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Union Cabinet: जनगणना के लिए कैबिनेट ने 11,718 करोड़ रुपये के बजट को दी मंजूरी, लगभग 30 लाख फील्ड कार्यकर्ता देंगे अंजाम

New Delhi: केंद्रीय कैबिनेट ने शुक्रवार को तीन महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने भारत की जनगणना 2027 को हरी झंडी देते हुए इसके लिए ₹11,718.24 करोड़ रुपये के बजट को मंजूर किया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कोयला लिंकेज नीति में सुधार के लिए कोलसेटू नीति को भी मंजूरी दी है। सरकार ने खोपरा 2025 सीजन के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को भी नीतिगत मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि जनगणना 2027 विश्व का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास होगा। यह अब तक की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद की 8वीं जनगणना होगी।
दो चरणों में होगी जनगणना
जनगणना 2027 दो चरणों में होगी। पहले चरण में गृह-सूचीकरण और आवास गणना का काम होगा, जो अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा। दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा, जो फरवरी 2027 में होगा। हालांकि, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के बर्फीले इलाकों, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में जनगणना सितंबर 2026 में ही कराई जाएगी।
2011 में हुई थी पिछले जनगणना
कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियम, 1990 के तहत इसे किया जाता है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी। कोविड महामारी के कारण जनगणना 2021 आयोजित नहीं की जा सकी। इससे पहले 16 जून 2025 को जनगणना 2027 की राजपत्र अधिसूचना जारी की गई। जनगणना 2027 की अनुमानित लागत 11,718 करोड़ रुपये होगी।
30 लाख लोग जनगणना को देंगे अंजाम
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि जाति गणना को भी जनगणना 2027 में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जनगणना को लगभग 30 लाख फील्ड कार्यकर्ता अंजाम देंगे, जो राष्ट्रीय महत्व का यह अभियान पूरा करेंगे। डेटा इकट्ठा करने के लिए मोबाइल ऐप का इस्तेमाल होगा, जो एंड्रॉयड और iOS दोनों पर चलेगा। साथ ही, निगरानी के लिए एक केंद्रीय पोर्टल भी होगा, जिससे डेटा की क्वालिटी बेहतर बनेगी। डेटा यूजर्स को एक क्लिक में उपलब्ध कराया जाएगा। Census-as-a-Service (CaaS) के जरिए मंत्रालयों को साफ-सुथरा, डिजिटल और उपयोगी डेटा मिलेगा। जनगणना को लेकर एक गजट नोटिफिकेशन आएगा जिसमें लागत आदि के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस बार स्व-गणना का भी विकल्प प्रदान किया जाएगा।
कोयले से जुड़ी सुधार नीति को कैबिनेट की मंजूरी
केंद्रीय कैबिनेट ने ‘कोयला लिंकेज नीति में सुधार: कोलएसईटीयू’ को भी नीतिगत मंजूरी दी है। वैष्णव ने कहा, “भारत कोयले के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। 2020 में कोयले का वाणिज्यिक खनन शुरू हुआ, जिससे घरेलू कोयले की उपलब्धता में उल्लेखनीय सुधार हुआ। भारत ने 2024-25 में पहली बार एक वर्ष में 1 अरब टन कोयले के उत्पादन का आंकड़ा पार किया। 2024-25 में कुल उत्पादन 1.048 अरब टन रहा। खपत के प्रतिशत के रूप में आयात लगातार घट रहा है। 2024-25 में आयात में 7.9% की कमी आई, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 60,700 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत हुई।” रेल-कोयला साझेदारी के बारे में बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष रेलवे के जरिए 823 मिलियन टन कोयले का परिवहन किया गया। घरेलू बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार रिकॉर्ड उच्च स्तर पर है।
क्या है कोयले से जुड़ा कोलसेटू और उसमें हुआ सुधार?
