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UP News: फर्जी पैन कार्ड केस में आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला को 7-7 की सजा, MP-MLA कोर्ट का फैसला

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UP News: Azam and his son Abdullah sentenced to 7 years each in fake PAN card case, MP-MLA court verdic

Azam khan: यूपी के रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने मंगलवार को सपा नेता आजम खां और उनके बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड मामले में दोषी ठहराते हुए 7-7 की कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोनों पर 50-50 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। फैसले के बाद दोनों को अदालत ने तुरंत कस्टडी में ले लिया। रामपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट ने फर्जी पैन कार्ड मामले में सोमवार को ही दोनों को दोषी करार देने के कुछ देर बाद सजा सुना दी। कोर्ट ने दोनों पर 50-50 हजार का जुर्माना भी लगाया है।फैसले को देखते हुए कचहरी परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। बाहर बड़ी संख्या में भाजपा और सपा कार्यकर्ता भी एकत्र हो गए थे। इससे परिसर के आसपास तनाव का माहौल बना रहा।

पूर्व मंत्री आजम खान को 23 सितंबर यानी 2 महीने पहले ही सीतापुर जेल से रिहा हुए थे। जबकि उनके बेटे अब्दुल्ला 9 महीने पहले हरदोई जेल से रिहा हुए थे। अब दोनों फिर से जेल जाएंगे। बता दें कि फर्जी पैन कार्ड का मामला 2019 का है। रामपुर में भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में दोनों के खिलाफ केस दर्ज कराया था।

भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया था कि आजम ने बेटे अब्दुल्ला को चुनाव लड़वाने के लिए दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्रों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए। असली जन्म तिथि यानी 1 जनवरी 1993 के मुताबिक, अब्दुल्ला 2017 में चुनाव लड़ने के योग्य नहीं थे। उनकी उम्र 25 साल नहीं हुई थी। इसलिए आजम ने दूसरा पैन कार्ड बनवाया, जिसमें उन्होंने जन्म का साल 1990 दिखाया था।

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UP News: यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर हमले का दूसरा आरोपी गुलफाम भी एनकाउंटर में मारा गया, 48 घंटे में दोनों भाई ढेर

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Ghaziabad Encounter: गाजियाबाद में यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर हुए जानलेवा हमले के मामले में 48 घंटे के भीतर दूसरा बड़ा एनकाउंटर हुआ। मुख्य आरोपी जीशान के बाद मंगलवार रात उसका बड़ा भाई गुलफाम भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। दोनों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। थाना इंदिरापुरम क्षेत्र में पुलिस को गुलफाम और उसके साथी की लोकेशन मिली थी।

एडिशनल DCP क्राइम पीयूष सिंह के मुताबिक, वसुंधरा बिजलीघर के पास घेराबंदी की गई। देर रात एक बाइक आती दिखी, जिस पर दो लोग सवार थे। रोकने का इशारा करने पर उन्होंने बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की। स्वाट टीम ने पीछा किया। एलिवेटेड रोड के नीचे मिट्टी के टीले पर बाइक फिसल गई और दोनों बदमाश गिर पड़े। पुलिस के पहुंचते ही उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी।

जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली गुलफाम को लगी। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। गुलफाम की पहचान अमरोहा निवासी के रूप में हुई है, जो गाजियाबाद में किराए पर रह रहा था।इससे पहले रविवार को मुख्य आरोपी जीशान भी एनकाउंटर में मारा जा चुका है।

6 पॉइंट में पूरा एनकाउंटर

  • गुलफाम की लोकेशन पर इंदिरापुरम में घेराबंदी
  • बाइक से भागने की कोशिश, एलिवेटेड रोड के नीचे फिसली बाइक
  • बदमाशों की फायरिंग में 2 पुलिसकर्मी घायल।
  • ACP समेत अन्य अधिकारियों की जैकेट पर लगी गोलियां
  • जवाबी फायरिंग में गुलफाम को गोली, अस्पताल में मौत
  • 48 घंटे में दोनों सगे भाई पुलिस मुठभेड़ में ढेर

क्या है पूरा मामला?

