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MP Cabinet: पीएम आवास योजना 2.0 को स्वीकृति, एमपी सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2025 लागू करने की स्वीकृति

Bhopal: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के प्रदेश में क्रियान्वयन करने की स्वीकृति दी गई। योजना अनुसार प्रदेश के आर्थिक रूप से कमजोर, निम्न तथा मध्यम आय वर्ग के पात्र हितग्राही परिवारों को योजना के चार घटकों के माध्यम से लाभान्वित करने के लिए 5 वर्षों की योजना अवधि में 10 लाख आवासों का निर्माण किया जायेगा। इसमें 50 हजार करोड़ रुपए व्यय होंगे। बेनेफिसयरी लेड कंस्ट्रक्शन (बी.एल.सी.) घटक अंतर्गत ईडब्ल्यूएस वर्ग के पात्र हितग्राही को अपनी स्वयं की भूमि पर स्वयं आवास का निर्माण करने के लिए अनुदान प्रदान किया जायेगा।
एफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनशिप (ए.एच.पी.) घटक अंतर्गत ईडब्ल्यूएस वर्ग के पात्र हितग्राहियों को नगरीय निकायों, राज्य की अन्य निर्माण एजेंसियों तथा निजी बिल्डर/डेवलपर के द्वारा आवासों का निर्माण कर प्रदान किया जायेगा। इस घटक अंतर्गत निजी डेवलपर द्वारा क्रियान्वित व्हाइट लिस्टेड/ओपन मार्केट परियोजनाओं में हितग्राहियों द्वारा आवास क्रय करने के लिए रिडीमेबल हाऊसिंग वाउचर (आरएचवी) प्रदान किए जाने की स्वीकृति दी गयी है। एफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनशिप (ए.आर.एच.) घटक अंतर्गत कामकाजी महिलाओं / औद्योगिक श्रमिकों / शहरी प्रवासियों बेघर निराश्रितों /छात्रों एवं अन्य पात्र हितग्राहियों के लिए किराये के आवास बनाकर उपलब्ध किया जायेगा। इंटरेस्ट सब्सिडी स्कीम (आई.एस.एस.) घटक अंतर्गत ईडब्ल्यूएस, एलआईजी एवं एमआईजी वर्ग के पात्र परिवारों को आवास ऋण पर ब्याज अनुदान बैंक/एचएफसी के माध्यम से प्रदान किया जायेगा
योजना अनुसार कल्याणी महिलाओं, सिंगल वूमेन, दिव्यांगों, वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडर्स, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों तथा समाज के अन्य कमजोर एवं वंचित वर्गों के व्यक्तियों को वरीयता दी जाएगी। साथ ही सफाई कर्मियों, पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत चिन्हित स्ट्रीट वेंडरों, पीएम विश्वकर्मा योजना के विभिन्न कारीगरों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों, तथा मलिन बस्ती/चॉल के निवासियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बी.एल.सी. घटक के लिए अनुदान राशि 2.50 लाख प्रति आवास तथा ए.एच.पी. घटक की परियोजनाओं के लिए अनुदान राशि 2.50 लाख प्रति आवास की स्वीकृति प्रदान की गई। 10 लाख आवासों के निर्माण के लिए अनुमानित राशि 50,000 करोड़ रूपये का निवेश संभावित है। इसमें केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार से अनुमानित अनुदान राशि 23,025 करोड़ रूपये प्रदान किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना अंतर्गत पात्र हितग्राही परिवारों के लिए हर मौसम अनुकूल आवासों के निर्माण के साथ साथ समुचित अधोसंरचना जैसे सड़क, जल प्रदाय, मल-जल निकासी, पार्क तथा सामाजिक अधोसंरचना जैसे आंगनवाड़ी, प्राथमिक शाला एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आदि विकसित किये जायेंगे। शासन सभी पात्र हितग्राही परिवारों को आवास प्रदान किया जाना सुनिश्चित करेगा।
शहरी अवास योजना में बड़े शहरों को मलिन बस्ती मुक्त करने की दिशा में भूमि को संसाधन के रूप में उपयोग करते हुए पीपीपी मॉडल पर परियोजनाओं के क्रियान्वयन की स्वीकृति दी गई। ईडब्ल्यूएस वर्ग के हितग्राहियों का अंशदान कम करने के लिए पूर्वानुसार क्रॉस सब्सिडी मॉडल को क्रियान्वित करने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग की श्रेणी के आवासों के निर्माण के साथ निम्न आय वर्ग तथा मध्यम आय वर्ग के लिए भी मिश्रित रूप से आवासों, व्यवसायिक इकाइयों का निर्माण तथा भूखंड विकसित करने की स्वीकृति दी गई। एएचपी-लोक परियोजनाओं में हितग्राही अंश की व्यवस्था के लिए हितग्राही, नगरीय निकाय तथा बैंक/एचएफसी के मध्य पूर्वानुसार त्रिपक्षीय अनुबंध के माध्यम से ऋण उपलब्ध किये जाने एवं भूमिहीन पात्र हितग्राही परिवारों को आवासीय भूमि का पट्टा प्रचलित प्रावधान अनुसार उपलब्ध किये जाने की भी स्वीकृति दी गई, जिससे भूमिहीन गरीबों को भी बीएलसी घटक का लाभ प्राप्त हो सके।
