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Collector Conference: पुरानी शैली बदलें, पूरी संवेदनशीलता के साथ जनता की समस्याओं का निराकरण करें- मुख्यमंत्री साय

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Collector Conference: Change the old style, solve public problems with full sensitivity - Chief Minister

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में दो दिवसीय कलेक्टर कॉन्फ्रेंस को सम्बोधित करते हुए कहा कि बीते 9 महीने में यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी की गारंटी के अनुरूप प्रदेश को संवारने की दिशा में प्रयास किया गया है, किन्तु विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने के लिए हम सबको और अधिक कठिन परिश्रम करना होगा। उन्होंने कलेक्टरों से कहा कि शासन की योजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ क्रियान्वित की जाए और इसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी फ्लैगशिप योजनाओं में सैचुरेशन के लक्ष्य को ध्यान में रखकर कार्य करें। उन्होंने कुछ जिलों में आम जनता और स्कूली छात्रों से शासकीय अधिकारियों द्वारा किए गए दुर्व्यवहार पर सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अधिकारी पूरी संवेदनशीलता और सहृदयता के साथ आम जनता की समस्याओं को सुने और उसका यथासंभव शीघ्र निराकरण करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारियों-कर्मचारियों की भाषा-शैली मर्यादित होनी चाहिए। उन्होंने कलेक्टरों को जनसामान्य से संयमित लहजे में बातचीत करने की हिदायत दी और कहा कि यदि आपके अधीनस्थ अधिकारी भाषा संयम न रखें, तो उन पर तत्काल सख्त कार्यवाही करें।

मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों से कहा कि स्थानीय स्तर की समस्याएं वहीं निपटे, छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर लोगों को राजधानी न आना पड़े। इस बात का ध्यान जिला प्रशासन को रखना चाहिए। जनप्रतिनिधियों द्वारा ध्यान में लाई गई जन समस्याओं के त्वरित निदान के लिए प्रभावी कदम उठाएं जाएं।

मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान साफ तौर पर कहा कि इस विभाग का आम लोगों और किसानों से ज्यादा वास्ता है। राजस्व के प्रकरणों का निराकरण बिना किसी लेट-लतीफी के किए जाने से शासन-प्रशासन की छबि बेहतर होती है। उन्होंने अधिकारियों को जनसामान्य की भूमि संबंधी छोटी-छोटी त्रुटियों एवं समस्याओं का निदान पूरी संवेदनशीलता के साथ समय-सीमा में करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने सारंगढ़-बिलाईगढ़, बस्तर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में राजस्व मामलों के निराकरण की धीमी गति पर अप्रसन्नता जताई। उन्होंने जिलेवार कलेक्टरों से अविवादित और विवादित नामांतरण, खाता विभाजन, सीमांकन, त्रुटि सुधार, डायवर्सन, असर्वेक्षित ग्रामों की जानकारी, नक्शा बटांकन की जानकारी ली।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व प्रकरणों के निराकरण में ऐसे जिले जिनकी प्रगति 70 प्रतिशत से कम है, उन्हें इस मामले में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। विवादित बटवारा के प्रकरण 6 माह से ज्यादा लंबित न हो। सीमांकन के प्रकरणों को भी तेजी से निराकृत किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने सभी कमिश्नरों को अधीनस्थ जिलों का नियमित दौरा कर राजस्व प्रकरणों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा करने के भी निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य को प्रधानमंत्री ने अभी पीएम आवास के अंतर्गत 8 लाख 46 हजार 931 आवासों को स्वीकृति दी है। पूर्ववर्ती सरकार के दौरान पीएम आवास का काम काफी पिछड़ गया था। हमें तेजी से इस पर काम करना है। यह सर्वाेच्च प्राथमिकता का कार्य है। इसके साथ ही हमने चिन्हांकित किये गये लगभग 47 हजार आवासहीन परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवास देने का निर्णय भी लिया है। इस पर भी जुट कर काम करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में स्वच्छता सर्वे अभी चल रहा है। छत्तीसगढ़ के गांव और ग्राम पंचायतें स्वच्छता सर्वे को सभी मानदंडों को पूरा करती हों, इस पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत हैं। मनरेगा रोजगार सृजन का सबसे अच्छा माध्यम है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी अधोसंरचनाएं तैयार करें। मनरेगा में भुगतान संबंधी दिक्कतों का समाधान करें। मुख्यमंत्री ने मनरेगा के तहत मानव दिवस सृजन कम होने पर बस्तर कलेक्टर पर नाराजगी जतायी। उन्होंने कलेक्टरों को ग्रामीण क्षेत्रों में स्वसहायता समूहों को बढ़ावा देने के साथ ही ट्रेनिंग, बैंक लिंकेज आदि की व्यवस्था पर विशेष रूप से ध्यान देने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने पंचायतों का व्यापक निरीक्षण करने, वहां की समस्याओं को हल करने के निर्देश दिए। अमृत सरोवर योजना को जन अभियान का स्वरूप देने, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवासों का तेजी से निर्माण कराए जाने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारी सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता वाली योजना है। 15 सितम्बर को प्रधानमंत्री जी द्वारा पहली किश्त जारी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बैठक में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल विकास योजना के क्रियान्वयन की स्थिति की समीक्षा की और खैरागढ़, सारंगढ़, सक्ती, रायगढ़ जिलों की शून्य प्रगति पर नाराजगी जताई और कहा कि यह स्थिति ठीक नहीं है।