27 मार्च को इस्लाम धर्म छोड़ चुके यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर दिनदहाड़े उनके ऑफिस में हमला हुआ था। बिना नंबर प्लेट की बाइक से आए नकाबपोश हमलावरों ने उन पर 14 चाकू से वार किए और गला रेतने की कोशिश की। गंभीर रूप से घायल सलीम को दिल्ली के गुरु तेग बहादुर अस्पताल (GTB) में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। पीड़ित के बेटे की शिकायत पर AIMIM से जुड़े एक नेता समेत 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। घटना पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और यूपी में आतंक की कोई जगह नहीं है।

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UP News: प्रयागराज पॉक्सो कोर्ट का बड़ा आदेश, बच्चों के यौन शोषण के आरोप में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश

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Prayagraj: प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शनिवार को बड़ा आदेश देते हुए अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन शोषण के आरोप में FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट के आधार पर जारी किया। अदालत ने इससे पहले 13 फरवरी को आदेश सुरक्षित रख लिया था।

कोर्ट में पेश किए गए बच्चे

मामले में शिकायतकर्ता और जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत में दो बच्चों को पेश कर गंभीर आरोप लगाए थे। बच्चों के बयान कैमरे के सामने कोर्ट में दर्ज किए गए। अदालत के आदेश के बाद पुलिस को संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई करने को कहा गया है।

शिकायतकर्ता का बयान

आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा कि वे न्याय के लिए दर-दर भटक रहे थे, लेकिन पुलिस स्तर पर सुनवाई नहीं हो रही थी। उन्होंने कहा कि अदालत में आने के बाद उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिष्यों के साथ यौन शोषण और समलैंगिक अपराध किए गए। हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक आरोपित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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पैदल यात्रा का ऐलान

आशुतोष ब्रह्मचारी ने इस मामले को लेकर पैदल यात्रा शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वे वाराणसी के विद्यामठ तक जाएंगे और जनसमर्थन जुटाएंगे। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से भी इस मुद्दे पर खुलकर सामने आने की अपील की और कहा कि वे न्याय के लिए लोगों के बीच जाएंगे। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पुलिस जांच और न्यायालय की सुनवाई के बाद तय होगी।

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UP News: यूपी में 1.70 लाख शिक्षा मित्रों को बड़ा तोहफा, मानदेय 10 से बढ़कर 18 हजार, अनुदेशकों को 17 हजार मिलेंगे

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UP Shiksha Mitra Salary Hike: पंचायत और विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की Government of Uttar Pradesh ने बड़ा दांव खेला है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने विधानसभा में 1.70 लाख से ज्यादा शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया। अब शिक्षा मित्रों को हर महीने 18 हजार रुपए और अनुदेशकों को 17 हजार रुपए मिलेंगे। अभी तक शिक्षा मित्रों को 10 हजार और अनुदेशकों को 9 हजार रुपए मिलते थे। यानी एक साथ 8 हजार रुपए की बढ़ोतरी की गई है।

सीएम ने कहा कि महंगाई को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले सपा सरकार में शिक्षा मित्रों को सिर्फ 3 हजार रुपए मिलते थे। 2017 में हमारी सरकार ने इसे 10 हजार किया था, अब इसे 18 हजार किया जा रहा है।

9 साल बाद बढ़ा मानदेय, ट्रांसफर की भी सुविधा

करीब 9 साल बाद शिक्षा मित्रों की सैलरी बढ़ाई गई है। सरकार ने शिक्षा मित्रों के ट्रांसफर की व्यवस्था भी लागू करने की घोषणा की है। इसके अलावा उन्हें और उनके परिवार को 5 लाख रुपए तक की कैशलेस इलाज सुविधा भी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग में 75 हजार नौकरियों की घोषणा भी की है।

