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CG News: छत्तीसगढ़ सरकार ने कोदो-कुटकी का समर्थन मूल्य बढ़ाया, कृषि विभाग ने जारी की अधिसूचना

Raipur: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को राशि वितरण कार्यक्रम में मिलेट्स उत्पादक किसानों के हित में बड़ी घोषणा की। उन्होंने कोदो और कुटकी के समर्थन मूल्य में वृद्धि की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने खरीफ 2023 हेतु कोदो का समर्थन मूल्य 3000 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 3200 रुपए प्रति क्विंटल करने तथा कुटकी का समर्थन मूल्य 3100 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 3350 रुपए प्रति क्विंटल करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार कोदो तथा कुटकी का समर्थन मूल्य घोषित नहीं करती है। राज्य सरकार द्वारा कई बार केंद्र से कोदो और कुटकी का समर्थन मूल्य घोषित करने का आग्रह किया गया, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा इसकी घोषणा नहीं की गई। इसलिए छत्तीसगढ़ के मिलेट्स उत्पादक किसानों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा कोदो- कुटकी का समर्थन मूल्य घोषित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री की घोषणा पर त्वरित अमल
मुख्यमंत्री बघेल द्वारा आज शाम कोदो-कुटकी के समर्थन मूल्य में वृद्धि की घोषणा पर त्वरित अमल करते हुए छत्तीसगढ़ शासन के कृषि एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा खरीफ 2023 में उत्पादित कोदो एवं कुटकी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना में खरीफ 2023 में उत्पादित कोदो का न्यूनतम उपार्जन मूल्य 3200 रुपए प्रति क्विंटल और कुटकी का न्यूनतम उपार्जन मूल्य 3350 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है। रागी फसल के लिए भारत सरकार द्वारा खरीफ 2023 हेतु घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य 3846 रूपए प्रति क्विंटल के अनुसार उपार्जन किया जाएगा। उपार्जन अवधि का निर्धारण वन विभाग द्वारा किया जाएगा। कोदो-कुटकी एवं रागी का उपार्जन छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के माध्यम से किया जाएगा।
गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में डाली गई राशि
मुख्यमंत्री ने आज गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में 9.65 करोड़ रुपए अंतरित किए। इस राशि में गोबर विक्रेताओं को 4.93 करोड़ रुपए, गौठान समितियों को 1.45 करोड़ रुपए, स्व-सहायता समूहों की 1.14 करोड़ रुपए की लाभांश राशि के साथ ही गौठान समिति के सदस्यों को 2.26 करोड़ रुपए की मानदेय राशि शामिल है। गोधन न्याय योजना के तहत हितग्राहियों को आज वितरित की गई राशि को मिलाकर 588.83 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा इस वर्ष धान की खरीदी 1 नवंबर से प्रारंभ होगी राज्य सरकार द्वारा इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि इस साल हम लोगों ने 130 लाख मीटरिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है, उम्मीद है कि हम इस लक्ष्य को जरूर हासिल करेंगे।
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Chhattisgarh: AI के दौर में शिक्षक सिर्फ पढ़ाएं नहीं, विद्यार्थियों को सही दिशा भी दें, राज्यपाल डेका; 63 शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार

रायपुर: शिक्षक दिवस पर छत्तीसगढ़ में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। लोकभवन के छत्तीसगढ़ मंडपम् में हुए कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया। वर्ष 2025-26 के लिए 63 शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार और चार शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार दिया गया। इस मौके पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा भी की।
राज्यपाल बोले- AI सहायक बने, नियंत्रक नहीं
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों को नई तकनीक की जानकारी होना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी उसका जिम्मेदारी और विवेक के साथ इस्तेमाल करना है।उन्होंने कहा कि AI हमारा सहायक बने, हमारा नियंत्रक नहीं। शिक्षक विद्यार्थियों को AI और डिजिटल तकनीक का उपयोग ज्ञान बढ़ाने, नवाचार और व्यक्तित्व विकास के लिए करने की सीख दें।
