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Raipur: साय सरकार में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल हुआ कर्जमुक्त, अटल नगर देश का पहला ऋण मुक्त ग्रीनफील्ड शहर बना- वित्त मंत्री चौधरी

Raipur: प्रदेश के आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने छत्तीसगढ संवाद ऑडिटोरियम में प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व में आवास एवं पर्यावरण विभाग ने विगत दो वर्षों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। लोगों को किफायती आवास की उपलब्धता, बेहतर रहवासी सुविधा, आजीविका के साधनों के विकास के साथ ही पर्यावरण अनुकूल ईज आफ लिविंग का ध्यान रखते हुए इन दो सालों में काम किया गया है। विभाग द्वारा किये गये दो सालों से नागरिक जीवन बेहतर हुआ है और राज्य की उज्ज्वल भविष्य की ठोस नींव रख दी गई है।
मंत्री चौधरी ने बताया कि दो साल पहले छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा था। 3200 से अधिक आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों का विक्रय नहीं हो सका था। 735 करोड रुपए का बकाया था। मंडल को ऋण मुक्त करने के लिए यह राशि राज्य शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई। वर्तमान में मंडल पर कोई ऋण नहीं है। जिन संपत्तियों का विक्रय लंबे समय से नहीं हुआ था, उनके विक्रय के लिए सरकार द्वारा एकमुश्त निपटान योजना ओटीएस-2 आरंभ की गई। इसके माध्यम से इन संपत्तियों पर 30 प्रतिशत तक की छूट उपलब्ध करायी गई। इस योजना को सफलता मिली और 9 महीनों में ही 1251 संपत्तियों का विक्रय हुआ और इस योजना के माध्यम से 190 करोड रुपए का राजस्व अर्जित किया गया। यह राशि आगामी परियोजनाओं में व्यय की जाएगी, ताकि अधिकतम हितग्राहियों को किफायती आवास एवं व्यावसायिक संपत्ति का लाभ मिल सके।
उन्होंने बताया कि भविष्य में अविक्रित स्टॉक से बचने के लिए नई निर्माण नीति लागू की गई है। अब मांग आधारित निर्माण को प्राथमिकता दी जाएगी। बाजार की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार परियोजनाएं शुरू होंगी। इससे वित्तीय जोखिम कम होगा। नई नीति के अनुसार 60 प्रतिशत या प्रथम 3 माह में 30 प्रतिशत पंजीयन अनिवार्य किया गया है। इसके पश्चात ही निर्माण कार्य प्रारंभ होगा। यह व्यवस्था परियोजनाओं की व्यवहार्यता सुनिश्चित करेगी। नागरिकों की मांग को प्रत्यक्ष रूप से महत्व मिलेगा।
चौधरी ने कहा कि आवंटियों की सुविधा के लिए ऑनलाइन पोर्टल को और सुदृढ किया गया है। प्रक्रियाएं सरल और समयबद्ध हुई हैं। नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एआई आधारित चैटबॉट के माध्यम से 24×7 जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता कम हुई है। पारदर्शिता और सुविधा दोनों में वृद्धि हुई है।
मंत्री चौधरी ने रायपुर विकास प्राधिकरण की उपलब्धियों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 193 करोड रूपए की लागत से प्राधिकरण द्वारा पीएम यूनिटी मॉल का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही टिकरापारा में 168 फ्लैट का निर्माण प्रस्तावित है। जिसके लिए निविदा आमंत्रित की गई है। जनवरी से प्राधिकरण द्वारा ऑनलाईन प्रणाली की शुरूआत की गई है।
उन्होंने कहा कि नवा रायपुर अटल नगर के विकास के लिए बीते 2 सालों में ऐतिहासिक निर्णय हुए हैं। नवा रायपुर अटल नगर देश का पहला ऋण मुक्त ग्रीनफील्ड शहर बना है। यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय मानी जा रही है। प्राधिकरण द्वारा 1,345 करोड़ के संपूर्ण ऋण का भुगतान किया गया। यह ऋण पूर्ववर्ती विकास परियोजनाओं से संबंधित था। अनुशासित वित्तीय प्रबंधन से यह संभव हो सका। किसी नए ऋण का बोझ नहीं डाला गया। ऋण चुकता होने के साथ 5,030 करोड मूल्य की भूमि और संपत्ति गिरवी-मुक्त हुई। अब ये परिसंपत्तियां पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इससे निवेश और विकास प्रस्तावों को गति मिलेगी।
