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DGP/IG Conference: प्रधानमंत्री मोदी ने पुलिस के बारे में जनता की धारणा बदलने, युवाओं तक पहुंच बढ़ाने पर दिया जोर

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DGP/IG Conference: PM Modi stresses on changing public perception about police, increasing outreach to youth

Raipur: प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय प्रबंधन संस्थान, रायपुर में पुलिस महानिदेशकों/महानिरीक्षकों के 60वें अखिल भारतीय सम्मेलन में भाग लिया। तीन दिवसीय इस सम्मेलन का विषय ‘विकसित भारत: सुरक्षा आयाम’ है। प्रधानमंत्री ने खासकर युवाओं के बीच पुलिस के प्रति जनता की धारणा बदलने की तत्काल जरूरत पर बल दिया, जिसके लिए दक्षता, संवेदनशीलता और जवाबदेही को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने शहरी पुलिस व्यवस्था को मज़बूत करने, पर्यटक पुलिस को फिर से सक्रिय करने और औपनिवेशिक काल के आपराधिक कानूनों के स्थान पर लागू किए गए नए भारतीय न्याय संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के बारे में जन जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की पुलिस और व्यापक प्रशासन को निर्जन द्वीपों को एकीकृत करने के लिए नवीन रणनीतियां अपनाने, राष्ट्रीय खुफिया ग्रिड (नेटग्रिड) के अंतर्गत एकीकृत डेटाबेस का प्रभावी उपयोग करने और कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी प्राप्त करने के लिए इन प्रणालियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से जोड़ने का निर्देश दिया। उन्होंने विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को पुलिस जांच में फोरेंसिक के उपयोग पर केस स्टडी करने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया, और कहा कि फोरेंसिक के बेहतर अनुप्रयोग से आपराधिक न्याय प्रणाली और मजबूत होगी।

प्रधानमंत्री ने प्रतिबंधित संगठनों की नियमित निगरानी के लिए तंत्र स्थापित करने, वामपंथी उग्रवाद से मुक्त क्षेत्रों का समग्र विकास सुनिश्चित करने और तटीय सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए नवोन्मेषी मॉडल अपनाने के महत्व पर ज़ोर दिया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि नशीली दवाओं के दुरुपयोग से निपटने के लिए एक समग्र सरकारी दृष्टिकोण की आवश्यकता है, जिसमें प्रवर्तन, पुनर्वास और सामुदायिक स्तर पर हस्तक्षेप एक साथ किया जाए।

सम्मेलन में राष्ट्रीय सुरक्षा के विविध मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। विजन 2047 की दिशा में पुलिस व्यवस्था के दीर्घकालिक रोडमैप, आतंकवाद-निरोध और कट्टरपंथ-निरोध में उभरते रुझान, महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने में तकनीक का लाभ उठाने, विदेशों में रह रहे भारतीय भगोड़ों को वापस लाने की रणनीतियों और प्रभावी जांच एवं अभियोजन सुनिश्चित करने के लिए फोरेंसिक क्षमताओं को मज़बूत करने पर चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री ने मज़बूत तैयारियों और समन्वय की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और पुलिस प्रमुखों से चक्रवात, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपात स्थितियों, जिनमें चक्रवात दित्वा की मौजूदा स्थिति भी शामिल है, के लिए प्रभावी आपदा प्रबंधन तंत्र को मज़बूत करने का आग्रह किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं के दौरान जीवन की रक्षा और न्यूनतम व्यवधान सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय योजना, तत्क्षण समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया और समग्र सरकारी दृष्टिकोण आवश्यक हैं।

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अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने पुलिस नेतृत्व से आह्वान किया कि वे विकासशील राष्ट्र की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पुलिस व्यवस्था को फिर से व्यवस्थित करें, ताकि विकसित भारत बनने की राह पर साफ हो सके।

प्रधानमंत्री ने खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक प्रदान किए। उन्होंने शहरी पुलिस व्यवस्था में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन शहरों को भी पुरस्कार प्रदान किए। यह सम्मान शहरी पुलिस व्यवस्था में नवाचार और सुधार को प्रोत्साहित करने के लिए पहली बार स्थापित किया गया है।

इस सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, गृह राज्य मंत्री और केंद्रीय गृह सचिव ने भाग लिया। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक, साथ ही केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुखों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि देश भर से विभिन्न रैंकों के 700 से अधिक अधिकारी वर्चुअल माध्यम से इस सम्मेलन में शामिल हुए।