सेमी कंडक्टर नीति से 14,400 रोजगार होंगे सृजित
मंत्रि-परिषद द्वारा “मध्यप्रदेश सेमी कंडक्टर नीति 2025” लागू किये जाने की स्वीकृति दी गयी। उत्कृष्टता केंद्रों के लिए सकारात्मक भूमिका में सहयोगी, ‘स्किल इंडिया जैसी पहल और वैश्विक तकनीकी उन्नत कंपनियों के साथ साझेदारी भारतीय कार्य बल को चिप डिजाइन, निर्माण, और सिस्टम एकीकरण में उन्नत कौशल तथा इस क्षेत्र में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित कर आर्थिक विकास को बढ़ावा देने राज्य को इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर निर्माण केंद्र के रूप में विकसित किये जाने की आवश्यताओं के दृष्टिगत राज्य शासन द्वारा “मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2025” जारी करने का निर्णय लिया गया है।
कैबिनेट में हुए निर्णय अनुसार प्रदेश में निवेश के प्रति निर्मित अनुकूल वातारण को बढ़ावा मिलेगा। मध्यप्रदेश में एक स्थायी इको-सिस्टम का विकास होगा। उत्कृष्टता केंद्र के माध्यम से कौशल विकसित होगा। प्रदेश में सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में निवेश आकर्षित होगा। इससे प्रदेश में रोजगार की संभावनाएँ भी बढ़ेगी। इस नीति से राज्य को उच्च तकनीक से जुड़े कुशल कार्यबल का विकास करने का अवसर मिलेगा। राज्य को दीर्घकालिक औद्योगिक विकास की दिशा में अग्रसर करने के लिए सेमीकंडक्टर विनिर्माण क्षेत्र सार्थक होगा। वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनने का अवसर प्राप्त होंगे। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। घरेलू और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति में सुदृढ़ होगी। उद्योगों और स्टार्टअप्स को सहयोग मिलेगा नवाचार को बढ़ावा देकर सेमी कंडक्टर डिज़ाइन, आर एंड डी और विनिर्माण क्षेत्रों को सहायता मिलेगी। निर्यात वृद्धि से राजस्व में राज्य की वैश्विक बाजार में पकड़ मजबूत होगी।
देश में ‘मेक इन इंडिया और ‘डिजिटल इंडिया’ की दिशा में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सेमी कंडक्टर डिजाइन में निवेश के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाया गया है। भारत की युवा और तकनीकी रूप से कुशल जनसंख्या अनुसंधान और विनिर्माण के लिए एक विशाल प्रतिभा पूल प्रदान करती है। इसके अलावा, अमेरिका, जापान, और ताइवान जैसे देशो के साथ भारत के सहयोग ने सेमीकंडक्टर विनिर्माण में इसकी स्थिति को और मजबूत किया है। भारत का तेजी से बढ़ता स्टार्ट-अप इको-सिस्टम, विशेष रूप से एआई, आईओटी और रोबोटिक्स में, सेमीकंडक्टर अनुप्रयोगों में नवाचार को प्रोत्साहित कर रहा है। अकादमिक और उद्योग के बीच सहयोग स्वदेशी डिजाइन और विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो रही है और आत्मनिर्भरता बढ़ रही है।
“मध्यप्रदेश ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति-2025” की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद द्वारा राज्य को ड्रोन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बनाने” मध्यप्रदेश ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति-2025″ की स्वीकृति दी गयी हैं। स्वीकृति अनुसार मध्यप्रदेश ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति-2025″ के लाभ मिलेंगे। आर्थिक विकास ड्रोन नीति से राज्य में निवेश आकर्षित होगा, जिससे आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और राज्य की समृद्धि में वृद्धि होगी। रोजगार सृजन ड्रोन उद्योग में नई नौकरियों का सृजन