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मुख्यमंत्री साय ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति की समीक्षा के दौरान गरियाबंद जिले के सूपेबेड़ा में किडनी की बीमारी की रोकथाम के लिए प्रभावी उपाय करने और आवश्यकतानुसार दिल्ली से विशेषज्ञ बुलाकर सेवाएं लेने की बात कही। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम का सभी जिलों में संचालन तथा रोगियों को लाभ सुनिश्चित करने, आगामी 6 माह में शत प्रतिशत आयुष्मान पंजीयन करने, पीएम जनऔषधि केंद्रों का संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने टीबी उन्मूलन के तहत किये जा रहे कार्यों की भी जानकारी ली। टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में रायपुर और बिलासपुर जिले में बेहतर स्थिति की सराहना की। उन्होंने अन्य जिलों को भी टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में तेजी लाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए सरस्वती सायकल योजना के वितरण में कुछ जिलों में हुई लेट-लतीफी को लेकर अप्रसन्नता जताई। उन्होंने कलेक्टरों को स्पष्ट तौर पर कहा कि सायकल का वितरण शिक्षा सत्र शुरू होते ही सुनिश्चित किया जाना चाहिए। सुकमा एवं बलरामपुर जिले में साइकिल वितरण अब तक न होने पर की स्थिति को देखते हुए कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने आदिम जाति विकास विभाग की समीक्षा के दौरान हितग्राहियों को प्रधानमंत्री जन मन योजना का शत-प्रतिशत लाभ दिलाने पर जोर दिया। उन्होंने कबीरधाम जिले में वन अधिकार पट्टा के कार्य में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया और जिन जिलों में डिजिटलाइजेशन का कार्य 80 प्रतिशत से कम है, वहां तेजी से कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आश्रम एवं छात्रावासों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने पर विशेष ध्यान देने को कहा और कलेक्टरों को स्वयं निरीक्षण करने के निर्देश दिए। साथ ही, छात्रावासों में भोजन मेन्यू के अनुसार उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा करते हुए महतारी वंदन योजना को सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना बताया। उन्होंने कहा कि इस योजना में कोई पात्र महिला वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने पीएम मातृ वंदन योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ से कुपोषण को जड़ से समाप्त करना हम सभी का लक्ष्य होना चाहिए और इसके लिए विभाग को विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है।

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कलेक्टर-एसपी कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अन्बलगन पी., मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत और पी. दयानंद तथा सभी संबंधित विभागों के सचिव सहित सभी संभागों के आयुक्त, सभी जिलों के कलेक्टर, जिला पंचायतों के सीईओ और नगर निगमों के आयुक्त भी मौजूद थे।

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Raipur: मुख्यमंत्री साय की उपस्थिति में 6,412 जोड़े विवाह बंधन में बंधे, गोल्डन बुक में दर्ज हुआ रिकॉर्ड, कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का हुआ शुभारंभ

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Raipur: 6,412 couples tied the knot in the presence of Chief Minister Sai, record entered in the Golden Book, malnutrition free Chhattisgarh campaign launched

