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CG News: छत्तीसगढ़ सरकार ने कोदो-कुटकी का समर्थन मूल्य बढ़ाया, कृषि विभाग ने जारी की अधिसूचना

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CG News: Chhattisgarh government increased the support price of Kodo-Kutki, Agriculture Department issued notification

Raipur: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को राशि वितरण कार्यक्रम में मिलेट्स उत्पादक किसानों के हित में बड़ी घोषणा की। उन्होंने कोदो और कुटकी के समर्थन मूल्य में वृद्धि की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने खरीफ 2023 हेतु कोदो का समर्थन मूल्य 3000 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 3200 रुपए प्रति क्विंटल करने तथा कुटकी का समर्थन मूल्य 3100 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 3350 रुपए प्रति क्विंटल करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार कोदो तथा कुटकी का समर्थन मूल्य घोषित नहीं करती है। राज्य सरकार द्वारा कई बार केंद्र से कोदो और कुटकी का समर्थन मूल्य घोषित करने का आग्रह किया गया, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा इसकी घोषणा नहीं की गई। इसलिए छत्तीसगढ़ के मिलेट्स उत्पादक किसानों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा कोदो- कुटकी का समर्थन मूल्य घोषित किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री की घोषणा पर त्वरित अमल

मुख्यमंत्री बघेल द्वारा आज शाम कोदो-कुटकी के समर्थन मूल्य में वृद्धि की घोषणा पर त्वरित अमल करते हुए छत्तीसगढ़ शासन के कृषि एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा खरीफ 2023 में उत्पादित कोदो एवं कुटकी के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है। अधिसूचना में खरीफ 2023 में उत्पादित कोदो का न्यूनतम उपार्जन मूल्य 3200 रुपए प्रति क्विंटल और कुटकी का न्यूनतम उपार्जन मूल्य 3350 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है। रागी फसल के लिए भारत सरकार द्वारा खरीफ 2023 हेतु घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य 3846 रूपए प्रति क्विंटल के अनुसार उपार्जन किया जाएगा। उपार्जन अवधि का निर्धारण वन विभाग द्वारा किया जाएगा। कोदो-कुटकी एवं रागी का उपार्जन छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के माध्यम से किया जाएगा।

गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में डाली गई राशि 

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मुख्यमंत्री ने आज गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों के खाते में 9.65 करोड़ रुपए अंतरित किए। इस राशि में गोबर विक्रेताओं को 4.93 करोड़ रुपए, गौठान समितियों को 1.45 करोड़ रुपए, स्व-सहायता समूहों की 1.14 करोड़ रुपए की लाभांश राशि के साथ ही गौठान समिति के सदस्यों को 2.26 करोड़ रुपए की मानदेय राशि शामिल है। गोधन न्याय योजना के तहत हितग्राहियों को आज वितरित की गई राशि को मिलाकर 588.83 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा इस वर्ष धान की खरीदी 1 नवंबर से प्रारंभ होगी राज्य सरकार द्वारा इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि इस साल हम लोगों ने 130 लाख मीटरिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा है, उम्मीद है कि हम इस लक्ष्य को जरूर हासिल करेंगे।

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Raipur: 5 पर्वों पर मांस-मटन की बिक्री पर रोक, गणेश चतुर्थी से संवत्सरी तक दुकानें और पशुवध गृह बंद; होटल-रेस्टोरेंट पर भी नजर

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रायपुर: गणेश चतुर्थी, पर्युषण पर्व, डोल ग्यारस और अनंत चतुर्दशी समेत प्रमुख पर्वों को देखते हुए रायपुर नगर निगम ने शहर में मांस-मटन की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया है। सितंबर में अब आने वाली 5 पर्व तिथियों पर नगर निगम क्षेत्र के सभी पशुवध गृह और मांस-मटन की दुकानें बंद रहेंगी। होटल, रेस्टोरेंट और अन्य प्रतिष्ठानों में मांस-मटन बेचने या परोसने पर भी कार्रवाई की जाएगी।

महापौर मीनल चौबे के निर्देश पर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने यह आदेश जारी किया है। निगम की जोन स्वास्थ्य टीमों और स्वच्छता निरीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।