कोयला लिंकेज नीति में सुधार वर्तमान नीति के अनुसार कोयला केवल अंतिम उपयोगकर्ताओं जैसे सीमेंट, इस्पात, स्पंज आयरन, एल्युमीनियम सेक्टर आदि को नीलामी के माध्यम से दिए जाते हैं। भारत में अब पर्याप्त घरेलू उत्पादन है। कैबिनेट ने आज सुधारों को मंजूरी दी है। यह सुधार 2016 की नीति के तहत एक नई विंडो जिसे कोलसेटू (CoalSETU) कहा जाता है में होगा। यह लिंकेज योजना कोयले की निर्बाध, कुशल और पारदर्शी उपयोग के लिए बनी है। सुधारों के तहत कोयला लिंकेज किसी भी औद्योगिक उपयोग और निर्यात के लिए नीलामी के माध्यम से प्रदान किए जा सकते हैं। CoalSETU में सुधार के साथ कोई भी घरेलू खरीदार लिंकेज नीलामी में भाग ले सकता है। कोयले का उपयोग स्वयं के उपभोग, निर्यात या कोयला धुलाई जैसे किसी अन्य उद्देश्य के लिए बिना किसी अंतिम उपयोग प्रतिबंध के किया जा सकता है। कोयला लिंकेज धारक 50% तक मात्रा का निर्यात कर सकते हैं। ईंधन आपूर्ति समझौता अधिकतम 15 वर्षों तक का होगा। समूह की कंपनियों के बीच कोयला लिंकेज के लचीले उपयोग की अनुमति होगी। मौजूदा अंतिम उपयोगकर्ताओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा, वे भी नई विंडो के तहत भाग ले सकते हैं।
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Railway: रेलवन एप से जनरल टिकट बुक करने पर आज से बड़ा फायदा, नई स्कीम 6 महीने लागू

New Delhi: रेलवन (RailOne) एप के जरिए अनरिजर्व्ड (जनरल) टिकट बुक करके UPI, क्रेडिट, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से पेमेंट करने पर आज से 3% डिस्काउंट मिलेगा। इसके अलावा रेलवन एप से टिकट बुक करके अगर पमेंट R-वॉलेट से किया तो दुगना फायदा मिलेगा। क्योंकि इससे जनरल टिकट बुक करने पर 3% छूट पहले से दी जा रही थी। इसे आज से बढ़ाकर 6% कर दिया गया है। यह ऑफर 14 जुलाई 2026 तक यानी 6 महीने के लिए लागू रहेगा। भारतीय रेलवे ने 30 दिसंबर को जनरल टिकट पर डिस्काउंट देने का ऐलान किया था।
किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर नहीं मिलेगी यह छूट
रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि 3% डिस्काउंट का यह ऑफर केवल रेलवन एप पर ही उपलब्ध होगा। यदि यात्री किसी अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या वेबसाइट से जनरल टिकट बुक करते हैं, तो उन्हें डिस्काउंट नहीं मिलेगा। इसका उद्देश्य यात्रियों को रेलवे के आधिकारिक एप की ओर शिफ्ट करना है ताकि स्टेशनों पर टिकट काउंटरों पर लगने वाली भीड़ को कम किया जा सके।
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Nitin Gadkari: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने स्लीपर बसों में लग रही आग की घटनाओं पर जताई चिंता, सख्त एक्शन की तैयारी

Delhi: देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और स्लीपर बसों को बनाने में बरती जा रही अनियमित्तओं को रोकने के लिए केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सख्त एक्शन लेने की तैयारी कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री गडकरी ने कहा है कि कुछ मामलों की जांच के लिए सीबीआई को लिखने वाले हैं। उन्होंने कहा कि प्राइवेट बस बॉडी बिल्डरों (वेंडरों) द्वारा बसों को बनाने में बरती गई बड़े पैमाने पर लापरवाही, सुरक्षा मानकों पर खरी ना उतरने के बावजूद फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने और अन्य तरह के घपलों के संदेह को देखते हुए कुछ मामलों की जांच सीबीआई से भी कराने के लिए रिकमंड किया जाएगा।
जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
उन्होंने कहा कि हमारे काफी प्रयास करने के बावजूद सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने की जगह बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने पिछले साल तीन महीनों में राजस्थान समेत अन्य राज्यों में स्लीपर बसों में आग लगने की हुई पांच से छह घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें 145 लोग जिंदा जल गए। हम किसी भी तरह की माफी या अनदेखी करने के मूड में नहीं हैं। किसी भी कीमत पर इन पर अंकुश लगाना ही है।
