से नाराज शालू ने पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को हत्या के लिए तैयार किया।
6 लाख रुपए में हत्या की सुपारी देने का आरोप
पुलिस जांच के अनुसार हत्या की कथित सुपारी 6 लाख रुपए में तय हुई थी। शालू पर आरोप है कि उसने ऐसे समय वारदात की योजना बनाई, जब वह पति सुब्रत और बच्चे के साथ पार्टी के लिए घर से बाहर थी। जांच में यह भी सामने आया कि वारदात से पहले शालू और विशाल के बीच कई बार फोन पर बातचीत हुई थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हत्या वाली रात दोनों के बीच 14 बार संपर्क हुआ। पुलिस ने कॉल डिटेल, CCTV फुटेज और अपार्टमेंट के सुरक्षा गार्ड के बयान को जांच की अहम कड़ी माना है।
CCTV में फ्लैट में जाते दिखे थे दो आरोपी
पुलिस को अपार्टमेंट के CCTV फुटेज में दो संदिग्ध फ्लैट की ओर जाते और बाद में बाहर निकलते दिखाई दिए। इनमें पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम की पहचान हुई। पुलिस के अनुसार, विशाल पहले विनीत के यहां काम कर चुका था।रविवार देर रात पुलिस ने विशाल और राजकिशोर को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। दोनों के पैर में गोली लगने की बात सामने आई है। पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर शालू के कहने पर हत्या करने की जानकारी दी, जिसके बाद जांच की दिशा परिवार के भीतर पहुंच गई।
गार्ड के बयान से भी पुलिस को मिला सुराग
अपार्टमेंट के सुरक्षा गार्ड के मुताबिक, दोनों संदिग्धों के आने पर उन्हें फ्लैट में जाने की अनुमति नहीं मिल रही थी। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर शालू से फोन पर बात की और शालू ने उन्हें अंदर आने देने को कहा। कुछ देर बाद शालू अपने पति और बच्चे के साथ अपार्टमेंट से निकल गई। उस समय विनीत मिनोचा फ्लैट में अकेले थे। पुलिस ने इसी घटनाक्रम को जांच की महत्वपूर्ण कड़ी माना।
26 चाकू के वार से हुई थी हत्या
पुलिस के मुताबिक, विनीत मिनोचा पर चाकू से कई वार किए गए। पोस्टमॉर्टम से 26 घाव सामने आने की बात रिपोर्टों में कही गई है। हमलावरों ने घर से सामान चोरी नहीं किया, जिससे शुरुआत से ही पुलिस को मामला लूट के बजाय किसी सुनियोजित हत्या का लगा।
खर्च और रोक-टोक को लेकर नाराजगी का दावा
पूछताछ में शालू ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि करोड़ों के कारोबार वाले परिवार में होने के बावजूद उसके और पति के खर्च पर ससुर का नियंत्रण था। छोटे खर्चों के लिए भी उन्हें उनसे पैसे मांगने पड़ते थे। पुलिस के सामने कथित तौर पर यह भी आया कि 28 जुलाई को देर रात पार्टी से लौटने को लेकर शालू और विनीत के बीच विवाद हुआ था। इसी के बाद हत्या की योजना बनाने का आरोप है।
पति सुब्रत की भूमिका की पुष्टि नहीं
पुलिस की शुरुआती जांच में फिलहाल शालू के पति सुब्रत की भूमिका सामने नहीं आने की बात रिपोर्टों में कही गई है। पुलिस ने फिलहाल शालू और दोनों कथित हमलावरों की भूमिका पर जांच केंद्रित की है। विनीत मिनोचा बिरहाना रोड पर फार्मा ट्रेडर्स नाम से दवा कारोबार चलाते थे और उन्हें कानपुर के प्रमुख दवा कारोबारियों में गिना जाता था। पुलिस अब हत्या की पूरी साजिश, पैसों के लेन-देन और सभी आरोपियों की भूमिका की जांच कर रही है।
ऐसे खुली हत्या की पूरी कहानी
शनिवार रात परिवार के घर से निकलने के बाद दो संदिग्ध फ्लैट में पहुंचे। विनीत के लौटने के बाद उन पर हमला किया गया। इसके बाद आरोपी फरार हो गए। रविवार तड़के जब बेटा-बहू वापस लौटे तो विनीत का शव बेडरूम में मिला। पुलिस ने CCTV खंगाले, संदिग्धों की पहचान की और दोनों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में कथित तौर पर मिली जानकारी, कॉल डिटेल और गार्ड के बयान के आधार पर बहू की भूमिका भी जांच के घेरे में आई।
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Chitrakoot Flood: चित्रकूट में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM योगी: 800 परिवारों को राहत किट बांटी; बोले- जिनके घर बहे, उन्हें मिलेगा पक्का मकान

चित्रकूट: उत्तर प्रदेश में बाढ़ के बिगड़ते हालात के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को चित्रकूट पहुंचे। उन्होंने मंदाकिनी नदी के उफान से प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया और रामघाट पहुंचकर बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लिया। इसके बाद रैन बसेरे में बनाए गए राहत शिविर में पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
मुख्यमंत्री ने रामायण मेला परिसर में करीब 800 प्रभावित परिवारों को राहत किट वितरित की। बाढ़ में आश्रयहीन हुए परिवारों को राहत राशि और आवास के लिए भूमि आवंटन प्रमाणपत्र भी दिए गए।
रामघाट में नुकसान देखा, अधिकारियों को दिए निर्देश