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Chhattisgarh: गौरेला में सड़क पर बर्थडे मनाना पड़ा भारी, BJYM जिलाध्यक्ष समेत 4 पर FIR

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: छत्तीसगढ़ के गौरेला में सड़क पर जन्मदिन का जश्न मनाना भाजयुमो जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ दुबे उर्फ सिद्धू समेत चार लोगों को भारी पड़ गया। 18 सितंबर की रात अमरकंटक चौक पर मंच लगाकर जन्मदिन मनाया गया था। कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गौरेला पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज की।

पुलिस के मुताबिक, समारोह के दौरान चौक पर बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। इससे सार्वजनिक मार्ग पर आवागमन प्रभावित हुआ और लोगों को परेशानी हुई। पुलिस ने सिद्धार्थ दुबे, मौसम ताम्रकार, रितुराज अग्रवाल समेत अन्य के खिलाफ BNS की धारा 285 और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले में जांच जारी है।

फेसबुक लाइव में दिखा था पूरा जश्न

पुलिस के अनुसार, 18 सितंबर की रात करीब 11:42 बजे सोशल मीडिया पर जन्मदिन समारोह का वीडियो सामने आया। वीडियो में सिद्धार्थ दुबे फेसबुक लाइव करते दिखाई दे रहे थे। अमरकंटक चौक पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे और जन्मदिन मनाने के लिए मंच तैयार किया गया था।

वीडियो में केक काटने और लोगों के बधाई देने के दृश्य दिखाई दिए। ढोल-नगाड़ों के बीच हुए इस आयोजन के कारण सड़क पर भीड़ जमा होने और यातायात प्रभावित होने की बात पुलिस ने कही है।

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वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस ने दर्ज किया केस

पुलिस ने सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और उपलब्ध तथ्यों की जांच के बाद मामला दर्ज किया। FIR में सिद्धार्थ दुबे उर्फ सिद्धू, मौसम ताम्रकार और रितुराज अग्रवाल समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने BNS की धारा 285 के तहत सार्वजनिक मार्ग में बाधा उत्पन्न करने से जुड़ा मामला दर्ज किया है। साथ ही धारा 3(5) भी लगाई गई है। पुलिस का कहना है कि विवेचना के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अभी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं

मामले में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस जांच कर रही है। फिलहाल आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस समारोह में शामिल अन्य लोगों और आयोजन से जुड़ी परिस्थितियों की भी जांच कर रही है।

गौरेला नगर पालिका अध्यक्ष के भतीजे हैं सिद्धार्थ

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सिद्धार्थ दुबे गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष हैं। वे गौरेला नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश दुबे के भतीजे भी बताए जाते हैं। इससे पहले सितंबर में बाईपास की मांग को लेकर पदयात्रा की घोषणा से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट पर भी उन्हें संगठन की ओर से कारण बताओ नोटिस दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।

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Chhattisgarh: स्कूलों में दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश की तारीखें घोषित, 15 दिन बंद रहेंगे स्कूल

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रायपुर: छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए दशहरा, दीपावली और शीतकालीन अवकाश की तारीखें घोषित कर दी हैं। तीनों अवसरों पर स्कूलों में 5-5 दिन की छुट्टी रहेगी। इस तरह इन तीनों अवकाशों को मिलाकर पूरे सत्र में कुल 15 दिन स्कूल बंद रहेंगे। यह अवकाश राज्य के शासकीय, अनुदान प्राप्त और गैर-अनुदान प्राप्त स्कूलों में लागू होगा। D.Ed., B.Ed. और M.Ed. से जुड़े संस्थानों को भी इस अवकाश कार्यक्रम में शामिल किया गया है।

दशहरा: 17 से 21 अक्टूबर तक छुट्टी

दशहरा पर्व पर विद्यार्थियों और शिक्षकों को 17 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक 5 दिन का अवकाश मिलेगा। इस दौरान स्कूल बंद रहेंगे।

दीपावली: 6 से 10 नवंबर तक स्कूल बंद

दीपावली के लिए 6 नवंबर से 10 नवंबर 2026 तक पांच दिन का अवकाश निर्धारित किया गया है।

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दिसंबर में 5 दिन का विंटर ब्रेक

साल के अंत में शीतकालीन अवकाश 24 दिसंबर से 28 दिसंबर 2026 तक रहेगा। यानी दिसंबर में भी लगातार पांच दिन स्कूल बंद रहेंगे।

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छत्तीसगढ़ में DJ-लाउडस्पीकर पर नए नियम: बिना अनुमति बजाया तो 1 साल तक जेल और ₹1 लाख जुर्माना; 100 मीटर का क्षेत्र शांत जोन