इसके लिए मंत्रालय की तरफ से राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर पूछा गया है कि वह बताएं कि इन दुर्घटनाओं के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है? इनमें किस-किस स्तर पर लापरवाहियां बरती गईं? हम गलती करने वाले अधिकारियों को बख्शेंगे नहीं। इसके अलावा भी अब ऐसे जो भी मामले सामने आएंगे। उनमें जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लिया जाएगा।
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Bulldozer Action: दिल्ली में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास ढहाए गए अवैध निर्माण, पथराव से इलाके में तनाव

Delhi NCR News: दिल्ली के तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास अवैध निर्माण हटाने के लिए एमसीडी ने आधी रात से बुलडोजर एक्शन की कार्रवाई शुरू की। हालांकि कार्रवाई शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने विरोध जताया और देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई। इस दौरान उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव भी कर दिया। इसके बाद इलाके में तनाव फैल गया। स्थिति को संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया है।
हालात सामान्य होते ही बुधवार सुबह बुलडोजर कार्रवाई फिर शुरू की गई। मौके पर 17 बुलडोजर की मदद से अतिक्रमण हटाया गया।सेंट्रल रेंज के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस मधुर वर्मा ने कहा, दिल्ली हाईकोर्ट के निर्दशों के तहत एमसीडी ने 7 जनवरी की सुबह तड़के दिल्ली के रामलीला मैदान के पास तुर्कमान गेट स्थित फैज़-ए-इलाही मस्जिद के आसपास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है।
उन्होंने कहा, अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई के दौरान कुछ उपद्रवियों ने माहौल खराब करने की कोशिश की। हालात को नियंत्रित करने के लिए सीमित और संतुलित बल का इस्तेमाल किया गया, जिससे बिना किसी तनाव बढ़ाए स्थिति को तुरंत काबू में कर लिया गया।
एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक मस्जिद से सटे दवाखाने और बारात घर को अवैध घोषित किया गया था। रामलीला मैदान क्षेत्र में हुए सर्वे के बाद इन निर्माणों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। देर रात नगर निगम के 17 बुलडोजर पहुंचे तो वहां पथराव शुरू हो गया। मौके पर तैनात पुलिसबल ने आंसू गैस गोले छोड़े और लोगों को खदेड़ा। पुलिस ने थोड़ी देर में ही स्थिति को नियंत्रण में कर लिया।
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Vande Bharat Sleeper: 180 KM प्रति घंटे की रफ्तार में भी वंदे भारत स्लीपर में नहीं छलका पानी, जल्द दिखेगी पटरी पर

Vande Bharat Sleeper: भारतीय रेलवे ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने ट्रायल रन के दौरान 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार पकड़कर इतिहास रच दिया है। वंदे भारत स्लीपर का सफल परीक्षण सवाई माधोपुर-कोटा-नागदा सेक्शन पर किया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। रेल मंत्री इसे न्यू जनरेशन ट्रेन बताते हुए भारतीय रेलवे के लिए बड़ा कदम बताया है।
रेल मंत्री ने शेयर किया वीडियो
मंगलवार शाम रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि रेल सुरक्षा आयुक्त की निगरानी में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का परीक्षण किया गया। उन्होंने कहा कि कोटा–नागदा खंड पर 180 किमी प्रति घंटे की गति से दौड़ती यह ट्रेन भारत में विकसित नई पीढ़ी की रेल तकनीक की ताकत को दर्शाती है। इस ट्रायल ने न सिर्फ ट्रेन की गति क्षमता को साबित किया, बल्कि इसके आधुनिक डिजाइन और सुरक्षा मानकों पर भी मुहर लगा दी है।
