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Iran Israel War: ईरान के तेल ठिकानों पर इजराइल के हमले तेज, 30 फ्यूल टैंक और कई डिपो निशाने पर; ट्रम्प बोले- ईरान लड़ने लायक नहीं बचेगा

Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। Israel और Iran के बीच संघर्ष के नौवें दिन इजराइल ने ईरान के तेल भंडार से जुड़े ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं। इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में करीब 30 फ्यूल टैंकों और कई तेल डिपो को निशाना बनाया गया है। इन हमलों से ईरान के ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
ट्रम्प बोले- ईरान को पूरी तरह हार माननी होगी
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान पूरी तरह हार मान ले। ट्रम्प ने कहा कि या तो ईरान खुद आत्मसमर्पण करे या फिर उसकी सैन्य ताकत इतनी कमजोर कर दी जाए कि वह आगे लड़ने की स्थिति में न रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि लगातार दबाव के कारण ईरान अब पहले जैसा प्रभावशाली नहीं रहा।
फारस की खाड़ी को लेकर बढ़ा तनाव
दूसरी ओर ईरानी सेना ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी जहाज फारस की खाड़ी में आते हैं तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी नौसेना द्वारा ऑयल टैंकरों की सुरक्षा के लिए जहाज भेजने की संभावना जताई जा रही है। ये टैंकर आमतौर पर Strait of Hormuz से होकर गुजरते हैं, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है।
जंग से भारी नुकसान
संघर्ष के दौरान अब तक ईरान में कई नागरिक इलाकों को भी नुकसान पहुंचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक हजारों घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचा है, जबकि कई स्कूल और मेडिकल सेंटर भी हमलों की चपेट में आए हैं। इस युद्ध में अब तक बड़ी संख्या में लोगों की मौत और हजारों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
पड़ोसी देशों से माफी का दावा
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि ईरान ने कुछ पड़ोसी देशों से माफी मांगी है और वादा किया है कि उनकी जमीन से ईरान पर हमला न होने तक वह उन पर हमला नहीं करेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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US Iran Ceasefire: पाकिस्तान की अपील पर ट्रम्प ने बढ़ाया सीजफायर, नाकेबंदी रहेगी जारी

US Iran Ceasefire: डोनाल्ड ट्रम्प ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका, पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ जारी युद्धविराम (सीजफायर) को आगे बढ़ा रहा है। हालांकि, उन्होंने इसकी अवधि को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। ट्रम्प के मुताबिक, इस समय ईरान में नेतृत्व और सरकार के भीतर एकजुटता की कमी है। ऐसे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने उनसे अपील की कि ईरान को एक साझा प्रस्ताव तैयार करने के लिए समय दिया जाए।
हमले रोके, लेकिन दबाव जारी
ट्रम्प ने कहा कि इस अपील को स्वीकार करते हुए उन्होंने अमेरिकी सेना को फिलहाल हमले रोकने के आदेश दिए हैं, लेकिन सेना को पूरी तरह सतर्क और तैयार रहने को कहा गया है। साथ ही, उन्होंने साफ किया कि ईरान पर समुद्री नाकेबंदी (ब्लॉकेड) जारी रहेगी और दबाव बनाए रखते हुए बातचीत को आगे बढ़ाया जाएगा।
कब तक चलेगा सीजफायर?
ट्रम्प के अनुसार, सीजफायर तब तक जारी रहेगा जब तक ईरान अपनी ओर से ठोस और एकजुट प्रस्ताव नहीं देता
और दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी नहीं हो जाती। उन्होंने संकेत दिया कि बातचीत का नतीजा कुछ भी हो सकता है, लेकिन फिलहाल कूटनीतिक रास्ता खुला रखा गया है।
वैश्विक नजरें टिकीं
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच यह फैसला मध्य-पूर्व और वैश्विक राजनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका भी इस पूरे घटनाक्रम में चर्चा का केंद्र बनी हुई है।
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US Iran Talks: अमेरिका-ईरान वार्ता पर संकट, ईरान ने इस्लामाबाद जाने से किया इनकार, ट्रम्प बोले- आखिरी मौका

US Iran Talks: अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर मंगलवार को इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की बातचीत पर संकट खड़ा हो गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने प्रतिनिधि इस बैठक में नहीं भेजेगा। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जब तक देश पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी, तब तक कोई डेलिगेशन पाकिस्तान नहीं भेजा जाएगा।
ट्रम्प की सख्त चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को “आखिरी मौका” देते हुए कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो उसके इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े हमले किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी डेलिगेशन सोमवार को बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचेगा।
कौन-कौन पहुंचेगा पाकिस्तान
ट्रम्प ने बताया कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस्लामाबाद पहुंचेंगे। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बार वार्ता में शामिल नहीं होंगे। इससे पहले 11-12 अप्रैल की बातचीत में वेंस ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स
- भारतीय जहाजों पर फायरिंग: ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में 2 भारतीय जहाजों पर फायरिंग की। 14 जहाज रोके गए, जिनमें से 13 लौट गए। भारत ने विरोध दर्ज कराया।
- होर्मुज फिर बंद: ईरान ने सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगाते हुए स्ट्रेट को फिर बंद कर दिया।
- अमेरिका ने तेल जारी किया: सप्लाई संकट के बीच अमेरिका ने 2.6 करोड़ बैरल तेल इमरजेंसी रिजर्व से जारी किया।
- नई बातचीत की संभावना: सोमवार को पाकिस्तान में वार्ता हो सकती है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं।
- नाकेबंदी जारी: ट्रम्प ने कहा- डील होने तक ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी।
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US Navy Action: होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नाकाबंदी शुरू, ट्रम्प की सख्त चेतावनी, ईरानी जहाज दिखे तो कार्रवाई

