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CG New CM: छत्तीसगढ़ के नए सीएम होंगे विष्णुदेव साय, विधायक दल की बैठक में फैसला

CG New CM: छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव का नतीजा घोषित होने के सात दिन बाद आखिरकार नए मुख्यमंत्री को लेकर सस्पेंस खत्म हुआ। भाजपा विधायक दल की बैठक में विष्णुदेव साय को छत्तीसगढ़ का पहला आदिवासी मुख्यमंत्री चुन लिया गया है। बीजेपी ने बड़ा दांव खेलते हुए आदिवासी नेता विष्णुदेव साय को सूबे का मुख्यमंत्री बनाया है। विष्णुदेव साय को संघ और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का काफी करीबी माना जाता है। साय छत्तीसगढ़ की कुनकुरी विधानसभा सीट से विधायक हैं और दो बार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद की कमान भी संभाल चुके हैं। विष्णुदेव साय रायगढ़ सीट से सांसद और मोदी सरकार में राज्यमंत्री भी रह चुके हैं।
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केंद्रीय नेतृत्व ने प्रस्तावित किया विष्णुदेव साय का नाम
छत्तीसगढ़ में 3 दिसंबर को नतीजों की घोषणा के बाद से ही मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान का इंतजार किया जा रहा था। मुख्यमंत्री की रेस में कई नेताओं के नाम चल रहे थे। लेकिन बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने विष्णुदेव साय का नाम प्रस्तावित किया। बीजेपी विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर चर्चा हुई और सर्वसम्मति से उन्हें विधायक दल का नेता चुन लिया गया। बैठक में बीजेपी के ओर से नियुक्त किए गए तीनों पर्यवेक्षक केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और अर्जुन मुंडा और दुष्यंत कुमार गौतम के अलावा छत्तीसगढ़ बीजेपी प्रभारी ओम माथुर भी मौजूद रहे।
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साय के पास है लंबा राजनीतिक अनुभव
छत्तीसगढ़ के नए मुख्यमंत्री चुने गए विष्णुदेव साय साफ सुधरी छवि वाले नेता माने जाते हैं और लंबा राजनीतिक अनुभव रखते हैं। साय को 1989 में जशपुर की बगिया पंचायक का सरपंच चुना गया। इसके बाद वे 1990 में तपकरा विधानसभा से विधायक रहे। साय प्रदेश की रायगढ़ लोकसभा सीट से चार बार सांसद और मोदी सरकार में राज्यमंत्री भी रह चुके हैं। इसकेअलावा वह बीजेपी की राष्ट्रीय कार्य समिति के सदस्य हैं।
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Chhattisgarh: प्रदेश में जमीन का सीमांकन होगा ऑनलाइन, अब नहीं लगाने पड़ेंगे तहसील के चक्कर; 7 दिन में नया मॉड्यूल लागू करने के निर्देश

रायपुर: छत्तीसगढ़ में जमीन के सीमांकन के लिए तहसील कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की परेशानी जल्द खत्म होने वाली है। राज्य सरकार के राजस्व एवं भू-अभिलेख विभाग ने सीमांकन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और डिजिटल करने की तैयारी शुरू कर दी है। नए सिस्टम के तहत आवेदन से लेकर राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट तक की प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।
नए डिजिटल सिस्टम में जमीन मालिकों को सीमांकन के लिए सीधे तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी। आवेदन लोक सेवा केंद्र, CSC/चॉइस सेंटर, राजस्व विभाग के ऑनलाइन सिटीजन पोर्टल या सेवा सेतु के माध्यम से किया जा सकेगा। विभाग ने NIC को ई-कोर्ट सॉफ्टवेयर में जरूरी तकनीकी बदलाव कर नया मॉड्यूल 7 दिनों के भीतर लागू करने के निर्देश दिए हैं।
आवेदन सीधे तहसीलदार की आईडी में पहुंचेगा
नई व्यवस्था में सीमांकन का आवेदन ऑनलाइन जमा होने के बाद सीधे संबंधित तहसीलदार की आईडी में ट्रांसफर होगा। इसके बाद राजस्व निरीक्षक अपनी रिपोर्ट भी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे। इससे आवेदक को अपने आवेदन की स्थिति और प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन मिलती रहेगी। मैन्युअल आवेदन दर्ज करने की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की तैयारी है।
आपत्ति होने पर ही जाना पड़ेगा तहसील
नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि निर्विवाद सीमांकन के मामले में आवेदक को तहसील कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सीमांकन के दौरान यदि पड़ोसी या किसी अन्य पक्ष की ओर से औपचारिक आपत्ति दर्ज होती है, तभी आवेदक को आगे की प्रक्रिया के लिए तहसील कार्यालय जाना पड़ सकता है। बाकी प्रक्रिया ऑनलाइन और डिजिटल मैपिंग के जरिए पूरी करने की व्यवस्था की जा रही है।
बिचौलियों और मैन्युअल प्रक्रिया पर लगेगी रोक
सरकार का मानना है कि मैन्युअल प्रक्रिया खत्म होने से कार्यालयों की अनावश्यक भागदौड़ कम होगी। साथ ही बिचौलियों की भूमिका घटेगी और आवेदन की निगरानी ऑनलाइन होने से पारदर्शिता बढ़ेगी। डिजिटल प्रक्रिया से सीमांकन के मामलों के लंबित रहने की समस्या कम करने और तय समय-सीमा में रिपोर्ट उपलब्ध कराने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
पहले से कई राजस्व सेवाएं ऑनलाइन
छत्तीसगढ़ में जमीन से जुड़ी कई सेवाओं को पहले ही डिजिटल किया जा चुका है। नागरिक डिजिटल हस्ताक्षरित B-1 और P-II की प्रमाणित प्रतियां ऑनलाइन डाउनलोड कर सकते हैं। खसरा-खतौनी की जानकारी और QR कोड वाली प्रमाणित प्रतियां भी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध हैं।
जमीन की खरीद-बिक्री के बाद नामांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन और स्टेटस ट्रैकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा नजरी नक्शा, परिवर्तित भूमि (डायवर्जन) और नजूल भूमि से जुड़े टैक्स रिकॉर्ड को भी डिजिटल किया जा चुका है। राजस्व अदालतों में चल रहे मामलों की पेशी, आदेश और सुनवाई से संबंधित जानकारी भी ऑनलाइन देखी जा सकती है।
डिजिटल गवर्नेंस को मिलेगा बढ़ावा
सीमांकन की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने की पहल से जमीन मालिकों, किसानों और आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का फोकस राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और नागरिक-केंद्रित बनाने पर है। नया मॉड्यूल लागू होने के बाद सीमांकन के लिए आवेदन करने से लेकर उसकी प्रगति और रिपोर्ट तक की प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी।
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Chhattisgarh: सुखदेव भगत बने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नए प्रभारी, भूपेश बघेल को असम की जिम्मेदारी

नई दिल्ली/रायपुर: कांग्रेस पार्टी ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए कई राज्यों के प्रभारी बदल दिए हैं। झारखंड की लोहरदगा सीट से सांसद सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया गया है। अब तक छत्तीसगढ़ का प्रभार संभाल रहे सचिन पायलट को पंजाब की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव भूपेश बघेल को पंजाब के प्रभारी पद से हटाकर असम का प्रभारी बनाया गया है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी नियुक्तियों के मुताबिक ये बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू होंगे। पार्टी ने इसके साथ महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश समेत कुछ अन्य राज्यों के लिए भी नए प्रभारी नियुक्त किए हैं।
पंजाब में गुटबाजी के बीच बघेल की छुट्टी
पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच भूपेश बघेल को प्रभारी पद से हटाया गया है। पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के गुट के साथ मतभेद चल रहे थे।
रिपोर्टों के मुताबिक, वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने के फैसले के बाद पंजाब कांग्रेस में असंतोष और बढ़ गया था। चन्नी खेमे के नेताओं ने संगठन की स्थिति को लेकर हाईकमान के सामने अपनी नाराजगी जताई थी।
हालांकि, बघेल को हटाने का आधिकारिक कारण कांग्रेस ने अलग से नहीं बताया है। इसलिए पंजाब की गुटबाजी को उनकी नियुक्ति बदलने का कारण बताते समय इसे राजनीतिक घटनाक्रम और मीडिया रिपोर्टों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
बघेल अब संभालेंगे असम की जिम्मेदारी
भूपेश बघेल को कांग्रेस ने असम का महासचिव प्रभारी बनाया है। दूसरी ओर, पंजाब जैसे चुनावी राज्य की जिम्मेदारी अब सचिन पायलट को दी गई है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, इसलिए यह नियुक्ति कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कौन हैं सुखदेव भगत?
