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Chhattisgarh: प्रदेश के चार प्रमुख नेशनल हाइवे का होगा विकास, केंद्र से 11 हजार करोड़ की मंजूरी

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Chhattisgarh: Four major national highways of the state will be developed, approval of Rs 11 thousand crore from the Centre

New Delhi: छत्तीसगढ़ की सड़कों का जाल और मजबूत होने जा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने छत्तीसगढ़ के लिए 11 हजार करोड़ रुपये की मंजूरी देकर राज्य को एक बड़ी सौगात दी है। इस राशि से चार प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास किया जाएगा, जो छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ करेगा। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने यह घोषणा नई दिल्ली में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ हुई एक समीक्षा बैठक के दौरान की।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक का आयोजन हुआ, जिसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल हुए। बैठक में छत्तीसगढ़ में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गई। इस दौरान केन्द्रीय सड़क परिवहन राज्यमंत्री अजय टाम्टा और हर्ष मल्होत्रा व छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव भी शामिल रहे।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने छत्तीसगढ़ में चल रही परियोजनाओं की प्रगति पर समीक्षा की, ताकि कार्यों का समय पर और कुशलता से निष्पादन हो सके। बैठक में परियोजनाओं के विलम्ब के कारणों व रुकावटों पर चर्चा की गयी। इस संबंध में वन विभाग से क्लीयरेंस, राजस्व और खनन से जुड़े अड़चनों को दूर करने व परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। समीक्षा बैठक में सभी लंबित मुद्दों पर चर्चा कर अवरोधों को दूर करने का प्रयास किया गया। केन्द्रीय मंत्री गडकरी ने समस्त प्रगतिरत एवं प्रस्तावित परियोजनाओं को समय सीमा में पूर्ण करने का निर्देश दिए।

बैठक में राष्ट्रीय राजमार्गों की प्रगति पर चर्चा की गई, इसके साथ ही चार प्रमुख राजमार्गों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) बनाने की मंजूरी दी गई। बैठक में जिन चार मुख्य परियोजनाओं पर चर्चा हुई, उनमें उरगा-कटघोरा बाईपास (NH-149B), बसना से सारंगढ़ (माणिकपुर) फीडर रूट, सारंगढ़ से रायगढ़ फीडर रूट, और रायपुर-लखनादोन आर्थिक गलियारा शामिल हैं। इन परियोजनाओं की कुल लंबाई 236.1 किलोमीटर है। जिसके लिए केन्द्रीय मंत्री ने कुल 9208 करोड़ स्वीकृत किए हैं। वहीं, केन्द्रीय सड़क निधि के तहत 908 करोड़ के आठ कार्यों को स्वीकृति प्रदान की गई है। बैठक में केशकाल घाट व धमतरी-जगदलपुर मार्ग के चार लेन चौड़ीकरण कार्य की भी मंजूरी दी गयी।

एनएचएआई के अंतर्गत रायपुर-विशाखापट्टनम मार्ग एवं बिलासपुर-उरगा-पत्थलगांव मार्ग को समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। वहीं, पत्थलगांव से कुनकुरी-झारखंड बॉर्डर मार्ग को एक माह के अन्दर एजेंसी निर्धारित करने के लिए निर्देशित किया गया। बैठक में रायपुर शहर टाटीबंध से तेलीबांधा के बीच ग्रेड सेपरेटर व विधानसभा रोड से बिलासपुर रोड (धनेली) को जोड़ने वाले मार्ग एवं रायपुर एक्सप्रेस वे पर ग्रेड सेपरेटर बनाने की सहमति दी गई। इसके अलावा सड़कों के विकास के लिए 1200 करोड़ की अतिरिक्त राशि की स्वीकृति मिली है।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “यह छत्तीसगढ़ के विकास के लिए एक बड़ी सौगात है। छत्तीसगढ़ की औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि सड़क नेटवर्क का विस्तार राज्य के ग्रामीण इलाकों की कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाएगा, जिससे स्थानीय लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी परियोजनाओं की नियमित रूप से समीक्षा करें और समय पर कार्य पूरा करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वे स्वयं इन परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखेंगे और हर सप्ताह इसकी रिपोर्ट तलब करेंगे, ताकि काम में कोई देरी न हो। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार पूरी निष्ठा से इन परियोजनाओं को समय सीमा के भीतर पूरा करेगी, जिससे राज्य के नागरिकों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी और विकास की गति तेज होगी।

बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव पी दयानंद, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, वन विभाग के सचिव अमरनाथ प्रसाद सहित राज्य के लोक निर्माण विभाग, राजस्व, खनन और वन विभागों के अन्य अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

परियोजनाओं के प्रमुख बिंदु

1. केंद्रीय सड़क निधि (सीआरएफ) योजना के तहत 908 करोड़ रुपए लागत की आठ परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन परियोजनाओं से छत्तीसगढ़ के सड़कों के बुनियादी ढांचे में सुधार होगा, जिससे राज्य की कनेक्टिविटी और व्यापार को प्रोत्साहन मिलेगा।

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2. केशकाल घाट के फोरलेन चौड़ीकरण कार्य की स्वीकृति दी गई है, जिसे एक महीने के भीतर मंजूरी मिलने की संभावना है। यह परियोजना क्षेत्र में यातायात सुगमता और सड़क सुरक्षा को बढ़ाने में मदद करेगी।

3. धमतरी-जगदलपुर मार्ग के चौड़ीकरण की स्वीकृति भी दी गई है, जिससे दक्षिण छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।

4.सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छत्तीसगढ़ की सड़कों और राजमार्गों का विकास तेजी से हो सके।

5. एनएचएआई के अंतर्गत रायपुर-विशाखापटनम और बिलासपुर-उरगा-पत्थलगांव राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए समयबद्ध पूर्णता के निर्देश दिए गए हैं, जिससे राज्य की कनेक्टिविटी में सुधार होगा।

6. पत्थलगांव से कुनकुरी-झारखंड बॉर्डर मार्ग परियोजना के लिए एजेंसी का चयन एक महीने के भीतर किया जाएगा, ताकि सीमा क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा सके।

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7. रायपुर शहर के टाटीबंध से तेलीबांधा के बीच सरोना, उद्योग भवन और तेलीबांधा में ग्रेड सेपरेटर के निर्माण की भी मंजूरी मिली है। जिससे शहर में यातायात की भीड़ कम होगी।

8. विधानसभा रोड से बिलासपुर रोड (धनेली) और रायपुर-धमतरी मार्ग पर ग्रेड सेपरेटर के निर्माण की सहमति दी गई है, जिससे यातायात का दबाव कम होगा और यात्रियों को सुविधा होगी।

प्रमुख परियोजनाएं

*उरगा-कोरबा कटघोरा रिंग रोड (42.1 किमी) – 1,593 करोड़ रुपये
*बसना से सारंगढ़ (33 किमी) – 490 करोड़ रुपये
*सारंगढ़ से रायगढ़ (56 किमी) – 825 करोड़ रुपये
*रायपुर-लखनादोन इकोनोमिक कॉरिडोर (105 किमी) – 6,300 करोड़ रुपये

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Chhattisgarh: RTE एडमिशन 2026, 14,403 छात्रों का ऑनलाइन लॉटरी से चयन, रायपुर में सबसे ज्यादा सीटें

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Raipur: छत्तीसगढ़ में आर.टी.ई. (Right to Education) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए चयन सूची जारी कर दी गई है। स्कूल शिक्षा विभाग ने 15 अप्रैल 2026 को मंत्रालय महानदी भवन से ऑनलाइन लॉटरी के जरिए यह सूची जारी की। इस प्रक्रिया में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और शिक्षा मंत्री की उपस्थिति में चयन प्रक्रिया पूरी की गई।

14 हजार से ज्यादा छात्रों का चयन

इस साल कुल 21,975 सीटों के लिए 38,439 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 27,203 आवेदन पात्र पाए गए, जबकि 11,236 आवेदन अपात्र घोषित किए गए। पात्र आवेदनों में से 14,403 विद्यार्थियों का चयन ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से किया गया।

जिलेवार स्थिति 

सबसे ज्यादा चयन रायपुर में 2606 छात्रों का हुआ। इसके बाद बिलासपुर (1509), दुर्ग (1059), बलरामपुर (798), मुंगेली (702) और रायगढ़ (544) प्रमुख रहे। वहीं सुकमा (9) और बीजापुर (14) में सबसे कम चयन हुआ।

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क्यों खाली रह गईं कुछ सीटें?

सरकार के अनुसार कई निजी स्कूलों को छात्रों ने प्राथमिकता नहीं दी, जिसके कारण वहां सीटें खाली रह गईं। कई मामलों में छात्रों को उनकी पहली पसंद के स्कूल में प्रवेश मिल जाने से अन्य विकल्पों की सीटें रिक्त रह गईं।

आगे क्या होगा?

