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“लेट्स कोलैब छत्तीसगढ़”: क्रिएटर्स मीट अप कार्यक्रम में जुटे सैकड़ों क्रिएटर्स, 15 को मिला सम्मान

Let’s Collab Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ जनसंपर्क द्वारा नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद भवन के ऑडिटोरियम में ‘लेट्स कोलैब छत्तीसगढ़’’ क्रिएटर्स मीट अप कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ के जाने-माने सैकड़ों क्रिएटरों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ जनसंपर्क आयुक्त मयंक श्रीवास्तव और आईएएस डॉ अय्याज फकीरभाई तंबोली ने किया। कार्यक्रम में 270 से अधिक क्रिएटरों ने भाग लिया। जनसंपर्क विभाग के द्वारा अलग-अलग कैटगरी में बेहतर कंटेंट के लिए 15 लोगों को सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हए जनसंपर्क आयुक्त मयंक श्रीवास्तव ने कहा कि इस मीटअप का उदेश्य सरकार और नागरिकों के बीच एक सेतु बनाना है, खासतौर से क्रियेटिव लोगों के बीच। हम लोगों ने क्रिएटर मीट अप आयोजन इसलिए किया है क्योंकि आप लोगों की क्रिएटिविटी एक ऐसा माध्यम है, जिससे आप आम आदमी तक और ऐसे इलाकों में जहां पर प्रशासन नहीं पहुंच पाते हैं। मीटअप में सुशासन की स्थापना में सोशल मीडिया का महत्व, नई सरकार से युवाओं की उम्मीदें, सोशल मीडिया के माध्यम से राज्य सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर राय शुमारी की गई।
एक्सपर्ट्स ने दिए सुझााव और टिप्स
कार्यक्रम में आईएएस डॉ अय्याज फकीरभाई तंबोली ने शासन में सोशल मीडिया की भूमिका पर चर्चा की। इसी तरह आईपीएस अंकिता शर्मा ने सोशल मीडिया पर साइबर कानूनों के प्रभाव पर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि कभी भी किसी फर्जी वेबसाइट और ऐसे लोगों के बातों में न आए। अगर आपके साथ कोई फ्रॉड हो या कोई आपको किसी कारण से ब्लैकमेल करे तो घबराएं नहीं बल्कि पुलिस से संपर्क करें। कार्यक्रम में एसपी रायपुर संतोष सिंह ने प्रभावी पुलिसिंग में सोशल मीडिया के प्रभाव पर अपनी राय रखी। इसी तरह एएसपी पिताम्बर पटेल ने नए साइबर सुरक्षा के नियमो पर क्रिएटर्स को संबोधित किया।
“क्रिएटर्स आफ द ईयर” का मिला सम्मान
कार्यक्रम में हिमांशु यादव को Solo Influencer (Male), काजल श्रीवास को Solo Influencer (Female), अमलेश नागेश को Entertainment, आरु साहू को Entertainment (Music),अभिनव भूमरकर को Fashion & Lifestyle, वेदांशी नीतीश बंजारी को Recipe Curator(Food Blogger), भोज राज को Food Blogger, मानस पटनायक को Education, राहुल देवांगन को Tourism, गीतेश देशमुख को Infotainment, प्रमोद साहू को Art & DIYs, रवि साहू को Culture, पुष्कर साहू एवं तुषार सोलंकी को Rising Music Star, रेणुका सिंह को Emerging Story Tellers की कैटेगरी में क्रिएटर ऑफ़ द ईयर के अवार्ड से सम्मानित किया गया।
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Raipur: PWD में 1 अक्टूबर से नया टेंडर सिस्टम, नई निविदाएं अब GePNIC पर होंगी; ठेकेदारों को कराना होगा ऑनलाइन नामांकन

रायपुर: लोक निर्माण विभाग (PWD) में ई-टेंडरिंग की व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से बदलने जा रही है। इस तारीख से विभाग की सभी नई निविदाओं का सृजन और प्रकाशन GePNIC (Government e-Procurement-NIC) पोर्टल पर होगा। टेंडर जारी करने से लेकर बिड प्राप्ति, तकनीकी- वित्तीय मूल्यांकन और अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाएं भी इसी पोर्टल पर पूरी की जाएंगी। विभाग ने नई व्यवस्था शुरू होने से पहले ठेकेदारों और अधिकारियों को जरूरी तकनीकी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
