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UP Police Constable Result 2026: 76,184 अभ्यर्थी पास, 17 अगस्त से DV, सितंबर में फिजिकल टेस्ट

लखनऊ: उत्तर प्रदेश पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा 2026 का रिजल्ट शुक्रवार को जारी कर दिया गया। 32,679 पदों के लिए आयोजित भर्ती परीक्षा में 76,184 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए सफल घोषित किए गए हैं। उत्तर प्रदेश पुलिस रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन बोर्ड (UPPRPB) ने रिजल्ट के साथ कैटेगरी वाइज कट-ऑफ भी जारी कर दी है। अब सफल अभ्यर्थियों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (DV) 17 अगस्त से शुरू होगा, जबकि फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST) सितंबर में आयोजित किया जाएगा।
जनरल की कट-ऑफ सबसे ज्यादा
जारी कट-ऑफ के अनुसार जनरल वर्ग की कट-ऑफ 258.03 अंक रही। वहीं ओबीसी की 251.63, EWS की 247.57, SC की 239.34 और ST की 210.10 अंक रही।
फिजिकल टेस्ट में दौड़ होगी
डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद अभ्यर्थियों को फिजिकल टेस्ट देना होगा। पुरुष अभ्यर्थियों को 25 मिनट में 4.8 किलोमीटर और महिला अभ्यर्थियों को 14 मिनट में 2.4 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होगी।
28.86 लाख ने किया था आवेदन
भर्ती के लिए 28,86,797 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। इनमें 21,92,236 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि करीब 6.94 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी। परीक्षा 8, 9 और 10 जून को प्रदेश के 75 जिलों के 1,183 केंद्रों पर छह पालियों में आयोजित हुई थी।
नेगेटिव मार्किंग नहीं थी
लिखित परीक्षा 300 अंकों की थी, जिसमें 150 प्रश्न पूछे गए। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का था। इस बार परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं रखी गई थी।
फर्जीवाड़े पर सख्ती
भर्ती बोर्ड ने परीक्षा के दौरान फर्जी अभ्यर्थियों और सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 12 मुकदमे दर्ज किए और 9 लोगों को गिरफ्तार किया। ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक सत्यापन और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए निगरानी की गई।
कट-ऑफ (Category-wise)
| वर्ग | कट-ऑफ |
| सामान्य (General) | 258.03 |
| ओबीसी | 251.63 |
| EWS | 247.57 |
| एससी | 239.34 |
| एसटी | 210.10 |
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गोरखपुर वैभव हत्याकांड: AI से सीखा फिरौती मांगने का तरीका, ₹36 लाख के कर्ज में डूबे कंप्यूटर टीचर का कबूलनामा

गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 10 वर्षीय वैभव की हत्या के मामले में आरोपी कंप्यूटर टीचर सर्वेश उर्फ बिट्टू भट्ट ने पुलिस पूछताछ में सनसनीखेज खुलासे किए हैं। आरोपी ने बताया कि ₹36 लाख के कर्ज और परिवार के तानों से परेशान होकर उसने अपहरण की साजिश रची। इसके लिए उसने AI की मदद से लॉरेंस बिश्नोई गैंग के काम करने का तरीका समझा और फिरौती मांगने की योजना बनाई।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने इंटरनेट से ₹199 में कंबोडिया का मोबाइल नंबर खरीदा और उसी पर व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर कारोबारी परिवार से ₹1 करोड़ की फिरौती मांगी।
गिफ्ट का झांसा देकर ले गया, फिर कर दी हत्या
पुलिस के अनुसार, सोमवार को सर्वेश ने वैभव को गिफ्ट देने का लालच देकर अपने साथ ले गया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि जब बच्चा शोर मचाने लगा तो उसने उसे जमीन पर गिराकर गला दबा दिया। हत्या के बाद शव को बोरे में भरकर अपने घर के बेसमेंट में अनाज की बोरियों के बीच छिपा दिया। इसके बाद वह परिवार के साथ बच्चे की तलाश का नाटक भी करता रहा।
CCTV से खुला पूरा राज
पुलिस ने इलाके के CCTV फुटेज खंगाले, जिसमें वैभव आरोपी सर्वेश के साथ जाता दिखाई दिया। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जहां उसने हत्या की बात स्वीकार कर ली।
डेढ़ महीने पहले हुई थी मां की मौत
वैभव शहर के एक सराफा कारोबारी का पोता था और चौथी कक्षा में पढ़ता था। करीब डेढ़ महीने पहले उसकी मां का निधन हो गया था।
2024 में पेपर लीक केस में भी जा चुका है जेल
पुलिस के अनुसार, सर्वेश कंप्यूटर कोचिंग चलाता है, जहां डिप्लोमा और TET की तैयारी कराई जाती है। वह 2024 में बिहार के एक पेपर लीक मामले में करीब 40 दिन नैनी जेल में भी रह चुका है।
पिता, भाई और पत्नी समेत 7 लोग हिरासत में
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के पिता, भाई, पत्नी समेत सात लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्चे की गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई है।
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UP News: यूपी में बड़ा पुलिस फेरबदल, लखनऊ-प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर बदले, 15 IPS अफसरों के तबादले

