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Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ मीडिया कर्मी सुरक्षा विधेयक-2023 पारित, मुख्यमंत्री बोले- जो वादा किया, वो पूरा हुआ

Raipur: छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज बजट सत्र के 13वें दिन छत्तीसगढ़ मीडिया कर्मी सुरक्षा विधेयक-2023 पेश हुआ और सर्वानुमति से पारित भी हो गया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विधेयक को पेश करते हुए मीडिया कर्मी सुरक्षा विधेयक के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि यह विधेयक व्यापक प्रभाव वाला है और सभी से रायशुमारी के बाद ही यह कानून तैयार हुआ है। इससे पहले सदन में विधेयक को पेश किए जाने पर विपक्ष ने इसे प्रवर समिति में भेजने की मांग की, जिसे आसंदी ने खारिज कर दिया। इसके बाद चर्चा से विपक्ष ने खुद को अलग कर लिया।
https://twitter.com/bhupeshbaghel/status/1638542717662773249?s=20
मीडियाकर्मी सुरक्षा विधेयक से जुड़ी अहम बातें
इन पत्रकारों को मिलेगी सुरक्षा
- ऐसे मीडियाकर्मी जिनके पिछले 3 महीनों में कम से कम 6 लेख प्रकाशित हुए हों।
- किसी मीडिया संस्थान से समाचार संकलन के लिए कम से कम 3 भुगतान प्राप्त किया हो।
- मीडियाकर्मी जिसके फोटोग्राफ गत 3 माह की अवधि में कम से कम 3 बार प्रकाशित हुए हों।
- कॉलमिस्ट अथवा फ्री लांस जर्नलिस्ट जिसके कार्य गत 6 माह के दौरान 6 बार प्रकाशित/प्रसारित हुए हों।
- मीडियाकर्मी जिसके विचार/मत गत तीन माह के दौरान कम से कम 6 बार जनसंचार में प्रतिवेदित हुए हों।
- जिसके पास मीडिया संस्थान में कार्यरत होने का परिचय पत्र या पत्र हो।
पंजीकरण के लिए बनेगी अथॉरटी
मीडियाकर्मियों के पंजीकरण के लिए तैयार कानून के प्रभावी होने के 30 दिन के अंदर अथॉरिटी का गठन किया जाएगा। अथॉरिटी का सचिव जनसम्पर्क विभाग के उस अधिकारी को बनाया जाएगा, जो अतिरिक्त संचालक से निम्न पद का न हो। अथॉरिटी में दो मीडियाकर्मी भी होंगे, जिनकी वरिष्ठता कम से कम 10 वर्ष की होगी। इनमें से एक महिला मीडियाकर्मी होगी। अथॉरिटी में शामिल मीडियाकर्मियों का कार्यकाल दो वर्ष का होगा। इन्हें अधिकतम दो कार्यकाल के लिए ही अथॉरटी में नियुक्त किया जा सकेगा।
शिकायतों के निवारण के लिए बनेगी समिति
मीडियाकर्मी सुरक्षा विधेयक के प्रभावी होने की तारीख के 30 दिन के अंदर छत्तीसगढ़ सरकार एक समिति का भी गठन करेगी। यह समिति पत्रकारों की प्रताड़ना, धमकी या हिंसा या गलत तरीके से अभियोग लगाने और पत्रकारों को गिरफ्तार करने संबंधी शिकायतों को देखेगी। इस समिति में कम से कम एडीजी स्तर का एक पुलिस अधिकारी, जनसंपर्क विभाग के प्रमुख और कम से कम 12 वर्ष का अनुभव रखने वाले तीन पत्रकार शामिल होंगे। इनका कार्यकाल दो वर्ष का होगा और इन्हें अधिकतम दो कार्यकाल के लिए ही समिति में नियुक्त किया जा सकेगा।
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Bastar Dussehra: राष्ट्रपति मुर्मु ने की बस्तर दशहरा की सराहना, मांझियों का मानदेय ₹5,000 और चालकी का ₹3,500 हुआ

जगदलपुर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जगदलपुर में आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल होकर इसकी अनूठी जनजातीय परंपराओं, सामूहिक आस्था और सामाजिक समरसता की सराहना की। उन्होंने मुरिया दरबार को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक मूल्यों का जीवंत उदाहरण बताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि माओवाद से मुक्त बस्तर अब नवनिर्माण और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने पारंपरिक प्रतिनिधियों के मानदेय में भी वृद्धि की है।
बस्तर दशहरा सामाजिक समरसता का प्रतीक: राष्ट्रपति मुर्मु
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित बस्तर दशहरा उत्सव में शामिल हुईं। मां दंतेश्वरी की पावन भूमि पर आयोजित इस समारोह में उन्होंने बस्तर की विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की सराहना की।