ठेकेदारों को पहले कराना होगा Enrollment
नई निविदाओं में हिस्सा लेने वाले ठेकेदारों के लिए GePNIC पोर्टल पर Enrollment यानी नामांकन कराना जरूरी होगा। विभाग ने ठेकेदारों से समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करने को कहा है, ताकि 1 अक्टूबर से टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह की तकनीकी परेशानी न हो।
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वीके भतपहरी ने विभागीय अधिकारियों के साथ ठेकेदार संघ के पदाधिकारियों को भी पत्र भेजकर नई व्यवस्था की जानकारी ठेकेदारों तक पहुंचाने और उन्हें समय पर नामांकन कराने के लिए कहा है।
टेंडर की पूरी प्रक्रिया नए पोर्टल पर
नई व्यवस्था में केवल टेंडर का प्रकाशन ही नहीं होगा, बल्कि पूरी निविदा प्रक्रिया GePNIC पर संचालित होगी। इसमें निविदा का सृजन और प्रकाशन, बिड प्राप्ति, तकनीकी मूल्यांकन, वित्तीय मूल्यांकन, संबंधित ऑनलाइन स्वीकृति और अन्य कार्यवाही शामिल हैं।
पुराने पोर्टल के टेंडर 31 मार्च तक निपटेंगे
30 सितंबर 2026 तक पुराने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर प्रकाशित निविदाओं की बिड प्राप्ति, मूल्यांकन, स्वीकृति और अन्य लंबित ऑनलाइन कार्यवाही 31 मार्च 2027 तक उसी पुराने पोर्टल पर पूरी की जाएगी। इसके बाद पुराने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर निविदाओं से संबंधित कोई नई कार्रवाई नहीं होगी।
अधिकारियों की भी बनेगी नई डिजिटल व्यवस्था
नई व्यवस्था के लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को भी तकनीकी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी निविदा आमंत्रण अधिकारियों, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन समिति के सदस्यों और संबंधित कर्मचारियों को यूजर आईडी, रोल मैपिंग और डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) की प्रक्रिया तत्काल पूरी करनी होगी। विभाग का जोर है कि 1 अक्टूबर से नई व्यवस्था बिना तकनीकी या प्रशासनिक बाधा के सुचारू रूप से शुरू हो।
ठेकेदारों के लिए बदल जाएगा टेंडर प्लेटफॉर्म
1 अक्टूबर से PWD की नई निविदाओं में भाग लेने वाले ठेकेदारों को पुराने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के बजाय GePNIC को नए टेंडर प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल करना होगा। विभाग ने अधिकारियों और ठेकेदारों से निर्धारित समय-सीमा में सभी तैयारियां पूरी करने को कहा है।
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छत्तीसगढ़ में कैंसर अब नोटिफाइड डिजीज: हर केस की जानकारी सरकार को देना जरूरी

रायपुर: छत्तीसगढ़ में कैंसर के मामलों की निगरानी और समय पर इलाज की व्यवस्था मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने कैंसर को ‘नोटिफाइड डिजीज’ यानी अधिसूचित बीमारी घोषित किया है। अब सरकारी और निजी अस्पतालों समेत पैथोलॉजी लैब, मेडिकल कॉलेज, डायग्नोस्टिक सेंटर और कैंसर देखभाल से जुड़े संस्थानों को कैंसर के मामलों की जानकारी सरकार को देना अनिवार्य होगा।
नई व्यवस्था के तहत कैंसर की पुष्टि होने के बाद संबंधित संस्थान को तय प्रक्रिया के अनुसार इसकी जानकारी एक महीने के भीतर संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी। इससे राज्य में कैंसर के मामलों का केंद्रीकृत और ज्यादा सटीक डेटा तैयार करने में मदद मिलेगी।
संदिग्ध मरीजों की भी होगी जांच