नवा रायपुर में औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधि बढ़ाने के लिए भी उल्लेखनीय पहल की गई है। 132 एकड क्षेत्र में टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है। टेक्सटाइल पार्क में लगभग 2,000 करोड के निवेश का अनुमान है। यह निवेश राज्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को सशक्त करेगा। एमएसएमई और बड़े उद्योगों को अवसर मिलेंगे। निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी। इस परियोजना से 12,000 से अधिक रोजगार सृजित होने की संभावना है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार दोनों शामिल होंगे। स्थानीय युवाओं को अवसर मिलेंगे तथा क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
सेमीकंडक्टर और आईटी क्षेत्र में 1,800 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। यह पहल उन्नत 5जी और 6 जी तकनीक को ध्यान में रखकर की गई है। इससे राज्य को तकनीकी मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। डिजिटल इकोसिस्टम मजबूत होगा। आईटी क्षेत्र से लगभग 10,000 नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। उच्च कौशल आधारित रोजगार उपलब्ध होंगे। स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों को बढ़ावा मिलेगा।
चौधरी ने कहा कि नवा रायपुर टेक-हब के रूप में उभरेगा। नवा रायपुर को कॉन्फ्रेंस कैपिटल के रूप में विकसित किया जा रहा है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों को आकर्षित करने की योजना है। एमआईसीई टूरिज्म को बढावा मिलेगा। सेवा और पर्यटन क्षेत्र को नई गति मिलेगी। चौधरी ने बताया कि शहर को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और खुले स्थल उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इवेंट आधारित अर्थव्यवस्था को बढावा मिलेगा। स्थानीय सेवाओं में रोजगार बढ़ेगा। 400 करोड की लागत से इनलैंड मरीना परियोजना विकसित की जा रही है। यह पर्यटन और शहरी सौंदर्य दोनों को बढ़ाएगी। मनोरंजन के नए अवसर सृजित होंगे। ग्रीन और ब्लू इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ा गया है।
120 करोड की लागत से आर्ट ऑफ लिविंग सेंटर विकसित किया जाएगा। यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा। वेलनेस टूरिज्म को प्रोत्साहन मिलेगा। शहर की सामाजिक पहचान मजबूत होगी। 230 करोड की लागत से साइंस सिटी विकसित की जा रही है। इससे शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। छात्रों और युवाओं को विज्ञान से जोड़ने का उद्देश्य है। भविष्य उन्मुख सोच को प्रोत्साहन मिलेगा।
नवा रायपुर को मेडिकल हब बनाने के उद्देश्य से मेडी सिटी विकसित की जा रही है। यहां उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। क्षेत्रीय स्वास्थ्य सुविधाओं पर दबाव कम होगा। मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा। मेडी सिटी में 300 बिस्तरों वाला हॉस्पिटल बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा विकसित किया जा रहा है। एजु सिटी के अंतर्गत NIFT और NIELIT को भूमि आवंटन की प्रक्रिया प्रगति पर है। डिजाइन और आईटी शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। उच्च शिक्षा संस्थानों का क्लस्टर विकसित होगा। देश विदेश के नामी शैक्षणिक संस्थानों के आने से नवा रायपुर ज्ञान केंद्र के रूप में उभरेगा।
मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा भी बीते दो साल में उल्लेखनीय कार्य किये गये हैं। नियमों को अधिक सरल, व्यावहारिक और किफायती बनाने के उद्देशेय से राज्य में पहली बार किफायती जन आवास नियम, 2025 लागू किया गया है। इससे आवास निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। नागरिकों और डेवलपर्स दोनों को लाभ होगा। अब कृषि भूमि में भी किफायती आवास स्वीकार किया गया है। प्रक्रिया सरल और समयबद्ध हुई है। कॉलोनाइजर्स द्वारा सामुदायिक खुले स्थान की अनिवार्यता 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की गई है। इससे परियोजनाओं की लागत में कमी आएगी। किफायती आवास अधिक व्यवहार्य बनेंगे। फिर भी आवश्यक खुले स्थान सुरक्षित रहेंगे।