सरकार ने बताया कि बची हुई सीटों को भरने के लिए आगे की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। मुख्यमंत्री डीएवी स्कूलों के लिए अलग से ऑफलाइन लॉटरी होगी, जिसकी जानकारी RTE पोर्टल पर अपडेट की जाएगी। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संचालित किया गया है, ताकि पात्र छात्रों को निष्पक्ष तरीके से प्रवेश मिल सके।

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CG Cabinet: छत्तीसगढ़ कैबिनेट के बड़े फैसले, UCC पर कमेटी, महिलाओं को जमीन रजिस्ट्रेशन में 50% छूट

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Raipur: छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय महानदी भवन में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इसमें कैबिनेट ने राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) लागू करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। यह समिति नागरिकों और विशेषज्ञों से सुझाव लेकर ड्राफ्ट तैयार करेगी।

महिलाओं को बड़ी राहत

मंत्रिपरिषद ने महिलाओं के नाम पर होने वाले भूमि रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50% की छूट देने का फैसला लिया। इससे महिलाओं को संपत्ति खरीदने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा, हालांकि सरकार को करीब 153 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा।

सैनिकों को भी राहत

सेवारत, भूतपूर्व सैनिकों और उनकी विधवाओं को राज्य में 25 लाख रुपए तक की संपत्ति खरीदने पर स्टाम्प शुल्क में 25% छूट दी जाएगी।

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उद्योग और निवेश को बढ़ावा

औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम 2015 में संशोधन कर PPP मॉडल को बढ़ावा, NBFC को शामिल करने और भूमि आवंटन प्रक्रिया को आसान बनाने का फैसला लिया गया है। इससे Ease of Doing Business को मजबूती मिलेगी।

रेत और खनन नियमों में बदलाव

रेत खदानों को अब सरकारी उपक्रमों जैसे छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन को आरक्षित किया जा सकेगा। अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई के तहत 25 हजार से 5 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

पशुपालन और रोजगार पर फोकस

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दुधारू पशु योजना में अब सभी वर्गों को लाभ मिलेगा। साथ ही पशुओं के टीकाकरण के लिए National Dairy Development Board की सहायक कंपनी से वैक्सीन खरीदी जाएगी।

MP से 10,536 करोड़ की वापसी पर सहमति

मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के बीच पेंशन दायित्व को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। छत्तीसगढ़ को 10,536 करोड़ रुपए की अतिरिक्त भुगतान राशि वापस मिलेगी, जिसमें से 2000 करोड़ मिल चुके हैं, बाकी राशि 6 किस्तों में दी जाएगी।कैबिनेट में खरीफ सीजन के लिए उर्वरक और LPG गैस की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई।

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Sakti vedanta plant accident: मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख, घायलों को 50-50 हजार की मदद

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Sakti vedanta plant accident: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए हादसे पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इस घटना को बेहद दुःखद बताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने ऐलान किया कि हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। वहीं, घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक मदद दी जाएगी, ताकि उन्हें तत्काल राहत मिल सके।

सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी घायलों का समुचित और निःशुल्क इलाज सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि हादसे के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सरकार पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और राहत एवं पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता के साथ संचालित किया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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Chhattisgarh: बस्तर में विकास की गूंज, सुकमा में ₹308 करोड़ के प्रोजेक्ट्स के साथ ‘अटल आरोग्य लैब’ की शुरुआत

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Sukma: नक्सलवाद से उबरते बस्तर में अब विकास और स्वास्थ्य दोनों मोर्चों पर बड़ी पहल देखने को मिली है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सुकमा जिले को ₹308 करोड़ से अधिक के 228 विकास कार्यों की सौगात देने के साथ ही ‘अटल आरोग्य लैब’ का राज्यस्तरीय शुभारंभ भी किया। मिनी स्टेडियम सुकमा में आयोजित कार्यक्रम में 159 कार्यों का शिलान्यास और 69 का लोकार्पण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में अब शांति के साथ विकास की नई कहानी लिखी जा रही है।