अगर किसी मरीज में कैंसर का संदेह होता है तो इलाज करने वाले डॉक्टर को उसे जरूरी जांच के लिए रेफर करना होगा। जांच में कैंसर की पुष्टि होने के बाद पैथोलॉजिस्ट को निर्धारित कैंसर नोटिफिकेशन फॉर्म भरना होगा। इस रिपोर्ट को भी बीमारी की पहचान के एक महीने के भीतर संबंधित स्वास्थ्य प्राधिकरण को उपलब्ध कराना होगा।
अभी कैंसर रजिस्ट्री में रिपोर्टिंग स्वैच्छिक
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अब तक राज्य में कैंसर के मामलों की जानकारी मुख्य रूप से कैंसर रजिस्ट्री के जरिए स्वैच्छिक रूप से दर्ज की जाती रही है। इससे कई मामलों के रिकॉर्ड में शामिल नहीं होने की संभावना रहती है।
नई व्यवस्था के बाद कैंसर से जुड़े मामलों का डेटा सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। इससे बीमारी के पैटर्न, मरीजों की संख्या और अलग-अलग क्षेत्रों में कैंसर के प्रसार की बेहतर निगरानी हो सकेगी।
डेटा के आधार पर बनेगी रोकथाम की रणनीति
सरकार इस डेटा का इस्तेमाल कैंसर की रोकथाम और नियंत्रण से जुड़ी नीतियां बनाने में करेगी। इसके अलावा उपचार सुविधाओं के विस्तार, स्क्रीनिंग कार्यक्रमों, रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर विकसित करने में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा। नियमित डेटा से यह भी पता लगाया जा सकेगा कि अलग-अलग प्रकार के कैंसर के मामलों और उनसे होने वाली मौतों में समय के साथ क्या बदलाव हो रहा है।
26 जिलों में डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर
प्रदेश में फिलहाल 3 सरकारी कैंसर अस्पताल और 2 सरकारी रेडियोथेरेपी यूनिट हैं। इसके अलावा 26 जिलों में जिला डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 5 और जिलों में ऐसे सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव भेजा है। स्वास्थ्य केंद्रों में कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए स्क्रीनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।
सरकारी से निजी संस्थानों तक लागू होगी व्यवस्था
नोटिफिकेशन के दायरे में राज्य और केंद्र सरकार के अस्पतालों के साथ निजी अस्पताल, डिस्पेंसरी, मेडिकल कॉलेज और अन्य स्वास्थ्य संस्थान आएंगे। इसके अलावा पैथोलॉजी और हेमेटोलॉजी लैब, इमेजिंग सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर तथा कैंसर की देखभाल से जुड़े संस्थानों और एनजीओ को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी देनी होगी। कैंसर की जांच और इलाज से जुड़े डॉक्टर तथा पैथोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी होगी कि सामने आने वाले मामलों की रिपोर्ट तय समयसीमा में उपलब्ध कराई जाए।
ढाई साल में 17,611 कैंसर केस दर्ज
राज्य में कैंसर के बढ़ते मामलों का अंदाजा स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 1 अप्रैल 2024 से जून 2026 के बीच प्रदेश में कुल 17,611 कैंसर केस दर्ज किए गए। इनमें 4,465 मुख कैंसर, 210 गले के कैंसर, 252 जीभ के कैंसर, 1,038 फेफड़ों के कैंसर, 2,633 स्तन कैंसर, 2,200 गर्भाशय कैंसर, 2,560 पेट के कैंसर, 4,253 अन्य प्रकार के कैंसर के मामले शामिल हैं। नई नोटिफिकेशन व्यवस्था से सरकार के पास कैंसर के मामलों का ज्यादा व्यापक डेटाबेस उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे स्क्रीनिंग, इलाज और कैंसर नियंत्रण की योजनाओं को जरूरत के मुताबिक तैयार करने में मदद मिल सकती है।FEA
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श्रमिक महासम्मेलन: CM साय की 3 बड़ी घोषणाएं, ई-बाइक योजना शुरू होगी; ई-रिक्शा के लिए सहायता ₹1 लाख हुई