योगी आदित्यनाथ ने रामघाट क्षेत्र में बाढ़ से हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने घाट, दुकानों, मकानों और मठ-मंदिरों की स्थिति देखी। इस दौरान बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त तुलसीदास की प्रतिमा को भी देखा और उसके संरक्षण व जीर्णोद्धार के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली।
मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ से चित्रकूट के 36 गांव प्रभावित बताए जा रहे हैं। कई घरों और फसलों को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान जारी है।
मंच पर फोटो खिंचवाने पहुंचे नेताओं को पीछे हटाया
राहत सामग्री वितरण के दौरान मंच पर मौजूद कुछ नेता मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचवाने की कोशिश करने लगे। इससे योगी नाराज हो गए। उन्होंने इशारे से नेताओं को पीछे जाने को कहा, ताकि राहत लेने आए लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
रामघाट निरीक्षण के दौरान जब सुरक्षा में तैनात जवान लोगों को पीछे हटाने लगा तो मुख्यमंत्री ने उसे भी रोकते हुए कहा कि लोगों को अपनी बात कहने दिया जाए। मुख्यमंत्री ने बाढ़ पीड़ितों की समस्याएं सीधे सुनने पर जोर दिया।
‘जिनके घर बह गए, उन्हें मिलेगा मकान’
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि आपदा की इस घड़ी में सरकार उनके साथ है। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त या बह गए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मकान उपलब्ध कराया जाएगा। जिन जरूरतमंद परिवारों के पास रहने के लिए जमीन नहीं है, उन्हें आवासीय पट्टा देने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही। फसल और अन्य नुकसान का सर्वे कराकर पात्र लोगों को नियमानुसार सहायता देने के निर्देश दिए गए हैं।
यूपी के दो दर्जन से ज्यादा जिले बाढ़ से प्रभावित
भारी बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर से उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। आकाशवाणी की 6 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 24 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। इससे पहले 4 सितंबर को 26 जिलों के प्रभावित होने की सूचना थी।
वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या और अन्य जिलों में भी बाढ़ का असर देखा जा रहा है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण वाराणसी के कई घाटों और निचले इलाकों में पानी पहुंचा है। प्रयागराज में भी घाट और शवदाह स्थलों पर बाढ़ का असर पड़ा है।
वाराणसी के बाद चित्रकूट पहुंचे योगी
इससे एक दिन पहले शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया था और राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने बाढ़ में डूबी फसलों का सर्वे कर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के निर्देश भी दिए हैं।
चित्रकूट दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशासन से राहत-बचाव कार्यों की जानकारी ली और प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए। फिलहाल प्रशासन का फोकस प्रभावित परिवारों को सुरक्षित रखने और राहत सामग्री पहुंचाने पर है।
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UP News: सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, कोर्ट का आदेश बरकरार रहने के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई; सपा सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। प्रशासन के मुताबिक सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा मानते हुए हटाने का आदेश दिया था। मस्जिद पक्ष की अपील जिला जज की अदालत से भी खारिज होने के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की।
ध्वस्तीकरण के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के पांचों गेट बंद कर दिए गए और बाहरी लोगों की आवाजाही रोक दी गई। मौके पर पुलिस के साथ आरएएफ और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात रहा। कार्रवाई के बाद इलाके में राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ गई है।
2 सितंबर को जिला जज ने खारिज की थी अपील
मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत शिकायत के बाद हुई थी। इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत अधिभोगियों की बेदखली) अधिनियम के तहत मामला चला। 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़ा निर्माण मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था। आदेश में करीब 6.41 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की गई थी।
मस्जिद पक्ष ने इस आदेश को जिला जज की अदालत में चुनौती दी। कई तारीखों पर सुनवाई के बाद 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
प्रशासन बोला- कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कार्रवाई
सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह के मुताबिक नोटिस और अपील समेत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण किया गया। प्रशासन ने संवेदनशील स्थिति को देखते हुए पहले से सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। त्योहारों के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पीएसी और आरएएफ की तैनाती की गई थी। मिश्रित आबादी वाले इलाकों में फुट पेट्रोलिंग और फ्लैग मार्च भी किया गया। अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सपा सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बीच कैराना से सपा सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट किए जाने की खबर सामने आई। वह सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया।
इमरान मसूद भी बोले- कानूनी लड़ाई आगे ले जाएंगे
मामले पर सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत विपक्षी नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। ध्वस्तीकरण के बाद मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक मसूद ने इस मामले को आगे अदालत में चुनौती देने की बात कही है।
मायावती ने कार्रवाई रोकने की मांग की
बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी सहारनपुर की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को अवैध बताकर गिराए जाने के कथित सरकारी अभियान पर सवाल उठाते हुए ऐसी कार्रवाई रोकने और विवादों का समाधान निकालने की मांग की है। मामले को लेकर प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों पर रोक लगाने के लिए निगरानी बढ़ा दी है।
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UP News: मायावती ने आकाश आनंद को फिर हटाया, राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी छीनी, बोलीं- अभी राजनीतिक रूप से और परिपक्व होने की जरूरत

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को एक बार फिर पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी से हटा दिया है। गुरुवार को लखनऊ में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मायावती ने स्पष्ट किया कि आकाश आनंद फिलहाल पार्टी में काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें कोई बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
मायावती ने इसकी वजह आकाश का अभी राजनीतिक रूप से पूरी तरह परिपक्व नहीं होना बताया। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक हैं और ऐसे समय में पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को देना उचित नहीं होगा, जिसे अभी राजनीतिक परिस्थितियों और विरोधियों की रणनीतियों से निपटने के लिए और अनुभव की जरूरत है।
3 साल में तीसरी बार बदली आकाश की भूमिका
आकाश आनंद के राजनीतिक सफर में यह तीसरा मौका है, जब मायावती ने उन्हें बड़ी जिम्मेदारी से हटाया है। इससे पहले भी उन्हें पार्टी की अहम जिम्मेदारियों से हटाया गया था और बाद में दोबारा संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई थी। अगस्त 2025 में उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी मिली थी। इस बार मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाकर फिलहाल पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर काम करने की बात कही है।
मायावती बोलीं- कांशीराम के विचारों पर कायम हूं
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मायावती ने परिवारवाद और पार्टी में रिश्तेदारों की भूमिका को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि कांशीराम परिवार और रिश्तेदारों को पार्टी के काम में सहयोग करने की अनुमति देते थे, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने या सरकार बनने पर पद देने के पक्ष में नहीं थे।
मायावती ने कहा कि वह भी इसी विचार पर कायम हैं। उनका कहना था कि बसपा का लक्ष्य शोषित और वंचित समाज को सत्ता में भागीदारी दिलाना है और इस उद्देश्य में उनके लिए कोई अपना या पराया नहीं है।
आकाश बैठक में नहीं पहुंचे, छोटे भाई ईशान की पहली मौजूदगी
लखनऊ में हुई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में देशभर से करीब 350 पदाधिकारी पहुंचे। खास बात यह रही कि आकाश आनंद बैठक में नजर नहीं आए, जबकि उनके छोटे भाई ईशान आनंद पहली बार पार्टी के इस आधिकारिक मंच पर दिखाई दिए। ईशान बसपा का पटका पहनकर अपने पिता आनंद कुमार के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे।
मायावती के बैठक के लिए बैठने तक ईशान अपने पिता के साथ खड़े रहे। इससे पहले 2024 में मायावती के जन्मदिन के मौके पर भी ईशान अपने भाई आकाश के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे थे।
युकेश सिंह भी बैठक में पहुंचे