अब स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ी क्रांति

सुकमा जिला अस्पताल में शुरू हुई ‘अटल आरोग्य लैब’ के जरिए प्रदेश के 1046 स्वास्थ्य संस्थानों में मुफ्त जांच सुविधा मिलेगी। इस डिजिटल सिस्टम से मरीजों को 133 तरह की जांचें निःशुल्क उपलब्ध होंगी। जांच रिपोर्ट SMS और व्हाट्सऐप के जरिए सीधे मरीजों तक पहुंचेगी, जिससे बार-बार अस्पताल आने की जरूरत नहीं होगी और इलाज में तेजी आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल खासतौर पर बस्तर जैसे दूरस्थ इलाकों के लोगों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने में मील का पत्थर साबित होगी।

स्वास्थ्य + विकास = नया बस्तर मॉडल

“मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान” के तहत 7 जिलों में 1100 टीमें घर-घर स्वास्थ्य जांच करेंगी। अब तक 28 पंचायतें टीबी मुक्त हो चुकी हैं और 7 पंचायतों को प्रमाण पत्र भी दिए गए। कार्यक्रम में मरीजों को फूड बास्केट, चश्मे और दवाइयां वितरित की गईं। साथ ही स्वास्थ्य केंद्रों को गुणवत्ता सुधार के लिए एनक्वास सर्टिफिकेट दिया गया।

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आजीविका और सशक्तिकरण पर फोकस

स्व-सहायता समूह की महिलाओं को “लखपति दीदी से करोड़पति दीदी” बनने का लक्ष्य दिया गया। दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर और ट्राइसिकल वितरित किए गए। वनाधिकार पत्रों के जरिए आदिवासी परिवारों को अधिकार दिए गए और ई-रिक्शा देकर स्वरोजगार को बढ़ावा मिला।

नियद नेल्लानार 2.0 का ऐलान

सरकार ने ‘नियद नेल्लानार 2.0’ योजना का विस्तार करते हुए 10 जिलों को शामिल करने का ऐलान किया। इसके तहत सड़क, पुल, बस स्टैंड और सामुदायिक भवन जैसे विकास कार्य होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर के हर गांव तक विकास और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचे।

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Census 2027: छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 की शुरुआत, 1 मई से घर-घर सर्वे, अब डिजिटल होगी पूरी प्रक्रिया

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Census 2027: छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 का पहला चरण 1 मई से 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस’ के तहत हर घर, परिवार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इसके लिए सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। इस बार जनगणना प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है।

16 अप्रैल से 30 अप्रैल के बीच लोग ऑनलाइन पोर्टल के जरिए खुद भी अपने घर और परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसे सेल्फ-एन्यूमरेशन कहा जा रहा है। ऑनलाइन जानकारी भरने पर एक यूनिक आईडी मिलेगी, जिसे बाद में सर्वे करने आने वाले कर्मचारियों को दिखाना होगा।

33 सवालों में घर-परिवार की पूरी जानकारी

इस चरण में मकान की स्थिति, उसका उपयोग (रहवासी या व्यवसायिक), निर्माण की गुणवत्ता (कच्चा या पक्का), परिवारों की संख्या और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े 33 सवाल पूछे जाएंगे। इसके अलावा पेयजल, शौचालय, बिजली, कुकिंग फ्यूल, इंटरनेट, टीवी-रेडियो जैसी सुविधाओं की भी जानकारी ली जाएगी। घर में रहने वाले लोगों की संख्या और उपयोग में आने वाले वाहनों का भी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।

हर घर बनेगा ‘डिजिटल डॉट’, मिलेंगे 5 बड़े फायदे

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इस बार हर मकान की जियो-टैगिंग की जाएगी और उसे डिजिटल मैप पर दर्ज किया जाएगा। इससे आपदा के समय राहत और बचाव कार्य तेजी से होंगे। विधानसभा और लोकसभा परिसीमन के लिए सटीक डेटा मिलेगा। शहरों में सड़क, स्कूल, अस्पताल और पार्क की बेहतर प्लानिंग हो सकेगी। पलायन और शहरीकरण की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। मतदाता सूची में डुप्लीकेट नाम हटाने में मदद मिलेगी।

जानकारी रहेगी पूरी तरह गोपनीय

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान जुटाई गई सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इसका उपयोग केवल योजनाओं और नीतिगत फैसलों के लिए किया जाएगा।

कंट्रोल रूम से होगी निगरानी

जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे, जहां से पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी। साथ ही, लोगों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन भी उपलब्ध रहेगी। प्रशासन ने अपील की है कि लोग केवल अधिकृत पहचान पत्र वाले कर्मचारियों को ही जानकारी दें और सही जानकारी साझा करें।

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