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Jashpur Rail Project: इतिहास में पहली बार रेल मानचित्र पर उभरेगा जशपुर, धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना को केंद्र की मंजूरी

Jashpur: जिले के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित रेल संपर्क का सपना अब साकार होने की दिशा में बढ़ गया है। केंद्र सरकार के रेल मंत्रालय ने धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा नई रेल लाइन परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित कर दिया है। इसके साथ ही जशपुर को पहली बार राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने का रास्ता साफ हो गया है।
करीब 291.881 किलोमीटर लंबी यह रेल लाइन रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ से शुरू होकर जशपुर जिले के पत्थलगांव होते हुए झारखंड के लोहरदगा तक पहुंचेगी। परियोजना के लागू होने से जशपुर के सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री साय ने जताया आभार
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय जशपुर और पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के विकास के लिए ऐतिहासिक साबित होगा। लंबे समय से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे क्षेत्र को इससे नई पहचान मिलेगी।
वनांचल क्षेत्र जुड़ेगा विकास की मुख्यधारा से
जशपुर जिला अब तक रेल संपर्क से वंचित रहा है। परिवहन के लिए लोगों को मुख्य रूप से सड़क मार्ग पर निर्भर रहना पड़ता था। नई रेल लाइन बनने से यात्रियों को सुरक्षित, सुलभ और किफायती परिवहन सुविधा मिलेगी। इसका लाभ विद्यार्थियों, किसानों, व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और आम नागरिकों को सीधे तौर पर मिलेगा।
किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
रेल संपर्क स्थापित होने के बाद जशपुर के कृषि और उद्यानिकी उत्पादों को देश के बड़े बाजारों तक पहुंचाना आसान हो जाएगा। जैविक खेती, सुगंधित धान, मक्का, दलहन, सब्जियां और बागवानी उत्पादों के लिए प्रसिद्ध इस क्षेत्र के किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ेगी। परिवहन लागत कम होने से स्थानीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी।
पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान
प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपातों, घने जंगलों और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध जशपुर में रेल संपर्क से पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं होंगी सुलभ
नई रेल लाइन से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा संस्थानों तक पहुंचने में सुविधा होगी। वहीं गंभीर मरीजों को बड़े शहरों के अस्पतालों तक जल्दी पहुंचाया जा सकेगा। इससे शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में भी सुधार होगा।
रोजगार और निवेश की बढ़ेंगी संभावनाएं
परियोजना के निर्माण और संचालन के दौरान प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर सृजित होंगे। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण औद्योगिक और व्यावसायिक निवेश भी बढ़ेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रेल, सड़क, ऊर्जा और अन्य आधारभूत अधोसंरचना परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य तेजी से हो रहा है।
उन्होंने कहा धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना इसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में जशपुर और आसपास के क्षेत्रों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की क्षमता रखती है।
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Raipur: छत्तीसगढ़ में 16 जून से ही खुलेंगे स्कूल, 1 जुलाई से सत्र शुरू होने की खबर फर्जी, शिक्षा विभाग ने किया स्पष्ट

Raipur: छत्तीसगढ़ में शैक्षणिक सत्र 2026-27 को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही भ्रामक खबरों पर स्कूल शिक्षा विभाग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। लोक शिक्षण संचालनालय ने कहा है कि राज्य की सभी शासकीय और अशासकीय स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र 16 जून 2026 से ही शुरू होगा। संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 12 जून 2026 को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश के सभी विद्यालयों का नियमित संचालन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 16 जून (मंगलवार) से प्रारंभ किया जाएगा।
1 जुलाई से स्कूल खुलने की खबर को बताया फर्जी
विभाग के संज्ञान में आया था कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर यह सूचना प्रसारित की जा रही है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत 1 जुलाई 2026 से होगी। इस पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए विभाग ने कहा कि ऐसी जानकारी पूरी तरह असत्य, भ्रामक और फर्जी है। लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि विद्यालय संचालन की अधिकृत तिथि 16 जून 2026 ही है और इसमें किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है।
अभिभावकों और विद्यार्थियों से अपील
शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे केवल विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। विभाग ने कहा कि सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट और भ्रामक जानकारियों से बचें तथा किसी भी सूचना की पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से ही करें। अधिकारियों के अनुसार, नए शैक्षणिक सत्र की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और प्रदेशभर के स्कूल 16 जून से नियमित रूप से संचालित होंगे।
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India U19 Women Cricket Team: छत्तीसगढ़ की बेटी महक नरवासे बनीं भारतीय अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान, CM साय ने किया सम्मानित

