अर्थ जगत
पहली तिमाही में जीडीपी की ग्रोथ में जबरदस्त उछाल, टूटे तीन दशक के सारे रिकॉर्ड!

नई दिल्ली: कोरोना काल में देश की अर्थव्यवस्था पर तगड़ी मार पड़ी है। लेकिन धीरे-धीरे हालात सामान्य होने की तरफ बढ़ रहे हैं।मंगलवार को सरकार की तरफ से जीडीपी के ताजा आंकड़े जारी किए गए। इसमें वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही यानी अप्रैल 2021 से जून 2021 में भारत की जीडीपी की ग्रोथ में 20.1 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। जो कि 1990 से लेकर अब तक की यह किसी एक तिमाही में आई सबसे बड़ी ग्रोथ है।
आंकड़ों के अनुसार 2021-22 के पहली तिमाही में जीडीपी 32.38 लाख करोड़ रुपए रही है, जो 2020-21 की पहली तिमाही में 26.95 लाख करोड़ रुपए थी। यानी साल दर साल के आधार पर जीडीपी में 20.1 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। बता दें कि जीडीपी किसी देश के आर्थिक विकास का सबसे बड़ा पैमाना है। अधिक जीडीपी का मतलब है कि देश की आर्थिक बढ़ोतरी हो रही है। अगर जीडीपी बढ़ती है तो इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था ज्यादा रोजगार पैदा कर रही है। इसका यह भी मतलब है कि लोगों का जीवन स्तर भी आर्थिक तौर पर समृद्ध हो रहा है।
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SBI Data Leak: डार्क वेब पर मिले 3,897 रिकॉर्ड में ग्राहकों की निजी जानकारी, बैंक ने बताया पैसा सुरक्षित

SBI Cyber Alert: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्राहकों के डेटा से जुड़ी साइबर घटना सामने आई है। बैंक के मुताबिक, शुरुआती जांच में डार्क वेब पर उपलब्ध करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड में से 3,897 रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें ग्राहकों की निजी जानकारी शामिल थी। बैंक ने प्रभावित ग्राहकों को ईमेल और WhatsApp के जरिए अलग-अलग सूचना भेजी है।
हालांकि, बैंक ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के खातों में जमा रकम सुरक्षित है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कितने ग्राहकों की कौन-कौन सी निजी जानकारियां प्रभावित हुईं और डेटा सामने आने की घटना किस तरह हुई।
क्या SBI ग्राहकों के खाते से पैसे निकलने का खतरा है?
SBI ने अपने संदेश में ग्राहकों को भरोसा दिलाया है कि उनके खातों में जमा रकम सुरक्षित है। हालांकि, निजी डेटा सामने आने की घटना को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। यदि साइबर अपराधियों के पास किसी ग्राहक की निजी जानकारी पहुंच जाती है, तो वे उसका इस्तेमाल फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करने, नकली मैसेज भेजने या धोखाधड़ी के जरिए गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल करने की कोशिश में कर सकते हैं।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि प्रभावित ग्राहकों के खातों से पैसे निकाले गए हैं। बैंक ने कितने ग्राहकों का डेटा प्रभावित हुआ और कौन-सी जानकारी सामने आई, इसका पूरा विवरण साझा नहीं किया है।
डार्क वेब पर मिले 3,897 रिकॉर्ड में क्या था?
बैंक की ओर से शेयर बाजार को दी गई जानकारी के मुताबिक, 21 अक्टूबर को सामने आए मामले की शुरुआती जांच में डार्क वेब पर उपलब्ध लगभग 3.75 लाख रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। इनमें से 3,897 रिकॉर्ड में ग्राहकों की निजी जानकारी होने की पहचान की गई।
बैंक को 16 अक्टूबर को अपने थ्रेट इंटेलिजेंस सेवा प्रदाता, डिफेंस साइबर एजेंसी और भारतीय कंप्यूटर आपात प्रतिक्रिया दल (CERT-In) से डेटा उजागर होने की आशंका से जुड़े अलर्ट मिले थे। इसके बाद बैंक ने मामले की जांच शुरू की और प्रभावित ग्राहकों को सूचना देने की प्रक्रिया अपनाई।
ग्राहकों को ईमेल और WhatsApp से भेजा गया अलर्ट
SBI ने जिन ग्राहकों के डेटा से जुड़ी जानकारी की पहचान की, उन्हें ईमेल और WhatsApp के जरिए अलग-अलग सूचित किया है। यदि आपको बैंक के नाम से कोई संदेश मिलता है, तो उसकी सत्यता की जांच जरूर करें। किसी भी लिंक पर क्लिक करने या व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से पहले सुनिश्चित करें कि संदेश वास्तव में बैंक की ओर से भेजा गया है।
साइबर अपराधी कई बार बैंक के नाम और लोगो का इस्तेमाल करके नकली संदेश भेजते हैं। इसलिए केवल संदेश में SBI का नाम या लोगो देखकर उस पर भरोसा न करें।
SBI ग्राहकों को किन 5 बातों का ध्यान रखना चाहिए?