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में तेज आवाज वाले DJ, लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों पर नियंत्रण के लिए राज्य सरकार ने कोलाहल नियंत्रण अधिनियम-2026 का प्रारूप जारी किया है। प्रस्तावित कानून के तहत सार्वजनिक स्थानों पर DJ या लाउडस्पीकर बजाने से पहले जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त या सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति लेना जरूरी होगा।

बिना अनुमति ध्वनि विस्तारक यंत्र चलाने पर जेल, जुर्माना और उपकरण जब्त करने का प्रावधान प्रस्तावित है। हालांकि, यह अभी ड्राफ्ट है और कानून लागू नहीं हुआ है। गृह एवं पुलिस विभाग ने आम नागरिकों, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से 5 अक्टूबर 2026 तक दावे और आपत्तियां मांगी हैं।

अस्पताल-स्कूल के आसपास 100 मीटर का क्षेत्र शांत जोन

प्रस्तावित अधिनियम में अस्पताल, नर्सिंग होम, स्कूल-कॉलेज, छात्रावास, न्यायालय और केंद्र-राज्य सरकार व स्थानीय निकायों के कार्यालयों की 100 मीटर की परिधि को शांत क्षेत्र घोषित करने का प्रावधान है। जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस आयुक्त जरूरत के अनुसार किसी अन्य क्षेत्र को भी शांत क्षेत्र घोषित कर सकेंगे। ड्राफ्ट में समय को भी दो हिस्सों में बांटा गया है। सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक दिन का समय और रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक रात का समय माना गया है।

पहली बार उल्लंघन पर ₹50 हजार से जुर्माना

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प्रस्तावित नियमों के अनुसार पहली बार नियम तोड़ने पर कारावास, कम से कम ₹50 हजार जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यदि उल्लंघन शांत क्षेत्र में होता है तो एक साल तक की जेल और कम से कम ₹75 हजार जुर्माना लगाया जा सकता है।

दोबारा गलती की तो 2 साल तक जेल

बार-बार नियम तोड़ने पर सजा और कड़ी होगी। सामान्य क्षेत्र में दोबारा दोष सिद्ध होने पर 3 महीने से 1 साल तक की जेल और कम से कम ₹1 लाख जुर्माना प्रस्तावित है। वहीं शांत क्षेत्र में दोबारा उल्लंघन करने पर 6 महीने से 2 साल तक की जेल और कम से कम ₹1.50 लाख जुर्माना हो सकता है। नियमों का उल्लंघन करने वाले को उपकरण उपलब्ध कराने वाले विक्रेता का पंजीयन भी स्थायी रूप से रद्द करने का प्रावधान है।

DJ-साउंड सिस्टम किराए पर देने वालों के लिए भी नियम

प्रस्तावित कानून में साउंड सिस्टम और ध्वनि विस्तारक यंत्रों के विक्रेताओं तथा आपूर्तिकर्ताओं के लिए भी नियम तय किए गए हैं। उन्हें स्थानीय पुलिस से सत्यापन कराने के बाद निर्धारित कार्यालय में पंजीयन कराना होगा। बिना वैध अनुमति वाले आयोजक को साउंड सिस्टम किराए पर नहीं दिया जा सकेगा। साउंड सिस्टम उपलब्ध कराने वाले विक्रेता के पास साउंड मीटर होना भी जरूरी किया गया है।

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रैली और आयोजनों में 6 घंटे की अनुमति

विशेष रैली, जुलूस, सार्वजनिक कार्यक्रम या उत्सव के लिए सक्षम अधिकारी दिन में अधिकतम 6 घंटे तक ध्वनि विस्तारक यंत्र के इस्तेमाल की अनुमति दे सकेंगे। कुछ विशेष अवसरों पर पूरे कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 15 दिनों तक रात 12 बजे तक लाउडस्पीकर चलाने की छूट देने का प्रावधान भी रखा गया है। हालांकि, शांत क्षेत्र में किसी भी समय इस तरह की छूट नहीं होगी।

अभी लागू नहीं हुआ है प्रस्तावित कानून

सरकार ने प्रारूप पर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इसके बाद प्राप्त सुझावों पर विचार और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कानून का अंतिम स्वरूप तय होगा। इसलिए फिलहाल प्रस्तावित ₹1 लाख जुर्माना, जेल और उपकरण जब्ती जैसे प्रावधानों को लागू कानून नहीं माना जा सकता। मौजूदा नियमों के तहत ध्वनि प्रदूषण पर कार्रवाई जारी रहेगी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया है कि नए विधेयक की प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान मौजूदा कानूनों के पालन में ढिलाई नहीं होनी चाहिए।