2017 में रद्द हुआ था समायोजन

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यूपी में 2001 से शिक्षा मित्रों की नियुक्ति शुरू हुई थी। 2013-14 में सपा सरकार ने उन्हें सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित किया था। इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। 12 सितंबर 2015 को हाईकोर्ट ने समायोजन रद्द कर दिया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने भी समायोजन रद्द करने का फैसला सुनाया। इस फैसले के बाद 1.78 लाख सहायक अध्यापक फिर से शिक्षा मित्र बना दिए गए। 50 हजार रुपए वेतन पाने वाले शिक्षकों का मानदेय घटकर 3500 रुपए रह गया था।

आंदोलन के बाद बढ़ा था मानदेय

समायोजन रद्द होने के बाद प्रदेशभर के शिक्षा मित्रों ने लखनऊ में गोमती तट पर बड़ा आंदोलन किया। इसके बाद सरकार ने मानदेय 3500 से बढ़ाकर 10 हजार रुपए करने की घोषणा की थी। सरकार ने 68,500 और फिर 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती में शिक्षा मित्रों को आयु सीमा में छूट और 25 बोनस अंक देने का फैसला किया। इन दोनों भर्तियों में करीब 13 हजार से ज्यादा शिक्षा मित्र सहायक अध्यापक बने।अब एक बार फिर मानदेय बढ़ने से चुनावी साल में लाखों परिवारों को राहत मिली है।

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UP News: शंकराचार्य विवाद पर विधानसभा में गरजे योगी, बोले- हर कोई नहीं लिख सकता शंकराचार्य, कानून सबके लिए बराबर

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UP News: Yogi roared in the assembly on the Shankaracharya controversy, said- not everyone can write Shankaracharya, the law is equal for everyone

Lucknow: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर जवाब देते हुए कहा- कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है, मैं भी नहीं। माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन 4.5 करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच व्यवस्था तोड़ने की कोशिश गैर-जिम्मेदाराना थी। सपा पर भी सीधा सवाल- अगर वे शंकराचार्य थे तो वाराणसी में लाठीचार्ज क्यों?

‘हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता’

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर शुक्रवार को विधानसभा में बोलते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने साफ कहा कि हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता और न ही आचार्य बनकर कहीं भी माहौल बिगाड़ सकता है। उन्होंने कहा, भारत में कानून का शासन है और कानून सबके लिए बराबर है- मेरे लिए भी वही कानून है, जो किसी आम नागरिक के लिए है। योगी ने कहा कि अगर सपा के लोग उन्हें पूजना चाहते हैं तो पूजें, लेकिन व्यवस्था और मर्यादा का पालन सबको करना होगा।

‘माघ मेले में जो मुद्दा नहीं था, उसे मुद्दा बनाया गया’

सीएम ने कहा कि माघ मेले में जो मुद्दा नहीं था, उसे जानबूझकर मुद्दा बनाया गया। क्या कोई भी व्यक्ति मुख्यमंत्री या मंत्री का बोर्ड लगाकर पूरे प्रदेश में घूम सकता है? नहीं। एक व्यवस्था है, एक सिस्टम है और उसी के तहत सबको चलना होगा। उन्होंने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन माघ मेले में करीब साढ़े 4 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे थे। ऐसे में हर किसी के लिए एक समान व्यवस्था लागू थी। जिस रास्ते से श्रद्धालु जा रहे थे, उसे ब्लॉक कर देना किसी जिम्मेदार व्यक्ति का आचरण नहीं हो सकता।

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सपा पर पलटवार: ‘लाठीचार्ज क्यों करवाया था?’

योगी ने सदन में सपा से सवाल किया कि अगर वे शंकराचार्य थे, तो वाराणसी में उन पर लाठीचार्ज क्यों करवाया गया? एफआईआर क्यों दर्ज की गई? कैसी नैतिकता की बात की जा रही है? उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र है। आदि जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने देश के चार कोनों में चार पीठों की स्थापना की- उत्तर में ज्योतिष पीठ, दक्षिण में श्रृंगेरी, पूर्व में पुरी और पश्चिम में द्वारका। हर पीठ की अपनी परंपरा और वैदिक मान्यता है, जिसे नियमों के तहत ही स्वीकार किया जाता है।

मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था?

