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UP News: UP में शिक्षा मित्र-अनुदेशकों की सैलरी बढ़ी, 9 साल बाद बड़ा फैसला, अब ₹18,000 तक मानदेय

Lucknow: उत्तर प्रदेश में शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने गुरुवार शाम सैलरी बढ़ाने का आदेश जारी कर दिया। अब शिक्षा मित्रों को ₹18,000 और अनुदेशकों को ₹17,000 प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुकी है, जबकि बढ़ा हुआ वेतन 1 मई से खातों में आना शुरू होगा। करीब 9 साल बाद यह बड़ी बढ़ोतरी की गई है।
कितनी बढ़ी सैलरी
शिक्षा मित्र: ₹10,000 से बढ़कर ₹18,000
अनुदेशक: ₹9,000 से बढ़कर ₹17,000
कितने लोगों को फायदा
प्रदेश में 1,42,229 शिक्षा मित्र, 24,717 अनुदेशक हैं, यानी कुल मिलाकर लगभग 1.67 लाख कर्मचारियों को सरकार के फैसले का सीधा लाभ मिलेगा। इस फैसले से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है।
अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी
CM योगी ने पहले ही घोषणा की थी कि शिक्षा मित्रों का ट्रांसफर भी किया जाएगा। परिवार को ₹5 लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। इसके बाद शासन की ओर से आदेश जारी कर दिया गया।
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Ayodhya Deepotsav 2026: अयोध्या में 30 लाख दीप जलाने का लक्ष्य, उज्जैन के विश्व रिकॉर्ड को चुनौती

अयोध्या दीपोत्सव 2026: दीपों की रोशनी से रामनगरी को जगमगाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। दीपोत्सव-2026 में अयोध्या के सरयू तट के 56 घाटों पर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए करीब 33 लाख दीप मंगाए जाने की तैयारी है। यह लक्ष्य पूरा होने पर अयोध्या एक साथ दीप प्रज्ज्वलित करने के मामले में उज्जैन के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच सकती है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन में 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस पर 33,27,125 दीप प्रज्ज्वलित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। ऐसे में अयोध्या के सामने अपने पिछले रिकॉर्ड को बेहतर बनाने के साथ उज्जैन के आंकड़े तक पहुंचने की चुनौती भी है। हालांकि, 30 लाख दीपों का लक्ष्य उज्जैन के बताए गए आंकड़े से कम है।
2017 में 1.87 लाख दीपों से हुई थी शुरुआत
अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में 1,87,213 दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ हुई थी। इसके बाद हर साल दीपों की संख्या बढ़ती गई। वर्ष 2018 में 3,01,152, 2019 में 4,04,026 और 2020 में 6,06,569 दीप जलाए गए।
वर्ष 2021 में 9,41,551 दीप प्रज्ज्वलित कर अयोध्या ने नया कीर्तिमान बनाया। वर्ष 2022 में उज्जैन में 11,71,078 दीप जलाए जाने के बाद अयोध्या ने उसी वर्ष 15,76,955 दीप प्रज्ज्वलित किए। वर्ष 2023 में अयोध्या में 22,23,000 दीप जलाए गए, जबकि वर्ष 2024 में दीपों की संख्या 25.12 लाख से अधिक रही।
वर्ष 2025 में रामनगरी के 56 घाटों पर 26,17,215 दीप प्रज्ज्वलित किए गए। इस उपलब्धि को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया था।
उज्जैन में 33.27 लाख दीप जलाने का दावा
17 सितंबर 2026 को उज्जैन में क्षिप्रा नदी के घाटों और महाकाल लोक क्षेत्र में 33,27,125 दीप प्रज्ज्वलित किए जाने की सूचना सामने आई। यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस और मध्य प्रदेश में शुरू किए गए सेवा संकल्प अभियान से जुड़ा था।
उज्जैन के इस आंकड़े को पार करने के लिए अयोध्या में 33.28 लाख से अधिक दीप जलाने होंगे। 30 लाख दीपों का लक्ष्य पूरा होने पर भी रामनगरी अपने पिछले वर्ष के रिकॉर्ड से करीब 3.83 लाख अधिक दीप जलाएगी।
दीपोत्सव की तैयारियों पर नजर
अयोध्या का दीपोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों का भी प्रमुख आयोजन बन चुका है। सरयू तट पर लाखों दीपों की सजावट, घाटों की रोशनी और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम इस आयोजन का आकर्षण रहते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में दीप प्रज्ज्वलित करने की तैयारी है। हालांकि, 30 लाख दीपों के लक्ष्य और आयोजन की अंतिम रूपरेखा को लेकर आधिकारिक घोषणा से पुष्टि करना जरूरी होगा।