1. OTP किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी होने का दावा करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP मांगे, तो उसे साझा न करें।
2. PIN और पासवर्ड गोपनीय रखें: ATM PIN, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड और अन्य गोपनीय बैंकिंग विवरण किसी के साथ साझा न करें।
3. संदिग्ध लिंक से बचें: ईमेल, SMS या WhatsApp पर आए अनजान लिंक के जरिए बैंकिंग खाते में लॉगिन न करें।
4. अनजान कॉल पर भरोसा न करें: KYC अपडेट, खाता बंद होने या पैसे सुरक्षित रखने के नाम पर आने वाली कॉल की आधिकारिक माध्यम से पुष्टि करें।
5. संदिग्ध लेनदेन दिखे तो तुरंत शिकायत करें: बैंक के आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर भारत के साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
क्या ग्राहकों को अपना पासवर्ड बदलना चाहिए?
केवल इस खबर के आधार पर सभी ग्राहकों के पासवर्ड बदलना जरूरी होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। हालांकि, यदि बैंक ने आपको व्यक्तिगत रूप से अलर्ट भेजा है, तो उसमें दिए गए आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।यदि आपको किसी संदिग्ध गतिविधि का संदेह है, तो बैंक के आधिकारिक चैनल से संपर्क करके अपने खाते की सुरक्षा की जांच कराएं। किसी भी स्थिति में OTP, PIN या पासवर्ड साझा न करें। फिलहाल इस मामले में प्रभावित डेटा की पूरी प्रकृति और संभावित दुरुपयोग से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
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UPI पेमेंट पर MDR चार्ज दिवाली तक टला, ₹2,000 से ज्यादा के भुगतान पर लगना था 0.4% शुल्क

नई दिल्ली: यूपीआई (UPI) पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लगाने का फैसला फिलहाल टाल दिया गया है। यह नियम पहले 15 अक्टूबर से लागू होना था। प्रस्ताव के मुताबिक, दुकानदारों को ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर 0.4% शुल्क देना पड़ता। हालांकि, आम लोगों के बीच होने वाले यूपीआई ट्रांजैक्शन फ्री रहने की बात कही गई है।
त्योहारी सीजन के बाद लागू करने की तैयारी
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने त्योहारी सीजन को देखते हुए चार्ज लागू करने का फैसला आगे बढ़ाया है। जानकारी के मुताबिक, इसे दिवाली के तुरंत बाद लागू किया जा सकता है। हालांकि, नई तारीख का अभी ऐलान नहीं किया गया है।
दुकानदारों पर पड़ सकता है असर
प्रस्ताव लागू होने पर ₹2,000 से अधिक के पात्र यूपीआई भुगतान पर दुकानदारों को 0.4% शुल्क देना पड़ सकता है। आम लोगों के बीच होने वाले व्यक्तिगत यूपीआई ट्रांजैक्शन पर शुल्क नहीं लगने की बात कही गई है।
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GST Council 2026: 5 करोड़ से कम की टैक्स गड़बड़ी पर गिरफ्तारी नहीं, ₹10 हजार तक के मामलों में नोटिस भी नहीं

नई दिल्ली: GST काउंसिल ने कारोबारियों और टैक्सपेयर्स को राहत देते हुए GST कानून के तहत टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म करने और क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन की सीमा बढ़ाने की सिफारिश की है। गुरुवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई GST काउंसिल की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। काउंसिल ने GST मामलों में क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन की न्यूनतम सीमा ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने का फैसला किया है। साथ ही सामान्य पेनल्टी को ₹25 हजार से घटाकर ₹10 हजार करने की सिफारिश की गई है।
GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म
GST व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव गिरफ्तारी से जुड़ा है। काउंसिल ने GST अधिकारियों की टैक्सपेयर्स को गिरफ्तार करने की शक्ति खत्म करने की सिफारिश की है। साथ ही न्यूनतम सजा का प्रावधान भी हटाने का फैसला किया गया है। अब किसी मामले में जुर्माना, जेल या दोनों में से क्या सजा होगी, इसका फैसला न्यायिक प्रक्रिया के तहत अदालत करेगी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि टैक्स चोरी या गलत ITC लेने पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। टैक्स की रिकवरी, ब्याज और लागू पेनल्टी की कार्रवाई जारी रहेगी।