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना छत्तीसगढ़ में सामाजिक समरसता, अंत्योदय और संवेदनशील शासन की भावना को साकार करने वाली ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने कहा कि एक समय गरीब परिवारों के लिए बेटी का विवाह बड़ी चिंता का विषय होता था, जिसे इस योजना ने सम्मान और भरोसे में बदल दिया है। मुख्यमंत्री साय राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक विवाह कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में रायपुर सहित पूरे प्रदेश में कुल 6,412 जोड़े विभिन्न धार्मिक परंपराओं एवं रीति-रिवाजों के अनुसार वैवाहिक जीवन में बंधे। साइंस कॉलेज मैदान में 1,316 नवविवाहित जोड़ों को मुख्यमंत्री ने प्रत्यक्ष रूप से आशीर्वाद प्रदान किया, जबकि अन्य जिलों के जोड़े वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। योजना के अंतर्गत प्रत्येक नवविवाहित दंपति को 35 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। उल्लेखनीय है कि इस अभूतपूर्व आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह आयोजन केवल विवाह समारोह नहीं, बल्कि सर्वधर्म समभाव और सामाजिक एकता का उत्सव है। इस वृहद आयोजन में हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध तथा विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के जोड़े अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह सूत्र में बंधे, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सरगुजा एवं बस्तर संभाग के आठ जिलों में इस अभियान की शुरुआत की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ और सुपोषित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए शासन के साथ-साथ समाज की सहभागिता आवश्यक है तथा अभियान की सफलता के बाद इसे पूरे प्रदेश में विस्तारित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेशवासियों के आशीर्वाद से छत्तीसगढ़ तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार ने दो वर्षों में ही मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा किया है। महतारी वंदन योजना के अंतर्गत 70 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये की सहायता दी जा रही है। उन्होंने तेंदूपत्ता संग्राहकों के हित में मानक बोरा मूल्य में वृद्धि, चरण पादुका योजना का पुनः प्रारंभ, श्रीरामलला दर्शन योजना तथा भूमिहीन मजदूरों को आर्थिक सहायता जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख भी किया।

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महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में की गई थी, जिसे मुख्यमंत्री साय आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए सतत प्रयासरत है और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य में जनसहभागिता आवश्यक है।

कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि एक ही दिन में हजारों जोड़ों का विवाह मुख्यमंत्री की संवेदनशीलता और सर्वसमावेशी सोच का प्रमाण है।

कार्यक्रम में विधायक सुनील सोनी, पुरंदर मिश्रा, अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू,  संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ बीज निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्राकर तथा बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव  शम्मी आबिदी, संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव अनेक जनप्रतिधि और अधिकारी कर्मचारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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Chhattisgarh: अरपा महोत्सव में मुख्यमंत्री साय ने दी 100 करोड़ रुपए के विकास कार्यों की सौगात, मुख्यमंत्री बस सेवा योजना में शामिल करने सहित कई घोषणाएं

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Chhattisgarh: Chief Minister Sai announced development works worth Rs 100 crore at the Arpa Mahotsav, including inclusion in the Chief Minister's Bus Service Scheme

Bilaspur: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अरपा महोत्सव एवं गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के छठवें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर जिले को लगभग 100 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने कहा कि जिले के समन्वित विकास के लिए हर संभव पहल की जाएगी। उन्होंने इस मौके पर मुख्यमंत्री बस सेवा योजना में जिले को शामिल करने के साथ ही कई घोषणाएं की। उन्होंने कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत 300 नव विवाहित जोड़ों को सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए आशीर्वाद दिया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अरपा महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि 100 करोड़ से अधिक विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन जिले के समन्वित विकास को गति देगा। उन्होंने कहा कि पेंड्रारोड से अमरकंटक तक 19 किलोमीटर सड़क निर्माण से आवागमन में सुविधा होगी तथा केवची मार्ग के निर्माण से पर्यटन विकास को नई दिशा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरे प्रदेश में 6 हजार 414 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ है, जो ऐतिहासिक क्षण है तथा इसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना बेटियों के सम्मान और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण योजना है।

