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Chhattisgarh: प्रदेश के 25 लाख किसानों के खातों में पहुंची पीएम किसान निधि, 2,500 किमी ग्रामीण सड़कों की मिली सौगात

Raipur: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धमतरी में आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में 2,225 करोड़ रुपए की ग्रामीण सड़क परियोजनाओं, मखाना बोर्ड का विस्तार, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत किसानों को प्रत्यक्ष भुगतान और अनेक विकासपरक घोषणाओं का औपचारिक शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा कोयंबटूर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त का देशव्यापी वितरण और छत्तीसगढ़ के 25 लाख किसानों के खातों में 500 करोड़ रुपये का सीधा हस्तांतरण इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहा। हज़ारों किसानों और ग्रामीण प्रतिनिधियों की उपस्थिति में सम्पन्न इस समारोह ने राज्य के विकास पथ को नई दिशा प्रदान की।
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के धमतरी में राज्यस्तरीय समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, राज्य के कृषि मंत्री रामविचार नेताम, मंत्री दयालदास बघेल, टंकराम वर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana) के अंतर्गत 2,225 करोड़ रुपये की स्वीकृत ग्रामीण सड़क परियोजनाओं का दस्तावेज प्रस्तुत किया। इन परियोजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ के लगभग 780 गाँव पहली बार पक्की सड़क से जुड़ेंगे और 2,500 किलोमीटर से अधिक नई ग्रामीण सड़कें निर्मित की जाएँगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता ने देश में बुनियादी ढांचे के विस्तार को नई दिशा दी है और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण आर्थिक गतिविधियों को सशक्त बनाता है।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने घोषणा की कि केंद्र सरकार द्वारा स्थापित किए गए राष्ट्रीय मखाना विकास बोर्ड में अब छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से प्रदेश के किसानों को मखाना उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और राष्ट्रीय बाज़ार से जुड़ने का बड़ा अवसर प्राप्त होगा।
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए प्रमुख राष्ट्रीय निर्णयों का उल्लेख किया, जिनमें अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का शांतिपूर्ण निष्कासन, महिला आरक्षण कानून का पारित होना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने वाले निर्णय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी कदम भारत की विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐतिहासिक मील के पत्थर हैं।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर निर्णायक प्रहार को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे समन्वित अभियान से राज्य में नक्सली हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है और अब नक्सलवाद “अंतिम चरण” में पहुँच चुका है। उन्होंने इसे प्रदेश के विकास, निवेश और ग्रामीण शांति की दिशा में बड़ा कदम बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने छत्तीसगढ़ की वर्तमान राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य अब पुनः विकास की मुख्यधारा में तेजी से लौट रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के कारण कई केंद्रीय योजनाएं प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकीं, किन्तु अब लाभ सीधे पात्र किसानों, ग्रामीणों और महिलाओं तक पहुंच रहा है।
कार्यक्रम में हजारों किसानों एवं ग्रामीण नागरिकों की सहभागिता रही। इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र, कृषि किट, उपकरण और अन्य सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम स्थल पर कृषि तकनीक, ग्रामीण अवसंरचना, महिला स्व-सहायता समूहों, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना और आत्मनिर्भर भारत से संबंधित प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे किसानों और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक देखा।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा स्थापित इस राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख किया और कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते समय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों की आय-वृद्धि, कृषि तकनीकी विस्तार, सिंचाई क्षमता, जैविक खेती और मिलेट मिशन जैसे विषयों पर केंद्रित महत्वपूर्ण वक्तव्य दिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि अन्नदाताओं का सम्मान और समृद्धि हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की किस्त जारी होने से राज्य के 24 लाख 70 हजार 640 किसानों को सीधा लाभ प्राप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि 494 करोड़ रुपये की राशि किसानों, वनपट्टाधारी हितग्राहियों एवं विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के परिवारों के बैंक खातों में अंतरित की गई है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार ने इस योजना में 2 लाख 75 हजार नए किसानों को पंजीकृत कर लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई है।