राष्ट्रपति ने कहा कि लगभग 75 दिनों तक चलने वाला बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव, सामूहिक आस्था, सामाजिक समरसता और जनजातीय विरासत का जीवंत प्रतीक है। इस उत्सव की खासियत यह है कि विभिन्न गोत्रों, समुदायों और समाज के सभी वर्गों के लोग इसमें सक्रिय भागीदारी निभाते हैं।
रथ निर्माण, रथ खींचने, पूजा-अर्चना और विभिन्न अनुष्ठानों में अलग-अलग समुदाय अपनी पारंपरिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हैं। राष्ट्रपति के अनुसार, यह व्यवस्था आपसी सहयोग और पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक निरंतरता का उल्लेखनीय उदाहरण है।
मुरिया दरबार लोकतांत्रिक परंपराओं का उदाहरण
राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा के दौरान आयोजित होने वाले मुरिया दरबार को लोकतांत्रिक व्यवस्था की जमीनी अभिव्यक्ति बताया। उन्होंने कहा कि इस परंपरा में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं, जरूरतों और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं।
सामूहिक संवाद से समाधान निकालने की यह परंपरा भारतीय लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती है। राज्यपाल रमेन डेका ने भी कहा कि बस्तर दशहरा और मुरिया दरबार समाज को साथ लेकर चलने तथा संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजने का संदेश देते हैं।
उन्होंने पारंपरिक मांझियों, मुखियाओं, पुजारियों, कारीगरों, रथ निर्माताओं, कलाकारों और स्थानीय प्रशासन के योगदान की सराहना की।
जनजातीय युवाओं की प्रतिभा को मिले अवसर
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समाज में प्रतिभा और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। उचित अवसर, प्रोत्साहन और संसाधन उपलब्ध होने पर जनजातीय युवा हर क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ा सकते हैं।
उन्होंने बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों को जनजातीय युवाओं को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। बस्तर ओलंपिक में युवाओं की भागीदारी की सराहना करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि उचित प्रशिक्षण और मंच मिलने पर यहां के खिलाड़ी भविष्य में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे।
राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय उद्यमियों को वित्तीय सुविधाओं और बाजार से जोड़ने के प्रयास समावेशी विकास को गति दे सकते हैं। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में जनजातीय समाज की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।
दंडकारण्य से जुड़ी है बस्तर की सांस्कृतिक विरासत
राष्ट्रपति ने बस्तर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण में इस क्षेत्र का संबंध दंडकारण्य से जोड़ा जाता है। भगवान श्रीराम के वनवास और माता शबरी से जुड़े प्रसंग इस क्षेत्र की सांस्कृतिक स्मृतियों का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के आदर्शों, माता सीता की मर्यादा और माता शबरी की भक्ति से प्रेरणा लेकर समाज को नैतिकता और मानवीय मूल्यों को जीवन में अपनाना चाहिए।
राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज की प्रकृति संरक्षण परंपरा की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि जंगल, पहाड़, पेड़-पौधे और प्राकृतिक संसाधन अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण और अधिकाधिक पौधरोपण के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण सुरक्षित रखना आवश्यक है।
माओवाद से मुक्त बस्तर में विकास की नई राह: मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति मुर्मु का स्वागत करते हुए कहा कि उनकी उपस्थिति से बस्तरवासियों का उत्साह बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा जनजातीय संस्कृति, सामूहिक सहभागिता और आपसी विश्वास की सुंदर अभिव्यक्ति है।
उन्होंने कहा कि बस्तर हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक जैसे आयोजन इस बदलाव को गति दे रहे हैं और क्षेत्र की कला-संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार दूरस्थ इलाकों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है। नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ अंदरूनी क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीएम-जनमन के तहत दूरस्थ बसाहटों को सड़क से जोड़ने का काम जारी है।