इन 5 तारीखों पर बंद रहेंगी दुकानें

तारीखपर्वप्रतिबंध
14 सितंबरश्री गणेश चतुर्थीमांस-मटन बिक्री बंद
15 सितंबरपर्युषण पर्व का अंतिम दिवसमांस-मटन बिक्री बंद
22 सितंबरडोल ग्यारसमांस-मटन बिक्री बंद
25 सितंबरअनंत चतुर्दशीमांस-मटन बिक्री बंद
26 सितंबरसंवत्सरी एवं उत्तम क्षमामांस-मटन बिक्री बंद

नगर निगम के आदेश के मुताबिक सितंबर में 4 सितंबर जन्माष्टमी और 7 सितंबर पर्युषण पर्व के प्रथम दिवस पर भी यही प्रतिबंध लागू था। इस तरह पूरे महीने कुल 7 निर्धारित तिथियों पर मांस-मटन की बिक्री पर रोक रखी गई है।

होटल-रेस्टोरेंट में भी नहीं बेच सकेंगे मांस-मटन

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प्रतिबंध सिर्फ मांस-मटन की दुकानों और पशुवध गृहों तक सीमित नहीं है। निर्धारित पर्वों के दिन होटल, रेस्टोरेंट और ऐसे अन्य प्रतिष्ठानों पर भी निगरानी रखी जाएगी, जहां मांस-मटन की बिक्री या परोसे जाने की संभावना है।

बिक्री मिली तो मौके पर ही जब्ती

नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधित दिन किसी होटल, दुकान या अन्य स्थान पर मांस-मटन की बिक्री होती मिली तो मौके पर ही सामान जब्त किया जाएगा। संबंधित व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। जोन स्वास्थ्य अधिकारियों और स्वच्छता निरीक्षकों को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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Chhattisgarh: प्रदेश के 2 लाख परिवारों ने नए पक्के घर में किया गृह प्रवेश; सक्ती को ₹121.70 करोड़ के 38 विकास कार्यों की सौगात

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सक्ती: छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत 2 लाख परिवारों का पक्के घर का सपना पूरा हुआ। सक्ती जिले में आयोजित राज्यस्तरीय गृह प्रवेश समारोह में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हितग्राहियों को नए घरों की प्रतीकात्मक चाबी सौंपी।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ के लिए PM आवास योजना-ग्रामीण के 3.65 लाख अतिरिक्त आवासों की सौगात देने की घोषणा की। उन्होंने सक्ती में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने और बस्तर संभाग में PM आवास के सर्वे की समय-सीमा बढ़ाकर 31 अक्टूबर 2026 करने का भी ऐलान किया।

रोज 1600 से ज्यादा PM आवास पूरे हो रहे : शिवराज

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं और ग्रामीण परिवारों के जीवन में बदलाव लाने के लिए काम कर रही है। PM आवास योजना-ग्रामीण इसी दिशा में महत्वपूर्ण योजना है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में आवास निर्माण तेजी से चल रहा है और प्रतिदिन 1600 से अधिक आवास पूरे किए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना की। शिवराज ने कहा कि गरीब परिवारों को केवल पक्की छत ही नहीं मिल रही, बल्कि उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, मुफ्त राशन, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं का भी लाभ मिल रहा है।

ढाई साल में 11.50 लाख से ज्यादा आवास पूरे : साय

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। सरकार ने पहली कैबिनेट बैठक में ही 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति देकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी थी। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 11.50 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूरे किए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र गरीब परिवार पक्के मकान से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवास सर्वे-2011 और आवास प्लस सर्वे के तहत आवासों की स्वीकृति मिल चुकी है। अब आवास प्लस-प्लस सर्वे में शामिल पात्र परिवारों के लिए भी आवास स्वीकृत कराने का प्रयास किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में 13.85 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और बिहान के माध्यम से महिलाओं को आजीविका के नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। वहीं महतारी वंदन योजना के तहत करीब 70 लाख महिलाओं को लाभ मिल रहा है और अब तक 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि उनके खातों में ट्रांसफर की जा चुकी है।

सक्ती में खुलेगा कृषि विज्ञान केंद्र

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सक्ती में कृषि विज्ञान केंद्र खोलने की घोषणा की। इससे क्षेत्र के किसानों को स्थानीय स्तर पर आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत खेती, फसल विविधीकरण और वैज्ञानिक मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अब केवल धान उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है। किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं।

