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केंद्र के खिलाफ कांग्रेस का हल्ला बोल, राहुल बोले- ‘आज देश में दो हिंदुस्तान, एक कारोबारियों का, दूसरा मजदूर और किसानों का‘

Congress Halla Bol Rally:दिल्ली के रामलीला मैदान में महंगाई, बेरोजगारी और जीएसटी के मुद्दे पर कांग्रेस की हल्ला बोल रैली आयोजित की गई है। इस रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी, मोदी सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा है कि महंगाई, बेरोजगारी का डर देश में बढ़ता जा रहा है। इस कारण हिंदुस्तान में नफरत बढ़ती जा रही है। इससे लोग बंटते हैं, देश बंटता है और देश कमजोर होता है।
https://twitter.com/RahulGandhi/status/1566340644146380800?s=20&t=810jiwqDYWjCwMknAY0TsQ
खाने पीने, दूध व पेट्रोल के दामों पर सरकार को घेरा
राहुल ने 2014 से अभी तक के खाने पीने, दूध व पेट्रोल के दामों का अंतर गिनाया। महंगाई पर आंकड़े गिनाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि रसोई गैस और पेट्रोल डीजल, दूध के दाम वर्ष 2014 में सस्ते थे और आज महंगे हो गए। उन्होंने कहा कि चीन के मुद्दे, बेरोजगारी के मुद्दे पर हम संसद में बात नहीं कर सकते। राहुल ने अपने संबोधन में कहा कि दो उद्योगपतियों के समर्थन के बिना नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते।
मैं ईडी से नहीं डरता- राहुल गांधी
राहुल ने कहा कि जो भी नरेंद्र मोदी के खिलाफ काम करना चाहता है, चाहे वो विपक्ष हो या कोई और उनके खिलाफ ईडी और सीबीआई लगा दिए जाते हैं। मुझे 55 घंटे ईडी ने बिठाया। राहुल ने कहा कि मैं आपकी ईडी से नहीं डरता चाहे 55 घंटे मुझे बिठाओ या 5 साल बिठाओ। जो संविधान है इसकी रक्षा करना और इसे बचाने का काम, देश के हर नागरिक को करना पड़ेगा। यह नहीं किया, आज नहीं खड़े हुए तो फिर यह देश नहीं बचेगा।
‘देश में आज दो हिंदुस्तान’
राहुल गांधी ने कहा कि आज दो हिंदुस्तान बन गए हैें। एक मजदूर, गरीबों, किसानों और बेरोजगार युवाओं का। इनके देश में कोई सपना नहीं देखा जा सकता। खून पसीना देने के बाद भी फायदा नहीं मिलेगा। और इसी हिंदुस्तान के अंदर दूसरा देश 10-15 अरबपतियों का है, उसमें जो भी आप हिंदुस्तान में आप चाहते हो, आपको मिल जाएगा।
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NEET: सुप्रीम कोर्ट में बोली सरकार-NEET परीक्षा सिस्टम सुरक्षित, SC ने कहा- UPSC जैसा मजबूत सिस्टम बनाने की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि NEET परीक्षा की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित है और इसमें सेंध लगाना आसान नहीं है। सरकार के मुताबिक प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने तक कई स्तरों पर गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था लागू है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को UPSC की तर्ज पर और मजबूत परीक्षा व्यवस्था विकसित करने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि सिस्टम में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे अनुभवी अधिकारियों के तबादले के बाद भी परीक्षा कराने का संस्थागत अनुभव बना रहे।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट, FAIMA और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। याचिकाओं में NTA को भंग करने और पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा- UPSC जैसा सिस्टम बनाएं
सुप्रीम कोर्ट ने करीब तीन महीने बाद एक बार फिर NTA की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि NTA को UPSC की तरह ऐसा सिस्टम विकसित करना चाहिए, जिसमें परीक्षा कराने का अनुभव अधिकारियों के ट्रांसफर होने के बावजूद संस्था के पास बना रहे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कागज पर कोई प्रक्रिया कितनी भी मजबूत दिखाई दे, असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि एक परीक्षा खत्म होने के बाद अगली परीक्षा में वही कमजोरियां दोबारा सामने न आएं।
