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Exam Reforms: NTA परीक्षा सुधार के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स ने जनता से मांगे सुझाव,13 सितंबर तक दे सकेंगे राय

नई दिल्ली:केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं की व्यवस्था में व्यापक सुधार की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में बनाई गई 6 सदस्यीय हाई-पावर्ड टास्क फोर्स ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक संगठनों से सुझाव मांगे हैं।
टास्क फोर्स खासतौर पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षाओं के संचालन, परीक्षा सुरक्षा, पेपर डिजाइन और पूरी व्यवस्था में सुधार के उपायों पर काम कर रही है। केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय के मुताबिक, इसका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित, पारदर्शी, निष्पक्ष और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाना है।
पेपर लीक रोकने से लेकर तकनीक के इस्तेमाल तक पर राय
टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सुझाव ले रही है। इनमें पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी रोकने, संस्थागत व्यवस्था मजबूत करने, तकनीक के इस्तेमाल, परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने और छात्रों की परेशानियां कम करने जैसे विषय शामिल हैं।
सरकार का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सीधे छात्रों और परीक्षा से जुड़े दूसरे लोगों के अनुभवों को शामिल करना जरूरी है।
13 सितंबर तक दे सकेंगे सुझाव
सरकार ने जनता के लिए ऑनलाइन पोर्टल के साथ फोन, वॉट्सऐप और ईमेल के जरिए सुझाव देने की व्यवस्था की है।सुझाव examreforms-taskforce.dopt.gov.in पर भेजे जा सकते हैं। इसके अलावा 1800-180-4747 पर फोन करके भी राय दी जा सकती है। वॉट्सऐप के जरिए सुझाव देने के लिए 7827042830 नंबर पर ‘hptf’ लिखकर भेजने की व्यवस्था की गई है।
टास्क फोर्स इन सुझावों का अध्ययन करने के बाद परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें देगी। सभी लोग 13 सितंबर तक अंग्रेजी, हिंदी या क्षेत्रीय भाषाओं में अपने सुझाव भेज सकते हैं।
जुलाई में बनी थी टास्क फोर्स
केंद्र सरकार ने जुलाई में नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में इस टास्क फोर्स का गठन किया था। इसका गठन परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक से जुड़े विवादों के बीच किया गया। टास्क फोर्स में नीलेकणि के अलावा पूर्व इंटेलिजेंस ब्यूरो निदेशक तपन डेका, पूर्व इसरो चेयरमैन एस. सोमनाथ, IIT मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनिता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं।
NTA में 3 नए अधिकारियों की नियुक्ति
परीक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही कवायद के बीच राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में तीन नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। आईपीएस अधिकारी रवि कुमार सिंह और आईएएस अधिकारी प्रसन्ना वेंकटेश वी. को निदेशक नियुक्त किया गया है। वहीं, आईआरएस अधिकारी अमित समदरिया को संयुक्त निदेशक बनाया गया है।
एंटी-पेपर लीक कानून भी लागू
सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए कानून भी बनाया है। मानसून सत्र में इससे संबंधित विधेयक को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिली थी। इसके बाद 1 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ यह कानून बन गया।
सरकार के मुताबिक, इसका दायरा केवल NTA की परीक्षाओं तक सीमित नहीं रहेगा। UPSC, कर्मचारी चयन आयोग (SSC), बैंकिंग और अन्य सार्वजनिक परीक्षाएं भी इसके दायरे में आएंगी।
NEET-UG विवाद के बाद परीक्षा व्यवस्था पर बढ़ा फोकस
परीक्षा सुधार की यह कवायद NEET-UG से जुड़े पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच हो रही है। पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ी थी।
मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) द्वारा किए जाने की बात सामने आई है। जांच के दौरान कई राज्यों में कार्रवाई की गई है और आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है।
सरकार अब परीक्षा व्यवस्था में ऐसी खामियों को दूर करने पर जोर दे रही है, ताकि देश की बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और तकनीकी गड़बड़ियों की आशंका को कम किया जा सके।
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Weather Update: दिल्ली-NCR में लगातार दूसरे दिन तेज बारिश, कई इलाकों में 3-4 फीट पानी भरा, रेड अलर्ट; 390 फ्लाइट्स लेट

नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में मंगलवार सुबह लगातार दूसरे दिन तेज बारिश हुई। बारिश के चलते एम्स फ्लाईओवर, कनॉट प्लेस, ITO और आरके पुरम समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। कुछ जगहों पर 3-4 फीट तक पानी भरने से ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ। मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR के लिए रेड अलर्ट जारी किया है।
बारिश के कारण दिल्ली से गुरुग्राम जाने वाले NH-48 पर महिपालपुर के पास लंबा जाम लगा। दिल्ली एयरपोर्ट ने भी यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी कर उड़ानों के प्रभावित होने की जानकारी दी।
दिल्ली एयरपोर्ट पर उड़ानों पर असर
खराब मौसम के कारण सोमवार को दिल्ली एयरपोर्ट से संचालित होने वाली उड़ानें प्रभावित हुईं। करीब 390 फ्लाइट्स लेट, 15 डायवर्ट और 26 फ्लाइट्स कैंसिल की गईं। एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों से अपनी फ्लाइट का स्टेटस चेक करने और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी।
गुरुग्राम में स्कूल-दफ्तर बंद, वर्क फ्रॉम होम
गुरुग्राम में कई इलाकों में करीब 3 फीट तक पानी भर गया। इसके बाद मंगलवार को सरकारी दफ्तरों और स्कूलों में वर्क फ्रॉम होम लागू किया गया। सोमवार को जलभराव के कारण कई स्कूल बसें 3 से 6 घंटे तक पानी में फंसी रही थीं। इसके बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए।
यूपी के कई शहरों में बारिश, वाराणसी में स्कूल बंद
उत्तर प्रदेश के अयोध्या समेत करीब 15 शहरों में बारिश का दौर जारी है। वाराणसी में सोमवार रात 8 बजे से लगातार बारिश हो रही है। खराब मौसम और जलभराव को देखते हुए स्कूल बंद कर दिए गए हैं। बारिश से जुड़ी घटनाओं में 4 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। मथुरा में भी सड़कें और कई रिहायशी इलाके जलमग्न हैं।
भोपाल समेत MP के कई जिलों में तेज बारिश
मध्य प्रदेश में भी कई जिलों में तेज बारिश हुई। भोपाल में बारिश के कारण ट्रैफिक प्रभावित हुआ, जबकि विदिशा के बाजार में पानी भर गया। प्रदेश में अब तक करीब 28.75 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है।
15 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने 27 अगस्त तक 15 राज्यों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इनमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, उत्तराखंड और केरल समेत अन्य राज्य शामिल हैं। लगातार बारिश के कारण कई राज्यों में जलभराव, ट्रैफिक और हवाई सेवाओं पर असर पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से लोगों को मौसम और स्थानीय एडवाइजरी के अनुसार ही यात्रा करने की सलाह दी गई है।
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अमरावती जिला अस्पताल के NICU में आग, 3 नवजातों की मौत, 39 बच्चे भर्ती थे; वेंटिलेटर में धमाके के बाद आग लगने की आशंका

अमरावती: महाराष्ट्र के अमरावती जिला महिला अस्पताल के NICU में सोमवार सुबह करीब 3:30 बजे आग लग गई। हादसे में 3 नवजातों की मौत हो गई। आग अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित NICU में लगी, जहां उस समय 39 नवजात भर्ती थे। आग लगते ही डॉक्टरों, नर्सों और अस्पताल कर्मचारियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया। कई बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालकर दूसरी जगह शिफ्ट किया गया।
