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UP News: यूपी STF के साथ मुठभेड़ में गैंगस्टर अनिल दुजाना ढेर, दुजाना के नाम दर्ज थे 60 से अधिक मुकदमे

UP News: उत्तरप्रदेश में एसटीएफ (UP STF) ने आज एक और कुख्यात गैंगस्टर अनिल दुजाना (Anil Dujana Encounter) उर्फ अनिल नागर को मिट्टी में मिला दिया। मेरठ में हुए इस एनकाउंटर में मारे गए अनिल दुजाना पर यूपी समेत अन्य राज्यों में 18 हत्या समेत लूट, रंगदारी, अपहरण, फिरौती के 60 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। दुजाना को मिलाकर यूपी एसटीएफ पिछले 6 साल में 184 एनकाउंटर कर चुकी है। अनिल दुजाना तीन साल से अयोध्या जेल में बंद था और जमानत मिलने के बाद से ही फरार चल रहा था। बताया जा रहा है कि एसटीएफ के साथ एनकाउंटर के समय सफेद स्कॉर्पियो गाड़ी में सवार होकर अनिल दुजाना बागपत से मुजफ्फरनगर साथियों से मिलने जा रहा था। इसी दौरान मुखबिर की सूचना पर भोला की झाल के पास एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
https://twitter.com/uppstf/status/1654155658558599168?s=20
https://twitter.com/AHindinews/status/1654083828078743553?s=20
प्रदेश सरकार की 66 गैंगस्टर की लिस्ट में शामिल था दुजाना
यूपी सरकार ने हाल ही में उत्तरप्रदेश के 66 गैंगस्टर की लिस्ट जारी की थी, उसमें सात गौतमबुद्धनगर के थे। इसमें सुंदर भाटी, अनिल दुजाना, रणदीप भाटी, सिंहराज भाटी, अनिल कसाना, अनिल भाटी व मनोज उर्फ आसे का नाम शामिल था। सात में से एक गैंगस्टर अनिल दुजाना का आज अंत हो गया।
https://twitter.com/ANINewsUP/status/1654088867648278533?s=20
ख़बर उत्तरप्रदेश
UP News: पंचायत सहायकों का मानदेय बढ़ा, अब 9 हजार रुपए; प्रधान-सचिव नहीं हटा सकेंगे

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत सहायकों के आंदोलन के बीच योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। पंचायत सहायकों का मासिक मानदेय 6 हजार से बढ़ाकर 9 हजार रुपए करने का ऐलान किया गया है। पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को लखनऊ में इसकी जानकारी दी। इस फैसले से प्रदेश के 57 हजार से ज्यादा पंचायत सहायकों को फायदा मिलेगा।
सरकार ने केवल मानदेय बढ़ाने का फैसला नहीं किया है, बल्कि पंचायत सहायकों की सेवा सुरक्षा, भुगतान व्यवस्था और आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को लेकर भी राहत का ऐलान किया है।
प्रधान या सचिव मनमाने तरीके से नहीं हटा सकेंगे
अब किसी पंचायत सहायक को ग्राम प्रधान या पंचायत सचिव अपनी मर्जी से सेवा से हटाने की प्रक्रिया नहीं कर सकेंगे। सेवा समाप्त करने से पहले जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित कमेटी जांच करेगी। जांच के बाद ही सेवा समाप्ति पर फैसला लिया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य पंचायत सहायकों को स्थानीय स्तर पर मनमाने तरीके से हटाए जाने से सुरक्षा देना है।
मानदेय सीधे बैंक खाते में भेजने की तैयारी
अभी पंचायत सहायकों के मानदेय के भुगतान की व्यवस्था राज्य वित्त आयोग से जुड़ी है। सरकार ने अब इसे DBT के जरिए सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खाते में भेजने की व्यवस्था करने की बात कही है। इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी के बाद व्यवस्था लागू की जाएगी। इससे भुगतान के लिए ग्राम प्रधान या पंचायत स्तर की मध्यस्थ प्रक्रिया खत्म करने की दिशा में कदम उठेगा।
आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस होंगे
