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अंग्रेजों के समय से चली आ रही व्यवस्था खत्म, अब 24 घंटे हो पाएगा ‘Post-mortem’

नई दिल्ली: मोदी सरकार ने कई सारी ऐसी व्यवस्थाओं को बदला और बंद किया है, जो वक्त के साथ प्रासंगिक नहीं रह गई थीं। अब मृत शरीरों के पोस्टमॉर्टम को लेकर चली आ रही एक पुरानी प्रथा को समाप्त कर दिया गया है। दरअसल अंग्रेजों के समय से ये व्यवस्था चली आ रही थी, कि सूर्यास्त के बाद Post Mortem नहीं किया जाएगा। लेकिन अब सरकार ने नया आदेश जारी कर कहा है कि जिन अस्पतालों में रात को भी Post Mortem की व्यवस्था है वहां पर सूर्यास्त के बाद भी इसे किया जा सकेगा।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोमवार को इसके बारे में जानकारी दी है। सरकार ने कहा है कि इस कदम से अंगदान का लाभ उठाने वाले लोगों को सहायता मिलेगी। किसी भी संदेह को दूर करने के लिए पूरी रात सभी पोस्टमॉर्टम के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी और यह कानूनी उद्देश्यों के वास्ते भविष्य के संदर्भ के लिए संरक्षित रखी जाएगी।
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Vande Mataram: ‘वंदे मातरम्’ को भी मिलेगी कानूनी सुरक्षा? राज्यसभा में संशोधन विधेयक पेश, बाधा डालने पर 3 साल तक की सजा का प्रस्ताव

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान की तरह कानूनी संरक्षण देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने शुक्रवार को राज्यसभा में ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया। यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ के गायन में बाधा डालना, उसे रोकना या कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न करना कानूनन अपराध माना जाएगा।
क्या है प्रस्तावित बदलाव?
विधेयक में 1971 के राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव है। फिलहाल इस कानून के तहत केवल राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के अपमान पर कार्रवाई का प्रावधान है। संशोधन के बाद राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी इसी कानून के दायरे में लाया जाएगा।
क्या होगी सजा?
प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ के गायन में बाधा डालता है या उसे रोकने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। ऐसे मामलों में अधिकतम तीन वर्ष की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। हालांकि यह प्रावधान तभी लागू होगा, जब विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त कर कानून बन जाएगा।
सरकार ने क्या कहा?
सरकार का कहना है कि ‘वंदे मातरम्’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय अस्मिता का महत्वपूर्ण प्रतीक रहा है। इसलिए इसके सम्मान की रक्षा के लिए इसे भी राष्ट्रीय गान की तरह कानूनी संरक्षण दिया जाना आवश्यक है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल यह केवल एक विधेयक है। अब इस पर संसद में चर्चा होगी। दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून के रूप में लागू होगा।
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Sonam Wangchuk: 27 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म की भूख हड़ताल, PM मोदी बोले- पेपर लीक पर बनेगा सख्त कानून

Sonam Wangchuk: NEET पेपर लीक के विरोध में 27 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात अपना अनशन समाप्त कर दिया। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे। इस दौरान जेपी नड्डा ने उन्हें जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया।
शुक्रवार सुबह जारी वीडियो संदेश में वांगचुक ने बताया कि पिछले दो दिनों से सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी। उनकी तीन प्रमुख मांगों पर सरकार ने लिखित आश्वासन दिया, जिसके बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का फैसला लिया।
सरकार ने क्या आश्वासन दिया?
वांगचुक ने बताया कि सरकार ने तीन प्रमुख बिंदुओं पर भरोसा दिया है-
- प्रदर्शनकारी छात्रों पर कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
- पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर संसद में चर्चा होगी।
- आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को उचित मुआवजा देने पर विचार किया जाएगा।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर सरकार की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला।
‘छात्रों पर कार्रवाई रुकना ज्यादा जरूरी था’
वांगचुक ने कहा कि उनके लिए सबसे अहम मुद्दा छात्रों के खिलाफ कार्रवाई रुकवाना था। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी अनिवार्य शर्त नहीं था।
CJP बोली- आंदोलन जारी रहेगा
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने वांगचुक के अनशन खत्म करने का स्वागत किया, लेकिन कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी रहेगा।
PM मोदी का ऐलान- पेपर लीक पर बनेगा सख्त कानून
इधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात छात्रों के नाम वीडियो संदेश जारी कर कहा कि सरकार पेपर लीक के खिलाफ कड़े प्रावधान वाला नया कानून लाएगी। उन्होंने कहा कि संबंधित मसौदे पर शुक्रवार को कैबिनेट में चर्चा होगी। मंजूरी मिलने के बाद इसे अगले सप्ताह संसद में पेश किया जाएगा और जल्द पारित कराने का प्रयास किया जाएगा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट का भी प्रावधान
प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का भी प्रस्ताव तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई महीनों में पेपर लीक के आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। साथ ही 22 लाख छात्रों की परीक्षा दोबारा कराकर समय पर परिणाम भी घोषित किया गया।
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Paper Leak: पेपर लीक मामलों के लिए बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट: PM मोदी बोले- दोषियों को मिलेगी जल्द सजा, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पेपर लीक मामलों को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के आरोपियों के खिलाफ मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पिछले 34 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी 26 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उनका इलाज गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में चल रहा है।
‘युवाओं का भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता’
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसे अपराधों के दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पहली बार पेपर लीक मामलों के लिए अलग फास्ट ट्रैक कोर्ट
देश में अब तक पेपर लीक मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में होती रही है, जिसके कारण मामलों के निपटारे में कई साल लग जाते थे। अब पहली बार इन मामलों के लिए अलग से फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला लिया गया है, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके।
2000 में हुई थी फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत
भारत में फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत वर्ष 2000 में 11वें वित्त आयोग की सिफारिश पर हुई थी। आयोग ने देशभर में 1,734 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने के लिए विशेष फंड की अनुशंसा की थी।
POCSO और रेप मामलों में बेहतर रहा प्रदर्शन
केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच रेप और POCSO मामलों के लिए गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 3.06 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया। इन अदालतों में मामलों के निपटारे की दर 96.28 प्रतिशत रही। हालांकि, लगातार नए मामले दर्ज होने के कारण 2025 के अंत तक 2.45 लाख से अधिक मामले लंबित रहे, जबकि 2024 के अंत में यह संख्या 2.04 लाख थी।
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Sikkim: टनल हादसे में 25 में से 20 मजदूरों के शव बरामद, 5 तक पहुंचना अब भी चुनौती; मीथेन गैस से रेस्क्यू में मुश्किल