होगा, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। तकनीकी प्रगति ड्रोन प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे राज्य की तकनीकी क्षमताओं में वृद्धि होगी। कृषि सुधार ड्रोन का उपयोग सटीक कृषि, फसल निगरानी और सिंचाई प्रबंधन में किया जाएगा, जिससे कृषि उत्पादन में सुधार होगा। आपदा प्रबंधन में ड्रोन का उपयोग तेजी से प्रतिक्रिया और राहत कार्यों में मदद करेगा। मानव सुरक्षा एवं सार्वजनिक सुरक्षा ड्रोन का उपयोग निगरानी, भीड़ नियंत्रण और अपराध जांच में किया जाएगा, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा में सुधार होगा। बुनियादी ढांचों पुलों, सड़कों और अन्य बुनियादी ढांचे के निरीक्षण में किया जाएगा, जिससे रख-रखाव और सुरक्षा में सुधार होगा। पर्यावरण संरक्षणः ड्रोन का उपयोग वन्यजीव निगरानी, प्रदूषण निगरानी और व्रन प्रबंधन में किया जाएगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी। शिक्षा और कौशल विकास ड्रोन प्रौद्योगिकी को शैक्षिक कार्यक्रमों में शामिल किया जाएगा, जिससे छात्रों और पेशेवरों को नई तकनीकों का ज्ञान और कौशल मिलेगा। पर्यटन संवर्धन ड्रोन का उपयोग राज्य की सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक सुंदरता को प्रदर्शित करने के लिए किया जाएगा, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रकार, नई ड्रोन नीति से मध्यप्रदेश को बहुआयामी लाभ प्राप्त होंगे, जिससे राज्य की समग्र प्रगति और विकास को अप्रत्याशित बढ़ावा मिलेगा।
नवाचार, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए ड्रोन प्रौद्योगिकी का उपयोग कृषि, बुनियादी ढांचे, आपदा प्रबंधन, सार्वजनिक सुरक्षा और अन्य क्षेत्रों में किया जाकर सेवा वितरण में सुधार एवं ड्रोन निर्माण और प्रौद्योगिकी का एक प्रमुख केंद्र बनाने तथा ड्रोन क्षेत्र में प्रदेश में निवेश आकर्षित करने के लिए मध्यप्रदेश ड्रोन संवर्धन एवं उपयोग नीति-2025″ जारी किये जाने की स्वीकृति दी गयी है।
हुकुमचंद मिल (परिसमापन के अंतर्गत) की देनदारियों के निपटान एवं नवीन परियोजना क्रियान्वयन की मंजूरी
मंत्रि-परिषद द्वारा हुकुमचंद मिल, इंदौर की 17.52 हेक्टर भूमि पर परियोजना के सफल क्रियान्वयन एवं अन्य दायित्वों के लिए नगर पालिक निगम, इंदौर तथा म.प्र. गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल एवं प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास के मध्य त्रिपक्षिय अनुबंध हस्ताक्षरित किया गया। इंदौर शहर में इस परियोजना से शहर के लिए शापिंग मॉल, मार्केट, ऑफिस स्पेस, रहवासी क्षेत्र एवं बगीचे आदि सुविधाएँ उपलब्ध होगी। योजना से नगर पालिक निगम, इंदौर को भी संपत्ति कर एवं अन्य राजस्व की प्राप्ति होगी, जिसका उपयोग शहर की अधोसंरचनाओं के लिए होगा। योजना में पर्यावरण संरक्षण एवं नए वृक्षारोपण का विशेष ध्यान दिया जाएगा।
5100 करोड़ रूपये के निवेश से लगभग 10 हजार रोजगार सृजन हो सकेगा
इंदौर शहर की प्रचलित नगर विकास योजना 2021 एवं राज्य शासन द्वारा स्वीकृत किये जा रहे अतिरिक्त 0.5 एफ.ए.आर. के अनुसार कुल 2.08 लाख वर्ग मीटर आवासीय बिल्ट-अप एरिया निर्मित होगा, जिसमें लगभग 1400 करोड़ रूपये का निवेश आयेंगा। इसी प्रकार वाणिज्यिक क्षेत्र में लगभग 3 लाख वर्ग मीटर बिल्ट-अप एरिया निर्मित होगा, जिसमें लगभग रूपये, 3700 करोड़ निवेश आयेंगा। साथ ही, इस परियोजना में लगभग रूपये, 2332 करोड़ के निर्माण कार्य किये जायेगें, जिससे शहर की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा एवं नए रोजगार सृजित होंगे। परियोजना से प्रत्यक्ष जी.एस.टी. से राजस्व लगभग 400 करोड़ रूपये, निर्मित क्षेत्रफल के विक्रय से 650 करोड़ रूपये स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क एवं अन्य कर सहित लगभग 1200 करोड़ रूपये राजस्व शासन को प्राप्त होने का अनुमान है। योजना से निर्माण के दौरान लगभग 83 लाख मानव-दिवस एवं योजना उपरांत नियमित रूप से लगभग 8000 से 10,000 रोजगार सृजित होंगे। परियोजना में ग्रीन बिल्डिंग, जीरो डिस्चार्ज, ऊर्जा दक्षता, पर्यावरण एवं जल संरक्षण के विभिन्न मापदण्डों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