Mahak Narwase: छत्तीसगढ़ की प्रतिभाशाली युवा क्रिकेटर महक नरवासे को भारतीय अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम के श्रीलंका दौरे के लिए टी-20 और वनडे दोनों टीमों का उपकप्तान नियुक्त किया गया है। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री साय ने उन्हें सम्मानित कर बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री से शुक्रवार को महक नरवासे ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने महक को शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि महक नरवासे की यह उपलब्धि केवल उनके परिवार या राजनांदगांव जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बेटियां खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं। महक ने अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर यह मुकाम हासिल किया है, जो युवाओं और विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणादायी है।
‘खूब खेलो, आगे बढ़ो और नई ऊंचाइयों को छुओ’
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि महक आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ और देश का नाम रोशन करेंगी। उन्होंने महक को प्रोत्साहित करते हुए कहा, “खूब खेलो, आगे बढ़ो और नई ऊंचाइयों को छुओ। आपकी सफलता प्रदेश के हजारों युवा खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देगी।”
खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित कर रही सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। महक नरवासे का भारतीय अंडर-19 महिला टीम की उपकप्तान के रूप में चयन प्रदेश में विकसित हो रहे खेल माहौल और खिलाड़ियों को मिल रहे अवसरों का उत्कृष्ट उदाहरण है। महक नरवासे ने इस सम्मान और शुभकामनाओं के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महक के पिता राधेश्याम नरवासे, महापौर मधुसूदन यादव, कोच मनोज तिवारी तथा अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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Keshkal Ghat Bypass: केशकाल घाट फोरलेन बायपास को मिली रफ्तार, 308 करोड़ की परियोजना के लिए कार्यादेश जारी

Keshkal Ghat Bypass: बस्तर की लाइफलाइन माने जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर बहुप्रतीक्षित केशकाल घाट फोरलेन बायपास परियोजना को गति मिल गई है। लोक निर्माण विभाग ने 308 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस बायपास के निर्माण के लिए चयनित एजेंसी को कार्यादेश जारी कर दिया है।
यह कार्रवाई उप मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण मंत्री Arun Sao के निर्देशों के बाद की गई है। उन्होंने हाल ही में बस्तर प्रवास के दौरान परियोजना स्थल का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए थे।
5 जून को किया था मौके का निरीक्षण
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने 5 जून को विभागीय अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों के साथ केशकाल बायपास के दोनों छोरों का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने परियोजना से जुड़े लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा कर निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए थे।
निरीक्षण के बाद विभाग ने आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाएं तेजी से पूरी करते हुए 11 जून को निर्माण एजेंसी को औपचारिक कार्यादेश जारी कर दिया।
समय-सीमा और गुणवत्ता पर विशेष जोर
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि परियोजना में उपयोग होने वाली निर्माण सामग्री और कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाए। साथ ही निर्धारित समय-सीमा में निर्माण कार्य पूरा करने पर भी जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि केशकाल घाट बायपास केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके निर्माण से रायपुर-जगदलपुर मार्ग पर यातायात सुगम होगा और यात्रा का समय भी कम होगा।
11.38 किमी लंबा होगा बायपास
लोक निर्माण विभाग के अनुसार, केशकाल घाट फोरलेन बायपास की कुल लंबाई 11.38 किलोमीटर होगी। परियोजना के तहत दो वृहद (बड़े) और दो मध्यम पुलों का भी निर्माण किया जाएगा।
बायपास बनने के बाद केशकाल घाट के घुमावदार और चुनौतीपूर्ण मार्ग से वाहनों की निर्भरता कम होगी, जिससे सड़क सुरक्षा में सुधार होने के साथ-साथ माल और यात्री परिवहन भी अधिक सुगम होगा।
सरकार का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने से बस्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और क्षेत्र के आर्थिक एवं पर्यटन विकास को भी नई गति मिलेगी।
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Bastar Development Plan: बस्तर के हर परिवार की आय 30 हजार रुपए महीना करने का लक्ष्य, CM साय ने नीति आयोग में रखा विजन