राजभर ने कहा कि आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के दौरान जिन पंचायत सहायकों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। आंदोलन के दौरान कार्रवाई के चलते जिन सहायकों को सेवा से हटाया गया है, उनकी बहाली की भी बात कही गई है।
पंचायत सहायकों की 5 प्रमुख मांगें
पंचायत सहायकों की ओर से मानदेय बढ़ाने और सेवा सुरक्षा समेत कई मांगें रखी गई थीं। सरकार के ताजा ऐलान के बाद इनका स्वरूप इस तरह है-
1. मानदेय बढ़ाने की मांग: पंचायत सहायकों की ओर से मानदेय को 20 से 25 हजार रुपए तक करने की मांग थी। सरकार ने फिलहाल इसे बढ़ाकर 9 हजार रुपए किया है।
2. नियमितीकरण की मांग: संविदा व्यवस्था खत्म कर स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
3. सीधे बैंक खाते में भुगतान: सरकार ने DBT के जरिए सीधे खाते में मानदेय भेजने की व्यवस्था की घोषणा की है। इसके लिए कैबिनेट प्रक्रिया पूरी की जानी है।
4. सेवा सुरक्षा: अब सेवा समाप्त करने से पहले जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी से जांच कराने की व्यवस्था की जाएगी।
5. आंदोलन से जुड़े मुकदमे: धरना-प्रदर्शन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लेने और कार्रवाई में हटाए गए सहायकों की बहाली का ऐलान किया गया है।
57 हजार से ज्यादा पंचायत सहायकों को मिलेगा फायदा
सरकार के मुताबिक प्रदेश में 57 हजार से अधिक पंचायत सहायक कार्यरत हैं। इनके मानदेय में ₹3,000 की बढ़ोतरी के बाद अब हर महीने ₹9,000 का मानदेय तय किया गया है। यह मौजूदा ₹6,000 की तुलना में 50% की वृद्धि है।
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योगी कैबिनेट के 23 बड़े फैसले: चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए ₹1,008 करोड़ मंजूर; पूर्व अग्निवीरों को 20% आरक्षण, 14,429 स्कूल बनेंगे स्मार्ट

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में विकास और जनकल्याण से जुड़े 23 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। फैसलों में चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे, परिषदीय स्कूलों को स्मार्ट बनाने, किसानों को रियायती ब्याज पर कर्ज, खिलौना उद्योग को बढ़ावा देने और पूर्व अग्निवीरों को सरकारी भर्ती में आरक्षण देने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय शामिल हैं।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने बुनियादी ढांचे, शिक्षा, कृषि, रोजगार और औद्योगिक विकास से जुड़े कई प्रस्तावों को मंजूरी दी है।
चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के लिए ₹1,008.67 करोड़
कैबिनेट ने 15.172 किलोमीटर लंबे, प्रवेश नियंत्रित छह लेन ग्रीनफील्ड चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के संशोधित परियोजना प्रस्ताव को मंजूरी दी है। परियोजना का निर्माण EPC मोड पर कराया जाएगा और इसकी अनुमानित लागत ₹1,008.67 करोड़ है। परियोजना का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। निर्माणकर्ता के चयन के लिए ग्लोबल टेंडर की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। एक्सप्रेसवे से बुंदेलखंड क्षेत्र और चित्रकूट धाम के बीच आवागमन आसान होने के साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
14,429 परिषदीय स्कूल बनेंगे स्मार्ट
कैबिनेट ने प्रदेश के 14,429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके लिए करीब ₹300 करोड़ का प्रावधान किया गया है और प्रत्येक स्कूल को लगभग ₹2.07 लाख की राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
स्मार्ट स्कूलों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और ICT से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य सरकारी प्राथमिक स्कूलों में डिजिटल माध्यम से पढ़ाई को बढ़ावा देना और बच्चों को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