शासकीय पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालयों में अध्ययनरत इंटर्नशिप छात्रों को स्टायपेण्ड राशि में वृद्धि करने की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद द्वारा जबलपुर, महू एवं रीवा के शासकीय पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालयों में वर्तमान में इंटर्नशिप छात्रों को स्टायपेण्ड राशि में वृद्धि करने की स्वीकृति दी गयी है। स्वीकृति अनुसार मध्यप्रदेश पशुपालन एवं डेयरी विभाग अंतर्गत पशु पालन विभाग अंतर्गत नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के अंतर्गत शासकीय पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालयों में अध्ययनरत् स्नातक छात्रों के लिए इंटर्नशिप स्टायपेण्ड में 7600 (रूपये 3000 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अंश रूपये 4600 राज्य अंश) को बढ़ाकर 10000 (रुपये 3000 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अंश रूपये 7000 राज्य अंश) किये जाने के लिए राज्य अंश राशि रूपये 4600 में बढ़ोत्तरी कर राज्य अंश राशि रूपये 7000 किये जाने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय से भविष्य में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा इंटर्नशिप स्टायपेण्ड में वृद्धि किये जाने पर इंटर्नशिप स्टायपेण्ड में देय राज्यांश को तार्किक रूप से युक्तियुक्तकरण करने के लिये निर्णय मंत्री-परिषद से लिया जायेगा।
इंटर्नशिप स्टायपेण्ड राशि रूपये 7600 से बढ़ाकर 10 हजार रूपये की स्वीकृति
पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 के तहत नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय 3 नवम्बर 2009 को स्थापित किया गया है। मध्यप्रदेश में तीन डिग्री कॉलेज जबलपुर, महू एवं रीवा में संचालित है। इन महाविद्यालयों में कुल 300 छात्रों के प्रवेश की क्षमता है। वर्तमान में इंटर्नशिप छात्रों को स्टायपेण्ड राशि रूपये 7600 (रुपये 3000 भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अंश+ रूपये 4600 राज्य अंश) प्रदाय किया जा रहा है।
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Ujjain: मुहर्रम जुलूस में हवा में वैन लटका कर विस्फोट मामला, ATS जांच में शामिल; 3 आरोपी गिरफ्तार

Ujjain: उज्जैन जिले के बड़नगर में मुहर्रम जुलूस के दौरान क्रेन से हवा में लटकाई गई वैन में विस्फोट करने का मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। बड़नगर पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार कर वैन और क्रेन जब्त कर ली है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय पुलिस के साथ एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) भी जांच में शामिल हो गई है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वैन में करीब 8 हजार रुपये के पटाखे रखकर विस्फोट किया गया था। हालांकि, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस दावे की भी जांच कर रही हैं।
40 फीट ऊंचाई पर लटकाई गई थी वैन
घटना 23 जून की रात की है। बड़नगर के अडान मोहल्ले से निकाले गए मुहर्रम जुलूस के दौरान एक टाटा मैजिक वाहन को क्रेन की मदद से करीब 40 फीट ऊंचाई पर हवा में लटकाया गया। वाहन की छत पर दो युवक लाल झंडे लहरा रहे थे। कुछ देर बाद उसी वैन में विस्फोट कर दिया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वैन पर ‘ले, फिर आ गए’ लिखा हुआ था। जुलूस में शामिल कुछ लोगों के हाथों में मौजूद तख्तियों पर भी यही संदेश लिखा दिखाई दिया।
तीन बड़े सवालों के जवाब तलाश रही जांच एजेंसियां
- पुलिस और ATS फिलहाल तीन प्रमुख बिंदुओं पर जांच कर रही हैं-
- विस्फोट के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था?
