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कभी नरेंद्र मोदी को आतंकियों ने दी थी लाल चौक पर झंडा फहराने की चुनौती, अब पूरे कश्मीर में लहराएगा तिरंगा
नई दिल्ली: मोदी सरकार ने आर्टिकल 370 के एक खंड को छोड़कर सभी को खत्म कर देश के माथे पर लगे 70 साल पुराने कलंक को धो डाला। सरकार के इस फैसले से अब जम्मू-कश्मीर न विशेष राज्य रह गया है, न उसका अलग संविधान होगा, न अलग झंडा और न अलग निशान। केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए जम्मू कश्मीर में अब भारतीय संविधान के सभी प्रावधान लागू होंगे। इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो काफी चर्चा में है, जिसमें वो बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के साथ लाल चौक पर तिरंगा फहराते नजर आ हैं। यहां तिरंगा फहराने को लेकर आतंकवादियों ने उन्हें घाटी में पोस्टर लगाकर खुली चुनौती देते हुए लिखा था कि ‘किसने अपनी मां का दूध पिया है, जो कि 26 जनवरी को 11 बजे श्रीनगर के लाल चौक पर आकर के तिरंगा झंडा फहरा कर जिंदा वापिस जाए।’
https://youtu.be/qGEIXyWwz44
नरेंद्र मोदी और मुरली मनोहर जोशी ने दिया था मुंहतोड़ जवाब
बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के साथ कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक एकता यात्रा पर निकले नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद की अपनी सभा में आतंकवादियों की खुली चुनौती को न सिर्फ स्वीकार किया, बल्कि श्रीनगर के लाल चौक पर जाकर 26 जनवरी 1992 को तिरंगा झंडा फहराया।
https://youtu.be/sVt9qVNmGhA
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BRICS Summit 2026: नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद पर सख्त रुख, पहलगाम हमले की निंदा

नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई और वैश्विक शासन में सुधार पर सहमति जताई है। नई दिल्ली घोषणा में आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा करते हुए आतंकियों की फंडिंग रोकने, सुरक्षित ठिकाने खत्म करने और आतंकियों तथा उनके समर्थकों की जवाबदेही तय करने पर जोर दिया गया है। यह सहमति ऐसे समय बनी है, जब BRICS के भीतर पश्चिम एशिया के संघर्ष को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद थे। ईरान और UAE अलग-अलग पक्षों में हैं, इसके बावजूद भारत की कोशिशों से संयुक्त घोषणा पर सहमति बनी।
पहलगाम हमले की निंदा, आतंक के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
BRICS घोषणा में 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी, की कड़ी निंदा की गई है। आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोड़ने का विरोध किया गया है। घोषणा में आतंकवाद, उसकी फंडिंग, सीमा पार आवाजाही और आतंकियों को सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के तहत Comprehensive Convention on International Terrorism को जल्द अंतिम रूप देने की मांग भी दोहराई गई है।
आतंकियों को पनाह और फंडिंग देने वालों पर कार्रवाई
BRICS देशों ने आतंकवाद से जुड़े पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की जरूरत बताई है। इसमें आतंकियों तक पहुंचने वाली फंडिंग रोकना, सुरक्षित ठिकाने खत्म करना और आतंकी संगठनों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई शामिल है। घोषणा में आतंकवाद से निपटने के लिए BRICS Counter-Terrorism Working Group और संबंधित तंत्र के जरिए सहयोग मजबूत करने की बात भी कही गई है।
एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों पर भी चिंता
नई दिल्ली घोषणा में एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं को लेकर भी चिंता जताई गई। BRICS देशों ने नियम आधारित और निष्पक्ष वैश्विक व्यापार व्यवस्था की जरूरत बताई तथा व्यापारिक कदमों को WTO के नियमों के अनुरूप रखने पर जोर दिया।