मुख्यमंत्री साय ने इस मौके पर नगर पंचायत मरवाही में उच्च विश्राम गृह की स्वीकृति, मुख्यमंत्री बस सेवा योजना में जीपीएम जिले को शामिल करने, जिला मुख्यालय में भव्य ऑडिटोरियम निर्माण तथा समदलई पर्यटन स्थल में स्टॉप डैम निर्माण की घोषणा की। कार्यक्रम में विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को चेक एवं सामग्री का वितरण के साथ ही स्वामित्व योजना अंतर्गत 435 किसानों को पट्टा प्रदान किया गया। कार्यक्रम स्थल पर जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित लगाए गए सभी स्टालों का मुख्यमंत्री साय ने अवलोकन किया।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने जिले के विकास कार्यों पर आधारित बुकलेट का विमोचन भी किया। इसके साथ ही कार्यक्रम में जिले की पर्यटन संभावनाओं और जिले की दो वर्षों की विकास यात्रा पर आधारित वीडियो फिल्म का भी प्रदर्शन हुआ। इस मौके पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची, अटल श्रीवास्तव, अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैकरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी तथा बड़ी संख्या में आमजन मौजूद थे।

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Bastar Pandum 2026: अमित शाह बोले- बस्तर की पहचान बारूद नहीं, संस्कृति है; 55 हजार आदिवासियों की भागीदारी नक्सल भय खत्म होने का सबूत

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Bastar Pandum 2026: Amit Shah said Bastar's identity is culture, not gunpowder; the participation of 55,000 tribals is proof of the end of Naxalite fear

Bastar Pandum 2026: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि बस्तर की पहचान कभी भी बारूद और बंदूक नहीं रही, बल्कि उसकी असली पहचान यहां की समृद्ध संस्कृति, परंपराएं और विरासत हैं। वे छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

अमित शाह ने कहा कि जो बस्तर कुछ साल पहले नक्सली हिंसा, IED धमाकों और गोलियों की आवाज से दहला रहता था, आज वहीं 55 हजार से ज्यादा आदिवासी खान-पान, गीत, नृत्य, नाटक, वेशभूषा, परंपरा और वन औषधि सहित 12 विधाओं के जरिए अपनी संस्कृति को जीवंत कर रहे हैं। यह बस्तर के नक्सल भय से मुक्त होने का बड़ा प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि पिछली बार जहां 7 विधाओं में प्रतियोगिताएं हुई थीं, वहीं इस बार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 5 नई विधाओं को जोड़कर आदिवासी संस्कृति को और मजबूती दी। बस्तर के सात जिलों, 1885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद मुख्यालयों से हजारों प्रतिभागियों ने इसमें हिस्सा लिया।

गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर जैसी कला और संस्कृति दुनिया के किसी भी जनजातीय क्षेत्र में दुर्लभ है। यह सिर्फ बस्तर की नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक धरोहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि बस्तर की संस्कृति देश-दुनिया तक पहुंचे और इसे वैश्विक पहचान मिले।

अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार आदिवासी जनजातियों के संरक्षण और सम्मान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस और उनकी 150वीं जयंती को जनजातीय गौरव वर्ष घोषित करना इसी सम्मान का प्रतीक है। सरकार ने जनजातीय शिल्प, व्यंजन और वन उत्पादों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग को भी बढ़ावा दिया है।

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नक्सलवाद पर सख्त संदेश देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई का मूल आधार आदिवासी किसानों, निर्दोष बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा है। उन्होंने बचे हुए नक्सलियों से आत्मसमर्पण की अपील करते हुए कहा कि सरकार उन्हें सम्मानजनक पुनर्वासन देगी, लेकिन जो हथियार उठाएंगे, उन्हें हथियार से ही जवाब मिलेगा।

अमित शाह ने कहा कि अगले पांच वर्षों में बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनेगा। नई पर्यटन गतिविधियां, एडवेंचर टूरिज्म, होम-स्टे और औद्योगिक क्षेत्र बस्तर को रोजगार से समृद्ध करेंगे। 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र, रेल परियोजनाएं, सिंचाई योजनाएं और कनेक्टिविटी बस्तर की तस्वीर बदल देंगी।

उन्होंने कहा कि आज बस्तर में कर्फ्यू नहीं, बल्कि रात में सांस्कृतिक नृत्य दिखाई देते हैं। स्कूल, अस्पताल, सड़कें और मोबाइल टावर बस्तर को मुख्यधारा से जोड़ रहे हैं। तय समय सीमा में बस्तर पूरी तरह नक्सल मुक्त होगा, इसमें कोई संदेह नहीं है।

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बस्तर पंडुम का भव्य समापन आज: अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि, CM साय करेंगे अध्यक्षता