कृषक उन्नति योजना का विस्तार
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार ने कृषक उन्नति योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसमें दलहन, तिलहन और मक्का फसलों को शामिल किया है। उन्होंने कहा कि धान फसल में लाभ ले चुके किसान यदि इन फसलों की खेती करेंगे तो उन्हें भी योजना का पूरा लाभ प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि योजना का लाभ रेगहा , बटाई, लीज तथा डूबान क्षेत्र के किसानों को भी दिया जा रहा है, जिससे कृषि आधारित आजीविका को सीधा बल मिल रहा है।
मुख्यमंत्री साय ने यह भी बताया कि पिछले 22 महीनों में लगभग सवा लाख करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों के खातों में अंतरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के दो सप्ताह के भीतर 13 लाख किसानों को 3,716 करोड़ रुपये बोनस के रूप में दिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा मिलेट मिशन को दिए गए बढ़ाए गए महत्व से छत्तीसगढ़ के परंपरागत कोदो-कुटकी, रागी उत्पादकों को बड़ा लाभ मिला है। उन्होंने जशपुर जिले में स्वसहायता समूहों द्वारा बनाए जा रहे ‘‘जशप्योर’’ ब्रांड के उत्पादों का उदाहरण देते हुए कहा कि ‘‘महुआ लड्डू, कोदो-कुटकी आधारित उत्पाद पूरे देश में लोकप्रिय हो रहे हैं।’’
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैविक खेती की अपार संभावनाओं वाला प्रदेश है, क्योंकि जनजातीय क्षेत्रों में रासायनिक खादों का न्यूनतम उपयोग हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2015 से लंबित 115 सिंचाई परियोजनाओं के लिए 2,800 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे लाखों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलेगी।उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (GST) में कटौती से ट्रैक्टरों और कृषि मशीनरी की खरीदी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि ‘‘कई व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल यह बताते हैं कि GST कटौती के बाद किसानों की खरीद क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।’’ कार्यक्रम का समापन किसानों के प्रति आभार और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण एवं कृषि विकास की निरंतरता बनाए रखने के संकल्प के साथ हुआ।
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Raipur: छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों को 104.54 करोड़ की सौगात, महापौर, अध्यक्ष और पार्षद निधि जारी

Raipur: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के नगरीय निकायों को विकास कार्यों के लिए बड़ी वित्तीय सहायता जारी की है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नगर निगमों की महापौर निधि, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों की अध्यक्ष निधि तथा तीनों प्रकार के निकायों की पार्षद निधि के रूप में 104 करोड़ 54 लाख 25 हजार रुपए जारी किए हैं। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद यह राशि संबंधित निकायों को जारी की गई।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सभी नगरीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि इन निधियों का प्रभावी और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि शहरी क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार हो और आम नागरिकों को सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सके।
विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नगर निगमों की महापौर निधि तथा नगर पालिकाओं एवं नगर पंचायतों की अध्यक्ष निधि की 50 प्रतिशत प्रथम किस्त के रूप में कुल 31 करोड़ 16 लाख 25 हजार रुपए जारी किए हैं। इसके अलावा तीनों प्रकार के नगरीय निकायों के लिए पार्षद निधि की प्रथम किस्त के रूप में 73 करोड़ 38 लाख रुपए भी जारी किए गए हैं।
किस निकाय को कितनी राशि मिली
- 14 नगर निगमों के लिए महापौर निधि : 10 करोड़ 12 लाख 50 हजार रुपए
- 57 नगर पालिकाओं के लिए अध्यक्ष निधि : 11 करोड़ 6 लाख 25 हजार रुपए
- 121 नगर पंचायतों के लिए अध्यक्ष निधि : 9 करोड़ 97 लाख 50 हजार रुपए
पार्षद निधि की प्रथम किस्त के तहत-
- नगर निगमों को : 21 करोड़ 84 लाख रुपए
- नगर पालिकाओं को : 24 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपए
- नगर पंचायतों को : 27 करोड़ 19 लाख 50 हजार रुपए
राज्य सरकार का कहना है कि इस राशि का उपयोग नगरीय निकायों में सड़क, नाली, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था सहित अन्य मूलभूत विकास कार्यों पर किया जाएगा, जिससे शहरी क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं को और बेहतर बनाया जा सके।