बसपा के दिवंगत विधायक उमाशंकर सिंह के बेटे युकेश सिंह भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल हुए। मायावती ने कुछ दिन पहले ही युकेश को पार्टी के राजनीतिक मंच पर आगे बढ़ाया था। इसके बाद उनकी भूमिका को लेकर भी पार्टी के भीतर चर्चा तेज है।
5 राज्यों के चुनाव की रणनीति पर मंथन
बैठक में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारियों पर भी चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश के अलावा उत्तराखंड और पंजाब समेत पांच राज्यों में होने वाले चुनावों को देखते हुए संगठन को मजबूत करने और पार्टी की चुनावी रणनीति पर पदाधिकारियों के साथ मंथन किया गया।
मायावती ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले चुनावों में बसपा अपने दम पर चुनाव लड़ने की रणनीति पर आगे बढ़ेगी। पार्टी का फोकस संगठन को मजबूत करने और अपने वोट बैंक को दोबारा सक्रिय करने पर है।
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Ayodhya: राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO बने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, ऑपरेशन सिंदूर में संभाली थी वेस्टर्न एयर कमांड की कमान

अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के प्रशासन को नए ढांचे में ले जाने की दिशा में बड़ा फैसला किया है। ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। वह उत्तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले हैं।
बुधवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में तीन नए ट्रस्टियों के नामों पर भी मुहर लगी। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। निर्मला यादव की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट में पहली बार किसी महिला को जगह मिली है।
पूर्व एयर मार्शल को मिली मंदिर के प्रशासन की कमान
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी अधिकारी रहे हैं। उन्होंने पश्चिमी वायु कमान की जिम्मेदारी संभाली है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी वे इस सैन्य अभियान से जुड़े अनुभवों को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखते रहे हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी ने लंबी प्रक्रिया के बाद तीन नामों का पैनल तैयार किया था। इस पद के लिए हजारों आवेदन आए थे और कई चरणों की स्क्रीनिंग के बाद उम्मीदवारों के इंटरव्यू किए गए थे।
तीन नए ट्रस्टी कौन हैं?
महेश भागचंदका: दिल्ली के रहने वाले महेश भागचंदका को ट्रस्ट में शामिल किया गया है। वे विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल के रिश्तेदार बताए जाते हैं। 2020 में राम मंदिर के भूमि पूजन और 2024 की प्राण-प्रतिष्ठा के धार्मिक अनुष्ठानों में भी उनकी भूमिका रही थी।
मदन मोहन पांडेय: अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय को भी ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया है। वह लंबे समय से राम जन्मभूमि से जुड़े कानूनी मामलों से जुड़े रहे हैं।
निर्मला यादव: शिकोहाबाद की निर्मला यादव को ट्रस्टी बनाया गया है। उनकी नियुक्ति को खास इसलिए माना जा रहा है क्योंकि ट्रस्ट के गठन के बाद पहली बार किसी महिला को इसमें शामिल किया गया है।
चढ़ावा चोरी के बाद ट्रस्ट में लगातार हो रहे बदलाव
राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट में प्रशासनिक बदलाव तेज हुए हैं। इसी क्रम में जुलाई में तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए थे। इसके बाद रिटायर्ड IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी।चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था और वित्तीय निगरानी को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
पहली बार CEO की नियुक्ति क्यों अहम?
राम मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ने की संभावना है। ऐसे में दर्शन व्यवस्था, प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, कर्मचारियों की व्यवस्था, सुरक्षा और श्रद्धालु सुविधाओं जैसे कामों के लिए एक पेशेवर प्रशासनिक ढांचे की जरूरत महसूस की जा रही थी।
CEO की नियुक्ति इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब ट्रस्ट के धार्मिक और नीतिगत कामों के साथ रोजमर्रा के प्रशासनिक संचालन के लिए एक समर्पित कार्यकारी व्यवस्था होगी।
जुलाई में बदला था ट्रस्ट का प्रशासनिक ढांचा
चढ़ावे से जुड़े मामले के बाद हुई बैठक में ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए थे। कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव बनाया गया था। इसके बाद CEO की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय सर्च कमेटी ने प्रक्रिया आगे बढ़ाई। अब CEO और तीन नए ट्रस्टियों की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव पूरा होता दिखाई दे रहा है।
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