मंत्री चौधरी ने बताया इसके अतिरिक्त केंद्रीय रिफॉर्म के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 में भी संशोधन किये गये हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में न्यूनतम पहुंच मार्ग की चौड़ाई कम की गई है। अब 7.5 से 9 मीटर चौड़ाई स्वीकार्य है। पहले यह 12 मीटर होनी अनिवार्य थी। इससे भूमि का बेहतर उपयोग संभव होगा। औद्योगिक क्षेत्रों में ग्राउंड कवरेज 60 प्रतिशत से बढाकर 70 प्रतिशत किया गया है। उद्योगों को अधिक निर्माण क्षेत्र मिलेगा। उत्पादन क्षमता में वृद्धि होगी। इससे औद्योगिक विस्तार आसान होगा।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा उद्योगों द्वारा पर्यावरणीय उत्सर्जनों के निगरानी हेतु रियल टाइम सिस्टम लागू किया गया है। ऑनलाइन के माध्यम से निरंतर निगरानी हो रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ी है। उत्सर्जन सीमा से अधिक होने पर तुरंत अलर्ट जारी होता है। तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई संभव होती है। नियमों के पालन में सख्ती आई है। स्वचालित नोटिस प्रणाली लागू की गई है। इससे प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हुई है तथा मानव हस्तक्षेप पर निर्भरता कम हुई है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग की उपलब्धियां छत्तीसगढ़ को वित्तीय रूप से सक्षम, निवेश-अनुकूल, पर्यावरण-संवेदनशील और नागरिक केंद्रित राज्य के रूप में स्थापित करती हैं। विकसित छत्तीसगढ़ के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में विभाग द्वारा की गई पहल अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इसके लिए दीर्घकालीन विकास की ठोस नींव तैयार हुई है। इस अवसर पर अनुराग सिंह देव, अध्यक्ष, छत्तीसगढ गृह निर्माण मंडल, नन्द कुमार साहू, अध्यक्ष, रायपुर विकास प्राधिकरण, विधायक रायमुनी भगत, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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Chhattisgarh: दुर्ग में गैस सिलेंडर ब्लास्ट से एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, सरकार देगी 5-5 लाख की सहायता

Durg: दुर्ग जिले के कुम्हारी थाना क्षेत्र स्थित खपरी में गैस सिलेंडर ब्लास्ट की दर्दनाक घटना में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई। हादसे में होमदास वैष्णव (40), लक्ष्मी वैष्णव (18), चांदनी वैष्णव (17) और 2 साल की मासूम गोपिका वैष्णव की मौके पर ही जान चली गई। घटना की जानकारी मिलते ही मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और गजेंद्र यादव तत्काल घटनास्थल पहुंचे। दोनों मंत्रियों ने मौके का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की और स्थानीय लोगों से चर्चा कर पूरी घटना की जानकारी ली।
प्रत्येक मृतक के परिजनों को 9-9 लाख की सहायता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की। सरकार की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजन को 5-5 लाख रुपए दिए जाएंगे। इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा आरबीसी 6-4 के तहत 4-4 लाख रुपए की अतिरिक्त सहायता राशि भी प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने जताया शोक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। घटनास्थल पर कई जनप्रतिनिधि समेत जिला प्रशासन की टीम भी मौके पर मौजूद रही।
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Raipur: छत्तीसगढ़ में नर्सिंग स्टाफ के पदनाम बदले, ‘नर्सिंग सिस्टर’ अब कहलाएंगी ‘सीनियर नर्सिंग ऑफिसर’

Raipur: अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ सरकार ने नर्सिंग संवर्ग के पदनाम में बड़ा बदलाव किया है।स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने घोषणा की कि अब “नर्सिंग सिस्टर” को “सीनियर नर्सिंग ऑफिसर” और “स्टाफ नर्स” को “नर्सिंग ऑफिसर” कहा जाएगा।
रायपुर के अंबेडकर अस्पताल में हुई घोषणा
यह घोषणा डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय रायपुर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय नर्सेस दिवस कार्यक्रम के दौरान की गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नर्सिंग अधिकारी, नर्सिंग छात्र-छात्राएं और अस्पताल के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
‘नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़’