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2 लाख आवासों के गृह प्रवेश के साथ कई ग्रामीण योजनाएं शुरू

कार्यक्रम में 2 लाख PM आवासों के गृह प्रवेश के अलावा ग्रामीण विकास से जुड़े कई अभियानों और नवाचारों की शुरुआत की गई। इनमें मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत AI आधारित जियो-टैग सत्यापन, ‘धार अपार’ और ‘सुघ्घर बाड़ी’ अभियान, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के 270 नए इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर और ‘अथ उद्यमिता की ओर’ इन्क्यूबेशन प्रोग्राम शामिल हैं। इस दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाली लखपति दीदियों, डीलर दीदियों और पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानित भी किया गया।

सक्ती जिले को ₹121.70 करोड़ के 38 विकास कार्य

इसी कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सक्ती जिले को 121 करोड़ 70 लाख रुपए से अधिक के 38 विकास कार्यों की सौगात दी। इनमें करीब 79.25 करोड़ रुपए के 23 कार्यों का भूमिपूजन और 42.46 करोड़ रुपए के 15 कार्यों का लोकार्पण शामिल है। इन परियोजनाओं में सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, प्रशासनिक भवन और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े काम शामिल हैं।

22 किमी सड़क समेत इन परियोजनाओं का भूमिपूजन

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भूमिपूजन किए गए प्रमुख कार्यों में करीब 25.82 करोड़ रुपए की लागत से 22 किमी लंबी देवरघटा-बरतुंगा-तुलसीडीह-अण्डा-चरौदा-सपिया नहरपार सड़क शामिल है। इसके अलावा करीब 15.30 करोड़ रुपए की लागत से छुहीपाली से कटेकोनी बड़े-कर्राखई-ठाकुरपाली होते हुए सेमराडीह तक 12 किमी सड़क के चौड़ीकरण और नवीनीकरण का काम भी शामिल है। अण्डी-किरकार-जगमहन-सातबहिनिया, नगझर-नवापारा और गुरेराडीह किरारी-केसला मार्ग समेत कई अन्य सड़क परियोजनाओं का भी भूमिपूजन किया गया।

कॉलेज, अस्पताल और पुलिस भवनों को भी मंजूरी

शिक्षा क्षेत्र में शासकीय कन्या महाविद्यालय सक्ती के नए भवन, बेदराम शासकीय महाविद्यालय मालखरौदा के अतिरिक्त भवन और नवीन लाइवलीहुड संस्थान भवन का भूमिपूजन हुआ। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए विभिन्न गांवों में उप स्वास्थ्य केंद्र और महतारी सदनों के निर्माण की आधारशिला रखी गई। वहीं, लोकार्पित कार्यों में सड़क और पुल-पुलिया के अलावा चंद्रपुर व हसौद के नए तहसील कार्यालय, डभरा-चंद्रपुर-जैजैपुर के नए पुलिस थाना भवन, अड़भार पुलिस चौकी, सुलौनी हाईस्कूल भवन, गोपालपुर प्रशिक्षण भवन और गोबरा महतारी सदन शामिल हैं। जल जीवन मिशन के तहत स्थापित सोलर ड्यूल पंप भी जनता को समर्पित किए गए।

पंचायतों के विकास कार्यों पर लगेगा बारकोड

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ग्रामीण विकास में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए पंचायतों में कराए जा रहे विकास कार्यों पर बारकोड लगाया जा रहा है। नागरिक बारकोड स्कैन कर संबंधित विकास कार्य की जानकारी हासिल कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे। नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे लोगों के आवास की भी चिंता की जा रही है। डिप्टी सीएम शर्मा ने बताया कि 26 जनवरी 2027 तक प्रदेश के प्रत्येक विद्यालय में बालिका शौचालय की सुविधा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद कमलेश जांगड़े समेत जनप्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी, लखपति दीदियां, आवास हितग्राही और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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Chhattisgarh: बस्तर में सड़क निर्माण में लापरवाही पर 6 ठेकेदार ब्लैकलिस्ट, 2 के पंजीयन रद्द, 4 पर 2 से 5 साल तक रोक