रायपुर: विश्वकर्मा जयंती पर रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक महासम्मेलन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रमिक हित में तीन बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि श्रमिकों के परिश्रम से ही विकसित छत्तीसगढ़ की नींव मजबूत हो रही है। सरकार का लक्ष्य श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, रोजगार और उनके बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर देना है।
शहरों में बनेंगे आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र
CM साय ने शहरों में काम की तलाश में आने वाले श्रमिकों के लिए आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र बनाने की घोषणा की। यहां बैठने की व्यवस्था के साथ पेयजल, मोबाइल चार्जिंग और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। पंजीकृत श्रमिकों के लिए ई-बाइक सहायता योजना भी शुरू की जाएगी। इसका उद्देश्य काम के लिए रोज लंबी दूरी तय करने वाले श्रमिकों का आवागमन आसान बनाना है। इसके अलावा असंगठित क्षेत्र के रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा खरीदने के लिए मिलने वाली सहायता राशि ₹50 हजार से बढ़ाकर ₹1 लाख करने की घोषणा की गई।
1.43 लाख श्रमिकों के खातों में पहुंची ₹51.32 करोड़ की सहायता
महासम्मेलन में विभिन्न श्रमिक कल्याण योजनाओं के तहत 1.43 लाख से अधिक श्रमिकों के बैंक खातों में ₹51.32 करोड़ से ज्यादा की राशि DBT के जरिए ट्रांसफर की गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि श्रम विभाग के तीन मंडलों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों के लिए 67 कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं। पिछले ढाई साल में इन योजनाओं के जरिए ₹1,000 करोड़ से अधिक की सहायता श्रमिकों तक पहुंचाई गई है।
100 श्रमिक दीदियों को मिली ई-रिक्शा की चाबी
‘दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना’ के तहत 100 श्रमिक महिलाओं को ई-रिक्शा की चाबी सौंपी गई। मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर ई-रिक्शा रवाना किए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना परिवारों को आर्थिक रूप से मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। मुख्यमंत्री ने श्रमिक बहनों के साथ बैठकर भोजन भी किया और उनके परिवार, रोजगार तथा बच्चों की पढ़ाई के बारे में जानकारी ली।
हजारों श्रमिकों के साथ जलाया ‘आशीर्वाद का दीया’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने महासम्मेलन में हजारों श्रमिकों के साथ ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि श्रमिकों के साथ उनके परिवारों को भी आगे बढ़ने के अवसर मिलें और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
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झीरम घाटी केस में 10 दोषियों को फांसी, 13 साल बाद NIA कोर्ट का फैसला, हाईकोर्ट की मंजूरी के बाद ही सजा लागू होगी

जगदलपुर: 2013 के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने बुधवार को सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। इनमें 2 महिलाएं और 8 पुरुष शामिल हैं। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था और सजा की घोषणा के लिए 16 सितंबर की तारीख तय की थी।
25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादियों ने हमला किया था। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक हमले में 27 लोगों की मौत और 38 लोग घायल हुए थे। मृतकों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और 10 सुरक्षाकर्मी शामिल थे।
13 साल चली सुनवाई, 101 गवाहों के बयान