राज्यपाल ने कहा कि तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन, प्रेरणा और जीवन की सही दिशा शिक्षक ही दे सकते हैं। तकनीक पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता बच्चों के स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रभावित कर सकती है।
शिक्षक अब करियर गाइड और काउंसलर की भूमिका भी निभाएं
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के बाद शिक्षा व्यवस्था में तेजी से बदलाव हो रहा है। आने वाले समय में शिक्षकों को अपने ज्ञान और कौशल को लगातार अपडेट करना होगा। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा पहचानकर उन्हें सही विषय और करियर चुनने में मार्गदर्शन देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों की काउंसलिंग भी शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक की भूमिका सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं होती। विद्यार्थी अपने शिक्षक को आदर्श मानते हैं, इसलिए शिक्षक का आचरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनका ज्ञान।
CM साय बोले- शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शिक्षक वास्तव में राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि ज्ञानवान, संस्कारवान, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और हर बच्चे तक बेहतर शैक्षणिक अवसर पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है।
युक्तियुक्तकरण के बाद एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। बस्तर क्षेत्र में बच्चों को स्थानीय बोली के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा देने की पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे बच्चों के लिए सीखना अधिक सहज और प्रभावी हो रहा है। वहीं, पैरेंट्स-टीचर मीट के माध्यम से अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा से जोड़ा जा रहा है।
341 स्कूल PM श्री योजना में, 150 स्वामी विवेकानंद स्कूल
CM साय ने बताया कि प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन पीएम श्री योजना के तहत किया गया है। इन स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 विद्यालय शुरू किए जा रहे हैं। शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को भी सरकार ने प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।
बस्तर में ओरछा-जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के लक्ष्य में शिक्षा और शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।
AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों में संस्कार, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए भी विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी अवसर पर उन्होंने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों की घोषणा की।
चार शिक्षकों को विशेष स्मृति पुरस्कार
समारोह में चार शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार दिए गए।
- राजेश कुमार प्रजापति, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई- डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार
- कामता प्रसाद जायसवाल, कोरबा- डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार
- प्रज्ञा सिंह, दुर्ग – डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार
- प्रियंका गोस्वामी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ – श्री गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति पुरस्कार
इसके अलावा प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एलबी, शिक्षक एलबी, सहायक शिक्षक और सहायक शिक्षक एलबी संवर्ग के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना, स्कूल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव संतोष देवांगन समेत विभागीय अधिकारी और विभिन्न जिलों से आए शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
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Chhattisgarh: जन्माष्टमी पर CM साय ने किया शंख अभिषेक: बोले- श्रीकृष्ण का जीवन धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण की राह दिखाता है