PM मोदी का संदेश- अगले 20 साल का एजेंडा तैयार करें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS के 20 साल पूरे होने के मौके पर समूह के लिए अगले दो दशकों का महत्वाकांक्षी एजेंडा तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि BRICS को अपने फैसलों को जमीन पर उतारने के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। मोदी ने AI, साइबरस्पेस, अंतरिक्ष और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नियम बनाने की प्रक्रिया में ग्लोबल साउथ की बराबर भागीदारी की जरूरत बताई।
युवाओं और नाविकों के लिए भी पहल का प्रस्ताव
प्रधानमंत्री ने युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय बातचीत तथा कानून से जुड़े विषयों की ट्रेनिंग देने का सुझाव दिया। उन्होंने समुद्र में संकट में फंसे नाविकों के लिए देशों के बीच एक इमरजेंसी नेटवर्क बनाने की बात भी रखी, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें चिकित्सा सहायता, परिवार से संपर्क और सुरक्षित निकासी उपलब्ध कराई जा सके। BRICS मंच पर भारत ने समुद्री सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा को भी प्रमुखता दी है।
मोदी बोले- भविष्य साझा है तो फैसला भी सबका होना चाहिए
प्रधानमंत्री ने ग्लोबल साउथ की भूमिका बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि दुनिया का भविष्य अगर साझा है तो उसे तय करने का अधिकार भी सभी देशों के पास होना चाहिए। भारत BRICS में वैश्विक संस्थाओं में सुधार, विकासशील देशों की अधिक भागीदारी और बहुपक्षीय व्यवस्था को मजबूत करने की वकालत कर रहा है। BRICS की 2026 अध्यक्षता के लिए भारत ने “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” थीम रखी है।
7 साल बाद भारत आए शी जिनपिंग
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। उनका यह 2020 के गलवान संघर्ष के बाद पहला भारत दौरा है। इससे पहले उनकी भारत यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी। हालांकि मोदी और जिनपिंग 2025 में चीन के तियानजिन में मिल चुके हैं।
BRICS के दौरान मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक तय है। बातचीत में LAC, सीमा विवाद, व्यापार घाटा, बाजार पहुंच और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे उठने की संभावना है। चीन ने बैठक से पहले कहा है कि वह भारत के साथ मतभेदों को उचित तरीके से संभालने, संवाद बढ़ाने और सहयोग मजबूत करने के लिए तैयार है।
BRICS में भारत की कूटनीतिक परीक्षा
नई दिल्ली में हो रहा यह सम्मेलन ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब BRICS में 11 सदस्य देश हैं और समूह के भीतर पश्चिम एशिया के युद्ध, व्यापार प्रतिबंधों और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर अलग-अलग राय है। इसके बावजूद भारत संयुक्त घोषणा पर सहमति बनाने में सफल रहा। Reuters के मुताबिक, घोषणा पर सहमति बनना BRICS के भीतर मतभेदों के बावजूद एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है।
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MBBS की 13,186 सीटें बढ़ीं, देश में अब 1.40 लाख से ज्यादा सीटें; कर्नाटक में सबसे ज्यादा 1,650 का इजाफा, MP को 520 और CG को 645 नई सीटें

नई दिल्ली: मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया के बीच राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने 2026-27 के लिए संशोधित MBBS सीट मैट्रिक्स जारी कर दी है। नई मैट्रिक्स में देशभर में 13,186 MBBS सीटें बढ़ाई गई हैं। इसके साथ ही, इंस्टीट्यूट्स ऑफ नेशनल इंपोर्टेंस (INI) जैसे AIIMS और JIPMER की सीटों को छोड़कर कुल MBBS सीटों की संख्या बढ़कर 1,40,214 हो गई है।
NMC के आंकड़ों के मुताबिक पहले 1,27,028 सीटें रिन्यू हुई थीं। अब नई स्वीकृत सीटों को जोड़ने के बाद कुल संख्या 1,40,214 हो गई है। देश में MBBS मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी 836 पहुंच गई है।