Sikkim Tunnel Accident: सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की टनल में फंसे मजदूरों को निकालने के लिए चलाए जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन में मंगलवार देर रात तक 20 शव बरामद कर लिए गए। हालांकि, बाकी पांच मजदूरों तक राहत दल अब भी नहीं पहुंच पाया है। मीथेन गैस और मलबे के कारण बचाव अभियान लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
हादसा एनएचपीसी के तीस्ता स्टेज-6 हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की आदित-3 टनल में हुआ। यह परियोजना नामची जिले के समरडुंग-झोलुंगय क्षेत्र में निर्माणाधीन है और इसका निर्माण पटेल इंजीनियरिंग कंपनी कर रही है।
मीथेन गैस बनी सबसे बड़ी बाधा
रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती टनल में भरी मीथेन गैस है। गैस के कारण कई बचावकर्मी बेहोश हो चुके हैं, जिससे अभियान की रफ्तार प्रभावित हुई है।
मजदूर टनल के प्रवेश द्वार से करीब 1.5 किलोमीटर अंदर अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए थे। हादसा टनल के फेस-4बी हिस्से में हुआ, जहां छत से मलबा गिरने के साथ मीथेन गैस भर गई। टनल का बाकी हिस्सा सुरक्षित बताया गया है।
40 मिनट में खत्म हो जाता है ऑक्सीजन सिलेंडर
बचाव अभियान में आठ-आठ सदस्यों की टीमें बारी-बारी से टनल के भीतर भेजी जा रही हैं। एक राहतकर्मी का ऑक्सीजन सिलेंडर करीब 40 मिनट ही चलता है। सिलेंडर खत्म होने से पहले टीम को बाहर लौटना पड़ता है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन धीमा हो रहा है।
ब्लास्ट-प्रूफ ब्लोअर और रोबोट से हटाया जा रहा मलबा
टनल के भीतर ताजा हवा पहुंचाने के लिए ब्लास्ट-प्रूफ ब्लोअर्स और वेंटिलेशन पाइप लगाए गए हैं, ताकि मीथेन गैस का असर कम किया जा सके। वहीं, दोबारा मलबा गिरने से रोकने के लिए शॉटक्रीट और रॉक-बोल्टिंग की जा रही है। मलबा हटाने के लिए छोटे लोडर और रोबोटिक मशीनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
5-5 किलोमीटर लंबी हैं दोनों टनल
जानकारी के अनुसार, तीस्ता स्टेज-6 परियोजना में पानी के प्रवाह के लिए 5-5 किलोमीटर लंबी दो समानांतर टनल बनाई जा रही हैं। हादसा इनमें से एक टनल के निर्माण के दौरान हुआ।
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CJP Protest: जंतर-मंतर पर फिर जुटे हजारों लोग, संसद मार्च हिंसा में 10 FIR; बंगाल से बुलाए गए 2 हजार CRPF जवान

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन बुधवार को 33वें दिन भी जारी रहा। सुबह से ही हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचे। इनमें 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लोग भी शामिल हैं।
उधर, संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने 10 एफआईआर दर्ज की हैं। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों पर हमला, पथराव, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
संसद मार्च हिंसा पर 10 FIR दर्ज
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, संसद मार्ग थाने में 4, कनॉट प्लेस थाने में 3 और मंदिर मार्ग, बाराखंभा रोड तथा कर्तव्य पथ थानों में एक-एक एफआईआर दर्ज की गई है। एफआईआर में प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों पर जानलेवा हमला करने, पथराव, तोड़फोड़ और कानून-व्यवस्था बाधित करने के आरोप शामिल हैं।
सोनम वांगचुक से मेदांता में मिले जेपी नड्डा
सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मंगलवार देर रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचे और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की। वांगचुक 28 जून से अनशन पर हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देश के बाद मंगलवार को उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया।
दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा, बंगाल से मंगाई गईं CRPF की 20 कंपनियां
दिल्ली में संसद के मानसून सत्र और जारी प्रदर्शनों को देखते हुए केंद्र सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर पश्चिम बंगाल से CRPF की 20 अतिरिक्त कंपनियां दिल्ली भेजी जा रही हैं। एक कंपनी में करीब 100 जवान होते हैं। इस तरह लगभग 2 हजार जवानों को कोलकाता से एयरलिफ्ट कर दिल्ली लाया जा रहा है।
पहले से तैनात हैं CRPF और RAF की 30 कंपनियां
इससे पहले भी दिल्ली पुलिस की सहायता के लिए CRPF और RAF की करीब 30 कंपनियां राजधानी में तैनात की जा चुकी हैं। ये बल 20 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र और CJP के प्रदर्शन के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं।
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