रायपुर: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शुक्रवार को राजधानी के टाटीबंध स्थित इस्कॉन रायपुर के श्रीश्री राधा रासबिहारी मंदिर पहुंचे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और शंख अभिषेक किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
इस दौरान मंदिर परिसर ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे’ के महामंत्र से गूंजता रहा। मुख्यमंत्री साय भी श्रद्धालुओं के साथ महामंत्र के संकीर्तन में शामिल हुए।
CM बोले- गीता का कर्मयोग आज भी जीवन की राह दिखाता है
मुख्यमंत्री ने जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन मानव समाज को धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता में दिया गया कर्मयोग का संदेश आज भी जीवन की चुनौतियों के बीच अपने कर्तव्य पर आगे बढ़ने की दिशा दिखाता है।
उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव नहीं है, बल्कि उनके जीवन-दर्शन और आदर्शों को अपनाने का अवसर भी है। श्रीकृष्ण ने अन्याय के खिलाफ खड़े होने, धर्म की रक्षा करने और कमजोर वर्ग के साथ खड़े रहने का संदेश दिया।
धार्मिक स्थलों को विकसित कर रही सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत प्रदेश की बड़ी पहचान है। माता कौशल्या की जन्मभूमि और भगवान श्रीराम के ननिहाल के रूप में भी छत्तीसगढ़ का विशेष धार्मिक महत्व है।
उन्होंने कहा कि भोरमदेव, गंधेश्वर महादेव, मधेश्वर महादेव और कुलेश्वर महादेव जैसे शिवधाम तथा मां बमलेश्वरी, मां महामाया, मां दंतेश्वरी और मां चंद्रहासिनी जैसे प्रमुख आस्था केंद्र प्रदेश की धार्मिक पहचान को मजबूत करते हैं। सरकार इन स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार और विकास कार्यों पर काम कर रही है।
भोरमदेव क्षेत्र में 150 करोड़ से विकास
CM साय ने बताया कि ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर क्षेत्र को प्रसाद योजना के तहत करीब 150 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास से विरासत संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। इससे स्थानीय युवा, स्व-सहायता समूह, छोटे कारोबारी और कारीगर लाभान्वित हो सकते हैं।
50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु कर चुके रामलला के दर्शन
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर में रामलला के विराजमान होने के बाद छत्तीसगढ़ के लोगों में दर्शन को लेकर उत्साह बढ़ा है। श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के जरिए प्रदेश के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा का अवसर भी दिया जा रहा है।
3 से 5 सितंबर तक चल रहा महोत्सव
इस्कॉन रायपुर के 26वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर 3 से 5 सितंबर तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान भजन-कीर्तन, भगवान श्रीकृष्ण की आराधना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं।
कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, इस्कॉन रायपुर के पदाधिकारी, संतजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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Chhattisgarh: जन्माष्टमी पर 4 सितंबर को छत्तीसगढ़ में शुष्क दिवस, शराब दुकानें, बार और क्लब रहेंगे बंद; अवैध बिक्री पर उड़नदस्तों की नजर

रायपुर: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर 4 सितंबर, शुक्रवार को पूरे छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री और परोसने पर रोक रहेगी। राज्य शासन ने इस दिन को ‘शुष्क दिवस’ घोषित किया है। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं।
शराब दुकान से लेकर होटल-बार तक सब बंद
शुष्क दिवस के दौरान प्रदेश की सभी देशी और विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानें बंद रहेंगी। इसके अलावा रेस्टोरेंट बार, होटल-बार, क्लब, अहाता और शराब बेचने या परोसने वाले अन्य सभी लाइसेंसी प्रतिष्ठान भी बंद रहेंगे। भांग और भांगघोटा की फुटकर दुकानें भी 4 सितंबर को नहीं खुलेंगी।
होटल-रेस्टोरेंट और क्लबों में भी शराब पर रोक
शासन के निर्देश के मुताबिक शुष्क दिवस के दौरान किसी भी होटल, रेस्टोरेंट, क्लब या अन्य प्रतिष्ठान अथवा व्यक्ति को शराब बेचने या परोसने की अनुमति नहीं होगी। गैरमालिकाना क्लब, रेस्टोरेंट और स्टार होटल भी इस प्रतिबंध के दायरे में आएंगे।
शराब का भंडारण भी प्रतिबंधित
