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अंग्रेजों के समय से चली आ रही व्यवस्था खत्म, अब 24 घंटे हो पाएगा ‘Post-mortem’

नई दिल्ली: मोदी सरकार ने कई सारी ऐसी व्यवस्थाओं को बदला और बंद किया है, जो वक्त के साथ प्रासंगिक नहीं रह गई थीं। अब मृत शरीरों के पोस्टमॉर्टम को लेकर चली आ रही एक पुरानी प्रथा को समाप्त कर दिया गया है। दरअसल अंग्रेजों के समय से ये व्यवस्था चली आ रही थी, कि सूर्यास्त के बाद Post Mortem नहीं किया जाएगा। लेकिन अब सरकार ने नया आदेश जारी कर कहा है कि जिन अस्पतालों में रात को भी Post Mortem की व्यवस्था है वहां पर सूर्यास्त के बाद भी इसे किया जा सकेगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोमवार को इसके बारे में जानकारी दी है। सरकार ने कहा है कि इस कदम से अंगदान का लाभ उठाने वाले लोगों को सहायता मिलेगी। किसी भी संदेह को दूर करने के लिए पूरी रात सभी पोस्टमॉर्टम के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी और यह कानूनी उद्देश्यों के वास्ते भविष्य के संदर्भ के लिए संरक्षित रखी जाएगी।
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Tripura DGP: त्रिपुरा के DGP अनुराग धनखड़ मृत मिले, शुरुआती जांच में आत्महत्या की आशंका

Tripura DGP: त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ सोमवार सुबह पुलिस मुख्यालय में अचेत अवस्था में मिले। अधिकारियों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस की शुरुआती जांच में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही होगी। फिलहाल उनका शव अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में रखा गया है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम घटनास्थल की जांच कर रही है।
1994 बैच के IPS अधिकारी थे
अनुराग धनखड़ 1994 बैच के IPS अधिकारी थे। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बिहारीपुर गांव के रहने वाले धनखड़ ने अपने सेवा काल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों की जांच में भी अहम भूमिका निभाई थी। परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। उनके बड़े भाई भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त हैं, जबकि छोटे भाई खेती-किसानी करते हैं।
25 साल पहले आखिरी बार गांव आए थे
गांव के लोगों के अनुसार, अनुराग धनखड़ करीब 25 साल पहले आखिरी बार अपने पैतृक गांव आए थे। गांव में उनका पुश्तैनी मकान है, लेकिन वर्तमान में वहां परिवार का कोई सदस्य नहीं रहता।
गांव के स्कूल से शुरू हुई पढ़ाई
अनुराग धनखड़ ने पांचवीं तक की पढ़ाई गांव के प्राथमिक विद्यालय से की। इसके बाद उन्होंने सरूरपुर इंटर कॉलेज से 12वीं और बड़ौत डिग्री कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: राहुल-खड़गे ने PM मोदी को लिखा पत्र, ट्रस्ट के खातों की स्वतंत्र जांच और सार्वजनिक ऑडिट की मांग

नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा गबन मामले को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। दोनों नेताओं ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट के खातों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि श्रद्धालु यह जान सकें कि चढ़ावे की राशि का उपयोग किस तरह किया गया। शनिवार को लिखा गया यह पत्र रविवार को सार्वजनिक हुआ। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जांच में जो भी जिम्मेदार पाए जाएं, उनके खिलाफ जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
PM से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग
पत्र में कहा गया है कि संसद में राम मंदिर ट्रस्ट के गठन की घोषणा प्रधानमंत्री ने की थी और ट्रस्ट के सदस्यों की नियुक्ति सरकार द्वारा की गई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के कई सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और उनसे जुड़े संगठनों से जुड़े रहे हैं। ऐसे में सरकार को पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
आरोपियों की पुलिस रिमांड पूरी
उधर, चढ़ावा गबन मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और उसके भतीजे मनीष की पुलिस कस्टडी रविवार को पूरी हो गई। दोनों से करीब 39 घंटे तक पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, टिन्नू मंदिर के दानपात्रों की देखरेख करता था, जबकि मनीष चढ़ावे की गिनती से जुड़ा था। जांच के दौरान टिन्नू के घर से 1 लाख रुपये और मनीष के घर से 2 लाख रुपये नकद बरामद किए गए थे। इससे पहले पुलिस इस मामले में छह अन्य आरोपियों से भी पूछताछ कर चुकी है।
ट्रस्ट ने क्या कहा
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि अब तक 3,264 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ है, जिसमें से 2,370 करोड़ रुपये मंदिर निर्माण और अन्य कार्यों पर खर्च किए जा चुके हैं। ट्रस्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक श्रद्धालुओं से 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा मिला। इसमें 391 करोड़ रुपये मंदिर संचालन और अन्य खर्चों पर उपयोग किए गए, जबकि शेष राशि बैंक खातों में सुरक्षित है।
ट्रस्ट ने यह भी कहा है कि मामले की कानूनी जांच जारी है और जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। ट्रस्ट का दावा है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और उपहारों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित है तथा हर वर्ष स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा उसका ऑडिट कराया जाता है।
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New Delhi: 21 दिन के अनशन के बाद अस्पताल ले जाए गए सोनम वांगचुक, हाईकोर्ट ने दिए थे नियमित मेडिकल जांच के निर्देश