किसानों को 6% ब्याज पर ₹6 लाख तक का कर्ज
मुख्यमंत्री कृषक समृद्धि योजना के तहत लघु और सीमांत किसानों को दीर्घकालिक ऋण उपलब्ध कराने का फैसला किया गया है। उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के माध्यम से किसानों को ₹6 लाख तक का कर्ज 6% सालाना ब्याज पर दिया जाएगा। इससे किसानों को कृषि और ग्रामीण जरूरतों के लिए अपेक्षाकृत कम ब्याज दर पर लंबी अवधि की वित्तीय सहायता मिल सकेगी।
पूर्व अग्निवीरों को 20% क्षैतिज आरक्षण
कैबिनेट ने पूर्व अग्निवीरों के लिए परिवहन विभाग में प्रवर्तन सिपाही (परिवहन) और कारागार विभाग में जेल वार्डर के पदों पर सीधी भर्ती में 20% क्षैतिज आरक्षण को मंजूरी दी है। चार साल की सेवा पूरी कर चुके पूर्व अग्निवीरों को इस व्यवस्था का लाभ मिलेगा। जिस श्रेणी में अग्निवीर आता है, उसी श्रेणी के तहत क्षैतिज आरक्षण दिया जाएगा। साथ ही अधिकतम आयु सीमा में तीन साल की छूट का प्रावधान किया गया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुल आरक्षण की सीमा 50% से अधिक नहीं होगी। इससे पहले पुलिस विभाग में भी पूर्व अग्निवीरों के लिए 20% आरक्षण का फैसला किया जा चुका है।
जेलों की सुरक्षा में पूर्व अग्निवीरों की भूमिका
पूर्व अग्निवीरों की जेल वार्डर के रूप में भर्ती से कारागारों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि चार साल की सैन्य सेवा से मिले अनुशासन, प्रशिक्षण और सुरक्षा कौशल का उपयोग संवेदनशील कारागारों में किया जा सकेगा। इस फैसले से पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी रोजगार का एक और रास्ता खुलेगा।
PRD जवानों और परिवार को कैशलेस इलाज
कैबिनेट ने प्रांतीय रक्षक दल (PRD) के स्वयंसेवकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को मुख्यमंत्री PRD कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत इलाज की सुविधा देने का फैसला किया है। इससे PRD जवानों और उनके परिवारों को इलाज के दौरान होने वाले खर्च का आर्थिक बोझ कम करने में मदद मिलेगी।
यूपी खिलौना उद्योग को नई नीति से बढ़ावा
कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश खिलौना विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2025 को मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य प्रदेश में खिलौना निर्माण से जुड़ा उद्योग विकसित करना, निवेश आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। नई नीति के जरिए खिलौना निर्माण इकाइयों को प्रोत्साहन और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा।
सरकार का फोकस- इंफ्रास्ट्रक्चर से रोजगार तक
कैबिनेट के फैसलों में एक्सप्रेसवे और स्कूलों से लेकर किसान, अग्निवीर, PRD जवान और उद्योग तक कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से एक तरफ बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी, वहीं दूसरी ओर शिक्षा, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। कैबिनेट के 23 फैसलों में न्यायिक व्यवस्था और अन्य विभागों से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल हैं। इनमें अदालतों के विस्तार समेत कई प्रशासनिक फैसले लिए गए हैं।
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UP में 15,012 शिक्षक पदों पर भर्ती, सहायक अध्यापक के 12,405 और प्रवक्ता संवर्ग के 2,607 पद शामिल, 16 सितंबर से आवेदन