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Chhattisgarh: किसानों को बड़ी राहत, अब एकमुश्त मिलेगा यूरिया; 80% वितरण सीमा खत्म

रायपुर: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर खरीफ सीजन 2026 में किसानों को बड़ी राहत मिली है। राज्य सरकार ने जांजगीर-चांपा जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से यूरिया वितरण पर लागू 80 प्रतिशत की सीमा समाप्त कर दी है। अब किसानों को खरीफ 2025 की तरह उनकी पात्रता के अनुसार एकमुश्त यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा।
उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने बताया कि खरीफ 2026 में किसानों को खरीफ 2025 में प्राप्त यूरिया की मात्रा के अनुरूप उर्वरक वितरित किया जाएगा। यदि संबंधित सहकारी समिति में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा तो किसानों को पूरा यूरिया एक साथ दिया जाएगा। यदि किसी समिति में स्टॉक कम होगा तो शेष मात्रा उपलब्ध होते ही किसानों को वितरित कर दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस निर्णय से किसानों को बार-बार सहकारी समितियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। समय पर यूरिया मिलने से खरीफ सीजन की बुवाई और अन्य कृषि कार्य बिना किसी बाधा के पूरे किए जा सकेंगे।
राज्य सरकार का कहना है कि किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है। आवश्यक उर्वरक समय पर मिलने से खेती की लागत और प्रबंधन आसान होगा तथा फसल उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
सरकार का मानना है कि यह निर्णय किसानों की सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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Chhattisgarh: नैनो डीएपी और नैनो यूरिया पर सरकार का जोर, कम लागत में बढ़ेगा उत्पादन; किसानों को किया जा रहा जागरूक

Raipur: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल खेती के लिए नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग के प्रति जागरूक कर रही है। सरकार का उद्देश्य किसानों की उत्पादन लागत कम करना, फसल की गुणवत्ता बढ़ाना और वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना है।
कृषि विभाग के अनुसार 26 जून 2026 तक राज्य में लगभग 2.47 लाख बोतल नैनो डीएपी का भंडारण किया गया है। इनमें से 87 हजार से अधिक बोतलें किसानों को वितरित की जा चुकी हैं। वहीं 2.86 लाख बोतल नैनो यूरिया का भंडारण किया गया है, जिनमें से 1.14 लाख से अधिक बोतलों का वितरण हो चुका है। शेष स्टॉक सहकारी समितियों में उपलब्ध है।
कम लागत, ज्यादा उत्पादन
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया पारंपरिक रासायनिक उर्वरकों की तुलना में अधिक प्रभावी हैं। इनके उपयोग से कम मात्रा में उर्वरक की जरूरत पड़ती है, पौधों द्वारा पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण होता है और उत्पादन लागत घटती है। साथ ही फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता में भी वृद्धि होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरक मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
किसानों को किया जा रहा जागरूक
खरीफ सीजन 2026 के दौरान कृषि विभाग सहकारी समितियों के माध्यम से नैनो उर्वरकों के भंडारण और वितरण की लगातार निगरानी कर रहा है। किसानों को इनके वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी देने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने और आधुनिक तकनीकों के जरिए खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से नैनो उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपने निकटतम सहकारी समिति या कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग की जानकारी प्राप्त करें और वैज्ञानिक खेती को अपनाएं।
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Raipur: छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज, बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मंजूरी

Raipur: छत्तीसगढ़ में व्यावसायिक हीरा खनन की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल ने महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना के अगले चरण को मंजूरी देते हुए बड़े व्यास (लार्ज डायमीटर) की ड्रिलिंग शुरू करने का फैसला किया है। यह ड्रिलिंग क्षेत्र में मौजूद हीरा भंडार का वैज्ञानिक आकलन करेगी और इसके आधार पर व्यावसायिक खनन का अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
नई दिल्ली में आयोजित एनसीएल बोर्ड की बैठक में परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए गए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार की गुणवत्ता और मात्रा का सटीक आकलन किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (फीजिबिलिटी रिपोर्ट) तैयार होगी।