एक कंपार्टमेंट में भर्ती थे 9 नवजात, 3 की मौत
अमरावती के पुलिस कमिश्नर राकेश ओला के मुताबिक, NICU में तीन कंपार्टमेंट थे। इनमें से एक में 9 नवजात भर्ती थे। आग की चपेट में आने से 3 बच्चों की मौत हो गई, जबकि बाकी 6 नवजातों को इलाज के लिए दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। इन 6 बच्चों की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति को लेकर अभी जानकारी सामने नहीं आई है।
वेंटिलेटर में धमाके के बाद आग लगने की आशंका
पुलिस की शुरुआती जांच में NICU में लगे वेंटिलेटर के अंदर धमाके के बाद आग लगने की आशंका जताई गई है। हालांकि, आग लगने की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां घटना के कारणों की जांच कर रही हैं।
CM फडणवीस ने दिए हाईलेवल जांच के आदेश
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना की हाईलेवल जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के सचिव को अमरावती जाकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले नवजातों के परिवारों को ₹5-5 लाख की आर्थिक सहायता देने का भी ऐलान किया है।
दो दिन पहले छिंदवाड़ा में भी NICU में लगी थी आग
अमरावती की घटना से दो दिन पहले मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिला अस्पताल के NICU में भी आग लगी थी। शनिवार देर रात करीब 2 बजे वार्मर मशीन के फिलामेंट से निकली चिंगारी के बाद आग लगी थी। हादसे में 3 नवजात झुलस गए थे। अस्पताल स्टाफ ने फायर फाइटिंग उपकरणों की मदद से आग पर काबू पाया और बच्चों को प्राथमिक इलाज दिया। इसके बाद तीनों नवजातों को बेहतर इलाज के लिए जबलपुर रेफर किया गया। इनमें एक बच्चे की हालत गंभीर थी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन ने छिंदवाड़ा की घटना के बाद आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने घटाई जज बनने के लिए वकालत की अनिवार्य अवधि, 3 साल की जगह अब 1 साल प्रैक्टिस; चयन के बाद 2 साल की ट्रेनिंग भी जरूरी

नई दिल्ली: न्यायिक सेवा में प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बदलाव किया है। कोर्ट ने जज बनने के लिए वकालत की प्रैक्टिस को अनिवार्य रखने का फैसला बरकरार रखा, लेकिन जरूरी प्रैक्टिस की अवधि 3 साल से घटाकर 1 साल कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह भी तय किया कि न्यायिक सेवा परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को नियुक्ति के बाद 2 साल की अनिवार्य ट्रेनिंग और क्लर्कशिप से गुजरना होगा।
1 साल प्रैक्टिस के बाद 2 साल की ट्रेनिंग
सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देश के अनुसार, न्यायिक सेवा परीक्षा में चयनित उम्मीदवारों को पहले 1 साल राज्य न्यायिक अकादमी में गहन प्रशिक्षण लेना होगा। इसके बाद उन्हें 6 महीने जिला न्यायाधीश या उच्चतर न्यायिक सेवा के अधिकारी के साथ क्लर्कशिप और 6 महीने मौजूदा हाईकोर्ट जज के साथ क्लर्कशिप करनी होगी। यानी जज बनने के लिए अब 1 साल की वकालत के साथ चयन के बाद 2 साल की ट्रेनिंग और क्लर्कशिप का मॉडल लागू होगा।
31 मार्च 2027 तक संक्रमण अवधि में बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने नई व्यवस्था लागू करने के लिए संक्रमण अवधि भी तय की है, जो 31 मार्च 2027 तक लागू रहेगी। कोर्ट ने कहा कि पहले के फैसले के बाद एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है। ऐसे में इस अवधि के दौरान सभी कानून स्नातकों को आवेदन करने की पात्रता दी जाएगी। इस संक्रमण अवधि में उम्मीदवारों को 1 साल की सक्रिय प्रैक्टिस का अलग से प्रमाणपत्र देने की जरूरत नहीं होगी।
पहले 3 साल की प्रैक्टिस अनिवार्य की गई थी
मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवेश स्तर की न्यायिक सेवा के लिए वकील के रूप में कम से कम 3 साल की प्रैक्टिस अनिवार्य करने का फैसला दिया था। कोर्ट का मानना था कि ट्रायल कोर्ट के जजों में क्षमता और परिपक्वता सुनिश्चित करने के लिए अदालत में पहले का अनुभव जरूरी है। इस फैसले के खिलाफ कई समीक्षा याचिकाएं दाखिल की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने अब प्रैक्टिस की अनिवार्यता को खत्म नहीं किया, बल्कि उसकी अवधि 3 साल से घटाकर 1 साल कर दी है।
CJI ने कहा था- 3 साल की शर्त से युवा प्रतिभाएं छूट सकती हैं
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा था कि 3 साल की प्रैक्टिस की अनिवार्यता कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले युवाओं के लिए एक तरह की खाली अवधि पैदा कर सकती है। अदालत ने माना कि इससे प्रतिभाशाली कानून स्नातक पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद न्यायिक सेवा को करियर के रूप में चुनने से हतोत्साहित हो सकते हैं। CJI ने महिला उम्मीदवारों की स्थिति पर भी चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि परिवार, शादी और स्थान परिवर्तन जैसी सामाजिक परिस्थितियों के कारण कई महिला उम्मीदवारों के लिए लगातार कई साल की प्रैक्टिस पूरी करना मुश्किल हो सकता है।
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Delhi: दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर बुलडोजर चला, बैरिकेड और फेंसिंग समेत अवैध ढांचे हटाए; इस्लामाबाद में भारतीय मिशन के बाहर भी हुई थी कार्रवाई

नई दिल्ली: देश की राजधानी के चाणक्यपुरी इलाके में बुधवार देर रात पाकिस्तान हाई कमीशन के बाहर बुलडोजर चला। कार्रवाई में बैरिकेड, लोहे की फेंसिंग और वीजा सेक्शन के पास कतार लगाने के लिए बनाए गए ढांचे हटा दिए गए। अधिकारियों के मुताबिक, ये निर्माण हाई कमीशन की तय सीमा के बाहर किए गए थे।
मौके पर JCB से कार्रवाई के बाद टूटी रेलिंग, लोहे के फ्रेम, छत की चादरें और कंक्रीट के टुकड़े बिखरे दिखाई दिए। हालांकि, पाकिस्तान हाई कमीशन की मुख्य इमारत, मेन गेट और परिसर की दीवारों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब दो दिन पहले इस्लामाबाद में भारतीय हाई कमीशन के बाहर लगे सुरक्षा बैरिकेड और पार्किंग पोल हटाए गए थे।
कश्मीर पर अमेरिकी राजदूत के बयान से भी बढ़ा तनाव
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के बीच अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के कश्मीर पर दिए बयान को लेकर भी पाकिस्तान ने आपत्ति जताई है। 19 अगस्त को श्रीनगर दौरे के दौरान गोर ने जम्मू-कश्मीर को भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था। इसके बाद पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी चार्ज डी’अफेयर्स नताली बेकर को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया।
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NEET: सुप्रीम कोर्ट में बोली सरकार-NEET परीक्षा सिस्टम सुरक्षित, SC ने कहा- UPSC जैसा मजबूत सिस्टम बनाने की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि NEET परीक्षा की पूरी प्रक्रिया सुरक्षित है और इसमें सेंध लगाना आसान नहीं है। सरकार के मुताबिक प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने तक कई स्तरों पर गोपनीयता और सुरक्षा व्यवस्था लागू है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को UPSC की तर्ज पर और मजबूत परीक्षा व्यवस्था विकसित करने की सलाह दी। कोर्ट ने कहा कि सिस्टम में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे अनुभवी अधिकारियों के तबादले के बाद भी परीक्षा कराने का संस्थागत अनुभव बना रहे।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट, FAIMA और अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। याचिकाओं में NTA को भंग करने और पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा- UPSC जैसा सिस्टम बनाएं