सुखदेव भगत का जन्म 22 अक्टूबर 1960 को लोहरदगा में हुआ। वे वर्तमान में झारखंड की लोहरदगा लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद हैं। राजनीति में आने से पहले भगत राज्य प्रशासनिक सेवा में थे। उन्होंने 2005 में सरकारी सेवा से इस्तीफा देकर विधानसभा चुनाव लड़ा और लोहरदगा से विधायक चुने गए। 2013 में वे झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने।
भाजपा में गए, फिर कांग्रेस में लौटे
2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले सुखदेव भगत भाजपा में शामिल हुए और लोहरदगा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं सके। जनवरी 2022 में उन्होंने कांग्रेस में वापसी की। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में लोहरदगा से उम्मीदवार बनाया। उन्होंने भाजपा के समीर उरांव को 1,39,138 वोटों के अंतर से हराकर पहली बार लोकसभा चुनाव जीता।
अब छत्तीसगढ़ में संगठन मजबूत करने की चुनौती
सुखदेव भगत के सामने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और प्रदेश स्तर पर नेताओं के बीच बेहतर समन्वय बनाने की चुनौती होगी। पार्टी के लिए यह नियुक्ति इसलिए भी अहम है क्योंकि अगले विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने पर जोर रहेगा। कांग्रेस के इस फेरबदल में एक तरफ बघेल को असम की नई जिम्मेदारी मिली है, वहीं सचिन पायलट को पंजाब और सुखदेव भगत को छत्तीसगढ़ भेजा गया है।
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Chhattisgarh: AI के दौर में शिक्षक सिर्फ पढ़ाएं नहीं, विद्यार्थियों को सही दिशा भी दें, राज्यपाल डेका; 63 शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार

रायपुर: शिक्षक दिवस पर छत्तीसगढ़ में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। लोकभवन के छत्तीसगढ़ मंडपम् में हुए कार्यक्रम में राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया। वर्ष 2025-26 के लिए 63 शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार और चार शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार दिया गया। इस मौके पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा भी की।
राज्यपाल बोले- AI सहायक बने, नियंत्रक नहीं
राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों को नई तकनीक की जानकारी होना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी उसका जिम्मेदारी और विवेक के साथ इस्तेमाल करना है।उन्होंने कहा कि AI हमारा सहायक बने, हमारा नियंत्रक नहीं। शिक्षक विद्यार्थियों को AI और डिजिटल तकनीक का उपयोग ज्ञान बढ़ाने, नवाचार और व्यक्तित्व विकास के लिए करने की सीख दें।
राज्यपाल ने कहा कि तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन, प्रेरणा और जीवन की सही दिशा शिक्षक ही दे सकते हैं। तकनीक पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता बच्चों के स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रभावित कर सकती है।
शिक्षक अब करियर गाइड और काउंसलर की भूमिका भी निभाएं
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के बाद शिक्षा व्यवस्था में तेजी से बदलाव हो रहा है। आने वाले समय में शिक्षकों को अपने ज्ञान और कौशल को लगातार अपडेट करना होगा। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा पहचानकर उन्हें सही विषय और करियर चुनने में मार्गदर्शन देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बच्चों की काउंसलिंग भी शिक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक की भूमिका सिर्फ कक्षा तक सीमित नहीं होती। विद्यार्थी अपने शिक्षक को आदर्श मानते हैं, इसलिए शिक्षक का आचरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनका ज्ञान।
CM साय बोले- शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शिक्षक वास्तव में राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि ज्ञानवान, संस्कारवान, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और हर बच्चे तक बेहतर शैक्षणिक अवसर पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है।