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UP PET 2026: लखनऊ में परीक्षा देने वालों को राहत, 24 घंटे मिलेंगी बसें; स्पेशल ट्रेनें भी चलेंगी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (PET) में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए राहत की खबर है। लखनऊ में परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों की आवाजाही आसान बनाने के लिए रोडवेज प्रशासन अतिरिक्त बसें चलाएगा। वहीं, रेलवे भी अलग-अलग रूटों पर परीक्षा स्पेशल ट्रेनों का संचालन करेगा।
लखनऊ में PET-2026 की परीक्षा 25 अक्टूबर, 30 अक्टूबर और 1 नवंबर को आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने और परीक्षा के बाद घर लौटने में अभ्यर्थियों को परेशानी न हो, इसके लिए परिवहन सेवाओं की व्यवस्था की गई है।
आलमबाग, कैसरबाग और अवध बस स्टेशन से 24 घंटे बसें
अवध बस डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक आरएस वर्मा को परीक्षार्थियों के लिए परिवहन सेवाओं का नोडल अधिकारी बनाया गया है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश के आठ शहरों और बिहार से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के लखनऊ पहुंचने की संभावना है।
परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए आलमबाग, कैसरबाग और अवध बस स्टेशन से 24 घंटे अतिरिक्त बसें उपलब्ध रहेंगी। इनमें एसी जनरथ बसें भी शामिल होंगी। अभ्यर्थी जनरथ बसों में उपलब्ध सीटों की ऑनलाइन बुकिंग करा सकेंगे। इसके अलावा विभिन्न मार्गों पर अतिरिक्त साधारण बसें भी चलाई जाएंगी।
मुरादाबाद-लखनऊ के बीच चलेंगी परीक्षा स्पेशल ट्रेनें
रेलवे प्रशासन ने PET अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए मुरादाबाद और लखनऊ के बीच विशेष अनारक्षित ट्रेनों के संचालन की व्यवस्था की है। ट्रेन संख्या 04322 मुरादाबाद से दोपहर 1:20 बजे रवाना होकर रामपुर, बरेली, शाहजहांपुर, हरदोई और बालामऊ होते हुए शाम 6:10 बजे लखनऊ पहुंचेगी। वापसी में ट्रेन संख्या 04321 लखनऊ से शाम 7 बजे रवाना होगी और निर्धारित स्टेशनों से गुजरते हुए अगले दिन रात 1:50 बजे मुरादाबाद पहुंचेगी।
रेलवे की प्रकाशित समय-सारणी के अनुसार, इस रूट पर 25 और 30 अक्टूबर तथा 1 नवंबर को विशेष सेवाएं निर्धारित हैं। यात्रा से पहले अभ्यर्थी संबंधित ट्रेन की तारीख और समय की पुष्टि रेलवे की आधिकारिक जानकारी से कर लें।
गोरखपुर और बरेली रूट पर भी विशेष ट्रेनों की व्यवस्था
परीक्षार्थियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए दूसरे मार्गों पर भी विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। गोरखपुर-लखनऊ रूट पर विशेष ट्रेन की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा लखनऊ और बरेली के बीच भी परीक्षा स्पेशल ट्रेनें निर्धारित की गई हैं।
इन सेवाओं से विभिन्न जिलों से लखनऊ आने वाले अभ्यर्थियों को आवागमन में मदद मिलेगी। अलग-अलग रूटों पर ट्रेनों की तारीख और समय अलग हो सकते हैं, इसलिए यात्रा की योजना बनाने से पहले रेलवे की ताजा समय-सारणी जरूर देख लें।
अभ्यर्थी यात्रा से पहले इन बातों का रखें ध्यान
- परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय लेकर निकलें।
- बस या ट्रेन की उपलब्धता और प्रस्थान का समय पहले जांच लें।
- ऑनलाइन बुकिंग करते समय यात्रा की तारीख और बस का रूट ध्यान से चुनें।
- परीक्षा के बाद वापसी की यात्रा के लिए भी पहले से योजना बनाएं।
- रोडवेज और रेलवे की अतिरिक्त सेवाओं से PET अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में राहत मिलने की उम्मीद है।
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UP Liquor Shops Closed: यूपी के 72 जिलों में 23 और 27 अक्टूबर को शराब की दुकानें बंद, जानें वजह

