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MP News: मुख्यमंत्री ने लाड़ली बहनों के खातों में ट्रांसफर की राशि, 1.75 लाख हितग्राहियों की संख्या में आई कमी

Bhopal: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज भोपाल में आयोजित “मकर संक्रांति उत्सव” कार्यक्रम में शामिल हुए। इसमें उन्होंने ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ अंतर्गत बहनों को ₹1576 करोड़ एवं ₹341 करोड़ की पेंशन व आर्थिक सहायता राशि हितग्राहियों के खाते में अंतरित की। विधानसभा चुनाव के बाद नई सरकार में आज पहली बार 1.29 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में 1250 रुपए राशि ट्रांसफर हुई है। हालांकि लाड़ली बहना योजना की हितग्राहियों की संख्या में आई कमी को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने कई सवाल खड़े किए हैं। दरअसल विधानसभा चुनावों से पहले अक्टूबर महीने तक योजना की 1 करोड़ 31 लाख 2 हजार 182 हितग्राही थीं, जो घटकर अब 1 करोड़ 29 लाख 26 हजार 835 रह गईं। यानी योजना में कुल 1 लाख 75 हजार 347 महिलाओं की संख्या घटी हैं।
लाड़ली बहनों की संख्या में आई कमी की वजह
महिला एवं बाल विकास विभाग ने लाड़ली बहनों की घटी संख्या के संबंध में जानकारी देते हुए आंकड़ें जारी किए हैं। विभाग के मुताबिक 154 हितग्राहियों की मृत्यु, 18136 हितग्राहियों के स्वेच्छा से लाभ त्यागने, 804 समग्र आधार डी लिंक होने के कारण और 1,56,253 हितग्राहियों के 60 साल से ऊपर हो जाने की वजह से वे योजना से बाहर हो गई हैं। ऐसे में कुल 1 लाख 75 हजार 347 हितग्राहियों की संख्या में कमी आई है।
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Indore: राजा रघुवंशी मर्डर केस में सुप्रीम कोर्ट ने सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द की, 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

नई दिल्ली: इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि ट्रायल में देरी होती है तो वह 6 महीने बाद दोबारा जमानत याचिका दाखिल कर सकती है। सोनम को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सोनम के वकील ने क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान सोनम रघुवंशी के वकील ने कहा कि मामले में 94 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल 4 गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं। उन्होंने बताया कि सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और सोनम जमानत की सभी शर्तों का पालन कर रही है।
मेघालय सरकार ने क्या कहा?
मेघालय सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गिरफ्तारी को लेकर उठाया गया तर्क तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड में आरोपी के सरेंडर का उल्लेख है और चार्जशीट में भी इसका जिक्र किया गया है। उन्होंने यह भी दलील दी कि दस्तावेज में एक कानूनी धारा का नंबर टाइप करने में हुई तकनीकी गलती के आधार पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने दिए थे दो विकल्प
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोनम से पूछा था कि वह स्वेच्छा से सरेंडर करना चाहती है या फिर अदालत उसकी जमानत रद्द करने पर फैसला सुनाए। अपने जवाब में सोनम ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि उसे झूठा फंसाया गया है और अभियोजन का पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बदलते समाज में नई परिस्थितियां सामने आ रही हैं। अदालत ने कहा कि आज की पीढ़ी के पास जानकारी अधिक हो सकती है, लेकिन दबाव से निपटने की क्षमता पहले की तुलना में कमजोर होती जा रही है।
इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, “आज जानकारी ज्यादा है, लेकिन ज्ञान कम है।” इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि WhatsApp पर साझा की जाने वाली हर जानकारी को ज्ञान नहीं माना जा सकता।
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MP News: प्रदेश में नया फायर सेफ्टी कानून लागू, बिना फायर NOC भवन चलाने पर ₹5 लाख तक जुर्माना, फायर प्लान होगा अनिवार्य

भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा ने मध्य प्रदेश फायर सेफ्टी एवं इमरजेंसी सर्विस विधेयक पारित कर दिया है। नए कानून के लागू होने के बाद अब किसी भी भवन के निर्माण और संचालन के लिए फायर सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि नए कानून से आगजनी की घटनाओं की रोकथाम, राहत एवं बचाव कार्यों की क्षमता और फायर सेफ्टी व्यवस्था को आधुनिक बनाया जा सकेगा।
फायर सेफ्टी निदेशालय बनेगा, आधुनिक फायर स्टेशन भी खुलेंगे
विधेयक के तहत राज्य में एकीकृत मध्य प्रदेश फायर सेफ्टी एवं इमरजेंसी सर्विस का गठन किया जाएगा। इसके संचालन के लिए अलग फायर सेफ्टी निदेशालय बनाया जाएगा। सरकार जरूरत और स्थानीय निकायों की सिफारिश के आधार पर आधुनिक फायर स्टेशन और फील्ड यूनिट स्थापित कर सकेगी।
अब बिना फायर NOC नहीं मिलेगा ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट
नए कानून के तहत किसी भी भवन के निर्माण से पहले फायर प्लान की मंजूरी और फायर एनओसी (No Objection Certificate) लेना अनिवार्य होगा। बिना फायर एनओसी के किसी भी भवन को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (भवन उपयोग की अनुमति) जारी नहीं किया जाएगा।
निजी एजेंसियां भी करेंगी फायर ऑडिट
सरकार निजी विशेषज्ञ एजेंसियों को लाइसेंस देगी। ये एजेंसियां फायर प्लान तैयार करेंगी, फायर सेफ्टी ऑडिट करेंगी और थर्ड पार्टी फायर सेफ्टी सर्टिफिकेशन जारी करेंगी। इसके अलावा एक ही परिसर या व्यावसायिक क्षेत्र में स्थित कई भवनों के लिए साझा फायर सेफ्टी सिस्टम विकसित करने की भी अनुमति होगी, जिससे निर्माण लागत कम होगी।
आपात स्थिति में किसी भी जल स्रोत से ले सकेंगे पानी
कानून में यह भी प्रावधान किया गया है कि आग लगने जैसी आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड की टीम किसी भी सरकारी या निजी जल स्रोत से बिना शुल्क पानी ले सकेगी, ताकि राहत और बचाव कार्य में देरी न हो।
किस नियम पर कितना जुर्माना?
- आग लगने की घटना को लेकर अफवाह फैलाने पर ₹20,000 तक जुर्माना।
- फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी करने पर ₹50,000 तक जुर्माना।
- उल्लंघन जारी रखने पर ₹5,000 प्रतिदिन अतिरिक्त जुर्माना।
- बिना फायर NOC और स्वीकृत फायर प्लान के भवन संचालित करने पर ₹5 लाख तक जुर्माना।
- प्रशासन द्वारा सील किए गए भवन की सील तोड़ने पर ₹5 लाख तक जुर्माना।
- ड्यूटी में लापरवाही करने वाले फायर कर्मियों पर 3 माह तक की जेल या 3 माह के वेतन की कटौती।
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MP Cabinet: मध्य प्रदेश में UCC लागू करने की तैयारी, कैबिनेट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड विधेयक-2026 के ड्राफ्ट को दी मंजूरी

MP Cabinet: मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक-2026 के ड्राफ्ट को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। अब इसे विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा, जिसकी शुरुआत सोमवार से हो रही है।
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सरकार विधेयक को सदन में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि समानता भारतीय संस्कृति और मूल्यों का अभिन्न हिस्सा रही है और इसी भावना के अनुरूप सरकार यह कदम उठा रही है।
उत्तराखंड के बाद MP भी बढ़ा आगे
देश में उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य है। वहीं गुजरात और असम अपनी-अपनी विधानसभाओं से यूसीसी विधेयक पारित कर चुके हैं। अब मध्य प्रदेश भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
भोपाल के इतिहास का भी किया जिक्र
कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने भोपाल के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भोपाल का इतिहास राजा भोज, परमार राजवंश और गोंड शासकों से जुड़ा रहा है। उन्होंने रानी कमलापति, राजा निजाम शाह और दोस्त मोहम्मद खान के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि भोपाल विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं का संगम रहा है।
देश में UCC की स्थिति
- उत्तराखंड: जनवरी 2025 से UCC लागू।
- गुजरात: मार्च 2026 में UCC विधेयक पारित।
- असम: मई 2026 में UCC विधेयक विधानसभा से पास
- गोवा: पुर्तगाली सिविल कोड के तहत पहले से समान नागरिक कानून लागू।
क्या है UCC?
समान नागरिक संहिता (UCC) का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करना है। वर्तमान में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं।
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MP News: 4 लाख पेंशनर्स को बड़ी राहत, अब DR बढ़ाने के लिए छत्तीसगढ़ की मंजूरी का इंतजार नहीं, समय पर मिलेगा महंगाई राहत का लाभ