केंद्र ने बताया- NEET पेपर की सुरक्षा के 10 स्तर
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को NEET प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सरकार ने बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र पर छात्रों तक पहुंचने तक कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था लागू रहती है।
1. कई विशेषज्ञ तैयार करते हैं प्रश्न बैंक
विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ प्रश्न बैंक तैयार करते हैं। इसके बाद 100-100 सवालों के आधार पर चार अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं। इनमें से दो प्रश्नपत्र NTA के महानिदेशक चुनते हैं। अंतिम प्रश्नपत्र कौन-सा होगा, इसकी जानकारी पहले से किसी को नहीं होती।
2. 13 भाषाओं में तैयार होता है प्रश्न बैंक
करीब 500 सवालों का प्रश्न बैंक 13 भाषाओं में तैयार किया जाता है। इसके लिए विशेषज्ञ ट्रांसलेटर की मदद ली जाती है।
3. दो प्रिंटिंग प्रेस में छपते हैं पेपर
प्रश्नपत्र सीलबंद कवर में दो निर्धारित प्रिंटिंग प्रेस भेजे जाते हैं। यहां CCTV और CISF की निगरानी रहती है। प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों को भी यह जानकारी नहीं होती कि प्रश्नपत्र किस परीक्षा के लिए है।
4. डिजिटल चाबी और कोड से खुलता है बॉक्स
प्रश्नपत्र ले जाने वाले व्यक्ति के पास डिजिटल चाबी होती है, लेकिन बॉक्स खोलने का कोड उसके पास नहीं होता। यह कोड NTA महानिदेशक की अनुमति के बाद जारी किया जाता है।
5. लोहे के बॉक्स में रखे जाते हैं पेपर
प्रश्नपत्र ऐसे लोहे के बॉक्स में रखे जाते हैं, जिन्हें बंद करने के बाद लॉक तोड़े बिना खोला नहीं जा सकता।
6. हर पैकेट में अलग क्रम के प्रश्नपत्र
24 प्रश्नपत्रों वाले पैकेट में सवालों का क्रम अलग-अलग रखा जाता है। प्रत्येक पैकेट पर वॉटरमार्क नंबर, शहर, परीक्षा केंद्र और पैकेट नंबर दर्ज होता है।
7. स्ट्रॉन्ग रूम में रखे जाते हैं पेपर
प्रश्नपत्रों के दो सेट अलग-अलग बैंकों के स्ट्रॉन्ग रूम में रखे जाते हैं। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होती है और संबंधित अधिकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हैं।
8. GPS से ट्रैक होती है गाड़ी
बैंक से परीक्षा केंद्र तक प्रश्नपत्र पहुंचाने वाली गाड़ी में GPS लगा होता है। गाड़ी की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है और पुलिस सुरक्षा के बीच प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र तक पहुंचते हैं।
9. परीक्षा से कुछ घंटे पहले खुलता है बॉक्स
परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले दो छात्रों की मौजूदगी में प्रश्नपत्र का बॉक्स खोला जाता है। इस प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जाती है।
10. 24 छात्रों के लिए अलग पैकेट
हर कक्षा में 24 छात्रों के लिए अलग प्रश्नपत्र पैकेट होता है। कक्षा समन्वयक यह पैकेट छात्रों को देते हैं और छात्र स्वयं पैकेट खोलते हैं।
टेक्नोलॉजी समझने वाले अधिकारियों को शामिल करने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने NTA को परीक्षा व्यवस्था में नई तकनीक की समझ रखने वाले अधिकारियों को शामिल करने की सलाह दी। कोर्ट का जोर ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर रहा, जिसमें परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों की पहचान कर उन्हें लगातार दूर किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश है कि सिर्फ कागज पर मजबूत प्रक्रिया काफी नहीं है। परीक्षा प्रणाली को ऐसा बनाया जाना चाहिए, जिसमें सुरक्षा, तकनीक और संस्थागत अनुभव लगातार मजबूत होते रहें।
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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बुजुर्ग बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं

नई दिल्ली/लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता अपनी संपत्ति से बच्चों को बेदखल करा सकते हैं, अगर उनके भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मान के लिए ऐसा करना जरूरी हो।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए ट्रिब्यूनल को बच्चों या अन्य परिजनों को संपत्ति खाली करने का आदेश देने का अधिकार है।
कोर्ट ने कहा कि किसी सभ्य समाज की पहचान इस बात से भी होती है कि वह अपने बुजुर्गों को कितना सम्मान, सुरक्षा और गरिमा देता है।
लखनऊ के मकान से जुड़ा था मामला
मामला लखनऊ के विकास नगर निवासी रवि कांत गुप्ता से जुड़ा है। उन्होंने 5 जून 2022 को अपने बेटे को मकान से बेदखल करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के सामने आवेदन दिया था। जिस मकान को लेकर विवाद था, वह गुप्ता की स्वयं अर्जित संपत्ति थी। परिवार में विवाद इतना बढ़ गया था कि गुप्ता की 81 वर्षीय मां को घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मामले की सुनवाई के बाद एसडीएम ने 15 नवंबर 2022 को बेटे को मकान से बेदखल करने का आदेश दिया था। बाद में जिला मजिस्ट्रेट ने 9 अगस्त 2023 को इस आदेश को बरकरार रखते हुए बेटे और बहू को मकान खाली करने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था बेदखली का आदेश
बेटे और बहू ने एसडीएम और जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 बुजुर्गों को अपनी संपत्ति से बच्चों को बेदखल करने का स्पष्ट अधिकार नहीं देता। इसके आधार पर हाईकोर्ट ने दोनों आदेश रद्द कर दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट ने दखल देकर गलती की
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए कहा कि कानून का उद्देश्य केवल बुजुर्गों को भरण-पोषण दिलाना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना भी है। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी वरिष्ठ नागरिक की सुरक्षा और गरिमा के लिए जरूरी हो, तो ट्रिब्यूनल बच्चों को संपत्ति खाली करने का आदेश दे सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक्ट की धारा 7 और 8 का हवाला देते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के मामलों की सुनवाई के लिए बने ट्रिब्यूनल को सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां दी गई हैं। ऐसे में कानून के उद्देश्य को लागू करने के लिए जरूरी आदेश देने का अधिकार भी ट्रिब्यूनल के पास है।
सुप्रीम कोर्ट ने पुराने फैसलों का भी दिया हवाला
कोर्ट ने 2021 के एस. वनिता बनाम डिप्टी कमिश्नर मामले का भी उल्लेख किया। इस फैसले में कहा गया था कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बाद के मामलों में भी इसी सिद्धांत को दोहराया गया। इनमें समटोला देवी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2025) और कमलकांत मिश्रा बनाम एडिशनल कलेक्टर (2025) के मामले शामिल हैं। इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि यदि बच्चों या परिजनों की वजह से किसी बुजुर्ग की सुरक्षा, सम्मान या शांतिपूर्ण जीवन प्रभावित हो रहा है, तो वह संबंधित ट्रिब्यूनल के माध्यम से अपनी संपत्ति खाली कराने की मांग कर सकता है।
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Kolkata Hotel Fire: होटल में भीषण आग, 4 साल के बच्चे समेत 9 की मौत, 80 लोगों को बचाया