18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान के लिए संगम जा रहे थे। पुलिस ने पालकी रोकते हुए पैदल जाने को कहा। शिष्यों ने इसका विरोध किया और आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और शिष्यों के बीच धक्का-मुक्की हुई। कई शिष्यों को हिरासत में लिया गया। आरोप है कि एक साधु को चौकी में पीटा भी गया। इससे नाराज शंकराचार्य ने शिष्यों को छोड़े बिना आगे न बढ़ने की बात कही। बाद में पालकी को संगम से करीब एक किमी दूर खींचकर ले जाया गया, जहां उसका एक हिस्सा भी टूट गया। वे स्नान नहीं कर सके और 28 जनवरी तक शिविर के बाहर धरने पर बैठे रहे, फिर वाराणसी लौट गए।शंकराचार्य ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों ने संतों के साथ मारपीट की और यह सब सरकार के इशारे पर हुआ, क्योंकि उन्होंने पहले भगदड़ मामले में सरकार को जिम्मेदार ठहराया था।

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UP News: मुजफ्फरनगर में 50 हजार का इनामी अमजद ढेर, 25 मिनट मुठभेड़, एसपी-सीओ की जैकेट में लगी गोलियां

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UP News: Amjad, carrying a reward of 50,000 rupees, killed in Muzaffarnagar; 25-minute encounter; SP-CO's jackets hit by bullets

Muzaffarnagar:मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना थाना क्षेत्र में 50 हजार का इनामी बदमाश अमजद पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। करीब 25 मिनट चली इस कार्रवाई में बदमाश ने कार्बाइन और पिस्टल से अंधाधुंध फायरिंग की। एसपी देहात आदित्य बंसल, सीओ गजेंद्र सिंह और कोतवाल सुभाष अत्री बाल-बाल बचे, उनकी बुलेटप्रूफ जैकेट में गोलियां धंसीं।

पुलिस के मुताबिक, तड़के  करीब 3:30 बजे सूचना मिली थी कि अमजद अपने गांव की ओर आ रहा है। घेराबंदी के बाद उसे सरेंडर की चेतावनी दी गई, लेकिन उसने फायरिंग शुरू कर दी। दरोगा संदीप चौधरी और सिपाही अशफाक के हाथ में गोली लगी। जवाबी कार्रवाई में अमजद को गोली लगी और वह गिर पड़ा। उसे बुढ़ाना सीएचसी ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। उसका एक साथी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकला।

20 राउंड फायरिंग, वाहन क्षतिग्रस्त

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बदमाश ने करीब 20 राउंड फायर किए। पुलिस वाहनों के शीशे टूट गए। पुलिसकर्मियों ने वाहन की आड़ लेकर जवाबी फायरिंग की। घटनास्थल से कार्बाइन, पिस्टल और बाइक बरामद हुई है।

40 मुकदमे, कई राज्यों में वारदात

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40 वर्षीय अमजद मुजफ्फरनगर के शाहपुर का रहने वाला था। उस पर यूपी, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड में करीब 40 मुकदमे दर्ज थे। 2021 में राजस्थान के चूरू में मुथूट फाइनेंस से 5 किलो सोना लूटने के मामले में भी वह वांछित था। बताया जाता है कि वह पुलिस की वर्दी पहनकर लूट की वारदातें करता था। 2013 में उस पर गैंगस्टर एक्ट लगा। 2017 में लूट के प्रयास के दौरान एक युवक की हत्या के बाद वह सुर्खियों में आया था। अकेले मुजफ्फरनगर में उसके खिलाफ 21 केस दर्ज थे। पुलिस फरार साथी की तलाश में दबिश दे रही है।

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