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Grand closing ceremony of Bastar Pandum today: Amit Shah will be the chief guest, CM Sai will preside

बस्तर पंडुम 2026: बस्तर की जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाने वाला तीन दिवसीय बस्तर पंडुम सोमवार को अपने भव्य समापन के साथ इतिहास रचने जा रहा है। आज 9 फरवरी को जगदलपुर के लालबाग मैदान में होने वाले समापन समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय करेंगे।

‘प्रकृति और परंपरा का उत्सव’ थीम पर आयोजित बस्तर पंडुम, बस्तर की माटी की खुशबू, लोककला, लोकनृत्य और जनजातीय विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का सशक्त मंच बना है। समापन समारोह का आयोजन 9 फरवरी को पूर्वान्ह 11 बजे से लालबाग मैदान, जगदलपुर में होगा।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा सहित राज्य मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्य कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। साथ ही सांसद, विधायक, महापौर और अन्य जनप्रतिनिधियों की भी गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।

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Raipur: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की उलटी गिनती, अमित शाह की हाईलेवल मीटिंग, 31 मार्च से पहले अंत का दावा

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Raipur: Countdown to end Naxalism in Chhattisgarh, Amit Shah's high-level meeting, claims end before March 31

Raipur: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह तीन दिन के छत्तीसगढ़ दौरे पर रायपुर पहुंचे हैं। राजधानी के मेफेयर होटल में वे नक्सलवाद को लेकर हाईलेवल समीक्षा बैठक कर रहे हैं। बैठक के पहले सत्र में इंटेलिजेंस इनपुट्स, सुरक्षा अभियानों और विकास कार्यों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।

मीटिंग के बाद अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार और अधिकारियों के साथ नक्सल विरोधी अभियानों की समीक्षा की गई है। सिक्योरिटी सेंट्रिक रणनीति, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, नक्सल फाइनेंशियल नेटवर्क पर प्रहार और आत्मसमर्पण नीति के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं।

शाह ने दावा किया कि 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। उन्होंने लिखा कि जो छत्तीसगढ़ कभी नक्सली हिंसा का गढ़ माना जाता था, वह आज भाजपा की डबल इंजन सरकार में विकास का प्रतीक बन चुका है। राज्य के युवा खेल, फॉरेंसिक और तकनीकी शिक्षा में आगे बढ़ रहे हैं और साथ ही अपनी संस्कृति व परंपराओं को भी संजो रहे हैं।

बैठक के दूसरे सत्र में नक्सल प्रभावित इलाकों की मौजूदा स्थिति और आगे की रणनीति पर मंथन होगा। इस अहम बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, कई राज्यों के डीजीपी, एसीएस गृह, CRPF और अन्य केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

डेडलाइन में बचे 51 दिन

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केंद्र सरकार की रणनीति के तहत 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे का लक्ष्य रखा गया है। इस समयसीमा का ऐलान खुद अमित शाह ने किया था। इसके बाद से छत्तीसगढ़ समेत नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों के अभियान तेज किए गए हैं। अब डेडलाइन में केवल 51 दिन शेष हैं।

पंडुम महोत्सव के समापन में भी शामिल होंगे शाह

अमित शाह बस्तर में आयोजित पंडुम महोत्सव के समापन कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। इससे पहले वे 28 से 30 नवंबर के बीच नवा रायपुर स्थित IIM परिसर में आयोजित 60वें DGP-IGP सम्मेलन में भी पहुंचे थे।

विजय शर्मा बोले- आखिरी बड़ी बैठक संभव

राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि 31 मार्च 2026 से पहले नक्सलवाद को लेकर यह संभवत: आखिरी बड़ी रणनीतिक बैठक हो सकती है। आने वाले दिनों में किस तरह काम किया जाएगा, इस पर बड़े स्तर पर निर्णय लिए जाएंगे।

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मीटिंग के बाद ऑपरेशन और तेज होने के संकेत

अमित शाह के दौरे को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। बैठक में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, राज्य पुलिस और इंटेलिजेंस एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए हैं। माना जा रहा है कि बैठक के बाद नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा ऑपरेशन और ज्यादा तेज किए जाएंगे। कुल मिलाकर, अमित शाह का यह दौरा केवल नियमित समीक्षा नहीं, बल्कि तय समयसीमा से पहले नक्सलवाद के खिलाफ आखिरी रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।

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