शुष्क दिवस के दौरान व्यक्तिगत रूप से शराब का भंडारण करने और गैर-लाइसेंसी परिसरों में शराब रखने पर भी रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर शराब जब्त करने के साथ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अवैध शराब के खिलाफ चलेगा जांच अभियान
शराब की अवैध बिक्री, परिवहन और संग्रहण रोकने के लिए आबकारी विभाग ने निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। जिला कार्यालयों के साथ संभागीय और राज्य स्तरीय उड़नदस्ते भी कार्रवाई करेंगे। जांच दल संदिग्ध वाहनों और अवैध शराब के संभावित संग्रहण स्थलों की जांच करेंगे। अवैध शराब मिलने पर उसे जब्त कर संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाएगा।
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Chhattisgarh: बस्तर फाइटर्स में 4600 पदों पर सीधी भर्ती, स्थानीय बोली जानने वालों को मिलेंगे 20 बोनस अंक

रायपुर: बस्तर संभाग के स्थानीय युवाओं को पुलिस सेवा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार बस्तर फाइटर्स में 4600 आरक्षकों की सीधी भर्ती करने जा रही है। भर्ती की नियमावली गृह विभाग ने तैयार कर ली है। अब पुलिस मुख्यालय की ओर से अलग से विज्ञापन जारी किया जाएगा। भर्ती में स्थानीय भाषा- बोली का ज्ञान रखने वाले अभ्यर्थियों को 20 बोनस अंक दिए जाएंगे।
इस भर्ती में सबसे महत्वपूर्ण शर्त संबंधित जिले का स्थानीय निवासी होना है। यानी अभ्यर्थी उसी जिले का स्थानीय निवासी होना चाहिए, जिसके लिए भर्ती की जा रही है। सरकार का उद्देश्य स्थानीय युवाओं को पुलिस सेवा में अवसर देने के साथ बस्तर के दुर्गम इलाकों में पुलिस और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना है।
सामान्य वर्ग 10वीं पास, ST को 5वीं पास पर भी मौका
सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास रखी गई है। वहीं अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के उम्मीदवार 5वीं पास होने पर भी भर्ती के लिए पात्र होंगे। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के नक्सल पीड़ित परिवारों और राहत शिविरों में रहने वाले परिवारों के सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को भी 5वीं पास होने पर आवेदन का अवसर मिलेगा।
18 से 28 वर्ष होगी आयु सीमा
भर्ती में शामिल होने के लिए अभ्यर्थी की उम्र 18 से 28 वर्ष के बीच होनी चाहिए। SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट मिलेगी। महिलाओं, पूर्व सैनिकों, नगर सैनिकों और संविदा कर्मचारियों को भी नियमों के अनुसार अतिरिक्त आयु छूट का लाभ मिलेगा।
200 अंकों की होगी पूरी चयन प्रक्रिया
बस्तर फाइटर्स की चयन प्रक्रिया कुल 200 अंकों की होगी। शुरुआत 100 अंकों की शारीरिक दक्षता परीक्षा से होगी। इसमें अभ्यर्थियों को लंबी कूद, ऊंची कूद, गोला फेंक के साथ 100 मीटर और 800 मीटर दौड़ में प्रदर्शन करना होगा।शारीरिक दक्षता परीक्षा में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को कम से कम 60% अंक, जबकि SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवारों को न्यूनतम 50% अंक हासिल करने होंगे। इसके बाद मेरिट के आधार पर अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा के लिए चुना जाएगा।
लिखित परीक्षा में बस्तर की समझ भी परखी जाएगी
लिखित परीक्षा में सामान्य ज्ञान, बुद्धि-विवेक, अंकगणित के साथ स्थानीय भूगोल और संस्कृति से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे। लिखित परीक्षा के बाद मेरिट के आधार पर पदों की संख्या से तीन गुना अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इंटरव्यू 20 अंकों का होगा। स्थानीय भाषा-बोली के ज्ञान के लिए भी निर्धारित बोनस अंक चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
स्थानीय महिलाओं, होमगार्ड और पूर्व सैनिकों को आरक्षण
इस भर्ती में अलग-अलग वर्गों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। स्थानीय महिलाओं को 30%, तीन वर्ष की सेवा पूरी कर चुके होमगार्ड जवानों को 25% और भूतपूर्व सैनिकों को 10% आरक्षण दिया जाएगा। चयनित जवानों को नई पेंशन प्रणाली के तहत NPS या UPS (यूनिफाइड पेंशन स्कीम) में से किसी एक योजना का विकल्प चुनने का अधिकार होगा।
बस्तर फाइटर्स में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता क्यों?