कोलकाता: कोलकाता के मिर्जा गालिब स्ट्रीट स्थित पांच मंजिला बिल्डिंग में मंगलवार देर रात भीषण आग लग गई। हादसे में 4 साल के बच्चे समेत 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 6 लोग घायल हैं। दमकल और पुलिस की टीम ने अब तक करीब 80 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। आग रात करीब 1:45 बजे लगी। बिल्डिंग में कई होटल संचालित हो रहे थे और घटना के समय ज्यादातर लोग सो रहे थे। आग के बाद पूरी इमारत में तेजी से धुआं भर गया, जिससे लोगों को बाहर निकलने में मुश्किल हुई। दम घुटने के कारण कई लोग बेहोश हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल की 5 गाड़ियां, पुलिस और डिजास्टर मैनेजमेंट की टीमें मौके पर पहुंचीं। घने धुएं की वजह से दमकलकर्मियों को ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई। आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन इमारत में कूलिंग का काम जारी है।
शॉर्ट सर्किट की आशंका, फॉरेंसिक जांच से होगी पुष्टि
पश्चिम बंगाल के फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज विभाग के राज्य मंत्री कौशिक चौधरी ने घटनास्थल का दौरा किया। शुरुआती तौर पर आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि इसकी अंतिम पुष्टि फॉरेंसिक जांच के बाद ही होगी। मंत्री ने इमारत के अंदर की व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिल्डिंग में बुनियादी सुरक्षा और निर्माण नियमों के पालन में गंभीर खामियां सामने आई हैं।
मृतकों में विदेशी नागरिक भी शामिल
पुलिस मृतकों की पहचान कर रही है। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों में बांग्लादेशी नागरिकों के शामिल होने की बात सामने आई है। 4 साल के एक बच्चे की भी मौत हुई है।
बिल्डिंग मालिक की तलाश, केस दर्ज करने की तैयारी
पुलिस के मुताबिक, इमारत के मालिक की तलाश की जा रही है। आग लगने की असली वजह के साथ ही होटल संचालन और फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन की भी जांच की जाएगी। यह घटना पश्चिम बंगाल में कुछ दिन पहले बीरभूम के तारापीठ इलाके में होटल में लगी आग के बाद हुई है। उस हादसे में भी कई लोगों की मौत हुई थी।
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BJP: यूपी, पंजाब और गुजरात के प्रभारी बदले गए, विनोद तावड़े को यूपी, सतीश पूनिया को पंजाब की जिम्मेदारी

नई दिल्ली: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए नए राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए। बिहार चुनाव में पार्टी की जीत के दौरान अहम जिम्मेदारी संभाल चुके विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। गुजरात के जगदीश ईश्वरभाई पटेल को यूपी का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। वहीं, राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। गुजरात की जिम्मेदारी भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग को सौंपी गई है।
तीनों राज्यों में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में इन नियुक्तियों को भाजपा की चुनावी तैयारियों और संगठन को मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। नितिन नवीन ने एक दिन पहले ही 65 सदस्यीय नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया था।
बिहार के बाद अब यूपी की जिम्मेदारी विनोद तावड़े के पास
विनोद तावड़े भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं और पहले हरियाणा व बिहार के प्रभारी रह चुके हैं। सितंबर 2022 में उन्हें बिहार की जिम्मेदारी दी गई थी। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के दौरान भी वे राज्य के प्रभारी थे। महाराष्ट्र में तावड़े लंबे समय तक पार्टी संगठन में सक्रिय रहे हैं। वे राज्य सरकार में मंत्री और विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं।
जगदीश पटेल बने यूपी के सह-प्रभारी
गुजरात के भाजपा नेता जगदीश ईश्वरभाई पटेल को उत्तर प्रदेश का सह-प्रभारी नियुक्त किया गया है। वे 2019 में अमराईवाड़ी विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे और अहमदाबाद शहर भाजपा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। अगस्त 2026 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया था। अब उन्हें यूपी संगठन में नई जिम्मेदारी दी गई है।
पंजाब की कमान सतीश पूनिया को
राजस्थान भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया को पंजाब का प्रभारी बनाया गया है। वे पहले हरियाणा के प्रभारी रह चुके हैं और लोकसभा चुनाव के दौरान हरियाणा के चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। हरियाणा विधानसभा चुनाव में भाजपा की लगातार तीसरी जीत के दौरान भी वे संगठनात्मक जिम्मेदारी में अहम भूमिका में रहे। जून 2026 में वे राज्यसभा सांसद चुने गए थे।
गुजरात की जिम्मेदारी तरुण चुग को
भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुग को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है। वे पहले तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्रभारी रह चुके हैं। तरुण चुग लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय हैं और पंजाब के अमृतसर से आते हैं।
2027 चुनाव से पहले तीनों राज्यों पर BJP का फोकस
उत्तर प्रदेश: सत्ता बचाने की चुनौती
403 विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में 2027 में चुनाव होने हैं। फिलहाल राज्य में भाजपा की सरकार है और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को राज्य में नुकसान हुआ था। समाजवादी पार्टी 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, जबकि भाजपा को 33 सीटें मिली थीं। ऐसे में विधानसभा चुनाव में भाजपा के सामने सत्ता बरकरार रखने के साथ संगठन को मजबूत करने की चुनौती होगी।
पंजाब: 117 सीटों पर संगठन विस्तार की कवायद
पंजाब में 117 विधानसभा सीटें हैं और यहां 2027 में चुनाव होने हैं। फिलहाल राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार है और भगवंत मान मुख्यमंत्री हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने 92 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था। भाजपा आगामी चुनाव में सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। ऐसे में सतीश पूनिया के सामने पार्टी का संगठन विस्तार और चुनावी आधार मजबूत करने की चुनौती होगी।
गुजरात: रिकॉर्ड प्रदर्शन दोहराने की चुनौती
182 विधानसभा सीटों वाले गुजरात में भी 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। राज्य में भाजपा की सरकार है और भूपेंद्र पटेल मुख्यमंत्री हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 156 सीटें जीतकर रिकॉर्ड बहुमत हासिल किया था। 2027 में पार्टी के सामने इस प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती होगी।
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BJP: नितिन नवीन ने घोषित की BJP की 65 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम, स्मृति ईरानी की वापसी, राम माधव बने उपाध्यक्ष