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रायपुर: बस्तर में सड़क और पुल निर्माण कार्यों में लगातार देरी और बेहद धीमी प्रगति पर लोक निर्माण विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने काम पूरा करने में रुचि नहीं लेने और अनुबंध की शर्तों का पालन नहीं करने वाले 6 ठेकेदारों के पंजीयन का नवीनीकरण रोक दिया है। इनमें से के. मोहन रेड्डी और मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा. के पंजीयन निरस्त भी कर दिए गए हैं।

विभाग के मुताबिक इन ठेकेदारों को काम में तेजी लाने के लिए कई बार नोटिस दिए गए थे। अनुबंध अवधि बढ़ाने और ठेकेदारों की ओर से काम पूरा करने के शपथ पत्र दिए जाने के बावजूद निर्माण कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं आई। इसके बाद शासन ने कार्रवाई का फैसला लिया।

6 ठेकेदारों पर हुई कार्रवाई

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय ने के. मोहन रेड्डी, मेसर्स शांति विजय कन्सट्रक्शन, मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा., मेसर्स राघवा कन्सट्रक्शन, मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेसर्स पंकज हालदार के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। विभाग ने सार्वजनिक आवागमन से जुड़े सड़क और पुल निर्माण में देरी को गंभीरता से लेते हुए इन ठेकेदारों के पंजीयन के नवीनीकरण पर रोक लगाई है। दो मामलों में पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई भी की गई है।

दो ठेकेदारों का पंजीयन रद्द

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के. मोहन रेड्डी का पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। वे सुकमा जिले में भेज्जी-चिंतागुफा मार्ग और चिंतलनार-मरियागुड़म सड़क का निर्माण कर रहे थे। विभाग ने पंजीयन निरस्त करने के साथ आगामी 5 साल तक नवीनीकरण पर रोक लगा दी है। इसी तरह मेसर्स ट्रांसाफ्ट इंफ्रा. का पंजीयन भी निरस्त किया गया है। कंपनी चिंतलनार-मरियागुड़म मार्ग के निर्माण से जुड़ी थी। इसके पंजीयन पर भी आदेश की तारीख से अगले 5 साल तक नवीनीकरण नहीं होगा।

3 ठेकेदारों पर 5 साल की रोक

मेसर्स राघवा कन्सट्रक्शन सुकमा जिले में चिंतलनार-मरियागुड़म और कोंटा-गोलापल्ली मार्ग का काम कर रही थी। कंपनी के पंजीयन का आगामी 5 साल तक नवीनीकरण नहीं किया जाएगा। मेसर्स शांति विजय कन्सट्रक्शन नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा सड़क का निर्माण कर रही थी। इसके पंजीयन के नवीनीकरण पर भी 5 साल की रोक लगाई गई है। वहीं मेसर्स पंकज हालदार नारायणपुर-सोनपुर-मरोड़ा मार्ग पर पुल-पुलिया निर्माण से जुड़ी थी। इसके पंजीयन के नवीनीकरण पर भी आगामी 5 साल तक रोक रहेगी।

बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 2 साल की रोक

मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर कोंटा-गोलापल्ली मार्ग का निर्माण कर रही थी। विभाग ने कंपनी के पंजीयन के नवीनीकरण पर 2 साल की रोक लगाई है।

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बार-बार नोटिस और शपथ पत्र के बाद भी काम में तेजी नहीं

शासन के मुताबिक इन निर्माण कार्यों की समीक्षा के दौरान सामने आया कि संबंधित ठेकेदारों को कई बार नोटिस जारी किए गए थे। काम पूरा करने के लिए अनुबंध अवधि बढ़ाई गई और ठेकेदारों ने निर्धारित समय में काम पूरा करने के संबंध में शपथ पत्र भी दिए। इसके बावजूद सड़क और पुल निर्माण की प्रगति बेहद धीमी रही। काम पूरा करने में रुचि नहीं दिखाने और अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन को देखते हुए विभाग ने पंजीयन संबंधी कार्रवाई की।

हाईकोर्ट में कैविएट भी दायर

राज्य शासन ने इन कार्रवाईयों के संबंध में बिलासपुर हाईकोर्ट में कैविएट भी दायर की है। शासन का कहना है कि बस्तर की महत्वपूर्ण सड़कों और पुलों के निर्माण में देरी से आम लोगों के आवागमन और जनसुविधाओं पर असर पड़ रहा है। इसलिए निर्माण कार्यों में लापरवाही को गंभीरता से लिया गया है।