सरकारी कॉलेजों में 2,786 और निजी में 10,400 सीटें बढ़ीं
संशोधित सीट मैट्रिक्स के मुताबिक सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 61,185 सीटें रिन्यू हुई थीं और इनमें 2,786 सीटों की बढ़ोतरी हुई। इससे सरकारी कॉलेजों की कुल क्षमता 63,971 सीटें हो गई। वहीं निजी मेडिकल कॉलेजों में 65,843 सीटें रिन्यू हुई थीं। इनमें 10,400 नई सीटें जुड़ने के बाद निजी कॉलेजों की कुल क्षमता 76,243 सीटें हो गई है। इस तरह कुल 13,186 अतिरिक्त सीटों में सबसे बड़ा हिस्सा निजी मेडिकल कॉलेजों का है।
कर्नाटक में सबसे ज्यादा 1,650 सीटों का इजाफा
राज्यों में MBBS सीटों की सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कर्नाटक में हुई है। यहां 1,650 सीटें बढ़ाई गई हैं। राज्य में अब कुल 15,745 MBBS सीटें हैं। इसके बाद तमिलनाडु, बिहार और उत्तर प्रदेश का नंबर है।
| राज्य | बढ़ी MBBS सीटें | कुल सीटें |
| कर्नाटक | 1,650 | 15,745 |
| तमिलनाडु | 1,250 | 14,299 |
| बिहार | 1,240 | 4,660 |
| उत्तर प्रदेश | 1,200 | 14,400 |
| राजस्थान | 1,100 | 8,280 |
| तेलंगाना | 1,010 | 10,450 |
| पश्चिम बंगाल | 975 | 7,350 |
| छत्तीसगढ़ | 645 | 3,025 |
| महाराष्ट्र | 550 | 13,249 |
| आंध्र प्रदेश | 525 | 7,615 |
| झारखंड | 520 | 1,650 |
| मध्य प्रदेश | 520 | 6,120 |
| हरियाणा | 350 | 3,060 |
| केरल | 300 | 5,754 |
| गुजरात | 250 | 7,800 |
| उत्तराखंड | 200 | 1,525 |
छत्तीसगढ़ को 645 नई सीटों का फायदा
छत्तीसगढ़ में MBBS सीटों में 645 की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ राज्य में कुल MBBS सीटों की संख्या 3,025 हो गई है। यह बढ़ोतरी राज्यों में आठवीं सबसे बड़ी है। मध्य प्रदेश में भी 520 सीटें बढ़ी हैं और अब वहां कुल 6,120 MBBS सीटें हैं।
27 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में बढ़ीं सीटें
NMC की संशोधित मैट्रिक्स में 34 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में से 27 में MBBS सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। सात राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में इस बार कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। इनमें अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली, दिल्ली, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड शामिल हैं।
काउंसलिंग में स्वीकृत सीटों से ज्यादा दाखिला नहीं
NMC ने काउंसलिंग समितियों को निर्देश दिया है कि दाखिले के लिए केवल संशोधित और स्वीकृत सीट मैट्रिक्स का ही इस्तेमाल किया जाए। यदि किसी सीट या कॉलेज के आंकड़े में कोई विसंगति मिलती है तो उसे Medical Assessment and Rating Board (MARB) के पास स्पष्टीकरण के लिए भेजा जाएगा। NMC ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत क्षमता से अधिक सीटों पर दाखिला नहीं दिया जा सकता।
NEET UG 2026 के छात्रों को बढ़े विकल्प
सीटों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब NEET UG 2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया जारी है। 13,186 अतिरिक्त सीटों के जुड़ने से MBBS में प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध सीटों का दायरा बढ़ गया है। हालांकि, किस छात्र को कौन-सी सीट मिलेगी, यह संबंधित काउंसलिंग प्रक्रिया और उम्मीदवार की मेरिट पर निर्भर करेगा।
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मोदी-पुतिन की मुलाकात आज: Su-57 की बिक्री और भारत में प्रोडक्शन पर होगी बात; S-400, ब्रह्मोस-NG और न्यूक्लियर पावर भी एजेंडे में

नई दिल्ली: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी। दोनों नेताओं की बातचीत में रक्षा सहयोग सबसे अहम मुद्दों में से एक रहने की संभावना है। खास तौर पर रूस के Su-57 स्टील्थ फाइटर की भारत को बिक्री और इसके लिए तकनीक हस्तांतरण पर चर्चा हो सकती है।