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 15 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया। तबादला सूची में 2 डीजी, 6 एडीजी, 5 आईजी और 2 एसपी रैंक के अधिकारी शामिल हैं। सबसे बड़ा बदलाव लखनऊ और प्रयागराज में हुआ, जहां दोनों शहरों के पुलिस कमिश्नर बदल दिए गए।
तरुण गाबा बने लखनऊ के नए पुलिस कमिश्नर
लखनऊ पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सेंगर को डीजी इंटेलिजेंस बनाया गया है। उनकी जगह एडीजी सुरक्षा तरुण गाबा को राजधानी का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है। वहीं, वाराणसी जोन के एडीजी पीयूष मोर्डिया को प्रयागराज का नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया है।
जोगेंद्र कुमार को मिली नई जिम्मेदारी
प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार को आईजी, पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (PTS) मुरादाबाद भेजा गया है। सूत्रों के अनुसार, 25 जुलाई को NEET पेपर लीक के विरोध में प्रयागराज में हुए छात्र प्रदर्शन और हंगामे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाराज थे। हालांकि, सरकार ने तबादलों के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया है।
मोहित गुप्ता भ्रष्टाचार निवारण संगठन भेजे गए
गृह विभाग के सचिव आईपीएस मोहित गुप्ता को आईजी, भ्रष्टाचार निवारण संगठन की जिम्मेदारी दी गई है।
कौन हैं तरुण गाबा
2001 बैच के आईपीएस अधिकारी तरुण गाबा मूल रूप से चंडीगढ़ के रहने वाले हैं। वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से वर्ष 2020 में उत्तर प्रदेश कैडर में लौटे थे। गाबा CBI में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उन्होंने आईजी विजिलेंस और गृह सचिव के पद पर भी कार्य किया है। आईपीएस तरुण गाबा पहले प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर भी रह चुके हैं।
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: सुप्रीम कोर्ट ने SIT में फोरेंसिक ऑडिटर जोड़ने को कहा, 2 हफ्ते में मांगी स्टेटस रिपोर्ट

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामले की जांच के लिए नई विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर दी गई है। इसकी अगुआई आईजी किरण एस. कर रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने जांच को और प्रभावी बनाने के लिए SIT में फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया।
‘जांच बंद नहीं कर रहे, और सुधार जरूरी’
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा कि अदालत इस मामले की निगरानी जारी रखेगी। उन्होंने कहा, “हम इस जांच को बंद नहीं कर रहे हैं। चोरी के इस मामले में और भी सुधार के कदम उठाने होंगे।” कोर्ट ने कहा कि फोरेंसिक ऑडिटर खातों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर वित्तीय अनियमितताओं का पता लगाने में मदद करेगा।
नई SIT को मिलेगा पूरा अधिकार
सुनवाई के दौरान अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि क्या नई SIT को जांच से जुड़े सभी रिकॉर्ड और दस्तावेजों तक पूरा एक्सेस मिलेगा। इस पर तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि नई टीम को जांच के लिए आवश्यक सभी अधिकार दिए गए हैं। नई SIT में आईजी, डीआईजी, एसएसपी और एएसपी स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
2 हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने SIT को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के भीतर अपनी स्टेटस रिपोर्ट अदालत में दाखिल करे। इसके बाद अगली सुनवाई में रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार को नई SIT गठित करने और अब तक की जांच का ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया था।
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नई SIT गठित, IG किरण एस. करेंगी जांच की अगुआई