उन्होंने परिवहन सुविधाओं के विस्तार, रायपुर से रावघाट तक रेल सेवा, रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन और रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे का उल्लेख किया। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए होम-स्टे तथा वनोपज संग्राहकों को उचित मूल्य दिलाने के प्रयासों की भी जानकारी दी।
स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं का हो रहा विस्तार
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उनके अनुसार, जगदलपुर में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल शुरू किया गया है और गीदम में मेडिकल कॉलेज इसी शैक्षणिक सत्र से प्रारंभ हुआ है। ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में विकास की संभावनाएं और मजबूत होंगी।
मांझियों और चालकी के मानदेय में बढ़ोतरी
बस्तर दशहरा समारोह में पारंपरिक प्रतिनिधियों के मानदेय में वृद्धि की जानकारी भी दी गई। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के अनुसार, राज्य सरकार ने मांझियों और चालकी के मासिक मानदेय में बढ़ोतरी की है।
मांझी: ₹2,000 से बढ़ाकर ₹5,000 प्रतिमाह।
चालकी: ₹1,500 से बढ़ाकर ₹3,500 प्रतिमाह।
संस्कृति मंत्री ने कहा कि यह निर्णय बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने वाले पारंपरिक प्रतिनिधियों के योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है।
राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा की कुटुम्ब जात्रा और 27 अक्टूबर को मां दंतेश्वरी तथा देवी मावली की डोली विदाई जैसे पारंपरिक अनुष्ठानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने मां दंतेश्वरी से बस्तरवासियों के उज्ज्वल भविष्य, छत्तीसगढ़ की प्रगति और समग्र विकास की कामना की।
समारोह में राज्यपाल रमेन डेका, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, विभिन्न मंत्री, सांसद, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी, पारंपरिक मांझी-चालकी और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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Raipur: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने युवाओं को दिए सफलता के मंत्र; ₹200 का स्मारक सिक्का जारी

रायपुर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरे पर गुरुवार को रायपुर पहुंचीं। इस दौरान वे इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘सेवा सम्मान पर्व’ और ‘युवा प्रबोधन’ कार्यक्रम में शामिल हुईं। कार्यक्रम में उन्होंने युवाओं को सफलता के मंत्र दिए और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
राष्ट्रपति के दौरे के दौरान कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश को लेकर भी स्थिति सामने आई। विधायक मोतीलाल साहू को VIP गेट से प्रवेश नहीं मिला। इसके बाद वे दूसरे गेट से पैदल कार्यक्रम स्थल पहुंचे। वहीं, विधायक संपत अग्रवाल को भी कार्यक्रम स्थल पर जाने से पहले रोक दिया गया। इसके बाद वे वापस लौट गए।
राष्ट्रपति ने जारी किया ₹200 का स्मारक सिक्का
रायपुर पहुंचने से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोकभवन में ₹200 का स्मारक सिक्का जारी किया। सिक्के पर एक ओर अशोक स्तंभ और दूसरी ओर शदाणी दरबार की पीठाधीश माता साहिब हासी देवी की तस्वीर अंकित है।
जानकारी के अनुसार, इस सिक्के का वजन 35 ग्राम है और इसे चार धातुओं से मिलाकर तैयार किया गया है। सिक्के को ऑनलाइन बुक करने की सुविधा भी बताई गई है।
युवाओं को सफलता के लिए किया प्रेरित
इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘युवा प्रबोधन’ कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने युवाओं को जीवन में लक्ष्य निर्धारित करने, मेहनत करने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। दौरे के दौरान ‘सेवा सम्मान पर्व’ भी आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति शामिल हुईं। राष्ट्रपति का यह दो दिवसीय दौरा छत्तीसगढ़ में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहा।