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CG Cabinet: युवाओं के लिए ₹500 करोड़ का स्टार्टअप-NIPUN मिशन, सरकारी कर्मचारियों को 45 साल तक भर्ती में मौका

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रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में बुधवार को मंत्रालय महानदी भवन में हुई कैबिनेट बैठक में युवाओं, रोजगार, कौशल विकास और निर्यात को बढ़ावा देने से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए। सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए ₹500 करोड़ के मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन को मंजूरी दी है।

इसके साथ ही शासकीय, संविदा और संबद्ध संस्थाओं में काम करने वाले कर्मचारियों को दूसरी सरकारी सेवाओं और उच्च पदों के लिए आवेदन करने में बड़ी राहत दी गई है। अब निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 38 से बढ़ाकर 45 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है।

33 जिलों में उद्यमिता केंद्र, 100 टेक लैब बनेंगी

मुख्यमंत्री स्टार्टअप एवं NIPUN मिशन के तहत प्रदेश के सभी 33 जिलों में उद्यमिता विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा 100 इमर्जिंग टेक्नोलॉजी लैब और 5 इंडस्ट्री एक्सीलेंस सेंटर बनाए जाएंगे।

मिशन के जरिए युवाओं को रोजगार पाने वाले यानी जॉब सीकर से रोजगार देने वाले जॉब क्रिएटर बनाने पर जोर रहेगा। उद्योगों की जरूरत के मुताबिक युवाओं को प्रशिक्षण देने और औपचारिक रोजगार से जोड़ने के लिए NIPUN JOB Engine विकसित किया जाएगा।

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सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को स्टार्टअप, नवाचार और नई तकनीक आधारित उद्योगों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करना है।

निर्यात बढ़ाने के लिए नई नीति को मंजूरी

कैबिनेट ने छत्तीसगढ़ निर्यात प्रोत्साहन नीति 2026-30 को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य प्रदेश को देश के प्रमुख निर्यात केंद्रों में शामिल करना है।

नई नीति के तहत निर्यात के लिए मजबूत इकोसिस्टम और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। निर्यातकों को बेहतर बाजार पहुंच और व्यापार सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ कृषि एवं औद्योगिक क्षेत्र के वैल्यू एडेड उत्पादों के निर्यात पर जोर दिया जाएगा।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों के जरिए प्रदेश के उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधी पहुंच दिलाने की कोशिश होगी।

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नवा रायपुर में बनेगा NSTI, 10 एकड़ जमीन मुफ्त

कैबिनेट ने नवा रायपुर अटल नगर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (NSTI) की स्थापना के लिए ग्राम तेंदुवा में 10 एकड़ जमीन निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

करीब ₹200 करोड़ की लागत से विकसित होने वाले संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और छात्रावास सुविधाएं होंगी। यहां हर साल दीर्घकालिक पाठ्यक्रमों में 1,000 और अल्पकालीन कार्यक्रमों में 3,000 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।

NSTI में युवाओं को उद्योगों की जरूरत के मुताबिक आधुनिक तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे कौशल प्रशिक्षण के साथ इंटर्नशिप और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए उम्र सीमा 45 साल

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कैबिनेट के एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में राज्य शासन के स्थायी-अस्थायी कर्मचारी, निगम-मंडल और स्वशासी संस्थाओं के कर्मचारी, संविदाकर्मी और नगर सैनिकों के लिए बड़ी राहत दी गई है।

इन कर्मचारियों के लिए अन्य शासकीय सेवाओं और उच्च पदों पर आवेदन करने की निर्धारित अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।

इस फैसले से सरकारी और संबद्ध संस्थाओं में पहले से काम कर रहे कर्मचारियों को दूसरी सरकारी सेवाओं तथा उच्च पदों पर जाने के लिए अधिक अवसर मिलेंगे। इसके लिए राज्य शासन की ओर से एकीकृत स्थायी दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।

दुर्ग में नया जिला न्यायालय भवन बनेगा

कैबिनेट ने दुर्ग जिला न्यायालय के नए भवन के निर्माण का रास्ता भी साफ कर दिया है। इसके लिए ग्राम तितुरडीह में BIT कॉलेज के पास 4 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। यह जमीन वर्तमान में भिलाई इस्पात संयंत्र के नाम दर्ज है। इसके बदले ग्राम पाहंदा, तहसील पाटन में 5.024 हेक्टेयर शासकीय भूमि भिलाई इस्पात संयंत्र को दी जाएगी। दोनों भूखंडों का वर्तमान मूल्य लगभग समान बताया गया है। नए परिसर के निर्माण से दुर्ग जिला न्यायालय को आधुनिक और सुव्यवस्थित न्यायिक अधोसंरचना उपलब्ध हो सकेगी।