Bhopal: मध्यप्रदेश के करीब 4 लाख पेंशनर्स के लिए राहत भरी खबर है। अब केंद्र सरकार जैसे ही महंगाई राहत (Dearness Relief-DR) में बढ़ोतरी करेगी, मध्यप्रदेश सरकार उसे लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की सहमति का इंतजार नहीं करेगी। नई व्यवस्था लागू होने से वर्षों से चली आ रही देरी खत्म होगी और पेंशनर्स को समय पर बढ़ी हुई महंगाई राहत का लाभ मिल सकेगा।
यह फैसला मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकारों की आपसी सहमति से लागू किया गया है। अब दोनों राज्य केंद्र सरकार के फैसले के बाद अपने-अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से डीआर घोषित कर उसका भुगतान कर सकेंगे।
25 साल पुरानी व्यवस्था खत्म
साल 2000 में छत्तीसगढ़ के गठन के बाद दोनों राज्यों के पेंशनर्स को महंगाई राहत देने के लिए दोनों सरकारों की सहमति अनिवार्य कर दी गई थी। इस प्रक्रिया के कारण कई बार डीआर बढ़ने के बावजूद पेंशनर्स को 6-6 महीने तक इंतजार करना पड़ता था। नई व्यवस्था के बाद यह बाध्यता समाप्त हो गई है।
कार्यकारी आदेश से लागू होगा फैसला
मध्यप्रदेश के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी और छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अब महंगाई राहत लागू करने के लिए किसी विधायी संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी। दोनों राज्य कार्यकारी आदेश जारी कर स्वतंत्र रूप से डीआर लागू कर सकेंगे।
हालांकि, दोनों राज्यों के बीच वित्तीय भार से जुड़ी जानकारी साझा की जाएगी, लेकिन महंगाई राहत लागू करने के लिए एक-दूसरे की मंजूरी लेना जरूरी नहीं होगा।
केंद्र से अधिक DR नहीं दे सकेंगे
नई व्यवस्था के तहत दोनों राज्य केंद्र सरकार द्वारा घोषित महंगाई राहत की दर से अधिक डीआर नहीं दे सकेंगे। यानी डीआर की अधिकतम सीमा केंद्र सरकार की घोषणा के अनुरूप ही रहेगी।
वित्त मंत्री बोले- समय पर मिलेगा लाभ
उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्णय से पेंशनर्स को समय पर महंगाई राहत मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि इस फैसले से अनावश्यक देरी समाप्त होगी और प्रदेश के करीब 4 लाख पेंशनर्स तथा उनके परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।
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MP Weather: मध्य प्रदेश में बारिश की रफ्तार थमी, 35 जिलों में सामान्य से कम वर्षा, पूर्वी हिस्से में सूखे जैसे हालात

Bhopal: मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार पिछले एक सप्ताह से धीमी पड़ गई है। लगातार सात दिन से कहीं भी भारी या अति भारी बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश के कई इलाकों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। स्थिति यह है कि जबलपुर समेत 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। सबसे अधिक असर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में दिखाई दे रहा है, जबकि पश्चिमी जिले फिलहाल बेहतर स्थिति में हैं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 270.3 मिमी होनी चाहिए थी। यानी अब तक प्रदेश में 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
पूर्वी MP में सबसे ज्यादा कमी
मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश की सबसे अधिक कमी दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 24 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। इसके विपरीत भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभागों में सामान्य से करीब 2 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है।
19 जुलाई के बाद बदल सकता है मौसम
मौसम विभाग का अनुमान है कि 19 जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होगा। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में नया मौसम तंत्र बनने और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के सक्रिय होने से मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां फिर तेज हो सकती हैं।
जुलाई के दूसरे पखवाड़े में अच्छी बारिश की उम्मीद
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल पूरे प्रदेश में मानसून की स्थिति पूरी तरह खराब नहीं है, लेकिन पूर्वी जिलों में वर्षा की कमी कृषि और जल संसाधनों के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि बनने वाली मौसम प्रणालियां अनुकूल रहीं, तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।
जून के बाद जुलाई में भी बारिश का ग्राफ कमजोर
मौसम विभाग के अनुसार, जून में भी सामान्य से कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति में कुछ सुधार आया, लेकिन पिछले सात दिनों से बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण लगातार तीन दिन से प्रदेश का वर्षा प्रतिशत फिर सामान्य से नीचे चला गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जुलाई मानसून का सबसे अहम महीना होता है और इसी दौरान प्रदेश में पूरे सीजन की करीब 40 प्रतिशत बारिश होती है। ऐसे में आने वाले दिनों की बारिश खेती और जलाशयों दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेगी।
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