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी भर्ती का रास्ता खुल गया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े 15,012 शिक्षक पदों के लिए दो विज्ञापन जारी किए हैं। इनमें सहायक अध्यापक के 12,405 और प्रवक्ता संवर्ग के 2,607 पद शामिल हैं। इन पदों के लिए लिखित परीक्षा 3 और 4 दिसंबर 2026 को प्रस्तावित है।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार के मुताबिक, अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) व्यवस्था लागू की गई है। उम्मीदवारों को संबंधित भर्ती के लिए आवेदन करने से पहले OTR पूरा करना होगा।
12,405 सहायक अध्यापक पदों पर भर्ती
विज्ञापन संख्या 05/2026 के तहत माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी के 897 पद और बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक (शहरी) के 11,508 पद हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन की प्रक्रिया 16 सितंबर 2026 से शुरू होगी। अभ्यर्थी 15 अक्टूबर 2026 तक आवेदन शुल्क जमा कर सकेंगे। आवेदन में संशोधन की अंतिम तारीख 19 अक्टूबर 2026 तय की गई है।
2,607 प्रवक्ता पदों पर भी मौका
आयोग ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रवक्ता संवर्ग के 2,607 रिक्त पदों के लिए विज्ञापन संख्या 06/2026 जारी किया है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन पंजीकरण और आवेदन प्रक्रिया 18 सितंबर 2026 से शुरू होगी। आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 17 अक्टूबर 2026 और आवेदन में संशोधन की अंतिम तारीख 21 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है। प्रवक्ता संवर्ग की परीक्षा 15 और 16 दिसंबर 2026 को होगी।
OTR के बिना आवेदन नहीं
आयोग ने अभ्यर्थियों के लिए वन टाइम रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू की है। यानी उम्मीदवार को पहले अपना स्थायी प्रोफाइल/OTR तैयार करना होगा और इसके बाद संबंधित भर्ती के लिए आवेदन करना होगा। आयोग का OTR पोर्टल भी उम्मीदवारों को एक स्थायी प्रोफाइल बनाकर अलग-अलग परीक्षाओं के लिए उसी ID से आवेदन करने की सुविधा देता है।
आवेदन से पहले पात्रता जरूर जांचें
आयोग ने अभ्यर्थियों से कहा है कि आवेदन करने से पहले संबंधित भर्ती का विस्तृत विज्ञापन और सूचना पुस्तिका ध्यान से पढ़ लें। शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, आरक्षण और अन्य पात्रता शर्तों को पूरा करने के बाद ही आवेदन करें। आयोग ने स्पष्ट किया है कि विज्ञापित पदों की अर्हता और पात्रता के संबंध में अलग से व्यक्तिगत परामर्श नहीं दिया जाएगा। अभ्यर्थी आवेदन और भर्ती से जुड़ी आधिकारिक जानकारी के लिए UPESSC की वेबसाइट जरूर देखें।
नोट: अंतिम पात्रता, विषयवार पद, आरक्षण और अन्य शर्तों के लिए आयोग के मूल विज्ञापन को ही मान्य माना जाए।
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Bihar कैबिनेट के 17 बड़े फैसले: गया में काशी विश्वनाथ की तर्ज पर विष्णुपद कॉरिडोर, ₹3,516 करोड़ मंजूर

पटना: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बिहार कैबिनेट की बैठक में विकास, धार्मिक पर्यटन, रोजगार, स्वास्थ्य, कृषि, जल प्रबंधन और हवाई संपर्क से जुड़े 17 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। सबसे बड़ा फैसला गया के विष्णुपद मंदिर क्षेत्र के समग्र विकास और सोन-फल्गु नदी जोड़ परियोजना को लेकर हुआ, जिस पर कुल ₹3,516.05 करोड़ खर्च होंगे।
काशी विश्वनाथ की तर्ज पर विकसित होगा विष्णुपद क्षेत्र
गया के ऐतिहासिक विष्णुपद मंदिर परिसर को वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए ₹2,520 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। योजना में मंदिर परिसर के विकास के साथ मल्टीलेवल पार्किंग, एलिवेटेड पथ, घाट, रैंप, पैदल पुल, डॉर्मिटरी और कैंटीन जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