180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार में भी नहीं झलका पानी
रेल मंत्री द्वारा शेयर किए गए करीब 24 सेकंड के वीडियो में ट्रायल रन के दौरान जब वंदे भारत स्लीपर ट्रेन 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पटरियों पर दौड़ रही थी, उसी समय केबिन में मौजूद एक कर्मचारी वीडियो रिकॉर्ड करता दिखाई देता है। वीडियो में ट्रेन के केबिन के अंदर स्पीडोमीटर के ठीक सामने चार गिलास पानी से भरे रखे हुए नजर आते हैं। इसमे सबसे अहम बात यह है कि इतनी तेज रफ्तार के बावजूद किसी भी गिलास से पानी की एक भी बूंद नहीं छलकी। यह दृश्य वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की उन्नत तकनीक, बेहतर सस्पेंशन सिस्टम और स्मूद रनिंग क्षमता को दर्शाता है, जिसे यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाया गया है।
वंदे भारत स्लीपर में होंगे 16 कोच
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में कुल 16 कोच होंगे, जिनमें स्लीपर और एसी दोनों श्रेणियों के कोच शामिल रहेंगे। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इनमें आरामदायक बर्थ की व्यवस्था की गई है। सेमी हाई-स्पीड ट्रेन होने के कारण इसमें अपग्रेडेड सस्पेंशन सिस्टम लगाया गया है, जिससे यात्रा के दौरान झटके और कंपन काफी कम महसूस होंगे। खासतौर पर स्लीपर कोच में सफर करते समय यात्रियों को बेहतर आराम मिलेगा, चाहे ट्रेन तेज रफ्तार से ही क्यों न चल रही हो। इसके साथ ही ट्रेन में ऑटोमैटिक दरवाजे, आधुनिक टॉयलेट सिस्टम, फायर सेफ्टी उपकरण, सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। रेलवे का कहना है कि वंदे भारत स्लीपर यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और अंतरराष्ट्रीय स्तर का यात्रा अनुभव प्रदान करेगी।
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IRCTC Train Ticket Booking: बिना आधार लिंक सुबह 8 से 12 टिकट बुक नहीं होगा, बुकिंग खुलने के पहले दिन पर लागू होगा नया नियम

IRCTC Train Ticket Booking: ट्रेन से यात्रा करने वालों के लिए बड़ी ख़बर है। आज यानी 29 दिसंबर से बिना आधार लिंक वाले IRCTC यूजर्स सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। ये नियम केवल रिजर्व रेल टिकट बुकिंग खुलने के पहले दिन पर प्रभावी होगा। रिजर्व टिकट की बुकिंग ट्रेन डिपार्चर की तारीख के 60 दिन पहले खुलती है। स्टेशन काउंटर से टिकट लेने पर भी OTP जरूरी है। आपका मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना चाहिए। यदि किसी और के लिए टिकट ले रहे हैं, तो उसका आधार और OTP भी जरूरी होगा।
रेलवे इस नए नियम को तीन चरण में लागू करने जा रहा है। पहला चरण आज से लागू हो चुका है। वहीं दूसरा चरण 5 जनवरी से और तीसरा चरण 12 जनवरी से लागू होगा। 29 दिसंबर यानी आज से बिना आधार सुबह 8 बजे से 12 बजे तक टिकट बुक नहीं होगी। जबकि 5 जनवरी से सुबह 8 से शाम 4 बजे तक टिकट बुकिंग पर पाबंदी रहेगी। वहीं 12 जनवरी से सुबह 8 से रात 12 बजे तक ऐसे यूजर्स की टिकट बुक नहीं होगी।
जानकारों का मानना है कि टिकट दलालों और फर्जी सॉफ्टवेयर पर लगाम लगाने के लिए। इससे ओपनिंग डे पर आम यात्रियों को कन्फर्म टिकट मिलने में आसानी होगी। शुरुआती 4 घंटे अब एजेंट्स टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। आम यूजर्स के पास बुकिंग का पूरा मौका होगा। फिलहाल कोई दूसरा विकल्प नहीं दिया गया है।
ध्यान रहे यूजर्स को अपने IRCTC अकाउंट को आधार से लिंक करना होगा। बुकिंग के वक्त आपके रजिस्टर्ड मोबाइल पर एक OTP आएगा, जिसे डालने के बाद ही टिकट कन्फर्म होगा। बिना आधार लिंक वाले यूजर्स शुरुआती 4 घंटों (विंडो ओपनिंग) में टिकट बुक नहीं कर पाएंगे। इसके बाद ही उन्हें मौका मिलेगा।