₹1 करोड़ की जगह ₹5 करोड़ हुई प्रॉसिक्यूशन लिमिट
अब तक ₹1 करोड़ की टैक्स गड़बड़ी पर क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन शुरू किया जा सकता था। काउंसिल ने इस सीमा को पांच गुना बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य छोटे और सामान्य टैक्स विवादों को आपराधिक कार्रवाई के दायरे से बाहर रखना और गंभीर टैक्स चोरी के मामलों पर फोकस करना है।
₹10 हजार तक के मामलों में नहीं दिया जाएगा नोटिस
GST काउंसिल ने ₹10 हजार या उससे कम की राशि वाले मामलों में शो-कॉज नोटिस जारी नहीं करने का फैसला किया है। पहले से लंबित ऐसे नोटिस वापस लेने का भी प्रावधान किया गया है। इससे छोटी रकम से जुड़े मामलों में कारोबारियों पर होने वाली कागजी और कानूनी कार्रवाई कम होगी।
सामान्य पेनल्टी ₹25 हजार से घटकर ₹10 हजार
जहां किसी विशेष उल्लंघन के लिए अलग पेनल्टी तय नहीं है, वहां लागू होने वाली जनरल पेनल्टी ₹25 हजार से घटाकर ₹10 हजार करने की सिफारिश की गई है। वहीं रिटर्न दाखिल करने में देरी, गलती या टैक्स भुगतान में देरी पर टैक्स रिकवरी, ब्याज और लागू अनुपातिक पेनल्टी की कार्रवाई जारी रहेगी।
सही बिल वाले खरीदारों के ITC पर कमेटी करेगी अध्ययन
इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC को लेकर भी काउंसिल ने अहम कदम उठाया है। यदि किसी खरीदार के पास सही इनवॉइस है, उसने सामान प्राप्त किया है और सप्लायर को भुगतान कर दिया है, लेकिन सप्लायर की गलती या धोखाधड़ी के कारण खरीदार का ITC प्रभावित होता है, तो ऐसे मामलों की सुरक्षा व्यवस्था पर Committee of Officers अध्ययन करेगी। कमेटी को अपनी रिपोर्ट तीन महीने में देने को कहा गया है। रिपोर्ट अगली GST काउंसिल बैठक में रखी जाएगी।
छोटे ई-कॉमर्स कारोबारियों को भी राहत
काउंसिल ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सामान बेचने वाले छोटे कारोबारियों के लिए GST अनुपालन आसान करने की सिफारिश की है। इसके तहत कुछ शर्तों के साथ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के वेयरहाउस को दूसरे राज्य में कारोबार के प्रमुख स्थान के रूप में इस्तेमाल करने की सुविधा दी जाएगी।
GST की दरों में कोई बदलाव नहीं
बैठक में मौजूदा GST टैक्स रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। इस बार काउंसिल का फोकस टैक्स दरों के बजाय GST व्यवस्था को सरल बनाने, अनुपालन का बोझ घटाने और टैक्स प्रशासन को आसान बनाने पर रहा।
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RBI ने बढ़ाई रेपो रेट: 5.25% से 5.50% हुई, आने वाले समय में महंगा हो सकता है लोन

मुंबई: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट में 0.25% यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। अब रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गई है। यह फरवरी 2023 के बाद RBI की पहली दर बढ़ोतरी है। RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार, 7 अक्टूबर को फैसलों की जानकारी दी। RBI ने महंगाई के बढ़ते दबाव को देखते हुए अपनी मौद्रिक नीति का रुख भी ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी चरणबद्ध सख्ती की ओर किया है।
EMI पर पड़ सकता है असर
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को अल्प अवधि के लिए कर्ज देता है। इसमें बढ़ोतरी होने पर बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, पर्सनल लोन और अन्य कर्ज की ब्याज दरों और EMI पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका असर हर बैंक और हर लोन पर एक जैसा या तुरंत होना जरूरी नहीं है।
महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2%
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, खाद्य कीमतों और मौसम से जुड़े जोखिमों को महंगाई के लिए चुनौती माना गया है।