सुप्रीम कोर्ट ने करीब तीन महीने बाद एक बार फिर NTA की परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि NTA को UPSC की तरह ऐसा सिस्टम विकसित करना चाहिए, जिसमें परीक्षा कराने का अनुभव अधिकारियों के ट्रांसफर होने के बावजूद संस्था के पास बना रहे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कागज पर कोई प्रक्रिया कितनी भी मजबूत दिखाई दे, असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि एक परीक्षा खत्म होने के बाद अगली परीक्षा में वही कमजोरियां दोबारा सामने न आएं।
केंद्र ने बताया- NEET पेपर की सुरक्षा के 10 स्तर
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को NEET प्रश्नपत्र की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी। सरकार ने बताया कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा केंद्र पर छात्रों तक पहुंचने तक कई स्तरों पर सुरक्षा व्यवस्था लागू रहती है।
1. कई विशेषज्ञ तैयार करते हैं प्रश्न बैंक
विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ प्रश्न बैंक तैयार करते हैं। इसके बाद 100-100 सवालों के आधार पर चार अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार किए जाते हैं। इनमें से दो प्रश्नपत्र NTA के महानिदेशक चुनते हैं। अंतिम प्रश्नपत्र कौन-सा होगा, इसकी जानकारी पहले से किसी को नहीं होती।
2. 13 भाषाओं में तैयार होता है प्रश्न बैंक
करीब 500 सवालों का प्रश्न बैंक 13 भाषाओं में तैयार किया जाता है। इसके लिए विशेषज्ञ ट्रांसलेटर की मदद ली जाती है।
3. दो प्रिंटिंग प्रेस में छपते हैं पेपर
प्रश्नपत्र सीलबंद कवर में दो निर्धारित प्रिंटिंग प्रेस भेजे जाते हैं। यहां CCTV और CISF की निगरानी रहती है। प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों को भी यह जानकारी नहीं होती कि प्रश्नपत्र किस परीक्षा के लिए है।
4. डिजिटल चाबी और कोड से खुलता है बॉक्स
प्रश्नपत्र ले जाने वाले व्यक्ति के पास डिजिटल चाबी होती है, लेकिन बॉक्स खोलने का कोड उसके पास नहीं होता। यह कोड NTA महानिदेशक की अनुमति के बाद जारी किया जाता है।
5. लोहे के बॉक्स में रखे जाते हैं पेपर
प्रश्नपत्र ऐसे लोहे के बॉक्स में रखे जाते हैं, जिन्हें बंद करने के बाद लॉक तोड़े बिना खोला नहीं जा सकता।
6. हर पैकेट में अलग क्रम के प्रश्नपत्र
24 प्रश्नपत्रों वाले पैकेट में सवालों का क्रम अलग-अलग रखा जाता है। प्रत्येक पैकेट पर वॉटरमार्क नंबर, शहर, परीक्षा केंद्र और पैकेट नंबर दर्ज होता है।
7. स्ट्रॉन्ग रूम में रखे जाते हैं पेपर
प्रश्नपत्रों के दो सेट अलग-अलग बैंकों के स्ट्रॉन्ग रूम में रखे जाते हैं। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी होती है और संबंधित अधिकारी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करते हैं।
8. GPS से ट्रैक होती है गाड़ी
बैंक से परीक्षा केंद्र तक प्रश्नपत्र पहुंचाने वाली गाड़ी में GPS लगा होता है। गाड़ी की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जाता है और पुलिस सुरक्षा के बीच प्रश्नपत्र परीक्षा केंद्र तक पहुंचते हैं।
9. परीक्षा से कुछ घंटे पहले खुलता है बॉक्स
परीक्षा शुरू होने से कुछ घंटे पहले दो छात्रों की मौजूदगी में प्रश्नपत्र का बॉक्स खोला जाता है। इस प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी की जाती है।
10. 24 छात्रों के लिए अलग पैकेट
हर कक्षा में 24 छात्रों के लिए अलग प्रश्नपत्र पैकेट होता है। कक्षा समन्वयक यह पैकेट छात्रों को देते हैं और छात्र स्वयं पैकेट खोलते हैं।
टेक्नोलॉजी समझने वाले अधिकारियों को शामिल करने की सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने NTA को परीक्षा व्यवस्था में नई तकनीक की समझ रखने वाले अधिकारियों को शामिल करने की सलाह दी। कोर्ट का जोर ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर रहा, जिसमें परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों की पहचान कर उन्हें लगातार दूर किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश है कि सिर्फ कागज पर मजबूत प्रक्रिया काफी नहीं है। परीक्षा प्रणाली को ऐसा बनाया जाना चाहिए, जिसमें सुरक्षा, तकनीक और संस्थागत अनुभव लगातार मजबूत होते रहें।
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