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों पर होने वाले चुनाव के मद्देनजर 23 और 27 अक्टूबर को लखनऊ समेत 72 जिलों में शराब की दुकानें बंद रहेंगी। इन तारीखों पर शराब की बिक्री पर रोक रहेगी। प्रतिबंध के दायरे में बार, मॉडल शॉप और सैन्य कैंटीन भी शामिल हैं।
लखनऊ के जिलाधिकारी के मुताबिक, यह फैसला चुनाव प्रक्रिया के दौरान नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। ऐसे में शराब की बिक्री से जुड़े प्रतिष्ठानों को निर्धारित तारीखों पर प्रशासन के निर्देशों का पालन करना होगा।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को मतगणना
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होगा। मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित है। इन चुनावों में पांच स्नातक खंड और छह शिक्षक खंड की सीटें शामिल हैं। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद संबंधित क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता भी लागू की गई है।
प्रशासन ने मतदान और मतगणना के दिन शराब की बिक्री पर रोक लगाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया के दौरान लागू प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करना है।
इन तीन जिलों में नहीं रहेगी पाबंदी
कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव में आदर्श आचार संहिता लागू नहीं होने की जानकारी दी गई है। इसलिए इन तीन जिलों में इस चुनाव के कारण मतदान नहीं होगा और शराब की दुकानों को भी बंद नहीं रखा जाएगा। हालांकि, किसी अन्य स्थानीय आदेश या अलग प्रतिबंध की स्थिति में संबंधित प्रशासन के निर्देश लागू होंगे।
विधान परिषद की 11 सीटों पर चुनाव
इस चुनाव में पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटें शामिल हैं।
स्नातक खंड की पांच सीटें:
- लखनऊ
- वाराणसी
- आगरा
- मेरठ
- इलाहाबाद-झांसी
शिक्षक खंड की छह सीटें:
- लखनऊ
- वाराणसी
- आगरा
- मेरठ
- बरेली-मुरादाबाद
- गोरखपुर-फैजाबाद
इन सीटों पर मतदान के बाद 27 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी। चुनाव परिणामों के साथ विधान परिषद में विभिन्न राजनीतिक दलों और शिक्षक समूहों की स्थिति में बदलाव की तस्वीर स्पष्ट होगी।
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UP News: पुलिसकर्मियों का वर्दी भत्ता बढ़ा, PPS अफसरों को अब मिलेंगे ₹15 हजार

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को पुलिस स्मृति दिवस पर पुलिसकर्मियों के लिए तीन बड़ी घोषणाएं कीं। अब प्रांतीय पुलिस सेवा (PPS) के अधिकारियों को वर्दी के लिए सालाना ₹6,400 की जगह ₹15,000 भत्ता मिलेगा। इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर का मोटरसाइकिल भत्ता ₹700 से बढ़ाकर ₹1,000 और मोबाइल रिचार्ज भत्ता ₹2,000 से बढ़ाकर ₹2,500 कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों की सुविधाएं बढ़ाना और उन्हें बेहतर संसाधन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने पुलिस स्मृति दिवस पर ड्यूटी के दौरान शहीद हुए छह पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवारों को सम्मानित किया।
2017 के बाद कई बार बढ़े पुलिस भत्ते
योगी सरकार ने पिछले वर्षों में पुलिसकर्मियों के भत्तों में बदलाव किए हैं।
- अक्टूबर 2024: सिपाहियों का वार्षिक वर्दी भत्ता ₹3,000 से बढ़ाकर ₹6,400 किया गया।
- अक्टूबर 2022: ₹200 मासिक साइकिल भत्ते की जगह ₹700 मासिक मोटरसाइकिल भत्ता शुरू किया गया।
- अक्टूबर 2021: पुलिसकर्मियों के सीयूजी और मोबाइल-सिम इस्तेमाल से जुड़े भत्ते को बढ़ाकर ₹2,000 किया गया।
अब ताजा घोषणाओं के तहत PPS अधिकारियों के वर्दी भत्ते, इंस्पेक्टर-सब इंस्पेक्टर के मोटरसाइकिल भत्ते और मोबाइल रिचार्ज भत्ते में बढ़ोतरी की गई है।
‘पहले अपराधियों पर कार्रवाई करने से डरती थी पुलिस’
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछली सरकारों के दौरान पुलिस पर राजनीतिक दबाव होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने पर अधिकारियों पर कार्रवाई का दबाव बनाया जाता था।