क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव पहले ही कह चुके हैं कि भारत को Su-57 बेचने का मुद्दा बैठक के एजेंडे में है। भारत की ओर से विमान के स्थानीय उत्पादन के लिए तकनीक ट्रांसफर की इच्छा भी जताई गई है और इस पर अतिरिक्त बातचीत चल रही है। यानी फिलहाल अंतिम समझौते की पुष्टि नहीं हुई है।
रात में दिल्ली पहुंचे पुतिन
पुतिन भारत पहुंचने के बाद सीधे अपने निर्धारित कार्यक्रम के तहत आगे बढ़े। दिल्ली में उनके लिए बेहद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा में उनकी अपनी सुरक्षा टीम के साथ भारतीय एजेंसियां भी तैनात हैं।BRICS सम्मेलन के लिए दिल्ली में हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। पुतिन और अन्य राष्ट्राध्यक्षों के होटल, यात्रा मार्ग और कार्यक्रम स्थलों को अलग-अलग सुरक्षा घेरे में रखा गया है।
‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ और बख्तरबंद कार भी साथ
पुतिन की यात्रा के साथ रूस की सुरक्षा व्यवस्था भी भारत पहुंची है। उनकी सुरक्षा व्यवस्था में Aurus Senat बख्तरबंद लिमोजिन और अत्याधुनिक संचार सुविधाओं से लैस ‘Flying Kremlin’ के नाम से चर्चित विशेष विमान शामिल हैं।रूसी राष्ट्रपति की टीम अपने साथ निजी शेफ और भोजन की जांच के लिए पोर्टेबल टेस्टिंग लैब भी रखती है। रिपोर्टों के मुताबिक रूसी सुरक्षा अधिकारी होटल और यात्रा मार्गों की एडवांस जांच भी कर रहे हैं।
मोदी-पुतिन की बैठक में 5 बड़े मुद्दे
1. Su-57: खरीद से आगे भारत में उत्पादन की तैयारी
भारत रूस से पांचवीं पीढ़ी के Su-57 स्टील्थ फाइटर जेट खरीदने में रुचि दिखा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा इसका भारत में उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण है। रूस ने भारत को विमान की बिक्री के साथ स्थानीय उत्पादन में सहयोग की पेशकश की है। अगर बातचीत आगे बढ़ती है तो यह भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।
2. S-400 की अंतिम खेप और रखरखाव
भारत और रूस के बीच S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अंतिम यूनिट की डिलीवरी भी चर्चा में रहेगी। भारत ने पांच S-400 सिस्टम के लिए करीब 5.43 अरब डॉलर का समझौता किया था। चार सिस्टम भारत को मिल चुके हैं और अंतिम यूनिट की डिलीवरी पर बातचीत चल रही है। इसके अलावा मौजूदा S-400 सिस्टम के रखरखाव और भविष्य की जरूरतों पर भी दोनों पक्ष चर्चा कर सकते हैं।
3. BrahMos-NG और Su-30MKI अपग्रेड
ब्रह्मोस मिसाइल के नए और हल्के संस्करण BrahMos-NG पर भी बातचीत हो सकती है। इसका उद्देश्य ऐसे प्लेटफॉर्म तैयार करना है जिन्हें हल्के लड़ाकू विमानों से भी इस्तेमाल किया जा सके। Su-30MKI के अपग्रेड पर भी दोनों देश सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। भारत की ‘सुपर सुखोई’ योजना में रडार, एवियोनिक्स और हथियार प्रणाली को आधुनिक बनाने पर जोर है।
4. परमाणु ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने पर जोर
रक्षा के अलावा परमाणु ऊर्जा भी बैठक का अहम विषय हो सकती है। रूस की रोसाटॉम कंपनी कुडनकुलम परमाणु बिजली परियोजना में भारत के साथ काम कर रही है। दोनों देशों के बीच नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र, रूसी तकनीक, उपकरणों के स्थानीयकरण और संयुक्त निर्माण को लेकर पहले से सहयोग चल रहा है।
5. रुपये-रूबल कारोबार और नए ट्रेड रूट
भारत और रूस दोनों देशों की स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने के विकल्पों पर भी चर्चा कर सकते हैं। इसका मकसद द्विपक्षीय व्यापार में भुगतान संबंधी अड़चनों को कम करना है। इसके साथ ही International North-South Transport Corridor (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक ईस्टर्न मैरीटाइम कॉरिडोर को आगे बढ़ाने पर भी जोर है। दोनों देश पहले ही इन परिवहन मार्गों के जरिए व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने पर सहमत हो चुके हैं।
BRICS से पहले क्यों अहम है मोदी-पुतिन की मुलाकात?
यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब भारत-रूस संबंधों में रक्षा के साथ ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। दोनों नेताओं ने अगस्त में बिश्केक में SCO बैठक के दौरान भी द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की थी और 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS सम्मेलन के लिए पुतिन के भारत दौरे की पुष्टि की थी। इसलिए शुक्रवार की बातचीत में किसी एक रक्षा सौदे से ज्यादा भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी के अगले चरण पर फोकस रहने की संभावना है।
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Bank Strike: आज से बैंकिंग पर असर, SBI-PNB समेत कई बैंकों में हड़ताल, 5-डे वर्किंग की मांग; कुछ राज्यों में 4 दिन शाखाएं बंद रहेंगी

नई दिल्ली: देशभर में बैंकिंग सेवाओं पर आज यानी 11 सितंबर को असर पड़ सकता है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने 5-डे बैंकिंग समेत लंबित मांगों को लेकर एक दिन की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इसका सबसे ज्यादा असर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं पर पड़ने की संभावना है। SBI समेत कई बैंकों ने ग्राहकों को संभावित व्यवधान की जानकारी दी है।
हड़ताल के बाद 12 सितंबर को दूसरा शनिवार और 13 सितंबर को रविवार है। इसके अलावा 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी की छुट्टी कई राज्यों में है। ऐसे में कुछ राज्यों में बैंक शाखाएं लगातार चार दिन बंद रह सकती हैं। हालांकि UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और ATM जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की उम्मीद है।
5-डे बैंकिंग की मांग सबसे बड़ा मुद्दा
बैंक यूनियनों की सबसे प्रमुख मांग सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग लागू करना है। 8 मार्च 2024 को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक यूनियनों के बीच हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते में 5-डे बैंकिंग के प्रस्ताव पर सहमति बनी थी।
प्रस्ताव के मुताबिक शनिवार और रविवार को छुट्टी होगी। इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक कर्मचारियों के दैनिक कामकाज के समय में करीब 40 मिनट की बढ़ोतरी की जानी है।
UFBU का कहना है कि प्रस्ताव सरकार के पास भेजे जाने के बावजूद करीब ढाई साल से अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है। 9 सितंबर तक सरकार की ओर से इसे लागू करने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी गई थी।
PLI विवाद भी हड़ताल की बड़ी वजह
बैंक यूनियनों ने नई Performance Linked Incentive (PLI) व्यवस्था को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था में वरिष्ठ अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के बीच इंसेंटिव को लेकर बड़ा अंतर पैदा होता है। हालांकि, 8 सितंबर की बातचीत के बाद वित्तीय सेवा विभाग ने स्केल IV से VIII अधिकारियों के लिए 2025-26 की PLI योजना को फिलहाल स्थगित रखने और इस मुद्दे पर द्विपक्षीय बातचीत की बात कही थी। इसके बावजूद UFBU ने 11 सितंबर की हड़ताल वापस नहीं ली, क्योंकि 5-डे बैंकिंग पर ठोस समयसीमा नहीं मिली।
UPI, मोबाइल बैंकिंग और ATM चलते रहेंगे
बैंक शाखाओं की सेवाएं प्रभावित होने के बावजूद UPI, ATM, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग जैसी डिजिटल सुविधाएं सामान्य रूप से जारी रहने की उम्मीद है। हालांकि किसी खास बैंक की तकनीकी या बैकएंड सेवा पर अलग-अलग असर हो सकता है।
पेंशन अपडेट और OPS की मांग भी शामिल
UFBU ने पेंशन से जुड़े पुराने मुद्दों को भी अपनी मांगों में शामिल किया है। यूनियनों की प्रमुख मांगों में पेंशनभोगियों के लिए पेंशन अपडेट करना, सभी पेंशनरों के लिए समान महंगाई भत्ता फार्मूला, NPS में शामिल कर्मचारियों को पुरानी पेंशन व्यवस्था में जाने का विकल्प, लंबित वेतन और सेवा संबंधी मुद्दों का समाधान शामिल हैं।
28 से 30 सितंबर फिर हड़ताल
11 सितंबर की हड़ताल के बाद भी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो UFBU ने 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल का कार्यक्रम घोषित किया है। इसके बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है। IBA और सरकार की ओर से हड़ताल टालने के लिए बातचीत और अपील की गई थी, लेकिन UFBU ने 11 सितंबर की हड़ताल वापस लेने से इनकार कर दिया। यूनियन का कहना है कि 5-डे बैंकिंग पर जब तक ठोस निर्णय या समयसीमा नहीं मिलती, आंदोलन जारी रहेगा।