नई दिल्ली: भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने पद संभालने के 209 दिन बाद सोमवार को अपनी 65 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया। नई टीम में कई पुराने चेहरों को बरकरार रखा गया है, जबकि कुछ नेताओं की राष्ट्रीय संगठन में वापसी हुई है।
राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जबकि स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी देकर फिर से राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे उपाध्यक्ष पद पर बनी रहेंगी। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बीएल संतोष भी अपने पद पर बने रहेंगे।
IT सेल में बदलाव, छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को जिम्मेदारी
भाजपा की नई टीम में IT सेल की जिम्मेदारी में भी बदलाव किया गया है। अब तक यह जिम्मेदारी संभाल रहे अमित मालवीय की जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को नया प्रभारी बनाया गया है।
55 साल औसत उम्र, 12 महिलाओं को मिली जगह
नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम की औसत उम्र 55 साल बताई गई है। कार्यकारिणी में 12 महिलाओं को शामिल किया गया है। महिला नेताओं में वसुंधरा राजे, डी. पुरंदेश्वरी, रेखा वर्मा, वर्षाबेन दोशी, डॉ. भारती पवार और डॉ. मधुचंद्र कर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, स्मृति ईरानी को महासचिव की जिम्मेदारी मिली है। कविता पाटीदार, फांग्नोन कोन्यक और संगीता यादव को राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है। इसके अलावा रूप कुमारी चौधरी को महिला मोर्चा अध्यक्ष और प्रीति गांधी को सोशल मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।
यूपी से दो मुस्लिम चेहरे भी शामिल
नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से तारिक मंसूर और बासित अली को भी जगह मिली है। दोनों को मुस्लिम प्रतिनिधित्व के रूप में देखा जा रहा है। महिला प्रतिनिधित्व की बात करें तो उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा 3 महिलाएं टीम में शामिल हैं। महाराष्ट्र से 2, जबकि अन्य राज्यों से एक-एक महिला को जगह मिली है।
भाजपा के 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष

भाजपा के 8 राष्ट्रीय महामंत्री

भाजपा के 16 राष्ट्रीय मंत्री

भाजपा के मोर्चा अध्यक्ष

भाजपा के मीडिया और सोशल मीडिया संयोजक

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