अयोध्या/लखनऊ: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने नई विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया है। तीन सदस्यीय इस टीम की कमान आईजी लखनऊ रेंज किरण एस. को सौंपी गई है। नई SIT का गठन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद किया गया है। इससे पहले गठित SIT की अध्यक्षता IAS अधिकारी विजय विश्वास पंत कर रहे थे। उस टीम में किरण एस. सदस्य थीं, लेकिन नेतृत्व विजय विश्वास पंत के पास था।
सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे नए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को सुनवाई के दौरान वरिष्ठ IPS अधिकारी की अध्यक्षता में नई SIT गठित करने का निर्देश दिया था। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दिया था। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया था कि 27 जुलाई तक मामले की स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
अब सीधे सुप्रीम कोर्ट को देनी होगी रिपोर्ट
नई SIT अब समय-समय पर अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करेगी। मामले की निगरानी भी सर्वोच्च अदालत स्वयं करेगी। पहले गठित SIT अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप रही थी।
DIG और SSP भी टीम में शामिल
नई SIT में अयोध्या के DIG और SSP को भी सदस्य बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि आपराधिक मामलों और चोरी की तकनीकी जांच में पुलिस अधिकारियों की भूमिका अधिक प्रभावी होती है। इसी आधार पर जांच की जिम्मेदारी सीधे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है।
योगी सरकार ने किया पुनर्गठन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पहले गठित SIT की अध्यक्षता लखनऊ मंडल के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद टीम का पुनर्गठन कर आईजी लखनऊ रेंज किरण एस. को इसका अध्यक्ष बनाया गया है।
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UP News: गोरखपुर को ₹995 करोड़ की विकास परियोजनाओं की सौगात: CM योगी बोले- सपा-कांग्रेस ने आस्था और युवाओं के साथ किया अन्याय

गोरखपुर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को गोरखपुर दौरे के दौरान करीब 995 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने 813 करोड़ रुपये की चार परियोजनाओं का लोकार्पण और 181 करोड़ रुपये की 10 परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इस दौरान आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग कभी आस्था पर प्रहार करते थे, आज वही आस्था के सबसे बड़े ठेकेदार बनने का दावा कर रहे हैं।
₹995 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास
मुख्यमंत्री ने टीपीनगर-पैडलेगंज 2.6 किलोमीटर लंबे सिक्सलेन फ्लाईओवर समेत कुल 813.52 करोड़ रुपये की चार परियोजनाओं का लोकार्पण किया। इसके अलावा 181.77 करोड़ रुपये की 10 नई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया।
‘2007 से 2017 के बीच 29 चीनी मिलें बंद हुईं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस के शासनकाल में 29 चीनी मिलें बंद हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों ने युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय किया और रोजगार के अवसर खत्म किए। उन्होंने कहा कि आज नया उत्तर प्रदेश बेहतर सड़क संपर्क, मजबूत आधारभूत ढांचे और तेज विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
‘रामभक्तों पर गोली चलवाई, अब आस्था की बात कर रहे हैं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने शासनकाल में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में बाधा डाली और रामभक्तों पर गोली चलवाई। वहीं कांग्रेस ने भगवान श्रीराम के अस्तित्व और मंदिर आंदोलन के खिलाफ अदालत में पक्ष रखा था।उन्होंने कहा कि ऐसे दलों द्वारा आज आस्था पर भाषण देना जनता को स्वीकार नहीं है।
‘2017 से पहले दंगे और अराजकता आम बात थी’
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में दंगे, अराजकता और असुरक्षा का माहौल था। होली, रामनवमी, दुर्गापूजा, विजयदशमी और कांवड़ यात्रा जैसे धार्मिक आयोजनों के दौरान भी तनाव की स्थिति बनती थी। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने कानून-व्यवस्था को मजबूत किया है।
इंसेफेलाइटिस और रोजगार को लेकर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले पूर्वांचल में इंसेफेलाइटिस हजारों बच्चों की मौत का कारण बन रहा था, लेकिन तत्कालीन सरकारों ने इस ओर गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी सरकार में नौकरियों पर ‘सैफई सिंडिकेट’ का कब्जा था और युवाओं के साथ अन्याय किया गया।
‘अब निवेशकों की पहली पसंद बना गोरखपुर’k
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय गोरखपुर माफिया और इंसेफेलाइटिस के लिए बदनाम था। निवेशक यहां आने से बचते थे, लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने कहा कि बेहतर कानून-व्यवस्था और निवेश के माहौल के कारण गीडा (GIDA) में बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित हुए हैं, जिससे करीब 50 हजार युवाओं को रोजगार मिला है। आज लोग गोरखपुर में जमीन खरीदने और निवेश करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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