- वाहन पर ‘ले, फिर आ गए’ लिखने का क्या आशय था?
- विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री क्या थी और उसे कहां से लाया गया था?
तीन आरोपी गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने शोएब पिता गब्बू, जाहिद पिता भूरा खां और तपसील उर्फ तस्लीम को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा क्रेन मालिक के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने वैन और क्रेन दोनों को जब्त कर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है।
संवेदनशील क्षेत्र होने से बढ़ाई गई निगरानी
उज्जैन, नागदा, उन्हेल और महिदपुर पहले से संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं। इसी कारण मामले की जांच में ATS को भी शामिल किया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही विस्फोट के कारणों और अन्य तथ्यों पर अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।
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Monsoon 2026: 9 दिन की देरी के बाद मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री, 33 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट

Madhya Pradesh Rain Alert: लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बुधवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने मध्य प्रदेश में दस्तक दे दी। मौसम विभाग ने प्रदेश में मानसून की आधिकारिक एंट्री की घोषणा कर दी है। इस बार मानसून सामान्य तिथि से 9 दिन की देरी से पहुंचा है। प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है।
मौसम विभाग के अनुसार मानसून बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी के रास्ते मध्य प्रदेश में प्रवेश कर चुका है। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि अगले तीन से चार दिनों में मानसून प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर लेगा, जिससे बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी।
33 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट
मानसून की एंट्री के साथ मौसम विभाग ने प्रदेश के 33 जिलों में तेज आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की है। अगले कुछ घंटों में हरदा, बैतूल, खंडवा (ओंकारेश्वर), छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बुरहानपुर में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना जताई गई है।
इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, खरगोन, शाजापुर, अशोकनगर, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, सिवनी, रीवा, मऊगंज और सिंगरौली सहित कई जिलों में भी मौसम का मिजाज बदला रहेगा।
24 घंटे में 39 जिलों में बारिश
पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 39 जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई। इंदौर, उज्जैन, भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, ग्वालियर, मुरैना, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, सागर, सतना और अनूपपुर समेत कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। बालाघाट जिले में ओलावृष्टि भी दर्ज की गई, जिससे मौसम अचानक ठंडा हो गया।
जबलपुर समेत 4 जिलों में लू का अलर्ट
मानसून की एंट्री के बावजूद प्रदेश के कुछ हिस्सों में गर्मी का असर अभी भी बना हुआ है। मौसम विभाग ने जबलपुर, मंडला, दमोह और उमरिया में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, भोपाल, बैतूल, हरदा, देवास, खंडवा, बुरहानपुर, इंदौर और झाबुआ सहित 26 जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है।
गर्मी और बारिश दोनों का दौर
मौसम विभाग के अनुसार नीमच, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, गुना, शिवपुरी, छतरपुर, पन्ना, रीवा, सीधी और सिंगरौली जैसे जिलों में अभी भी गर्मी का असर बना रह सकता है। हालांकि अगले कुछ दिनों में मानसून के सक्रिय होने के साथ तापमान में गिरावट और व्यापक वर्षा की संभावना है, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलेगी।
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Ujjain: महाकाल मंदिर को रिकॉर्ड 78 करोड़ का दान, कुल आय पहुंची 142 करोड़; महाकाल लोक के बाद तीन गुना बढ़े श्रद्धालु