Bastar Development Plan: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक में बस्तर के विकास का व्यापक विजन प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की छाया से बाहर निकल रहा बस्तर अब रोजगार, कृषि, पर्यटन, शिक्षा और तकनीक आधारित विकास का नया मॉडल बनेगा।
मुख्यमंत्री ने अगले तीन वर्षों में बस्तर के प्रत्येक परिवार की मासिक आय बढ़ाकर 30 हजार रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में बस्तर के करीब 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15 हजार रुपए से कम है।
डेयरी मॉडल से गांवों में बढ़ेगी आय
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर डेयरी मॉडल लागू किया जा रहा है। इसके तहत आदिवासी परिवारों को दुधारू गाय और भैंस उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे गांवों में स्थायी आय के स्रोत विकसित होंगे और महिलाओं व युवाओं को रोजगार मिलेगा।
डेयरी केंद्र, दूध संग्रहण, परिवहन और स्थानीय बाजार जैसी आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
2 हजार करोड़ की सिंचाई परियोजनाएं, 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा लाभ
बस्तर में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए 2,000 करोड़ रुपए से अधिक लागत की दो बड़ी सिंचाई परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं। इनसे 32 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इंद्रावती नदी क्षेत्र में सालभर पानी उपलब्ध होने से किसान धान के साथ-साथ फल, सब्जियां और नकदी फसलों की खेती भी कर सकेंगे, जिससे उनकी आय बढ़ेगी।
36 लाख लोगों की बनेगी डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल
स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बस्तर के लगभग 36 लाख लोगों की डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार की जा रही है। इससे मरीजों के इलाज, बीमारी और दवाओं का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा और डॉक्टरों को समय पर आवश्यक जानकारी मिल सकेगी। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और बुजुर्गों को मिलने की उम्मीद है।
200 सुरक्षा शिविर बनेंगे ‘सेवा डेरा’
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर में स्थापित लगभग 200 सुरक्षा शिविरों को अब “सेवा डेरा” के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां ग्रामीणों को राशन, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा समेत केंद्र और राज्य सरकार की 371 योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिलेगा।
चित्रकोट और सिरपुर को बनाया जाएगा विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र
सरकार चित्रकोट जलप्रपात और बौद्ध विरासत स्थल सिरपुर को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित कर रही है। बस्तर में वॉटर स्पोर्ट्स, एडवेंचर स्पोर्ट्स और जंगल सफारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं सिरपुर में ग्लोबल मेडिटेशन सेंटर, संग्रहालय और महानदी तट के विकास पर काम जारी है। सरकार का मानना है कि पर्यटन के जरिए हजारों युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
AI और सेमीकंडक्टर में बढ़ेगा निवेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निवेश और तकनीक आधारित विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। अब तक 435 सुधार लागू किए जा चुके हैं और निवेशकों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को मजबूत किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य में सेमीकंडक्टर क्षेत्र की दो आधुनिक इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। साथ ही एआई मिशन, पर्यटन मिशन, खेल मिशन, अधोसंरचना मिशन और स्टार्टअप-निपुण मिशन के जरिए युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
शिक्षा और डिजिटल सेवाओं पर भी जोर
बस्तर के अबूझमाड़ और जगरगुंडा में 100 करोड़ रुपए की लागत से एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही है। इसके अलावा 341 पीएमश्री स्कूल, 5,857 स्मार्ट क्लासरूम और 16 स्थानीय भाषाओं में द्विभाषी पुस्तकों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि एग्रीस्टैक योजना के तहत 33 लाख से अधिक किसानों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ा जा चुका है। वहीं डिजिटल द्वार प्लेटफॉर्म और अटल मॉनिटरिंग पोर्टल के माध्यम से सरकारी सेवाओं को अधिक पारदर्शी बनाया गया है।
761 करोड़ रुपए से अधिक का निर्यात
मुख्यमंत्री ने बताया कि ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना के तहत स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में फरवरी 2026 तक राज्य से 761.76 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ, जिसमें खुशबूदार चावल का सबसे बड़ा योगदान रहा। उन्होंने कहा कि इससे किसानों, कारीगरों और स्थानीय उद्यमियों की आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
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