मामले की सुनवाई करीब 13 साल चली। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए और बड़ी संख्या में दस्तावेज व अन्य साक्ष्य पेश किए। इस मामले में कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जिसके बाद 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही। NIA की जांच में कई अन्य आरोपियों के नाम भी सामने आए थे, जो फरार बताए गए हैं। एजेंसी ने 2014 में इस मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की थी और बाद में सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की गई।
फांसी की सजा अभी अंतिम नहीं
अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद भी दोषियों को तुरंत फांसी नहीं दी जाएगी। मौत की सजा के लिए हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी होगी। दोषियों को फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील का अधिकार भी है। बचाव पक्ष पहले ही फैसले को चुनौती देने की बात कह चुका है।
अभियोजन पक्ष ने दोषियों के लिए अधिकतम सजा यानी मृत्युदंड की मांग की थी। वहीं बचाव पक्ष ने सजा में नरमी की मांग की थी। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोषियों को सजा सुनाई।
ऐसे हुआ था झीरम घाटी हमला
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से लौट रही थी। काफिला दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था, तभी माओवादियों ने घात लगाकर हमला कर दिया। NIA के रिकॉर्ड के मुताबिक हमले की शुरुआत काफिले पर विस्फोट और घात लगाकर किए गए हमले से हुई। इसके बाद माओवादियों ने गोलीबारी की और हथियार भी लूटे। इस हमले में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं समेत सुरक्षाकर्मियों की जान गई।
महेंद्र कर्मा समेत कई बड़े नेता मारे गए थे
हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और कांग्रेस नेता उदय मुदलियार समेत कई लोग मारे गए थे। महेंद्र कर्मा नक्सलवाद के खिलाफ चलाए गए सलवा जुडूम आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड में इस हमले में 27 लोगों की मौत दर्ज है। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 27 से 29 तक बताई गई है।
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Chhattisgarh: सरकारी योजनाओं के पैसे का नया सिस्टम, एक योजना-एक बैंक खाता; जरूरत पर ही हितग्राही-वेंडर को भुगतान, रियल टाइम होगी निगरानी

रायपुर: छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार की योजनाओं के फंड मैनेजमेंट का तरीका बदलने जा रहा है। राज्य योजनाओं के लिए State Single Nodal Agency (S-SNA) मॉडल लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य अलग-अलग खातों में लंबे समय तक पड़ी सरकारी राशि को कम करना और योजना के लिए जरूरत पड़ने पर ही संबंधित हितग्राही या वेंडर को भुगतान करना है।
इस व्यवस्था में प्रत्येक चिन्हित योजना के लिए एक S-SNA Mother Account होगा। क्रियान्वयन एजेंसियों के लिए Zero Balance Subsidiary Account यानी ZBSA लिंक किए जाएंगे। राशि Mother Account में रहेगी और भुगतान वास्तविक जरूरत के मुताबिक किया जाएगा।
एक योजना-एक बैंक खाता, लगभग जीरो फ्लोट
S-SNA मॉडल का प्रमुख सिद्धांत Just-in-Time Fund Release है। यानी योजना की पूरी राशि पहले से अलग-अलग विभागीय या क्रियान्वयन एजेंसियों के खातों में डालने के बजाय जरूरत के समय ही भुगतान सीमा उपलब्ध कराई जाएगी।
वित्त विभाग के दिशा-निर्देश के मुताबिक कोषालय से राशि अनुमोदित और मैप किए गए S-SNA खाते में जाएगी। इसके बाद S-SNA संबंधित Implementing Agencies के लिए Drawing Limit तय करेगा। एजेंसियां इसी सीमा के भीतर राशि का उपयोग कर सकेंगी।