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Chhattisgarh: सिरपुर को मिली वैश्विक पहचान, UNESCO की अस्थायी सूची में शामिल हुई छत्तीसगढ़ की प्राचीन नगरी

रायपुर: छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। महासमुंद जिले में महानदी के तट पर स्थित प्राचीन नगरी सिरपुर को यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है। इससे सिरपुर के भविष्य में विश्व धरोहर स्थल का दर्जा हासिल करने की संभावनाओं को नई दिशा मिली है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण तथा पर्यटन विकास पर जोर दे रही है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में भी प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
दक्षिण कोसल की राजधानी रहा है सिरपुर
प्राचीन काल में श्रीपुर के नाम से प्रसिद्ध सिरपुर पांडुवंशी शासकों के शासनकाल में दक्षिण कोसल की राजधानी रहा। यह नगर राजनीतिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। यहां शैव, वैष्णव, बौद्ध और जैन परंपराओं के अवशेष मिलते हैं, जो प्राचीन भारत में धार्मिक सहअस्तित्व और सांस्कृतिक समन्वय की परंपरा को दर्शाते हैं।
सातवीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी इस क्षेत्र की यात्रा की थी। उनके यात्रा विवरणों में यहां बौद्ध धर्म की समृद्ध परंपरा का उल्लेख मिलता है।
लक्ष्मण मंदिर और बौद्ध विहार हैं प्रमुख आकर्षण
सिरपुर का सातवीं शताब्दी का लक्ष्मण मंदिर प्राचीन भारतीय ईंट स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है। मंदिर की नक्काशी, अलंकरण और निर्माण शैली इसे विशेष पहचान देते हैं। ऐतिहासिक मान्यता के अनुसार, इसका निर्माण रानी वासटा ने अपने पति हर्षगुप्त की स्मृति में कराया था।
यहां स्थित गंधेश्वर महादेव मंदिर, सुरंग टीला, राम मंदिर, आनंदप्रभु कुटी विहार और स्वास्तिक विहार भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल हैं। पुरातात्विक उत्खननों में मंदिरों, बौद्ध विहारों, मूर्तियों, सिक्कों और दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं के अवशेष मिले हैं। ये खोजें सिरपुर की प्राचीन धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर प्रकाश डालती हैं।
पर्यटन और रोजगार को मिल सकती है नई गति
सिरपुर को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किए जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान बढ़ने की उम्मीद है। इससे इतिहासकारों, पुरातत्वविदों, शोधकर्ताओं और देश-विदेश के पर्यटकों का आकर्षण बढ़ सकता है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय परिवहन, होटल, होमस्टे, हस्तशिल्प और अन्य रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।
अभी विश्व धरोहर का अंतिम दर्जा मिलना बाकी
यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल होना विश्व धरोहर का दर्जा पाने की प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन यह अंतिम मान्यता नहीं है। इसके बाद संबंधित स्थल को निर्धारित मानकों के अनुरूप नामांकन और मूल्यांकन की प्रक्रिया से गुजरना होता है।
सिरपुर की प्राचीन स्थापत्य कला, बौद्ध विरासत और विभिन्न धार्मिक परंपराओं के ऐतिहासिक सहअस्तित्व को देखते हुए इसका अस्थायी सूची में शामिल होना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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Chhattisgarh: शहीद जवानों के बलिदान से छत्तीसगढ़ में शांति का नया अध्याय: CM साय

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ मिली निर्णायक सफलता पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों के अदम्य साहस, शौर्य और सर्वोच्च बलिदान का परिणाम है। दशकों तक नक्सली हिंसा और भय से प्रभावित रहे बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ इलाकों में अब शांति, सुरक्षा और विश्वास का नया वातावरण बन रहा है। मुख्यमंत्री बुधवार को रायपुर के माना स्थित चौथी वाहिनी छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल परिसर में आयोजित पुलिस स्मृति दिवस परेड को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्योछावर करने वाले अमर शहीदों को नमन किया और शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने शहीद पुलिस अधिकारियों और जवानों के परिजनों को शॉल, श्रीफल और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