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Raipur: PWD में 1 अक्टूबर से नया टेंडर सिस्टम, नई निविदाएं अब GePNIC पर होंगी; ठेकेदारों को कराना होगा ऑनलाइन नामांकन

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रायपुर: लोक निर्माण विभाग (PWD) में ई-टेंडरिंग की व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से बदलने जा रही है। इस तारीख से विभाग की सभी नई निविदाओं का सृजन और प्रकाशन GePNIC (Government e-Procurement-NIC) पोर्टल पर होगा। टेंडर जारी करने से लेकर बिड प्राप्ति, तकनीकी- वित्तीय मूल्यांकन और अन्य ऑनलाइन प्रक्रियाएं भी इसी पोर्टल पर पूरी की जाएंगी। विभाग ने नई व्यवस्था शुरू होने से पहले ठेकेदारों और अधिकारियों को जरूरी तकनीकी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

ठेकेदारों को पहले कराना होगा Enrollment

नई निविदाओं में हिस्सा लेने वाले ठेकेदारों के लिए GePNIC पोर्टल पर Enrollment यानी नामांकन कराना जरूरी होगा। विभाग ने ठेकेदारों से समय रहते यह प्रक्रिया पूरी करने को कहा है, ताकि 1 अक्टूबर से टेंडर प्रक्रिया में किसी तरह की तकनीकी परेशानी न हो।

लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वीके भतपहरी ने विभागीय अधिकारियों के साथ ठेकेदार संघ के पदाधिकारियों को भी पत्र भेजकर नई व्यवस्था की जानकारी ठेकेदारों तक पहुंचाने और उन्हें समय पर नामांकन कराने के लिए कहा है।

टेंडर की पूरी प्रक्रिया नए पोर्टल पर

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नई व्यवस्था में केवल टेंडर का प्रकाशन ही नहीं होगा, बल्कि पूरी निविदा प्रक्रिया GePNIC पर संचालित होगी। इसमें निविदा का सृजन और प्रकाशन, बिड प्राप्ति, तकनीकी मूल्यांकन, वित्तीय मूल्यांकन, संबंधित ऑनलाइन स्वीकृति और अन्य कार्यवाही शामिल हैं।

पुराने पोर्टल के टेंडर 31 मार्च तक निपटेंगे

30 सितंबर 2026 तक पुराने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर प्रकाशित निविदाओं की बिड प्राप्ति, मूल्यांकन, स्वीकृति और अन्य लंबित ऑनलाइन कार्यवाही 31 मार्च 2027 तक उसी पुराने पोर्टल पर पूरी की जाएगी। इसके बाद पुराने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर निविदाओं से संबंधित कोई नई कार्रवाई नहीं होगी।

अधिकारियों की भी बनेगी नई डिजिटल व्यवस्था

नई व्यवस्था के लिए विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को भी तकनीकी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी निविदा आमंत्रण अधिकारियों, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन समिति के सदस्यों और संबंधित कर्मचारियों को यूजर आईडी, रोल मैपिंग और डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) की प्रक्रिया तत्काल पूरी करनी होगी। विभाग का जोर है कि 1 अक्टूबर से नई व्यवस्था बिना तकनीकी या प्रशासनिक बाधा के सुचारू रूप से शुरू हो।

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ठेकेदारों के लिए बदल जाएगा टेंडर प्लेटफॉर्म

1 अक्टूबर से PWD की नई निविदाओं में भाग लेने वाले ठेकेदारों को पुराने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के बजाय GePNIC को नए टेंडर प्लेटफॉर्म के रूप में इस्तेमाल करना होगा। विभाग ने अधिकारियों और ठेकेदारों से निर्धारित समय-सीमा में सभी तैयारियां पूरी करने को कहा है।

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छत्तीसगढ़ में कैंसर अब नोटिफाइड डिजीज: हर केस की जानकारी सरकार को देना जरूरी

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रायपुर: छत्तीसगढ़ में कैंसर के मामलों की निगरानी और समय पर इलाज की व्यवस्था मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने कैंसर को ‘नोटिफाइड डिजीज’ यानी अधिसूचित बीमारी घोषित किया है। अब सरकारी और निजी अस्पतालों समेत पैथोलॉजी लैब, मेडिकल कॉलेज, डायग्नोस्टिक सेंटर और कैंसर देखभाल से जुड़े संस्थानों को कैंसर के मामलों की जानकारी सरकार को देना अनिवार्य होगा।