सीधे हितग्राही और वेंडर को भुगतान
नई व्यवस्था में जिला, ब्लॉक, पंचायत और ग्राम स्तर की चिन्हित एजेंसियों को भी शामिल किया जा सकेगा। Mother-Child Account व्यवस्था के तहत ZBSA खाते भुगतान प्रक्रिया से जुड़े रहेंगे, लेकिन राशि को लंबे समय तक इन खातों में रखने के बजाय वास्तविक भुगतान के समय उपयोग किया जाएगा। इसमें DBT और Non-DBT दोनों तरह के भुगतान शामिल किए जा सकेंगे।
रियल टाइम दिखेगा पैसा कहां गया
S-SNA से योजनाओं के फंड फ्लो और खर्च की निगरानी डिजिटल तरीके से की जा सकेगी। विभागों को उपलब्ध राशि, जारी की गई खर्च सीमा, वास्तविक व्यय और अप्रयुक्त राशि की जानकारी अधिक स्पष्ट रूप से मिल सकेगी।
डिजिटल ऑडिट ट्रेल और Maker-Checker व्यवस्था वित्तीय लेन-देन की निगरानी को मजबूत करेगी। इससे अनधिकृत भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं की पहचान में मदद मिलेगी।
सरकारी पैसा पड़ा नहीं रहेगा, जरूरत पर होगा इस्तेमाल
राज्य सरकार का जोर सरकारी खातों में लंबे समय तक निष्क्रिय पड़ी राशि को कम करने पर है। S-SNA व्यवस्था में योजना की जरूरत और वास्तविक भुगतान के बीच अंतर को कम करने की कोशिश की जाएगी।
इससे सरकार को उपलब्ध नकदी का बेहतर प्रबंधन करने में मदद मिलेगी। साथ ही ऐसी स्थिति को कम करने का लक्ष्य है जिसमें एक तरफ योजनाओं के लिए संसाधन जुटाने पड़ें और दूसरी तरफ सरकारी राशि अलग-अलग खातों में अप्रयुक्त पड़ी रहे।
ब्याज से होने वाली आय राज्य की संचित निधि में जाएगी
S-SNA व्यवस्था में योजनाओं की राशि के प्रबंधन से मिलने वाला ब्याज राज्य की संचित निधि में जमा किया जाएगा। इससे सरकारी धन के वित्तीय प्रबंधन को एकीकृत करने में मदद मिलेगी।
केंद्र की SNA व्यवस्था की तर्ज पर मॉडल
राज्य सरकार ने इस मॉडल को केंद्र प्रायोजित योजनाओं में लागू Single Nodal Agency व्यवस्था के अनुरूप तैयार किया है। राज्य योजनाओं में फंड फ्लो State Treasury/e-Kosh से S-SNA खाते तक जाएगा और उसके बाद वास्तविक भुगतान की जरूरत के अनुसार राशि जारी होगी।
वित्त विभाग ने S-SNA मॉडल के लिए योजना की पहचान, वित्त विभाग से अनुमोदन, Scheme Code, e-Kosh Mapping, S-SNA और ZBSA खाते खोलने तथा Treasury से भुगतान तक की चरणबद्ध प्रक्रिया निर्धारित की है।
किन योजनाओं पर लागू होगा?
यह व्यवस्था राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित चिन्हित योजनाओं और विभागों की अन्य चयनित योजनाओं पर लागू की जा सकेगी। DBT और Non-DBT दोनों प्रकार की योजनाओं तथा जिला, ब्लॉक, पंचायत और ग्राम स्तर की Implementing Agencies को इसके दायरे में लाया जा सकता है। वहीं PFMS-SNA/SPARSH के तहत आने वाली केंद्र प्रायोजित योजनाएं, Central Sector योजनाएं और ऐसी योजनाएं जिनमें DDO सीधे e-Kosh से भुगतान करते हैं, इस व्यवस्था से बाहर रहेंगी।
चरणबद्ध तरीके से होगा क्रियान्वयन
S-SNA व्यवस्था में मुख्य रूप से ये चरण होंगे-
- योजना की पहचान
- वित्त विभाग से अनुमोदन
- S-SNA Scheme Code आवंटन
- e-Kosh Mapping
- S-SNA और ZBSA खाते खोलना
- Treasury से S-SNA और Implementing Agency के जरिए हितग्राही/वेंडर को भुगतान
आधिकारिक वित्त विभाग के रिकॉर्ड में S-SNA मॉडल के लिए 31 अगस्त 2026 का स्थायी वित्त निर्देश भी दर्ज है।सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था से योजनाओं के फंड फ्लो को अधिक केंद्रीकृत और डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा तथा सरकारी राशि के उपयोग में वित्तीय अनुशासन बढ़ेगा।
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