Mahakal Mandir Donation: महाकाल लोक के निर्माण के बाद बाबा महाकाल के दरबार में श्रद्धालुओं की संख्या के साथ दान का प्रवाह भी लगातार बढ़ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति को रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की आय हुई है। इसमें केवल दान मद से 78 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, जो पिछले छह वर्षों में सबसे अधिक है। यह राशि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 27 करोड़ रुपए अधिक है। मंदिर समिति के अनुसार, श्रद्धालुओं की बढ़ती आस्था और महाकाल लोक के आकर्षण के चलते मंदिर की आय में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।
दान पेटियों से आए 62 करोड़ रुपए
मंदिर समिति के आंकड़ों के अनुसार दान से प्राप्त 78 करोड़ रुपए में सबसे बड़ा योगदान दान पेटियों का रहा।
- दान पेटियों से – 62 करोड़ रुपए
- नगद काउंटर से – 5.50 करोड़ रुपए
- ऑनलाइन दान – 3.60 करोड़ रुपए
- अन्नक्षेत्र से – 3.38 करोड़ रुपए
- गुप्त दान – 4.65 करोड़ रुपए
- मनी ऑर्डर से -1.23 लाख रुपए
इसके अलावा श्रद्धालुओं ने सोने-चांदी के करोड़ों रुपए मूल्य के आभूषण भी बाबा महाकाल को अर्पित किए।
लड्डू प्रसादी से 65 करोड़ की आय
मंदिर समिति को लड्डू प्रसादी की बिक्री से भी बड़ी आय प्राप्त हुई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 65 करोड़ रुपए की आय केवल लड्डू प्रसादी की बिक्री से हुई।
महाकाल लोक के बाद तीन गुना बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
11 अक्टूबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महाकाल लोक का लोकार्पण किए जाने के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पहले जहां प्रतिदिन 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर डेढ़ लाख से दो लाख श्रद्धालु प्रतिदिन तक पहुंच गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का सीधा असर मंदिर की आय पर भी दिखाई दे रहा है।
दान की गणना में कड़े सुरक्षा इंतजाम
राम मंदिर दान विवाद के बीच महाकाल मंदिर प्रशासन ने दान प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी जानकारी दी है।मंदिर के सहायक प्रशासक आशीष पलवड़िया के अनुसार मंदिर परिसर में कुल 95 दान पेटियां स्थापित हैं। इन पेटियों को हर सप्ताह सुरक्षा व्यवस्था के बीच गणना कक्ष में पहुंचाया जाता है। दान पेटियां अधिकारियों की मौजूदगी में खोली जाती हैं और पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी कराई जाती है। गणना कार्य सीसीटीवी निगरानी में संपन्न होता है।
विशेष बात यह है कि दान की गणना करने वाले कर्मचारियों को बिना जेब वाले या सिली हुई जेब वाले कपड़े पहनने के बाद ही गणना कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी जाती है, ताकि किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।
बढ़ी आय के साथ बढ़ा खर्च भी
महाकाल लोक विस्तार के बाद मंदिर परिसर का क्षेत्रफल 2.82 हेक्टेयर से बढ़कर 47 हेक्टेयर हो गया है। मंदिर समिति के 306 कर्मचारी वर्तमान में विभिन्न व्यवस्थाओं का संचालन कर रहे हैं। कर्मचारियों के वेतन, सुरक्षा, साफ-सफाई, रखरखाव, निर्माण कार्य, अन्नक्षेत्र, धर्मशाला, गोशाला, वैदिक शोध संस्थान और सांस्कृतिक आयोजनों पर भी बड़ी राशि खर्च की जा रही है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए सुविधाओं और व्यवस्थाओं का विस्तार लगातार किया जा रहा है।
मंदिर समिति के अनुसार, महाकाल लोक के विस्तार और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण मंदिर का मासिक खर्च भी दोगुना हो गया है। पहले जहां मंदिर का मासिक व्यय करीब 2.5 करोड़ रुपए था, वहीं अब यह बढ़कर 5 करोड़ रुपए से अधिक प्रतिमाह पहुंच गया है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए सुविधाओं और व्यवस्थाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
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Ujjain: महाकाल भस्म आरती के नियम बदले, अब 3 महीने में एक बार ही मोबाइल नंबर से मिलेगी अनुमति

Ujjain: भगवान महाकाल की विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में शामिल होने के लिए अब श्रद्धालुओं को नए नियमों का पालन करना होगा। महाकाल मंदिर प्रबंधन ने भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिए एक मोबाइल नंबर से तीन महीने में केवल एक बार ही अनुमति देने का नियम प्रभावी कर दिया है।
नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी मोबाइल नंबर का उपयोग तीन माह की अवधि के भीतर दोबारा भस्म आरती की अनुमति प्राप्त करने के लिए नहीं किया जा सकेगा। यह नियम प्रोटोकॉल के माध्यम से अनुमति प्राप्त करने वाले श्रद्धालुओं पर भी लागू होगा।
शिकायतों के बाद फिर लागू हुई व्यवस्था
महाकाल मंदिर में भस्म आरती के लिए अनुमति को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप थे कि कुछ लोग एक ही मोबाइल नंबर और पहचान का उपयोग कर बार-बार अनुमति प्राप्त कर रहे हैं, जिससे आम श्रद्धालुओं को अवसर नहीं मिल पा रहा था।
इसी को देखते हुए वर्ष 2024 में तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने एक आधार कार्ड और एक मोबाइल नंबर से तीन माह के भीतर दोबारा अनुमति नहीं देने का निर्णय लिया था। कुछ समय तक यह व्यवस्था लागू रही, लेकिन बाद में इसका प्रभाव कम हो गया। अब मंदिर समिति ने एक बार फिर इस नियम को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है।
पहले 15 दिन पहले होती थी ऑनलाइन बुकिंग
करीब दो वर्ष पहले तक श्रद्धालु भस्म आरती के लिए 15 दिन पहले ऑनलाइन बुकिंग करा सकते थे। उस समय मोबाइल नंबर या आधार कार्ड के उपयोग को लेकर कोई विशेष प्रतिबंध नहीं था। बढ़ती भीड़ और अनुमति प्रक्रिया को लेकर शिकायतों के बाद मंदिर प्रशासन ने चरणबद्ध तरीके से नियमों में बदलाव किए।
प्रोटोकॉल से आने वालों पर भी लागू होगा नियम
नई व्यवस्था के तहत अब वे श्रद्धालु भी प्रभावित होंगे जो प्रोटोकॉल या विशेष अनुशंसा के आधार पर हर माह भस्म आरती में शामिल होते थे। ऐसे लोगों को भी अब एक बार अनुमति मिलने के बाद अगले तीन माह तक इंतजार करना होगा।
मंदिर प्रशासक ने क्या कहा
महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह व्यवस्था पहले से लागू थी, जिसे अब और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग रोकने से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं को भस्म आरती में शामिल होने का अवसर मिलेगा और अनुमति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
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Bhopal: MP में UCC लागू करने की तैयारी तेज, मानसून सत्र में आएगा प्रस्ताव, CM मोहन यादव बोले- महाकाल चाहेंगे तो इसी सत्र में होगा पारित

Bhopal: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि आगामी मानसून सत्र में सरकार UCC का प्रस्ताव विधानसभा में पेश करेगी। उन्होंने कहा कि महाकाल की कृपा रही तो इसी सत्र में यह प्रस्ताव पारित भी हो जाएगा। प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। ऐसे में उत्तराखंड और गुजरात के बाद मध्य प्रदेश भी समान नागरिक संहिता लागू करने वाले राज्यों की सूची में शामिल हो सकता है।
CM मोहन यादव का बड़ा बयान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार मानसून सत्र में UCC प्रस्ताव लाने की तैयारी कर चुकी है। उन्होंने विश्वास जताया कि विधानसभा में प्रस्ताव पारित कराने में भी सफलता मिलेगी। सरकार का लक्ष्य इस वर्ष दीपावली तक प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करना बताया जा रहा है।
UCC ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनी हाई-लेवल कमेटी
मध्य प्रदेश सरकार ने 27 अप्रैल 2026 को UCC की व्यवहारिकता और मसौदा तैयार करने के लिए छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह, विधि विशेषज्ञ अनूप नायर, शिक्षाविद् गोपाल शर्मा और सामाजिक कार्यकर्ता बुद्धपाल सिंह सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।
प्रदेशभर से लिए गए सुझाव
समिति ने राज्य के विभिन्न हिस्सों का दौरा कर अलग-अलग वर्गों से संवाद किया। आम नागरिकों से सुझाव लेने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया गया था। UCC को लेकर सुझाव और प्रस्ताव जमा करने की प्रक्रिया 15 मई से 15 जून तक चली। सरकार के अनुसार मिले सुझावों के आधार पर मसौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। समिति को गठन के 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और ड्राफ्ट बिल सरकार को सौंपना है।
क्या है UCC?
समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है, चाहे उनका धर्म या समुदाय कोई भी हो।फिलहाल देश में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं।


