युक्तियुक्तकरण के बाद एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। बस्तर क्षेत्र में बच्चों को स्थानीय बोली के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा देने की पहल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे बच्चों के लिए सीखना अधिक सहज और प्रभावी हो रहा है। वहीं, पैरेंट्स-टीचर मीट के माध्यम से अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा से जोड़ा जा रहा है।
341 स्कूल PM श्री योजना में, 150 स्वामी विवेकानंद स्कूल
CM साय ने बताया कि प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन पीएम श्री योजना के तहत किया गया है। इन स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 विद्यालय शुरू किए जा रहे हैं। शिक्षकों की लंबे समय से लंबित पदोन्नतियों को भी सरकार ने प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।
बस्तर में ओरछा-जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ बनाने के लक्ष्य में शिक्षा और शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।
AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों में संस्कार, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए भी विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी अवसर पर उन्होंने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों की घोषणा की।
चार शिक्षकों को विशेष स्मृति पुरस्कार
समारोह में चार शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार दिए गए।
- राजेश कुमार प्रजापति, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई- डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार
- कामता प्रसाद जायसवाल, कोरबा- डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार
- प्रज्ञा सिंह, दुर्ग – डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार
- प्रियंका गोस्वामी, सारंगढ़-बिलाईगढ़ – श्री गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति पुरस्कार
इसके अलावा प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एलबी, शिक्षक एलबी, सहायक शिक्षक और सहायक शिक्षक एलबी संवर्ग के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना, स्कूल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव संतोष देवांगन समेत विभागीय अधिकारी और विभिन्न जिलों से आए शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
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Chhattisgarh: जन्माष्टमी पर CM साय ने किया शंख अभिषेक: बोले- श्रीकृष्ण का जीवन धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण की राह दिखाता है

रायपुर: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शुक्रवार को राजधानी के टाटीबंध स्थित इस्कॉन रायपुर के श्रीश्री राधा रासबिहारी मंदिर पहुंचे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और शंख अभिषेक किया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
इस दौरान मंदिर परिसर ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे’ के महामंत्र से गूंजता रहा। मुख्यमंत्री साय भी श्रद्धालुओं के साथ महामंत्र के संकीर्तन में शामिल हुए।
CM बोले- गीता का कर्मयोग आज भी जीवन की राह दिखाता है
मुख्यमंत्री ने जन्माष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन मानव समाज को धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता में दिया गया कर्मयोग का संदेश आज भी जीवन की चुनौतियों के बीच अपने कर्तव्य पर आगे बढ़ने की दिशा दिखाता है।
उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव नहीं है, बल्कि उनके जीवन-दर्शन और आदर्शों को अपनाने का अवसर भी है। श्रीकृष्ण ने अन्याय के खिलाफ खड़े होने, धर्म की रक्षा करने और कमजोर वर्ग के साथ खड़े रहने का संदेश दिया।
धार्मिक स्थलों को विकसित कर रही सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत प्रदेश की बड़ी पहचान है। माता कौशल्या की जन्मभूमि और भगवान श्रीराम के ननिहाल के रूप में भी छत्तीसगढ़ का विशेष धार्मिक महत्व है।