नई व्यवस्था के तहत कैंसर की पुष्टि होने के बाद संबंधित संस्थान को तय प्रक्रिया के अनुसार इसकी जानकारी एक महीने के भीतर संबंधित प्राधिकारी को देनी होगी। इससे राज्य में कैंसर के मामलों का केंद्रीकृत और ज्यादा सटीक डेटा तैयार करने में मदद मिलेगी।

संदिग्ध मरीजों की भी होगी जांच

अगर किसी मरीज में कैंसर का संदेह होता है तो इलाज करने वाले डॉक्टर को उसे जरूरी जांच के लिए रेफर करना होगा। जांच में कैंसर की पुष्टि होने के बाद पैथोलॉजिस्ट को निर्धारित कैंसर नोटिफिकेशन फॉर्म भरना होगा। इस रिपोर्ट को भी बीमारी की पहचान के एक महीने के भीतर संबंधित स्वास्थ्य प्राधिकरण को उपलब्ध कराना होगा।

अभी कैंसर रजिस्ट्री में रिपोर्टिंग स्वैच्छिक

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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अब तक राज्य में कैंसर के मामलों की जानकारी मुख्य रूप से कैंसर रजिस्ट्री के जरिए स्वैच्छिक रूप से दर्ज की जाती रही है। इससे कई मामलों के रिकॉर्ड में शामिल नहीं होने की संभावना रहती है।

नई व्यवस्था के बाद कैंसर से जुड़े मामलों का डेटा सेंट्रलाइज्ड पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। इससे बीमारी के पैटर्न, मरीजों की संख्या और अलग-अलग क्षेत्रों में कैंसर के प्रसार की बेहतर निगरानी हो सकेगी।

डेटा के आधार पर बनेगी रोकथाम की रणनीति

सरकार इस डेटा का इस्तेमाल कैंसर की रोकथाम और नियंत्रण से जुड़ी नीतियां बनाने में करेगी। इसके अलावा उपचार सुविधाओं के विस्तार, स्क्रीनिंग कार्यक्रमों, रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर विकसित करने में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा। नियमित डेटा से यह भी पता लगाया जा सकेगा कि अलग-अलग प्रकार के कैंसर के मामलों और उनसे होने वाली मौतों में समय के साथ क्या बदलाव हो रहा है।

26 जिलों में डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर

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प्रदेश में फिलहाल 3 सरकारी कैंसर अस्पताल और 2 सरकारी रेडियोथेरेपी यूनिट हैं। इसके अलावा 26 जिलों में जिला डे-केयर कीमोथेरेपी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 5 और जिलों में ऐसे सेंटर शुरू करने का प्रस्ताव भेजा है। स्वास्थ्य केंद्रों में कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए स्क्रीनिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

सरकारी से निजी संस्थानों तक लागू होगी व्यवस्था

नोटिफिकेशन के दायरे में राज्य और केंद्र सरकार के अस्पतालों के साथ निजी अस्पताल, डिस्पेंसरी, मेडिकल कॉलेज और अन्य स्वास्थ्य संस्थान आएंगे। इसके अलावा पैथोलॉजी और हेमेटोलॉजी लैब, इमेजिंग सेंटर, डायग्नोस्टिक सेंटर तथा कैंसर की देखभाल से जुड़े संस्थानों और एनजीओ को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी देनी होगी। कैंसर की जांच और इलाज से जुड़े डॉक्टर तथा पैथोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी होगी कि सामने आने वाले मामलों की रिपोर्ट तय समयसीमा में उपलब्ध कराई जाए।

ढाई साल में 17,611 कैंसर केस दर्ज

राज्य में कैंसर के बढ़ते मामलों का अंदाजा स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। 1 अप्रैल 2024 से जून 2026 के बीच प्रदेश में कुल 17,611 कैंसर केस दर्ज किए गए। इनमें 4,465 मुख कैंसर, 210 गले के कैंसर, 252 जीभ के कैंसर, 1,038 फेफड़ों के कैंसर, 2,633 स्तन कैंसर, 2,200 गर्भाशय कैंसर, 2,560 पेट के कैंसर, 4,253 अन्य प्रकार के कैंसर के मामले शामिल हैं। नई नोटिफिकेशन व्यवस्था से सरकार के पास कैंसर के मामलों का ज्यादा व्यापक डेटाबेस उपलब्ध होने की उम्मीद है। इससे स्क्रीनिंग, इलाज और कैंसर नियंत्रण की योजनाओं को जरूरत के मुताबिक तैयार करने में मदद मिल सकती है।FEA

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