जवानों के परिवारों का त्याग भी अतुलनीय
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पुलिस स्मृति दिवस देश की एकता, अखंडता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों को याद करने का दिन है। पुलिस और सुरक्षा बल कठिन परिस्थितियों में भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। उनके साहस और समर्पण से ही समाज में शांति और सुरक्षा का वातावरण कायम होता है।
उन्होंने कहा कि जब कोई जवान देश की सुरक्षा के लिए कर्तव्य पथ पर खड़ा होता है, तो उसके पीछे पूरे परिवार का त्याग, धैर्य और साहस भी होता है। इसलिए शहीद जवानों के परिवारों का सम्मान और कल्याण सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मुख्यमंत्री ने परिजनों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है।
1959 में शहीद हुए 10 जवानों की याद में मनाया जाता है दिवस
मुख्यमंत्री ने कहा कि 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स क्षेत्र में चीनी सैनिकों के साथ संघर्ष के दौरान भारतीय पुलिस के 10 जवान शहीद हुए थे। उन्हीं की स्मृति में हर साल 21 अक्टूबर को पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि यह दिन केवल श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि शहीदों के आदर्शों, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का भी दिन है।
नक्सल विरोधी अभियान में पुलिस और सुरक्षा बलों की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने नक्सलवाद के खिलाफ लंबे संघर्ष के बाद शांति, सुरक्षा और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इस अभियान में छत्तीसगढ़ पुलिस, जिला रिजर्व गार्ड (DRG), बस्तर फाइटर्स और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
उन्होंने कहा कि जवानों ने घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और कठिन परिस्थितियों में अपनी जान की परवाह किए बिना नक्सलवाद का मुकाबला किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में शांति और विश्वास का वातावरण बनाने में मदद मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ मिली सफलता के बाद अब शांति को स्थायी बनाना और विकास की गति तेज करना जरूरी है। सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश को समृद्धि और खुशहाली की ओर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।
बस्तर में सड़क, बिजली और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री के मुताबिक, जिन क्षेत्रों में पहले भय और हिंसा का माहौल था, वहां अब विकास की गतिविधियां बढ़ रही हैं। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। दूरस्थ गांवों तक सरकारी योजनाएं और सेवाएं पहुंच रही हैं।
उन्होंने बताया कि नियद नेल्लानार योजना, पीएम जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से दूरस्थ और वंचित जनजातीय क्षेत्रों में सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार पुलिस बल को आधुनिक तकनीक और संसाधनों से मजबूत बनाने, बेहतर प्रशिक्षण देने तथा जवानों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए भी काम कर रही है।
एक साल में 84 नक्सली मारे गए, 6 पुलिस जवान शहीद
पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने कहा कि छत्तीसगढ़ लंबे समय तक माओवादी हिंसा की चुनौती से जूझता रहा है। पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और अन्य सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से नक्सलवाद के उन्मूलन की दिशा में निर्णायक सफलता मिली है।