स्वास्थ्य मंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि नर्सें स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ होती हैं और मरीजों की देखभाल में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग स्टाफ दिन-रात समर्पण और सेवा भाव से मरीजों की सेवा करता है। कोविड काल में नर्सों की भूमिका को याद करते हुए मंत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी नर्सिंग स्टाफ ने अद्भुत सेवा भावना दिखाई थी।
‘नर्स का दर्जा मां के समान’
मंत्री जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा सेवा में नर्स मां के समान होती है, क्योंकि वे मरीजों की देखभाल परिवार की तरह करती हैं। उन्होंने नर्सिंग पेशे को मानवीय संवेदनाओं और सेवा का सबसे बड़ा उदाहरण बताया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जताया आभार
स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री साय का आभार जताते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है और लंबे समय से लंबित व्यवस्थाओं को पूरा किया जा रहा है।
नर्सिंग अधिकारियों का किया सम्मान
कार्यक्रम में सीनियर नर्सिंग ऑफिसर डॉ. रीना राजपूत, नीलिमा शर्मा, रंजना सिंह ठाकुर, सुमन देवांगन, कोमेश्वरी नवरंगे, प्रगति सतपुते, शीतल सोनी और नमिता डेनियल सहित कई नर्सिंग अधिकारियों को सम्मानित किया गया।
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Chhattisgarh: सीएम साय ने हटकेश्वर महादेव मंदिर में किया जलाभिषेक, प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना

Raipur: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोमवार को राजधानी रायपुर स्थित महादेव घाट के हटकेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की। उन्होंने महादेव से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में हुए शामिल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय महादेव घाट स्थित मंदिर परिसर में आयोजित सोमनाथ स्वाभिमान पर्व कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और भगवान शिव का आशीर्वाद लिया।
कई मंत्री और जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
कार्यक्रम में कृषि मंत्री राम विचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा समेत कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इसके अलावा विधायक पुरंदर मिश्रा, रायपुर महापौर मीनल चौबे और जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन अग्रवाल भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
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Chhattisgarh: तेंदूपत्ता संग्राहक के बेटे बने IFS अधिकारी, रायगढ़ के अजय गुप्ता ने हासिल की 91वीं रैंक

Raigarh: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के छोटे से गांव संबलपुरी से निकले अजय गुप्ता ने भारतीय वन सेवा (IFS) में चयनित होकर प्रदेश का नाम रोशन किया है। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार से आने वाले अजय ने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करते हुए देशभर में 91वीं रैंक हासिल की। अब वही जंगल, जहां कभी उनका परिवार तेंदूपत्ता और महुआ बीनकर जीवन चलाता था, उनकी जिम्मेदारी बनने जा रहा है।
जंगलों से निकलकर IFS तक का सफर
अजय गुप्ता का बचपन जंगलों और खेती-किसानी के बीच बीता। छुट्टियों में वे अपने माता-पिता के साथ तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहण में मदद करते थे। आर्थिक अभावों के बावजूद उन्होंने 10वीं में 92.66% और 12वीं में 91.40% अंक हासिल किए। इसके बाद उन्हें एनआईटी (National Institute of Technology) रायपुर में प्रवेश मिला। एनआईटी में पढ़ाई के दौरान उन्हें लगातार तीन साल तक छात्रवृत्ति भी मिली।
‘गांव से बाहर निकलने के बाद बदला नजरिया’
अजय कहते हैं कि शुरुआत में उनके सपने सीमित थे, लेकिन एनआईटी में प्रवेश के बाद सोच बदल गई। उन्होंने कहा,
“पहले लगता था कि हमारी दुनिया गांव तक ही सीमित है, लेकिन कॉलेज पहुंचने के बाद लगा कि मैं भी कुछ बड़ा कर सकता हूं।” अजय का कहना है कि जंगल उनके जीवन का अहम हिस्सा रहा है और यही जुड़ाव उन्हें वन सेवा तक लेकर आया।