मंसारवा-मानपुर पुल, सार्वजनिक सुविधाओं और सीता कुंड के पीएफसी समेत कई निर्माण कार्य भी योजना में शामिल हैं। परियोजना का क्रियान्वयन बिहार राज्य पथ विकास निगम लिमिटेड करेगा।
सोन-फल्गु नदी जोड़ने पर ₹996.05 करोड़
कैबिनेट ने सोन-फल्गु नदी जोड़ योजना के लिए भी ₹996.05 करोड़ मंजूर किए हैं। इसके तहत इंद्रपुरी बैराज से करीब 23 किलोमीटर ऊपर सोन नदी में इंटेक वेल बनाया जाएगा। यहां से लगभग 11 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाने की योजना है। सरकार के मुताबिक इससे गया क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ जल उपलब्धता से जुड़ी जरूरतों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मखाना और बागवानी योजनाओं को मंजूरी
कृषि क्षेत्र में 2026-27 के लिए मखाना विकास योजना के तहत ₹89.79 करोड़ की लागत से कार्यक्रमों के क्रियान्वयन, राशि निकासी और व्यय को मंजूरी दी गई। इसके अलावा एकीकृत बागवानी विकास मिशन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 और 2027-28 के दौरान ₹78.34 करोड़ की योजना को मंजूरी मिली। 2026-27 के लिए इसमें ₹68.66 करोड़ खर्च किए जाएंगे। नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम के तहत भी 2026-27 में ₹2.10 करोड़ की निकासी और खर्च को मंजूरी दी गई।
5 मेडिकल कॉलेजों में 366 सहायक प्राध्यापक
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े फैसले में राज्य के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 366 रिक्त सहायक प्राध्यापक पदों पर संविदा नियुक्ति को मंजूरी दी गई है। ये नियुक्तियां नियमित नियुक्ति होने तक की जाएंगी। इनमें बेतिया, पूर्णिया, मधेपुरा, छपरा और समस्तीपुर के मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।
सरकारी दंत महाविद्यालयों और अस्पतालों में भी रिक्त शिक्षक पदों पर नियमित नियुक्ति या प्रोन्नति होने तक संविदा आधार पर नियुक्ति का रास्ता साफ किया गया है।
पैरावेट स्कूल में 6 स्थायी पद बनेंगे
बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना में पैरावेट स्कूल की स्थापना के लिए 4 अनुदेशक और 2 निम्नवर्गीय लिपिक समेत छह पदों के सृजन को मंजूरी मिली। इन पदों पर सालाना करीब ₹45.99 लाख का व्यय भार आएगा।
ग्रामीण परिवारों को 125 दिन रोजगार
बिहार में विकसित भारत-जी राम जी व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी है। यह कानून 1 जुलाई 2026 से देशभर में लागू हो चुका है। बिहार कैबिनेट ने इस व्यवस्था से संबंधित शिकायत निवारण नियमावली को भी मंजूरी दी है।
गाद हटेगी, निर्माण में भी इस्तेमाल होगी
कैबिनेट ने बिहार जलस्रोत पुनर्स्थापन एवं गाद प्रबंधन नीति-2026 को मंजूरी दी है। इसके तहत नदियों, बराजों और जलाशयों से जमा गाद हटाकर जल संरचनाओं की क्षमता बहाल करने और निकाली गई गाद का इस्तेमाल निर्माण कार्यों में मिट्टी भराई के लिए करने की व्यवस्था की जाएगी।
जल संसाधन विभाग को बाढ़ और सिंचाई से जुड़े कार्यों के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से ₹1,000 करोड़ की अग्रिम राशि लेने की भी मंजूरी मिली है।
छोटे शहरों तक बढ़ेगा हवाई संपर्क
कैबिनेट ने केंद्र के Modified UDAN Scheme के तहत बिहार में हवाई संपर्क बढ़ाने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और राज्य सरकार के बीच MoU को मंजूरी दी। इसके जरिए नए हवाई मार्गों को वित्तीय सहायता और कम यात्री संख्या वाले मार्गों के शुरुआती संचालन को समर्थन मिलने की व्यवस्था होगी।
राज्य में तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों पर भर्ती एवं प्रोन्नति के लिए बिहार राज्य विमानन संवर्ग भर्ती नियमावली-2026 को भी मंजूरी दी गई।