उन्होंने कहा कि भोरमदेव, गंधेश्वर महादेव, मधेश्वर महादेव और कुलेश्वर महादेव जैसे शिवधाम तथा मां बमलेश्वरी, मां महामाया, मां दंतेश्वरी और मां चंद्रहासिनी जैसे प्रमुख आस्था केंद्र प्रदेश की धार्मिक पहचान को मजबूत करते हैं। सरकार इन स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं के विस्तार और विकास कार्यों पर काम कर रही है।
भोरमदेव क्षेत्र में 150 करोड़ से विकास
CM साय ने बताया कि ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर क्षेत्र को प्रसाद योजना के तहत करीब 150 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे।
उन्होंने कहा कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन के विकास से विरासत संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। इससे स्थानीय युवा, स्व-सहायता समूह, छोटे कारोबारी और कारीगर लाभान्वित हो सकते हैं।
50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु कर चुके रामलला के दर्शन
मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर में रामलला के विराजमान होने के बाद छत्तीसगढ़ के लोगों में दर्शन को लेकर उत्साह बढ़ा है। श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से अब तक 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के जरिए प्रदेश के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थस्थलों की यात्रा का अवसर भी दिया जा रहा है।
3 से 5 सितंबर तक चल रहा महोत्सव
इस्कॉन रायपुर के 26वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर 3 से 5 सितंबर तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान भजन-कीर्तन, भगवान श्रीकृष्ण की आराधना और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं।
कार्यक्रम में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा, इस्कॉन रायपुर के पदाधिकारी, संतजन और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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Chhattisgarh: जन्माष्टमी पर 4 सितंबर को छत्तीसगढ़ में शुष्क दिवस, शराब दुकानें, बार और क्लब रहेंगे बंद; अवैध बिक्री पर उड़नदस्तों की नजर

रायपुर: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर 4 सितंबर, शुक्रवार को पूरे छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री और परोसने पर रोक रहेगी। राज्य शासन ने इस दिन को ‘शुष्क दिवस’ घोषित किया है। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं।
शराब दुकान से लेकर होटल-बार तक सब बंद
शुष्क दिवस के दौरान प्रदेश की सभी देशी और विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानें बंद रहेंगी। इसके अलावा रेस्टोरेंट बार, होटल-बार, क्लब, अहाता और शराब बेचने या परोसने वाले अन्य सभी लाइसेंसी प्रतिष्ठान भी बंद रहेंगे। भांग और भांगघोटा की फुटकर दुकानें भी 4 सितंबर को नहीं खुलेंगी।
होटल-रेस्टोरेंट और क्लबों में भी शराब पर रोक
शासन के निर्देश के मुताबिक शुष्क दिवस के दौरान किसी भी होटल, रेस्टोरेंट, क्लब या अन्य प्रतिष्ठान अथवा व्यक्ति को शराब बेचने या परोसने की अनुमति नहीं होगी। गैरमालिकाना क्लब, रेस्टोरेंट और स्टार होटल भी इस प्रतिबंध के दायरे में आएंगे।
शराब का भंडारण भी प्रतिबंधित
शुष्क दिवस के दौरान व्यक्तिगत रूप से शराब का भंडारण करने और गैर-लाइसेंसी परिसरों में शराब रखने पर भी रोक रहेगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर शराब जब्त करने के साथ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अवैध शराब के खिलाफ चलेगा जांच अभियान
शराब की अवैध बिक्री, परिवहन और संग्रहण रोकने के लिए आबकारी विभाग ने निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। जिला कार्यालयों के साथ संभागीय और राज्य स्तरीय उड़नदस्ते भी कार्रवाई करेंगे। जांच दल संदिग्ध वाहनों और अवैध शराब के संभावित संग्रहण स्थलों की जांच करेंगे। अवैध शराब मिलने पर उसे जब्त कर संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाएगा।
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