US Navy Action: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री नाकाबंदी शुरू कर दी है। यह फैसला आज शाम 7:30 बजे (अमेरिकी समयानुसार सुबह 10 बजे) से लागू हो गया। ट्रम्प ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई भी ईरान का जहाज अमेरिकी नाकाबंदी के पास आता है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्रवाई उसी तरीके से की जाएगी, जैसे समुद्र में ड्रग तस्करों के जहाजों को रोका जाता है- तेजी और सख्ती के साथ।
हर जहाज की होगी जांच
इस फैसले के तहत होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले हर जहाज को रोका जाएगा और उसकी जांच की जाएगी। खासतौर पर उन जहाजों पर नजर रखी जाएगी, जिन्होंने ईरान को टोल दिया है। ट्रम्प पहले ही साफ कर चुके हैं कि जो जहाज ईरान को “गैरकानूनी टोल” देंगे, उन्हें सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा। इसे ईरान की आर्थिक ताकत कमजोर करने की रणनीति माना जा रहा है।
भारत को फिलहाल राहत
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने कहा है कि अब तक होर्मुज से गुजरने वाले भारतीय जहाजों से कोई टोल नहीं लिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि ईरान भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में सहयोग करता रहेगा।
क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट?
दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। वैश्विक सप्लाई चेन के लिए बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। यहां तनाव बढ़ने से तेल कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है।
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Iran conflict: ट्रम्प की चीन को कड़ी चेतावनी: ईरान की मदद की तो 50% टैरिफ, होर्मुज पर भी सख्ती

Iran conflict: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह ईरान को सैन्य मदद करता हुआ पाया गया, तो अमेरिका उस पर 50% तक भारी टैरिफ लगाएगा। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और किसी भी तरह की मदद को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि स्थिति बिगड़ने पर अमेरिका सख्त आर्थिक और सैन्य कदम उठा सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ेगी सैन्य मौजूदगी
ट्रम्प ने बताया कि ब्रिटेन समेत कुछ अन्य देश होर्मुज स्ट्रेट में माइन हटाने वाले नौसैनिक जहाज भेजेंगे। यह कदम क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना जरूरत पड़ने पर स्ट्रेट में नाकाबंदी कर सकती है और उन जहाजों को रोक सकती है जो ईरान को टोल देते हैं।
“अमेरिका पूरी तरह तैयार”
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका “Locked and Loaded” है, यानी पूरी तरह तैयार है। उन्होंने दोहराया कि सही समय आने पर अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स
- चीन को धमकी: ईरान की मदद पर 50% तक टैरिफ लगाने की चेतावनी
- होर्मुज पर सख्ती: अमेरिकी नौसेना नाकाबंदी कर सकती है
- मस्जिद विवाद: इजराइली मंत्री के अल अक्सा दौरे पर जॉर्डन का विरोध
- ईरान का दावा: स्ट्रेट पर कंट्रोल, जहाजों से टोल वसूली की बात
- गिरफ्तारी: ईरान में जासूसी के आरोप में 50 लोग पकड़े गए
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Iran ceasefire: ईरान ने पाकिस्तान में सीजफायर वार्ता से किया इनकार, लेबनान में शांति के बाद ही बातचीत

Iran ceasefire: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ईरान ने पाकिस्तान में प्रस्तावित सीजफायर वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ईरानी मीडिया फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने साफ कहा है कि जब तक लेबनान में सीजफायर लागू नहीं होता, वह किसी भी बातचीत में हिस्सा नहीं लेगा। इससे पहले वॉल स्ट्रीट जर्नल ने दावा किया था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच चुका है। रिपोर्ट में मोहम्मद बाकर गालिबाफ और अब्बास अराघची के शामिल होने की बात कही गई थी। हालांकि, फार्स न्यूज एजेंसी ने इस खबर को पूरी तरह फर्जी बताया।
7 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच 2 हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बनी थी। दोनों देशों के नेताओं की बैठक इस्लामाबाद में प्रस्तावित थी, जिसमें अमेरिकी डेलिगेशन के पहुंचने की खबर है।
किन मुद्दों पर होनी थी बातचीत
1. न्यूक्लियर प्रोग्राम
अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपनी परमाणु गतिविधियों को सीमित करे।
2. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर मतभेद है।
- ईरान: नियंत्रण और टोल की मांग
- अमेरिका: बिना रुकावट फ्री नेविगेशन
3. बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम
अमेरिका ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलों पर रोक चाहता है।
4. सैंक्शंस हटाना
ईरान की मांग है कि सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए जाएं और फंसी संपत्तियां वापस दी जाएं।
क्या संकेत मिलते हैं
ईरान के इस फैसले से साफ है कि क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर उसकी प्राथमिकता अभी लेबनान है। इससे अमेरिका-ईरान वार्ता पर असर पड़ सकता है और मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने की आशंका है।


