पांच प्राकृतिक हीरे मिल चुके हैं
एनसीएल ने स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के जरिए किम्बरलाइट पाइप की पहचान की थी। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में कराया गया, जिसमें कुल 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे मिले। इससे बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है।
देश के बड़े हीरा उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है छत्तीसगढ़
विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी प्रारंभिक चरण में इसी तरह की खोज के बाद बड़े व्यावसायिक हीरा भंडार विकसित हुए थे। ऐसे में बलौदा-बेलमुंडी परियोजना को छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश की महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं में माना जा रहा है।
लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा
बैठक में राज्य की प्रमुख लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट-4 में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसे आगे बढ़ाकर 70 लाख टन प्रतिवर्ष किया जाएगा। वहीं बैलाडीला डिपॉजिट-13 को एक करोड़ टन वार्षिक क्षमता के साथ विकसित करने की दिशा में भी काम जारी है।
पर्यावरण संरक्षण रहेगा प्राथमिकता
बैठक में यह भी दोहराया गया कि सभी खनन परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
सौरभ सिंह ने क्या कहा
छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह ने कहा कि खनिज संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और उद्योगों का संतुलित विकास आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बलौदा-बेलमुंडी की हीरा परियोजना भविष्य में छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में स्थापित कर सकती है।
बैठक में एनसीएल के निदेशक मंडल के सदस्य श्री अमिताभ मुखर्जी, श्री आशीष चटर्जी, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष श्री सौरभ सिंह, खनिज विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद, सीएमडीसी के प्रबंध संचालक श्री रजत बंसल, श्री उपेंद्र कुमार और श्री विनय कुमार उपस्थित रहे।
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Chhattisgarh: मानसून ने पकड़ी रफ्तार, अगले 24 घंटे में पूरे प्रदेश को कवर करेगा, कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

CG Weather Update: दक्षिण-पश्चिम मानसून ने छत्तीसगढ़ में रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून प्रदेश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों तक पहुंच चुका है, जबकि उत्तर और उत्तर-पश्चिम के शेष जिलों में अगले 24 घंटे के भीतर इसकी एंट्री होने की संभावना है।
मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। पिछले 24 घंटों के दौरान दंतेवाड़ा और रायगढ़ में भारी बारिश दर्ज की गई, जबकि कई अन्य जिलों में भी अच्छी वर्षा हुई।
बारिश के बावजूद बुधवार को बिलासपुर प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं राजनांदगांव में न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
इन जिलों में अगले 24 घंटे में पहुंचेगा मानसून
मौसम विभाग के मुताबिक सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, जशपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़ और रायगढ़ जिलों में अगले 24 घंटे के भीतर मानसून पहुंच सकता है। इन जिलों में फिलहाल प्री-मानसून बारिश हो रही है, लेकिन आधिकारिक रूप से मानसून की घोषणा अभी नहीं की गई है।
7 दिन की देरी, अब तक 65% कम बारिश
इस वर्ष मानसून सामान्य तिथि से करीब सात दिन की देरी से छत्तीसगढ़ पहुंचा है। इसका असर वर्षा के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। 1 जून से अब तक प्रदेश में सामान्यतः 127.8 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, जबकि केवल 44.8 मिमी वर्षा दर्ज हुई है। यानी अब तक करीब 65 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है।
बस्तर में सबसे ज्यादा बारिश, फिर भी सामान्य से कम
मानसून की पहली दस्तक का सबसे अधिक असर बस्तर संभाग में देखा गया है, लेकिन वहां भी सामान्य से कम वर्षा हुई है।
- बस्तर: 142.7 मिमी सामान्य के मुकाबले 74.8 मिमी (48% कम)
- दंतेवाड़ा: 107.7 मिमी के मुकाबले 49.9 मिमी (54% कम)
- सुकमा: 60.3 मिमी वर्षा, सामान्य से 54% कम
- कोंडागांव: 51.9 मिमी
- बीजापुर: 28 मिमी वर्षा दर्ज
खरीफ की बुवाई के लिए अगले 10 दिन अहम
बारिश की कमी के कारण प्रदेश के अधिकांश जिलों में खेतों में बुवाई लायक नमी अभी तक नहीं बन पाई है। हालांकि मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक गरज-चमक के साथ अच्छी बारिश की संभावना जताई है। यदि जून के शेष दिनों में व्यापक और तेज बारिश होती है, तो वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है और खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी।

