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Chhattisgarh: प्रदेश में जमीन का सीमांकन होगा ऑनलाइन, अब नहीं लगाने पड़ेंगे तहसील के चक्कर; 7 दिन में नया मॉड्यूल लागू करने के निर्देश

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में जमीन के सीमांकन के लिए तहसील कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की परेशानी जल्द खत्म होने वाली है। राज्य सरकार के राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग ने सीमांकन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और डिजिटल करने की तैयारी शुरू कर दी है। नए सिस्टम के तहत आवेदन से लेकर राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट तक की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।

नए डिजिटल सिस्टम में जमीन मालिकों को सीमांकन के लिए सीधे तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। आवेदन लोक सेवा केंद्र, CSC/चॉइस सेंटर, राजस्व विभाग के ऑनलाइन सिटीजन पोर्टल या सेवा सेतु के माध्यम से किया जा सकेगा। विभाग ने NIC को ई-कोर्ट सॉफ्टवेयर में जरूरी तकनीकी बदलाव कर नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए हैं।

आवेदन सीधे तहसीलदार की आईडी में पहुंचेगा

नई व्यवस्था में सीमांकन का आवेदन ऑनलाइन जमा होने के बाद सीधे संबंधित तहसीलदार की आईडी में ट्रांसफर होगा। इसके बाद राजस्व निरीक्षक अपनी रिपोर्ट भी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इससे आवेदक को अपने आवेदन की स्थिति और प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन मिलती रहेगी। मैन्युअल आवेदन दर्ज करने की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की तैयारी है।

आपत्ति होने पर ही जाना पड़ेगा तहसील

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नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि निर्विवाद सीमांकन के मामले में आवेदक को तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सीमांकन के दौरान यदि पड़ोसी या किसी अन्य पक्ष की ओर से औपचारिक आपत्ति दर्ज होती है, तभी आवेदक को आगे की प्रक्रिया के लिए तहसील कार्यालय जाना पड़ सकता है। बाकी प्रक्रिया ऑनलाइन और डिजिटल मैपिंग के जरिए पूरी करने की व्यवस्था की जा रही है।

बिचौलियों और मैन्युअल प्रक्रिया पर लगेगी रोक

सरकार का मानना है कि मैन्युअल प्रक्रिया खत्म होने से कार्यालयों की अनावश्यक भागदौड़ कम होगी। साथ ही बिचौलियों की भूमिका घटेगी और आवेदन की निगरानी ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी। डिजिटल प्रक्रिया से सीमांकन के मामलों के लंबित रहने की समस्या कम करने और तय समय-सीमा में रिपोर्ट उपलब्ध कराने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

पहले से कई राजस्व सेवाएं ऑनलाइन

छत्तीसगढ़ में जमीन से जुड़ी कई सेवाओं को पहले ही डिजिटल किया जा चुका है। नागरिक डिजिटल हस्ताक्षरित B-1 और P-II की प्रमाणित प्रतियां ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं। खसरा-खतौनी की जानकारी और QR कोड वाली प्रमाणित प्रतियां भी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध हैं।

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जमीन की खरीद-बिक्री के बाद नामांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन और स्टेटस ट्रैकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा नजरी नक्शा, परिवर्तित भूमि (डायवर्जन) और नजूल भूमि से जुड़े टैक्स रिकॉर्ड को भी डिजिटल किया जा चुका है। राजस्व अदालतों में चल रहे मामलों की पेशी, आदेश और सुनवाई से संबंधित जानकारी भी ऑनलाइन देखी जा सकती है।

डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगा बढ़ावा

सीमांकन की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की पहल से जमीन मालिकों, किसानों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का फोकस राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और नागरिक-केंद्रित बनाने पर है। नया मॉड्यूल लागू होने के बाद सीमांकन के लिए आवेदन करने से लेकर उसकी प्रगति और रिपोर्ट तक की प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी।

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