सरकारी योजनाओं से मिली मदद
अजय की सफलता में राज्य सरकार की छात्रवृत्ति योजनाओं की बड़ी भूमिका रही। उन्हें लघु वनोपज संघ छात्रवृत्ति और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत आर्थिक सहायता मिली, जिससे पढ़ाई और तैयारी जारी रखने में मदद मिली।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी बधाई
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अजय गुप्ता को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता छत्तीसगढ़ के वनाश्रित परिवारों के अटूट विश्वास की जीत है। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह गर्व की बात है कि जंगलों में तेंदूपत्ता और महुआ संग्रहित करने वाला युवा आज उन्हीं वनों के संरक्षण की जिम्मेदारी संभालेगा।”
वन मंत्री बोले- हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने भी अजय को फोन कर बधाई दी। उन्होंने कहा कि अजय की उपलब्धि वनांचल के हजारों परिवारों के सपनों का प्रतीक है। अजय गुप्ता आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य हासिल करने का सपना देखते हैं।
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Raipur: पेयजल संकट पर सख्त साय सरकार, निकायों को एक सप्ताह में हैंडपंप-बोरवेल सुधारने के निर्देश

Chhattisgarh water crisis: छत्तीसगढ़ में बढ़ती गर्मी और पेयजल संकट को देखते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगरीय निकायों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को एक सप्ताह के भीतर हैंडपंप, बोरवेल और जलप्रदाय प्रणालियों की जांच कर आवश्यक मरम्मत करने को कहा है। उप मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने यह परिपत्र जारी किया है।
पाइपलाइन लीकेज तुरंत सुधारने के निर्देश
विभाग ने सभी निकायों को पाइपलाइन में लीकेज और टूट-फूट तत्काल ठीक करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही नालियों से गुजरने वाली पाइपलाइन और हाउस सर्विस कनेक्शन को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने को कहा गया है ताकि पेयजल दूषित न हो। गर्मी में जलस्तर कम होने वाले वार्डों और बस्तियों को चिन्हित कर वहां वैकल्पिक जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
प्याऊ घर और पशुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था
नगरीय प्रशासन विभाग ने बस स्टैंड, बाजार और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ घर खोलने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर सामाजिक संस्थाओं और NGOs का सहयोग लेने की बात भी कही गई है। इसके अलावा पशुधन के लिए भी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके लिए तालाबों में पानी भराव को लेकर जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग से समन्वय बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
रोज होगी शिकायतों की मॉनिटरिंग
विभाग ने स्पष्ट किया है कि नगर निगमों में आयुक्त और नगर पालिकाओं में मुख्य नगर पालिका अधिकारी पेयजल संकट के नोडल अधिकारी होंगे। उन्हें प्रतिदिन शिकायतों की समीक्षा कर समय-सीमा में समाधान सुनिश्चित करना होगा। जलप्रदाय योजनाओं की मरम्मत और शिकायतों का रिकॉर्ड भी रजिस्टर में दर्ज करने को कहा गया है।
जल गुणवत्ता और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर जोर
विभाग ने हैंडपंप और पेयजल स्रोतों में ब्लीचिंग पाउडर और सोडियम हाइपोक्लोराइड का उपयोग कर पानी को कीटाणुरहित करने के निर्देश दिए हैं। ओवरहेड टैंक, जलागार और जल शोधन संयंत्रों की सफाई एवं डिस-इन्फेक्शन भी अनिवार्य किया गया है। साथ ही भू-जल स्तर बढ़ाने के लिए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और रिचार्ज पिट बनाने पर भी जोर दिया गया है।
15 दिन में पूरी हों जल योजनाएं
विभाग ने अमृत मिशन और 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत जल योजनाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।जो योजनाएं लगभग पूरी हो चुकी हैं, उन्हें अगले 15 दिनों में चालू कर नागरिकों को पेयजल सुविधा देने को कहा गया है।
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