जेल की जमीन पर खुलेंगे पेट्रोल पंप
बिहार की जेलों की खाली जमीन का व्यावसायिक इस्तेमाल करते हुए वहां पेट्रोलियम रिटेल आउटलेट खोलने की नियमावली को मंजूरी दी गई है। इसके तहत पूर्णिया और मुजफ्फरपुर की केंद्रीय जेल की जमीन पर इंडियन ऑयल, जबकि बक्सर और भागलपुर की जेल की जमीन पर हिंदुस्तान पेट्रोलियम के माध्यम से पेट्रोल पंप संचालित किए जाने का प्रस्ताव है।
कैबिनेट के फैसलों में ये प्रस्ताव भी शामिल
- बिहार सूचना आयोग में 2 अतिरिक्त राज्य सूचना आयुक्त पदों का सृजन।
- ईंट-भट्ठों के बकाया राजस्व के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना।
- बिहार जिला खनिज फाउंडेशन नियमावली में संशोधन।
- नागरिक उड्डयन क्षेत्र में भर्ती एवं पदोन्नति के नए नियम।
- स्वास्थ्य और पशु विज्ञान क्षेत्र में नए पदों का सृजन।
- जल संसाधन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े कार्यों के लिए वित्तीय स्वीकृतियां।
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यूपी लेखपाल भर्ती में 28,409 अभ्यर्थी शॉर्टलिस्ट, 7,994 पदों के लिए अब अभिलेख सत्यापन; जांच के बाद आएगा अंतिम परिणाम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लेखपाल के 7,994 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने मुख्य परीक्षा 2025 का परिणाम जारी करते हुए 28,409 अभ्यर्थियों को पात्रता और अभिलेख परीक्षण के लिए शॉर्टलिस्ट किया है।
आयोग ने अभिलेख परीक्षण के लिए कटऑफ भी जारी कर दी है। अब शॉर्टलिस्ट अभ्यर्थियों की पात्रता और उनके दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इसके बाद ही 7,994 पदों के लिए अंतिम चयन परिणाम जारी होगा।
7,994 पदों के लिए 28,409 अभ्यर्थी आगे
लेखपाल भर्ती के लिए 7,994 पद निर्धारित हैं। इनके मुकाबले 28,409 अभ्यर्थियों को अगले चरण के लिए पात्र पाया गया है। यानी प्रत्येक पद के लिए औसतन करीब 3.55 अभ्यर्थी अंतिम प्रक्रिया में पहुंचे हैं। मुख्य परीक्षा 21 मई 2026 को आयोजित की गई थी। परीक्षा के आधार पर आयोग ने श्रेणीवार कटऑफ तय कर अभ्यर्थियों को अभिलेख परीक्षण के लिए शॉर्टलिस्ट किया है।
यह अंतिम चयन सूची नहीं
UPSSSC ने स्पष्ट किया है कि 28,409 अभ्यर्थियों की यह सूची अंतिम चयन सूची नहीं है। इसमें नाम आने का मतलब सिर्फ इतना है कि अभ्यर्थी अगले चरण यानी पात्रता और अभिलेख परीक्षण के लिए योग्य पाया गया है।
आयोग के अनुसार अंतिम चयन का दावा अभिलेख परीक्षण से पहले नहीं किया जा सकता। पात्रता और दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम परिणाम घोषित किया जाएगा।
अब अभ्यर्थियों को क्या करना होगा?
शॉर्टलिस्ट अभ्यर्थियों को आयोग की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अभिलेख परीक्षण से संबंधित तिथि, प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।
अभ्यर्थियों को सलाह है कि वे UPSSSC की वेबसाइट पर जारी आधिकारिक नोटिस नियमित रूप से देखते रहें, ताकि दस्तावेज अपलोड करने या सत्यापन से जुड़ी कोई महत्वपूर्ण सूचना छूट न जाए।
वर्गवार कटऑफ भी जारी
आयोग ने अभिलेख परीक्षण के लिए अलग-अलग श्रेणियों की कटऑफ भी जारी की है। सामान्य वर्ग की कटऑफ 58.75 अंक, OBC की 55.75, EWS की 55.25 और SC की 51.25 अंक रही। ST वर्ग की कटऑफ 44 अंक रही।इसके अलावा महिला, भूतपूर्व सैनिक, दिव्यांगजन और अन्य क्षैतिज आरक्षण श्रेणियों के लिए भी अलग-अलग कटऑफ जारी की गई है। यानी अभी 28,409 अभ्यर्थियों की दौड़ जारी है। अंतिम मंजिल 7,994 चयनित लेखपालों की सूची है, जो अभिलेख और पात्रता जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी।
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