दुर्गम इलाकों की बेहतर जानकारी: बस्तर के घने जंगलों, पहाड़ी इलाकों और दुर्गम रास्तों की स्थानीय युवाओं को बेहतर जानकारी होती है। इससे अभियान और पुलिसिंग में मदद मिल सकती है।
स्थानीय भाषा में संवाद: गोंडी, हल्बी जैसी स्थानीय बोलियों में ग्रामीणों से संवाद करने से पुलिस और आदिवासी समुदाय के बीच भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी।
नक्सल प्रभावित परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ना: 5वीं और 10वीं पास स्थानीय युवाओं तथा नक्सल प्रभावित परिवारों के सदस्यों को सरकारी सेवा का अवसर देकर उन्हें रोजगार और मुख्यधारा से जोड़ना भर्ती का एक अहम उद्देश्य है।
खुफिया सूचनाओं में मदद: स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों की समझ रखने वाले जवानों से क्षेत्र में सूचनाओं के बेहतर और तेज आदान-प्रदान में मदद मिलने की उम्मीद है। 4600 पदों की यह भर्ती बस्तर के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का बड़ा अवसर होगी। साथ ही स्थानीय युवाओं को पुलिस बल में शामिल कर क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों का लाभ सुरक्षा व्यवस्था को देने की कोशिश भी की जाएगी।
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Chhattisgarh: नवा रायपुर में 40 एकड़ में बनेगा NMIMS कैंपस, 2-3 साल में शुरू होगी पढ़ाई

रायपुर/नवा रायपुर: छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी खबर है। देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शामिल नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) अब नवा रायपुर अटल नगर में अपना कैंपस स्थापित करेगा। सेक्टर-18 में करीब 40 एकड़ जमीन पर बनने वाले इस कैंपस के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
राज्य सरकार का कहना है कि NMIMS के आने से छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों को प्रबंधन, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा के लिए दूसरे बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी। संस्थान का पहला शैक्षणिक बैच अगले दो से तीन वर्षों में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। कैंपस पूरी तरह विकसित होने के बाद करीब 10 हजार विद्यार्थी यहां अध्ययन कर सकेंगे।
90 साल की लीज पर मिली जमीन
NMIMS का संचालन करने वाले श्री विले पार्ले केलवणी मंडल (SVKM) को सेक्टर-18 की करीब 40 एकड़ जमीन 90 वर्ष की लीज पर दी गई है। राज्य मंत्रिपरिषद ने 21 जनवरी 2026 को संस्थान के लिए जमीन आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अब लीज और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कैंपस निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।संस्थान की स्थापना से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को अगले सात वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन पढ़ाई इससे पहले शुरू करने की तैयारी है।
महानगरों की जगह प्रदेश में ही मिलेंगे बड़े संस्थान के अवसर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली, मुंबई, पुणे या दूसरे बड़े शहरों का रुख न करना पड़े। NMIMS की स्थापना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का फोकस उच्च शिक्षा के साथ कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को जोड़ने पर है, ताकि युवा बदलती अर्थव्यवस्था और उद्योगों की जरूरत के अनुरूप तैयार हो सकें।
पढ़ाई के साथ रोजगार और स्टार्टअप को भी बढ़ावा
NMIMS के आने से सिर्फ डिग्री और पाठ्यक्रमों तक सीमित फायदा नहीं होगा। संस्थान के जरिए कौशल विकास, शोध, नवाचार और उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विद्यार्थियों को उद्योगों के साथ काम करने, व्यावहारिक अनुभव हासिल करने और नए कारोबारी विचारों पर काम करने के अवसर मिलेंगे। इससे छत्तीसगढ़ में विकसित हो रहे औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
देशभर से छात्र आएंगे, नवा रायपुर का एजुकेशन हब का सपना मजबूत होगा
NMIMS जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान के आने से नवा रायपुर में देश के अलग-अलग हिस्सों से विद्यार्थी और शिक्षक आने की संभावना है। इससे शहर का शैक्षणिक और बौद्धिक माहौल और मजबूत होगा। राज्य सरकार नवा रायपुर को आधुनिक सुविधाओं वाले शहर के साथ एजुकेशन और नॉलेज हब के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। NMIMS की स्थापना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी में प्रक्रिया पूरी
लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, आवास एवं पर्यावरण सचिव अंकित आनंद और नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के CEO चंदन कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। कैंपस पूरी क्षमता से संचालित होने के बाद करीब 10 हजार विद्यार्थियों को यहां शिक्षा मिलने की उम्मीद है। इससे नवा रायपुर में शिक्षा के साथ आवास, परिवहन, सेवाओं और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
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