DGP के मुताबिक, 1 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच नक्सल विरोधी अभियानों में 84 नक्सली मारे गए। इसी अवधि में छत्तीसगढ़ पुलिस के छह जवानों ने कर्तव्य निर्वहन के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने शहीद परिवारों के प्रति कृतज्ञता जताते हुए कहा कि उनका त्याग और धैर्य पूरे पुलिस परिवार के लिए प्रेरणा है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि जवानों ने नक्सलवाद को पीछे धकेलने में असाधारण साहस दिखाया है। आज सुरक्षा बल शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ सरकारी योजनाओं और विकास का लाभ आम लोगों तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
शहीद वाटिका में भी अर्पित किए श्रद्धासुमन
पुलिस स्मृति दिवस पर मुख्यमंत्री साय राजीव स्मृति वन स्थित शहीद वाटिका पहुंचे। उन्होंने अमर जवान स्तंभ पर पुष्प अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी शहीद जवानों के नामों की पट्टिका पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वीर जवानों का बलिदान छत्तीसगढ़ की स्मृतियों में हमेशा अमर रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा तथा समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा। कार्यक्रम में पुलिस और सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा शहीद जवानों के परिजन मौजूद रहे।
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Chhattisgarh: आजादी के बाद पहली बार रावघाट पहुंचेगी रेल, 20 अक्टूबर को 2 रेल लाइनों का उद्घाटन

रायपुर: छत्तीसगढ़ के रेल इतिहास में 20 अक्टूबर का दिन अहम होने जा रहा है। आजादी के बाद पहली बार रावघाट तक रेल पहुंचेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में ताड़ोकी-रावघाट और अभनपुर-कुरूद ब्रॉडगेज रेल लाइन का उद्घाटन होगा। इस दौरान रावघाट-रायपुर और रायपुर-कुरूद नई यात्री रेल सेवाओं की शुरुआत भी की जाएगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कार्यक्रम में शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रावघाट तक रेल पहुंचने से बस्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ इलाकों में विकास, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और आवागमन की सुविधाओं का विस्तार होगा।
1,628 करोड़ रुपए में बनी 95 किमी रेल लाइन
दल्लीराजहरा से रावघाट के बीच करीब 1,628 करोड़ रुपए की लागत से 95 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का निर्माण पूरा किया गया है। ताड़ोकी से रावघाट के बीच 17.5 किलोमीटर रेल लाइन का काम पूरा होने के साथ परियोजना का यह महत्वपूर्ण हिस्सा तैयार हो गया है।
रेल संपर्क बनने से क्षेत्र के लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी। साथ ही रावघाट क्षेत्र के लौह अयस्क के परिवहन और भिलाई इस्पात संयंत्र समेत देश के इस्पात उद्योग की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।
अभनपुर-कुरूद ब्रॉडगेज लाइन से रायपुर पहुंचना होगा आसान
अभनपुर-धमतरी गेज परिवर्तन परियोजना के तहत अभनपुर से कुरूद के बीच 22 किलोमीटर रेल लाइन का गेज परिवर्तन पूरा हो गया है। इसके शुरू होने से कुरूद और आसपास के यात्रियों को राजधानी रायपुर तक बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। परियोजना के कुरूद-धमतरी सेक्शन में अभी काम जारी है। नई यात्री सेवाओं से विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, किसानों और व्यापारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
रायपुर में बनेगी आधुनिक रेल इंजन मेंटेनेंस सुविधा
कार्यक्रम में रायपुर में इलेक्ट्रिक रेल इंजन मेंटेनेंस फैसिलिटी का शिलान्यास भी होगा। प्रस्तावित सुविधा में भविष्य में 300 हाई हॉर्सपावर इलेक्ट्रिक रेल इंजनों के रखरखाव की क्षमता विकसित करने की योजना है। इससे रेल परिचालन और माल परिवहन की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई रेल लाइनें और यात्री सेवाएं छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई गति देंगी। रावघाट तक रेल पहुंचने से बस्तर अंचल में रोजगार, व्यापार और सामाजिक-आर्थिक विकास के नए अवसर खुलेंगे।
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