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BJP ने 7 मोर्चों के प्रभारी घोषित किए, MP से लाल सिंह आर्या और गजेंद्र पटेल को जिम्मेदारी; युवा मोर्चा हरीश द्विवेदी के पास

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को और मजबूत करने के लिए अपने सात प्रमुख मोर्चों के प्रभारियों की घोषणा कर दी है। पार्टी ने युवा, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, OBC, किसान और अल्पसंख्यक मोर्चों की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेताओं को सौंपी है। खास बात यह है कि सात मोर्चा प्रभारियों में दो नेता मध्य प्रदेश से हैं। पूर्व विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता लाल सिंह आर्या को किसान मोर्चा तथा खरगोन सांसद गजेंद्र पटेल को अल्पसंख्यक मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है।
किसे कौन-सा मोर्चा मिला
- युवा मोर्चा- हरीश द्विवेदी
- महिला मोर्चा- डी. पुरंदेश्वरी
- अनुसूचित जाति मोर्चा- संजय भाटिया
- अनुसूचित जनजाति मोर्चा- सतीश पूनिया
- OBC मोर्चा- बैजयंत पांडा
- किसान मोर्चा- लाल सिंह आर्या
- अल्पसंख्यक मोर्चा- गजेंद्र पटेल
इन नियुक्तियों का उद्देश्य संबंधित मोर्चों की संगठनात्मक गतिविधियों को गति देना और राज्यों में उनकी टीम को मजबूत करना है।
कार्यकारिणी और प्रदेश टीम तैयार कराने में निभाएंगे भूमिका
नवनियुक्त मोर्चा प्रभारी संबंधित मोर्चा अध्यक्षों के साथ समन्वय कर काम करेंगे। इन्हें मोर्चों की कार्यकारिणी तैयार करने, प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारियां तय करने और राज्यों में संगठनात्मक टीम को सक्रिय करने में सहयोग की जिम्मेदारी दी गई है। BJP ने अगस्त में अपनी नई राष्ट्रीय टीम का भी ऐलान किया था, जिसमें इन नियुक्तियों में शामिल कई नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई थीं।
MP के दो नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी
लाल सिंह आर्या
मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता लाल सिंह आर्या गोहद से विधायक रह चुके हैं। वे मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे हैं और पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चे के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अगस्त 2026 में उन्हें BJP का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था।
गजेंद्र पटेल
खरगोन से लोकसभा सांसद गजेंद्र पटेल को अल्पसंख्यक मोर्चे की जिम्मेदारी दी गई है। वे 2019 और 2024 में खरगोन से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। अगस्त में उन्हें BJP का राष्ट्रीय महासचिव भी बनाया गया था।
हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चे की जिम्मेदारी
उत्तर प्रदेश के बस्ती से पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को युवा मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। वे 2014 और 2019 में बस्ती से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं और पार्टी संगठन में भी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
पुरंदेश्वरी, पूनिया और पांडा को भी अहम जिम्मेदारी
आंध्र प्रदेश की वरिष्ठ नेता डी. पुरंदेश्वरी को महिला मोर्चा का प्रभारी बनाया गया है। राजस्थान BJP के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को ST मोर्चे की जिम्मेदारी मिली है।
ओडिशा के वरिष्ठ नेता और BJP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बैजयंत पांडा को OBC मोर्चे का प्रभारी बनाया गया है। वहीं हरियाणा के राज्यसभा सांसद संजय भाटिया को SC मोर्चे की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संगठन विस्तार और चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा फैसला
BJP में मोर्चों को संगठन के सामाजिक और वर्गीय विस्तार का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। नई जिम्मेदारियों के जरिए पार्टी युवा, महिला, किसान, OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक वर्गों के बीच संगठनात्मक गतिविधियों को और सक्रिय करने की दिशा में काम करेगी।
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