Sonam Wangchuk: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह पुलिस सफदरजंग अस्पताल ले गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया, जिससे मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई।
वांगचुक के अस्पताल ले जाए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने वांगचुक के साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें जबरन अस्पताल ले गई। साथ ही उन्होंने अपने साथ मारपीट का भी आरोप लगाया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग की।
पेपर लीक मामले को लेकर कर रहे हैं अनशन
सोनम वांगचुक पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। लंबे अनशन के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। बताया जा रहा है कि उनका वजन करीब 9.5 किलोग्राम कम हो चुका है।
हाईकोर्ट ने दिए थे मेडिकल जांच के निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वांगचुक की रोजाना मेडिकल जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाए। इसी आदेश के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई
वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद अस्पताल परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अस्पताल में आम लोगों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है और मीडिया को भी परिसर के बाहर ही रोका जा रहा है।
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Hydrogen Train: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू, PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी, दुनिया का पांचवां देश बना भारत

Hydrogen Train: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच शुरू हुई इस सेवा के साथ भारत हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन संचालित करने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया। इससे पहले जर्मनी, फ्रांस, स्वीडन और चीन में इस तकनीक की ट्रेनें संचालित हो रही हैं।
ट्रेन को रवाना करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन है। इसे भारतीय इंजीनियरों ने डिजाइन किया है और इसका निर्माण भी देश की कंपनी ने किया है।
14 स्टेशनों के बीच चलेगी ट्रेन
10 कोच वाली यह हाइड्रोजन ट्रेन जींद-सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। रास्ते में यह 14 स्टेशनों पर रुकेगी। ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 75 किलोमीटर प्रति घंटा होगी और पूरा सफर लगभग 2 घंटे में पूरा होगा। यात्रियों के लिए किराया 5 से 25 रुपए के बीच निर्धारित किया गया है। पहले दिन ट्रेन सुबह 11:22 बजे जींद से रवाना हुई और दोपहर 1:22 बजे सोनीपत पहुंची।
स्वच्छ और आधुनिक रेलवे की ओर बड़ा कदम
रेलवे के लिए हाइड्रोजन तकनीक को भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा माना जा रहा है। इससे डीजल पर निर्भरता कम होगी और कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में रेलवे को और अधिक पर्यावरण-अनुकूल तथा ऊर्जा दक्ष बनाना है।
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IRCTC: आईआरसीटीसी की नई वेबसाइट लॉन्च, टिकट बुकिंग होगी पहले से तेज, स्मार्ट कैप्चा और फास्ट चेकआउट समेत कई नए फीचर्स

IRCTC: भारतीय रेलवे की ऑनलाइन टिकट बुकिंग वेबसाइट IRCTC का नया बीटा वर्जन लॉन्च कर दिया गया है। रेलवे का कहना है कि वेबसाइट को पहले से अधिक तेज, सरल और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है। फिलहाल इसे बीटा वर्जन के रूप में जारी किया गया है, ताकि यात्रियों के फीडबैक के आधार पर अंतिम बदलाव किए जा सकें।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले महीने जयपुर में इसकी घोषणा की थी। तय कार्यक्रम के अनुसार नया पोर्टल 15 जुलाई 2026 की रात 9 बजे से लाइव हो गया।
यात्रियों को मिलेंगे ये बड़े बदलाव
नई वेबसाइट में टिकट बुकिंग प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए कई तकनीकी सुधार किए गए हैं।
स्मार्ट कैप्चा: लॉगिन और टिकट बुकिंग के दौरान पहले की तुलना में आसान कैप्चा सिस्टम होगा। अनावश्यक पॉप-अप और ध्यान भटकाने वाले ग्राफिक्स भी हटा दिए गए हैं।
एक स्क्रीन पर सभी सीटों की जानकारी: अब अलग-अलग क्लास में सीट उपलब्धता देखने के लिए बार-बार सर्च नहीं करना होगा। सभी श्रेणियों की उपलब्ध सीटें एक साथ दिखाई देंगी।
फास्ट चेकआउट: टिकट बुकिंग के स्टेप्स कम किए गए हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया पहले से तेज होगी।
रिपीट बुकिंग आसान: नियमित यात्रा करने वाले यात्रियों की जानकारी सेव रहेगी। अगली बार टिकट बुक करते समय बार-बार विवरण भरने की जरूरत नहीं होगी।
बीटा वर्जन क्यों लॉन्च किया गया?
रेलवे के मुताबिक, बीटा वर्जन जारी करने का उद्देश्य यात्रियों से सुझाव और फीडबैक लेना है। यूजर्स वेबसाइट का उपयोग करने के बाद अपने अनुभव साझा कर सकेंगे। इन्हीं सुझावों के आधार पर अंतिम संस्करण में जरूरी बदलाव किए जाएंगे।
रोजाना 14.5 लाख टिकट बुकिंग का दबाव
IRCTC की वेबसाइट वर्ष 2002 में शुरू हुई थी। वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म पर रोजाना औसतन 14.5 लाख ट्रेन टिकट बुक किए जाते हैं। बढ़ते ट्रैफिक और तकनीकी जरूरतों को देखते हुए वेबसाइट के पूरे सिस्टम को अपग्रेड किया गया है।
सिर्फ डिजाइन नहीं, बैकएंड भी बदलेगा
रेलवे केवल वेबसाइट का लुक नहीं बदल रहा, बल्कि टिकट बुकिंग के बैकएंड सिस्टम यानी पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि अपग्रेडेशन के दौरान टिकट बुकिंग सेवा बिना बाधा जारी रखनी थी।
ऐसे करें नई वेबसाइट का इस्तेमाल
यात्री IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर नए बीटा पोर्टल का इस्तेमाल कर सकते हैं। मौजूदा वेबसाइट के होमपेज पर भी नए बीटा वर्जन का लिंक दिया गया है। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे वेबसाइट का उपयोग करने के बाद फीडबैक जरूर दें, ताकि अंतिम संस्करण को और बेहतर बनाया जा सके।
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