GDP ग्रोथ का अनुमान भी बढ़ा
महंगाई की चिंता के बावजूद RBI ने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ग्रोथ आउटलुक बेहतर किया है। FY27 में GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया गया है। पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही थी, जो RBI के अनुमान से बेहतर थी। इसी मजबूत आर्थिक गतिविधि को आगे की ग्रोथ के लिए सकारात्मक संकेत माना गया है।
Q2 में 7.2% और Q3 में 6.9% ग्रोथ का अनुमान
RBI के अनुमान के मुताबिक FY27 की दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ 7.2% और तीसरी तिमाही में 6.9% रह सकती है। चौथी तिमाही के लिए ग्रोथ अनुमान 6.8% पर बरकरार रखा गया है। RBI के सामने एक तरफ मजबूत आर्थिक गतिविधि है, वहीं दूसरी तरफ महंगाई और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों से जुड़े जोखिम हैं। इसी संतुलन को देखते हुए केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर बढ़ाने का फैसला किया है।
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World Bank ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, FY27 में 7.1% की रफ्तार

नई दिल्ली: वर्ल्ड बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। अप्रैल में संस्था ने FY27 में भारत की आर्थिक वृद्धि 6.6% रहने का अनुमान लगाया था। नया अनुमान मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को जारी ताजा India Development Update में सामने आया है।
वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। FY27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में GDP ग्रोथ 7.8% रही, जिसने पूरे वित्त वर्ष के अनुमान को ऊपर करने में अहम भूमिका निभाई।
गांव-शहरों में मांग बढ़ी, एक्सपोर्ट ने भी दिया सहारा
वर्ल्ड बैंक के अनुसार भारत की ग्रोथ को सबसे ज्यादा निजी खपत और निवेश से मजबूती मिली है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अच्छी कृषि गतिविधि, ग्रामीण आय सहायता, खाद्य सब्सिडी और कम महंगाई से सहारा मिला। वहीं, शहरी खपत को इनकम टैक्स में राहत और GST कटौती से बढ़ावा मिला। एक्सपोर्ट ने भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसे FY27 के ग्रोथ आउटलुक के लिए सकारात्मक संकेत माना गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और पावर सेक्टर में तेज ग्रोथ
सप्लाई साइड पर इंडस्ट्रियल एक्टिविटी ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। पहली तिमाही में इंफ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स की ग्रोथ 7.2% रही, जबकि एक साल पहले यह 6.1% थी। गर्मी के दौरान बिजली की मांग बढ़ने से इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर में 9.3% की ग्रोथ दर्ज की गई। वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, मजबूत औद्योगिक गतिविधि कृषि क्षेत्र में कमजोरी की भरपाई करने में मदद कर सकती है।
कृषि क्षेत्र पर बारिश की कमी का असर
वर्ल्ड बैंक ने कृषि क्षेत्र को लेकर कुछ चिंता भी जताई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश में कमी रही, हालांकि जुलाई के बाद हुई बारिश ने स्थिति में सुधार किया है। इसके बावजूद पूरे मानसून सीजन की कमी से कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर कुछ असर पड़ने की आशंका है।
FY26 में 7.8% रही भारत की ग्रोथ
वर्ल्ड बैंक के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था FY26 में 7.8% की दर से बढ़ी, जबकि FY25 में यह वृद्धि 7.2% रही थी। मजबूत निवेश, निजी खपत और अनुकूल वित्तीय एवं नीतिगत परिस्थितियों ने वैश्विक व्यापार संबंधी चुनौतियों के असर को कम करने में मदद की। हालांकि, वर्ल्ड बैंक ने आगे की तिमाहियों में ग्रोथ की रफ्तार कुछ कम होने की संभावना जताई है। वैश्विक तेल कीमतें, El Niño और शेयर बाजार में संभावित उतार-चढ़ाव जैसे जोखिम भारत की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बने रह सकते हैं।
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