सीएम योगी ने दावा किया कि वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में 815 दंगे हुए। उन्होंने मथुरा के जवाहर बाग कांड का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना पुलिस के लिए मुश्किल था।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, 2017 में सरकार बनने के बाद पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त करने की दिशा में कदम उठाए गए। उन्होंने कहा कि अब अपराधियों की अवैध संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ है।
पुलिस प्रशिक्षण क्षमता 6 हजार से बढ़कर 60 हजार हुई
योगी ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश पुलिस की प्रशिक्षण क्षमता करीब 6,000 कर्मियों की थी, जिसे बढ़ाकर 60,000 से अधिक किया गया है। उन्होंने पुलिस भर्ती, महिला पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने और सात बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने को भी पुलिस व्यवस्था में सुधार का हिस्सा बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराधों से निपटने के लिए हर जिले में साइबर थाना और हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। इसके अलावा महिला पीएसी की तीन बटालियन गठित करने और फॉरेंसिक संस्थान के निर्माण का भी उल्लेख किया।
शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को ₹425 करोड़ से ज्यादा सहायता
पुलिस स्मृति दिवस पर मुख्यमंत्री ने ड्यूटी के दौरान शहीद हुए उत्तर प्रदेश के छह पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी और उनके परिजनों को सम्मानित किया। उन्होंने बताया कि 2017 के बाद अपराधियों के खिलाफ अभियानों के दौरान 18 पुलिसकर्मी शहीद हुए और 1,953 घायल हुए।
मुख्यमंत्री के अनुसार, शहीद पुलिसकर्मियों के परिवारों को ₹425 करोड़ से अधिक की सहायता दी गई है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों का सम्मान, सुरक्षा और कल्याण सरकार की प्राथमिकता है।
दो घटनाओं में शहीद हुए छह पुलिसकर्मी
मुख्यमंत्री ने जिन छह पुलिसकर्मियों के परिवारों को सम्मानित किया, वे दो अलग-अलग घटनाओं में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए थे। पहली घटना ग्रेटर नोएडा में अग्निकांड की थी, जिसमें दो पुलिसकर्मियों की जान गई। दूसरी घटना जालौन में एक कारोबारी को बदमाशों के चंगुल से छुड़ाने के अभियान से जुड़ी थी, जिसमें चार पुलिसकर्मियों की मौत हुई।
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दशहरा शस्त्र पूजन: राजा भैया ने दशहरे पर किया शस्त्र पूजन, 500 से ज्यादा हथियारों की पूजा

प्रतापगढ़: कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने विजयादशमी पर अपने पैतृक आवास बेंती कोठी में शस्त्र पूजन किया। मंगलवार दोपहर हुए इस आयोजन में 500 से ज्यादा देशी-विदेशी हथियारों की पूजा की गई। राजा भैया धोती-कुर्ता और केसरिया साफा पहनकर अनुष्ठान में शामिल हुए।
पूजा में उनके जुड़वां बेटे शिवराज और बृजराज भी मौजूद रहे। सभी ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि समेत सैकड़ों समर्थक भी अपने हथियारों के साथ पहुंचे। आयोजन में हथियारों के साथ उनके लाइसेंस भी रखे गए।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दो घंटे चला पूजन
बेंती कोठी में करीब दो घंटे तक शस्त्र पूजन चला। आचार्य अतुल जी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान कराया। इसके बाद आरती हुई और प्रसाद वितरित किया गया।
बोले- हमारे परिवार की पुरानी परंपरा
राजा भैया ने कहा कि विजयादशमी पर शस्त्र पूजन प्राचीन भारतीय परंपरा है, जो अनादि काल से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि उनके परिवार में भी यह परंपरा लंबे समय से निभाई जा रही है। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि लोगों को भारत की गौरवशाली पुरानी परंपराओं से परिचित कराया जाए और उन्हें इनसे जोड़ा जाए।
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